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भारत का सवोच्च न्यायालय
व्यवहािरक अपीलीय अिधिकार – क्षेत
व्यवहािरक अपील संख्या 2361/2019
िवशेष अनुमित यािचका (व्यवहािरक) संख्या 36299/2016 से उदृत
जगदीश चंदर. ....अपीलाथी
बनाम
सतीश चंदर और अन्य ....प्रत्यथी
िनणरय
न्यायमूर्तितर, आर सुभाष रेड्डी
JUDGMENT
1) अनुमित दी गई ।
2. इस अपील मे अपीलाथी वाद मे पहला प्रितवादी था जो दीवानी वाद संख्या.आर.बी.टी 1251/95/92 उप न्यायाधिीश, प्रथम श्रेणी, जवाली, िजला कांगड़ा, िहमाचल प्रदेश क े समक्ष दायर िकया गया था। यह अपील िनयिमत िद्वितीय अपील संख्या 383/07 मे िहमाचल प्रदेश क े उच्च न्यायालय, िशमला द्विारा पािरत मे िदए गए िनणरय िदनांिकत २५.१०.२०१६ से व्यिथत होकर दायर की गयी है ।
3. पहला प्रत्यथी-वादी ने इस आशय की घोषणा क े िलए उपरोक मुकदमा दायर िकया है िक वह 435/924 शेयरो की सीमा क े िलए यानी अनुसूर्तिचत भूर्तिम मे 0- 04-57 हेक्टेयर भूर्तिम मे संयुक मािलक है । उसका मामला था िक श्रीमती िवद्या देवी जो वादी की मां और पहली प्रत्यथी है, वाद भूर्तिम की मूर्तल स्वािमनी थीं। उसने 09.04.1991 को एक पंजीक ृ त वसीयत को उसक े और वाद क े अपीलाथी क े पक्ष मे िनष्पािदत िकया। वसीयत क े अनुसार, 0-03-84 हेक्टेयर भूर्तिम वादी को और 0- 02-85 हेक्टेयर भूर्तिम अपीलाथी को वसीयत मे दी गई। श्रीमती िवद्या देवी ने प्रोफामार प्रत्यथी संख्या.[2] और 3 क े पक्ष मे अन्य भूर्तिम क े संबंधि मे एक वसीयत भी िनष्पािदत िकया था। प्रत्यथी नंबर 1- वादी का आरोप है िक अपीलाथी ने श्रीमती िवद्या देवी से धिोखाधिड़ी से 23.04.1991 को उनकी जानकारी और सहमित क े िबना एक काल्पिनक उपहार िवलेख िनष्पािदत िकया गया। यह भी िनवेदन िकया जाता है िक वाद भूर्तिम पैतृक संपित है और पक्षकार वैसे ही भूर्तिम क े िलए काँगड़ा प्रथागत कानूर्तन द्विारा वैसे ही हक़दार है जैसा की घोषणा क े िलए प्राथरना की गयी है।
4. अपीलाथी-प्रितवादी नंबर 1 ने वाद लड़ा। वादी द्विारा लगाए गए िविभन आरोपो का खंडन करते हुए, यह अपीलाथी का मामला था िक इसमे श्रीमती िवद्या देवी ने अपनी मजी, सहमित और िबना पक्षपात क े उसक े पक्ष मे एक वैधि उपहार िवलेख िनष्पािदत िकया था। उपहार िवलेख को उप-पंजीयक क े समक्ष पंजीक ृ त िकया गया था और इस तरह धिोखाधिड़ी का सवाल ही नहीं उठता। उपहार क े आधिार पर यह िनवेदन िकया गया था िक अपीलाथी 924 शेयरो मे से 558 शेयरो का मािलक बन गया है, िजसमे से 285 शेयर उपहार िवलेख क े कारण थे। अपीलाथी ने प्रत्यथी संख्या १-वादी क े आरोपो से इनकार िकया िक वाद भूर्तिम पैतृक संपित थी और कांगड़ा प्रथागत कानूर्तन द्विारा शािसत थी ।
5. िनणरय िदनांिकत 2 जूर्तन, 2003 द्विारा िवचारण न्यायालय ने प्रथम प्रत्यथी द्विारा दायर मुकदमे को खािरज कर िदया। िरकॉर्डर पर साक्ष्य की मूर्तल्यांकन क े िलए ने िवचारण न्यायालय ने माना है िक दाता श्रीमती िवद्या देवी ने अपने जीवनकाल मे उपहार िवलेख को कभी भी चुनौती नहीं दी। प्रथम प्रत्यथी -वादी एक तीसरी पाटी होने क े नाते, िकसी भी आधिार पर उपहार की वैधिता को चुनौती देने क े िलए उसक े िलए खुला नहीं है। इसक े अलावा िवचारण न्यायालय ने माना है िक अिभलेख पर उपलब्धि साक्ष्य यह बताने क े िलए पयारप नहीं है िक श्रीमती िवद्या देवी पर उपहार िवलेख क े िनष्पादन क े िलए कोई धिोखाधिड़ी हुई है। वादी की दलील िक उपहार क े दस्तावेज क े रूप मे र 5,000/- क े प्रितफल क े सबूर्तत से समिथरत है जो संपित हस्तांतरण अिधििनयम, 1882 की धिारा 122 क े तहत प्रावधिान क े उल्लंघन मे है और इस िनष्कषर को दजर करते हुए नकारात्मक िकया गया है िक उक रािश की प्रािप का कोई समथरन नहीं है। अिभयोगी क े आरोप पर िक वाद भूर्तिम पैतृक संपित है और कांगड़ा प्रथागत कानूर्तन क े अंतगरत है, उनक े द्विारा िवचारण न्यायालय द्विारा अिभिनधिारिरत िकया गया है िक िवद्या देवी ने अपने स्वगीय िपता से वसीयत क े माध्यम से शीषरक प्राप िकया है उसी तरह वाद संपित श्रीमती िवद्या देवी की स्वयं अिजरत संपित मानी जाएगी ।
6. उपरोक िनष्कषों क े साथ, िवचारण न्यायालय ने मुकदमा खािरज कर िदया।
7. मुकदमे को खािरज करते हुए िवचारण न्यायालय द्विारा िदए गए िनणरय और िडक्री से व्यिथत होकर, प्रथम प्रत्यथी ने अितिरक िजला न्यायाधिीश, त्विरत न्यायालय, धिमरशाला, िहमाचल प्रदेश मे प्रथम अपील दायर की है। यहां तक िक प्रथम अपीलीय अदालत ने िवचारण न्यायालय क े िनणरय िदनांिकत 2 अगस्त, 2007 द्विारा िनष्कषों पर सहमित व्यक की है और प्रथम अपील (िसिवल अपील संख्या 147- जे/05/03) को खािरज कर िदया गया।
8. उसी से व्यिथत होकर, पहले प्रत्यथी-वादी ने उच्च न्यायालय मे िनयिमत दूर्तसरी अपील संख्या 383/2007 मे दूर्तसरी अपील दायर की है।
9. उच्च न्यायालय ने, न्याियक िनणरय द्विारा दोनो न्यायालयो क े िनणरयो को उलट कर अपील स्वीक ृ त की है मुख्य रूप से इस आधिार पर िक उपहार िवलेख को ५,०००/- रपये प्रितफल प्राप करक े िनष्पािदत िकया गया था। यह माना जाता है िक दाता द्विारा प्राप िकए गए इस तरह क े रािश क े मद्देनजर, यह टी.पी. अिधििनयम क े प्रावधिानो क े अनुसार नहीं है। इसक े अलावा, उच्च न्यायालय ने भी वाद संपित क े संबंधि मे दािखल ख़ािरज (प्रदशर. -3/ ) PW F क े दस्तावेज को ध्यान मे रखा है, जहां जमीन क े कब्जे का िवतरण र 5000/- प्रितफल की प्रािप पर दजर िकया गया है। इसक े अलावा, उच्च न्यायालय का मत है िक 09.04.1991 को प्रत्यथी नंबर 1 और अपीलाथी क े पक्ष मे वसीयत िनष्पािदत की गई और थोड़े समय क े भीतर यािन 23.04.1991 को उपहार िवलेख िनष्पािदत की गई और उस थोड़े समय क े भीतर िनष्पािदत करने का कोई कारण नहीं था। उपयुरक िनष्कषों क े साथ वाद मे िडक्री पािरत करक े अपील अनुमित दी जाती है िजसक े िलए घोषणा की प्राथरना की गयी है ।
10. हमने अपीलाथी क े िवद्विान अिधिवका और प्रत्यथी गण क े िवद्विान अिधिवका को भी सुना ।
11. इस अपील मे, मुख्य रूप से अपीलाथी क े िवद्विान अिधिवका द्विारा यह दावा िकया गया है िक उच्च न्यायालय ने कानूर्तन क े िकसी भी महत्वपूर्तणर सवाल का फ ै सला िकए िबना, िवचारण न्यायालय क े साथ-साथ प्रथम अपीलीय न्यायालय द्विारा दजर िकए गए तथ्यात्मक िनष्कषों क े साथ अिभलेख पर साक्ष्य का पुनः िवश्लेषण करक े हस्तक्षेप िकया है। यह कहा गया िक िसिवल प्रिक्रया संिहता की धिारा १०० क े अंतगरत शिक का प्रयोग करते हुए, यह माननीय उच्च न्यायालय क े िलए अिभलेख पर साक्ष्य क े िवश्लेषण क े िलए नहीं है और िवचारण न्यायलय द्विारा उल्लेिखत िकये गए िनष्कषों को भंग करक े अलग िनष्कषर पर पहुंचा जाये जो प्रथम अपीलीय न्यायलय द्विारा पुष िकये गए है । इसक े अलावा यह तक र िदया गया िक माननीय उच्च न्यायालय ने दस्तावेज (प्रदशर -3/ ) PW F पर िवश्वास करते हुए यह अिभिनधिारिरत िकया िक उपहार िवलेख ५,०००/-प्रितफल की रािश प्राप करक े ही िनष्पािदत की गयी है। यह तक र िकया गया िक मूर्तल दस्तावेज शािक ब्दक भाषा मे है। दस्तावेज क े पहले पृष पर उिल्लिखत 5,000 का आंकड़ा क े वल मूर्तल्यांकन, स्टांप शुल्क क े भुगतान क े उद्देश्य क े िलए है लेिकन उसी को गलती से उच्च न्यायालय द्विारा प्रितफल क े रूप मे माना गया है । यह आगे प्रस्तुत िकया गया है िक उपहार िवलेख चुनौती क े तहत नहीं था, यह उच्च न्यायालय क े िलए िवचारण न्यायलय और प्रथम अपीलीय न्यायालय द्विारा दजर िनष्कषों को बदल देने क े िलए नहीं था िजसक े िलए राहत की घोषणा क े िलए प्राथरना की गयी है।
12. दूर्तसरी ओर, प्रितवािदयो क े िवद्विान अिधिवका का तक र है िक श्रीमती िवद्या देवी द्विारा 09.04.1991 को, थोड़े समय क े भीतर, वसीयत को अंजाम देने क े बाद उपहार िवलेख को िनष्पािदत करने का कोई कारण नहीं था। यह तक र िदया जाता है िक उपहार िवलेख का िनष्पादन को वसीयत की क ु छ िदनो क े बाद िनष्पािदत िकया जाता है जो िक उपहार िवलेख की वास्तिवकता पर काफी संदेह पैदा करता है। ऐसा कहा गया है िक इस तरह क े उपहार िवलेख को उसकी जानकारी और सहमित क े िबना िनष्पािदत िकया गया था। यह भी कहा गया है िक जैसा िक उपहार िवलेख पर िवचार की रसीद प्रािप क े द्विारा सबूर्तत िदया गया है और आगे दािखल खािरज (प्रदशर पी डब्ल्यूर्त-3/एफ) से संबंिधित दस्तावेजी साक्ष्य को देखते हुए, उच्च न्यायालय क े फ ै सले मे हस्तक्षेप करने क े िलए कोई आधिार नहीं है।
13. दोनो पक्षो क े िवद्विान अिधिवकाओं को सुनने क े बाद हमने माननीय उच्च न्यायालय क े आक्षेिपत िनणरय और अिभलेख पर उपलब्धि अन्य सामग्री का अवलोकन िकया। शुरआत मे, यह ध्यान िदया जाना चािहए िक उपहार िवलेख जो अपीलकतार क े पक्ष मे िनष्पािदत िकया गया है, एक पंजीक ृ त उपहार िवलेख है। अिभलेख पर उपलब्धि साक्ष्य से भी स्पष है िक श्रीमती िवद्या देवी ने वसीयत क े स्वािमत्व से ही संपित हािसल की जो िक दीवानी वाद संख्या-163/1987 मे िनणरय िदनांिकत 22.08.1989 (प्रदशर डी-४) से स्पष है। उक अिभयोग मे, यह स्पष रूप से अिभिनधिारिरत िकया गया है की श्रीमती िवद्या देवी ने संपित का स्वािमत्त्व वसीयत क े जिरये हािसल िकया था और इसी तरह संपित श्रीमती िवद्या देवी की स्वयं अिजरत संपित मानी जाएगी ।
14. जैसा की उपहार िवलेख को िनष्पािदत करने क े िलए ५,०००/- रूपए प्रितफल की प्रािप क े सम्बन्धि मे िववाद है, हमने ध्यानपूर्तवरक अिभलेख पर उपलब्धि उपहार िवलेख की प्रित का अवलोकन िकया है िजसे िरकॉर्डर मे रखा गया है। उपहार िवलेख क े अवलोकन से यह स्पष है की जो क ु छ दस्तावेज क े प्रथम पृष पर िलखा है वह स्टाम्प ड्यूर्तटी और पंजीकरण शुल्क क े उद्देश्य से संपित का मूर्तल्यांकन है जो र 5000/- है, लेिकन यह दाता द्विारा उपहार िवलेख िनष्पािदत करने क े िलए प्रितफल नहीं है। उपहार िवलेख को िवचारण न्यायालय और प्रथम अपीलीय न्यायालय द्विारा सही ढंग से व्याख्या की गयी है। लेिकन उसी को गलत ठहराते हुए, उच्च न्यायालय ने यह माना िक उपहार ५,०००/- रूपए प्रितफल रािश से समिथरत है । यह सही है िक अगर उपहार उपहार प्रितफल से समिथरत है तो वही टी पी अिधििनयम की धिारा 122 क े अंतगरत मान्य नहीं हो सकता है। लेिकन िसफ र दस्तावेज से ही यह स्पष है िक कोई भी प्रितफल पंजीक ृ त उपहार िवलेख क े अनुसार पािरत नहीं हुआ है । मूर्तल्यांकन क े प्रयोजन क े िलए प्रथम पृष मे र ५,०००/- का उल्लेख, दानकतार द्विारा उपहार िवलेख िनष्पािदत करने क े िलए प्रितफल प्रािप नहीं कहा जा सकता है।
15. दािखल ख़ािरज क े िनणरय (प्रदशर पी डब्ल्यूर्त-3/एफ) क े सन्दभर मे, माननीय उच्च न्यायालय ने अिभिनधिारिरत है िक (प्रदशर पी डब्ल्यूर्त-3/एफ) मे सिनिहत दािखल ख़ािरज क े िनणरय प्रदशर डी डब्लूर्त २/अ क े तहत अलगाव को व्यक करता है वही एक रंगीन लेनदेन या एक िदखावा लेनदेन िकया जा रहा है। दािखल ख़ािरज (प्रदशर पी डब्ल्यूर्त-3/एफ) मे, यह कहा गया है िक "िगफ्ट डीड पंजीक ृ त िकया गया है िजसका मूर्तल्यांकन र 5000/- है। म्यूर्तटेशन का क्रम िनम्नानुसार है: - “ श्रीमती िवद्या देवी द्विारा जगदीश चंद को िनष्पािदत उपहार िवलेख का दािखल ख़ािरज ितलक राज, नूर्तरपुर क े वकील द्विारा तस्दीक िकया गया िजसका मूर्तल्यांकन ५,०००/- रूपए है स्वािमत्व क े हस्तांतरण और कब्जे क े मूर्तल्यांकन क े िलए रिजस्टरी ने ५,०००/-रूपए दजर िकये इसिलए, रिजस्टरी सख्या १६२ िदनांिकत 23.04.1991 क े दािखल ख़ािरज क े सम्बन्धि मे भूर्तिम खसरा नं 235/710, नया खसरा नं 2132, 2133, क्षेत 0-06-1 मे से 0-02-85 हेक्टेयर मंजूर्तर है। ”उक दािखल ख़ािरज क े आदेश क े अवलोकन से यह देखा गया की दािखल ख़ािरज का िनणरय क े वल ५,०००/- रूपए क े रूप मे संपित क े मूर्तल्यांकन क े सन्दभर मे िकया गया है। यह इंिगत करने क े िलए क ु छ भी नहीं है िक दाता को प्रितफल क े रूप मे र 5000/- की उक रािश का भुगतान िकया गया है। दोनो उपहार िवलेख (प्रदशर डी डब्लूर्त २/अ) और साथ ही दािखल ख़ािरज क े आदेश क े वल संपित क े मूर्तल्य- िनधिाररण ५,०००/- रूपए क े रूप मे और क्रमशः शुल्क क े िलए और स्टाम्प भुगतान क े उद्देश्य से िकया गया। उच्च न्यायालयने यह व्यक करने मे भूर्तल की है िक जब प्रदशर डी.डब्लूर्त २/अ प्रदशर प डब्लूर्त ३/फ क े साथ पढ़ा जाता है तो प्रदशर डी डब्लूर्त २/अ क े अंतगरत स्पष रूप से वाद भूर्तिम क े अलगाव को जािहर करता है और दाता ग्रहीता से प्रितफल प्राप करता है.
16. हालाँिक, प्रत्यथी का यह तक र है िक ऐसा उपहार िवलेख श्रीमती िवद्या देवी ने अपनी इच्छा और सहमित क े आधिार पर िनष्पािदत नहीं िकया, इस बात का कोई सबूर्तत नहीं है जो इस आरोप को सािबत करे। इसक े अलावा, उपहार िवलेख क े िलए चुनौती क े अभाव मे, यह उपहार की वैधिता पर िकसी भी िनष्कषर को िरकॉर्डर करने क े िलए नहीं है। उच्च न्यायालय ने भी दािखल खािरज कायरवाही को मानने मे तुिट की, जो स्वयं पंजीक ृ त उपहार िवलेख पर आधिािरत है। इसक े अलावा, नागिरक प्रिक्रया संिहता की धिारा 100 क े तहत शिक क े प्रयोग मे िवचारण न्यायालय द्विारा दजर िनष्कषों की तुलना मे उच्च न्यायालय ने एक अलग िनष्कषर पर पहुँचने क े िलए अिभलेख पर उपलब्धि साक्ष्यो का पुनः मूर्तल्यांकन करने मे गलती की है । परीक्षण न्यायालय और प्रथम अपीलीय न्यायालय द्विारा दजर िनष्कषर पर साक्ष्य क े अनुसार है और इसक े अलावा उच्च न्यायालय ने उपहार क े दस्तावेज को गलत माना है, हम इस िवचार क े है िक उच्च न्यायालय का िनणरय अपास्त करने योग्य है ।
17. उपरोक कारणो क े िलए, हम इस अपील की अनुमित देते है और उच्च न्यायलय द्विारा िनयिमत दूर्तसरी अपील संख्या ३८३/२००७ मे पािरत आक्षेिपत िनणरय िदनांिकत २५. 0.१६ को अपास्त करते है। पिरणाम स्वरप,उप-न्यायाधिीश, प्रथम श्रेणी, जवाली, कनगरा, िहमाचल प्रदेश की पतावली पर दीवानी वाद संख्या आर बी टी १२५१/९५/९२ मे दािखल वाद को ख़ािरज िकया जाता है, िजसमे लागत का कोई आदेश नहीं है।........ न्यायमूर्तितर (आर भानुमित)........ न्यायमूर्तितर (आर सुभाष रेड्डी) नई िदल्ली: 27 फरवरी, 2019 खंडन (िडस्क्लेमर):- स्थानीय भाषा मे िनणरय अनुवाद का आशय, पक्षकारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तक ही सीिमत है और अन्य प्रयोजनाथर इसका उपयोग नहीं िकया जा सकता। समस्त व्यावहािरक एवं कायारलयीन प्रयोजनाथर, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रामािणक होगा एवं िनष्पादन तथा कायारन्वयन क े प्रयोजनाथर क्षेतधिािरता करेगा