Neeraj Dutta v. State (NCT of Delhi)

Supreme Court of India · 28 Feb 2019
R. Banumathi; R. Subhash Reddy
Criminal Appeal No 1669 of 2009
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld conviction under the Prevention of Corruption Act based on circumstantial evidence and legal presumptions despite absence of direct evidence due to complainant's death.

Full Text
Translation output
प्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायालय
दाण्डिक अपीलीय अधिकाररिा
दाण्डिक अपील संख्या – 1669/2009
श्रीमति नीरज दत्ता .............अपीलार्थी
बनाम
राज्य (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र ददल्ली) .................प्रत्यर्थी
आदेश
न्यायािीश आर. भानुमिी
JUDGMENT

1. यह अपील ददल्ली उच्च न्यायालय द्वारा तनर्णिि दाण्डिक अपील संख्या 15 एवं 4/2007 क े तनणिय ददनांक 02.04.2009 द्वारा उत्पन्न हुई है ण्जसमें उच्च न्यायालय ने प्रार्थी को भ्रष्ट्टाचार तनवारण अधधतनयम, 1988 की धारा 7 एवं धारा 13 (1)(D) सहपदिि 13(1) में अपराध की पुण्ष्ट्ट की है एवं उसे कारावास का दंि ददया है |

2. शिकायिकिाि-राजीव शसंह सेिी को अपीलार्थी ने जो ददल्ली ववद्युि बोिि में LDC क े िौर पर कायािर्थी र्था ने 17.04.2000 को 7:30 पूवािहन पर फ़ोन ककया एवं शिकायिकिाि प्रार्थी से शमला, उसने मीटर लगाने क े शलए 15,000/- रुपये ररिवि की मांग की जो सौदेबाजी क े बाद रुपये 10,000/- कर दी गई | प्रार्थी उसी ददन समय 03:00 PM एवं 04:00 PM क े बीच शिकायिकिाि की दुकान पर पैसे लेने को राज़ी हो गई | जैसा कक, शिकायिकिाि ररश्वि देना नहीं चाहिा र्था उसने एक शिकायि (Ex. PW5/A) ACB को कर दी ण्जसक े आधार पर FIR दजि की गई | इंस्पेक्टर ओ. िी. यादव (PW-6) ने छापे से पहले की िैयारी की | एस. क े. अवस्र्थी (PW-5) शिकायिकत्ताि क े सार्थ रहे एवं शिकायिकत्ताि ने रुपये 10,000/- अपीलार्थी को ददए एवं उसने वह राशि दूसरे अशियुक्ि योगेि क ु मार / चालक को ददए | PW-5/shadow witness, क े इिारा शमलने क े पर PW-6-Inspector रेडिंग पाटी क े संग पहुुँचे एवं रुपये 10,000/- दूसरे अशियुक्ि योगेि क ु मार से बरामद ककये | प्रार्थी एवं अशियुक्ि संख्या 2 योगेि क ु मार दोनों क े हार्थों को जब सोडियम बाइकाबोनेट सोलुिन में िाला गया िो वे गुलाबी रंग क े हो गए र्थे | चाजििीट प्रार्थी एवं मुण्ल्ज़म योगेि क ु मार क े ववरुद्ध भ्रष्ट्टाचार तनवारण अधधतनयम, 1988 की धारा 7 एवं 13(2) क े अंिगिि दार्िल की गई (संक्षक्षप्ि में: “The P.C. Act”) |

3. चूंकक प्रार्थी की ववचारण प्रारंि होने से पूवि मृत्यु हो गई, उसका साक्ष्य नहीं हो सका, PW-5/नाम मात्र का गवाह, का साक्ष्य ककया गया ण्जसमें अशियोजन क े बाद का पक्ष शलया | PW-5 क े साक्ष्य िर्था अपीलकिाि से पैसों की वसूली क े आधार पर ववचारण न्यायालय ने अशितनधािररि ककया कक गैर कानूनी पररिोषण की मांग एवं स्वीकृ ति अशियोजन द्वारा शसद्ध कर दी गयी है एवं अपीलकिाि – अशियुक्ि संख्या 1 को भ्रष्ट्टाचार तनवारण अधधतनयम की धारा 7 िर्था धरा 13-(1) (घ) सहपदिि धारा 13(2) दोषशसद्ध ककया िर्था उसको दो वषि िर्था िीन वषि क े कारावास की सजा दी िर्था जुमािना िी लगाया | ववचारण क े न्यायालय ने अशियुक्ि संख्या 2 को िी भ्रष्ट्टाचार तनवारण अधधतनयम की धारा 12 क े अंिगिि दुष्ट्प्रेरण क े शलए दोषशसद्ध ककया | अपील में उच्च न्यायालय ने अपीलार्थी की दोषशसद्धध को एवं उस पर कारावास की अधधरोवपि सज़ा को सही िहराया। उच्च न्यायालय ने दूसरे अशियुक्ि को उस पर लगे आरोपों से मुक्ि ककया और ये माना की षड्यंत्र अर्थवा दुष्ट्प्रेरणा को शसद्ध करने का कोई साक्ष्य नहीं है। उससे व्यधर्थि होकर अपीलार्थी ने यह अपील दायर ककया है।

4. अपीलार्थी क े शलए पेि हो रहे फाज़ज़ल वररष्ट्ि अधधवक्िा श्री एस. गुरुकृ ष्ट्णा क ु मार एवं प्रत्यर्थी-राज्य हेिु पेि हो रहे फाज़ज़ल वररष्ट्ि अधधवक्िा श्रीमति ककरण सूरी को हमने सुना।

5. अपीलार्थी का ये प्रतिरोध है कक, अवैध पररिोषण की मांग क े प्रमाण की अनुपण्स्र्थति में अशियुक्ि द्वारा मुद्रा की प्राण्प्ि का प्रमाण ही क े वल अशियुक्ि क े दोष को शसद्ध करने हेिु प्रयाप्ि नहीं है। यह प्रतिरोध ककया गया कक, जब शिकायि किाि का देहांि हो गया िो मांग का प्रार्थशमक साक्ष्य नहीं ददया जा सकिा एवं जब अशियोग ऐसे प्रार्थशमक साक्ष्य द्वारा मांग को स्र्थावपि नहीं कर सकिा िो अपीलार्थी की दोषशसद्धध बरकरार नहीं रह सकिी।

6. अपने प्रतिरोध क े समर्थिन में, अपीलार्थी क े फाण्ज़ल वररष्ट्ि अधधवक्िा ने पी. सत्यानारायणा मूतिि बनाम पुललस ण्िला तनरीक्षक आंध्रा प्रदेश एवं अन्य (2015-10-SCC-152) पर िरोसा ककया है उक्ि मुक़द्दमे में, शिकायिकत्ताि का ज़िचारण से पूवि देहांि हो गया एवं इस प्रकार अशियोग द्वारा परीक्षण नहीं हो सका। अशि. सा.-1 क े रूप मे पंच साक्षी का परीक्षण ककया गया जो अशियोग क े मुकदमे का मुख्य आधार र्था। यह दटप्पणी करिे हुए कक, शिकायिकत्ताि क े देहांि क े पश्चाि मांग का प्रार्थशमक साक्ष्य आगामी नहीं और मांग का अनुमातनक निीजा तनकालना ववधधनुसार अनुज्ञेय है, इस नयायालय ने पैरा (24) और (25) में तनम्न को माना:- “24. अशि. सा.-1 एस. उदय िासकर क े मुक़द्दमा क े िथ्यों एवं पररण्स्र्थतियों में अशियोग क े मुक़द्दमे का मुख्य आधार साक्ष्य है। यद्यवप राज्य क े फाज़ज़ल अधधवक्िा द्वारा प्रफ ु ण्ल्लि प्रयास ककया गया है कक अशि. सा.-1 एस. उदय िास्कर क े इस ब्यान को जाल दल द्वारा अपीलार्थी क े कब्जे से इस राशि की बरामदगी, जाल संकिया में प्रयोग ककए गए मुद्रा नोटों की पहचान और अपीलार्थी पर सोडियम काबोनेट घोल क े रासायतनक प्रतिकिया को सण्म्मशलि करिे हुए उपण्स्र्थि िथ्यों एवं पररण्स्र्थतियों से जोड़ा जाए, हम इस तनष्ट्कषि को मानने क े शलए िैयार नहीं हैं कक इस मुक़द्दमे में अशियोग मांग क े िथ्य को उधचि संदेह से परे शसद्ध करने में सफल रहा है। यद्यवप अशि. सा.-1 एस. उदय िासकर क े साक्ष्य को प्रत्यक्ष रूप से मान शलया जाए कफर िी यह अवैध पररिोषण की मांग क े प्रमाण की गुणवत्ता और ज़िज़ितता पर पूरा नहीं उिरिा ण्जसका आदेि ववधध द्वारा ददया गया है जो कक, अधधतनयम की धारा 7 और धारा 13(1)(d)(i) और (ii) क े अंिगिि ककसी अपराध क े शसद्ध होने क े संदिि में ददया गया है। यह सत्य है कक, शिकायिकत्ताि क े पश्चाि मांग का प्रार्थशमक साक्ष्य, यदद कोई हो, आगामी नहीं है। अशियोग क े अनुसार, वास्िव में ददनांक 03.10.1996 को अपीलार्थी द्वारा शिकायिकत्ताि से मांग की गई र्थी और उसी की शिकायि पर अगली तिधर्थ अर्थािि 04.10.1996 को जाल बबछाई गई र्थी। िर्थावप, अशि. सा.-1 एस. उदय िास्कर की गवाही अपीलार्थी द्वारा शिकायिकत्ताि से अशिकधर्थि रूप में की गई मांग को पुन: प्रस्िुि नहीं करिी ण्जसको ऐसा माना जाए जो अधधतनयम की धारा 7 अर्थवा धारा 13(1)(िी)(i) और (ii) क े अंिगिि अपराध क े िौर पर ववधध अनुसार ववचार ककया गया है कक, युण्क्ियुक्ि संदेह से परे अपीलार्थी द्वारा काररि ककया जाना शसद्ध हो गया हो।

25. हमारे आकलन क े अनुसार, अशिक े ि पर रिे साक्ष्य क े आधार पर यह मानना कक धारा 7 और धारा 13(1)(िी)(i) और (ii) में अपीलार्थी की संशलप्ििा शसद्ध हो गई है, एक अिुमाज़िक ितीजा होगा जो ववधध में मान्य नहीं है। उल्लेिनीय है कक, उच्च न्यायालय ने अधधतनयम की धारा 7 क े अंिगिि अपराध से अपीलार्थी को मुक्ि कर ददया र्था और राज्य ने उस फ ै सले को स्वीकार कर शलया र्था और उसक े ववरुद्ध कोई अपील दायर नहीं ककया है। अधधतनयम की धारा 7 और धारा 13(1)(िी)(i) और (ii) क े ववषय में उपरोक्ि में ककया गया ववश्लेषण अवैध पररतोषण क े मांग क े प्रमाण की अतनवायििा ददिाने क े शलए र्था। सत्यानारायणा में, न्यायालय यह मानकर चला कक शिकायिकत्ताि क े देहांि क े कारण अवैध पररिोषण की मांग को शसद्ध करने में अशियोग की ववफलिा अशियोग क े मुक़द्दमे क े शलए घािक होगी और अशियुक्ि से बरामद की गई राशि उसकी दोषशसद्दद नहीं करा पाएगी।

7. श्रीमति सूरी, राज्य क े फाज़ज़ल वररष्ट्ि अधधवक्िा ने तनवेदन ककया कक, सत्यानारायणा में न्यायालय ने तनणियों की िृंिला एवं ववशिन्न फ ै सलों में इस नयायालय द्वारा शलए गए तनरंिर ववचार पर ध्यान नहीं ददया कक, मांग प्रत्यक्ष्य साक्ष्य अर्थवा पंच गवाह एवं पररण्स्र्थतियों जैसे अन्य साक्ष्य से अिुमाज़िक ितीजा द्वारा िी शसद्ध की जा सकिी है।

8. फाण्ज़ल वररष्ट्ि अधधवक्िा ने हमारा ध्यान बहुि सारे तनणियों की ओर आकवषिि ककया है ण्जनमें अशियुक्ि को उस अवस्र्था में िी दोषशसद्ध ककया गया जब शिकायिकत्ताि का साक्ष्य उपलब्ध नहीं र्था चाहे शिकायिकत्ताि क े चलिे अर्थवा चाहें शिकायिकत्ताि क े पक्षज़िरोधी हो जाने क े कारण। ककिन चंद मंगल बनाम राजस्र्थान राज्य (1982) 3 SCC 466, ववचारण क े समय, शिकायिकत्ताि राजेंद्रा दत्त का देहांि हो गया और उसका परीक्षण नहीं हो सका। न्यायालय ने दो अन्य गवाहों राम बाबू (अशि.सा.-1) और क े िर मल (अशि.सा.-2), उप.एस. महावीर प्रसाद (अशि.सा.-7) क े साक्ष्य और अशियुक्ि से राशि की बरामदगी क े िथ्य पर िरोसा ककया और अशियुक्ि को उसक े आधार पर दोषशसद्ध कर ददया। अवपलार्थी/अशियुक्ि की दोषशसद्धध को सही िहरािे हुए इस न्यायालय ने माना कक, “.....िुली पररण्स्र्थतियाुँ जो यह इंधगि करिी हैं कक, मांग अवश्य रूप से की गई होगी......और यह कहना उधचि नहीं कक, ददनांक 20 नवम्बर, 1974 को घूस की मांग का कोई साक्ष्य नहीं”।

9. हज़ारी लाल बनाम राज्य (ददल्ली प्रशासन) (1980) 2 SCC 390, शिकायिकत्ताि पक्षववरोधी घोवषि कर ददया गया र्था और अन्य साक्ष्य क े वल तनरीक्षक (अशि.सा.-8) का र्था ण्जन्हें शिकायिकत्ताि ने अपना बयान उस समय ददया र्था जब वह अपनी शिकायि दजि कराने गया र्था और दूसरा गवाह ण्जसने अशियोग क े मुक़द्दमे को क े वल क ु छ ववशिण्ष्ट्टयों में समर्थिन ककया र्था। जाल बबछाने वाले तनरीक्षक िर्था पंच गवाह क े साक्ष्य क े आधार पर और यह देि कर कक यह आवश्यक नहीं है कक धन का ददया जाना प्रत्यक्ष साक्ष्य द्वारा शसद्ध होना चादहए, हजारी लाल क े पैरा (10) में उच्चिम न्यायालय ने तनम्नशलर्िि अशितनधािररि ककया:- "10....... यह आवश्यक नहीं है कक धन का ददया जाना प्रत्यक्ष साक्ष्य द्वारा शसद्ध ककया जाए । यह पररण्स्र्थतिजन्य साक्ष्य से िी साबबि ककया जा सकिा है । वििमान मामले में जल्दी से घदटि घटनाओं से क े वल यह तनष्ट्कषि तनकलिा है कक अशियुक्ि द्वारा पीिब्ल्यू-3 से धन प्राप्ि ककया गया र्था । साक्ष्य अधधतनयम की धारा 114 क े िहि न्यायालय ऐसे ककसी िथ्य का अण्स्ित्व उपधाररि कर सक े गा ण्जसका घदटि होना उस ववशिष्ट्ट मामले क े िथ्यों क े सम्बन्ध में प्राकृ तिक घटनाओं, मानवीय आचरण िर्था लोक और प्राइवेट कारोबार क े सामान्य अनुिम को ध्यान में रििे हुए वह संिाव्य समझिा है। साक्ष्य अधधतनयम की धारा 114 में ददए गए उदाहरणों में से एक यह है कक न्यायालय यह मान सकिा है कक चुराए हुए माल पर ण्जस मनुष्ट्य का चोरी क े िीघ्र उपरान्ि कब्जा है, जब िक कक वह अपने कब्जे का कारण न बिा सक े, या िो वह चोर है या उसने माल को चुराया हुआ जानिे हुए प्राप्ि ककया है। इसी प्रकार, वििमान मामले क े िथ्यों और पररण्स्र्थतियों में न्यायालय की यह उपधारणा है कक अशियुक्ि ण्जसने अपनी जेब से पैसे बाहर तनकाले और उन्हें दीवार क े पार फ ें का, उसने यह पैसे पीिब्ल्यू 3 से प्राप्ि ककये र्थे, ण्जसक े पास क ु छ शमनट पहले ही उन नोटों का कब्ज़ा ददिाया गया र्था| एक बार जब हम इस तनष्ट्कषि पर पहुुँचिे हैं कक अशियुक्ि ने पीिब्ल्यू-3 से पैसे शलए र्थे, भ्रष्ट्टाचार तनरोधक अधधतनयम की धारा 4 (1) क े अंिगिि उपधारणा पर िुरंि ध्यान जािा है | यह उपधारणा तनण्श्चि रूप से िंिन योग्य है लेककन वििमान मामले में इस उपधारणा का िंिन करने का कोई आधार नहीं है । इसशलए अशियुक्ि को तनचली अदालिों ने सही दोषशसद्ध िहराया । [रेखांकन िोडा] ।

10. एम. नरशसंगा राव बनाम आंध्र प्रदेि (2001) 1 SCC 691, में दोनों शिकायिकिाि-पीिब्लू-1 और पीिब्लू-2-पंच गवाह मुकर गए | अपीलकिाि/अशियुक्ि ने प्रतिवाद ककया कक अधधतनयम की धारा 20 क े अंिगिि यह उपधारणा ििी बनाई जा सकिी है जब अशियोजन पक्ष प्रत्यक्ष साक्ष्य प्रस्िुि कर मांग को शसद्ध करने में सफल हो कक दोषी लोक सेवक ने पररिोषण स्वीकार या प्राप्ि ककया है और यह अधधतनयम की धारा 20 में पररकण्ल्पि ववधधक उपधारणा क े शलए आधार बनने हेिु एक अनुमान पर तनििर नहीं कर सकिा। उक्ि कर्थन को अस्वीकार करिे हुए और अधधतनयम की धारा 20 (1) में प्रयुक्ि अशिव्यण्क्ि “अनुमान लगाएगा” क े अशिप्राय पर ववचार करिे हुए तनम्नशलर्िि अशितनधािररि ककया गया:- “14. जब उप-धारा ववधधक उपधारणा से सम्बद्ध हो िो उसे in terrorem क े रूप में समझना होगा अर्थािि एक आदेि क े स्वर में यह मानना होगा कक अशियुक्ि ने ककसी सरकारी कायि आदद को करने या न करने क े शलए एक उद्देश्य या प्रतिफल क े रूप में पररिोषण स्वीकार ककया आदद, यदद धारा क े पूवि िाग में पररकण्ल्पि ििि संिुष्ट्ट हो । धारा 20 क े अंिगिि ऐसी ववधधक पररकल्पना को ग्रहण करने की एकमात्र ििि यह है कक ववचारण क े दौरान यह शसद्ध ककया जाना चादहए कक अशियुक्ि ने कोई पररिोषण स्वीकार कर शलया है या स्वीकार करने क े शलए सहमि हो गया है। धारा में यह नहीं कहा गया है कक उक्ि ििि को प्रत्यक्ष साक्ष्य क े माध्यम से संिुष्ट्ट ककया जाना चादहए । इसकी एकमात्र आवश्यकिा यह है कक यह शसद्ध ककया जाना चादहए कक अशियुक्ि ने पररिोषण स्वीकार कर शलया है या स्वीकार करने क े शलए सहमि हो गया है । प्रत्यक्ष साक्ष्य उन ववधधयों में से एक है ण्जनक े माध्यम से िथ्य शसद्ध ककया जा सकिा है । लेककन साक्ष्य अधधतनयम में यह एकमात्र िरीका पररकण्ल्पि नहीं है ।

17. उपधारणा अन्य शसद्ध िथ्यों से तनकले ककसी िथ्य का अनुमान है। ककसी दूसरे िथ्य से ककसी िथ्य क े अण्तित्व का अनुमान लगािे समय न्यायालय क े वल बुद्धिमान िक ि की प्रकिया का प्रयोग कर रहा है िो एक वववेकपूणि आदमी का मन समान पररण्तितियों करेगा। उपधारणा अन्य िथ्यों से तनकाला जाने वाले अंतिम तनष्ट्कषि नहीं है। लेककन यह तनणाियक िी हो सकिी है यदद यह बाद में अबाधधि रहिी है। साक्ष्य क े कानून में उपधारणा सबूि क े िार को बदलने की अवस्र्था को दिािने वाला एक तनयम है। ककसी तनण्श्चि िथ्य या िथ्यों से न्यायालय तनष्ट्कषि तनकाल सकिा है और वह िब िक बना रहेगा जब िक कक यह तनष्ट्कषि या िो अस्वीकृ ि या ख़ाररज नहीं हो जािा।.............

19. साक्ष्य अधधतनयम की धारा 114 क े दृष्ट्टांि (क) में कहा गया है कक न्यायालय यह मान सकिा है कक "चुराए हुए माल पर ण्जस मनुष्ट्य का चोरी क े िीघ्र उपरान्ि कब्ज़ा है, जब िक कक वह अपने कब्जे का कारण न बिा सक े, या िो वह चोर है या उसने माल को चुराया हुआ जानिे हुए प्राप्ि ककया है|” इस दृष्ट्टांि का वििमान संदिि में िी सफलिा से उपयोग ककया जा सकिा है जब अशियोजन पक्ष ववश्वसनीय सामधग्रयां लाया हो कक जब अपीलकिाि की िलािी भ्रष्ट्टाचार तनरोधक ब्यूरो क े पीिब्लू-7 िीएसपी द्वारा की गई िो उसकी जेब में कफनोल्फर्थैलीन लगे 500 रुपये क े करेंसी नोट र्थे। इसक े द्वारा अपने आप से यह अनुमान नहीं लगाया जा सकिा कक उसने ककसी अन्य व्यण्क्ि से उस राशि को स्वीकार ककया क्योंकक ककसी अन्य व्यण्क्ि द्वारा उन करेंसी नोटों को उसकी जेब में िरने अर्थवा चोरी-तछपे उसमें िालने की संिावना है। लेककन अन्य पररण्स्र्थतियां जो दागी मुद्रा नोटों की िोज करने से पहले िर्था बाद में इस मामले में शसद्ध हुई हैं और, न्यायालय को िथ्यात्मक अनुमान लगाने में सहायिा प्रदान करने में संगि और उपयोगी है कक अपीलकिाि ने स्वेच्छा से करेंसी नोट प्राप्ि ककए। [रेखांकन िोडा]।

11. मांग का प्रत्यक्ष या प्रार्थशमक प्रमाण कम से िीन उदाहरणों में उपलब्ध नहीं हो सकिा:-(i) जब शिकायिकिाि मृि है और उसकी गवाही नहीं की जा सकी; (ii) शिकायिकिाि मुकर गया; और (iii) शिकायिकिाि की अनुपलब्धिा या अन्य कारणों की वजह से गवाही नहीं की जा सकी। ऊपर ददए गए उदाहरणों में मांग का प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं है परंिु पञ्च गवाहों क े साक्ष्यों से फ े नोल्फीर्थलीन परीक्षण क े द्वारा पैसों की स्वीकायििा शसद्ध हो गई र्थी एवं अधधतनयम की धारा 20 क े अंिगिि उपधारणा को प्रस्िुि कर मांग शसद्ध करने क े शलए अनुमान लगाना स्वीकायि है|

12. प्रत्यर्थी की ओर से यह तनवेदन ककया गया कक भ्रष्ट्टाचार तनवारण अधधतनयम की धारा 20 क े अंिगिि न्यायालय इसमें वर्णिि उपधारणा को ग्रहण करने क े शलए बाध्य है एवं प्रश्नगि उपधारणा मान्य होगी जब िक कक अशियुक्ि इसक े ववपरीि न शसद्ध कर दे| यह दृढ़िापूविक कहा गया कक अधधतनयम की धारा 20 क े अंिगिि उपधारणा का उद्देश्य अशियोजन पक्ष को ककसी िथ्य को शसद्ध करने क े बोझ से मुक्ि करना है एवं ऐसे में मांग शसद्ध करने क े शलए प्रार्थशमक साक्ष्यों पर ज़ोर देना सवोच्च न्यायालय द्वारा तनणियों में दी गई राय क े अनुरूप नहीं है|

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13. प्रत्यर्थी की ओर से ववद्वान ् वररष्ट्ि अधधवक्िा ने यह तनवेदन ककया कक न्यायालय को अशिलेि पर लाये गए िथ्यों एवं पररण्स्र्थतियों पर अवश्य ववचार करना चादहए एवं तनष्ट्कषि पर पहुंचने हेिु यह अनुमान लगाना चादहए कक क्या अवैध पररिोषण की मांग और स्वीकृ ति शसद्ध हुई या नहीं | मांग को शसद्ध करने क े शलए प्रत्यक्ष प्रमाण अर्थवा प्रार्थशमक साक्ष्य का आग्रह इस न्यायालय द्वारा कई तनणियों में दी गई राय क े अनुरूप नहीं है| ववद्वान ् वररष्ट्ि अधधवक्िा ने अपने िक ि की पुण्ष्ट्ट हेिु हमारा ध्यान अन्य मामलों की िरफ ददलाया कक सत्यनारायण ने सवोच्च न्यायालय क े ण्स्र्थर ववचार को ध्यान में नहीं शलया र्था| हम आगे ककसी िी वववाद में नहीं पड़ रहे हैं| हमारी राय है कक तनम्नशलर्िि मुद्दे पर बड़ी न्यायपीि द्वारा ववचार ककया जाना अपेक्षक्षि है:- “प्रश्न कक क्या शिकायिकिाि क े साक्ष्य क े अिाव में/ अवैध पररिोषण की मांग क े प्रत्यक्ष या प्रार्थशमक साक्ष्य क े अिाव में भ्रष्ट्टाचार तनवारण अधधतनयम 1988 की धारा 7 िर्था धारा 13(1) (घ) सह पदिि धारा 13 (2) क े अंिगिि ककसी लोक सेवक की अशियोज्यिा/जुमि का अनुमान अशियोजन द्वारा अन्य साक्ष्य क े आधार पर अनुज्ञेय नहीं है”

15. इस न्यायालय द्वारा शिन्न तनणियों में शलए गए ण्स्र्थर ववचार को ध्यान में रििे हुए, P. Satyanarayana Murthy V. District Inspector of Police, State of Andhra Pradesh and another में इस न्यायालय द्वारा अशिशलर्िि अवलोकन एवं तनष्ट्कषों क े सम्बन्ध में हमें क ु छ संकोच है | इस मामले को समुधचि आदेि क े शलए माननीय मुख्य न्यायाधीि क े समक्ष प्रस्िुि ककया जाए|.....................न्यायाधीि [आर. िानुमति]....................न्यायाधीि [आर. सुिाष रेड्िी] नई ददल्ली 28 फरवरी, 2019 अतवीकरण: देिी िाषा में तनणिय का अनुवाद मुकद्द्मेबाज़ क े सीशमि प्रयोग हेिु ककया गया है िाकक वो अपनी िाषा में इसे समझ सक ें एवं यह ककसी अन्य प्रयोजन हेिु प्रयोग नहीं ककया जाएगा| समस्ि कायािलयी एवं व्यावहाररक प्रयोजनों हेिु तनणिय का अंग्रेज़ी स्वरूप ही अशिप्रमार्णि माना जाएगा और कायािन्वयन िर्था लागू ककए जाने हेिु उसे ही वरीयिा दी जाएगी |