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आपराधि क अपीलीय आधि कारिरकता
आपराधि क अपीलीय संख्या 138/2010
कलुआ@कोशल किकशोर - अपीलकता#
बनाम
राजस्थान राज्य - प्रधितर्वोादी
क
े साथ
आपराधि क अपीलीय संख्या 139/2010
पिंपटू उर्फ
# कमल किकशोर और अन्य - अपीलकता#
बनाम
राजस्थान राज्य - प्रधितर्वोादी
किनर्ण#य
भानुमधित, न्याया ीश :
JUDGMENT
(1) ये अपीलें 18 अगस्त, 2008 को राजस्थान उच्च न्यायालय, पीठ जयपुर द्वारा डी.बी.सीआरएल 10/2005 और डी.बी.सीआरएल अपील संख्या 99/2005 में पारिरत किनर्ण#य और आदेश से उत्पन्न होती हैं। जिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने अपीलकता#ओं को ारा 302 सहपकिठत ारा 34 भारतीय दंड संकिहता क े तहत दोषजिसधिK की पुकिM की और उन्हें आजीर्वोन कारार्वोास की सजा दी। 2019 INSC 118 (2) संक्षेप में मामला इस प्रकार है। 17 जिसतंबर, 1999 को एक प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) द्वारा दज# कराई गई शिशकायत पर, जिजसमें कहा गया था किक शाम लगभग 5.00 बजे मृतक लखन मुख्य बाजार बयाना में नगर परिरषद/किनगम क े सर्फाई कम#चारिरयों क े किनरीक्षर्ण काय# में व्यस्त था। उस समय लखन सुस्या उर्फ # लोक े श (ए- 4), पिंपटू उर्फ # कमल किकशोर (ए-1), लड्डू उर्फ # मूल चंद (दोषमुक्त), किदनेश (ए-2), कलुआ (ए-5), सतीश (ए-3) (दोषमुक्त) और बंदूक और हशिथयारों से लैस अन्य व्यकिक्तयों से धि\रा हुआ था। पिंपटू उर्फ # कमल किकशोर (ए-1) और कलुआ उर्फ # कोशल किकशोर (ए-5) ने बाजार में दहशत र्फ ै लाने क े लिलए हर्वोा में गोलिलयां चलाई ं । सुस्या उर्फ # लोक े श (ए-4) ने अपने कट्टा (देशी बंदूक) से लखन पर गोली चलाई, जो लखन क े पेट क े बाई ंओर लगी और उसक े बाद सभी आरोपी मौक े से र्फरार हो गए। प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) और मौक े पर मौजूद अन्य लोगों ने \ायल लखन को अस्पताल में भत` कराया और अस्पताल में इलाज क े दौरान लखन ने दम तोड़ किदया। प्राथकिमक तौर पर अपीलकता#ओं क े लिखलार्फ आईपीसी की ारा 307 क े तहत मामला दज# किकया गया था। लेकिकन लखन की मौत क े बाद एर्फआईआर को ारा 302 आईपीसी में बदल किदया गया। (3) प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) और राक े श (पीडब्लू-12) क े साक्ष्य पर किर्वोचार करने पर और यह किक \टना स्थल से खाली कारतूस की बरामदगी हुई थी और पिंपटू @ कमल किकशोर (ए-1) से देशी बंदूक (कट्टा) की बरामदगी हुई थी, किर्वोचारर्ण न्यायालय ने पिंपटू @कमल किकशोर (ए-1), कलुआ @कोशल किकशोर (ए-
5) और सुस्या @ लोक े श (ए-4) को आईपीसी की ारा 302 सहपकिठत ारा 34 क े तहत दोषी ठहराया और उनमें से प्रत्येक को आजीर्वोन कारार्वोास की सजा सुनाई। किनचली अदालत ने किदनेश (ए-2) और सतीश (ए-3) तथा लड्डू उर्फ # मूल चंद को दोषमुक्त कर किदया। अपील में, उच्च न्यायालय ने पैरा (2) में पूर्वो क्त रूप में अपीलार्थिथयों की दोषजिसधिK की पुकिM की। (4) हमने अपीलकता# - कलुआ उर्फ # कोशल किकशोर (ए-5) की ओर से पेश होने र्वोाली किर्वोद्वान र्वोकील सुश्री चारु माथुर और अपीलकता#ओं- पिंपटू उर्फ # कमल किकशझोरे (ए-1) और सुस्या उर्फ # लोक े श (ए-4) की ओर से पेश होने र्वोाले किर्वोद्वान अधि र्वोक्ता श्री अशोक क े. श्रीर्वोास्तर्वो को बहुत किर्वोस्तार से सुना है। हमने प्रधितर्वोादी राज्य की ओर से उपस्थिस्थत किर्वोद्वान अधि र्वोक्ता श्री जयंत भट्ट को भी सुना है और आक्षेकिपत किनर्ण#य और अशिभलेख पर अन्य सामग्री का भी अर्वोलोकन किकया है। (5) अपीलकता# पिंपटू उर्फ # कमल किकशोर (ए-1) और सुशया उर्फ # लोक े श (ए-4) की ओर से उपस्थिस्थत किर्वोद्वान अधि र्वोक्ता श्री अशोक क े. श्रीर्वोास्तर्वो ने अन्य बातों क े साथ-साथ बालका सिंसह और अन्य बनाम पंजाब राज्य, (1975) 4 एससीसी 511 में इस न्यायालय क े र्फ ै सले पर भरोसा किकया। यह तक # किदये गए किक क ु छ अशिभयुक्तों, नामत: किदनेश (ए-2) और सतीश (ए-3) को झूठा र्फ ं साया जाना, अपीलकता#ओं की किमलीभगत पर गंभीर संदेह पैदा करता है और किर्वोचारर्ण न्यायालय या अपीलीय न्यायालय द्वारा इन पहलुओं पर ठीक से किर्वोचार नहीं किकया गया था। (6) किर्वोचारर्ण न्यायालय और उच्च न्यायालय ने इस तथ्य क े समर्वोत` किनष्कषp को दज# किकया किक चश्मदीद गर्वोाह प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) और राक े श (पीडब्लू-12) \टना क े प्राक ृ धितक गर्वोाह हैं। सबूतों क े मूल्यांकन पर, दोनों न्यायालयों ने समर्वोत` किनष्कषp को दज# किकया, जिजसमें कहा गया किक प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) और राक े श (पीडब्लू-12), जो किक मुख्य बाजार, बयाना, पंचायती राज मंकिदर में क ु छ सामान खरीद रहे थे, और उन्होंने \टना देखी किक पीकिड़त-लखन अपीलकता#ओं और अन्य अशिभयुक्तों से धि\रा हुआ था। जब दोनों न्यायालयों ने उनक े सबूतों को किर्वोश्वसनीय रूप से स्र्वोीकार कर लिलया है, तो हमें इन गर्वोाहों क े सबूतों को बदनाम करने का कोई आ ार नहीं किमलता है। (7) किर्वोशिभन्न किनर्ण#यों को किनर्दिदM करने क े पश्चात्, किर्वोचारर्ण न्यायालय ने अपने किनर्ण#य क े पैरा (37) द्वारा यह मत व्यक्त किकया किक प्राप्त मामले क े तथ्य और परिरस्थिस्थधितयों क े किर्वोश्लेषर्ण पर, यह इंकिगत किकया किक जिजस प्रकार अनाज को आसानी से भूसी से अलग किकया जा सकता है, झूठ और सत्य को आसानी से अलग किकया जा सकता है। अशिभयोजन पक्ष द्वारा किदए गए सबूतों पर किर्वोचार करते हुए, किर्वोचारर्ण न्यायालय ने किनर्ण#य सुनाया किक अशिभयुक्त नं. 2 और 3 अथा#त्, किदनेश (ए-2) और सतीश (ए-3) क े दोषमुकिक्त पर, अपरा करने में अन्य अशिभयुक्तों की संलिलप्तता पर संदेह नहीं किकया जा सकता है। किनचली अदालत और उच्च न्यायालय ने साथ-साथ यह माना किक चश्मदीद गर्वोाह प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) और राक े साक्ष्य आरोपी पिंपटू उर्फ # कमल किकशोर (ए-1), सुस्या उर्फ # लोक े श (ए-4) और कलुआ उर्फ # कोशल किकशोर (ए-5) क े अपरा को साकिबत करने क े लिलए तक # संगत और अकाट्य हैं। प्रत्यक्षदर्थिशयों क े सुसंगत कथन को ध्यान में रखते हुए, हम शिभन्न दृकिMकोर्ण अपनाने क े लिलए कोई अच्छा आ ार नहीं पाते हैं। (8) जहां तक प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) की किर्वोश्वसनीयता पर हमला करने र्वोाले तक # का संबं है किक उसे एक अन्य हत्या में दोषी ठहराया गया है और र्वोह आजीर्वोन कारार्वोास का सामना कर रहा है, अपने किनर्ण#य क े पैरा (38) में किर्वोचारर्ण किनचली अदालत ने अपने किनष्कषp को यह कहते हुए अशिभलिललिखत किकया किक र्वोत#मान \टना किकसी राजेश की हत्या क े मामले में प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) को आजीर्वोन कारार्वोास देने और थालेश की हत्या करने क े प्रयास से पहले की अर्वोधि से संबंधि त है। किर्वोचारर्ण न्यायालय ने सही अशिभकिन ा#रिरत किकया है किक क े र्वोल प्रेम शंकर (पीडब्लू- 9) को अन्य मामले में दोषी ठहराए जाने क े कारर्ण, यह उसकी किर्वोश्वसनीयता को प्रभाकिर्वोत नहीं करता है, जबकिक र्वोह इस \टना का गर्वोाह है । (9) जहां तक सुस्या उर्फ # लोक े श (ए-4), जिजसने किक पीकिड़त-लखन क े पेट पर गोली चलाई है, से कट्टा (देश किनर्दिमत बंदूक) की गैरबरामदगी क े बारे में किर्वोर्वोाद का संबं है, दोनों न्यायालयों ने समर्वोत` किनष्कषp को अशिभलिललिखत किकया है किक इस तरह की गैरबरामदगी या हशिथयार का अप्रस्तुधितकरर्ण अशिभयोजन क े मामले को भौधितक रूप से प्रभाकिर्वोत नहीं करेगा। (10) अशिभयोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत चश्मदीद गर्वोाहों और अन्य सामकिग्रयों क े साक्ष्य क े मूल्यांकन पर, किर्वोचारर्ण न्यायालय और उच्च न्यायालय ने समर्वोत` किनष्कषp को अशिभलिललिखत किकया किक प्रेम शंकर (पीडब्लू-9) और राक े साक्ष्य अकिर्वोर्वोाद्य हैं और हमें किर्वोचारर्ण न्यायालय और उच्च न्यायालय क े समर्वोत` किनष्कषp में हस्तक्षेप करने का कोई आ ार नहीं किमला है। (11) तदनुसार अपीलें खारिरज की जाती हैं। (12) चूंकिक अपीलार्थिथयों को दस र्वोष# से अधि क क े कारार्वोास का सामना करना पड़ रहा है, इसलिलए अपीलाथ` मार्फी क े लिलए अपने मामले पर किर्वोचार करने क े लिलए सक्षम प्राधि कारी से संपक # करने क े लिलए स्र्वोतंत्र हैं। जब भी इस संबं में इस तरह का प्रधितकिनधि त्र्वो किकया जाता है तो संबंधि त प्राधि कारी को कानून क े अनुसार किनर्ण#य लेना होता है। न्याया ीश (आर. बानुमशिथ) न्याया ीश (आर सुभाष रेड्डी) नई किदल्ली, 31 जनर्वोरी, 2019 यह अनुर्वोाद आर्दिटकिर्फशिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुर्वोास' क े जरिरए अनुर्वोादक की सहायता से किकया गया है। अस्र्वोीकरर्ण: यह किनर्ण#य पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीकिमत उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाकिदत किकया गया है और किकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं किकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारिरक और आधि कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, किनर्ण#य का अंग्रेजी संस्करर्ण ही प्रामाशिर्णक होगा और किनष्पादन और काया#न्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करर्ण ही मान्य होगा।