Satish Sharma v. State (RAK Delhi)

Supreme Court of India · 08 Feb 2019
Abhay Manohar Sapre; Dinesh Maheshwari
Criminal Appeal No 234 of 2019 @ SLP (Crl) No 10791 of 2015
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the High Court's quashing of criminal proceedings under Section 482 CrPC based on a bona fide settlement between all injured parties, preventing abuse of process and futile litigation.

Full Text
Translation output
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
दाांडिक अपीलीय अधिकाररता
द ांडिक अपील सां. 234/2019
(एस.एल.पी (क्रिमिनल) सां. 10791/2015 से उत्पन्न)
सतीश शर्ाा र्व अन्य अपीलार्थी
बनार्
राज्य (रा.रा.क्षे. ददल्ली) र्व अन्य प्रत्यर्थी
ददनेश िहेश्वरी, न्य य धीश
इजाजत दी जाती है |
JUDGMENT

2. इसर्ें अपीलार्थीयों, प्रश्नगत घटना र्ें तर्थाकधर्थत घायल व्यक्तत, जो घटना 05.12.2010 को सी-17, र्वेस्ट एर्वेन्यू, तलब रोि, पांजाबी बाग (र्वेस्ट), नई ददल्ली र्ें हुई र्थी, तर्था भारतीय दांि सांदहता की िारा 323, 324, 506 एर्वां 34 क े अांतगात अपराि हेतु पांजाबी बाग पुललस र्थाने र्ें 2010 र्ें रक्जस्टिा एफआईआर सां. 382 की वर्वषय-र्वस्तु बनी र्थी, ने क्रिलर्नल एर्.सी. सां. 3673/2013 तर्था क्रिलर्नल एर्.ए. सां. 13346/2013 क े आदेश ददनाांक 06.08.2015 पर प्रश्न क्रकया है, क्जसक े द्र्वारा ददल्ली उच्च न्यायालय ने दांि प्रक्रिया सांदहता की िारा 482 क े अांतगात याधचका को र्ांजूर करते हुए उतत एफआईआर क े अांतगात कायार्वाही को यह सांतुष्ट होने पर क्रक वर्वर्वाद र्वास्तर्व र्ें र्कान र्ाललक तर्था क्रकरायेदार क े बीच र्था क्जसका फ ै सला पक्षकारों द्र्वारा ननष्पाददत सर्झौता वर्वलेख क े ननबांिनों क े अनुसार क्रकया जा चुका र्था अलभखांडित क्रकया है|

3. अपीलाधर्थायों की ओर से यह ननर्वेदन क्रकया गया है क्रक उच्च न्यायालय ने उपरोतत एफआईआर क े अांतगात कायार्वाही को क े र्वल एक घायल व्यक्तत क े ब्यान क े आिार पर अलभखांडित करने र्ें गलती की है जबक्रक र्वारदात र्ें तीन घायल व्यक्तत र्थे क्जनर्ें से दो अपीलार्थी हैं क्जन्हें उच्च न्यायालय क े सर्क्ष पक्षकार नहीां बनाया गया तर्था र्ार्ले र्ें सुना नहीां गया|

4. अपीलाधर्थायों की ओर से प्रस्तुत क्रकए गए तक ा का प्रत्यर्थी सां. 2 तर्था 3 द्र्वारा, जो अलभयुतत व्यक्तत र्थे तर्था उच्च न्यायालय क े सर्क्ष याधचकाकताा र्थे, खांिन क्रकया गया है| यह कहा गया है क्रक उपरोतत एफआईआर र्ें जाांच क े दौरान पक्षकारों क े र्ध्य यर्थार्वत हस्ताक्षररत सर्झौता वर्वलेख ददनाांक 30.05.2011, जो क्रक एक ओर सूचक-सुश्री ज्योनत शर्ाा (इसर्ें प्रत्यर्थी सां. 4) तर्था अपीलार्थी- श्री सतीश शर्ाा एर्वां श्री दीपक भरद्र्वाज तर्था दूसरी ओर प्रत्यर्थी सां. 2 एर्वां 3 क े सार्थ सार्थ श्री र्नीष तलरेजा एर्वां श्री अशोक क ु र्ार द्र्वारा ननष्पाददत क्रकया गया र्था| यह भी दार्वा क्रकया गया है क्रक र्वास्तर्व र्ें वर्वलेख अपीलार्थी सां. 2 श्री दीपक भरद्र्वाज, कधर्थत घायल व्यक्ततयों र्ें से एक, द्र्वारा तैयार क्रकया गया र्था तर्था लशकायतकतााओां ने वर्वरोि करने र्वाले प्रनतर्वाददयों, उतत एफआईआर र्ें अलभयुतत, से 25 लाख रूपये की रालश प्राप्त की र्थी| यह भी ननर्वेदन क्रकया गया है क्रक र्वास्तर्व र्ें अपीलार्थी सां. 2- श्री दीपक भरद्र्वाज आदेश ददनाांक 06.08.2015 पाररत करते सर्य उच्च न्यायालय क े सर्क्ष उपक्स्र्थत र्थे तर्था उनकी उपक्स्र्थनत उच्च न्यायालय क े सर्क्ष प्रत्यर्थी सां. 2 की ओर से अधिर्वतता क े रूप र्ें स्पष्ट तौर पर दजा की गई है (जो यहााँ प्रत्यर्थी सां. 4 है)| यह प्रनतर्वाद क्रकया गया है क्रक पक्षकारों ने होशो-हर्वास र्ें सर्झौता क्रकया र्था तर्था प्रस्तुत अपील क े र्वल इस बेबुननयाद एर्वां सारहीन आिार पर क्रक सभी घायल व्यक्ततयों को उच्च न्यायालय र्ें सुना नहीां गया र्था, र्ार्ला पुनः खोलने का एक प्रयास है|

5. पक्षकारों की ओर से वर्वद्र्वान अधिर्वतताओां को सुनने क े पश्चात तर्था अलभलेख पर उपलब्ि तथ्यों को देखने क े पश्चात हर् इस र्ार्ले र्ें जरा सा भी हस्तक्षेप करने का कोई कारण नहीां सर्झते|

6. ररकॉिा क े अध्ययन से यह स्पष्ट है क्रक ददनाांक 05.12.2010 को हुई घटना क े सम्बन्ि र्ें उतत एफआईआर दजा करने की ललखखत सूचना प्रत्यर्थी सां. 4 सुश्री ज्योनत शर्ाा द्र्वारा ददनाांक 24.12.2010 को दी गई र्थी| प्रत्यर्थी सां. 4 ने ललखखत सूचना र्ें, अन्य बातों क े सार्थ, कहा क्रक प्रत्यर्थी सां. 3 श्री सुशील र्ल्होत्रा, प्रत्यर्थी सां. 2 सुश्री सुनीता र्ल्होत्रा, प्रत्यर्थी सां. 3 का पुत्र, अन्य व्यक्तत श्री अशोक क ु र्ार तर्था 5-6 गुांिे जैसे व्यक्तत, क्जनक े हार्थों र्ें हधर्थयार र्थे, सी-17, न्यू र्वेस्ट एर्वेन्यू, तलब रोि, पांजाबी बाग (पक्श्चर्), नई ददल्ली क्स्र्थत उनक े घर आए; यह क्रक प्रत्यर्थी सां. 3 ने सूचक को र्थप्पड़ र्ारा तर्था उसक े बेटे ने सूचक का गला दबाया क्जस पर सूचक का भाई (अपीलार्थी सां. 1) बचार्व क े ललए आया परन्तु प्रत्यर्थी सां. 2 का पुत्र तर्था उतत श्री अशोक क ु र्ार ने सूचक क े भाई (अपीलार्थी सां. 1) को जर्ीन पर धगरा ददया तर्था उन पर लातों से र्वार क्रकया; यह क्रक उसी सर्य श्री दीपक भारद्र्वाज (अपीलार्थी सां. 2), सूचक का भतीजा, भी उनक े बचार्व र्ें आया परन्तु प्रत्यर्थी सां. 3 क े पुत्र ने उस पर र्वेिक (बोरर) से र्वार क्रकया जो उसक े बाांये पैर र्ें घुसा; एर्वां यह क्रक अन्य व्यक्ततयों ने भी अपीलार्थी सां. 2 को घेर ललया एर्वां उस पर र्वार क्रकया तर्था उसकी सोने की चेन छीन ली| यह भी कहा गया क्रक प्रत्यर्थी सां. 2 ने सूचक क े बाल खीांचे एर्वां गन्दी गललयााँ दीां|

7. ऐसा प्रतीत होता है क्रक इस र्ार्ले की जाांच बहुत सर्य तक लांबबत रही परन्तु, आखखर र्ें, पक्षकार एक सार्थ बैठे तर्था सर्झौता वर्वलेख ददनाांक 30.05.2011 तैयार क्रकया | उतत सर्झौता वर्वलेख की अांतर्वास्तु र्ार्ले की पृष्ठभूलर् को बताती है क्रक वर्वर्वाददत सम्पवि सी-17, न्यू र्वेस्ट एर्वेन्यू, तलब रोि, पांजाबी बाग (पक्श्चर्), नई ददल्ली का ग्राउांि फ्लोर प्रत्यर्थी सां. 2 सुश्री सुनीता र्ल्होत्रा द्र्वारा खरीदा गया र्था जबक्रक इसकी पहली तर्था दूसरी र्ांक्जल उनकी बेटी सुश्री आलशता तलरेजा, पत्नी श्री र्नीष तलरेजा द्र्वारा खरीदी गई र्थीां; तर्था सूचक क े पनत पहली र्ांक्जल क े वपछले भाग पर क े र्वल क्रकरायेदार की हैलसयत से काबबज रहे| उतत वर्वलेख से यह भी पता चलता है क्रक ददनाांक 05.12.2010 को, वर्वर्वाददत सांपवि क े ग्राउांि फ्लोर पर नर्वीकरण काया क े दौरान, एक ओर सूचक (प्रत्यर्थी सां. 4) क े पररर्वारों तर्था दूसरी ओर प्रत्यर्थी सां. 2 क े बीच गरर्ा गर्ी हुई र्थी; तर्था इस घटना क े कारण प्रत्यर्थी सां. 4 द्र्वारा एफआईआर तर्था प्रत्यर्थी सां. 3 द्र्वारा जर्वाबी लशकायत दजा की गई जो की दांिाधिकारी क े सर्क्ष लांबबत र्थी| र्ार्ले की पृष्ठभूलर् ररकॉिा करने क े पश्चात पक्षकारों ने सर्झौता वर्वलेख र्ें स्पष्ट रूप से इस प्रकार कहा: “2. यह क्रक दोनों पक्षकारों क े सह लर्त्रों क े बीच बचार्व से पक्षकारों क े र्ध्य वर्वर्वाद र्ैत्रीपूणा ढांग से सुलझा ललया गया है| दोनों पक्षकार उतत एफआईआर सां. 382/2010 र्थाना पांजाबी बाग क े सार्थ सार्थ श्री. लर्वलीन, दांिाधिकारी, तीस हजारी कोटा क े सर्क्ष लांबबत लशकायत र्वाद शीषाक सुशील र्ल्होत्रा बनार् भरत शर्ाा एर्वां अन्य र्ें सर्झौता करने तर्था इस सम्बन्ि र्ें अजी देने क े ललए तैयार हैं|

3. यह क्रक दोनों पक्षकार यह सर्झौता वर्वलेख बबना क्रकसी दबार्व एर्वां उत्पीिन क े कर रहे हैं. (इस प्रकार से)”

8. अलभयुतत व्यक्ततयों द्र्वारा उतत एफआईआर र्ें कायार्वाही को रद्द करने हेतु दाखखल की गई याधचका का र्ार्ला उच्च न्यायालय द्र्वारा लेने पर अलभयुतत व्यक्ततयों तर्था सूचक की ओर से यह कहा गया क्रक र्ार्ला क े पक्षकारों र्ें सर्झौता हो गया है एर्वां प्रत्यर्थी सां. 2 एर्वां 3 द्र्वारा पे आिार सां. 407575 ददनाांक 06.08.2015 क े जररये 25 लाख रूपये का भुगतान भी क्रकया गया| उच्च न्यायालय ने ज्ञ न मसांह बन ि पांज ब र ज्य एवां अन्य: 2012 (10) एससीसी 303 तथ नररांदर मसांह बन ि पांज ब र ज्य एवां अन्य: 2014(6) एससीसी 466 र्ें इस न्यायालय क े ननणायों क े सन्दभा र्ें सर्झौते क े कर्थन को देखते सर्य तर्था दाांडिक कायार्वाही को सर्ाप्त करने क े ललए दांि प्रक्रिया सांदहता की िारा 482 क े अांतगात शक्तत क े प्रयोग क े र्ागादशाक लसद्िाांतों को सार्विानी से देखा है| इसक े पश्चात, र्ार्ले क े तथ्यों एर्वां पररक्स्र्थनतयों की पूणाता र्ें तर्था सूचक क े शपर्थ पत्र को ध्यान र्ें रखते हुए, उच्च न्यायालय ने यह र्त ददया क्रक पक्षकारों क े र्ध्य र्कान र्ाललक-क्रकरायेदार का झगिा उतत सर्झौता वर्वलेख की शतों क े अनुसार सुलझ गया है उतत एफआईआर से उत्पन्न कायार्वाही का जारी रहना एक बेकार काया होगा|

9. इस र्ार्ले र्ें हर् उच्च न्यायालय क े दृक्ष्टकोण र्ें कोई गलती या अर्वैिता पाने र्ें असर्र्था हैं| जैसा की देखा गया है, वर्वर्वाददत एफआईआर कधर्थत घटना क े 19 ददनों क े बाद दजा करर्वाई गई र्थी| अलभयुतत पक्ष ने भी दांिाधिकारी क े सर्क्ष लशकायत दाखखल कर एक जर्वाबी र्ुकद्दर्ा दायर करने की कोलशश की| सर्झौता वर्वलेख ददनाांक 30.05.2011 स्पष्ट रूप से सूचक (प्रत्यर्थी सां. 4) र्वतार्ान अपीलार्थी, कधर्थत रूप से घायल व्यक्ततयों द्र्वारा हस्ताक्षररत क्रकया गया| प्रत्यर्थी सां. 4 ने शपर्थ पत्र दाखखल कर उच्च न्यायालय क े सर्क्ष सर्झौते की शतों की पुक्ष्ट की तर्था, अन्य बातों क े सार्थ सार्थ, यह भी कहा गया क्रक अलभयुतत व्यक्ततयों द्र्वारा लशकायतकिाा को 25 लाख रूपये की रालश दी गई| यद्यवप अपीलार्थीगण एफआईआर की कायार्वाही को सर्ाप्त करते सर्य नोदटस क े अभार्व की लशकायत कहने की प्रार्थाना करते हैं, तयोंक्रक र्वे भी घायल व्यक्तत र्थे परन्तु, ददलचस्प रूप से, अपीलार्थी सां. 2 को उच्च न्यायालय क े सर्क्ष सूचक, जो क्रक उच्च न्यायालय क े सर्क्ष प्रत्यर्थी सां. 2 र्था, क े अधिर्वतिा क े रूप र्ें र्ौजूद ददखाया गया है| इसक े अनतररति, यहााँ तक क्रक इस न्यायालय क े सर्क्ष फाइल की गई याधचका र्ें अपीलार्थीगन ने सर्झौता वर्वलेख ददनाांक 30.05.2011 क े ननष्पादन क े तथ्य पर कोई वर्वर्वाद नहीां क्रकया है|

10. ऊपर जो भी देखा गया उसक े सांचयी प्रभार्व र्ें हर् सांतुष्ट हैं क्रक यह ठीक ही है क्रक उच्च न्यायालय ने दांि प्रक्रिया सांदहता की िारा 482 क े अांतगात इसकी शक्ततयों क े उधचत प्रयोग र्ें र्ार्ले को आगे खीांचने की अनुर्नत का कोई कारण नहीां पाया है तर्था उतत एफआईआर क े अांतगात कायार्वाही को ठीक ही सर्ाप्त क्रकया है|

11. उपयुातत को देखते हुए अपीलार्थी की ओर से इस र्ार्ले र्ें हस्तक्षेप का कोई र्ार्ला नहीां बनता है| अतः यह अपील ख़ाररज की जाती है|.................................न्यायािीश (अभय र्नोहर सप्रे).................................न्यायािीश (ददनेश र्ाहेश्र्वरी) नई ददल्ली, ददनाांक: 8 फरर्वरी, 2019 अस्र्वीकरण: देशी भाषा र्ें ननणाय का अनुर्वाद र्ुकद्द्र्ेबाज़ क े सीलर्त प्रयोग हेतु क्रकया गया है ताक्रक र्वो अपनी भाषा र्ें इसे सर्झ सक ें एर्वां यह क्रकसी अन्य प्रयोजन हेतु प्रयोग नहीां क्रकया जाएगा| सर्स्त कायाालयी एर्वां व्यार्वहाररक प्रयोजनों हेतु ननणाय का अांग्रेज़ी स्र्वरूप ही अलभप्रर्ाखणत र्ाना जाएगा और कायाान्र्वयन तर्था लागू क्रकए जाने हेतु उसे ही र्वरीयता दी जाएगी |