Full Text
माननीय सवोचच नयायालय
फौजदारी अपीलीय अिधकािरता
फौजदारी अपील संखया 11042 /2018
िवशेष अनुमित यािचका (आपरािधक) संखया 17321/2016 से उतपन
िवमला देवी एवं अनय . ..अपीलाथी (गण )
बनाम
नेशनल इनसुरेस क
ं पनी
क
ं पनी िलिमटेड एवं अनय …..पतयाथी (गण )
िनणरय
अभय मनोहर सपे, नयायमूितर शी
JUDGMENT
1. अनुमित दी गई.
2. यह अपील दावेदारो दारा राजसथान उचच नयायालय, जयपुर पीठ दारा SBCMA संखया 1739/2007 मे पािरत अंितम िनणरय और आदेश िदनांिकत 23.03.2015 क े िखलाफ दायर की गई है, िजसमे उचच नयायालय ने दावेदारो दारा दायर अपील को खािरज कर िदया एवं MACT चोमू (जयपुर) दारा MAC वाद संखया 48/2005 मे पािरत अिधिनणरय िदनांिकत 05.12.2005 की पुिष की।
3. मामले मे उतपन होने वाले मुदो पर िवचार करने हेतु, पासंिगक तथयो को रेखांिकत 2018 INSC 1076 करना आवशयक है।
4. अपीलकतार दावेदार / वादी है जबिक पतयाथी उस दावा यािचका क े गैर-आवेदक / पितवादी है िजससे यह अपील उतपन हुई है।
5. लगभग 25 वषीय राजेद पसाद 03.06.2003 को "चोमू" नामक सथान पर जाने क े िलए बस संखया RJ-07-P-2151 मे याता कर रहा था. जब बस पुिलस सटेशन, चोमू क े पास पहुंची, तो एक टरक नंबर HR-55A-7729, जो िक चोमू से जयपुर की ओर जा रहा था तेज गित से आया और बस से टकरा गया। टककर का पभाव इतना पबल था िक राजेद पसाद, जो बस क े अंदर बैठे थे, गंभीर रप से घायल हो जाने की वजह से उनकी ततकाल मृतयु हो गई I पिरणामसवरप पुिलस थाना चोमू मे एफआईआर नंबर 214/2003 दजर िकया गया।
6. इस घटना क े पिरणामसवरप दो कानूनी कायरवाही नामतः आपरािधक और दीवानी का उपकम हुआ, जहां तक आपरािधक कायरवाही का संबंध है, दंडािधकारी की अदालत मे राजय दारा हमलावर टरक क े चालक क े िखलाफ एक आरोप-पत (1/2003) भारतीय दंड संिहता की धारा 304-ए क े तहत (संकेप मे, "भा.द.सं ") दायर की गई थी
7. जहाँ तक, इस अपील से संदिभरत दीवानी कायरवाही का समबनध है वो अपीलकतारओं (दावेदारो) दारा िजनमे मृतक की पतनी और दो नाबािलग बचचे शािमल है ने बीमा क ं पनी (पतयाथी संखया 1 ), चालक (पतयथी संखया 2 ) एवं हमलावर टरक क े मािलक (पतयाथी संखया 3 ) क े िवरद मोटर वाहन अिधिनयम क े धारा 166 (तदोपरांत "अिधिनयम" क े रप मे संदिभरत) पूवर मे मोटर दुघरटना नयायािधकरण, चोमू मे दायर की गई थी, िजसमे उनहोने अपने पिरवार क े एकमात आजीिवका कमाने वाले सदसय, राजेद पसाद क े असामियक मृतयु क े कारण हुई कित क े िलए उनहे उिचत मुआवजा देने का दावा िकया है.
8. अपीलकतारओं ने अपनी दावा यािचका क े साथ उन सभी दसतावेजो को पसतुत िकया, जो राजय दारा चालक क े िखलाफ आपरािधक कायरवाही मे दायर िकए गए थे, जैसे िक पथम सूचना िरपोटर, आरोप पत, नकशा-नजरी, मृतक की पोसटमाटरम िरपोटर, टरक न. एचआर-ए -7729 का पंजीकरण, बीमा कवरेज, यांितक िनरीकण िरपोटर, अिधिनयम की धारा 133 क े तहत मािलक को जारी नोिटस की पित आिद।
9. जहाँ तक, हमलावर टरक क े चालक और मािलक का समबनध है, आरमभ से ही दोनो कायरवाही मे एकपकीय रहे है. जहां तक बीमा क ं पनी (बीमाकतार) का संबंध है, उनहोने सवतः उपिसथत होकर िलिखत बयान दजर िकया। हालांिक, बीमा क ं पनी ने अपने िलिखत बयान मे कहा िक पहले तो, टरक क े मािलक ने बीमा क ं पनी को कोई सूचना नही दी; दूसरे, बस क े मािलक और चालक को कायरवाही मे पक क े रप मे नही िलया गया था; और तीसरा हमलावर टरक क े मािलक ने चालक क ं पनी क े डराइिवंग लाइसेस की एक पित बीमा क ं पनी को नही भेजी, तािक वे इसकी वासतिवकता क े बारे मे जांच कर सक े (अिधिनणरय क े पैरा 3 देखे)।
10. दावेदारो ने अपने मामले क े समथरन मे तीन गवाहो को पसतुत िकया । बीमा क ं पनी ने िकसी भी गवाह को पसतुत नही िकया। 05.12.2005 क े अिधिनणरय दारा, िटरबयूनल ने अपीलकतारओं क े दावे की यािचका को खािरज कर िदया। यह माना गया िक दावेदार हमलावर टरक से हुई दुघरटना िजसक े पिरणामसवरप राजेद पसाद की मृतयु हुई सािबत करने मे िवफल रहे। यह माना गया था िक यदिप दावेदारो ने दसतावेज दायर िकए थे, लेिकन चूंिक उन दसतावेजो का पदशरन नही िकया गया था, इसिलए बीमा क ं पनी दसतावेजो पर दावेदारो क े गवाहो से िजरह नही कर सकी। संकेप मे, िटरबयूनल ने अिभिनधारिरत िकया िक दावेदार सबूतो क े अभाव मे दुघरटना को सािबत करने मे नाकाम रहे और जो सबूत पसतुत िकया गया, उसका पदशरन न िकये जाने की वजह से वो वयथर हो गया। दावा यािचका को मूलतः उपरोक दो िनषकषों पर खािरज कर िदया गया I
11. दावेदारो ने वयिथत होकर राजसथान उचच नयायालय, जयपुर पीठ मे अपील दायर कर दी. उचच नयायालय ने आलोचय आदेश क े दारा कर अपील ख़ािरज कर दी िजसक े पिरणामसवरप दावेदारो ने वतरमान अपील को िवशेष अनुमित यािचका क े माधयम से नयायालय मे दायर िकया I
12. अपीलकतारओं क े िवदान अिधवका शी मारफ खान एवं पितवादी न. 1 क े िवदान विरष अिधवका सुशी मीनाकी िमधा को सुना गया ।
13. पककारो क े िवदान अिधवकाओं को सुनने एवं मामले क े पतावली का अवलोकन पशचात् हम अपील की अनुमित देते है और आलोचय आदेश को ख़ािरज करते हुए अपीलकतारओं (दावेदारो) दारा दायर दावा यािचका को सवीकार िकया जाता है. अपीलकतारओं को िनमनिलिखतानुसार उिचत मुआवजा पदान िकया जाता है I
14. हमारे िवचार मे, अपीलकतारओं क े दावे की यािचका / अपीलको खािरज करने क े िलए िटरबयूनल और उचच नयायालय क े दिषकोण, तक र और िनषकषर िविध अनुरप नही थे कयोिक दोनो ने मामले मे उतपन होने वाले िकसी भी मुदे पर िवचार नही िकया। उचच नयायालय ने अपील को खािरज करते हुए िबना कोई कारण बताए िटरबयूनल क े अिधिनणरय की िसफ र पुिष कर दी।
15. मामले क े तथयातमक पहलुओं की जांच करने से पूवर उस अिधिनयम क े पावधानो पर धयान देना उिचत होगा जो दावा यािचका क े िनणरय क े िलए पासंिगक है I
16. यह पुनः कहना चाहेगे की इस पकार मामलो मे इस अदालत ने पहले भी कहा है की यह अिधिनयम, मोटर दुघरटना क े उन पीिडतो को राहत देने क े िलए एक लाभदायक कानून है जो शारीिरक चोट से पीिडत है या िजनकी असामियक मृतयु हो गई है I अिधिनयम इस तरीक े से बनाया गया है, जो पीिडतो को उन कानून क े सखत अनुपालन को सुिनिशचत करने से राहत देता है जो दुघरटना मे हुए कितपूितर क े मुआवजे क े दावे हेतु अिधिनयम क े तहत दायर दावा यािचका पर मुकदमा चलाने और वाद समबनधी अनय कायरवािहयो पर अनयथा लागू होते है I
17. धारा 158 क े तहत मोटर वाहन चालक मोटर क े उपयोग क े समबनध मे पुिलस दारा मांगे जाने पर क ु छ पमाण पत, डराइिवंग लाइसेस और परिमट पसतुत करने पर बाधय होता है I उप-धारा (6) क े तहत, िजसे 1994 मे संशोधन क े माधयम से धारा 158 मे जोडा गया था, िकसी दुघरटना मे हुए मृतयु या िकसी वयिक को आये शारीिरक चोट से समबंिधत एफआईआर / िरपोटर की एक पित सूचना पािप क े 30 िदनो क े अंदर अिधकार-छेत क े दावा नयायािधकरण एवं एक पित समबंिधत बीमाकतार को पेिषत करने को बाधय होता है. अगर सूचना की एक पित हमलावर वाहन क े चालक को उपलबध कराई गई है तो इस उपधारा क े तहत वह उस सूचना को दावा नयायािधकरण और वाहन बीमाकतार को अगसािरत करने को बाधय है
18. दावा अिधकरण, इस रसीद पर उपलबध दुघरटना की िरपोटर को दावेदारो दारा धारा 166 (4) क े अिधिनयम क े तहत मुआवजा पाने हेतु िकये गए आवेदन क े रप मे पयोग करने क े िलए सशक हैऔर इस पकार योगयता क े आधार पर इस तरह क े आवेदन को िविध अनुसार िनणीत करने का अिधकार रखता है।
19. अिधिनयम की धारा 158 (6) सपिठत धारा 166 (4) का उदेशय दावेदारो क े दावा यािचका दायर िकए िबना दुघरटना क े एफआईआर क े पािप क े एक माह क े भीतर दुघरटना क े दावे क े पंजीकरण को अिनवायर करक े दावे क े मामलो क े लंिबत रहने की अविध को काम करने और कितपूितर रािश क े िनधाररण की पिकया को तेज करना है. (जय पकाश बनाम नेशनल इंशयोरेस क ं पनी िलिमटेड, 2010 (2) एससीसी 607 देखे)।
20. अिधिनयम की धारा 140, धारा 163-ए और अिधिनयम की धारा -166 दावा अिधकरण को दावेदारो को मुआवजा पदान करने का अिधकार पदान करती है.
21. जहाँ तक अिधिनयम की धारा 140 का समबनध है इसक े तहत तुिटरिहत देयता क े िसदांत पर आधािरत मुआवजे क े मामलो का िनपटान होता है.
22. जहां तक अिधिनयम की धारा 163A का संबंध है, यह मुआवजे क े भुगतान क े िवशेष पावधानो से संबंिधत और िदतीय अनुसूची मे िनिदरष संरिचत समीकरण पर आधािरत है.
23. अिधिनयम की धारा 140 और धारा 163A क े तहत देय मुआवजे का दावा करते समय, दावेदार को अिधिनयम क े धारा 140 (4) और धारा अिधिनयम की 163A (2) क े आधार पर िकये गए दावे से संबंिधत वयिक क े िकसी भी गलत क ृ तय, उपेका या चूक को सािबत करने की आवशयकता नही है।
23. अिधिनयम की धारा 140 और धारा 163A क े तहत देय मुआवजे का दावा करते समय, दावेदार को अिधिनयम क े धारा 140 (4) और धारा अिधिनयम की 163A (2) क े आधार पर िकये गए दावे से संबंिधत वयिक क े िकसी भी गलत क ृ तय, उपेका या चूक को सािबत करने की आवशयकता नही है।
24. जहाँ तक अिधिनयम की धारा 166 का संबंध है, इसक े तहत यह मुआवजे क े भुगतान से भी समबंिधत है। अिधिनयम की धारा 168 दावा अिधकरण क े अिधिनणरय से संबंिधत है, जबिक अिधिनयम की धारा 169 दावा अिधकरण को पिकयागत शिकयां पदान करती है। जैसा िक इस नयायालय (तीन जजो की बेच) दारा पितपािदत िकया गया है, अिधिनयम क े तहत दायर दावा यािचका न तो एक वाद है और न ही पारंपिरक अथों मे एक पितक ू ल सूचना है, बिलक यह एक पिकया है जो अधयाय XII क े पावधानो से संदिभरत और िविनयिमत है। यह अिधिनयम अपने आप मे एक पूणर संिहता है। (यूनाइटेड इंिडया इंशयोरेस क ं पनी िलिमटेड बनाम िशला दता एवं अनय देखे, 2011 (10) एससीसी 509)।
25. िविध क े पूवोक िसदांत को धयान मे रखते हुए, जब हम उस मामले क े तथयो का परीकण करते है तो हमारा मत यह है िक दावा अिधकरण और उचच नयायालय दारा अपीलकतारओं क े दावे की यािचका खािरज करना नयायसंगत नही था। हमारे िवचार मे अपीलकतारओं क े दावे की यािचका सवीकार कर अपीलकतारओं को िविध अनुसार उिचत मुआवजा िदया जाना चािहए। इसक े िनमनिलिखत कारण है।
26. सबसे पहले, अपीलकतारओं ने दुघरटना और हमलावर वाहन क े चालक की तेज और लापरवाह डराइिवंग क े, िजसक े पिरणामसवरप राजेद पसाद की मृतयु हो गई थी पयारप सबूत पसतुत िकये।
27. दूसरा, अपीलकतारओं ने दुघरटना क े तथय और उसमे शािमल वयिकयो को सािबत करने क े िलए महतवपूणर दसतावेज पसतुत िकए।
28. तीसरा, दसतावेजो मे सपष रप से दुघरटना मे शािमल टरक की पहचान, टरक चालक की पहचान, टरक क े मािलक की पहचान, हमलावर टरक क े बीमाकतार का नाम, टरक का बीमा कवरेज की अविध, दुघरटना क े संबंध मे संबंिधत पुिलस सटेशन मे दजर की गई पाथिमकी का िववरण िदया है ।
29. हमारे िवचार मे, दुघरटना क े तथय और उसमे शािमल वयिकयो को सािबत करने क े िलए अपीलकतारओं दारा दायर िकए गए दसतावेजो क े अलावा और कौन से दसतावेज पसतुत िकए जा सकते थे ।
30. चौथा, जहां तक टरक क े डराइवर और मािलक का संबंध था, दोनो आरमभ से ही एकपकीय रहे है अतएव उनहोने न तो अपीलकतारओं क े दावा यािचका का सामना िकया और न ही दावा यािचका और साकय मे अपीलकतारओं दारा लगाए गए आरोपो को खािरज करने क े िलए गवाह बॉकस मे पवेश िकया I दोनो क े िखलाफ एक पितक ू ल िनषकषर िनकाला जा सकता है।
31. पांचवां, जहां तक बीमा क ं पनी का संबंध है, उनहोने अपीलकतारओं क े साकय को खािरज करने क े िलए िकसी भी गवाह को पसतुत नही िकया। बीमा क ं पनी हमलावर टरक क े चालक को अपने गवाह क े रप मे पसतुत कर साकय पसतुत कर सकती थी लेिकन ऐसा नही िकया गया ।
32. छठी, दूसरी ओर, अपीलकतारओं ने तीन गवाहो को पसतुत िकया और इस तरह मामले को सािबत करने क े िलए अपने आरंिभक कतरवय को पूरा िकया ।
33. सातवे, यिद, साकय अिभलेखन क े दौरान अपीलकतारओं क े उलेख करने क े बावजूद दसतावेजो को पदिशरत नही िकया, तो ऐसी िसथित मे, अपीलकतारओं को इस आधार पर मुआवजे का दावा करने क े उनक े अिधकार से वंिचत नही िकया जा सकता है। हमारी राय मे, यह क ु छ नही बिलक एक पिकयातमक चूक थी, िजसे दावे की यािचका को खािरज करने का आधार नही बनाया जा सकता। िवशेषकर तब जब अपीलकतारओं ने अपने मामले को सािबत करने क े िलए मिखक और दसतावेजी साकय पसतुत िकये और पतयाथीयो ने उनक े जवाब मे क ु छ नही िकया ।
34. उपयुरक सात कारणो क े आलोक मे, यह िनषकषर िनकलता है िक अपीलकतार दुघरटना क े तथय को िसद करने मे सकम रहे. इससे सािबत होता है की चालाक क े लापरवाहीपूवरक वाहन चलाने क े वजह से दुघरटना हुई. यह भी सािबत होता है की समय हमलावर टरक का बीमा पितवादी नंबर 1 दारा िकया गया था और टरक पितवादी नंबर 3 क े सवािमतव मे था।
35. अब अगला पशन यह है की अपीलकतार अपने अजरक -राजेद पसाद की मौत क े दावा करने क े िलए िकतने मुआवजे क े हकदार है।
36. साकय मे यह आया है की मृतक की उम लगभग 25 वषर थी और वह अपने पीछे अपनी पतनी और दो नाबािलग बचचो को छोड गया। यह भी सबूत है िक वह पित माह लगभग 10,000 / - कमाता था।
37. मामले क े सभी तथयो और पिरिसथितयो को देखने क े पशचात्, हम उनकी मािसक आय 5000 /- रपये मान लेना उिचत मानते है। वयिकगत खचों क े िलए एक-ितहाई भाग घटाने पर, लगभग 3300 /- रपये बनते है। अपीलकतार 40% की दर से भिवषय क े संभािवत नुकसान का दावा करने क े भी हकदार है, जो 1,320 /- रपये है और इस तरह से क ु ल 4620 /- रपये की आय िनकलती है। 18 क े गुणक को लागू करने पर, 4620 x 12 x 18 = 9,97,920 /- रपये पाप होते है।
38. उपयुरक रािश मे अंतयेिष खचर क े िलए 15,000/- रपये, संपित क े नुकसान क े िलए र। 15,000/- रपये और दंपित और अिभभावक संघ क े नुकसान क े िलए 100000/- रपये िनिशचत करते है. इस पकार, अपीलकतारओं (दावेदारो) को क ु ल िमलकर पतयाथीयो से मुआवजे क े रप मे 11,27,920 /- रपये का दावा करने का हकदार माना जाता है। इस नयायालय दार अिधिनणीत देय रािश पर दावा करने की ितिथ से लेकर पािप तक 6% पितवषर की दर से बयाज लगेगा।
39. पूवरगामी चचार क े मदेनजर, अपील सफल होती है और सवीकार की जाती है। आलोचय आदेश को रद िकया जाता है। अपीलकतारओं क े दावा यािचका को आंिशक रप से पतयाथीयो क े िवरद संयुकतः और पृथकतः सवीकार िकया जाता है.
40. पतयाथी नंबर 1-बीमा क ं पनी को उिचत सतयापन क े बाद अपीलकतारओं को भुगतान करने क े िलए दावा अिधकरण को 3 माह क े भीतर िनिशचत रािश जमा करने क े िलए िनदेिशत िकया जाता है।......... नयायमूितर शी [अभय मनोहर सपे]........ नयायमूितर शीमती [ इंदु मलहोता] नई िदली; 16 नवंबर, 2018 खंडन (िडसकलेमर): सथानीय भाषा िनणरय क े अनुवाद का आशय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तक ही िसिमत है और अनय पयोजनाथर इसका पयोग नही िकया जा सकता. समसत वयावहािरक एवं कायारलयीन पयोजनाथर, िनणरय का अंगेजी संसकरण ही पामािणक होगा एवं िनषपादन तथा कायारनवयन क े पयोजनाथर केत धािरत करेगा I