Rajendra Tiwari v. Kedar Nath

Supreme Court of India · 28 Mar 2019 · 2019 INSC 414
Abhay Manohar Sapre; Dinesh Maheshwari
Civil Appeal Nos. 3282-3283 of 2019
2019 INSC 414
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside a default decree passed without giving the defendant an opportunity to file written statement and evidence, and remanded the suit for fresh trial on merits.

Full Text
Translation output
प्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायलय
दीवानी अपीलीय अधिकाररिा
दीवानी अपील संख्या 3282-3283/2019
(ववशेष अनुमति याधचका (दीवानी) सं. 20295-20296/2017 से उत्पन्न)
राज ंदर तिवारी अपीलार्थी(गण)
बनाम

े दार नार्थ (मृिक)
ववधिक प्रतितनधि एवं अन्य क
े द्वारा प्रत्यर्थी(गण)
तनणणय
न्या., अभय मनोहर सप्रे,
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान

2. यह अपीलें RSA No. 188/2010 में ददल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ददनांक 03.11.2016 को पाररि हुए अंतिम तनणणय एवं आदेश क े ववरुद्ि तनदेशशि होिी हैं ज समें उच्च न्यायालय ने इसमें प्रत्यर्थीगण द्वारा दायर RSA को अनुमति प्रदान की र्थी िर्था CM (Application) No. 46865/2016 में ददनांक 26.04.2017 क े आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने इसमें अपीलार्थी द्वारा दायर की दूसरी अपील की पुनः सुनवाई क े आवेदन को ख़ारर ककया| 2019 INSC 414

3. इन अपीलों क े तनपटान हेिु क ु छ िथ्यों को यहााँ नीचे उल्लेख करने की आवश्यकिा है, ज समें एक छोटा िथ्य है|

4. अपीलार्थी वादी है िर्था मूल प्रत्यर्थी (अब अपने ववधिक प्रतितनधियों द्वारा प्रतिुि) शसववल वाद में प्रतिवादी है ज नसे ये अपीलें उत्पन्न होिी हैं|

5. अपीलार्थी (वादी) ने मूल प्रत्यर्थी (प्रतिवादी) क े ववरुद्ि वररष्ठ शसववल न्यायािीश-सह-रैंट-क ं ट्रोलर (Rent Controller) (उत्तर-पूवण जिला), कड़कड़डूमा कोटण, ददल्ली की न्यायालय में वाद संपति क े सम्बन्ि में तर्थायी व्यादेश हेिु शसववल वाद सं. 147/2007 दायर ककया र्था|

6. यह वववाद में नही है कक, प्रतिवादी का शलखखि बयान दायर करने का अधिकार वररष्ठ शसववल न्यायािीश द्वारा इस पररणाम हेिु बंद कर ददया गया र्था कक प्रतिवादी अपने शलखखि बयान को दायर नहीं कर सका िर्था न ही ककसी दतिावेिी साक्ष्य को दायर कर सका|

7. वादी ने किर अपना साक्ष्य प्रतिुि ककया| प्रतिवादी, हालााँकक,शलखखि बयान की प्राजति हेिु, वादी क े गवाहों की अपने बचाव क े बबना प्रतिपरीक्षा कर सकिा है|

8. ददनांक 01.02.2010 क े तनणणय/डडक्री द्वारा, वररष्ठ शसववल न्यायािीश ने वादी क े वाद को डडक्री क े माध्यम से उसक े द्वारा प्रार्थणना की गई तर्थायी व्यादेश हेिु डडक्री पाररि की| प्रतिवादी को व्यधर्थि महसूस हुआ िर्था उसने अतिररक्ि जिला न्यायािीश क े समक्ष प्रर्थम अपील दायर की|

9. ददनांक 26.07.2010 क े तनणणय द्वारा प्रर्थम अपीलार्थी न्यायालय ने अपील ख़ारर कर दी िर्था वररष्ठ शसववल न्यायािीश द्वारा पाररि तनणणय िर्था डडक्री को समधर्थणि कर ददया|

10. प्रतिवादी को व्यधर्थि महसूस हुआ िर्था उसने ददल्ली उच्च न्यायालय में द्वविीय अपील दायर कर दी| ददनांक 03.11.2016 क े आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने द्वविीय अपील की मं ूरी करी, प्रर्थम अपीलीय न्यायालय क े तनणणय को अपाति ककया िर्था वादी (यहााँ अपीलार्थी) क े वाद को ख़ारर कर ददया| ित्पश्चाि वादी ने द्वविीय अपील की पुनः सुनवाई हेिु आवेदन डाला परन्िु उसे ददनांक 26.04.2017 क े आदेश द्वारा ख़ारर कर ददया गया| दोनों आदेशों क े ववरुद्ि, अपीलार्थी (वादी) ने विणमान अपीलों को ववशेष अनुमति क े रूप में इस न्यायालय में दायर ककया|

11. इसशलए, इन अपीलों पर ववचार करने हेिु ो लघु प्रश्न उठिा है कक क्या प्रतिवादी की द्वविीय अपील को मं ूरी देने में उच्च न्यायालय न्यायोधचि र्था, और, अिः वादी क े वाद (यहााँ अपीलार्थी) को ख़ारर करने में न्यायोधचि र्था|

12. पक्षकारों क े फ़ाजिल अधिवक्िा को सुनने िर्था मामले क े अशभलेख क े अवलोकन पर, हम इन अपीलों को अनुमति देने क े इच्छ ु क हैं, िर्था आक्षेवपि आदेशों को एक िरि रखिे हुए मुकद्दमे को ववचारण न्यायालय (वररष्ठ शसववल न्यायािीश) को शसववल वाद को नए शसरे से गुणागुण आिार पर सुनने हेिु कानून क े अनुसार वावपस भे िे है|

13. हमारे सुववचाररि मिानुसार, गुणागुण आिार पर शसववल वाद को नए शसरे से सुनने क े शलए वररष्ठ शसववल न्यायािीश को मुकद्दमा वावपस भे ने की आवश्यकिा एक से अधिक कारणों से हैं|

14. पहला, हमने यह पाया कक, वाद में ववचारण संिोष नक ढंग से नहीं हुआ चूाँकक प्रतिवादी को शलखखि बयान दायर करने का पयाणति अवसर नहीं प्राति हुआ र्था|

15. दूसरा, ककसी भी शलखखि बयान क े न होने पर, प्रतिवादी न िो उधचि साक्ष्य को प्रतिुि कर सकिा है और न ही मुकद्दमे क े समर्थणन में कोई दतिावेिी साक्ष्य दायर कर सकिा है|

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16. िीसरा, अिः पक्षकारों क े अधिकारों को दो न्यायालयों (ववचारण न्यायालय और प्रर्थम अपीलीय न्यायालय) द्वारा वाद में डडक्री पाररि करक े िर्था उच्च न्यायालय द्वारा अपयाणति साक्ष्य होने क े आिार पर वाद को ख़ारर करक े तनजश्चि ककया गया| हमारे मिानुसार, इससे दोनों पक्षकारों पर प्रतिक ू ल प्रभाव पड़ा|

17. चौर्था, हमें प्रतिवादी को उसक े शलखखि बयान को दायर से मना करने का कोई न्यायसंगि कारण नहीं शमलिा| उसे शलखखि बयान दायर करने का िर्था गुणागुण आिार पर वाद को लड़ने हेिु मौखखक और दतिावेिी साक्ष्य को प्रतिुि करने का अधिकार र्था|

18. यह तनजश्चि कानून है कक वाद क े सभी वववादी पक्षकारों को कानून क े अनुसार गुणागुण आिार पर वाद लड़ने का उधचि अवसर अवश्य शमलना चादहए| वाद की असंिोष नक सुनवाई में, न्यायालयों द्वारा ददया गया तनणणय क़ानूनी रूप से संवहनीय नहीं है| यह िथ्य पर ध्यान ददए बबना है कक सुनवाई में तनणणय ककसक े पक्ष में ा सकिा है|

19. इन्हीं कारणों से हमारा यह मि है कक ये अपीलें मंिूरी क े योग्य हैं िर्था मामले को नए शसरे से गुणागुण आिार पर सुनने हेिु कानून क े अनुसार ववचारण न्यायालय को वावपस भे ा ािा है|

20. यहााँ प्रत्यधर्थणयों (मूल प्रतिवादी क े क़ानूनी प्रतितनधि) को िदानुसार वाद में उपजतर्थि होने की तिधर्थ से एक महीने क े अन्दर शलखखि बयान दायर करने की तविंत्रिा प्रदान की ािी है| इसक े पश्चाि् ववचारण न्यायालय पक्षकारों क े अशभवचनों क े आिार पर वाद में उत्पन्न हो रहे वववाद्यकों की ववचरना करेगा और किर पक्षकारों को पहले से प्रतिुि साक्ष्य क े अतिररक्ि अपना साक्ष्य प्रतिुि करने की अनुमति देगा| पक्षकारों को अतिररक्ि दतिावेिों को दायर करने की भी अनुमति प्रदान की ाएगी, यदद वे चाहें िो|

21. ववचारण न्यायालय वाद का ि ै सला अशभवचनों क े आिार पर िर्था पूवण अवतर्था में इस मामले में न्यायालयों द्वारा पाररि ककसी भी तनणणय से अप्रभाववि होकर पक्षकारों द्वारा प्रतिुि ककये गए साक्ष्य क े आिार पर करेगा|

22. हम, किर भी, यह तपष्ट करिे हैं कक हमने मामले क े गुणागुण पर कोई मि व्यक्ि नहीं ककया है बकक मुकद्दमे को ववचारण न्यायालय को वावपस भे ने क े शलए राय बनाई गई है|

23. सुनवाई को एक वषण क े अन्दर पूरा ककया ाए| पक्षकारों को वररष्ट शसववल न्यायािीश (उत्तर पूवण जिला), कड़कड़डूमा कोटण, ददल्ली क े समक्ष 02.04.2019 को हाजिर होना है|

24. इस प्रकार अपीलें सिल होिी हैं और िदानुसार मंिूर की ािी हैं| आक्षेवपि आदेशों को अपाति ककया ािा है िर्था वाद को मूल िाइल में वावपस गुणागुण आिार पर सुनवाई हेिु पुन: तर्थावपि ककया ािा है ैसा कक ऊपर बिाया गया है| न्या..................... (अभय मनोहर सप्रे) न्या.................... (ददनेश महेश्वरी) नई ददल्ली, माचण 28, 2019 अतवीकरण: देशी भाषा में तनणणय का अनुवाद मुकद्द्मेबाि क े सीशमि प्रयोग हेिु ककया गया है िाकक वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एवं यह ककसी अन्य प्रयो न हेिु प्रयोग नहीं ककया ाएगा| समति कायाणलयी एवं व्यावहाररक प्रयो नों हेिु तनणणय का अंग्रेिी तवरूप ही अशभप्रमाखणि माना ाएगा और कायाणन्वयन िर्था लागू ककए ाने हेिु उसे ही वरीयिा दी ाएगी|