Ritu Bhatia v. Shaharipapurti Upbhokta Mamla & Ors.

Supreme Court of India · 05 Feb 2019 · 2019 INSC 138
L. Nageswara Rao; M. R. Shah
Civil Appeal No. 1467 of 2019
2019 INSC 138
employment appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the termination of an employee for failing to meet the strict experience requirement of five years 'as' a Company Secretary, interpreting the term 'as' in recruitment criteria literally.

Full Text
Translation output
प्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायलय
दीवानी अपीलीय अधिकाररिा
दीवानी अपील संख्या 1467/2019
(ववशेष अनुमति याधचका (दीवानी) सं. 116/2018 से उत्पन्न)
ऋिू भाटिया अपीलार्थी(गण)
बनाम
शहरी आपूतिि उपभोक्िा मामले
एवं साविजतनक वविरण मंत्रालय एवं अन्य प्रत्यर्थी(गण)
तनणिय
न्या., एम.आर.शाह
अनुमति प्रदान
JUDGMENT

2. टदल्ली उच्च न्यायालय क े खंडपीठ द्वारा टदनांक 31.07.2017 को लेिर पेिेंि अपील (एल.पी.ए.) संख्या 160/2015 में पाररि आक्षेवपि तनणिय एवं आदेश जजसक े द्वारा खंड पीठ ने उक्ि अपील को खाररज कर टदया र्था एवं टदनांक 02.02.2015 को फ़ाजिल एकल न्यायािीश द्वारा ररि याधचका (दीवानी) संख्या 977/2015 में पाररि तनणिय एवं आदेश की पुजटि की गई र्थी अर्थािि् उक्ि याधचका खाररज कर दी गई र्थी एवं अपीलार्थी की सेवाएँ समाप्ि करने वाले आदेश में हस्िक्षेप नहीं ककया गया र्था, उससे व्यधर्थि एवं असंिुटि होकर मूल ररि याधचकाकिाि ने यह अपील दायर ककया है| 2019 INSC 138

3. प्रत्यर्थी संख्या 2 यहाँ – सेंट्रल रेल साइड वेयरहाउस क ं पनी लललमिेड ने क ं पनी सधचव क े पद हेिु आवेदन पत्रों को आमंत्रत्रि ककया | प्रत्यर्थी संख्या 2 क े ववज्ञापन पत्र में ववतनटदिटििः यह प्राविान र्था कक टदनांक 30.11.2013 िक ककसी भी पी.एस.यू/.ख्याति प्राप्ि ककसी प्राइवेि क ं पनी में क े रूप में पाँच वषों का योग्यिा पश्चाि् अतनवायि अनुभव हो | अपीलार्थी ने क े पद क े ललए आवेदन पत्र टदया| अपने आवेदन पत्र में उन्होंने स्पटि रूप से ललखा कक योग्यिा पश्चाि् उन्हें साि वषों िर्था िीन महीनों का अनुभव हैI िद्पश्चाि वो साक्षात्कार में उपजस्र्थि हुईं जो कक प्रत्यर्थी संख्या 2 द्वारा ललया गया और उन्हें ववज्ञपति, टदनांक 13.03.2015 द्वारा क े पद हेिु तनयुजक्ि की पेशकश की गयी| िद्पश्चाि उन्हें कायािलय आदेश, टदनांक 22.04.2014 द्वारा क े पद पर तनरंिर आिार पर तनयुजक्ि दी गयी| प्रत्यर्थी संख्या 2 द्वारा कारण बिाओ नोटिस, टदनांक 01.11.2014 जारी की गयी और अपीलार्थी से कहा गया कक वो बिाएँ कक उनकी सेवाएँ समाप्ि क्यों न कर दी जाएं क्योंकक उनक े पास अपेक्षक्षि पाँच वषों का अनुभव जो क े पद हेिु अतनवायि है नहीं है| उपरोक्ि कारण बिाओ नोटिस का उत्तर अपीलार्थी ने टदया| प्रत्यर्थी संख्या 2 ने िद्पश्चाि अपने आदेश, टदनांक 02.01.2015 द्वारा अपीलार्थी की सेवाएँ समाप्ि कर दीं|

4. अपीलार्थी द्वारा समाजप्ि आदेश को उच्च न्यायालय क े समक्ष ररि याधचका (दीवानी) संख्या 977/2015 में चुनौिी दी गयी| फ़ाजिल एकल न्यायािीश ने अपने आदेश, टदनांक 02.02.2015 द्वारा उक्ि याधचका को खाररज कर टदया गया| ररि याधचका क े खाररज करने वाले फ़ाजिल एकल न्यायिीश द्वारा पाररि आदेश उच्च न्यायालय क े खंडपीठ क े समक्ष एल.पी.ए. संख्या 160/2015 में ववषय-वस्िु रहा| आक्षेवपि तनणिय एवं आदेश द्वारा खंडपीठ ने उक्ि अपील को खाररज कर टदया है एवं फ़ाजिल एकल न्यायिीश द्वारा ररि याधचका को खाररज करने वाले पाररि तनणिय एवं आदेश की पुजटि ककया है| एल.पी.ए. संख्या 160/2015 में खंडपीठ द्वारा पाररि आदेश इस अपील की ववषय-वस्िु है|

5. फ़ाजिल वररटठ अधिवक्िा श्री सुनील क ु मार अपीलार्थी क े तनलमि एवं फ़ाजिल वररटठ अधिवक्िा श्री गौरव बनजी प्रत्यर्थी संख्या 2 क े तनलमि उपजस्र्थि हुए| 5.[1] फ़ाजिल वररटठ अधिवक्िा श्री सुनील क ु मार ने तनवेदन ककया कक मुकदमा क े िथ्यों एवं पररजस्र्थतियों में इस आिार पर कक अपीलार्थी क े पास क े रूप में पाँच वषों क े अनुभव की अपेक्षक्षि योग्यिा नहीं र्थी समाजप्ि क े आदेश को अनुमोटदि करक े उच्च न्यायालय ने एक भयंकर गलिी की है| श्री सुनील क ु मार द्वारा यह तनवेदन ककया गया कक उच्च न्यायालय ने इस िथ्य को देखने में ववफलिा टदखाई है कक यद्यवप उनक े आवेदन पत्र में टदखाया गया साि वषों एवं िीन महीनों का वह अनुभव जजसक े दौरान प्रबंि प्रलशक्षणार्थी एवं सहायक क े रूप में वह तनयुक्ि हुई होंगी एवं फलस्वरुप वास्िव में क े रूप में तनयुक्ि नहीं हुई होंगी िर्थावप वह उस दौरान अपीलार्थी क ं पनी सधचव क े अमुक कायों/कििव्यों का तनविहन कर रही र्थीं| अिः ये तनवेदन ककया गया कक अपीलार्थी क े पास क े रूप में पाँच वषों का अपेक्षक्षि अनुभव र्था| अिः उस अवधि क े दौरान जजसमें अपीलार्थी प्रबंि प्रलशक्षणार्थी क े रूप में कायि कर रहीं र्थीं उसे क े पद हेिु अपेक्षक्षि अनुभव क े िौर पर धगना जाये| 5.[2] आगे फ़ाजिल वररटठ अधिवक्िा श्री सुनील क ु मार द्वारा यह भी तनवेदन ककया गया कक क े रूप में अनुभव मांगने का उद्देश्य एवं लक्ष्य यही र्था कक अपीलार्थी क े पास क े रूप में कायि करने का अनुभव हो एवं यह नहीं र्था कक अपीलार्थी वास्िववक रूप में क ं पनी सधचव अधितनयम, 1980 क े प्राविानों क े अंिगिि क ं पनी सधचव क े कििव्यों का कायिवाहन की हों| अिः ये तनवेदन ककया गया कक उच्च न्यायालय ने इसे मानकर गलिी ककया कक अपीलार्थी क े पास क ं पनी सधचव क े रूप में अपेक्षक्षि अनुभव नहीं र्था| 5.[3] आवेदन पत्र प्ररूप क े संग आवेदन पत्र देकर ववटहि प्रारूप पर भरोसा करिे हुए यह तनवेदन ककया गया कक जो अपेक्षक्षि र्था वो ये र्था कक क े रूप में योग्यिा/अनुभव हो और यह नहीं र्था कक वास्िव में क े रूप में कायि ककया हो| 5.[4] फ़ाजिल वररटठ अधिवक्िा श्री सुनील क ु मार द्वारा यह भी तनवेदन ककया गया कक जहाँ िक भारि भूषण शेयसि एंड कमोडडिी ब्रोकसि लललमिेड में अपीलार्थी द्वारा कायि करक े अनुभव लेने की बाि है, उच्च न्यायालय ने क े वल मई, 2007 िक क े अनुभव को ववचार करक े भयंकर गलिी ककया है| यद्यवप प्ररूप-32 समाजप्ि की तिधर्थ 29.06.2007 दशाििा है| 5.[5] डा. असीम क ु मार बोस बनाम भारि संघ एवं अन्य (1983) 1. SCC 345 वाले मुकद्दमा में इस न्यायालय क े तनणिय पर भरोसा करिे हुए श्री सुनील क ु मार द्वारा यह तनवेदन ककया गया है कक जैसा कक इस न्यायालय द्वारा कहा गया है और माना गया है कक शब्द ‘as’ की व्याख्या इसक े सािारण अर्थि में ककया जाना चाटहए अर्थािि् ‘in the capacity of’ अर्थवा ‘similar to’ अर्थवा ‘of the same kind’ अर्थवा ‘in the same manner’ अर्थवा ‘in the manner in which’ क े अर्थि में समझा जाना चाटहए| अिः ववज्ञापन में प्रयोग ककया गया शब्द ‘as’ का अर्थि यह कक आवेदक क े पास क े जैसे, क े प्रकार अर्थवा उसी िरह का अनुभव हो| अिः यह तनवेदन ककया गया कक अपीलार्थी द्वारा प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी क े रूप में ककये गए कायि का अनुभव एवं उस दौरान जब अपीलार्थी क े कििव्यों क े जैसे कायि कर रहा र्था उस अनुभव को भी क े रूप में पाँच वषों क े अनुभव क े गणना क े पररयोजन हेिु धगना जाये| 5.[6] उपरोक्ि तनवेदन कर क े यह प्रार्थिना ककया गया है कक इस अपील को स्वीकार ककया जाये एवं उच्च न्यायालय द्वारा पाररि आदेश एवं क ं पनी सधचव क े रूप में अपीलार्थी की सेवाओं को समाप्ि करने वाले आदेश को मुस्िरद ककया जाये|

6. प्रत्यर्थीगण तनलमि पेश होने वाले फ़ाजिल वररटठ अधिवक्िा श्री गौरव बनजी द्वारा इस अपील का ववरोि ककया गया है| श्री बनजी द्वारा यह तनवेदन ककया गया है कक उस ववज्ञापन पत्र में जजसमें क े पद हेिु आवेदन पत्र माँगे गए र्थे यह ववतनटदिटि रूप से उजल्लखखि ककया गया र्था कक अभ्यर्थी क े पास क े रूप में पाँच वषों का अनुभव अवश्य हो| यह तनवेदन ककया गया है कक ववज्ञापन पत्र क े पीछे खुला आशय यह र्था कक तनयुजक्ि हेिु योग्य होने क े ललए आवेदक ककसी पी.एस.यू./ककसी ख्याति प्राप्ि क ं पनी में क े रूप में अवश्य ही तनयुक्ि ककया गया हो एवं इस रूप में पाँच वषों िक कायि ककया हो| 6.[1] यह आगे तनवेदन ककया गया है कक उद्देश्य यह र्था कक व्यजक्ि ककसी पी.एस.यू./ककसी ख्याति प्राप्ि क े पद पर रहा हो एवं इस प्रकार ववधिवि कायों का तनविहन ककया हो अर्थािि् जिम्मेदारी वाले पद पर रहा हो| यह तनवेदन ककया गया कक इस मामले में एवं अपीलार्थी द्वारा आवेदन पत्र देिे समय दी गयी ववलशजटियों एवं आवेदन पत्र क े सार्थ लगे स्विः अलभप्रमाखणि दस्िावेजाि/अनुभव प्रमाण पत्र से भी यह देखा जा सकिा है कक अपीलार्थी क े रूप में पाँच वषों क े अनुभव क े रखने का अपेक्षक्षि पात्रिा मानदंड पर पूरा नहीं उिरिी र्थीं| श्री बनजी आगे तनवेदन करिे हक कक जैसा कक स्पटि है उस समयावधि क े दौरान जजसमें अपीलार्थी ने अपेक्षक्षि अनुभव का दावा ककया है, अपीलार्थी ‘प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी’ एवं ‘सहायक क ं पनी सधचव’ क े रूप में ही कायि की र्थी| यह तनवेदन ककया गया है कक ‘प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी’ एवं ‘सहायक क े रूप में प्राप्ि ककया गया अनुभव क क े रूप में पाँच साल वाले पात्रिा मानदंड को ववचार करने क े प्रयोजन हेिु नहीं धगना जा सकिा| 6.[2] श्री बनजी द्वारा आगे यह तनवेदन ककया गया कक अिः जब यह पाया गया कक अपीलार्थी का योग्यिा पश्चाि् क ु ल अनुभव न्यूनिम पाँच वषों से अपेक्षक्षि पात्रिा क े रूप में क े िौर पर पाँच वषों से कम का है िर्था इसललए इस आिार पर कक जब आवेदन पत्र माँगे गए र्थे िो वो पात्रिा मानदंड पूरा नहीं करिी र्थीं, उनकी सेवाएँ समाप्ि कर दी गयीं और इसललए उनकी सेवाएँ ववधिवि रूप से समाप्ि की गयी हक| यह तनवेदन ककया गया कक उच्च न्यायालय ने आक्षेवपि तनणिय एवं आदेश में अपीलार्थी द्वारा देलही स्िॉक एक्सचेंज एसोलसएशन लललमिेड, भारि भूषण शेयसि एंड कमोडडिी ब्रोकसि लललमिेड, उत्कल इन्वेस्िमेंि लललमिेड में अपीलार्थी द्वारा ककये गए कायि क े अनुभव पर ववस्िार पूविक ववचार ककया एवं िद्पश्चाि अलभलेख पर रखी सामग्री पर ववचार करिे हुए समाजप्ि क े आदेश में ववधिवि रूप से हस्िक्षेप करने से मना ककया एवं ववधिवि रूप से याधचका को खाररज कर टदया| 6.[3] प्रत्यर्थी क े फ़ाजिल अधिवक्िा द्वारा तनवेदन ककया गया है कक जहाँ िक अपीलार्थी तनलमि पेश होने वाले फ़ाजिल वररटठ अधिवक्िा द्वारा डॉ. असीम क ु मार बोस (उपरोक्ि) क े मुकद्दमे में इस न्यायालय क े फ ै सले पर भरोसा करने की बाि है, श्री बनजी द्वारा तनवेदन ककया गया है कक िथ्यों क े आिार पर उपरोक्ि फ ै सला इस मुकद्दमा क े िथ्यों पर लागू नही होिा| यह तनवेदन ककया गया है कक उक्ि फ ै सला िथ्यों क े आिार पर ववशेषणीय है| यह तनवेदन ककया गया है कक सुसंगि तनयमों की व्याख्या पर इस न्यायालय ने माना है कक शब्द ‘as’ प्रयोग ककये गए अपने समूह क े शब्दों ‘at least six years’ experience as Associate Professor/Assistant Professor/Reader’ िर्था ‘at least five years’ experience as Reader/Assistant Professor’ में प्रयोग ककये गए अर्थािि् पढाया हो ‘in the capacity of’ क े सािारण अर्थि मक समझा जाएगा| यह तनवेदन ककया गया है कक इस नयायालय क े समक्ष प्रश्न यह र्था कक क ें द्रीय स्वास्थ्य सेवा से संबंधिि लशक्षा अस्पिाल मै ववशेषज्ञ द्वविय श्रेणी से सम्बंधिि ववलशटिा वाले प्राध्यापक अर्थवा सहायक प्राध्यापक क े रूप में तनयुजक्ि अर्थवा पदोन्नति हेिु योग्य माना जायेगा की नहीं? अिः यह तनवेदन ककया गया है कक इस मुकद्दमे क े िथ्यों पर उक्ि फ ै सला लागू नही होिा| उपरोक्ि तनवेदन करक े प्रार्थिना ककया गया है कक इस अपील को खाररज कर टदया जाए|

7. दोनों पक्षकारों क े ललए पेश हुए फ़ाजिल अधिवक्िागण को देर िक सुना गया| इस न्यायालय क े समक्ष ववचार हेिु रखा गया प्रश्न यह है कक क्या मुकद्दमा क े िथ्यों एवं पररजस्र्थतियों में क्या यह कहा जा सकिा है कक ववज्ञापन में उजल्लखखि पात्रिा मानदंड कक क े िौर पर पाँच वषो का अनुभव हो उसे अपीलार्थी ने पूरा ककया या नहीं एवं/अर्थवा, क्या यह कहा जा सकिा है कक उस समयावधि क े दौरान जजसमे अपीलार्थी ने “प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी” एवं/अर्थवा “सहायक क ं पनी सधचव” क े िौर पर कायि ककया उसे अपीलार्थी क े क े िौर पर तनयुक्ि ककया हुआ होना माना जा सकिा है िाकक क ं पनी सधचव का जो ववज्ञापन र्था उसक े ललए वह पात्र हो सक े | 7.[1] अलभलेख पर जो सामग्री है, अति ववलशटि रूप से अपीलार्थी द्वारा टदए गए आवेदन पत्र एवं स्विः अलभप्रमाखणि दस्िावेजाि एवं प्रमाणपत्रों से, यह प्रिीि होिा है कक अपीलार्थी क े अनुसार उसक े पास योग्यिा पश्चाि् साि वषो एवं िीन महीनो का अनुभव र्था| आक्षेवपि तनणिय एवं आदेश क े पैरा 3 में उच्च न्यायालय द्वारा उसे ज्यों का त्यों पेश ककया गाया है और उस पर ववचार ककया गया है| 7.[2] उपरोक्ि पर ववचार करिे हुए, यह प्रिीि होिा है और यह सुसंगि तनयुजक्ि आदेशों से भी देखा जा सकिा है और अपीलार्थी क े मुकद्दमे से भी कक जून 2008 से मई 2010 की अवधि क े दौरान वह उत्कल इन्वेस्िमेंि लललमिेड में सहायक क े िौर पर कायि कर रही र्थी और अप्रैल 2005 से जून 2006 की अवधि क े दौरान वह देलही स्िॉक एक्सचेंज लललमिेड में प्रबन्िन प्रलशक्षणार्थी क े रूप में कायि कर रही र्थी और मई 2003 से जून 2004 की अवधि क े दौरान वह ओं.एन.जी.सी. में प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी क े िौर पर कायि कर रही र्थी| प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी क े रूप में उनकी तनयुजक्ि को क े समान नहीं माना जा सकिा और ववचार ककया जा सकिा| 7.[3] शब्द “as” जो ववज्ञापन में प्रयोग हुआ है उसे आक्षररक अर्थि में ललया जाना चाटहए| प्रत्यर्थी ववज्ञापन क े लेखक हक और वही शब्द “as” को प्रयोग करक े ककस अर्थि में सोचे इसका ववचार करने हेिु सविश्रेटठ व्यजक्ि है| प्रत्यर्थी तनलमत्त यह ववतनटदिटि मुकद्दमा है कक ववज्ञापन क े पीछे आशय यह र्था कक तनयुजक्ि हेिु पात्र होने क े ललए अवेदक ककसी पी.एस.यू./ख्याति प्राप्ि क े िौर पर अवश्य ही तनयुक्ि ककया गया हो और इस प्रकार पाँच वषो िक कायि ककया हो| प्रत्यर्थी क े अनुसार उद्देश्य यह र्था कक व्यजक्ि पी.एस.यू./ख्याति प्राप्ि क े पद को िाररि ककया हो िर्था संवैिातनक कायों का उसी रूप में संपादन ककया हो अर्थािि् उत्तरदातयत्व क े स्र्थान पर रहा हो| अिः जब शब्द ‘क े रूप में’ ववशेष रूप में प्रयुक्ि होिा है िो उसे सख्िी से सुववचाररि ककया जािा है अिः अपीलार्थी का ‘प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी’ क े िौर पर कायि करने का अनुभव क ं पनी सधचव को कायि करने क े अनुभव ‘क े रूप में’ सुववचाररि नहीं ककया जा सकिा िर्था/अर्थवा ऐसा नहीं कहा जा सकिा कक वह क े रूप में तनयुक्ि हुई र्थीं| यटद वह अवधि जजस दौरान अपीलार्थी ने बिौर ‘प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी’ कायि ककया र्था को तनकाल टदया जािा है, उस जस्र्थिी में, वास्िव में पी.एस.यू./ख्याति प्राप्ि क ं पनी में अपीलार्थी क ं पनी सधचव ‘क े रूप में’ तनयुजक्ि हेिु आवश्यक योग्यिा मानदंड को पूरा नही करेगी| ऐसा नहीं कहा जा सकिा कक अपीलार्थी ने ‘प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी’ क े िौर पर कायि करिे हुए ‘क ं पनी सधचव’ ‘क े रूप में’ कायि ककया र्था| 7.[4] यटद अपीलार्थी क े तनवेदन को स्वीकृ ि ककया जािा है कक ‘प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी’ क े िौर पर कििव्यों का तनवािह करिे हुए वह ‘क ं पनी सधचव’ क े क ु छ कििव्यों का भी तनवािह कर रही र्थीं और इसललए उसक े ललए यह कहा जा सकिा है कक वह क े रूप में’ तनयुजक्ि क े योग्यिा मानदंड को पूरा करिी हक, उस जस्र्थति में, यह आशय क े ववपरीि होगा| यटद आशय ऐसा र्था, उस जस्र्थिी में, ववज्ञापन में शब्द वही होने चाटहए र्थे कक उम्मीदवार को ‘क े कायि क े जैसे समान प्रकार क े कायि का अनुभव होना चाटहए| ववज्ञापन में ववशेष रूप से िर्था स्पटि रूप से कहा गया र्था कक उम्मीदवार को योग्यिा पश्चाि् पाँच वषों का क ं पनी सधचव ‘क े रूप में’ अनुभव होना चाटहए| प्रयुक्ि ककया गया शब्द “क ं पनी सधचव क े रूप में अनुभव” को यह अर्थि टदया जाना चाटहए कक उम्मीदवार की क े रूप में’ ही तनयुजक्ि की गई हो िर्था पाँच वषों क े ललए वास्िव में क े रूप में’ कायि ककया हो| अन्य अर्थि देना ववज्ञापन में उजल्लखखि योग्यिा मानदंड को पररवतििि करना होगा| जैसा कक यहाँ ऊपर देखा गया है, अपीलार्थी को पाँच वषों का क े रूप में’ कोई अनुभव नहीं है क्योंकक उनकी तनयुजक्ि और/अर्थवा उन्होंनें बिौर ‘प्रबंिन प्रलशक्षणार्थी’ अर्थवा ‘सहायक क ं पनी सधचव’ कायि ककया र्था| 7.[5] इस समय, जैसा कक अब िक इस न्यायालय क े डॉ.असीम क ु मार बोस (सुपरा) क े तनणिय पर आधश्रि अपीलार्थी की ओर से पेश वररटठ अधिवक्िा ने भरोसा ककया है, इस न्यायालय क े समक्ष मामले क े िथ्यों को देखिे हुए, हमारा यह मि है कक उक्ि तनणिय हमारे सामने रखे मामले क े िथ्यों पर लागू नहीं होगा| उपरोक्ि तनणिय में न्यायालय क े समक्ष रखे िथ्य ववशेषणीय हक| उपरोक्ि तनणिय में अपीलार्थी की तनयुजक्ि इरववन अस्पिाल, टदल्ली में ववशेषज्ञों क े ग्रेड में मूल क्षमिा में बिौर ववककरण धचककत्सक हुई र्थी जो कक अध्यापन अस्पिाल र्था| उन्हें टदल्ली ववश्वववद्यालय क े सार्थ-सार्थ मौलाना आिाद मैडडकल महाववद्यालय टदल्ली जजससे इरववन अस्पाल सम्बद्ि र्था दोनों का ववककरण धचककत्सा ववज्ञान का सहायक प्राध्यापक (पदेन) क े िौर पर सुववचाररि ककया गया र्था| उन्हें उस महाववद्यालय में ववककरण धचककत्सा क े सहायक प्राध्यापक क े पद पर तनयलमि तनयुजक्ि हेिु इस आिार पर सुववचाररि नहीं ककया गया र्था कक उनका पदेन सहायक प्राध्यापक क े िौर पर अध्यापन क े अनुभव को नहीं धगना गया र्था| क े न्द्रीय स्वास्थ्य सेवा तनयम का तनयम 8(2-ए) इस न्यायालय द्वारा ववचारािीन र्था जजसक े अनुसार उम्मीदवार का बिौर सहायक प्राध्यापक अध्यापन अनुभव होगा| अपीलार्थी को बिौर ववककरण धचककत्सा ववज्ञान (पदेन) का अनुभव र्था और इसललए यह मामला भारि संघ की ओर से र्था कक उसे बिौर सहायक प्राध्यापक अध्यापन अनुभव नहीं र्था क्योंकक उसने ववककरण धचककत्सा ववज्ञान (पदेन) क े सहायक प्राध्यापक क े िौर पर कायि ककया र्था| उस से, इस न्यायालय ने यह देखा िर्था यह माना कक तनयम 8(2-ए) में तनटहि प्राविानों िर्था क े न्द्रीय स्वास्थ्य सेवा तनयम की दूसरी अनुसूची क े अनुलग्नक I क े पैरा 3 की व्यापक और उदार अर्थि में व्याख्या की जानी चाटहए िाकक अपीलार्थी की िरह ववशेषज्ञ ग्रेड क े व्यजक्ि क े सार्थ अन्याय से बचा जा सक े | इस न्यायालय ने देखा कक तनयमों में कहीं भी यह नहीं बिाया गया है कक एक ववशेषज्ञ द्वारा ककसी लशक्षण अस्पिाल में एक सहायक प्राध्यापक (पदेन) क े रूप में अजजिि अनुभव को आवश्यक लशक्षण अनुभव में नहीं जोड़ा जाएगा| इस न्यायालय ने यह भी देखा कक जहाँ िक शैक्षखणक अनुभव की बाि है इससे शायद ही कोई असर पड़ेगा कक इसे तनयलमि तनयुजक्ि द्वारा अर्थवा लशक्षण अस्पिाल में पदेन पद पर ववशेषज्ञ क े रूप में अजजिि ककया है| इसक े बाद यह भी देखा गया कक शब्द ‘क े रूप में’ को शब्दों क े मेल में प्रयुक्ि “कम से कम छ: वषों” का सहयोगी प्राध्यापक/सहायक प्राध्यापक/रीडर क े रूप में अनुभव और प्रासंधगक तनयमों में शब्दों ‘न्यूनिम पाँच वषों’ का रीडर/सहायक प्राध्यापक क े रूप में अनुभव, को, इसक े सािारण रूप में शैक्षखणक अनुभव “की क्षमिा में” अजजिि क े रूप में वववेचन करना चाटहए| 7.[6] प्रस्िुि मामले में ववज्ञापन में प्रयुक्ि शब्द ‘क े रूप में’ और शब्द ‘क े रूप में अनुभव’ पूणििः स्पटि हक और जैसा कक उपरोक्ि में देखा गया कक इसका आशय यह है कक उम्मीदवार की क तनयुक्ि ककया गया हो और उसने ‘उसी तौर पर’ कायि ककया हो| इसललए, उपरोक्ि तनणिय हमारे सामने रखे मामले क े िथ्यों पर लागू नहीं होगा|

8. उपरोक्ि को ध्यान में रखिे हुए और उपरोक्ि बिाए कारणों क े मद्देनिर, चूँकक अपीलार्थी योग्यिा मानदंड क े, क े रूप में’, 30.11.2013 िक आहिाि पश्चाि् अनुभव क े पाँच वषों को पूरा नहीं करिी है, अपीलार्थी की सेवाओं को सही िौर से तनस्िाररि ककया गया| हम, उच्च न्यायालय द्वारा ललए गए तनणिय से पूणििः सहमति रखिे हक|

9. उपरोक्ि बिाए कारणों को ध्यान में रखिे हुए, वििमान अपील ववफल हो जािी है और िदानुसार खाररज की जािी है| कोई लागि नहीं| न्या..................... (एल.नागेश्वर राव) न्या.................... (एम.आर.शाह) नई टदल्ली, फरवरी 05,2019 अस्वीकरण: देशी भाषा में तनणिय का अनुवाद मुकद्द्मेबाि क े सीलमि प्रयोग हेिु ककया गया है िाकक वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एवं यह ककसी अन्य प्रयोजन हेिु प्रयोग नहीं ककया जाएगा| समस्ि कायािलयी एवं व्यावहाररक प्रयोजनों हेिु तनणिय का अंग्रेिी स्वरूप ही अलभप्रमाखणि माना जाएगा और कायािन्वयन िर्था लागू ककए जाने हेिु उसे ही वरीयिा दी जाएगी|