Full Text
भभरततय सरररचच नयभयभलय
दतरभनत अपतलतय अधधिकभधरतभ
धसधरल अपतल ससंख्यभ 5870/2015
घघेररचसंद एरसं अनय - अपतलभरर्थी गण
धररुद्ध
ममैससर महघेनदर धससंह एरसं अनय- izR;FkhZ गण
धनणरय
नयभयममधतर Jh अभय मनरहर lizs
1 . यह अपतल मभननतय उचच नयभयभलय रभजस्रभन, जरधिपपर दभरभ एस बत धसधरल izFke अपतल
ससंख्यभ 52 / 1997 ममें पभधरत असंधतम धनणरय एरसं आदघेश धदनभसंक 04.12.2006 क
घे धररुद्ध दभधखिल कत
गई हमै धजसममें मभननतय उचच नयभयभलय नघे izR;FkhZ गण (izfroknhx.k ) कत अपतल कर मसंजमर करतघे हपए
अधतधरक्त धजलभ जज ससंख्यभ 3 जरधिपपर दभरभ धसधरल मपकदमभ ससंख्यभ 135/1995 (146/1978) ममें
पभधरत धनणरय तरभ धडिक
क रत धदनभसंक 30.10.1996 कर अपभस्त करतघे हपए अपतलभरर्थी गण ( रभदतगण )
क
घे मपक़दमघे कर समय सतमभ बभधधित मभनकर खिभधरज कर धदयभ |
JUDGMENT
2. इस अपतल ममें धनधहत iz”u पर धरचभर करनघे क घे धलए कप छ तथ्यरसं पर धरचभर कर लघेनभ आरश्यक हमै |
3. इस धसधरल रभद ममें अपतलभरर्थी रभदतगण हहैं जबधक izR;FkhZ गण ( izfroknhx.k ) हहैं धजससघे यह अपतल उदमत हपआ हमै | 4.इस अपतल ममें धनधहत मपख्य ससंधक्षिप्त iz”u यह हमै धक क्यभ उचच नयभयभलय दभरभ izfroknhx.k कत izFke अपतल कर स्रतकभर कर अपतलभरर्थी गण (रभदतगण) क घे मपक़दमघे कर समय बभधधित कहकर खिभधरज करनभ नयभय ससंगत हमै ?
5. अपतलभरर्थी गण (रभदतगण) नघे izR;FkhZ गण (izfroknhx.k ) क घे धररुद्ध रभद गत पधरसर क घे सम्बनधि ममें दतरभनत मपकदमभ कर धदयभ जमैसभ कत इस okni= क घे izLrj 1 ममें धदयभ गयभ हमै और उनहरसंनघे izLrj 26(3) ममें रधणरत धनम्नधलधखित jkgrksa कत मभसंग कत -
26. रभदतगण uezrkiwoZd यह अनपनय करतघे हहैं fd -
1. रभदतगण क घे पक्षि ममें तरभ izfroknhx.k क घे धररुद्ध LoRo घरषणभ कत धडिक क रत पभधरत कत जभए और इस रभद क घे izLrj 1 ममें जमैसभ रधणरत हमै fd यह पधरसर Jh ओसरभल धससंह सभभ जरधिपपर सघे सम्बनधि रखितभ हमै और izfroknhx.k Jh धकशन धससंह कभ इसपर करई स्रभधमत्र अधधिकभर नहतसं हमै |
2. रभदतगण क घे पक्षि ममें तरभ izfroknhx.k क घे धररुद्ध स्रभयत व्यभदघेश पभधरत धकयभ जभए धक izfroknhx.k कर धकसत भत izdkj कभ दभरभ करनघे, धकसत भत izdkj कत कभयररभहत करनघे तरभ धररभधदत पधरसर क घे अधधिकभर ममें धकसत भत izdkj कभ व्यरधिभन उत्पनन करनघे सघे हमघेशभ क घे धलए ररकभ जभए |
3. उपररक्त पधरसर कभ कब्ज़भ पकरभपक सघे लघेकर रभदत कर धदलरभयभ जभए |
4. उपररक्त रभद कभ व्यय izfroknh सघे रभदत कर धदलरभयभ जभए |
5. अनय करई रभहत, धजससघे मभननतय नयभयभलय उधचत समझघे, भत रभदत कर धदलरभयभ जभए |
6. izR;FkhZ गण ( izfroknhx.k ) नघे धलधखित जरभब दभधखिल धकयभ और तथ्य और धरधधि सघे जपड़घे मपदरसं पर रभद ममें लगभयघे गए izeq[k आररपरसं कर अस्रतकभर धकयभ | इसक घे सभर सभर izfroknhx.k नघे यह आपधत्ति भत उठभई हमै धक यह रभद समय सतमभ सघे बभधधित हमै |
7. धरचभरण नयभयभलय नघे धनणरय / धडिक क रत क घे दभरभ समयसतमभ सधहत सभत धरधधि गत iz”uksa कभ उत्तिर अपतलभरर्थी गण क घे पक्षि ममें और izfroknhx.k क घे धररुद्ध दघेतघे हपए तदनपसभर धडिक क रत पभधरत कर दत |यह अधभधनधिभरधरत धकयभ गयभ fd अपतलभरर्थी रभद गत पधरसर क घे स्रभमत हहैं और रघे izfroknhx.k सघे इस रभद गत पधरसर कभ कब्ज़भ लघेनघे हघेतप अधधिक क त हहैं और असंतततः यह रभद समयसतमभ क घे भततर हमै |
8. izR;FkhZ गण ( izfroknhx.k) नघे व्यधरत हरकर मभननतय उचच नयभयभलय रभजस्रभन, जरधिपपर ममें izFke अपतल दभधखिल कत | आलरचय धनणरय क घे दभरभ, एकल बमेंच नघे अपतल कर मसंजमर करतघे हपए धरचभरण नयभयभलय क घे धनणरय और धडिक क रत कर अपभस्त करतघे हपए, पधरणभमस्ररूप रभद कर क घे रल इस आधिभर पर खिभधरज कर धदयभ fd रभद समय सतमभ बभधधित हमै| nwljs शब्दरसं ममें, मभननतय उचच नयभयभलय नघे धरचभरण नयभयभलय क घे सभत तथ्यततः धनष्कषर्षों कर अपतलभरर्थी (गण) क घे पक्षि ममें मभनय ठहरभयभ लघेधकन समयसतमभ क घे मपदघे पर धनणरय कर पलट धदयभ और यह अधभधनधिभरधरत धकयभ fd क्यरसंधक यह रभद भभरततय पधरसतमभ अधधिधनयम 1963 क घे असंतगरत धनधिभरधरत समयसतमभ सघे बभधधित हमै, अततः इस रभद कर समय सतमभ आधिभर पर खिभधरज धकयभ जभतभ हमै | izLrqr रभद ममें इसत मत कर लघेकर izfroknhx.k कत अपतल कर मसंजमर धकयभ गयभ और रभद कर भभरततय पधरसतमभ अधधिधनयम 1963 क घे असंतगरत धनधिभरधरत समयसतमभ क घे बभद दभयर धकयघे जभनघे क घे कभरण समय सतमभ बभधधित मभनकर खिभधरज कर धदयभ गयभ धजसक घे कभरण रभदतगण नघे इस नयभयभलय ममें धरशघेष अनपमधत यभधचकभ दभयर कत |
9. Jh एस. क घे जमैन रधरष्ठ अधधिरक्तभ अपतलभरर्थीगण (रभदतगण) क घे धलए उपधस्रत हपए जबधक izfroknhx.k dh vksj ls सम्मन क घे बभरजमद करई हभधजर नहतसं हपआ |
10. अपतलभरर्थीगण (रभदतगण) क घे धलए उपधस्रत रधरष्ठ अधधिरक्तभ कर सपनभ गयभ और रभद vfHkys[k कभ अरलरकन djus ds mijkar, हमभरभ मत अपतल कर मसंजमर करनघे कभ हमै और आलरचय धनणरय कर क घे रल इसत सतमभ तक ससंशरधधित करनघे कभ हमै जहभसं तक यह धनणर्थीत धकयभ गयभ हमै fd रभद समय सतमभ बभधधित हमै और पधरणभमततः, यह अधभधनधिभरधरत करतघे हपए धक रभद समय सतमभ क घे असंतगरत दभयर धकयभ गयभ, धरचभरण नयभयभलय क घे धनणरय कर कभयम रखिभ tkrk gSA
11. हमभरघे सपधरचभधरत मत सघे, धरचभरण नयभयभलय कभ यह मत नयभयससंगत रभ धक रभदत (इसममें अपतलभरर्थी ) दभरभ रभद समयसतमभ क घे असंतगरत हत दभयर धकयभ गयभ जबधक मभननतय उचच नयभयभलय दभरभ इस धनष्कषर कर पलटभ जभनभ उधचत नहतसं रभ |ऐसभ हम धनम्नधलधखित कभरणरसं सघे कहतघे हहैं -
12. धरचभरण नयभयभलय क घे धनणरय क घे अरलरकन पर, हम यह पभतघे हहैं fd धरचभरण नयभयभलय नघे इस रभद कर समय क घे भततर घरधषत करनघे क घे धलए पधरसतमभ अधधिधनयम क घे अनपचछघेद 65 कर आधिभर मभनभ क्यरसंधक यह रभद पधरसतमभ अधधिधनयम क घे अनपचछघेद 65 ममें धनधिभरधरत okn gsrqd क घे पकररदरन क घे 12 रषर क घे भततर हत दभयर धकयभ गयभ हमै |
13. हभलभसंधक मभननतय उचच नयभयभलय कभ मत यह रभ fd रभदतगण(अपतलभरर्थी गण) कभ izR;FkhZ गण (izfroknhx.k ) क घे धररुद्ध रभद अधनरभयर रूप सघे उद्घरषणभ और पधरणभमततः व्यभदघेश क घे धलए रभ और इसतधलए, यह ततन रषर्षों कत समय सतमभ सघे शभधसत हरनभ चभधहए और इस समय सतमभ कत गणनभ okn gsrqd क घे izFke पकररदरन सघे कत जभनत चभधहए | यह अधभधनधिभरधरत धकयभ गयभ धक चमचूँधक रभद ततन रषरर कत समय सतमभ क घे भततर दभयर नहतसं धकयभ गयभ, अततः इसघे समय सतमभ बभधधित मभनभ गयभ|
14. इस धरषय पर मभननतय उचच नयभयभलय कभ मत उद्धकत करनभ उधचत हरगभ- " हभलभचूँधक आदघेश धदनभसंक 20. 09.1983 क घे सम्बनधि ममें रभदतगण दभरभ कप छ भत अधभरचन नहतसं धकयभ गयभ और रभद कर क घे रल इसक घे रभस्तधरक रूप ममें हत सपनभ गयभ | रभदतगण कत ओर सघे dCts+ क घे धलए रभद चलभनघे सम्बनधित जभन बमझकर लरप पर, धरदभन अधधिरक्तभ Jh मघेहतभ दभरभ पधरसतमभ अधधिधनयम क घे अनपचछघेद 65 क घे सम्बनधि ममें धदए गए तकर्षों कभ करई महत्र नहतसं हमै | यह रभद क घे रल उद्घरषण और पधरणभमततः व्यभदघेश क घे धलए रभ और स्रतक क त रूप सघे okn gsrqd क घे izFke पकररदरन कत धतधर सघे ततन रषर्षों कत धनधिभरधरत अरधधि क घे बहपत समय बभद दभयर धकयघे जभनघे क घे कभरण स्पष्टतयभ समयसतमभ बभधधित हमै और तदनपसभर खिभधरज धकयघे जभनघे यरग्य हमै |
15. तथ्य सम्बनधित धकसत भत धररभद और धरस्तकत दलतलरसं पर धरचभर धकयघे धबनभ, धजनहघे हम अनभरश्यक समझतघे हहैं, हमभरघे मत सघे मभननतय उचच नयभयभलय कभ यह izs{k.k तथ्यभत्मक रूप सघे सहत नहतसं रभ धक यह रभद क घे रल उद्घरषणभ और व्यभदघेश क घे धलए धकयभ गयभ तरभ dCts+ क घे धलए नहतसं | (उपररक्त js[kkafdr असंश दघेखिमें )
16. हमभरघे मत सघे इस रभद i= क घे izLrj 5 ममें उद्धकत उपधिभरभ 26 (3) ममें izkfFkZr रभहत क घे अरलरकन ek= सघे यह स्पष्ट हमै fd रभदतगण नघे izfroknhx.k सघे रभद गत पधरसर क घे dCts+ कत धडिक क रत करनघे कत izkFkZuk भत कत हमै |
17. यह तथ्य धररभधदत नहतसं हमै जमैसभ fd दलतलरसं क घे अरलरकन सघे स्पष्ट हमै धक रभद गत पधरसर दसंडि izfdz;k ससंधहतभ, 1973 कत धिभरभ 145 क घे असंतगरत दरनरसं पक्षिकभररसं क घे बतच धसटत eftLVsªV क घे समक्षि कभयररभहत क घे अधितन हमै धजसममें दरनरसं हत पक्षिकभर एक दपसरघे क घे धररुद्ध रभद गत पधरसर क घे सम्बनधि ममें अपनघे dCts+ सधहत अपनघे अधधिकभर, स्रत्र और धहत कभ दभरभ कर रहघे हहैं | यह भत धररभधदत नहतसं हमै धक धसटत eftLVsªV नघे अपनघे आदघेश धदनभसंक 23. 12. 1996 क घे दभरभ, रभद गत पधरसर कर कप क र कर धदयभ रभ |
18. इसत कभरण सघे रभदतगण नघे 19.12.1978 कर रभद गत पधरसर पर अपनघे स्रत्र कत उद्घरषणभ कभ दभरभ करनघे, व्यभदघेश तरभ dCts+ क घे धलए izfroknhx.k क घे धररुद्ध दतरभनत रभद दभयर धकयभ | चमचूँधक रभद उद्घरषणभ, स्रभयत व्यभदघेश तरभ dCts+ क घे धलए रभ, अततः पधरसतमभ अधधिधनयम कभ अनपचछघेद 65 लभगम हरगभ धजसममें रभद दभयर करनघे क घे धलए 12 रषर कत समय सतमभ धनधिभरधरत हमै धजसघे उस धतधर सघे धगनभ जभनभ हरतभ हमै जब सघे izfroknh कभ स्रभधमत्र रभदतगण क घे धलए izfrdwy हर गयभ |
19. रभद-i= ममें लगभए गए आररपरसं क घे अनपसभर, izfroknhx.k कभ रभद गत पधरसर पर स्रभधमत्र, रभदतगण क घे अनपसभर, कब्ज़भ उस समय izfrdwy हपआ जब दसंडि izfdz;k ससंधहतभ कत धिभरभ 145 कत कभयररभहत क घे तहत izfroknhx.k नघे izFke बभर mijksDr पधरसर ममें अपनघे अधधिकभर, स्रभधमत्र तरभ vius fgr क घे दभरघे कर रभदतगण कत जभनकभरत ममें लभयभ और धजसममें बभद ममें धसटत eftLVsªV दभरभ 23.12.1996 कर कप कर्थी आदघेश पभधरत कर धदयभ x;k। रभदतगण क घे अनपसभर, izfroknhx.k दभरभ धकयघे गए उपररक्त कभयर सघे, रभदतगण क घे mijksDr पधरसर ममें अधधिकभर स्रभधमत्र तरभ fgr कर ससंदघेहभस्पद बनभयभ और इस izdkj mudks izfroknhx.k क घे धररुद्ध रभद गत पधरसर पर स्रभधमत्र कत घरषणभ कभ दभरभ तरभ अनय पधरणभमत रभहतरसं कभ दभरभ करनघे क घे धलए उद्धत धकयभ| (रभद कभ izLrj 23 दघेखिमें )
20. हमभरघे मत ममें, रभदतगण नघे कप कर्थी आदघेश धदनभसंक 23. 12.1996 सघे 12 रषर कत समय lhek क घे भततर, उधचत हत दतरभनत रभद 19.12.1978 कर दभयर धकयभ हमै | izfroknhx.k कभ रभद गत पधरसर पर अधधिकभर, स्रत्र तरभ mijksDr पधरसर मघेs fgr कर रभदत गण नघे izFke बभर धसटत eftLVsªV क घे समक्षि दसंडि izfdz;k ससंधहतभ कत धिभरभ 145 कत कभयररभहत क घे तहत दकधष्ट गत धकयभ और तब उद्घरषणभ और पधरसर पर dCts+ क घे धलए उनकभ रभद दभयर करनभ नयभय ससंगत रभ | अततः धरचभरण नयभयभलय दभरभ पधरसतमभ अधधिधनयम कभ अनपचछघेद 65 लभगम करतघे हपए रभद कर समय सतमभ क घे भततर ठहरभनभ नयभय ससंगत रभ |
21. समय सतमभ क घे iz”u कर धनणर्थीत करनघे क घे धलए, धक क्यभ रभद धनधिभरधरत समय सतमभ ममें दभयर धकयभ गयभ अररभ नहतसं, नयभयभलय कर क घे रल okni= ममें आररपरसं कर दघेखिघे जभनघे और रभदतगण नघे धकस izdkj okn gsrqd क घे पकररदरन हघेतप दलतल दत हमै, यह दघेखिघे जभनघे कत आरश्यकतभ हमै | इस रभद ममें, हम यह पभतघे हहैं कत रभदतगण नघे रभद कत धनधिभरधरत समय सतमभ रभलत शतर कर ससंतपष्ट करक घे रभद कर le;सतमभ ममें हत दभयर धकयभ हमै |
22. उपररक्त क घे अनपसभर, izR;FkhZ गण ( izfroknhx.k ) सभत दकधष्टकरणरसं सघे इस रभद ममें असफल हरतघे हहैं क्यरसंधक रघे न तर रभद गत पधरसर पर अपनभ LoRo और न हत धरधधिसम्मत dCt+k सभधबत कर सक घे हहैं | रघे मभननतय उचच नयभयभलय ममें क घे रल समय सतमभ क घे धबसंदप पर हत सफल हपए हहैं धजसक घे पधरणभमस्ररूप रभदतगण कभ दभरभ खिभधरज कर धदयभ गयभ क्यरसंधक izfroknhx.k नघे bl अपतल ममें दरनरसं हत नयभयभलय दभरभ पभयघे गयघे izfrdwy धनष्कषर्षों क घे धररुद्ध करई आपधत्ति दजर नहतसं करभई, इसतधलए इस अपतल ममें उन धनष्कषर्षों कत रमैधितभ और औधचत्य पर इस नयभयभलय दभरभ धरचभर धकयघे जभनघे कत करई आरश्यकतभ नहतसंहमै |
23. उपररक्त धरचभर धरमशर कत ररशनत ममें, हम मभननतय उचच नयभयभलय दभरभ समय सतमभ क घे iz”u पर धलए गए धनणरय सघे सहमत नहतसं हहैं | यह कभनमनत रूप सघे ससंधिभरणतय नहतसं हमै और तदनपसभर अपभस्त धकयघे जभनघे यरग्य हमै |
24. अपतल सफल हरतत हमै और तदनपसभर मसंजमर कत जभतत हमै | आलरचय धनणरय कर क घे रल उसत सतमभ तक, जहभचूँ तक यह अधभधनधिभरधरत धकयभ गयभ हमै धक अपतलभरर्थी गण (रभदतगण )क घे रभद कर समय सतमभ बभधधित हरनघे क घे कभरण धनरस्त धकयभ जभतभ हमै, कर एतद दभरभ अपभस्त धकयभ जभतभ हमै | पधरणभम स्ररुप,अपतलभरर्थी गण ( रभदतगण) क घे पक्षि ममें धरचभरण नयभयभलय क घे धनणरय तरभ धडिकक रत कर कभयम रखिभ जभतभ हमै | नयभयममधतर Jh अभय मनरहर lizs नयभयममधतर Jh अब्दपल नजतर नई धदल्लत, 20 धसतम्बर 2018 खिसंडिन (धडिस्क्लघेमर):- स्रभनतय भभषभ ममें धनणरय अनपरभद कभ आशय, पक्षिकभररसं कर इसघे अपनत भभषभ ममें समझनघे क घे उपयरग तक हत सतधमत हमै और अनय पकरयरजनभरर इसकभ उपयरग नहतसं धकयभ जभ सकतभ। समस्त व्यरहभधरक एरसं कभयभरलयतन पकरयरजनभरर, धनणरय कभ असंगकरघेजत ससंस्करण हत पकरभमभधणक हरगभ एरसं धनष्पभदन तरभ कभयभरनरयन क घे पकरयरजनभरर क्षिघेतकर धिभधरत करघेगभ |