Ambi Ram v. Uttarakhand State

High Court of Uttarakhand · 05 Feb 2019
Abhay Manohar Sapre; Dinesh Maheshwari
Criminal Appeal No 1723 of 2009
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court reduced the appellant's sentence under the Prevention of Corruption Act considering his age, health, delay in trial, and period already served, while upholding conviction and increasing the fine.

Full Text
Translation output
प्रतितिवेद
भारति का उच्चतिम न्यायलय
आपरािधिक अपीलीय क्षेत्रािधिकािरतिा
आपरािधिक अपील क्रमांक 1723/2009
अम्बी राम ........अपीलाथी
िवरुद
उत्तराखंड राज्य .........प्रतत्याथी
िनिर्णरय
न्यायमूर्तितिर श्री अभय मनिर्ोहर सप्रते
JUDGMENT

1. यह अपील उत्तराखंड उच्च न्यायालय, निर्ैनिर्ीतिाल क े िदिनिर्ांक 14.05.2009 को आपरािधिक अपील संख्या 258/2001 (पुरानिर्ा निर्ंबर 1518/1991) मे पािरति अंितिम िनिर्णरय और आदिेश क े िवरुद दिायर की गई थी, िजिसक े तिहति उच्च न्यायालय निर्े अपीलकतिार द्वारा दिायर अपील को आंिशक रूप से अनिर्ुमिति प्रतदिानिर् की थी।

2. इस अपील मे शािमल छोटे िववादिो की जिांच करनिर्े क े िलए क ु छ तिथ्यो का उल्लेख करनिर्ा आवश्यक है।

3. अपीलकतिार दिीदिीहाट मे "कानिर्ूर्तनिर्गो/पटवारी क े रूप मे काम कर रहा था। उनिर्क े िवरुद भ्रष्टाचार िनिर्वारण अिधििनिर्यम, 1947 (ऐतििमनिर्पश्चाति "पीसी अिधििनिर्यम" पढ़ा जिाए) की धिारा 5 (2) सपिठिति भारतिीय दिंड संिहतिा (ऐतििमनिर्पश्चाति "भादिंसं" पढ़ा जिाए), 1860 की धिारा 161 क े अंतिगरति दिंडनिर्ीय अपराधि कािरति करनिर्े क े िलए मुकदिमा चलाया गया था।

4. अपीलकतिार क े िखलाफ आरोप यह था िक उसनिर्े िकसी गोपाल िसंह को आश्वासनिर् िदिया था िक वह उसे िगरफ्तिार निर्ही करेगा और निर् ही उसे एक लंिबति आपरािधिक मामले मे फ ं साएगा, यिदि वह उसे 1200/- रुपए दिेगा।

5. अिभयोजिनिर् पक्ष का यह मामला था िक 30.09.1985 को अपीलकतिार द्वारा गोपाल िसंह से 1200/- रुपये का अवैधि पिरतिोषण स्वीकार करतिे हुए गोपाल िसंह क े इशारे पर इस उद्देश्य क े िलए िबछाये एक जिाल मे एस.पी. (सतिक र तिा) द्वारा पकड़ा गया था।

6. सत्र न्यायाधिीश, िपथौरागढ़ निर्े अपनिर्े आदिेश िदिनिर्ांक 05.08.1991 मे अिभयोजिनिर् का मामला युिक्तियुक्ति संदिेह से परे सािबति पाया और तिदिनिर्ुसार अपीलकतिार को पीसी अिधििनिर्यम की धिारा 5 (2) सपिठिति भारतिीय दिंड संिहतिा की धिारा 161 क े अंतिगरति दिंडनिर्ीय अपराधि मे दिोषिसद करतिे हुए चार वषर क े सश्रम कारावास और रु 5000/- का जिुमारनिर्ा अदिा करनिर्े की सजिा सुनिर्ायी और जिुमारनिर्ा निर् अदिा करनिर्े पर एक वषर क े अितििरक्ति सश्रम कारावास और भारतिीय दिंड संिहतिा की धिारा 161 क े अंतिगरति तिीनिर् साल की अविधि क े िलए सश्रम कारावास क े दिंड से दिित ण्डति िकया। दिोनिर्ो सजिाएं साथ साथ चलनिर्ी थी।

7. दिोषिसिद और दिंड से व्यिथति होकर अपीलकतिार निर्े उच्च न्यायालय मे अपील दिायर की। आलोच्य आदिेश द्वारा उच्च न्यायालय निर्े आंिशक रूप से अपील की अनिर्ुमिति दिी। उच्च न्यायालय निर्े दिोषिसिद यथावति रखी तिथा जिहाँ तिक पीसी अिधििनिर्यम की धिारा 5 (2) क े अंतिगरति दिंडनिर्ीय अपराधि का सम्बन्धि है दिी गयी सजिा की मात्रा मे दिखल करतिे हुए तिदिनिर्ुसार कारावास की अविधि को चार वषर से घटाकर एक वषर कर िदिया और अथरदिंड निर् अदिा करनिर्े पर तिीनिर् माह क े अितििरक्ति सश्रम कारावास की सजिा सुनिर्ाई। जिहाँ तिक भारतिीय दिंड संिहतिा की धिारा 161 क े अंतिगरति दिंडनिर्ीय अपराधि का सम्बन्धि है, उच्च न्यायालय निर्े दिोषिसिद को बरकरार रखा लेिकनिर् सजिा को तिीनिर् साल से घटाकर एक साल कर िदिया। दिोनिर्ो सजिाएं साथ साथ चलनिर्ी थी।

8. अपीलाथी (अिभयुक्ति) निर्े व्यिथति होकर इस न्यायालय मे िवशेष अनिर्ुमिति यािचका क े रूप मे यह अपील दिायर की है।

9. अपीलाथी (अिभयुक्ति) क े िवद्वानिर् अिधिवक्तिा श्री अरुण क े. िसन्हा और प्रतत्यथी (राज्य) क े िवद्वानिर् अिधिवक्तिा श्री आशुतिोष क ु मार शमार को सुनिर्ा। 10.अपीलाथी (अिभयुक्ति) क े िवद्वानिर् अिधिवक्तिा निर्े क े वल एक िबंदिु पर तिक र िदिया. उन्होनिर्े सजिा की वैधितिा पर सवाल निर्ही उठिाया। उन्होनिर्े तिक र िदिया िक अपीलकतिार को दिी गयी जिेल की सजिा को कम िकया जिाए। 11.उनिर्क े अनिर्ुसार, इस तिथ्य को दृष्टिष्टगति रखतिे हुए िक अपीलाथी अब लगभग 78 वषर की आयु का है और हृदिय रोग से पीिड़ति है तिथा घटनिर्ा वषर 1985 की है और इस बीच 34 वषर बीति चुक े है और अंतितिः अपीलाथी लगभग एक महीनिर्े और 10 िदिनिर् का कारावास भुगति चुका है, इस न्यायालय को पीसी अिधििनिर्यम की धिारा 5 (2) क े अंतिगरति अपनिर्ी शिक्तियो का प्रतयोग करतिे हुए अपीलकतिार क े एक वषर क े कारावास को घटाकर अपीलकतिार द्वारा जिेल मे व्यतिीति की गयी 1 वषर और 10 िदिनिर् की अविधि को ही पूर्तणर कारावास मानिर्ा जिाये। इसक े बजिाय यिदि उिचति समझा जिाये तिो जिुमारनिर्ा रािश बढ़ा सकतिे है। 12.प्रतिति उत्तर मे प्रतत्यथी क े िवद्वानिर् अिधिवक्तिा निर्े आलोच्य आदिेश का समथरनिर् करतिे हुए तिक र िकया िक तिथ्यात्मक पिरित स्थितियो क े मद्देनिर्ज़र उच्च न्यायालय द्वारा दिी गई सजिा मे और कमी का कोई मामला निर्ही बनिर्तिा है और इसिलए, अपील खािरजि िकये जिानिर्े योग्य है। 13.पक्षकारो क े िवद्वानिर् अिधिवक्तिाओं को सुनिर्निर्े और वादि क े अिभलेख क े अवलोकनिर् क े बादि, हम अपील को अंशतिः अनिर्ुमिति दिेतिे है और निर्ीचे िदिए गए अनिर्ुसार सजिा को कम करतिे है। 14.पीसी अिधििनिर्यम की धिारा 5 (2) इस प्रतकार है:- “(2) कोई भी लोक सेवक जिो आपरािधिक दिुराचार करतिा है, उसे ऐसे कारावास की सजिा दिी जिाएगी, जिो एक वषर से कम निर्ही होगी, लेिकनिर् िजिसकी अविधि साति साल तिक हो सकतिी है और वह अथरदिंड क े िलए भी उत्तरदिायी होगा। बशतिे िक अदिालति िलिखति मे दिजिर िवशेष कारणो क े िलए, एक वषर से कम कारावास की सजिा दिे सकतिी है। 15.पीसी अिधििनिर्यम की धिारा 5 (2) को पढ़निर्े से पतिा चलतिा है िक यिदि कोई भी लोक सेवक, जिो आपरािधिक दिुराचार करतिा है, उसे िजिस अविधि क े िलए कारावास की सजिा दिी जिाएगी वो एक वषर से कम निर्ही होगी, लेिकनिर् जिो अथरदिंड क े साथ 7 वषर तिक बढ़ाई जिा सकतिी है। 16.वह प्रतावधिानिर् जिो अदिालति को एक वषर से कम क े कारावास की सजिा दिेनिर्े का अिधिकार दिेतिा है, बशतिे एक वषर से कम की ऐसी सजिा को कम करनिर्े क े समथरनिर् मे कोई िवशेष कारण िलिखति मे दिजिर िकए जिाएं। 17.इसिलए, यह स्पष्ट है िक अदिालति को सजिा दिेनिर्े का अिधिकार िदिया गया है, जिो जिुमारनिर्े क े साथ 1 साल से 7 साल तिक हो सकतिा है। हालाँिक, िकसी िवशेष मामले मे, अगर अदिालति को लगतिा है िक अिभयुक्तिो क े पक्ष मे क ु छ िवशेष कारण है तिो न्यायालय को एक वषर से कम कारावास की सजिा दिेनिर्े का अिधिकार है, बशतिे उनिर् िवशेष कारणो को कम सजिा दिेनिर्े क े समथरनिर् मे िलिखति रूप मे िनिर्धिारिरति िकया जिाए। जिहां तिक जिुमारनिर्ा लगानिर्े का सवाल है तिो यह िकसी भी जिेल की सजिा को लागूर्त करतिे समय अिनिर्वायर है। िकतिनिर्ा जिुमारनिर्ा लगाया जिानिर्ा चािहए यह प्रतत्येक मामले क े तिथ्य पर िनिर्भरर करतिा है। 18.क े.पी. िसंह बनिर्ाम राज्य (रा.रा.क्षे िदिल्ली) (2015) 15 एससीसी 497 क े मामले मे इस न्यायालय निर्े क ु छ इसी तिरह क े तिथ्यो पर िवचार िकया िक जिेल की सजिा को कम करनिर्े क े िलए िकनिर् कारको / पिरित स्थितियो पर िवचार िकया जिानिर्ा चािहए।

19. न्यायमूर्तितिर श्री टीएस ठिाक ु र (तित्कालीनिर् न्यायाधिीश और बादि मे मुख्य न्यायाधिीश) निर्े अपनिर्ी िविशष्ट शैली और लेखनिर् क े अपनिर्े िविशष्ट अंदिाजि मे इस प्रतश्निर् की जिांच इस न्यायालय द्वारा इस िवषय पर िनिर्स्तिािरति पूर्तवर क े वादिो मे प्रतितिपािदिति िविधि क े आलोक मे अपनिर्ी िवस्तिृति राय दिी है और िनिर्म्निर् िसदांति प्रतितिपािदिति िकया है: - “10.िकसी िदिए गए मामले मे दिी जिानिर्े वाली सजिा की पयारप्ततिा का िनिर्धिाररण करनिर्ा आसानिर् काम निर्ही है, िजिस तिरह एक समानिर् दिंड निर्ीिति िवकिसति करनिर्ा एक किठिनिर् काम है। ऐसा इसिलए है क्योिक प्रतत्येक मामले मे दिी जिानिर्े वाली सजिा की जिो मात्रा दिी जिा सकतिी है, कई प्रतकार क े कारको पर िनिर्भरर करतिी है, िजिसमे िकसी िवशेष मामले मे गंभीरतिा कम करनिर्े वाली ख़ास पिरित स्थितियां शािमल है। अदिालति आमतिौर पर सजिा की मात्रा िनिर्धिारिरति करनिर्े क े मामले मे िववेक का अिधिकतिम उपयोग करतिी है। ऐसा करतिे समय अदिालतिो को सजिा क े सुधिारात्मक, िनिर्वारक और दिंडात्मक, िवचारण न्यायालय द्वारा वादि को िनिर्पटानिर्े मे की गयी दिेरी और कानिर्ूर्तनिर्ी कायरवाही, आरोपी की आयु, उसकी शारीिरक/स्वास्थ्य ित स्थिति, अपराधि की प्रतक ृ िति, इस्तिेमाल िकया गया हिथयार और आपरािधिक पिरतिोषण क े मामलो मे िरश्वति की रािश, सेवा से िनिर्ष्कासनिर् और अिभयुक्तिो क े पािरवािरक दिाियत्वो जिैसे क ु छ पहलु भी िवचारणीय तिथ्य है जिो प्रतबल रूप से न्यायालय को सजिा सुनिर्ाए जिानिर्े क े समय अलग-अलग स्तिर पर प्रतभािवति करतिे है। अदिालतिो निर्े उनिर् तिथ्यो पर िवस्तिृति रूप से िवचार करनिर्े का प्रतयास निर्ही िकया है जिो सजिा की मात्रा िनिर्धिारिरति करतिी है और निर् ही अदिालतिो निर्े उनिर् प्रतबलतिाओं को प्रतितिपािदिति करनिर्े का प्रतयास िकया जिो प्रतत्येक तिथ्य िलए है। ऐसा इसिलए है क्योिक इस तिरह की कोई भी कवायदि निर् तिो आसानिर् है और निर् ही ऐसी असंख्य ित स्थितियो मे िजिनिर्मे िनिर्धिाररण करनिर्े का प्रतश्निर् हो सकतिा है को दिेखतिे हुए सलाह दिी जिातिी है। मोटे तिौर पर कहे तिो अदिालतिो निर्े पूर्तवर मे उल्लेिखति इनिर् कारको को पहचानिर् िलया है जिो दिंड िनिर्धिाररण क े प्रतश्निर् क े सम्बन्धि मे प्रतासंिगक है। इस िवषय पर इस अदिालति निर्े असंख्य फ ै सले िदिए है। हालांिक, क े वल क ु छ संदिभर ही पयारप्त होनिर्े चािहए। 19.इस तिथ्य को ध्यानिर् मे रखतिे हुए िक हस्तिगति मामले मे िवचारण और अपील की कायरवाही लगभग 17 वषो ं तिक जिारी रही, िजिसक े कारण अब तिक अपीलाथी को भारी आघाति, मानिर्िसक पीड़ा और वेदिनिर्ा से गुजिरनिर्ा पड़ा और साथ ही इस तिथ्य को भी दृष्टिष्टगति रखतिे हुए िक िरश्वति की रािश मात्र रु 700/- थी जिबिक अपीलाथी 6 महीनिर्े क े न्यूर्तनिर्तिम वैधिािनिर्क कारावास क े स्थानिर् पर पहले ही 7½ महीनिर्े क े कारावास की सजिा काट चुका है, इस सम्बन्धि मे मेरे बंधिूर्त न्यायाधिीश द्वारा प्रतस्तिािवति सजिा मे कमी पूर्तरी तिरह से उिचति प्रततिीति होतिी है। इसिलए, मै मानिर्निर्ीय न्यायमूर्तितिर क े मति से सहमति हूँ। 20.इस न्यायालय द्वारा िनिर्धिारिरति कानिर्ूर्तनिर् क े पूर्तवोक्ति कथनिर् को ध्यानिर् मे रखतिे हुए जिब हम हस्तिगति मामले क े तिथ्यो की जिांच करतिे है तिो सवरप्रतथम हम पातिे है िक यह घटनिर्ा 1985 की है; दिूर्तसरा, यह मामला िपछले 34 वषों से लंिबति है; तिीसरे, अपीलाथी अब 78 वषों का हो चूर्तका है; चौथा, वह ह्रदिय रोग से पीिड़ति है जिो स्वस्थ भी निर्ही रहतिे है जिैसा िक अपीलाथी क े िवद्वानिर् अिधिवक्तिा निर्े बतिाया; पांचवा, िवचारण क े दिौरानिर् और दिोषिसिद क े बादि अब तिक अपीलाथी क ु ल एक माह और 10 िदिनिर् की जिेल काट चुका है; छठिा, िपछले पुरे 34 वषों से अपीलाथी जिमानिर्ति पर था और िकसी आपरािधिक गितििविधि मे शािमल निर्ही हुआ निर् ही दिी गयी जिमानिर्ति की िकसी शतिर का उलंघनिर् िकया; सातिवां, िरश्वति की रािश रु 1200/- थी; और अंति मे िपछले 34 वषों मे उन्होनिर्े भारी आघाति, मानिर्िसक पीड़ा और वेदिनिर्ा भोगी है। 21.हमारे िवचार मे उपरोक्ति 8 िवशेष कारण है जिो पीसी अिधििनिर्यम की धिारा 5 (2) की आवश्यकतिाओं को पूर्तरा करतिे है। इसिलए यह अदिालति पीसी अिधििनिर्यम की धिारा 5 (2) क े तिहति शिक्तियो का उपयोग करतिे हुए तिदिनिर्ुसार िनिर्चली दिोनिर्ो अदिालतिो द्वारा अपीलाथी को सुनिर्ाये गए जिेल कारावास को बदिलतिी है और इसे "अपीलकतिार द्वारा पहले से ही काटी गई जिेल अविधि", जिो की 1 महीनिर्े और 10 िदिनिर् है मे तिब्दिील करतिी है। 22.दिूर्तसरे शब्दिो मे, यह अदिालति न्याय िहति मे अपीलाथी की जिेल की सजिा को बदिलकर "उसक े द्वारा पूर्तवर मे काटी जिेल अविधि" मे तिब्दिील करतिी है और साथ ही अथरदिंड को रु 3000/ - से बढ़ा कर रु 10,000/ - करतिी है। 23.इसिलए अपीलकतिार को अब और अिधिक जिेल की सजिा भुगतिनिर्े की आवश्यकतिा निर्ही है। यदिप अगर पूर्तवर मे जिमा रु 3000/- समायोिजिति करनिर्े क े बादि वह रु 10000/- का अथरदिंड अदिा करनिर्े मे असफल होतिा है तिो उसे तिीनिर् माह क े साधिारण कारावास की सजिा भुगतिनिर्ी होगी। 24.यिदि अपीलाथी आजि से तिीनिर् माह क े अंदिर रु 10000/- क े अथरदिंड की रािश जिमा करा दिेतिा है तिो उसे व्यितिक्रम मे कारावास भुगतिनिर्े की आवश्यकतिा निर्ही है। यिदि वह रु 3000/- जिमा करा चुका है तिो उसे क े वल रु 7000/- जिमा करनिर्े होगे। 25.पूर्तवरगामी चचार क े मद्देनिर्जिर, अपील सफल होतिी है और आंिशक रूप से अनिर्ुमिति दिी जिातिी है। आलोच्य आदिेश को उपरोक्तिनिर्ुसार संशोिधिति िकया जिातिा है। न्यायमूर्तितिर श्री अभय मनिर्ोहर सप्रते न्यायमूर्तितिर श्री िदिनिर्ेश महेश्वरी निर्ई िदिल्ली फरवरी 05, 2019