Full Text
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
सससर्वल अपीलीय असिकाररता
सससर्वल अपील सं. 1474/2019
(एस.एल.पी.(सससर्वल) सं. 12393/2013 से उद्भूत)
यूसियि ऑफ़ इंसिया एर्वं अन्य .........अपीलार्थी(यों)
बिाम
श्री हरािंदा एर्वं अन्य ........प्रत्यर्थी(यों)
ससहत
सससर्वल अपील सं. 1475-81/ 2019
(एस एल पी (सससर्वल) सं. 35548-35554/2015 से उद्भूत), सससर्वल अपील सं. 1482/2019
(एस एल पी (सससर्वल) सं. 13937/2016 से उद्भूत)
एस एल पी (सससर्वल).......................सीसी सं. 5735/2016
एस एल पी (सससर्वल).......................सीसी सं. 5736/2016
एस एल पी (सससर्वल).......................सीसी सं. 5737/2016
एस एल पी (सससर्वल).......................सीसी सं. 5738/2016
एस एल पी (सससर्वल).......................सीसी सं. 5743/2016
एस एल पी (सससर्वल).......................सीसी सं. 5742/2016
एस एल पी (सससर्वल).......................सीसी सं. 5740/2016
सिर्णय
एम.आर.शाह,जे.
JUDGMENT
1. SLP (सससर्वल) सं. 12393/2013, 35548-35554/2015 एर्वं 13937/2016 में अिुमसत प्रदाि की जाती है | इि सभी अपील का सिपटाि इस सर्वणसिष्ठ सिर्णय द्वारा ककया जा रहा है|
2. ररट यासिका (सी) सं. 6314/2012 में कदल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कदिांक 04.12.2012 को पाररत आदेश तर्था आक्षेसपत सिर्णय से व्यसर्थत तर्था सिन्न होकर, यूसियि ऑफ़ इंसिया एर्वं अन्य िे सससर्वल अपील @ एस एल पी (सससर्वल) संख्या 12393/2013 प्रस्तुत की है | 2.[1] ररट यासिका (सी) सं. 153/2013 एर्वं अन्य सम्बंसित ररट यासिकाओं में कदल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कदिांक 03.09.2015 को पाररत आदेश तर्था आक्षेसपत सिर्णय से व्यसर्थत तर्था सिन्न होकर, यूसियि ऑफ़ इंसिया एर्वं अन्य िे सससर्वल अपील @ एस एल पी (सससर्वल) संख्या 35548-35554/2015 प्रस्तुत की है | 2.[2] ररट यासिका (सी) सं. 3529/2015 ररट यासिकाओं में कदल्ली उच्च न्यायालय द्वारा कदिांक 15.12.2015 को पाररत आदेश तर्था आक्षेसपत सिर्णय से व्यसर्थत तर्था सिन्न होकर, यूसियि ऑफ़ इंसिया एर्वं अन्य िे सससर्वल अपील @ एस एल पी (सससर्वल) संख्या 13937/2016 प्रस्तुत की है | SLP(सससर्वल)संख्या 12393/2013 से उद्भूत सससर्वल अपील
3. ररट यासिका (सी) सं. 6314/2012 में कदिांक 04.12.2012 को कदल्ली उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आदेश तर्था आक्षेसपत सिर्णय से उद्भूत एस एल पी (सससर्वल) सं. 12393/2013 से उद्भूत सससर्वल अपील के तथ्य सिम्नसलसित हैं:- 3.[1] मूल ररट यासिकाकताणओं जो RPF में ग्रुप ‘ए’ पद पर असिकारीगर् है सजन्होंिे सिम्नसलसित राहत /प्रार्थणिा के सलए भारतीय संसर्विाि के अिुच्छेद 226 के अंतगणत उच्च न्यायालय में ररट यासिका फाइल की | (क) परमादेश ररट जारी करके प्रत्यर्थी(यों) को सिसित समय के भीतर व्यर्वसस्र्थत तौर पर RPF को गरित करिे के सलए औपिाररकतायें पूरी के सलये सिदेसशत करिा एर्वं प्रत्यर्थी संख्या 1 द्वारा पहले से ही अिुमोकदत RPF भती सियमों को लागू करके सहतों को बढ़ार्वा देिे के सलए सिदेसशत करिा जो प्रत्यर्थी संख्या 2 को कदिांक 01.03.2005 पत्र द्वारा सूसित है और सभी प्रकार से ग्रुप ‘A’ रेलर्वे असिकाररयों को सससर्वल सेर्वा परीक्षा द्वारा भती हुए समझिा | (ि) प्रत्यार्र्थणयों को आगे सिदेसशत करिा कक यासिकाकताणओं की सभी पूर्वणव्यापी िीसत पररपत्रों को लागू करिा जो अन्य ग्रुप ‘ए’ रेलर्वे सेर्वाओं को उिके सासर्थयों के समाि लािे के सम्बन्ि में मान्य है एर्वं यासिकाकताणओं एर्वं अन्य समाि असिकाररयों को उस आिार पर सपछले र्वेति को ससहत सभी सहतों के सार्थ पदोन्नसत प्रदाि करिा | (ग) असभलेिों को मंगािे हेतु उत्प्रेषर्-लेि ररट जारी करिा एर्वं अन्य/सिदेश (उि सूििा पत्रों को ससम्मसलत करके, जो यासिकाकताण के सलए िहीं है, यकद कोई, सजसके द्वारा, प्रत्यार्र्थणयों िे र्वैिासिक प्रार्विािों के सर्वरुद्ध RPF की ररसि को प्रसतसियुसि के द्वारा भरिे की प्रकिया आरम्भ की र्थी एर्वं तत्पिात समाि को समाप्त कर कदया| 3.[2] यह मामला मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से र्था कक सभी ररट यासिकाकताण जो रेलर्वे सुरक्षा बल (सजन्हें RPF कहा गया है) में ग्रुप’ए पदों पर असिकारी हैं तर्था सभी UPSC के द्वारा होिे र्वाली सससर्वल परीक्षा ससहत 15 अन्य ग्रुप’ए’ केन्रीय सेर्वाओं सजिमें ग्रुप ‘ए’ रेलर्वे सेर्वाओं जैसे भारतीय रेलर्वे ट्रैकफक सेर्वा, भारतीय रेलर्वे लेिा सेर्वा एर्वं भारतीय रेलर्वे कमणिारी सम्बन्िी सर्वभाग द्वारा भती र्थे | ररट यासिकाकताणओं के अिुसार, भारत सरकार द्वारा गज़ट असिसूििा के अिुसार, सजसके आिार पर UPSC परीक्षा का संिालि करता है, इि सभी रेलर्वे सेर्वाओं को आपस में समाि रिा जाता है| मूल ररट यासिकतोोँ के द्वारा असिसूििा एर्वं सियुसि का प्रस्तार्व एर्वं रेलर्वे संरक्षर् बल असिसियम, 1957 (संक्षेप में RPF असिसियम,
1957) स्पष्ट रूप से RPF असिकाररयों को रेलर्वे कमणिारी के तौर पर सििाणररत करता है इसके असतररि रेलर्वे कमणिारी पर भारतीय रेलर्वे स्र्थापिा संसहता मान्य होगी, RPF असिकाररयों पर RPF असिसियम एर्वं RPF सियम, 1959 एर्वं िए RPF सियम, 1987, भती सियम 1981 एर्वं 1994 में ससम्मसलत प्रार्विाि लागू होंगे | 3.[3] यह मामला मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से र्था कक रेलर्वे मंत्रालय के द्वारा सलया गया एकरूप सिर्णय कक RPF असिकाररयों में संगरित सेर्वा की सभी सर्वशेषतायें है एर्वं उिको संगरित सेर्वा के तौर पर सियुि करिा िासहए| मूल प्रत्यर्थी संख्या 1- यूसियि ऑफ़ इंसिया द्वारा रेलर्वे मंत्रालय एर्वं कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग (संर्वगण पुिरीक्षर् िंि) (संक्षेप में DoPT) िे एक अर्थर्वा अन्य कारर्ों से, इस सम्बन्ि में अंसतम फै सला सलया गया है सजसके पररर्ामस्र्वरूप RPF असिकाररयों की बड़े पैमािे पर, ररट यासिकाकताणओं की तरह, प्रत्येक रैंक में गसतरोि है | 3.[4] मूल ररट यासिकाकताणओं की तरफ से यह कर्थि र्था कक 1981 से 1996 तक RPF असिसियम ससहत सियमों में सभन्न संशोिि लाये गए सजिके द्वारा आरम्भ में प्रसतसियुसि का भाग घटा कदया गया र्था तर्था अन्त में RPF सियमों, भती सियम में संशोिि द्वारा तर्था मुख्य असिसियम, 1957 में संशोिि लाकर, संशोिि असिसियम की िारा 19 द्वारा र्वतणमाि असिकाररयों को जो प्रसतसियुसि पर र्थे, दो सर्वकल्प देकर या तो उिके मूल संर्वगण में र्वापस भेजकर अर्थर्वा सेर्वासिर्वृसि स्र्वीकार करके प्रसतसियुसि से सर्वर्वर्जणत ककया गया | 3.[5] मूल ररट यासिकाकताणओं के अिुसार, रेलर्वे बोिण के द्वारा र्वषण 1986 में RPF को संगरित सेर्वा के तौर पर गरित करिे का सैद्धांसतक फ़ैसला सलया गया एर्वं मामले को DoPT के (संर्वगण पुिरीक्षर् िंि) को अिुमोदि के सलए भेजा गया | मूल ररट यासिकाकताणओं के अिुसार, तत्पिात, रेलर्वे मंत्रालय िे ओ.एम. कदिांक 12.07.2001 द्वारा RPF को संगरित सेर्वा के तौर पर सजसे भारतीय रेलर्वे सुरक्षा बल सेर्वा के िाम से जािा जाता है, सर्विार के सलए प्रस्तार्व को अग्रेसषत ककया | मूल ररट यासिकाकताणओं के अिुसार, तत्पिात, DoPT के (संर्वगण पुिरीक्षर् िंि) िे सभी पक्षों पर सर्विार ककया, सूििा पत्र द्वारा कदिांक 20.11.2003 को मुख्य रूप से आर पी एफ को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर अिुमोकदत करिे के सलए संप्रेसषत ककया र्था (संक्षेप में ‘OGACs’) | मूल ररट यासिकाकताणओं के अिुसार, तत्पिात, रेलर्वे मंत्रालय िे, सक्षम प्रासिकारी होिे के िाते रेलर्वे मंत्रालय के अिुमोदि के पिात् सूििा पत्र कदिांक 01.03.2005 द्वारा अन्य संगरित ग्रुप ‘ए’ रेलर्वे के केंरीय सेर्वाओं की तरह भती सियमों के ड्राफ्ट को भारतीय रेलर्वे सुरक्षा बल हेतु अग्रेसषत ककया | मूल ररट यासिकाकताणओं के अिुसार, तत्पिात, 2005-2010 के दौराि, RPF असिकाररयों की सेर्वा शतों को सुिारिे के सलए एर्वं उन्हें अन्य रेलर्वे सेर्वाओं को बराबर लािे के सलए आर्वश्यक पररर्वतणिों हेतु सर्वसभन्न कदम उिाये गये परन्तु कोई अर्थणपूर्ण हल िहीं सिकल पाया सजसके कारर् RPF असिकाररयों जैसे ररट यासिकाकताणओं को समाि पद पर सस्र्थर रहे एर्वं प्रभासर्वत रहे| 3.[6] मूल ररट यासिकाकताणओं के अिुसार, रेलर्वे बोिण िे समस्या के सिपटाि के सलए कई मीटटंग्स की, परन्तु कोई प्रभार्वी कदम िहीं उिाये गये एर्वं मूल प्रत्यर्थी सिरंतर उपलब्ि ररसियों को प्रसतसियुसि पर असिकाररयों द्वारा भरते रहे और यहाोँ तक की जब योग्य असिकारी उपलब्ि र्थे एर्वं बल (Force) में र्वैिासिक प्रसतबन्ि के बार्वजूद तत्पिात मूल ररट यासिकाकताण उच्च न्यायालय में गये तर्था उपरोि राहतों की प्रार्थणिा की | 3.[7] कक आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय िे, ओ.एम कदिांक 20.11.2003 पर सर्विार तर्था सूसित करिे के बाद सजसके द्वारा आर पी एफ को ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे का मुख्य सिर्णय सलया गया र्था, सिदेसशत ककया कक RPF की संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वाओं के सन्दभण में सेर्वा सियमों के तौर पर RPF की आर्वश्यक संर्वगण संरििा छ: महीिे के भीतर पूर्ण हों | उच्च न्यायालय िे आगे पुिर्र्वणलोकि ककया एर्वं कैसबिेट ससिर्व को सिदेसशत ककया कक तीि सिकायों जैसे UPSC, DoPT एर्वं रेलर्वे मंत्रालय से एक िोिल असिकारी का िामांकि करिा | 3.[8] कदिांक 04.12.2012 के आक्षेसपत सिर्णय तर्था आदेश में ससम्मसलत सिदेशों से सिन्न तर्था व्यसर्थत होकर यूसियि ऑफ़ इंसिया एर्वं अन्य िे र्वतणमाि अपील दायर की |
4. श्री अमि लेिी, सर्वद्वाि ASG यूसियि ऑफ़ इंसियि के पक्ष की तरफ से प्रस्तुत हुए हैं, श्री पी. एस. पटर्वासलया, सर्वद्वाि र्वररष्ठ असिर्विा प्रत्यार्र्थणयों –मूल ररट यासिकाकताणओं के पक्ष की तरफ से प्रस्तुत हुए हैं- एर्वं श्री लूर्थरा, सर्वद्वाि असिर्विा भारतीय पुसलस सेर्वा केंरीय संस्र्था के पक्ष की तरफ से प्रस्तुत हुए हैं| 4.[1] श्री लेिी, सर्वद्वाि ASG यूसियि ऑफ़ इंसिया के पक्ष की तरफ से प्रस्तुत हुए हैं, िे पुरज़ोर कहा कक उच्च न्यायालय िे DoPT के ओ.एम कदिांक 20.11.2003 में RPF को ग्रुप ‘ए’ संगरित सेर्वा के तौर पर गरित करिे हेतु कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा स्र्वीकृत “सैद्धांसतक”अिुमोदि पर सर्वश्वास करके परमादेश जारी करके र्वस्तुत: गलती की है| यह तीव्रता के सार्थ सिर्वेदि ककया कक उच्च न्यायालय का इस सिष्कषण पर पहुोँििा कक सैद्धांसतक” अिुमोदि कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा स्र्वीकृत र्था, एक गलती है क्योंकक समाि ओ.एम सर्वशेषत: पैरा 2 में सििाणररत है कक प्रस्तार्व एक सामान्य संर्वगण पुिरीक्षर् प्रस्तार्व की तरह कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा आगे की कायणर्वाही के अिुमोदि के सलए संर्वगण पुिरीक्षर् ससमसत के समक्ष जाएगा| 4.[2] आगे यह सिर्वेदि ककया की यहाोँ तक की उपरोि प्रस्तार्व रेलर्वे मंत्रालय द्वारा कदिांक 12.07.2001 की स्पष्ट रूप से समथ्या ओ.एम पर भी आिाररत र्था सजसमें यह गलत र्वर्णि र्था कक RPF में अगले सििले ग्रेि से प्रशाससिक ग्रेि पदोन्नसत द्वारा भरे हुए हैं| श्री लेिी सर्वद्वाि ASG िे सभन्न ग्रेि तर्था समाि पदों को न्यायालय के ध्याि में लाया | यह सिर्वेदि ककया कक सभन्न प्रकार के ग्रेि हैं 1. उच्चतर प्रशाससिक ग्रेि 2. र्वररष्ठ प्रशाससिक ग्रेि 3. कसिष्ठ प्रशाससिक ग्रेि 4. र्वररष्ठ टाइम स्केल 5. कसिष्ठ टाइम स्केल |1993 के मोिोग्राफ (पररपत्र) में अपेसक्षत र्था कक सभी पदों कसिष्ठ टाइम स्केल से र्वररष्ठ प्रशाससिक ग्रेि पदोन्नसत द्वारा भरे होिे िासहए| यह सिर्वेदि ककया कक RPF द्वारा यह पूरा िहीं ककया गया क्योंकक DIG एर्वं IG के पदों पर प्रसतसियुसि के सलए प्रार्विाि है| 4.[3] श्री लेिी, सर्वद्वाि ASG िे यह सिर्वेदि ककया कक संर्वगण पुिरीक्षर् ससमसत िे अपिी मीटटंग कदिांक 02.03.2008 में मामले को RPF के प्रस्तार्व को संर्वगण पुिरीक्षर् के सलए ससमसत के ससिर्वों को सिदेसशत ककया | यह सिर्वेदि ककया कक ससमसत के ससिर्वों िे कदिांक 05.09.2007 को अपिी मीटटंग में RPF के संर्वगण पुिरीक्षर् की दो समस्याओं तर्था RPF को OGACs के स्र्वीकृत दजाण देिे की मुद्दों के सिपटाि का सिर्णय ककया | यह सिर्वेदि ककया जाता है कक मीटटंग के समिट्स, यह सर्वशेषत: र्वर्णि ककया गया कक कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग का ससिर्व रेलर्वे बोिण के अध्यक्ष के सार्थ सलाह करेगा| यह सिर्वेदि ककया जाता है कक RPF का सर्वशेषत: OGACs के रूप में गिि िहीं ककया गया र्था| यह सिर्वेदि ककया जाता है कक कदिांक 30.11.2007 के अिुसार, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग िे RPF को ग्रुप ‘ए’ संगरित सेर्वा के तौर पर गरित करिे हेतु एर्वं पदोन्नसत के अर्वसर के पहलू के बारे में बतािे हेतु रेलर्वे बोिण को संशोसित संर्वगण पुिरीक्षर् प्रस्तार्व को भेजिे के सलए सिर्वेदि ककया र्था| यह सिर्वेदि ककया जाता है कक तत्पिात प्रस्तार्व रेलर्वे मंत्रालय द्वारा कदिांक 07.03.2013 को अग्रेसषत ककया गया र्था तर्था इसे व्यय सर्वभाग के सार्थ सलाह करके जांि पड़ताल की गई| यह सिर्वेदि ककया जाता है कक प्रस्तार्व का संर्वगण पुिरीक्षर् ससमसत के द्वारा कदिांक 29.07.2013 को सर्विार ककया गया एर्वं 6th CPC की ससफ़ाररशों तर्था गृह मंत्रालय के द्वारा असभव्यि प्रयोजि को सर्विार में रिते हुए ससमसत िे OGACs के प्रासस्र्थसत की ससफ़ाररश िहीं की| 4.[4] आगे यह सिर्वेदि ककया जाता है की ककसी भी घटिा में, RPF 1993 के मोिोग्राफ में सर्वशेषता (IV) अर्थर्वा O.M. कदिांक 19/20.11.2009 को संतुष्ट िहीं करता| यह सिर्वेदि ककया जाता है कक ररट यासिकाकताणओं िे ि तो मोिोग्राफ 1993 ि ही ओ.एम कदिांक 19/20.11.2009 को िुिौती दी गई | यह सिर्वेदि ककया जाता है कक अत:, पररर्ामस्र्वरूप, RPF उपरोि सर्वशेषता को संतुष्ट ि करते हुए, OGACs के दजे की स्र्वीकृसत हेतु उच्च न्यायालय के पास परमादेश जारी करिे का कोई कारर् िहीं र्था|
5. आगे श्री लेिी, सर्वद्वाि ASG द्वारा यह सिर्वेदि ककया जाता है कक कदिांक 01.03.2005 के ओ.एम द्वारा अग्रेसषत सर्वश्वसिीय सेर्वा सियम प्रारूप स्पष्ट रूप से उतिा गलत र्था, सजतिा कक उच्च न्यायालय िे भती सियमों एर्वं OGACs के सर्वशेषताओं के ससर्वाय CRC एर्वं COS की मीटटंग, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग का कदिांक 13.11.2007 सूििा पत्र तर्था कदिांक 29.07.2013 की CRC की मीटटंग, को अिदेिा ककया| 5.[1] यह सिर्वेदि ककया जाता है कक अत: राहत को प्रदाि करिे के सलए आिारभूत तथ्य संतोषजिक िहीं है| RPF के पास स्र्वयं का असिकार स्र्थासपत िहीं र्था अत: परमादेश ररट द्वारा इसको प्रर्वृि करिे का कोई कारर् िहीं र्था | 5.[2] आगे श्री लेिी सर्वद्वाि ASG द्वारा सिर्वेदि ककया जाता है कक उच्च न्यायालय कुछ सिसित रटप्पसर्यों, पत्र व्यर्वहार एर्वं कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा जारी पत्र के आिार पर OGACs के सृजि में सक्षम िहीं र्था इसके सलए गृह सर्वभाग है सजसके पास RPF असिसियम 1957 एर्वं अन्य सुसंगत सियमों के अंतगणत असिकाररता क्षेत्र है| अपिे सिर्वेदि के समर्थणि में कक गृह मंत्रालय OGACs को प्रदाि करिे के सििाणरर् के सलए एक सक्षम प्रासिकारी है| श्री लेिी, ASG िे RPF असिसियम 1957 की िारा 8 पर सर्वश्वास ककया है| आर पी एफ असिसियम की िारा 3 एर्वं िारा 8 पर सर्वश्वास करके, यह सिर्वेदि ककया जाता है कक RPF संघ का एक सशस्त्र बल है, सजसका फैसला लेिा गृह मंत्रालय के सलए अपेसक्षत है एर्वं अत: इसकी स्र्वीकायणता एर्वं असिसूििा के सलए इसको कैसबिेट जािा ही पड़ेगा | 5.[3] आगे श्री लेिी, सर्वद्वाि ASG एर्वं श्री लूर्थरा जो IPS ससमसत की ओर से प्रस्तुत है, यह सिर्वेदि करते हैं कक RPF असिसियम 1957 के अंतगणत भी र्वैिासिक सियम है जो RPF में प्रसतसियुसि प्रदाि करता है| RPF सियमों की सर्वश्वसिीयता सियम 54 एर्वं 76 में है | यह सिर्वेदि ककया जाता है कक संर्वगण सजसमें मूल ररट यासिकाकताण है उन्हें OGACs घोसषत ककये गए हैं तब कोई प्रसतसियुसि िहीं हो सकती एर्वं IPS के संर्वगण से भी कोई प्रसतसियुसि पर िहीं आ सकता एर्वं बल (Force) स्र्थापिा के भीतर दो समािांतर प्रर्ाली होिे की सम्भार्विा है| 5.[4] सर्वद्वाि ASG एर्वं श्री लूर्थरा द्वारा सिर्वेदि है कक IPS संर्वगण से प्रसतसियुसि का र्वैिासिक प्रार्विाि है जैसा कक RPF सियमों में भी कदया गया है | यह सिर्वेदि है कक संसर्विाि के अिुच्छेद 312 के अंतगणत IPS एक असिल भारतीय सेर्वा है तर्था अिुच्छेद 312(2) के अंतगणत राष्ट्रीय सहतों में आर्वश्यक एर्वं उसित समझा जाए| यह सिर्वेदि ककया जाता है कक यह सेर्वा, संघ एर्वं राज्यों में समाि है और इसीसलए, संघ के सशस्त्र बल (Forces) सजसे केंर द्वारा सिर्मणत ककया गया, हेतु सर्वशेषत: उसित है | इसे राज्य सर्वषय में ‘जि आदेश’ तहत होते हुए भी, राज्य की सससर्वल शसि के सार्थ उपलब्ि ककया जा सकता है| यह सिर्वेदि है कक अत: यह योजिा संसर्विाि द्वारा कसल्पत संरििा के भीतर अिुरूप है जो अिुच्छेद 312 एर्वं संघ सूिी की प्रसर्वसष्ट 2A एर्वं राज्य सूिी की प्रसर्वसष्टयाोँ 1 एर्वं 2 में स्पष्ट है | आगे सर्वद्वाि ASG िे यह सिर्वेदि ककया कक सार्वणजासिक व्यर्वस्र्था को सुिारू रूप से िलािे के सलए िेटर्वकण के महत्र्व को ध्याि में रिकर पृर्थक्करर् को हटाकर एर्वं जुिार्व को सुसिसित करके एर्वं कृसष एर्वं व्यर्वसाय के सर्वकास के कायण को छोड़कर सस्ता एर्वं सुसर्विाजिक यातायात का सािि प्रदाि करिे हेतु रेलर्वे संपसि की सुरक्षा महत्र्वपूर्ण है | यह सिर्वेदि है कक RPF को अत: CAPF से अलग िहीं समझा जा सकता | 5.[5] IREC के सियम 106 पर सर्वश्वास करते हुए, यह सिर्वेदि है कक रेल सेर्वा को राजपसत्रत एर्वं अराजपसत्रत के तौर पर र्वगीकृत ककया गया है| यह सिर्वेदि है कक सियम 108 स्र्थापिा के सलए है तर्था सेर्वाओं के अंतगणत श्रेसर्यां सियम 106 में र्वर्र्णत है | यह सिर्वेदि है कक दो सियमों को समलाकर इकठ्ठा पढ़िे से यह प्रत्यक्ष है कक RPF रेल सेर्वा की सूिी में ससम्मसलत िहीं है| उपरोि सिर्वेदि के समर्थणि में, उसे IREC के सियम 103(43) पर सर्वश्वास है| यह सिर्वेदि है कक अत: DoPT को RPF के मामले से पूर्णतया हटाया िहीं जा सकता | 5.[6] आगे यह सिर्वेदि है कक र्वास्तर्व में, RPF में प्रसतसियुसि, असिल भारतीय सेर्वाओं का सदस्य होिे के िाते, रेलर्वे बोिण के प्रशाससिक सियंत्रर् के अंतगणत िहीं हो सकती| यह सिर्वेदि है कक मद 42(9) के अंतगणत व्यापार सियम के आबंटि के दूसरी सूिी स्र्वयं सििाणररत करती है कक असिल भारतीय सेर्वाओं एर्वं केन्रीय सरकार सेर्वा के मािर्वशसि सियोजि एर्वं व्यर्वसाय सियोजि के सामान्य िीसत प्रश्न कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग का सर्वषय मामला है | इसके आिार पर, DoPT संर्वगण पुिरीक्षर् ससमसत के सलए ससिर्व का कायण करती है सजसकी अध्यक्षता कैसबिेट ससिर्व के द्वारा की जाती है| यह सिर्वेदि है कक अत: ि तो कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग को RPF के मामलों से अलग रिा जाए ि के र्वल रेलर्वे मंत्रालय RPF पर अपिे सियंत्रर् का दार्वा कर सके | 5.[7] उपरोि सिर्वेदिों को करते हुए, यह सिर्वेदि है कक मूल ररट यासिकाकताणओं के पक्ष में कोई प्रर्वतणिीय असिकार ि हो, सर्वशेषकर, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग एर्वं /अर्थर्वा गृह मंत्रालय के ककसी अंसतम अिुमोदि की अिुपसस्र्थसत में, उच्च न्यायालय का परमादेश जारी करिा उसित िहीं है| उपरोि के समर्थणि में, श्री लेिी, सर्वद्वाि ASG िे State of Kerala Vs. Lakshmikutty (1986) 4 SCC 632 के मामले में इस न्यायालय के सिर्णय पर सर्वश्वास ककया | 5.[8] उपरोि के समर्थणि में तर्था इस न्यायालय के उपरोि सिर्णय पर सर्वश्वास करते हुए, यह ररट यासिका (सससर्वल) सं. 6314 of 2012 में उच्च न्यायालय द्वारा पाररत कदिांक 04.12.2012 के आक्षेसपत तर्था आदेश को ख़ाररज करके समाप्त करिे की प्रार्थणिा की है|
6. र्वतणमाि अपील में मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत श्री पटर्वासलया, सर्वद्वाि र्वररष्ठ असिर्विा द्वारा सर्वरोि ककया गया है उन्होंिे तीव्रता से सिर्वेदि ककया कक, र्वैसे, र्वतणमाि अपील सबलकुल भी अिुरक्षर्ीय िहीं है क्योंकक यह आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश के सर्वरुद्ध है जो पक्षकारों के असिर्विा की सहमसत के बाद उच्च न्यायालय द्वारा पाररत सहमसत आदेश है कक उच्च न्यायालय आर्वश्यक सिदेशों को जारी करते हुए मामले का सिपटाि कर सकता है | यह बताया गया कक अपीलार्थी सं. 2 के असिर्विा ससहत पक्षकारों के असिर्विा सिदेशों के जारी होिे हेतु सहमत हैं एर्वं तत्पिात जब उच्च न्यायालय िे ररट यसिका का समझौते की शतों पर सिपटाि ककया है, अत: अपील अिुरक्षर्ीय िहीं है| 6.[1] आगे मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि र्वररष्ठ असिर्विा द्वारा यह सिर्वेदि है कक र्वतणमाि अपील भी गृह मंत्रालय के सम्बन्ि पर अिुरक्षर्ीय िहीं है, क्योंकक गृह मंत्रालय उच्च न्यायालय के समक्ष आर्वश्यक पक्षकार अर्थर्वा पक्षकार िहीं र्था| यह सिर्वेदि है कक यूसियि ऑफ़ इंसिया जो रेलर्वे मंत्रालय की ओर से प्रस्तुत र्था, िे उच्च न्यायालय के सिर्णय तर्था आदेश को िुिौती िहीं दी तर्था गृह मंत्रालय पूर्णत: अपररसित है एर्वं असिसस्र्थसत में भी िहीं है कक उच्च न्यायालय की िंि पीि के आदेश को िुिौती दी| 6.[2] मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि र्वररष्ठ असिर्विा िे आगे यह बताया कक जहाोँ तक कक भारत सरकार (कायण आबंटि ) सियम, 1961 का सम्बन्ि है गृह मंत्रालय RPF के ग्रुप ‘ए’ संर्वगण के सार्थ सम्बंसित िहीं है बसल्क रेल मंत्रालय RPF को ससम्मसलत करके रेलर्वे के सभी मामलों के सम्बन्ि में सशि है | यह सिर्वेदि है की उपरोि सियम पुसलस संगििों की सूिी को कदिायेगी जो गृह मंत्रालय के कायण आबंटि के भाग है| यह सिर्वेदि है कक सूिी में RPF का िाम िहीं है सजससे मूल ररट यासिकाकताण सम्बन्ि रिते हैं | यह सिर्वेदि है कक रेल मंत्रालय भी आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश को स्र्वीकार करती है एर्वं र्वास्तर्व में, आक्षेसपत सिदेशों के कायाणन्र्वयि के सलए सिम्नसलसित कदम सलये गए हैं| आगे यह सिर्वेदि है कक उच्च न्यायालय का सिर्णय, जो र्वैिासिक सियमों के अिुरूप एर्वं समाि है | यह सिर्णय रेल मंत्रालय द्वारा स्र्वीकायण है जो एक संर्वगण सियंत्रक मंत्रालय है| 6.[3] मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि् र्वररष्ठ असिर्विा द्वारा आगे यह सिर्वेदि है कक, यहाोँ तक कक अन्यर्था भी, गुर्ागुर् पर भी उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आक्षेसपत सिर्णय तर्था आदेश का इस न्यायालय द्वारा हस्तक्षेप अपेसक्षत िहीं है, यह सिर्वेदि है कक सार्विािीपूर्वणक सर्विार करते हुए रेल मंत्रालय द्वारा सलया गया सिर्णय कक RPF को OGACs के तौर पर समझिा एर्वं व्यर्वहार करिा एर्वं उच्च न्यायालय िे सिदेशों को जारी करिे में कोई गलती िहीं की सर्वशेषकर, जब कई र्वषों तक अंसतम फ़ै सला/ अिुमोदि िहीं सलया गया तर्था मूल ररट यासिकाकताणओं तर्था RPF सदस्य पीसड़त रहे | 6.[4] मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि् र्वररष्ठ असिर्विा िे र्वषण 2008 में प्रस्तुत सद्वतीय प्रशाससिक सुिार आयोग द्वारा फाइल ररपोटण को ध्याि में लाया गया | यह सिर्वेदि है कक उि से प्रस्तार्विा सलििे के बाद सभन्न पहलुओं पर ध्याि कदया | यह सिर्वेदि है कक उि आयोग िे प्रस्तार्विा सलििे के बाद सुिार के सलए सभन्न पहलुओं पर ध्याि कदलाया| यह सिर्वेदि है कक उि ररपोटण एक तासलका के बारे में र्वर्णि करती है जो भारत सरकार के सभी संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सससर्वल सेर्वाओं को ससम्मसलत करती है| यह सिर्वेदि है की मद सं. 15,22, 23,24 और 25 में सजि सेर्वाओं का िाम है र्वे RPF, BSF, CISF, CRPF and ITBP आकद िमशः है | यह सिर्वेदि है कक उि सूिी का स्त्रोत कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग र्थे| 6.[5] मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि् र्वररष्ठ असिर्विा िे हमारा ध्याि 2010 में भारत सरकार, कार्मणक मंत्रालय, सार्वणजासिक सशकायत एर्वं पेंशि, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सससर्वल सेर्वाओं के संर्वगण पुिरीक्षर् में लाया | यह सिर्वेदि है कक संर्वगण सियंत्रक प्रासिकारी के सार्थ सर्वस्तृत सर्विार सर्वमशण ककया गया र्था उि क्षेत्रों को पहिाििे हेतु सजिमें संर्वगण समीक्षा करते सुिार की आर्वश्यकता है एर्वं सर्विार सर्वमशण, कदशा सिदेश के आिार पर संशोसित हुए एर्वं केंरीय ग्रुप ‘ए’ सेर्वाओं का संर्वगण प्रबंिि पर िया मोिोग्राफ तैयार हुआ| यह सिर्वेदि है कक संर्वगण पुिरीक्षर् पर संशोसित मोिोग्राफ सर्वशेषकर प्रदाि करता है कक RPF एक OGACs है| 6.[6] मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि र्वररष्ठ असिर्विा िे इस न्यायालय का ध्याि कार्मणक मंत्रालय, सार्वणजासिक सशकायत एर्वं पेंशि, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा जारी ओ. एम. कदिांक 14.12.2010 पर कदलाया जो केन्रीय ग्रुप ‘ए’ सेर्वाओं के संर्वगण पुिरीक्षर् पर समासहत कदशा सिदेशों के सार्थ व्यर्वहार करता है | यह सिर्वेदि है कक उपरोि ओ.एम. में अिुलग्नक 1 केन्रीय ग्रुप ‘ए’ सेर्वाओं की श्रेर्ीर्वार सूिी देता है | यह सिर्वेदि है कक पहली श्रेर्ी गैर-तकिीकी सेर्वाओं, दूसरी तकिीकी सेर्वाओं, तीसरी स्र्वास्थ्य सेर्वाओं एर्वं िौर्थी अन्य सेर्वाओं की है| यह सिर्वेदि है कक अन्य सेर्वाओं सजसमें CRPF, CISF, BSF एर्वं ITBP एर्वं गैर तकिीकी सेर्वा है उिमें RPF ससम्मसलत है| यह सिर्वेदि है कक अत:, एक बार इस दजे को स्र्वीकार करते हुए ओ. एम. जारी ककया गया र्था यह िहीं कहा जा सकता कक यह ऑकफस िोट अर्थर्वा िीसत सर्विार पर आिाररत र्था सजसे यूसियि ऑफ़ इंसिया की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि ASSG के द्वारा भी प्रस्तुत ककया गया है | 6.[7] अत: मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि् र्वररष्ठ असिर्विा द्वारा यह बताया गया कक उच्च न्यायालय का परमादेश ररट जारी करिा न्यायोसित है एर्वं अर्वलोकि करिा कक OGACs को स्र्वीकृत गैर- कायाणत्मक सर्विीय उन्नसतकरर् के सहत मूल ररट यासिकाकताणओं को प्रदाि होिे िासहए क्योंकक संर्वगण का पुिरीक्षर् हो गया है एर्वं संगरित एर्वं असंगरित संर्वगों के बीि अंतर कम हो गया है| 6.[8] मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि र्वररष्ठ असिर्विा िे अपिे सिर्वेदि के समर्थणि में, RPF असिसियम, 1957 की िारा 10 पर सर्वश्वास प्रकट ककया है और बताया कक महासिदेशक सक्षम प्रासिकारी है एर्वं गृह मंत्रालय िहीं|
7. अब, जहाोँ तक कक गृह मंत्रालय एर्वं आई पी एस ससमसत द्वारा यूसियि ऑफ़ इंसिया की ओर से सिर्वेदि है कक यकद RPF को OGACs संर्वगण के तौर पर समझा जाता है तो उस मामले में, यह प्रसतसियुसि पर पदों को भरिे के सम्बन्ि में र्वैिासिक प्रार्विािों के सर्वरुद्ध होगी | रेलर्वे सुरक्षा बल (संशोिि) असिसियम, 1985 की िारा 19 पर सर्वश्वास ककया गया है| यह सिर्वेदि है कक उपरोि प्रार्विाि स्पष्ट रूप से ग्रुप ‘ए’ पद पर ककसी भी प्रसतसियुसि को प्रसतबंसित करते हैं| यह सिर्वेदि है कक क्या ककसी भी व्यसि को RPF में ग्रुप ‘ए’ पद पर प्रसतसियुि ककया जा सकता है, इसे कदल्ली उच्च न्यायालय में ररट यासिका सं. 6081 of 2010 द्वारा पररक्षर् ककया गया है एर्वं RPF (संशोसित) असिसियम एर्वं सियमों के सुसंगत प्रार्विािों के बाद, कदल्ली उच्च न्यायालय िे अर्वलोकि ककया कक रेलर्वे सुरक्षा सेर्वाओं में कोई भी प्रसतसियुसि एर्वं/अर्थर्वा पदों को प्रसतसियुसि आिार पर भरा िहीं जा सकता| यह सिर्वेदि है कक उि सिर्णय रेलर्वे मंत्रालय के द्वारा स्र्वीकार ककया गया है|
8. मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि र्वररष्ठ असिर्विा िे प्रभात रंजि ंसंह बिाम आर. के. कुशर्वाहा मामले में सससर्वल अपील सं. 9176 of 2018 में कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग की शसि पर अत्यसिक सर्वश्वास ककया| यह सिर्वेदि है कक, उपरोि सिर्णय में, इस न्यायालय िे यह अर्वलोकि ककया कक कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा जारी ज्ञापि से रेलर्वे प्रसतबंसित िहीं है एर्वं अपिे कमणिाररयों की सेर्वा शतें तय करिे के अपिे सियम बिािे में सशि है|
9. उपरोि सिर्वेदिों को करते हुए, र्वतणमाि अपील को ख़ाररज करिे की प्रार्थणिा की गई |
10. सम्बंसित पक्षकारों की ओर से प्रस्तुत सर्वद्वाि असिर्विाओं को सर्वस्तृत रूप से सुिा | 10.[1] एक लघु प्रश्न जो इस न्यायालय के समक्ष सर्विार के सलए आया है कक मामले के तथ्यों एर्वं पररसस्र्थसतयों को देिते हुए, क्या उच्च न्यायालय िे, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग, भारत सरकार के ओ. एम सं. 96/E(GR)I/16/I कदिांक 08.05.2003 सजसमें संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर RPF को गरित करिे का सैद्धांसतक सिर्णय सलया गया है, पर सर्विार करके गलती की है एर्वं इसके फलस्र्वरूप RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वाओं के सम्बन्ि में सेर्वा सियमों को पूर्ण करिे हेतु RPF के संर्वगण संरििा के आगे के कदम उिािे के सलए सिदेसशत करिे में? 10.[2] प्रारंभ से ही, उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश से ये ध्याि देिे की आर्वश्यकता है कक आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश एक सहमसत आदेश है जो उच्च न्यायालय िे, पक्षकारों की सहमसत के बाद पाररत ककया र्था कक न्यायालय आर्वश्यक सिदेशों को जारी करिे के बाद मामले का सिपटाि कर सकता है| अत:, तत्पिात, उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश को िुिौती देिा अपीलार्थी के सलए असिकृत िहीं होगा जो एक अंतररम आदेश है| इस िरर् पर, यह सूसित करिा अपेसक्षत है कक मूल प्रत्यार्र्थणयों को सजसमें रेलर्वे मंत्रालय, कार्मणक मंत्रालय, सार्वणजासिक सशकायत एर्वं पेंशि, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग र्थे, िे कोई प्रसत शपर्थ पत्र िहीं फाइल ककया, पयाणप्त समय समलिे पर भी| अत: ककसी भी प्रत्यर्थी िे कभी भी इसका सर्वरोि िहीं ककया कक ओ.एम कदिांक 20.11.2003 कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग का एक सैद्धांसतक सिर्णय िहीं र्था जो RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे के सलए र्था | पररसस्र्थसतयों के अंतगणत, र्वैसे, तत्पिात, अपीलार्थी के सलए आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश को िुिौती देिे का हक़ िहीं होगा सजसके द्वारा उच्च न्यायालय िे ररट यासिका का सिपटाि परमादेश को जारी करके ककया कक छ: महीिे के भीतर, RPF के संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वाओं के रूप में सेर्वा सियमों के रूप में RPF की आर्वश्यक संर्वगण संरििा पूर्ण होंगी | उपरोि सिदेश उच्च न्यायालय के द्वारा इस तथ्य पर सर्विार करते हुए जारी ककया गया है कक बहुत पहले 2003 में ओ.एम. कदिांक 20.11.2003 में कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सससर्वल सेर्वा के तौर पर गरित करिे का ‘सैद्धांसतक’ सिर्णय सिर्णय सलया गया र्था एर्वं तत्पिात, यहाोँ तक की र्वषण 2005 में, प्रारूप सेर्वा सियम, रेलर्वे मंत्रालय द्वारा, ग्रेि-र्वार संर्वगण संरििा का प्रयोग करिे के बाद, तैयार ककये गए र्थे एर्वं उपरोि के बार्वजूद, RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे का कोई अंसतम सिर्णय िहीं सलया गया र्था| पररसस्र्थसतयों के अंतगणत, उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश में इस न्यायालय द्वारा ककसी भी तरह के हस्तक्षेप की आर्वश्यकता िहीं है |
11. यहाोँ तक की गुर्ों के आिार पर भी, अपीलार्थी का कोई मामला िहीं है| 11.[1] अपीलार्थी (यों) के अिुसार, ओ.एम कदिांक 20.11.2003 को यह िहीं कहा जा सकता कक यह कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा स्र्वीकृत सैद्धांसतक’ अिुमोदि है सजसमें RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे के सलए कहा गया है एर्वं प्रस्तार्व को संर्वगण पुिरीक्षर् ससमसत के समक्ष अिुमोदि हेतु रिा जायेगा| र्वैसे, ओ.एम कदिांक 20.11.2003 को पढ़कर, उच्च न्यायालय िे इसे कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा स्र्वीकृत ‘सैद्धांसतक’ अिुमोदि समझकर न्यायोसित ककया है सजसमें RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे का प्रस्तार्व है| र्वैसे उि ओ.एम के पैरा (2) में र्वर्र्णत है कक प्रस्तार्व सामान्य संर्वगण पुिरीक्षर् प्रस्तार्व की तरह सर्वभाग के सलए आगे की कायणर्वाही के सलए संर्वगण पुिरीक्षर् ससमसत के समक्ष अिुमोदि हेतु रिा जायेगा | क्योंकक ससफण ‘सैद्धांसतक’ सिर्णय संर्वगण पुिरीक्षर् ससमसत के समक्ष रिा गया र्था, यह िहीं कहा जा सकता कक ओ.एम कदिांक 20.11.2003 में ससम्मसलत ‘सैद्धांसतक’ फैसला असग्रम अिुमोदि के अिीि र्था एर्वं /अर्थर्वा कोई सैद्धांसतक’ सिर्णय िहीं सलया गया र्था| यह सूसित करिा अपेसक्षत र्था कक ओ.एम कदिांक 20.11.2003, को जारी करते समय, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग िे रेलर्वे मंत्रालय के ओ. एम कदिांक 08.05.2003 पर सर्विार ककया र्था सजसके द्वारा रेलर्वे मंत्रालय िे एक सर्वस्तृत िोट द्वारा RPF को एक संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे का सुझार्व कदया र्था| अत:, अपीलार्थी(यों) एर्वं कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग की ओर से यह सिर्वेदि कक कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग का ओ. एम कदिांक 20.11.2003 सजसे कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा ‘सैद्धांसतक’ सिर्णय िहीं कहा जा सकता जो RPF के संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गिि हेतु प्रस्तासर्वत है, िहीं स्र्वीकार ककया जा सकता| यह पुि: ध्याि कदया गया कक उच्च न्यायालय को, रेलर्वे मंत्रालय एर्वं कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग ससहत सभी के द्वारा यह सर्वश्वास कदलर्वाया गया कक कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग द्वारा जारी ओ.एम. कदिांक 20.11.2003 सैद्धांसतक’ अिुमोदि है सजसमं RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गिि प्रस्तासर्वत र्था|
12. सर्वभाग की एक सशकायत जो कदिती है जहाोँ तक कक RPF से सम्बंसित र्वाद में कौि एक सक्षम प्रासिकरर् है, रेल मंत्रालय एर्वं/अर्थर्वा गृह मंत्रालय एर्वं/अर्थर्वा कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग है| यह सूसित करिा अपेसक्षत है कक, शुरुआत से ही, रेलर्वे मंत्रालय िे RPF को एक संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे का सुझार्व कदया एर्वं प्रस्तार्व ककया एर्वं/अर्थर्वा सर्विार ककया है, जो 2001 से ही उिके पत्र व्यर्वहार से ही स्पष्ट है, यहाोँ तक कक भारत सरकार (कायण आबंटि) सियमों, का सर्विार करके, कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग का असिकार क्षेत्र, रेलर्वे सेर्वाओं को छोड़कर, केन्रीय सेर्वाओं से सम्बंसित सामान्य प्रश्न जो भती पदोन्नसत एर्वं र्वररष्ठता से जुड़े हैं, से हैं| कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग का प्रासिकार रेलर्वे सर्वभाग के अंतगणत पदों को छोड़कर, भारत सरकार के अंतगणत सससर्वल पदों पर गैर-भारतीय की सियुसि पर होगा| यह आगे प्रदाि करता है कक रेलर्वे मंत्रालय का प्रासिकार सभी मामलो पर है सजसमें रेलर्वे की आय भी ससम्मसलत है| अत: कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग एर्वं/ अर्थर्वा गृह मंत्रालय का RPF की सेर्वाओं के सम्बन्ि में व्यर्वहार करिे का कोई प्रासिकार िहीं होगा| 12.[1] दूसरी बात जो ध्याि देिे योग्य है कक रेलर्वे मंत्रालय एर्वं कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग एर्वं अन्य प्रासिकाररयों के बीि पत्र-व्यर्वहार से स्पष्ट है की शुरू से ही, र्वैसे, रेलर्वे मंत्रालय िे RPF को एक संगरित ग्रुप ‘ए’ केंरीय सेर्वा के तौर पर गरित करिे का सुझार्व कदया र्था|
13. एक सर्वरोि जो RPF को एक संगरित ग्रुप’ए’ केन्रीय सेर्वाओं के तौर पर गरित/ समझिे के सर्वरुद्ध है र्वह सर्वशेषताओं में से एक सर्वशेषता है अर्थाणत् सर्वशेषता (iv), सभी पद JTS से SAG स्तर तक सभी पदोन्नसत से भरे जािे िासहए, संतोषजिक िहीं है क्योंकक DIG एर्वं IG के पदों पर, RPF भती सियमों में प्रसतसियुसि का प्रार्विाि है| इस िरर् पर, यह ध्याि देिे योग्य है कक IG (RPF) के पद को छोड़कर, अन्य पदों को पदोन्नसत अर्थर्वा प्रसतसियुसि पर भरा जािा है| अत: क्योंकक ससफण कुछ पदों को प्रसतसियुसि द्वारा भी भरा जा सकता है, एर्वं अन्यर्था, यकद पदों को पदोन्नसत द्वारा भी भरा जािा अपेसक्षत है, यह िहीं कहा जा सकता कक सर्वशेषता (iv) संतोषजिक िहीं है| दुभाणग्यपूर्ण, पदों को केर्वल प्रसतसियुसि द्वारा भरा जा रहा है पररर्ामस्र्वरूप जहाोँ तक आर पी एफ के असिकाररयों का सम्बन्ि है उन्हें गसतरोि की सस्र्थसत से पीसड़त होिा पड़ रहा है एर्वं र्वे अपिे पदोन्नसत के सलए बहुत र्वषों से इंतज़ार कर रहे हैं| ि तो उिको पदोन्नसत प्राप्त हो रही है ि ही उिको OGACs समझा जाता है एर्वं, इसीसलए, उिको सहतों से भी र्वंसित ककया जा रहा है | 13.[1] इस िरर् पर, यह ध्याि देिे योग्य है कक यहाोँ तक कक रेलर्वे मंत्रालय िे भी र्वषण 2005 में प्रारूप सियमों को ग्रेि र्वार संर्वगण संिरिा को प्रयोग में लािे का दासयत्र्व लेिे के बाद तैयार ककया र्था | 13.[2] उपरोि सिर्वेदिों एर्वं तथ्यों एर्वं पररसस्र्थसतयों एर्वं ररक्िण पर तथ्यों पर सर्विार करते हुए, जब उच्च न्यायालय िे कार्मणक एर्वं प्रसशक्षर् सर्वभाग के ओ.एम कदिांक 20.11.2003 के ‘सैद्धांसतक’ सिर्णय/ अिुमोदि पर सर्विार करके एर्वं/अर्थर्वा समझकर मंिेमस जारी ककया है जो RPF को एक संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वाओं के तौर पर गरित करिे हेतु है एर्वं फलस्र्वरूप अपीलार्थी(यों) को RPF के संर्वगण संरििा हेतु आगे के कदम लेिा एर्वं RPF के संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के सन्दभण में सेर्वा सियमों को पूर्ण करिे हेतु सिदेश जारी करिे से सम्बंसित है| यह िहीं कहा जा सकता कक उच्च न्यायालय िे कोई गलती की है| RPF को संगरित ग्रुप ‘ए’ केन्रीय सेर्वा के रूप में सही समझा और सर्विार ककया गया है|
14. उपरोि को ध्याि में रिते हुए एर्वं उपरोि र्वर्र्णत कारर्ों हेतु SLP (सससर्वल) सं. 12393 of 2013 से उत्पन्न र्वतणमाि अपील िाररज होिे योग्य है एर्वं तदिुसार िाररज की जाती है | मामले के तथ्यों एर्वं पररसस्र्थसतयों में, कोई कोस्ट (cost) िहीं होगा | सससर्वल अपील @ एस एल पी (सससर्वल) सं. 35548-54 of 2015 & 13937/2016
15. ररट यासिका (सससर्वल) सं. 153 of 2013 एर्वं अन्य सम्बंसित ररट यासिकाओं में कदिांक 03.09.2015 उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश से सिन्न एर्वं व्यसर्थत होकर एर्वं ररट यासिका (सससर्वल) सं. 3529/2015 में पाररत कदिांक 15.12.2015 सिर्णय एर्वं आदेश सजसमें उच्च न्यायालय िे यही अिुमसत दी है जो सिजी प्रत्यार्र्थणयों द्वारा प्रस्तुत की गयी है एर्वं ओ.एम कदिांक 28.10.2013 एर्वं अन्य पत्रों को समाप्त एर्वं रद्द कर कदया है, सजसके द्वारा मूल ररट यासिकाकताणओं की गैर-कायाणत्मक सर्विीय उन्नतीकरर् को प्रदाि करिे की प्रार्थणिा को अस्र्वीकार कर कदया र्था एर्वं सजसके द्वारा उच्च न्यायालय िे प्रत्यार्र्थणयों को उसमें सिदेसशत ककया है कक NFFU के लाभों को प्रदाि करिे की उपयुि असिसूििा जारी करें सजसकी संस्तुसत 6th केन्रीय र्वेति आयोग के द्वारा मूल ररट यासिकाकताणओं को की गई हो | मूल प्रत्यार्र्थणयों- यूसियि ऑफ़ इंसिया एर्वं अन्य िे र्वतणमाि अपील दायर की है |
16. र्वतणमाि अपील में प्रस्तुत तथ्य सिम्नसलसित हैं| कक मूल ररट यासिकताणओं केन्रीय ररज़र्वण पुसलस बल की सेर्वा में है, सभी को NFFU से, जो अन्य केन्रीय सेर्वा के ग्रुप ‘ए’ असिकाररयों को मान्य है, र्वंसित कर कदया गया र्था| अत: र्वे मूल प्रत्यार्र्थणयों को िुिौती देिे जो इसमें अपीलार्थी हैं, उच्च न्यायालय गए र्थे, सजसमें उिकी NFFU को प्रदाि करिे की प्रार्थणिा जो अन्य केन्रीय सरकार के ग्रुप ‘ए’ असिकाररयों को मान्य र्था, को अस्र्वीकार कर कदया गया र्था 16.[1] यह प्रकट है कक उच्च न्यायालय के समक्ष कायणर्वासहयों की सर्विारिीिता के दौराि, उच्च न्यायालय िे आदेश कदिांक 26.09.2013 द्वारा इसमें अपीलार्र्थणयों- मूल प्रत्यार्र्थणयों को CRPF,BSF एर्वं Indo-Tibetan Border Police के ग्रुप ‘ए’ असिकाररयों को NFFU को प्रदाि करिे के सम्बन्ि में समस्या को पुि: परीक्षर् के सलए सिदेसशत ककया| र्वैसे, गृह मंत्रालय द्वारा जारी ओ.एम कदिांक 28.10.2003, द्वारा र्वाद सर्वषय मूल ररट यासिकाकताणओं के सर्वरुद्ध सिर्र्णत र्था| अत:, मूल ररट यासिकाकताणओं िे ररट यासिकाओं में संशोिि ककया एर्वं तत्कालीि ओ.एम कदिांक 28.10.2013 को िुिौती दी| 16.[2] उच्च न्यायालय के समक्ष, मूल ररट यासिकाकताणओं िे परस्पर सिम्नसलसित राहतों के सलए प्रार्थणिा की |
1. परमादेश ररट उिको प्रदाि की जाये अर्थाणत् CAPF के कायणकारी ग्रुप ‘ए’ असिकारी को कदिांक 01.06.2006 से NFFU लाभ लागू ककया जाये, जो ओ.एम कदिांक 24.04.2009 द्वारा PB-3 एर्वं PB-4 के अंतगणत ग्रुप ‘ए’ सेर्वा के अन्य असिकाररयों को प्रदाि ककया जाता है|
2. कक, उिको कदिांक 01.01.2006 से सभी महत्र्वपूर्ण लाभों ससहत औपिाररक रूप से एक संगरित ग्रुप ‘ए’ सेर्वा घोसषत ककया जाए |
17. यह उच्च न्यायालय के समक्ष मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से र्वाद र्था कक सभी मूल ररट यासिकाकताण केंरीय ग्रुप ‘ए’ सेर्वा से सम्बंसित हैं| यह उच्च न्यायालय के समक्ष मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से र्वाद र्था कक र्वषण 1986 से CRPF,BSF इत्याकद को संगरित ग्रुप ‘ए’ सेर्वाओं के जैसे समझा एर्वं घोसषत ककया गया र्था| यह मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से र्वाद र्था कक “ग्रुप ‘ए’ केंरीय सेर्वाओं के संर्वगण प्रबंिि” पर मोिोग्राफ, में BSF एर्वं CRPF केन्रीय सेर्वाओं (ग्रुप ‘ए’) की सूिी में ससम्मसलत हैं| 17.[1] यह मूल ररट यासिकाकताणओं की ओर से र्वाद र्था, कक, शब्द “संगरित” की सर्वसिक सस्र्थसत केन्रीय ग्रुप ‘ए’ सेर्वाओं की उसित पहिाि के सलए िहीं है, और इस शब्द को प्रशाससिक सुसर्विा के सलए ककसी के द्वारा कुछ समय पहले प्रयोग ककया गया, सजसके पररर्ामस्र्वरूप दुसर्विा उत्पन्न हो गयी है| यह सिर्वेदि है कक मोिोग्राफ सूिी में 58 सेर्वाएं ससम्मसलत हैं सजिको गैर तकिीकी सेर्वाओं, तकिीकी सेर्वाओं, स्र्वास्थ्य सेर्वाओं एर्वं अन्य सेर्वाओं अर्थाणत् ITBP, CISF,BSF एर्वं CRPF को िम सं. 50, 51, 52 एर्वं 53 में श्रेर्ीकृत ककया गया है| 17.[2] मूल ररट यासिकाकिाणओं की तरफ से यह भी बताया गया है कक र्वह सब एक संगरित सेर्वा, सजसमे सर्वशेषता (iv) भी ससम्मसलत है, को पूरा करते है | यह भी बताया गया कक, जहाोँ तक की सर्वशेषता (iv) का संबंि है, एक प्रसतसियुि व्यसि अपिे ही कैिर सियमो के प्रभार्व से केर्वल संर्वगण बाह्य पदों के प्रसत ही सियुि हो सकता है, इससलए JTS से SAG स्तरों के सभी ररि पदों को केर्वल कैिर असिकाररयों से पदोन्नसत द्वारा भरा जाता है | मूल ररट यासिकाकिाणओं िे यह भी आगे बताया कक, गसतरोि समस्यओं से उभरिे हेतु, छिे र्वेति आयोग िे सर्वसभन्न संगरित ग्रुप “A” सेर्वाओं में सभी ग्रुप “A” असिकाररयों को NFFU देिे की ससफाररश की र्थी| यह बताया गया है कक, गसतरोि की समस्या से पीसड़त ग्रुप-A असिकाररयों को NFFU देिे के लक्ष्य का आशय पीछे-हटिे के सर्वकल्प की तरह र्था, जब सामान्य पदोन्नसतयां सर्वसभन्न कारर्ों के कारर् िहीं हो पाती | यह भी बताया गया कक, इससलए NFFU का लाभ, संगिि/संर्वगण, जो असत गसतरोि की समस्या से जूझ रहे हैं, को देिा ही िासहए| यह सिर्वेदि है कक, CPMFs गसतरोि की समस्या से जूझ रहे हैं और इससलए उन्हें NFFU का गैर-अिुदाि अत्यासिक मिमािा व्यर्वहार है |
18. उपरोि सभी यासिकाओं का भारत सरकार िे सर्वरोि ककया | यह बताया गया कक, कदिांक 28.10.13 का कायाणलय ज्ञापि सिर्वेदिों और मूल ररट यासिकाकिाणओं के मामले को ध्यािपूर्वणक सर्विार करिे के बाद जारी ककया गया र्था और इससलए एक सिेत सिर्णय सलया गया र्था कक, सभी मूल ररट यासिकाकिाणओं, जो CRPF से सम्बंसित है, को संगरित ग्रुप-A सेर्वा के रूप में िहीं मािा जा सकता हैं | 18.[1] भारत सरकार द्वारा यह बताया गया कक, CRPF और BSF को संगरित ग्रुप-A सेर्वा के रूप में माििे से पूर्वण छ: सर्वशेषतओं का पूरा होिा जरूरी हैं | यह भी बताया गया कक, हांलाकक सभी मूल ररट यासिकाकिाण–CRPF के कमणिारी पहले तीि सर्वशेषताओं को पूरा करते हैं, कफर भी, र्वे 4 और 6 सर्वशेषता को पूरी िहीं करते है | यह भी बताया ककया गया कक, यद्यसप, यकद सभी छ: सर्वशेषताऐ पूरी हो जाती, इन्हें कुछ अन्य मािदंि को भी पूरा करिा पड़ेगा, सजसके सलए कदिांक 19/20.11.2009 के कायाणलय ज्ञापि पर ध्याि आकर्षणत ककया गया| 18.[2] कक, इसके बाद, उच्च न्यायालय द्वारा दोिों पक्षों के सिर्वेदिो और ररक्िण-तथ्यों पर सर्विार करिे के बाद, सर्वसशष्टतया, समय-समय पर DoPT द्वारा जारी मोिोग्राफ द्वारा सिष्कषण सिकाला गया कक CPMFs को केंरीय समूह ‘A’ सेर्वा के भाग के रूप में दशाणया गया हैं और र्वे संगिि की शतण को पूरा करते हैं | उच्च न्यायालय िे मािा कक, भारत सरकार को यह पहले ही स्र्वीकार लेिा िासहए र्था कक, BSF और CRPF संगरित सेर्वाएोँ हैं और बसल्क, उन्हें संगरित सेर्वाओं के उदाहरर् के रूप में भी इस्तेमाल ककया गया हैं | र्वषण 1986, 1993 और 2010 के मोिोग्राफ पर सर्विार करते हुए, उच्च न्यायालय िे देिा कक, उसमे CMPFs को केंरीय सससर्वल सेर्वा के ग्रुप-A भाग के रूप में दशाणया गया हैं | उपरोि तथ्यों पर पहुंििे और सर्विारिे के बाद, उच्च न्यायालय िे आक्षेसपत सिर्णयों और आदेशों द्वारा कदिांक 28.10.2013 के कायाणलय ज्ञापि को और अन्य समर्वगी पत्रों को रद्द कर कदया, सजसके द्वारा मूल ररट यासिकाकिाणओं को NFFU के अिुदाि हेतु प्रार्थणिा को िामंजूर ककया गया र्था और सजसके पररर्ामस्र्वरूप अपीलार्थीयो-मूल प्रत्यार्र्थणयों को सिदेश कदया गया कक, र्वे मूल यासिकाकताणओ को छिे र्वेति आयोग द्वारा ससफाररश की गई NFFU के लाभ देिे हेतु आक्षेसपत असिसूििा जारी करें| 18.[3] आक्षेसपत सिर्णयों और आदेशो से असंतुष्ट, भारत सरकार और अन्य, िे र्वतणमाि अपीलों को दायर ककया | 19 फ़ासज़ल ASG श्री लेिी िे पुर ज़ोर कहा कक, उच्च न्यायालय िे, यह िाररत करके कक CMPFs को जाि-बूझकर OGAS का घटक बिाया गया र्था, आक्षेसपत सिर्णयों और आदेशो को पाररत करके र्वास्तर्व में त्रुरट की है और इस प्रकार से CRPF को NFFU के लाभ को प्रदाि करिे हेतु असिसूििा जारी करिे हेतु सिदेश देिे में र्वास्तसर्वक त्रुरट की है| 19.[1] फ़ासज़ल ASG िे यह भी बताया कक, OGAS में ककसी भी सेर्वा को शासमल होिे के सलए, छ: सर्वशेषताओ को पूरा करिा पड़ता है, जैसा कक 1993 के मोिोग्राफ और कायाणलय ज्ञापि कदिांक 19/20.11.2009 में देिा गया हैं | उन्होंिे कहा कक, प्रस्तुत मामले में, CRPF िौर्थी सर्वशेषता को पूरा िहीं करते है, अर्थाणत JTS और SAG स्तर तक की सभी ररसियां को अगली सििले स्तर से पदोन्नसत द्वारा भरा जािा| यह भी बताया गया कक, कदिांक 19/20.11.2009 के कायाणलय ज्ञापि में भी, पैरा 2, में यह सर्वशेष रूप से बताया गया है कक, यद्यसप, सेर्वा/कैिर उपरोि मािदंिो – छ: सर्वशेषताओं को पूरा करता हो, स्र्वतः रूप से ही उन्हें OGAS की प्रासस्र्थसत प्रद्ि िहीं की जाएगी | यह भी आगे बताया गया है कक, एक संगरित ग्रुप-A सेर्वा, र्वह सेर्वा है सजसे सिेतपूर्ण गरित ककया गया हो, र्वह भी, कैिर सियंत्रक प्रासिकरर्ों द्वारा और ऐसी सेर्वा को स्र्थासपत प्रकियाओं द्वारा ही गरित ककया गया हो | यह भी कहा गया कक, इसीसलए छ: सर्वशेषताएोँ र्वह मूलभूत सर्वशेषताए हैं, सजन्हें पूर्ण करिा आर्वश्यक हैं | 19.[2] फ़ासज़ल ASG श्री लेिी द्वारा यह भी आगे बताया गया कक, भती सियमों यािी IPS (CADRE) 1954 सियमों के अिुसार, JTS से SAG स्तर की सभी ररसियां अगले सििले ग्रेि से पदोन्नसत द्वारा िहीं, परन्तु IPS असिकाररयों से प्रसतसियुि द्वारा भरी जायेगी | यह भी बताया गया कक, आर्वश्यक सियमों को कोई िुिौती िहीं हैं | यह भी कहा गया कक, इससलए, िम संख्या 4 को पूरी तरह से पूर्ण िहीं ककया गया है| 19.[3] फ़ासज़ल ASG द्वारा यह भी आगे बताया गया कक, NFFU का अिुदाि केर्वल OGAS को ही छिे केन्रीय र्वेति आयोग की ससफाररश के पररर्ाम स्र्वरूप ही प्रदाि ककया जा सकता है| यह भी सिर्वेदि ककया गया कक, आयोग िे सर्वशेष रूप से CAPFs को OGAS के रूप में संगरित ि करिे की ससफाररश की र्थी, क्योंकक र्वह JTS से SAG स्तर तक की सभी पदों को पदोन्नसत द्वारा भरिे की आर्वश्यकता को पूर्णरूप से पूरा िहीं करते हैं | यह भी बताया गया कक, CRPF को NFFU अिुदाि िहीं देिे हेतु सिेति सिर्णय सलया गया क्योंकक CRPF/CAPF को OGAS के रूप में स्र्वीकारा िहीं जा सकता है | 19.[4] फ़ासज़ल ASG िे यह भी आगे बताया कक, अन्यर्था भी, उच्च न्यायलय िे कदिांक 28.10.13 के कायाणलय ज्ञापि में समासहत सिेत सिर्णय में हस्तक्षेप करके त्रुरट की है, र्वह भी, भारतीय संसर्विाि द्वारा प्रदत अिुच्छेद 226 की शसियों के तहत | यह बताया गया कक, मामले के गुर्-दोष को ध्यािपूर्वणक सर्विार करिे के बाद, कदिांक 23.10.2013 के कायाणलय ज्ञापि में सिेत सिर्णय सलया गया र्था | उन्होंिे कहा कक, इससलए उच्च न्यायलय के सभी आक्षेसपत आदेश सर्वसि अिुसार अिुसित है क्योंकक यह एक स्र्थासपत ससद्दांत है कक न्यासयक पुिरीक्षर् कायणर्वसहयो में सिर्णय लेिे के गुर्र्विा को संबोसित िहीं ककया जायेगा, परन्तु उस तरीके को, सजसके द्वारा सिर्णय सलया गया हो | यह भी बताया गया कक, उच्च न्यायालय का यह असिकार िहीं है कक र्वह न्यासयक पुिरीक्षर् की असिकाररता को प्रयोग करते हुए सर्वशेषज्ञ प्रासिकरर् द्वारा सलए गए सिर्णय, जोकक पक्षकारो से सम्बंसित है, को अपिे सर्विार से स्र्थािापन्न करें |
20. उपरोि कर्थिों को कहते हुए यह सिर्वेदि ककया गया कक, प्रस्तुत अपीलों को अिुमसत दी जाये और उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आपेसक्षत सिर्णयों और आदेशों को सिरस्त ककया जाये |
21. प्रस्तुत अपीलों का मूल ररट यासिकाकताणओं के असिर्विा िे पुरजोर सर्वरोि ककया | 21.[1] प्रत्यर्थी-मूल ररट यासिकाकताणओं के फ़ासज़ल असिर्विा िे पुरजोर कहा कक, उच्च न्यायालय द्वारा पाररत आपेसक्षत सिर्णयों और आदेशों में इस न्यायालय द्वारा ककसी भी हस्तक्षेप की आर्वश्कता िहीं है, क्योंकक, उच्च न्यायालय िे ररक्िण-तथ्यों और तथ्यों पर सर्विार करके कक, 1986 से CRPF आकद को ग्रुप ‘A’ संगिि सेर्वा के रूप में मािा और स्र्वीकारा गया है, आपेसक्षत सिर्णय और आदेश पाररत ककये हैं | 21.[2] मूल ररट यासिकाकताणओं की तरफ से यह बताया गया कक, भारत में सससर्वल सेर्वा प्रर्ाली के शुरुआत से ही, सेर्वाएोँ, जो र्वांछिीय पात्रताओं को पूरा करती हैं र्वह सब संगरित सेर्वा के रूप में समझी और स्र्वीकारी जाती है| यह सिर्वेदि ककया गया कक, ग्रुप-A सेर्वा को औपिाररक रूप से संगरित सेर्वा घोसषत करिे हेतु कोई क़ािूिी प्रार्विाि िहीं है| उन्होंिे कहा कक, DoPT के ररक्िण भी इस बात को स्र्वीकारते हैं, कक, तय औपिाररकताओं को देििे के बाद, केंरीय अिण सैसिक बलों को 1986 से ही संगरित सेर्वा के रूप में मािा गया र्था| यह भी कहा गया कक, एकाकी पद र्वह पद हैं सजिका कोई उसित पदिम, पदािुिम, भती योजिा, भती सियम आकद िहीं होते हैं, और इसके सर्वपरीत, संगरित सेर्वाएोँ र्वह सेर्वाएोँ होती हैं सजिकी उसित भती योजिा, प्रत्यक्ष प्रसर्वष्ट पदोन्नसत और प्रसतसियुसि हेतु तय कोटा आकद होते है, सजसका तथ्य 1986 में DoPT द्वारा जारी कैिर प्रबंिि मोिोग्राफ से भी स्पष्ट होता है | यह प्रबलतापूर्वणक बताया गया, कक, मोिोग्राफ में दी गई सूिी में, BSF और CRPF के िाम भी देिे जा सकते है| यह कहा गया, कक, केर्वल कदिांक 20.11.2009 के कायाणलय ज्ञापि में, केर्वल इस आिार पर एक शंका सिर्मणत की गई र्थी, कक, छ: सर्वशेषता में से एक सर्वशेषता को पूरा िहीं ककया गया है | यह भी बताया गया कक, कदिांक 20.11.2009 के कायाणलय ज्ञापि में बताए गए छ: सर्वशेषताएोँ उि बलों (forces) पर लागू िहीं होती क्योंकक, इन्हें DoPT द्वारा बार-बार पर अपिे मोिोग्राफस और अन्य पत्रािारों द्वारा संगरित सेर्वा के रूप में समझा एर्वं स्र्वीकारा गया | यह बताया गया कक, उसी रूप में BSF, CRPF और ITBP को सियसमत संगरित सेर्वाओं की श्रेर्ी में एक संगरित सेर्वा की आर्वश्यक पात्रताए पूरी करिे पर ही ससमसल्लत ककया गया और यह बात DoE के कदिांक 21.10.1986 की रटप्पर्ी में भी असभसिदेसशत है | 21.[3] यह भी आगे बताया गया कक, र्वास्तर्व में, DoPT िे कदिांक 20.11.09 के कायाणलय ज्ञापि द्वारा जारी करते हुए छ: सर्वशेषताओं को सुस्पष्ट बताया कक, र्विणमाि OGAS, जो समय के सार्थ सर्वकससत हुआ है, में अपिे कायणकारी आर्वयश्कताओ के िलते मामूली अंतर हो सकते हैं और इससलए स्पष्टीकरर् कदया कक, ऐसी सेर्वाओं के पुिरीक्षर् को िहीं करिे की घोषर्ा पहले ही की जा िुकी है | यह भी आगे बताया गया कक, उसी रूप में, कदिांक 20.11.2009 के कायाणलय ज्ञापि में बताए गई सर्वशेषताएं केर्वल मूल पात्रताएं है ि कक, एक संगरित सेर्वा कहलाए जािे हेतु पूर्वण सेर्वा शते| 21.[4] मूल ररट यासिकाकिाणओ के असिर्विा िे न्यायालय का ध्याि ग्रुप-A केन्रीय सेर्वाओं के कैिर प्रबंिक द्वारा 1986 और 1993 के मोिोग्राफस की ओर िींिा और पुरजोर कहा कक, कैिर समीक्षा केर्वल अध्ययि-समूह द्वारा ही गहि अध्ययि के बाद की जाती है और यह प्रशाससिक सुिार आयोग द्वारा की गई ससफ़ाररशो पर आिाररत होती है | यह बताया गया कक, उपरोि मोिोग्राफस में, CRPF, BSF आकद को संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं के रूप में स्र्वीकारा गया र्था | यह भी बताया, कक, इसीसलए, इसके बाद DoPT या कोई अन्य, यह हक िहीं रिता है कक, र्वह CRPF को केन्रीय सेर्वा ग्रुप ‘A’ के रूप में िहीं मािे और इन्हें NFFU अस्र्वीकृत करें| 21.[5] यह भी आगे बताया गया कक, मूल ररट यासिकाकिाणओ की तरफ से, कक, अन्यर्था भी, तीिो बलों (forces) सेर्वाओं में पदों का स्पष्ट पदािुिम है, सजसमे कैिर की पदोसन्नतयों हेतु पयाणप्त आयाम हैं, और इससलए र्वे सभी एक संगरित सेर्वा के आर्वश्यक पात्रताओं को पूरा करते हैं सजसमे िौर्थी सर्वशेषता भी सम्मसलत है अर्थाणत् र्वररष्ट प्रशाससिक ग्रेि (SAG) पद की सभी ररसियाोँ भरिे हेतु असिकार| 21.[6] मूल ररट यासिकाकिाणओ की तरफ से यह भी बताया गया कक, गैर-कायाणत्मक ियि ग्रेि (NFSG) सभी CAPFs को कदया गया र्था और DoPT के अपिे कर्थि अिुसार ही NFSG (गैर कायाणत्मक ियि ग्रेि) को केर्वल संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं को कदया जा सकता हैं | 21.[7] मूल ररट यासिकाकिाणओ द्वारा यह भी बताया गया कक, कदिांक 20.11.2009 के कायाणलय ज्ञापि के जारी करिे के बाद भी र्वषण 2010 में जारी मोिोग्राफ, सजसमे कदिांक 14.12.2010 की समेककत मागणदर्शणका को संदर्भणत करते हुए, कायाणलय ज्ञापि के सार्थ सलंसगत सूिी, सजसमे र्वतणमाि केन्रीय ग्रुप-A सेर्वाएोँ र्थी, का सर्वशेष सजि ककया गया र्था | यह भी कहा गया कक, कसर्थत सूिी में, िम संख्या 50,52,53 में ITBP, BSF और CRPF िमशः दर्शणत हैं | 21.[8] मूल ररट यासिकाकिाणओ द्वारा यह भी बताया गया कक, अपीलार्थी की प्रार्थणिा कक, प्रत्यर्थी िौर्थी सर्वशेषता को पूरा िहीं करते हैं, इस तथ्य को िज़रअंदाज करती है कक, िौर्थी सर्वशेषता का सन्दभण पदों के भरे जािे से है ि कक, पदों से | यह भी बताया गया है कक, र्वास्तर्व में, CPMF कैिरों में बड़ी मात्रा में उि पदों पर गसतरोि हैं जहाोँ IPS असिकाररयों हेतु प्रसतसियुसि कोटा तय कर कदया गया है | यह भी बताया गया कक, एक तरफ SAG स्तर पर IPS असिकाररयों हेतु कोटा तय करते है और बाद में दार्वा करते हैं कक, ररि पद कैिर असिकाररयो द्वारा भरे िहीं जा रहे हैं | यह भी कहा गया कक, तीिो बलों (forces) में ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं में असिकाररयों की संख्या उपलब्ि हैं और, र्वास्तर्व में सर्वसभन्न स्तरो पर पदोन्नसत हेतु योग्य भी हैं, लेककि र्वास्तसर्वकता में यह पदोन्नसत सियमो की पात्रताओं को पूरा करिे के बाद भी अत्यासिक समय तक गसतरोि हो रही हैं | यह भी बताया गया कक, र्वास्तर्व में, सरकार की अपिी ही फाइलों में रटप्पर्ी, सजसकी संख्या P–I–1/2012, Pers-DA-Pa ज्ञापि है, दशाणता है इस तथ्य को, कक, सर्वशेषता संख्या (iv) का पूरा ि होिा CAPFs के सहजगुर्को िहीं बताता और ऐसा िहीं हैं कक, सेिा के पास IG स्तर तक के ररि पदों को भरिे हेतु असिकाररयों की कमी हैं | यह भी बताया गया कक, र्वास्तर्व में, रटपण्र्ी यह भी दशाणती हैं कक, कैिर असिकारी, पदोन्नसत आयामों में देरी के कारर्, अलाभकारी सस्र्थसत में ि रहें | 21.[9] मूल ररट यासिकाकताणओं की तरफ से यह भी कहा गया कक, िौर्थे र्वेति आयोग की ससफ़ाररशो के अिुसार, DoPT िे 1990 में सर्विीय लाभ यासि गैर-कायाणत्मक ियि ग्रेि को शुरू ककया र्था | यह भी बताया गया कक, सेर्वाओं की सूिी को सर्विारिे के बाद, यह प्रतीत है कक, उपरोि कसर्थत लाभ सजन्हें प्रदाि ककए गए र्थे, उिमें CRPF, BSF, और ITBP का िाम भी शासमल हैं | यह भी बताया गया कक, CAPFs को योजिा का लाभ प्रदाि ककया गया र्था, सजसे केर्वल संगरित ग्रुप-A सेर्वाओं को ही कदया जाता है, और इससलए यह स्पष्ट करता है कक, CAPFs को संगरित ग्रुप-A सेर्वाओं के रूप में स्र्वीकारा जाता र्था |
21.10 मूल ररट यासिकाकताणओं की तरफ से यह भी कहा गया कक, छिा र्वेति आयोग केर्वल संस्तुसत मात्र है और यह सर्वसभन्न सेर्वाओं को संगरित या गैर-संगरित संगिि की प्रासस्र्थसत प्रदाि िहीं करता है | यह भी कहा गया कक, DoPT ही र्वह िोिल एजेंसी है, जो सेर्वाओं को ककसी सर्वशेष समूह में घोसषत करती है | यह भी कहा गया कक, DoPT िे अपिे सर्वसभन्न मोिोग्राफ में कैिर पुिरीक्षर् संिालि हेतु प्रकियाओं को बताया है और यह भी कदिाया है कक, कैिर पुिरीक्षर् कायण, एक सियसमत गरित सेर्वा (संगरित सेर्वाओं) का ही होता है | यह भी आगे बताया गया कक, DoPT के मोिोग्राफ अिुसार कैिर पुिरीक्षर् कायण केर्वल संगरित ग्रुप-A सेर्वाओं का ही होता है और कसर्थत मोिोग्राफ के सार्थ उि सेर्वाओं की एक सूिी भी संलसगत है, सजिका कैिर पुिरीक्षर् DoPT द्वारा ककया गया र्था, सजिमे CAPFs का िाम भी शासमल है | यह भी बताया गया कक, इससलए अपीलार्थीयों द्वारा यह कर्थि, कक, छिे आयोग िे CAPFs हेतु ससफाररश िहीं की र्थी, इससलए, र्वह सब NFFU के हकदार िहीं है, शसियो के प्रत्यायोजि और प्रकियाओं के सर्वरुद् हैं |
21.11 मूल ररट यासिकाकताणओ की तरफ से यह भी बताया गया कक, यहाोँ पर पदोन्नसत के आयाम और पदों का पदािुिम है और क्योंकक, केर्वल कुछ पदों को प्रसतसियुसि द्वारा भरा जा रहा है, यह कोई आिार िहीं हो सकता है CRPF आकद को संगरित ग्रुप-A सेर्वाओं की प्रासस्र्थसत देिे से मिा ककया जाए और इस आिार पर भी कक, सर्वशेषता संख्या (iv) पूरी िहीं की गई अर्थर्वा िहीं की जा रही है | यह भी बताया गया कक, ऐसी कई अन्य सेर्वायें / संगिि हैं, जैसे भारतीय लेिा परीक्षा एर्वं लेिा सेर्वा, केन्रीय स्र्वास्र्थय सेर्वाएोँ, भारतीय सर्वसि सेर्वा आकद, सजिमें अत्यासिक मात्रा में प्रसतसियुि व्यसि हैं, और कफर भी, उन्हें संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वाएोँ मािकर लाभ प्रदि ककये जाते हैं | यह भी बताया गया कक, इससलए, अपीलार्थी द्वारा CAPFs को NFFU का लाभ प्रदाि करिे हेतु की मिाही गैर-क़ािूिी, मिमािी और भारतीय संसर्विाि की िारा 14 के उल्लंघि तहत है |
22. उपरोि कर्थिों को कहते हुए, प्रस्तुत अपीलों को िाररज़ करिे की प्रार्थणिा की गई |
23. सम्बंसित पक्षों के फ़ासज़ल असिर्विाओं को अच्छी तरह से सुिा गया | 23.[1] शुरुआत में, आर्वश्यक है यह सर्विारिा, कक, प्रस्तुत अपीलों में मुद्दा CRPF में कायण कर रहे मूल यासिकाकताणओं जैसे असिकाररयों/कमणिाररयों को NFFU प्रदाि िहीं करिा है | प्रस्तुत मामले में CRPF को NFFU प्रदाि ि करिे का आिार है, कक, CRPF एक संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वा िहीं है और इससलए, उन्हें छिे र्वेति आयोग के अिुसार NFFU प्रदाि करिे से र्वांसछत रििे की ससफ़ाररश की गई परन्तु यह अन्य सेर्वाओं को प्रदाि की गई | 23.[2] कक, उपरोि मुद्दे पर सर्विार करते हुए, NFFU प्रदाि करिे का उद्देश्य आर्वश्यक रूप से देिा जािा िासहए | गसतरोि की समस्या से उभरिे हेतु, छिे र्वेति आयोग िे सर्वसभन्न संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं के सभी ग्रुप-A असिकाररयों को NFFU प्रदाि करिे की ससफाररश की र्थी | NFFU प्रदाि करिे का उद्देश्य गसतरोि की समस्या से पीसड़त ग्रुप-A असिकाररयों को पीछे- हटिे के सर्वकल्प की तरह र्था, जब सामान्य पदोन्नसतयां सर्वसभन्न कारर्ों के क़ारर् िहीं हो पाती| यह भी देिा गया कक, CPMFs गसतरोि की समस्या से अत्यासिक पीसड़त है, सर्वसशष्टतया, एक तरफ जब उन्हें पदोन्नसतयां प्रदाि िहीं की जा रही क्योंकक, पदोन्नसत पदों को असिकतर प्रसतसियुसि द्वारा भरा जा रहा हैं, और दूसरी तरफ, उन्हें NFFU भी प्रदाि िहीं ककया जा रहा है | 23.[3] जैसा कक, उपरोि देिा गया, CMPFs को NFFU इस आिार पर िहीं कदया जा रहा है क्योंकक उन्हें संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं के रूप में श्रेर्ीबद्द िहीं ककया जाता है | उपरोि देिा गया कक, अपीलार्थी की तरफ से यह कहा गया र्था, कक, संगरित ग्रुप-A सेर्वाओं के रूप में स्र्वीकारिे अर्थर्वा माििे हेतु, CRPF छ: सर्वशेषताओ में से सर्वशेषता संख्या (iv) और (vi) पूरी िहीं करता है, और यह भी बताया गया कक, CAPFs को NFFU प्रदाि ि करिे का आिार र्था, इसे छिे र्वेति आयोग द्वारा ससफ़ाररश िहीं ककया जािा | 23.[4] ररक्िण-तथ्यों पर सर्विार करते हुए, सर्वसशष्टतया, DoPT द्वारा 1986 से अभी तक के जारी मोिोग्राफ में CAPFs को केन्रीय ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं के रूप में दशाणया गया है | CAPFs को केन्रीय ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं के भाग के रूप में DoPT द्वारा कैिर पुिरीक्षर् आकद कायण करिे के बाद ही, दशाणया गया है | इससलए 1986 से अभी तक, DoPT द्वारा जारी मोिोग्राफ में, CAPFs को केन्रीय ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं के भाग के रूप में कदिाया गया है | इससलए, इसके बाद यह DoPT के क्षेत्रासिकार में िहीं होगा कक, र्वह CAPFs को संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वाओं का एक घटक के रूप में ि मािे या अस्र्वीकृत करें | 23.[5] असपलार्र्थणयो द्वारा अब तक के कर्थिों के अिुसार, CAPFs संगरित ग्रुप-A सेर्वा का एक घटक िहीं है, क्योंकक, र्वे सम्बंसित छ: सर्वशेषताओ में से दो सर्वशेषताए पूरी िहीं करते है, यह भी ध्याि कदया जािा िासहए कक, कदिांक 19.11.2009 के कायाणलय ज्ञापि में सर्वसशष्टतया रटप्पर्ी की गई र्थी, कक, इसमें सूिीबद्द सर्वशेषताओ में से कुछ “लघु त्रुरटयाोँ” हो सकती है, और यह तक भी, कक, सजसमे बताया गया हो कक, यद्यसप, यकद सूिी बद्द सर्वशेषताएोँ पूरी कर ली जाती हैं, तो, र्वह सब स्र्वत: ही एक संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वा के प्रासस्र्थसत को मािी िहीं जाएगी | इससलए, उच्च न्यायलय द्वारा आपेसक्षत सिर्णय और आदेश में यह भली भांसत समझा गया कक, CAPFs की प्रासस्र्थसत को सिर्र्णत करते हुए सर्वशेषताओ के अिुपालि / पूरा होिे को अत्यासिक महत्र्व िहीं कदया जायेगा | 23.[6] इस स्तर पर, यह भी ध्याि कदया जािा िासहए कक, ITBP, व्यय सर्वभाग, सर्वि मंत्रालय, भारत सरकार के मामले को सर्विार करते समय, यह DoPT के सिदेशक को असतररि शपर्थ- पत्र में संदर्भणत ककया गया कक, िूंकक ITBP के पास उसित संरििा िहीं है, इसे अन्य संगरित सेर्वाओं जैसे BSF, CRPF से तुलिा करिा संभर्व िहीं होगा | इससलए सरकार िे िुद ही, 21.10.1986 को, BSF और CRPF को संगरित सेर्वाओं के रूप में मािा र्था और उन्हें संगरित सेर्वाओं के उदाहरर् के रूप में भी प्रयोग ककया र्था | पुिः यह देिा जाता है कक, इसके बाद सरकार िे अपिी ही प्रकिया द्वारा, BSF, CRPF और ITBP को 1986, 1993 और 2010 के मोिोग्राफस के अिुसार एक-समाि के रूप में श्रेर्ी-बद्द ककया, सजसमे उपरोि CAPFs को केन्रीय सससर्वल सेर्वा ग्रुप ‘A’ के एक घटक के रूप में कदिाया गया र्था | 23.[7] उच्च न्यायालय द्वारा जारी आपेसक्षत सिर्णयों और आदेशो से यह प्रतीत होता है कक, आपेसक्षत सिर्णयों और आदेशो को पाररत करते हुए और CAPFs को संगरित ग्रुप-A केन्रीय सससर्वल सेर्वाओं के रूप में मािते हुए, उच्च न्यायालय िे सद्वतीय प्रशाससिक सुिार ससमसत की ररपोटण को सर्विारा, सजसकी तासलका 4.[1] में एक सूिी के अंतगणत भारत सरकार के सभी संगरित ग्रुप-A केन्रीय सेर्वाएोँ शासमल हैं सजिमे अिणसैसिक बल जैसे BSF, CISF, SRPF और ITBP को िम संख्या 22 से 25 तक िमश: दशाणया गया हैं और तासलका के िीिे इस सूििा का स्त्रोत DoPT को ही बताया गया है | 23.[8] उपरोि तथ्यों, पररसस्र्थसतयों और ररक्िण-तथ्यों पर सर्विार करते हुए, सजसे उच्च न्यायालय िे सर्वस्तार से सर्विारा, यह िहीं कहा जा सकता कक, CAPFs संगरित ग्रुप-A केन्रीय सससर्वल सेर्वाओं / ग्रुप-A केन्रीय सससर्वल सेर्वाओं का घटक िहीं हो सकते हैं |
24. अब, एक अन्य कारर् भी हैं सजसकी र्वजह से CRPF को NFFU देिे की मिाही की गई कक, छिे केन्रीय र्वेति आयोग िे सम्बंसित CAPFs को NFFU प्रदाि िहीं ककया हैं| यह भी ध्याि में रििा िासहए कक, केन्रीय र्वेति आयोग, ककसी भी सेर्वा को “संगरित सेर्वाओं” के रूप में पररभासषत अर्थर्वा ऐसी प्रासस्र्थसत प्रदाि करिे को प्रासिकृत िहीं हैं | केन्रीय र्वेति आयोग ससफ़ाररशे करता हैं केर्वल उि सूििाओं के अिुसार सजन्हें सर्वसभन्न सर्वभाग उसे प्रदाि करते हैं | ररक्िण तथ्यों को देििे से पता िलता हैं कक, 1986 से ही, सर्वसभन्न मोिोग्राफस में CAPFs को ग्रुप ‘A’ केन्रीय सससर्वल सेर्वाओं में ससम्मसलत ककया गया | सरकार िे यू-टिण ककया और सिर्णय सलया कक, CAPFs संगरित ग्रुप ‘A’ केन्रीय सेर्वाओं का घटक िहीं हैं, और, इससलए, ऐसे सिर्णय के आिार पर, सर्वभाग िे केन्रीय र्वेति आयोग को यह सूििा प्रदाि की होगी और, इससलए, छिे र्वेति आयोग िे CAPFs को NFFU प्रदाि िहीं करिे के ससफाररश की र्थी | इससलए, केर्वल इस आिार पर कक, छिे र्वेति आयोग िे CAPFs के PB-III एर्वं PB-IV में ग्रुप ‘A’ असिकाररयों को NFFU प्रदाि िहीं करिे की ससफाररश की है, PB-III एर्वं PB-IV में ग्रुप ‘A’ असिकाररयों को NFFU प्रदाि करिे हेतु मिाही िहीं की जा सकती हैं, परन्तु जो केन्रीय सससर्वल सेर्वाओं के अन्य सभी ग्रुप ‘A’ असिकाररयों को मंजूर ककया गया हैं | 24.[1] यह भी ध्याि देिे योग्य हैं कक, CAPFs को िौर्थे र्वेति आयोग की ससफाररश अिुसार लाभ प्रदाि ककया गया र्था, र्वो भी सर्वसशष्टतया MACP की योजिा, सजसे केन्रीय ग्रुप ‘A’ सससर्वल सेर्वाओं को प्रदाि ककया गया र्था | 24.[2] उपरोि तथ्यों और पररसस्र्थसतयों एर्वं छिे र्वेति आयोग द्वारा ससफाररश की गई NFFU को प्रदाि करिे के लक्ष्य और कारर्ों पर सर्विार करते हुए, जब उच्च न्यायलय िे देिा और पररर्ामस्र्वरूप सिदेश कदया कक, CAPFs में PB-III एर्वं PB-IV के सभी असिकारी संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वा के हैं और इससलए, छिे र्वेति आयोग द्वारा ससफाररश ककए गए NFFU के लाभ को प्राप्त करिे के हकदार हैं और तद्द्वारा अपीलार्थीयों को सिदेश कदया कक, र्वह एक र्वांसछत असिसूििा जारी कर छिे र्वेति द्वारा ससफाररश अिुसार NFFU का लाभ प्रदाि करें | यह िहीं कहा जा सकता हैं कक, उच्च न्यायालय िे कोई त्रुरट की हैं, सजसमे इस न्यायलय के हस्तक्षेप की आर्वश्यकता हैं | हम उच्च न्यायालय के सिर्णय से पूर्ण सहमत हैं|
25. उपरोि तथ्यों एर्वं पररसस्र्थसतयों के मद्देिजर, प्रस्तुत अपीलें जो SLP(Civil) NO. 35548-35554/2015 एर्वं 13937/2016 से उद्भूत हैं, ख़ाररज हेतु योग्य हैं और तदिुसार ख़ाररज की जाती हैं | मामले के तथ्यों और पररसस्र्थसतयों को देिते हुए, कोई क्स्ट (cost) िहीं| SLP (C) CC No. 5735/2016, SLP (C) CC No. 5736/2016, SLP (C) CC No. 5737/2016, SLP (C) CC No. 5738/2016, SLP (C) CC No. 5743/2016, SLP (C) CC No. 5742/2016, & SLP (C) ……….CC No. 5740/2016
26. जहाोँ तक कक, इि यासिकाओं द्वारा SLP दायर करिे की र्वांसछत आज्ञा से सम्बन्ि हैं, सससर्वल अपील @ SLP © No. 12393/2013, में बताए गए कारर्ों के मद्देिजर, और उसी प्रकार से हम उच्च न्यायलय द्वारा पाररत आक्षेसपत सिर्णय एर्वं आदेश से सहमत हैं, और अन्यर्था भी, इस तथ्य को सर्विारते हुए कक, RPF को एक संगरित ग्रुप ‘A’ केन्रीय सेर्वा की प्रासस्र्थसत प्रदाि करते हुए, IPS के असिकार, यकद कोई हो, RPF में कुछ पदों पर उिकी प्रसतसियुसि हेतु केर्वल इससलए प्रभासर्वत िहीं होंगे क्योंकक, RPF में कुछ पदों को प्रसतसियुसि द्वारा भरा जािा हैं | RPF को संगरित ग्रुप ‘A’ सेर्वा की प्रासस्र्थसत प्रदाि करिे से IPS प्रभासर्वत िहीं होंगे| SLP दायर करिे की आज्ञा हेतु सभी आर्वेदि इंकार करिे योग्य है और इससलए इंकार करे जाते हैं |................, न्यायािीश (रोंहंटि फली िरीमि)................, न्यायािीश (एम. आर. शाह) िई कदल्ली, 05 फ़रर्वरी, 2019 अस्र्वीकरर्: देशी भाषा में सिर्णय का अिुर्वाद मुकद्मेबाज़ के सससमत प्रयोग हेतु ककया गया हैं ताकक, र्वो अपिी भाषा में इसे समझ सके एर्वं यह ककसी अन्य प्रयोजि हेतु प्रयोग िहीं ककया जायगा | समस्त कायाणलयी एर्वं व्यार्वहाररक प्रयोजिों हेतु सिर्णय का अंग्रेज़ी स्र्वरूप ही असभप्रमासर्त मािा जाएगा और कायाणन्र्वयि तर्था लागू ककए जािे हेतु उसे ही र्वरीयता दी जाएगी |