Full Text
भा त का सर्वो च्च न्यायालय
सिसविर्वोल अपीलीय क्षेत्राधि का
सिसविर्वोल अपील संख्या 4695-4699/2018
(एसएलपी (सी) सं.14306-14310/2017 से उत्पन्न)
रि चल औ अन्य आवि5 - अपीलार्थी7(गण)
बनाम
ाजस्र्थीान लोक सेर्वोा आयोग औ अन्य आवि5 - प्रधितर्वोा5ी (गण)
क
े सार्थी
सिसविर्वोल अपील संख्या 4722 – 4725/2018
(एसएलपी (सी) सं. 19151 – 19154/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4702/2018
(एसएलपी (सी) सं.14481/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4700-4701/2018
(एसएलपी (सी) सं. 14356-14357/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील सं 4711 -4712/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 14593-14594/2017 से उत्पन्न)
(एसएलपी (सी) संख्या 14581-14584/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4703-4706/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 14522-14525/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4726/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 19157/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4713-4720/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 14947-14954/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4721/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 18982/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4727/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 21506/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4730/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 29556/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4728/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 24264/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4729/2018
सिसविर्वोल अपील संख्या 4731/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 32467/2017 से उत्पन्न)
सिसविर्वोल अपील संख्या 4754/2018
(एसएलपी (सी) संख्या 11674/2018 (डाय ी संख्या 9579/2018) से
उत्पन्न)
विनणAय
न्याया ीश, अशोक भूषण
JUDGMENT
1. विर्वोलंब माफ विकया गया। अनुमधित प्र5ान की गई।
2. अपीलों का यह बैच ाजस्र्थीान उच्च न्यायालय की विर्वोशेष अपील न्यायपीठों द्वा ा वि5ए गए विनणAय प सर्वोाल उठाता है। ाजस्र्थीान उच्च न्यायालय क े वि5नांक 08.03.2017 को जो पु में वि5ए गए विर्वोशेष अपीलीय विनणAय औ वि5नांक 13.04.2017 को जयपु पीठ में वि5ए गए विनणAय में अपीलकताAओं द्वा ा 5ाय रि र्टे याधिचकाओं को खारि ज क ने र्वोाले विर्वोद्वान एकल न्याया ीश क े विनणAयों को चुनौती 5ी गई है।
3. अपीलकताA ाजस्र्थीान लोक सेर्वोा आयोग (इसक े बा5 "आयोग" क े रूप में सं5र्भिभत) द्वा ा आयोसिजत स्क ू ल व्याख्याता प ीक्षा-2015 में उपस्थिस्र्थीत हुए र्थीे, सिजसमें र्वोे सफल घोविषत नहीं विकये गये। इन अपीलों को जन्म 5ेने र्वोाले संधिक्षप्त तथ्य इस प्रका हैंः- (I) ाजस्र्थीान लोक सेर्वोा आयोग ने वि5नांक 16.10.2015 क े अपने विर्वोज्ञापन क े माध्यम से माध्यविमक शिशक्षा विर्वोभाग, ाजस्र्थीान स का क े तहत विर्वोशिभन्न विर्वोषयों क े लिलए स्क ू ल व्याख्याताओं क े 13,000 प5ों का विर्वोज्ञापन वि5या। प ीक्षा में 5ो पेप शाविमल र्थीे-पेप -I सामान्य जागरूकता औ सामान्य अध्ययन, औ पेप -II - संबंधि त विर्वोषयों क े पेप । यह प ीक्षा 17 जुलाई, 2016 को आयोसिजत की गई र्थीी। उत्त क ुं जी क े संबं में आपलित्तयों को आमंवित्रत क ते हुए 12.08.2016 को उत्त क ुं जी प्रकाशिशत की गई र्थीी। कई उम्मी5र्वोा ों ने पेप -I क े सार्थी-सार्थी पेप -II क े संबं में विर्वोशिभन्न विर्वोषयों क े संबं में आपलित्तयां प्रस्तुत कीं। वि5नांक 22.09.2016 को आयोग ने परि णाम की घोषणा की सिजसक े विर्वोरुद्ध अंधितम उत्त क ुं जी क े अनुसा विर्वोशिभन्न उत्त ों प सर्वोाल उठाते हुए अनेक रि र्टे याधिचकाएं 5ाय की गई र्थीीं। विर्वोद्वान एकल न्याया ीश ने रि र्टे याधिचका संख्या 15028/2016 अ विंर्वो5 क ु मा र्वो अन्य बनाम आ पीएससी औ अन्य में अपने विनणAय औ आ5ेश वि5नांक 08.11.2016 क े तहत विर्वोशिभन्न विन5शों क े सार्थी रि र्टे याधिचका का विनस्ता ण विकया।इनमें से एक विन5श संशोधि त उत्त क ुं जी को विर्वोशेषज्ञों की रि पोर्टेA क े सार्थी एक सप्ताह क े भीत र्वोेबसाइर्टे प अपलोड क ने का र्थीा। विर्वोद्वत एकल न्याया ीश क े वि5नांक 08.11.2016 क े विन5शों क े अनुस ण में, अंधितम उत्त क ुं जी 18.11.2016 को प्रकाशिशत की गई र्थीी औ पेप I में 18 प्रश्नों को हर्टेा वि5या गया र्थीा। उत्त क ुं जी प विर्वोशिभन्न आपलित्तयां उठाते हुए उम्मी5र्वोा ों द्वा ा विर्वोशिभन्न रि र्टे याधिचकाएं 5ाय क क े मुक5मों का 5ूस ा 5ौ शुरू विकया गया। विर्वोद्वत एकल न्याया ीश ने जो पु में वि5नांक 08.02.2017 क े अपने विनणAय द्वा ा कई रि र्टे याधिचकाओं प विर्वोचा क ने क े बा5 रि र्टे याधिचकाओं क े समूह को खारि ज क वि5या। विर्वोद्वान एकल न्याया ीश ने विर्वोशिभन्न उत्त ों प विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA को स्र्वोीका क लिलया। (ii) वि5नांक 08.02.2017 क े विनणAय क े विर्वोरुद्ध विर्वोशिभन्न उम्मी5र्वोा ों द्वा ा जो पु में रि र्टे अपील 5ाय की गई र्थीी। खण्ड पीठ ने वि5नांक 08.03.2017 क े अपने फ ै सले क े माध्यम से विर्वोद्वत एकल न्याया ीश क े फ ै सले की पुविn क ने र्वोाली रि र्टे अपीलों को खारि ज क वि5या। रि र्टे अपीलों को खारि ज क ते हुए, खण्ड पीठ द्वा ा आयोग को उत्त क ुं जी औ का Aर्वोाई की तैया ी औ प्रकाशन क े संबं में विर्वोशिभन्न विन5श जा ी विकए गए र्थीे। रि र्टे अपीलों को खारि ज क ते हुए खंडपीठ द्वा ा आयोग को उत्त क ुं जी तैया क ने औ प्रकाशिशत क ने औ मुख्य उत्त तैया क ने र्वोालों क े लिखलाफ का Aर्वोाई क ने क े संबं में विर्वोशिभन्न विन5श जा ी विकए गए र्थीे। जयपु में भी, रि र्टे याधिचकाओं को खारि ज क वि5या गया, सिजसक े लिखलाफ रि र्टे अपील 5ाय की गई र्थीी औ जो पु में वि5नांक 08.03.2017 को वि5ए गए फ ै सले क े बा5 13.04.2017 क े विनणAय क े अनुसा, खण्ड पीठ ने विर्वोशिभन्न रि र्टे अपीलों को भी खारि ज क वि5या। (iii) वि5नांक 08.03.2017 क े विनणAय क े बा5, जो पु औ जयपु 5ोनों की खण्ड पीठ ने कई अन्य रि र्टे अपीलों को खारि ज क वि5या। हमा े समक्ष, विनणAय वि5नांक 08.03.2017 औ विनणAय वि5नांक 13.04.2017 तर्थीा पूर्वोA क े विनणAयों क े बा5 विर्वोशिभन्न अन्य विनणAयों क े विर्वोरुद्ध अपील 5ाय की गई है। जो पु पीठ में वि5नांक 08.03.2017 को वि5या गया विनणAय मुख्य विनणAय है सिजसका उच्च न्यायालय द्वा ा अपीलों क े इस समूह प विनणAय लेने क े लिलए कई विनणAयों में अनुस ण विकया गया है। अपील क े इस बैच प विनणAय लेने क े लिलए 2017 की विर्वोशेष अनुमधित याधिचका (सी) सं. 14306-14310 रि चल औ अन्य ाजस्र्थीान लोक सेर्वोा आयोग औ अन्य आवि5 से उत्पन्न सिसविर्वोल अपील को जन्म 5ेने र्वोाले वि5नांक 08.03.2017 क े खण्ड पीठ क े विनणAय को सं5र्भिभत क ना औ उस प विर्वोचा क ना पयाAप्त होगा।
4. अपीलों क े इस बैच में अशिभयोग औ हस्तक्षेप क े लिलए विर्वोशिभन्न आर्वोे5न 5ाय विकए गए हैं। हम सभी प्रत्या ोपण औ हस्तक्षेप अनुप्रयोगों की अनुमधित 5ेते हैं। इस न्यायालय ने 16.01.2018 को मामले की सुनर्वोाई क े बा5 विनम्नलिललिखत आ5ेश पारि त विकयाः- " ाजस्र्थीान लोक सेर्वोा आयोग (आ पीएससी) ने ाजस्र्थीान ाज्य में स्क ू ल लेक्च ों क े 13,000 से अधि क प5ों को भ ने क े लिलए एक विर्वोज्ञापन जा ी विकया र्थीा। इसक े बा5 लिललिखत प ीक्षा का आयोजन विकया गया। उत्त ों की क ुं जी भी प्रकाशिशत की गई र्थीी। क ु छ उम्मी5र्वोा ों ने सर्वोाल विकया विक उप ोक्त क ुं जी क ु छ प्रश्नों क े सही उत्त नहीं 5ेती है। यह उल्लेख विकया गया विक क ु छ प्रश्न तो सही ढंग से तैया भी नहीं विकए गए र्थीे। इसक े आ ा प उच्च न्यायालय में एक रि र्टे याधिचका 5ाय की गई र्थीी। विर्वोद्वान एकल न्याया ीश ने उन उम्मी5र्वोा ों की कशिर्थीत शिशकायतों प गौ क ने क े बा5 यह जांच क ने क े लिलए विर्वोशेषज्ञ सविमधित क े गठन का विन5श वि5या विक क्या उत्त ों की क ुं जी सही है। विर्वोशेषज्ञ सविमधित ने 18 प्रश्नों को हर्टेाने की सिसफारि श क ते हुए अपनी रि पोर्टेA 5ी, जो विर्वोशेषज्ञ सविमधित क े अनुसा सही ढंग से तैया नहीं विकए गए र्थीे औ इसलिलए उन्हें हर्टेाए जाने की आर्वोश्यकता र्थीी। इसने क ु छ अन्य प्रश्नों क े उत्त ों को भी संशोधि त विकया। इससे मुक5मेबाजी का 5ूस ा 5ौ शुरू हो गया क्योंविक इसमें याधिचकाकताAओं (जो उच्च न्यायालय में रि र्टे याधिचकाकताA र्थीे) ने कहा विक विर्वोशेषज्ञ सविमधित की पूर्वो क्त रि पोर्टेA भी सही नहीं र्थीी। यह प्रस्तुत विकया गया विक 13 प्रश्नों को गलत त ीक े से हर्टेा वि5या गया। इसक े समर्थीAन में याधिचकाकताAओं ने एनसीआ र्टेी की पाठ्य पुस्तकों का हर्वोाला वि5या, सिजसक े अनुसा उन प्रश्नों को सही ढंग से तैया विकया गया र्थीा औ उन्हें हर्टेाने का कोई सर्वोाल ही नहीं र्थीा। यह भी प्रस्तुत विकया गया विक पांच प्रश्न अभी भी गलत त ीक े से तैया विकए गए र्थीे, सिजन्हें विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा सुझाए गए उत्त ों को हर्टेाने या सही क ने की आर्वोश्यकता र्थीी। उच्च न्यायालय ने इस याधिचका को खारि ज क वि5या है। अन्य बातों क े सार्थी-सार्थी यह 5ेखा गया है विक इस मामले को शांत विकया जाना चाविहए क्योंविक ाजस्र्थीान ाज्य में 13,000 शिशक्षकों की विनयुविक्त में 5े ी नहीं क ना जनविहत में होगा। हमें सूधिचत विकया गया है विक परि णाम की घोषणा क े बा5, सफल उम्मी5र्वोा ों को पहले ही विनयुविक्त 5ी जा चुकी है। याधिचकाकताAओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता द्वा ा बताया गया है विक कई प[5] अभी भी खाली पड़े हैं। र्वोे आगे प्रस्तुत क ते हैं विक उन्हें कोई आपलित्त नहीं है यवि5 पहले से ही विनयुक्त विकए गए उम्मी5र्वोा ों की विनयुविक्त बाधि त नहीं होती है औ सार्थी ही याधिचकाकताAओं द्वा ा इंविगत की गई शिशकायतों को विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा विफ से 5ेखा जाता है औ यवि5 यह 5 याधिचकाकताAओं क े 5ार्वोे में पू ी त ह या आंशिशक रूप से औधिचत्य पाता है, क े र्वोल उन अन्य उम्मी5र्वोा ों क े मामलों की विफ से जांच की जाती है सिजन्हें विनयुक्त नहीं विकया गया है, जो इन पहलुओं प विर्वोशेषज्ञ सविमधित की सिसफारि शों द्वा ा 5ी जाएगी।आ पीएससी क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता इस संबं में विन5श लेने क े लिलए क ु छ समय चाहते हैं। 06.02.2018 को मामलों को सूचीबद्ध विकया जार्वोे।"
5. हमा े वि5नांक 16.01.2018 क े विन5शों क े अनुस ण में, रि र्टे याधिचकाकताAओं/अपीलकताAओं की शिशकायतों की पुनः जांच क ने क े लिलए एक विर्वोशेषज्ञ सविमधित विनयुक्त की गई र्थीी। एक शपर्थी पत्र आयोग द्वा ा वि5नांक 14.04.2018 को ाम5ेर्वो सिस ोया द्वा ा शपशिर्थीत पत्र 5ालिखल विकया गया है। हलफनामे में कहा गया है विक विर्वोशेषज्ञों की रि पोर्टेA क े आ ा प सिजन नौ विर्वोषयों क े लिलए ये विर्वोशेषज्ञ विनयुक्त विकए गए र्थीे, उनमें क ु ल विमलाक 22 उत्त ों की 5ोबा ा जांच की गई औ उत्त ों को संशोधि त विकया गया। शपर्थी पत्र क े पै ाग्राफ 5 औ 6 को उद्धृत क ना उपयोगी होगा, जो विनम्नलिललिखत प्रभार्वो क े लिलए हैः "5. विर्वोशेषज्ञों की रि पोर्टेA क े आ ा प उन सभी नौ विर्वोषयों क े 22 उत्त ों को संशोधि त विकया गया सिजनक े लिलए इन विर्वोशेषज्ञों को याधिचकाकताAओं क े 5ार्वोों की विफ से जांच क ने क े लिलए विनयुक्त विकया गया र्थीा।
6. सामान्य ज्ञान (पेप I) क े विर्वोषयों में पाँच प्रश्नों क े उत्त ों को संशोधि त क ने की आर्वोश्यकता र्थीी; पेप II (विर्वोषय) में र्वोाशिणज्य में तीन प्रश्नों क े उत्त ों को संशोधि त क ने की आर्वोश्यकता र्थीी; विर्वोषय भूगोल में तीन प्रश्न, विर्वोषय विंह5ी में 5ो प्रश्न (शिशक्षण पद्धधित); विर्वोषय इधितहास में एक प्रश्न; विर्वोषय ाजनीधित विर्वोज्ञान में चा प्रश्न; औ विर्वोषय में ाजस्र्थीानी क े तीन प्रश्न संशोधि त होने की सूचना 5ी गई र्थीी। प्रश्न संख्या, अंधितम क ुं जी में उत्त औ नई विर्वोशेषज्ञ रि पोर्टेA को 5शाAने र्वोाला एक चार्टेA इसक े सार्थी 5ालिखल विकया जा हा है औ संलग्नक 1 (पृष्ठ 5) क े रूप में धिचवि•त विकया जा हा है। नौ विर्वोषयों में विर्वोशेषज्ञों की रि पोर्टे€ की सत्य औ सही प्रधितयां यहां 5ालिखल की जा ही हैं औ उन्हें संलग्नक-2 (पृष्ठ 6-46) क े रूप में धिचवि•त विकया जा हा है। यह कहा गया है विक विर्वोशेषज्ञों की पहचान का खुलासा नहीं विकया जा हा है। विर्वोशेषज्ञों की रि पोर्टेA क े आ ा प सिजन अभ्यर्भिर्थीयों की विनयुविक्त नहीं हुई है उनका परि णाम ाजस्र्थीान लोक सेर्वोा आयोग द्वा ा संशोधि त विकया गया र्थीा।”
6. हलफनामे में यह भी कहा गया है विक सभी विर्वोषयों में क ु ल प5ों की संख्या में से सिजन 729 उम्मी5र्वोा ों को विनयुविक्त की पेशकश की गई र्थीी, उन्होंने ज्र्वोाइन नहीं विकया। इसक े अलार्वोा 316 उम्मी5र्वोा ों का चयन विकया गया र्थीा, लेविकन उनकी उम्मी5र्वोा ी खारि ज क 5ी गई र्थीी। इस प्रका क ु ल 1045 प[5] रि क्त र्थीे। विर्वोज्ञाविपत प5ों, चयविनत औ अनुशंसिसत उम्मी5र्वोा ों औ विनयुविक्तयों, ज्र्वोाइन क ने र्वोाले उम्मी5र्वोा ों की संख्या औ ऐसे उम्मी5र्वोा ों, सिजनकी उम्मी5र्वोा ी द्द क 5ी गई र्थीी, आवि5 क े सभी विर्वोर्वो णों को 5शाAने र्वोाला एक विर्वोस्तृत चार्टेA भी शपर्थी पत्र क े सार्थी संलग्न विकया गया है। शपर्थी पत्र में आगे कहा गया है विक अपीलों क े र्वोतAमान बैच में सभी 311 उम्मी5र्वोा हैं। विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA क े बा5 तैया विकए गए संशोधि त परि णामों में कहा गया है विक सभी विर्वोशेष अनुमधित याधिचकाओं में से 48 याधिचकाकताA चयन क े लिलए मेरि र्टे में पाए गए हैं, सिजन्हें नौ विर्वोषयों में बांर्टेा गया है।
7. आयोग द्वा ा वि5नांक 14.04.2018 को 5ाय हलफनामे का जर्वोाबी हलफनामा भी रि चल र्वो अन्य की सिसविर्वोल अपील में 5ाय विकया गया है। उत्त हलफनामे में, यह कहा गया है विक आयोग ने विर्वोशिभन्न श्रेशिणयों में पहले चयन क े सं5भA में अंधितम चयविनत उम्मी5र्वोा द्वा ा प्राप्त विकए गए र्वोास्तविर्वोक अंकों का खुलासा नहीं विकया है। यह कहा गया र्थीा विक आयोग को विर्वोशिभन्न श्रेशिणयों में अंधितम चयविनत उम्मी5र्वोा ों द्वा ा प्राप्त र्वोास्तविर्वोक अंकों क े आ ा प विर्वोशेषज्ञों द्वा ा विकए गए संशो न क े आलोक में र्वोतAमान में चयविनत उम्मी5र्वोा ों की एक संशोधि त काल्पविनक चयन सूची तैया क ने की आर्वोश्यकता है। अपीलकताAओं ने इस न्यायालय क े वि5नांक 16.01.2018 क े आ5ेश क े बा5 उनक े द्वा ा प्रस्तुत वि5नांक 23.01.2018 क े अभ्यार्वोे5न की प्रधित भी रि कॉडA प लाई है।
8. हमने अपीलकताAओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता क े सार्थी-सार्थी आयोग क े लिलए उपस्थिस्र्थीत विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता, ाजस्र्थीान ाज्य क े लिलए उपस्थिस्र्थीत विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता औ अशिभयोग औ हस्तक्षेप की मांग क ने र्वोाले विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता को सुना है।
9. अपीलार्भिर्थीयों क े विर्वोद्वत अधि र्वोक्ता प्रस्तुत क ते हैं विक हालांविक इन अपीलों में अपीलार्भिर्थीयों द्वा ा उठाई गई पयाAप्त शिशकायतें विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा संतुn हैं, विन5श क े अनुस ण में विनयुक्त की गई रि पोर्टेA में विर्वोशेषज्ञों द्वा ा विकए गए संशो न क े बा5 भी बहुत कम शिशकायतें हैं। यह प्रस्तुत विकया गया है विक संशो न में भी क ु छ गलधितयों को सु ा ा नहीं गया है। अपीलकताAओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने अपने विनर्वोे5न क े समर्थीAन में प्रश्न संख्या 58 औ क ु छ अन्य प्रश्नों सविहत पेप I क े क ु छ प्रश्नों का उल्लेख विकया है।
10. अपीलार्भिर्थीयों क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता द्वा ा प्रस्तुत विनर्वोे5नों में से एक यह है विक 18 प्रश्नों क े अंक सिजन्हें पेप संख्या 1 से हर्टेा वि5या गया र्थीा, शेष प्रश्नों में पुनर्विर्वोतरि त क वि5ए गए र्थीे जबविक अंक क े र्वोल उन उम्मी5र्वोा ों को आर्वोंविर्टेत विकए जाने चाविहए सिजनक े पास ऐसे प्रश्नों को क ने का प्रयास विकया। सिजन उम्मी5र्वोा ों ने उन प्रश्नों का प्रयास भी नहीं विकया, उन्हें अंक आर्वोंविर्टेत विकए गए जो कानून क े अनुसा नहीं र्थीे। क े र्वोल उन्हीं उम्मी5र्वोा ों को अंक आर्वोंविर्टेत विकए जाने चाविहए सिजन्होंने हर्टेाए गए प्रश्नों को क ने का प्रयास विकया है, र्वोैकस्थिल्पक रूप से, यह प्रस्तुत विकया जाता है विक 18 हर्टेाए गए प्रश्नों क े संबं में पूणA अंक सभी उम्मी5र्वोा ों को वि5ए जाने चाविहए र्थीे।
11. आयोग क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने अपीलकताAओं की 5लीलों का खंडन क ते हुए कहा विक विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा लगभग सभी शिशकायतों का ध्यान खा गया है औ गै -चयविनत उम्मी5र्वोा ों क े परि णाम को संशोधि त विकया गया है, इन अपीलों में औ क ु छ भी विर्वोचा क ने की आर्वोश्यकता नहीं है। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक विर्वोशेषज्ञों द्वा ा प्रमुख उत्त ों को संशोधि त क ने औ अब एक रि पोर्टेA प्रस्तुत क ने क े बा5, सिजसे आयोग द्वा ा स्र्वोीका क लिलया गया है, यह न्यायालय अपीलार्भिर्थीयों को विर्वोशेषज्ञ सविमधित क े विनणAय को चुनौती 5ेने की अनुमधित नहीं 5ेगा। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक सभी विर्वोशेष अनुमधित याधिचकाकताAओं में से क े र्वोल 48 चयविनत पाए गए हैं।
12. हमने पक्षका ों क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता की प्रस्तुधितयों प विर्वोचा विकया है औ अशिभलेखों का अर्वोलोकन विकया है।
13. अपील क े इस बैच में जो मुद्दा उठाया गया है र्वोह आयोग द्वा ा आपलित्तयों प विर्वोचा क ने क े बा5 अपलोड विकए गए अंधितम प्रमुख उत्त ों की शुद्धता से संबंधि त है। अपीलकताAओं का मामला यह है विक विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा आपलित्तयों का उपचा विर्वोषय प आधि कारि क पाठ्य पुस्तकों प आ ारि त नहीं र्थीा औ उत्त क ुं जी में कई त्रुविर्टेयां र्थीीं, जो पू े चयन को प्रभाविर्वोत क ने र्वोाले उम्मी5र्वोा ों की योग्यता को प्रभाविर्वोत क ती र्थीीं।
14. मुख्य उत्त की शुद्धता की न्याधियक समीक्षा क े 5ाय े से संबंधि त मुद्दे प इस न्यायालय द्वा ा बा -बा विर्वोचा विकया गया र्थीा। इस न्यायालय ने बहुत ही सीविमत आ ा प ऐसी चुनौधितयों प विर्वोचा विकया र्थीा औ हमेशा विर्वोषय विर्वोशेषज्ञों की ाय को उधिचत महत्र्वो वि5या है। कानपु विर्वोश्वविर्वोद्यालय में इस न्यायालय की तीन न्याया ीशों की खंडपीठ ने क ु लपधित औ अन्य बनाम समी गुप्ता औ अन्य, 1983 (4) SCC 309, क े माध्यम से एक ऐसे मामले प विर्वोचा क ने का अर्वोस र्थीा जहां संयुक्त प्रीमेधिडकल र्टेेस्र्टे क े माध्यम से धिचविकत्सा पाठ्यक्रमों में प्रर्वोेश क े लिलए र्वोस्तुविनष्ठ प्रका की प ीक्षा क े बहुविर्वोकल्पी क े संबं में पेप सेर्टे द्वा ा वि5ए गए प्रमुख उत्त ों को चुनौती 5ी गई र्थीी। उच्च न्यायालय ने विर्वोशिभन्न महत्र्वोपूणA उत्त ों क े लिलए उम्मी5र्वोा ों की चुनौती प विर्वोचा क ते हुए विर्वोशिभन्न प्रश्नों क े लिलए चुनौती स्र्वोीका की। क ु छ प्रश्नों क े संबं में उच्च न्यायालय ने अशिभविन ाAरि त विकया विक मुख्य उत्त सही उत्त नहीं है। इस न्यायालय ने चुनौती का खंडन क ते हुए पै ाग्राफ 15 औ 16 में विनम्नलिललिखत विर्टेप्पशिणयां कींः- "15. उच्च न्यायालय क े विनष्कषA छात्र समु5ाय क े लिलए बहुत महत्र्वोपूणA प्रश्न उठाते हैं। आमतौ प, विकसी का इस विर्वोचा क े प्रधित झुकार्वो होगा, खासक यवि5 कोई पेप सेर्टे औ प ीक्षक हा हो, विक पेप सेर्टे द्वा ा प्रस्तुत औ विर्वोश्वविर्वोद्यालय द्वा ा सही माने गए मुख्य उत्त को चुनौती 5ेने की अनुमधित नहीं 5ी जानी चाविहए। इसे प्राप्त क ने का एक त ीका यह है विक मुख्य उत्त को प्रकाशिशत न विकया जाए। यवि5 विर्वोश्वविर्वोद्यालय ने प ीक्षा क े परि णाम क े सार्थी मुख्य उत्त प्रकाशिशत नहीं विकया होता, तो इस मामले में कोई विर्वोर्वोा5 उत्पन्न नहीं होता। लेविकन इन मामलों को 5ेखने का यह सही त ीका नहीं है सिजसमें सैकड़ों छात्रों का भविर्वोष्य शाविमल है जो पेशेर्वो पाठ्यक्रमों में प्रर्वोेश क े इच्छ ु क हैं। यवि5 इस मामले में प्रमुख उत्त को गुप्त खा जाता तो उपचा बीमा ी से भी ब5त होता क्योंविक इतने सा े छात्रों को चुपचाप अन्याय का सामना क ना पड़ता। मुख्य उत्त क े प्रकाशन ने एक ऐसी अविप्रय स्थिस्र्थीधित को उजाग विकया है सिजसका समा ान विर्वोश्वविर्वोद्यालय औ ाज्य स का को ढूंढना चाविहए। मुख्य उत्त ों को प्रकाशिशत क ने में उनकी विनष्पक्षता की भार्वोना ने उन्हें उन प ीक्षाओं की प्रणाली को क ीब से 5ेखने का अर्वोस वि5या है जो र्वोे आयोसिजत क ते हैं। जो विर्वोफल हुआ है र्वोह क ं प्यूर्टे नहीं बस्थिल्क मानर्वो प्रणाली है।
16. श्री कक्कड़, जो विर्वोश्वविर्वोद्यालय की ओ से पेश हुए, ने यह प्रधितर्वोा5 विकया विक एक प्रमुख उत्त की शुद्धता क े लिलए कोई चुनौती तब तक नहीं 5ी जानी चाविहए जब तक विक यह गलत न हो। हम इस बात से सहमत हैं विक प्रमुख उत्त को तब तक सही माना जाना चाविहए जब तक विक यह गलत साविबत न हो जाए औ इसे तक A संगत या तक A संगत बनाने की प्रविक्रया द्वा ा गलत नहीं माना जाना चाविहए। यह स्पn रूप से गलत होने क े लिलए प्र5र्भिशत विकया जाना चाविहए, अर्थीाAत यह ऐसा होना चाविहए विक विकसी विर्वोशेष विर्वोषय में अच्छी त ह से र्वोाविकफ पुरुषों का कोई उधिचत विनकाय सही न माने। इस मामले में बड़ी संख्या में स्र्वोीक ृ त पाठ्य पुस्तकों द्वा ा विर्वोश्वविर्वोद्यालय क े तक A को गलत साविबत विकया गया है, जो आमतौ प यूपी में छात्रों द्वा ा पढ़ी जाती हैं। उन पाठ्यपुस्तकों में इस बात में कोई सं5ेह नहीं है विक छात्रों द्वा ा वि5या गया उत्त सही है औ मुख्य उत्त गलत है।"
12. कानपु विर्वोश्वविर्वोद्यालय (पूर्वो क्त) में उप ोक्त विनणAय क े अनुस ण में इस न्यायालय ने मनीष उज्जर्वोल औ अन्य बनाम महर्विष 5यानं5 स स्र्वोती विर्वोश्वविर्वोद्यालय औ अन्य, 2005 (13) एस. सी. सी. 744 में पै ाग्राफ 9 औ 10 में विनम्नलिललिखत शब्5ों में इस सिसद्धांत को 5ोह ाया हैः- "9. कानपु विर्वोश्वविर्वोद्यालय बनाम समी गुप्ता र्वोाले मामले में इसी त ह की समस्या प विर्वोचा क ते हुए, इस न्यायालय ने कहा विक प्रमुख उत्त ों क े सही होने क े बा े में एक ा णा है औ सं5ेह क े मामले में, न्यायालय विनधि–त रूप से प्रमुख उत्त ों को प्रार्थीविमकता 5ेगा। यही का ण है विक हमने उन प्रमुख उत्त ों का उल्लेख नहीं विकया है सिजनक े बा े में विर्वोशेषज्ञों क े बीच विर्वोचा ों क े अंत क े परि णामस्र्वोरूप सं5ेह है। मुख्य उत्त ों क े संबं में जहां मामला सं5ेह क े 5ाय े से प े है, इस न्यायालय ने माना है विक छात्रों को ऐसा उत्त नहीं 5ेने क े लिलए 5ंधिडत क ना अनुधिचत होगा जो मुख्य उत्त क े अनुरूप हो, अर्थीाAत ऐसा उत्त जो गलत वि5खाया गया है। उप ोक्त छह प्रमुख उत्त ों क े स्पn रूप से गलत होने क े बा े में कोई विर्वोर्वोा5 नहीं है औ इस तथ्य प विर्वोश्वविर्वोद्यालय क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता द्वा ा सही त ीक े से सर्वोाल नहीं उठाया गया है। इस दृविn से विर्वोश्वविर्वोद्यालय की गलती औ लाप र्वोाही का खाविमयाजा छात्रों को नहीं भुगतना पड़ सकता है।
10. उच्च न्यायालय ने इस विनष्कषA प पहुंचने में गंभी अर्वोै ता की प्रधितबद्धता व्यक्त की है विक "यह विनधि–तता क े सार्थी नहीं कहा जा सकता है विक प्रमुख उत्त ों में वि5ए गए छह प्रश्नों क े उत्त त्रुविर्टेपूणA औ गलत र्थीे।" जैसा विक पहले ही 5ेखा जा चुका है, प्रमुख उत्त स्पn रूप से गलत हैं। मामले क े उस दृविnकोण में, छात्र समु5ाय, चाहे अपीलकताA या हस्तक्षेप क ने र्वोाले या यहां तक विक र्वोे लोग भी सिजन्होंने उच्च न्यायालय या इस न्यायालय से संपक A नहीं विकया, उन्हें विर्वोश्वविर्वोद्यालय द्वा ा की गई गलधितयों क े का ण पीविड़त नहीं विकया जा सकता है। विफलहाल हम इससे ज्या5ा क ु छ नहीं कहते हैं क्योंविक रि कॉडA में ऐसा क ु छ भी नहीं है विक यह त्रुविर्टे गलत मुख्य उत्त 5ेने में क ै से हुई औ विकसने लाप र्वोाही की। सार्थी ही, हालांविक, यह ध्यान खना आर्वोश्यक है विक विर्वोश्वविर्वोद्यालय औ मुख्य उत्त तैया क ने र्वोालों को बहुत सार्वो ान हना होगा औ एक से अधि क का णों से इन मामलों में अत्यधि क सार्वो ानी आर्वोश्यक है। हम उनमें से क ु छ का उल्लेख क ते हैं; पहला औ सर्वो परि का ण गलत उत्त क े रूप में छात्र का कल्याण होना योग्यता को नुकसान पहुंचा सकता है। एक युर्वोा छात्र की 5ु5Aशा को उसक े करि य की 5हलीज प अच्छी त ह से समझा जा सकता है यवि5 सही उत्त 5ेने क े बार्वोजू5 छात्र गलत औ स्पn रूप से गलत क ुं जी उत्त ों क े परि णामस्र्वोरूप पीविड़त होता है; 5ूस ा का ण यह है विक अ5ालतें शैधिक्षक मामलों में 5खल 5ेने में ीमी हैं, जो ब5ले में, मुख्य उत्त तैया क ते समय विर्वोश्वविर्वोद्यालय प एक उच्च सिजम्मे5ा ी डालती है; औ तीस े, सं5ेह की स्थिस्र्थीधित में, लाभ विर्वोश्वविर्वोद्यालय क े पक्ष में जाता है न विक छात्रों क े पक्ष में। यवि5 संबंधि त व्यविक्तयों द्वा ा मुख्य उत्त प्र5ान क ने में लाप र्वोाही का यह र्वोैया अपनाया जाता है, तो गलत औ भ्रामक उत्त ों क े लिलए सिजम्मे5ा लोगों क े लिखलाफ अनुशासनात्मक का Aर्वोाई सविहत उधिचत का Aर्वोाई क ने क े लिलए विन5श जा ी विकए जा सकते हैं, लेविकन हम र्वोतAमान मामले में ऐसे विन5श जा ी क ने से प हेज क ते हैं।"
13. इसी प्रभार्वो क े लिलए, इस न्यायालय ने गुरु नानक 5ेर्वो विर्वोश्वविर्वोद्यालय बनाम सौविमल गगA औ अन्य, 2005 (13) एससीसी 749 में विर्वोश्वविर्वोद्यालय को सीबीएसई द्वा ा प्र5ान विकए गए प्रमुख उत्त ों क े सं5भA में 8 प्रश्नों क े उत्त ों का पुनमूAल्यांकन क ने का विन5श वि5या र्थीा। इस न्यायालय ने विर्वोश्वविर्वोद्यालय द्वा ा अपनाए गए उस पाठ्यक्रम को भी नामंजू क वि5या सिजसमें प्रर्वोेश प ीक्षा में भाग लेने र्वोाले सभी छात्रों को अंक वि5ए गए हैं, भले ही विकसी ने प्रश्नों का उत्त वि5या हो या नहीं।
14. एक अन्य विनणAय सिजसका उल्लेख विकया गया है र्वोह ाजेश क ु मा औ अन्य बनाम विबहा ाज्य औ अन्य, 2013 (4) एससीसी 690 है, जहां इस न्यायालय को गलत उत्त क ुं जी का उपयोग क क े गलत मूल्यांकन से संबंधि त मामले प विर्वोचा क ने का अर्वोस विमला। विबहा कमAचा ी चयन आयोग ने जूविनय इंजीविनय (सिसविर्वोल) क े प5ों क े लिलए आर्वोे5न आमंवित्रत विकए र्थीे। चयन प्रविक्रया में एक लिललिखत र्वोस्तुविनष्ठ प्रका की प ीक्षा शाविमल र्थीी। असफल उम्मी5र्वोा ों ने चयन प हमला विकया। उच्च न्यायालय क े एकल न्याया ीश ने इस मॉडल उत्त क ुं जी को विर्वोशेषज्ञों क े लिलए विनर्वि5n विकया। विर्वोशेषज्ञों की रि पोर्टेA क े आ ा प एकल न्याया ीश ने कहा विक 100 में से 41 मॉडल उत्त गलत हैं। एकल न्याया ीश ने कहा विक पू ी प ीक्षा द्द की जा सकती है औ इसी त ह उसक े आ ा प विनयुविक्तयां भी द्द की जा सकती हैं। पत्र पेर्टेेंर्टे अपील क ु छ उम्मी5र्वोा ों द्वा ा 5ाय की गई र्थीी सिजसे आंशिशक रूप से उच्च न्यायालय की खंडपीठ द्वा ा अनुमधित 5ी गई र्थीी। खण्ड पीठ ने एकल न्याया ीश द्वा ा पारि त आ5ेश को संशोधि त विकया औ घोषणा की विक पू ी प ीक्षा को द्द क ने की आर्वोश्यकता नहीं है। खण्ड पीठ क े आ5ेश को चुनौती 5ी गई सिजसमें इस न्यायालय ने पै ाग्राफ 19 में कहाः- "19. श्री ार्वो द्वा ा 5ी गई 5लीलें विबना विकसी योग्यता क े नहीं हैं। उत्त क ुं जी में 5ोष की प्रक ृ धित को 5ेखते हुए स्थिस्क्रप्र्टे क े मूल्यांकन को सही क ने का सबसे स्र्वोाभाविर्वोक औ तार्विकक त ीका क ुं जी को सही क ना औ उसक े आ ा प उत्त क ुं जी का विफ से मूल्यांकन क ना र्थीा। इन परि स्थिस्र्थीधितयों में, आयोग द्वा ा नए सिस े से प ीक्षा आयोसिजत क ने का विन5श 5ेने क े लिलए कोई बाध्यका ी का ण नहीं र्थीा, विर्वोशेष रूप से जब विकसी क5ाचा, ोखा ड़ी या भ्रn उद्देश्यों क े बा े में कोई आ ोप नहीं र्थीा, जो सभी संबंधि त लोगों द्वा ा एक नए प्रयास क े लिलए विपछली प ीक्षा को प्रभाविर्वोत क सकता र्थीा। सही क ुं जी क े सं5भA में उत्त पुस्थिस्तकाओं क े पुनमूAल्यांकन की प्रविक्रया तेज होने क े अलार्वोा कम खच7ली भी होगी। यह प्रविक्रया पहले आयोसिजत प ीक्षा औ उच्च न्यायालय क े विन5श क े अनुसा आयोसिजत प ीक्षा क े बीच समय अंत ाल क े का ण विकसी भी उम्मी5र्वोा को कोई अनुधिचत लाभ नहीं 5ेगी। यह कहना पयाAप्त होगा विक मामले क े तथ्यों औ परि स्थिस्र्थीधितयों में पुनमूAल्यांकन एक बेहत विर्वोकल्प र्थीा औ है।"
15. पेप सेर्टे या प ीक्षा विनकाय द्वा ा तैया विकए गए मुख्य उत्त ों को उधिचत विर्वोचा -विर्वोमशA क े बा5 तैया विकया गया माना जाता है। गलती क ना मानर्वोीय है। ऐसे कई का क हैं जो गलत उत्त क ुं जी को तैया क ने का का ण बन सकते हैं। प्रमुख उत्त ों का प्रकाशन पा 5र्भिशता प्राप्त क ने औ उम्मी5र्वोा ों को अपने उत्त ों की शुद्धता का आकलन क ने का अर्वोस प्र5ान क ने की वि5शा में एक क5म है। जांच विनकाय द्वा ा अपलोड विकए गए प्रमुख उत्त ों क े लिखलाफ आपलित्तयां 5जA क ने का अर्वोस इस प्रविक्रया में विनष्पक्षता औ पूणAता प्राप्त क ने की वि5शा में एक क5म है। प्रमुख उत्त ों प आपलित्तयों की विर्वोशेषज्ञों द्वा ा जांच की जानी है औ उसक े बा5 जांच विनकाय द्वा ा सु ा ात्मक उपाय, यवि5 कोई हो, विकए जाने चाविहए। र्वोतAमान मामले में हमने 5ेखा है विक आपलित्तयों प विर्वोचा क ने क े बा5 आयोग द्वा ा अंधितम मुख्य उत्त प्रकाशिशत विकए गए र्थीे, उसक े बा5 आयोग द्वा ा अपनाए गए मुख्य उत्त ों की शुद्धता को चुनौती 5ेते हुए कई रि र्टे याधिचकाएं 5ाय की गई र्थीीं। उच्च न्यायालय ने विर्वोशेषज्ञों क े विर्वोचा ों को स्र्वोीका क ते हुए चुनौती को खारि ज क वि5या। उम्मी5र्वोा अभी भी असंतुn हैं, र्वोे इन अपीलों को 5ाय क क े इस न्यायालय में आए हैं।
16. इस न्यायालय ने अपीलों की सुनर्वोाई क ते हुए हमा े समक्ष उठाए गए क ु छ प्रस्तुधितयों में सा पाया औ अपीलकताAओं ने इस न्यायालय को संतुn विकया विक विर्वोशेषज्ञों द्वा ा क ु छ प्रश्नों की विफ से जांच क ने की आर्वोश्यकता है, इस न्यायालय ने 16.01.2018 को विन5श जा ी विकए।जैसा विक ऊप उल्लेख विकया गया है, इस न्यायालय क े विन5शों क े अनुस ण में विर्वोशेषज्ञ सविमधित ने उन प्रश्नों की जांच की सिजनक े संबं में इन अपीलों में आपलित्तयां उठाई गई र्थीीं। इस न्यायालय क े वि5नांक 16.01.2018 क े आ5ेश क े बा5 आयोग ने विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA को अपनाया, सिजसने उन प्रश्नों की विफ से जांच की, सिजनक े संबं में हमा े समक्ष इन अपीलों में आपलित्तयां उठाई गई र्थीीं। आयोग द्वा ा वि5नांक 17.04.2018 को एक शपर्थी पत्र 5ाय विकया गया है। शपर्थी पत्र में विनम्नलिललिखत बयान शाविमल हैंः- (i) विर्वोशेषज्ञों की रि पोर्टेA क े आ ा प, 9 विर्वोषयों क े 22 प्रश्नों क े उत्त सही औ संशोधि त विकए गए र्थीे। [शपर्थी पत्र का पृष्ठ 2 औ 3] [चार्टेA पृष्ठ 5 प संलग्न विकया गया है] (ii) शपर्थी पत्र क े पृष्ठ 5 क े चार्टेA क े अनुसा पेप I (सामान्य जागरूकता औ सामान्य अध्ययन) में विर्वोशेषज्ञों द्वा ा विकए गए संशो न क े अर्वोलोकन से पता चलता है विकः (क) विर्वोशेषज्ञों ने याधिचकाकताA क े अभ्यार्वोे5न को स्र्वोीका क लिलया औ पहले हर्टेाए गए 18 प्रश्नों में से 3 प्रश्नों ( प्रश्न संख्या 53, 57, 60) को ब क ा खा। (ख) विर्वोशेषज्ञों ने याधिचकाकताAओं का अभ्यार्वोे5न स्र्वोीका क लिलया औ शेष 57 प्रश्नों में 1 प्रश्न (प्रश्न संख्या 3) क े उत्त को सही क वि5या। (ग) विर्वोशेषज्ञों ने 5 प्रश्नों (प्रश्न संख्या 25, 28, 33, 49, 58) क े उत्त में सु ा की मांग क ने र्वोाले याधिचकाकताAओं क े अभ्यार्वोे5न को खारि ज क वि5या। (iii)आ पीएससी ने कहा है विक स्क ू ल लेक्च ों क े क ु ल विर्वोज्ञाविपत प5ों (13,098) में से 1045 प[5] अभी भी रि क्त हैं।[हलफनामे का पृष्ठ 3 औ 7] [चार्टेA पृष्ठ 47 प संलग्न विकया गया है] (iv) आ पीएससी ने कहा है विक इस माननीय न्यायालय क े समक्ष उपस्थिस्र्थीत 311 विर्वोशेष अनुमधित याधिचकाकताAओं में से 48 अपनी उत्त पुस्थिस्तकाओं क े संशो न क े बा5 स्क ू ल व्याख्याता क े रूप में चयन क े लिलए योग्यता क े भीत हैं। [शपर्थीपत्र का पृष्ठ 3-4, पै ाग्राफ 8]
17. वि5नांक 02.04.2018 क े अपने आ5ेश द्वा ा, हमने सभी पक्षों को विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA की आपूर्तित क ने का विन5श वि5या है।रि पोर्टेA की प्रधितयां उपलब् क ा 5ी गई हैं। सुनर्वोाई क े 5ौ ान, अपीलकताAओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने प्रस्तुत विकया विक विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा इन अपीलों में उठाई गई पयाAप्त शिशकायतों का विनर्वोा ण विकया गया है। अपीलार्भिर्थीयों द्वा ा वि5ए गए अभ्यार्वोे5नों को काफी ह[5] तक स्र्वोीका क लिलया गया है जैसा विक ऊप उल्लेख विकया गया है। हालांविक, अपीलार्भिर्थीयों क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने तक A वि5या है विक विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा वि5ए गए क ु छ उत्त अभी भी सही नहीं हैं। हमा े समक्ष क ु छ ऐसे प्रश्न उठाए गए हैं सिजनक े बा े में अपीलार्भिर्थीयों क े अनुसा विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा संतोषजनक रूप से विर्वोचा नहीं विकया गया है। पेप नंब 1 क े प्रश्न संख्या 58 को सं5र्भिभत क ना पयाAप्त होगा। े विर्वोद्वत अधि र्वोक्ता का कहना है विक विर्वोशेषज्ञ सविमधित ने विर्वोकल्प संख्या 4 को सही विर्वोकल्प क े रूप में स्र्वोीका विकया है, जबविक सही विर्वोकल्प संख्या 3 है। े विर्वोद्वत अधि र्वोक्ता को अपनी बात को स्पn क ना है, सिजसने हमा े सामने विनम्नलिललिखत चार्टेA खा हैः- प्रश्न संख्या विर्वोकल्प उत्त आ पीएसस ीी उत्त विर्वोशेषज्ञ रि पोर्टेA (पृ. 15) याधिचकाक ताA का जर्वोाब समर्थीAन में साक्ष्य शिशक्षक क े लिलए प्रधित सप्ताह (1) 35 र्टेीचिंचग प्लस तैया ी घंर्टेे विर्वोकल्प 4 विर्वोकल्प 4 विर्वोकल्प 3 1. आ र्टेीई अधि विनयम में विनर्वि5n विकया गया है विक कायA क ने क े न्यूनतम घंर्टेे आ र्टेीई अधि विन यम, में (2) 40 प्लस तैया ी क े घंर्टेे (3) 45 शिशक्षण घंर्टेे (4) 45 शिशक्षण औ तैया ी क े घंर्टेे "शिशक्षक क े लिलए प्रधित सप्ताह कायA क े न्यूनतम घंर्टेे:तैया ी क े घंर्टेोंसविहत: पैंतालीस" आ पीएससी ने स्क ू ल लेक्च प ीक्षा 2013 में भी यही सर्वोाल पूछा र्थीा औ “45 आर्वोसA" को सही उत्त माना र्थीा। विर्वोशेषज्ञ सविमधित ने स्र्वोयं पृ. 15 प आ र्टेीई अधि विनयम, 2009 को उद्धृत क ते हुए "न्यूनतम शिशक्षण घंर्टेों को 'तैया ी घंर्टेों सविहत 45 शिशक्षण घंर्टेों' क े रूप में उद्धृत विकया"
18. 24 अप्रैल, 2018 को सुनर्वोाई क े समय, पहली बा में, हमने यह भी पाया विक प्रश्न संख्या 21 क े संबं में अपीलकताAओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता द्वा ा जो तक A वि5या गया है, उसमें सा हो सकता है, हालांविक, जब हमने विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा वि5ए गए प्रश्न औ उसक े उत्त की पू ी त ह से जांच की, तो हम विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा वि5ए गए उत्त से सहमत हैं। विर्वोशेषज्ञ सविमधित की ाय को स्र्वोीका क ने का का ण इस प्रका हैः प्रश्न संख्या 58 जो पूछा गया र्थीाः "आ र्टेीई अधि विनयम, 2009 में शिशक्षकों क े लिलए प्रधित सप्ताह कायA क ने क े न्यूनतम घंर्टेे हैं।"
19. इस प्रका उत्त में कायA घंर्टेों की संख्या 5शाAनी होगी। आ र्टेीई एक्र्टे 24 क े तहत नोविर्टेविफक े शन जा ी विकया गया है जहां एक सप्ताह क े लिलए न्यूनतम शिशक्षण घंर्टेे इस प्रका उसिल्ललिखत हैं: “45 तैया ी क े घंर्टेों सविहत शिशक्षण।" इस प्रका प्रधित सप्ताह कायA घंर्टेों की न्यूनतम संख्या 45 प्र5ान की गई है सिजसमें शिशक्षण औ तैया ी क े घंर्टेे 5ोनों शाविमल हैं। र्वोै ाविनक प्रार्वो ान शिशक्षण शब्5 का उपयोग क ता है सिजसमें तैया ी क े घंर्टेे शाविमल हैं जबविक उत्त शिशक्षण औ तैया ी क े घंर्टेे शब्5ों का उपयोग क ता है। इसमें कोई विर्वोर्वोा5 नहीं है विक आंकड़ा 45 एक सही आंकड़ा है, क े र्वोल इस बा े में मुद्दा है विक विर्वोकल्प संख्या 3 सही है या विर्वोकल्प संख्या 4। विर्वोकल्प संख्या 3 में 45 शिशक्षण घंर्टेों का उल्लेख है। उत्त संख्या 3 स्पn रूप से र्वोै ाविनक नुस्खे क े अनुसा नहीं है जो "तैया ी क े घंर्टेे सविहत 45 शिशक्षण" प्र5ान क ता है। इस प्रका, सही उत्त विर्वोकल्प संख्या 4 है सिजसमें 45 शिशक्षण औ तैया ी क े घंर्टेों का उल्लेख विकया गया है। "कानूनी प्रार्वो ान में "include" शब्5 का उपयोग क ने क े बजाय उत्त में "plus" शब्5 का उपयोग विकया गया है। जब अंक 45 में शिशक्षण क े सार्थी-सार्थी तैया ी क े घंर्टेे भी शाविमल हैं, तो शिशक्षण औ तैया ी क े घंर्टेे शब्5 का उपयोग समान अर्थीA को 5शाAता है। इस प्रका हमें उपयुAक्त विनर्वोे5न में कोई सा नहीं विमला है।
20. अपीलकताAओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने पेप संख्या 1 में कई अन्य प्रश्नों को भी इंविगत विकया है, सिजनका विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा अपीलकताAओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता क े अनुसा सही उत्त नहीं वि5या गया है। हमने विर्वोशेषज्ञ सविमधित द्वा ा इंविगत विकए गए क ु छ औ प्रश्नों प विर्वोचा विकया है औ हमा ा विर्वोचा है विक हमा े सामने इंविगत विकए गए तीन औ प्रश्नों क े संबं में विर्वोशेषज्ञ सविमधित क े उत्त ों में कोई त्रुविर्टे नहीं पाई जा सकती है। उत्त क ुं जी क े सत्यापन क े लिलए गविठत विर्वोशेषज्ञ सविमधित ने अपीलकताAओं द्वा ा उठाई गई ह आपलित्त का अध्ययन विकया है औ संतोषजनक जर्वोाब वि5या है। आयोग ने विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA को भी स्र्वोीका क लिलया है औ हमा े समक्ष उपस्थिस्र्थीत 311 अपीलार्भिर्थीयों क े परि णामों को संशोधि त क ने की प्रविक्रया शुरू क 5ी है।इस प्रका, हमा ा विर्वोचा है विक विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA, सिजसे आयोग ने स्र्वोीका क लिलया है, को कायाAस्थिन्र्वोत क ने की आर्वोश्यकता है।
21. अपीलकताAओं द्वा ा विकए गए अनु ो ों में से एक यह है विक हर्टेाए गए प्रश्नों क े अंकों को अन्य प्रश्नों में पुनर्विर्वोतरि त नहीं विकया जाना चाविहए र्थीा। यह प्रस्तुत विकया जाता है विक या तो सभी उम्मी5र्वोा ों को हर्टेाए गए सभी प्रश्नों क े लिलए समान अंक वि5ए जाने चाविहए र्थीे या क े र्वोल उन उम्मी5र्वोा ों को अंक वि5ए जाने चाविहए र्थीे सिजन्होंने उन प्रश्नों को क ने का प्रयास विकया र्थीा।
22. उत्त ों से प्रश्नों को हर्टेाए जाने क े बा5, प्रश्न पत्र को हर्टेाए गए प्रश्नों को कम क ने र्वोाले प्रश्न क े रूप में माना जाना चाविहए। हर्टेाए गए प्रश्नों क े संबं में अंकों का पुनर्विर्वोत ण मनमाना या अतार्विकक नहीं कहा जा सकता है। उम्मी5र्वोा ों की संख्या को 5ेखते हुए आयोग ने सभी उम्मी5र्वोा ों से विनपर्टेने क े लिलए एक समान त ीका अपनाया है। हमा ा विर्वोचा है विक सभी उम्मी5र्वोा ों को उनक े द्वा ा वि5ए गए सही उत्त ों की संख्या क े अनुसा अंकों क े पुनर्विर्वोत ण से लाभ हुआ है। इस प्रका, हम हर्टेाए गए अंकों क े अंकों क े पुनर्विर्वोत ण में कोई गलती नहीं पाते हैं।उच्च न्यायालय ने सही त ीक े से इस पद्धधित को मंजू ी 5ी है।
23. आयोग द्वा ा 5ालिखल शपर्थी पत्र में यह उल्लेख विकया गया है विक परि णाम में क े र्वोल 311 अपीलार्भिर्थीयों का संशो न विकया गया है जो इस न्यायालय क े समक्ष हैं। हमा ा विर्वोचा है विक प्रमुख उत्त ों को सही विकया गया है, उन उम्मी5र्वोा ों को छोड़क सिजन्हें पहले से ही चुना गया है, सभी उम्मी5र्वोा ों की योग्यता को विफ से विन ाAरि त क ने की आर्वोश्यकता है। हमा े वि5नांक 16.01.2018 क े आ5ेश में यह उल्लेख विकया गया है विक यह कर्वोाय[5] उन लोगों को प्रभाविर्वोत नहीं क ेगी जो पहले से ही चयविनत हो चुक े हैं। इस प्रका हमा ा विर्वोचा है विक आयोग को विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA क े आ ा प चयविनत उम्मी5र्वोा ों को छोड़क सभी उम्मी5र्वोा ों क े पू े परि णाम को संशोधि त क ना चाविहए औ सभी उम्मी5र्वोा ों क े संशोधि त परि णाम प्रकाशिशत क ने चाविहए। जब प ीक्षा में उपस्थिस्र्थीत होने र्वोाले उम्मी5र्वोा ों क े प्रमुख उत्त सही होते हैं, तो र्वोे अपने परि णाम क े संशो न क े हक5ा होते हैं, क्योंविक गलती उम्मी5र्वोा ों की नहीं, बस्थिल्क प ीक्षा विनकाय की होती है। उन उम्मी5र्वोा ों को लाभ नहीं 5ेना न्यायसंगत नहीं होगा जो आयोग औ इसकी पूर्वोA की विर्वोशेषज्ञ सविमधित सिजन्हें मुख्य उत्त ों को संशोधि त क ने का कायA वि5या गया र्थीा द्वा ा उठाए गए क5मों से संतुn होक न्यायालय नहीं आए हैं।
24. पूर्वोAगामी चचाAओं को ध्यान में खते हुए, हम विनम्नलिललिखत विन5ेशों क े सार्थी इन अपीलों का विनपर्टेान क ते हैंः (1) ाजस्र्थीान लोक सेर्वोा आयोग को वि5नांक 16.01.2018 क े हमा े आ5ेश क े अनुस ण में गविठत विर्वोशेषज्ञ सविमधित की रि पोर्टेA क े आ ा प सभी अपीलकताAओं सविहत सभी उम्मी5र्वोा ों क े परि णाम को संशोधि त क ने औ संशोधि त परि णाम प्रकाशिशत क ने का विन5श वि5या जाता है। (2) उपयुAक्त प्रविक्रया को पू ा क ते समय आयोग को उन सभी उम्मी5र्वोा ों क े परि णाम को संशोधि त क ने की आर्वोश्यकता नहीं है सिजनक े नाम पहले प्रकाशिशत चयन सूची में शाविमल विकए गए र्थीे। हमने पहले ही यह इंविगत क वि5या है विक इस प्रविक्रया से विनयुविक्तयां प्रभाविर्वोत नहीं होंगी, इसलिलए उनक े परि णाम को संशोधि त क ने की कोई आर्वोश्यकता नहीं है। इस प्रका, यह प्रविक्रया उन सभी उम्मी5र्वोा ों को छोड़क की जाएगी जो चयन सूची में शाविमल हैं। (3) आयोग उन संबंधि त श्रेशिणयों में अंधितम चयविनत उम्मी5र्वोा ों क े कर्टे ऑफ अंक भी प्रकाशिशत क ेगा, सिजन्हें चयन सूची में शाविमल विकया गया र्थीा, सिजसक े आ ा प आयोग द्वा ा विनयुविक्तयां की गई हैं। (4) संशोधि त परि णाम क े आ ा प, जो उम्मी5र्वोा अपने संबंधि त श्रेशिणयों में समान या अधि क अंक प्राप्त क ते हैं, उन्हें 1045 रि विक्तयों क े लिलए विनयुविक्त की पेशकश की जाएगी, जैसा विक आयोग द्वा ा उप ोक्त शपर्थी पत्र क े पै ाग्राफ 7 में उल्लेख विकया गया है। (5) परि णाम को संशोधि त क ने औ विनयुविक्तयों क े लिलए सिसफारि शें क ने का पू ा कायA आयोग द्वा ा आज से तीन महीने की अर्वोधि क े भीत पू ा विकया जायेगा। ाज्य उसक े बा5 आर्वोश्यक पारि णाविमक क5म उठाएगा। न्याया ीश (ए.क े.सीक ी) न्याया ीश (अशोक भूषण) नई वि5ल्ली, 03 मई 2018 यह अनुर्वोा5 आर्विर्टेविफशिशयल इंर्टेेलिलजेंस र्टेूल 'सुर्वोास' क े जरि ए अनुर्वोा5क की सहायता से विकया गया है। अस्र्वोीक ण: यह विनणAय पक्षका को उसकी भाषा में समझाने क े सीविमत उपयोग क े लिलए स्र्थीानीय भाषा में अनुर्वोावि5त विकया गया है औ विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारि क औ आधि कारि क उद्देश्यों क े लिलए, विनणAय का अंग्रेजी संस्क ण ही प्रामाशिणक होगा औ विनष्पा5न औ कायाAन्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्क ण ही मान्य होगा।