गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् v. राहुल मोदी & Ors.

Supreme Court of India · 27 Mar 2019 · 2019 INSC 408
अभर् मनोहर सप्रे; उदर् उमेश लचलत
Criminal Appeal Nos. 538-539 of 2019 @ Special Leave Petition (Criminal) Nos. 94-95 of 2019
criminal appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Court held that arrests made after expiry of the statutory investigation period without valid extension are illegal, upheld the High Court's interim bail order, and emphasized strict adherence to procedural safeguards under the Companies Act, 2013.

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प्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायालय
दाांतिक अपीलीय क्षेत्रातिकार
दाांतिक अपील सां. 538-539/2019
(तवशेष अनुमति यातिका सां. 94-95/2019 से उत्पन्न)
गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् ...अपीलार्थी
बनाम
राहुल मोदी व अन्य ...प्रत्यर्थी(गण)
संग
स्र्थानांतरण र्ाचचका (आप.) सं. 35/2019
(गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् व अन्य बनाम चववेक हररव्यासी व अन्य)
तनर्णय
न्या., उदय उमेश लतलि
JUDGMENT

1. अनुमचत प्रदाचनत|

2. र्ह अपीलें चदल्ली उच्च न्यार्ालर्, नई चदल्ली, द्वारा ररट र्ाचचका(आप.) सं. 3842 व 3843/2018 में चदनांक 20.12.2018 को पाररत सामान्य अंतररम आदेश क े सत्यता को चुनौती देती हैं|

3. कम्पनी अचधचनर्म 2013(संचिप्त में, “2013 अचधचनर्म”) की धारा 212(1)(सी), पररसीचमत दाचर्त्व भागीदारी अचधचनर्म 2008(संचिप्त में, “2008 अचधचनर्म”) की धारा 43(2) और धारा (3)(सी)(i) क े अंतगात प्रदत्त शक्तिर्ों का प्रर्ोग करते हुए क े न्द्रीर् सरकार ने अपने आदेश सं 07/115/2018/सीएल-II(एनडब्लूआर) क े द्वारा आदशा ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज और प.द.भ. (संचिप्त में, ‘द ग्रुप') क े कार्ों की जााँच का चनदेशन गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् क े अचधकारों द्वारा चदर्ा जैसा चक गं.धो.जााँ.का क े चनदेशक द्वारा नामांचकत है| चदनांक 20.06.2018 क े आदेश का सुसंगत भाग इस प्रकार र्था:- “चूाँचक क े न्द्रीर् सरकार को, कम्पनी अचधचनर्म 2013 की धारा 212(1)(सी) क े अंतगात अचधकार है चक जनचहत में कम्पनी क े कार्ों की जााँच का आदेश गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् (गं.धो.जााँ.का) को दे सकती है|

2. और जबचक क े न्द्रीर् सरकार को पररसीचमत दाचर्त्व भागीदारी अचधचनर्म 2008 की धारा 43(2) व (3)(सी)(i) क े तहत पररसीचमत 2019 INSC 408 दाचर्त्व भागीदारी (प.द.भ) क े कार्ों की जााँच का आदेश देने का भी अचधकार है|

3. और जबचक क े न्द्रीर् सरकार द्वारा बनाई रार् क े आधार पर, चनम्न क ं पचनर्ों क े कार्ों की जााँच का चनणार् चकर्ा गर्ा है:-

4. इसचलए, अब, कम्पनी अचधचनर्म 2013 की धारा 212(1)(सी) और प.द.भ. अचधचनर्म 2008 की धारा 43(2) & (3)(सी)(i) क े तहत प्रदत्त शक्तिर्ों का प्रर्ोग करते हुए, क े न्द्रीर् सरकार ने उपरोि नाचमत क ं पचनर्ों व प.द.भ. क े कार्ों की जााँच, गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् क े चनदेशक द्वारा नाचमत अचधकाररर्ों को करने का आदेश चदर्ा है|

5. गं.धो.जााँ.का को चनम्नगत िेत्ों में जााँच करनी चाचहए (उपरोि कम्पचनर्ों और प.द.भ.) इस क े अचतररि जााँच क े दौरान सामने आनेवाले अन्य मामलों की भी जााँच करेगी| (i) इसक े लाभाचर्थार्ों क े सार्थ वसूले धन क े पररवतान क े पररमाण की पहचान और धन क े आवतान की जााँच का पता लगाने हेतु| (ii) क ु प्रबंध, लापरवाही व कपट की घटनाओं को पहचानने हेतु| (iii) लेखाचधकाररर्ों, क े.एम.पी. व स्वछं द चनदेशकों व अन्य व्यक्तिर्ों की कचर्थत कपट में भूचमका का पता लगाने हेतु| (iv) कचर्थत कपट में चकसी अन्य तत्त्व का वाहक क े रूप में प्रर्ोग का पररिण| (v) अचधचनर्म क े सांचवचधक प्रावधान क े अनुपालन व कोपोरेट संचालन पर इसक े प्रभाव की पहचान हेतु|

6. चक कम्पनी अचधचनर्म, 2013 की धारा 217 व प.द.भ.अचधचनर्म, 2008 क े अध्यार् IX IXक े तहत चनर्ुि चनरीिक(कों) को प्राप्त शक्तिर्ों का पूणा प्रर्ोग करें| चनरीिक अपनी जााँच पूरी कर आदेश जारी होने की चतचर्थ से तीन महीने क े अन्दर ररपोटा क े न्द्रीर् सरकार को जमा कराए| सं. सीआईएन कम्पनी/ प.द.भ. का नाम नर्ा पता िेत् पैन सं. क्तस्र्थचत 1 U45201HR2000PLC0457 आदशा चबल्ड एस्टेट चलचमटेड प्रर्थम तल, ब्लॉक बी, वाचटका अचटिर्म गोल्फ कोसा रोड, सेक्टर- 53 गुडगााँव हररर्ाणा AAJCA19 07A चालू 2 से.................. 125 U45201RJ2013PTC04246 वाटरफॉल ररर्ल एस्टेट्स प्राइवेट चलचमटेड जे-7, मोती ड ूंगरी रोड, जर्पुर राजस्र्थान AABCW[3] 826E चालू

7. र्ह आदेश क े न्द्रीर् सरकार की ओर से व क े न्द्रीर् सरकार क े चलए जारी चकर्ा गर्ा र्था| हस्तािर (संतोष क ु मार) संर्ुि चनदेशक”

4. उसी चतचर्थ पर चदनांक 20.06.2018 को गं.धो.जााँ.का क े चनदेशक द्वारा भी आदेश पाररत हुआ| उि आदेश का प्रासंचगक भाग इस प्रकार है:- “3. अब, इसचलए, कम्पनीज अचधचनर्म 2013 की धारा 212(1) क े तहत प्रदत्त शक्ति क े प्रर्ोग द्वारा चनम्नचलक्तखत अचधकाररर्ों को उपरोि संस्र्थाओं क े कार्ों की जााँच कार्ावाही क े चलए चनरीिक नाचमत चकर्ा गर्ा है व कम्पनी अचधचनर्म 2013 में इन्हें चमली पूणा शक्तिर्ों का उपर्ोग करेंगें: 1.श्री पी.सी मौर्ाा, अचतररि चनदेशक 2.श्री प्रशांत बाचलर्ान, उप-चनदेशक 3.श्री जी.एल.मीणा, वररष्ठ सहार्क चनदेशक 4.श्री क ु मार गौतम, सहार्क चनदेशक

4. और आगे, कम्पनीज अचधचनर्म की धारा 2013 की धारा 212(4) क े अंतगात श्री प्रशांत बाचलर्ान, उप-चनदेशक को कम्पनी अचधचनर्म 2013 की धारा 212 (4) क े तहत श्री प्रशांत बाचलर्ान उप-चनदेशक को उपरोि जााँच का जााँच अचधकारी चनर्ुि चकर्ा गर्ा| जााँच अचधकारी को कम्पनी अचधचनर्म, 2013 की धारा 217 क े तहत चनरीिक की सारी शक्तिर्ााँ चमलेंगी| जााँच आदेश क े अनुसार चनम्नचलक्तखत मुद्ों की चवचशष्ट जााँच क े सार्थ-सार्थ आगे आने वाले मुद्ों की भी जााँच हो:

1. इसक े लाभाचर्थार्ों क े सार्थ वसूले धन क े पररवतान क े पररमाण की पहचान और धन क े आवतान की जााँच और पता लगाने हेतु;

2. क ु प्रबंध, लापरवाही और कपट क े उदाहरणों की पहचान;

3. लेखाचधकाररर्ों, क े.एम.पी और स्वतंत् चनदेशकों र्ा कचर्थत कपट में अन्य व्यक्ति की भूचमका का पता लगाना;

4. कचर्थत कपट में चकसी अन्य तत्त्व का वाहक क े रूप में हुए प्रर्ोग का परीिण; और

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5. अचधचनर्म क े सांचवचधक प्रावधान क े अनुपालन व कॉपोरेट संचालन पर इसक े प्रभाव की पहचान हेतु;

5. चनरीिक व जााँच अचधकारी जााँच पूरी करें और ररपोटा तीन महीने में जमा कराए|”

5. चदनांक 20.06.2018 क े आदेश क े खंड 6 में उक्तल्लक्तखत अवचध 19.09.2018 को समाप्त हो गई| जााँच क े दौरान चमली सामग्री क े आधार पर, 2017 कम्पनी चनर्म क े, चनर्म(2) क े तहत अनुमोदन गं.धो.जााँ.का चनदेशक से क ं पनी धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् द्वारा की गई जााँच क े संबंध में चगरफ्तार हुए चगरफ्ताररर्ों क े संबंध में) तीनों अचभर्ुि व्यक्तिर्ों अर्थाात राहुल मोदी, मुक े श मोदी और चववेक हररव्यासी को चगरफ्तार करने हेतु मााँगा गर्ा| अनुमोदन गं.धो.जााँ.का क े चनदेशक द्वारा चदनांक 10.12.2018 को चदर्ा गर्ा| 2017 चनर्मों क े अंतगात चनर्म 4 और 5 क े तहत जारी आदेश में कार्ावाही “07/115/2018 सीएल-II(एनडब्लूआर) चदनांक 20.06.2018” से सन्दभा स्र्थाचपत चकर्ा| अचभर्ुि उसी चहसाब से 10.12.2018 को चगरफ्तार हुए| 2017 क े चनर्मों का अनुपालन हुआ और वह ड्यूटी मैचजस्टिेट, चिला न्यार्ालर्, गुरुग्राम, हररर्ाणा क े समि 11.12.2018 को पेश हुए|

6. अपीलार्थी की ओर से एवं अचभर्ुि की ओर से अचधविा को सुनने क े बाद न्याचर्क मैचजस्टिेट प्रर्थम श्रेणी, गुरुग्राम ने 11.12.2018 चदनांचकत आदेश द्वारा 14.12.2018 तक ररमांड देकर चवशेष न्यार्ालर् (कम्पनी अचधचनर्म), गुरुग्राम क े समि 14.12.2018 को पेश होने का चनदेश चदर्ा| अचभर्ुि की चहरासत क े चलए मामला बनाने क े चलए ररमांड क े चलए आवेदन मााँगा गर्ा| र्ह मामला न्याचर्क मैचजस्टिेट द्वारा इस प्रकार चनपटार्ा गर्ा:- “5. अचभर्ुि सं. 1 व 2 क े अचधविा ने बहस की चक दोनों ही अचभर्ुिों ने 20 जून से हुई जााँच में सहर्ोग चकर्ा व उनक े कार्ाालर् भी सील है| इसक े बावजूद, अब चबना चकसी वजह क े ररमांड की मााँग की गई, इसचलए, इसे अस्वीक ृ त चकर्ा जाए|

6. अचभलेख पर दस्तावेजों क े अध्यर्न से पता चलता है चक गंभीर आरोप है एवं चदनांक 20.06.2018 क े आदेश अनुसार जााँच शुरू करने का आदेश चदर्ा गर्ा व दं.प्र.सं की धारा 167 क े तहत अचभर्ुि गं.धो.जााँ.का की ररमांड लेकर न्यार्ालर् में पेश चकर्ा गर्ा| धारा 436(1)(बी) क े तहत र्ह न्यार्ालर् मैचजस्टिेट की शक्तिर्ों का उपर्ोग करेगी| इस स्तर पर ररमांड मााँगी गई है| कचर्थत अपराध चनचित रूप से गम्भीर है व चगरफ़्तारी क े आदेश अचभलेख में उपक्तस्र्थत है| इन दस्तावेजों क े पररणामस्वरूप अचभर्ुिों को चगरफ्तार कर पेश चकर्ा गर्ा| चनसंदेह, र्ह लोग गं.धो.जााँ.का द्वारा जारी नोचटसों पर पेश हुए हैं, परन्तु अभी तक जााँच पूरी नहीं हुई क्ोंचक जााँच क े क ु छ चहस्ों में व्यैक्तिक भागीदारी की आवश्यकता है| र्ह मामला प्रर्थम दृष्टर्ा कम्पनी अचधचनर्म की धारा 447 को आकचषात करता है चजस कारण र्ह अपराध पूणातः संज्ञेर् व गैर-िमानती हैं| चहरासत में जााँच का मुख्य आधार चनकले हुए पैसों का आगे हुआ इस्तेमाल व लाभाचर्थार्ों का पता लगाना है| इसक े अचतररि, संपचत्तर्ों की पहचान और बहीखाता में कचर्थत ऋण व उधारों की व्याख्या चसफ ा अचभर्ुिों द्वारा दी जा सकती है पर वो अभी तक ऐसी कोई व्याख्या नहीं दे पाए हैं| र्हााँ तक की जो लोग चहरासत में हैं वो भी जााँच में सही रूप से सहर्ोग नहीं कर रहे हैं ताचक असल तथ्य सामने आ सक े | इन आधारों को गहन और व्यापक जााँच की आवश्यकता है इसचलए इन अचभर्ुिों की तीन चदन की चहरासत गं.धो.जााँ.का को सौंपना सही होगा| आरोचपर्ों को कम्पनी अचधचनर्म क े तहत 14.12.2018 को चवशेष न्यार्ालर् क े समि पेश चकर्ा जाए| इस आदेश की प्रचतचलचप जााँच अचधकारी व अचभर्ुिों को दी जाए जैसे की उन्होंने मााँगा र्था| तीनों आरोचपत व्यक्तिर्ों र्ाचन मुक े श मोदी, राहुल मोदी और चववेक हररव्यासी की तीन चदन की चहरासत गं.धो.जााँ.का को दी गई है| फाइल को कम्पनी अचधचनर्म क े तहत चवशेष न्यार्ालर् भेजा जाए|”

7. चदनांक 13.12.2008 को गं.धो.जााँ.का द्वारा क े न्द्रीर् सरकार से जााँच पूरी करने की अवचध बढ़ाने हेतु और 57 मामलों की जााँच ररपोटा जमा करने हेतु अनुमचत स्वीक ृ त की गई, जो पूरे होने क े अलग-अलग चरणों पर है र्ा उनकी जााँच पूरी करने हेतु चमली अवचध र्ा तो समाप्त हो चुकी है र्ा समाप्त होने वाली है| इनमें से एक मामला सूची में संख्या नं. 24 पर एक समूह का र्था| चदनांक 14.12.2018 को आरोपी चवशेष न्यार्ालर् में ररमांड क े नए आवेदन क े सार्थ पेश हुए| अन्य बातों क े सार्थ, चहरासत क े चवस्तार की प्रार्थाना का चवरोध अचभर्ुिों द्वारा इस आधार पर चकर्ा गर्ा चक चदनांक 20.06.2018 क े आदेश में जााँच की चनर्चमत अवचध समाप्त हो चुकी र्थी व इस प्रकार की आगामी कार्ावाही को गैर-कानूनी बतार्ा| कार्ावाही क े दौरान, 57 मामले चजनकी जााँच पूरी नहीं हो सकी उसकी अवचध बढ़ाने हेतु प्रस्ताव चवशेष न्यार्ालर् क े सामने रखा गर्ा| अचभलेख क े अध्यर्न क े बाद, चवशेष न्यार्ालर् ने पार्ा चक आगे की ररमांड हेतु आवेदन की मााँग उचचत है| इसचलए, अचभर्ुि की पुचलस चहरासत 18.12.2018 तक बढ़ा दी गई| चवशेष न्यार्ालर् द्वारा पाररत आदेश चदनांचकत 14.12.2018 क े पैरा 6 इस प्रकार रहा:- “6. कम्पनी अचधचनर्म की धारा 212(3) क े उपबंधों अनुसार आचदष्ट जााँच चनचदाष्ट समर् में पूणा हो जानी चाचहए| परन्तु समस्या र्ह है चक अगर ऐसा नहीं हुआ तो इसका पररणाम क्ा होगा र्ा क्ा आगे की कार्ावाही व जााँच गैर-क़ानूनी मानी जाएगी| इस न्यार्ालर् का उत्तर ना है क्ोंचक उक्तल्लक्तखत समर् सीमा जााँच को समर्बद्ध रूप में पूरी करने हेतु है परन्तु कचर्थत समर् सीमा उस प्राचधकार द्वारा समर् समर् पर आगे बढ़ाई जा सकती है| और इस मामले में सारी जााँच क े बाद टीम ने ररपोटा सिम प्राचधकार, जो चक गं.धो.जााँ.का क े चनदेशक है, को सौंपी चजन्होंने अचभर्ुि को चगरफ्तार कर टीम को जााँच आगे बढ़ाने की अनुमचत दी, जो चदए तथ्यों व पररक्तस्र्थचत अनुसार आगे बढ़ सकती है| तब धारा 212(3) का उद्ेश्य 2013 कम्पनी अचधचनर्म क े अध्यार् XIV क े तहत प्रदान प्रचिर्ा अनुसार जााँच की अनुमती प्रदान करना है और उपधारा 6 क े अनुसार कचर्थत अपराध संज्ञेर् और गैर- िमानती है और इसचलए गं.धो.जााँ.का को इससे जुड़े व्यक्तिर्ों को चगरफ्तार कर उनकी ररमांड को मद्ेनिर रखते हुए क े न्द्रीर् सरकार को अंचतम ररपोटा देनी होगी| इसचलए चगरफ्तारी क े बाद न्यार्ालर् क े समि ररपोटा पेश करने का मुद्ा अचनवार्ा है परन्तु अचभर्ुि की चगरफ्तारी से पूवा इसे करना समर्बद्ध कार्ा नहीं है चजसका उल्लंघन आगे की जााँच में कानूनी बाधा बन सकती है|” समूह क े संबंध में प्रस्ताव क े न्द्रीर् सरकार द्वारा पाररत आदेश चदनांचकत 14.12.2018 द्वारा स्वीकार चकर्ा गर्ा व 30.06.2019 तक का चवस्तार चदर्ा गर्ा|

8. चदनांक 17.12.2018 को ररट र्ाचचका (आप.) सं 3842 & 3843/2018, भारतीर् संचवधान क े अनुच्छे द 226 व 227 सहपचित दं.प्र.सं की धारा 482 क े तहत राहुल मोदी और मुक े श मोदी द्वारा चदल्ली उच्च न्यार्ालर् में दार्र चकर्ा गर्ा| र्ह प्रस्तुत चकर्ा गर्ा चक चदनांक 20.06.2018 क े आदेश में चदए जााँच पूरी करने हेतु समर् सीमा क े समाप्त होने क े सार्थ आगे की हुई कार्ावाही समेत प्रत्यर्थी की चगरफ़्तारी गैरकानूनी और कानून क े चकसी भी अचधकार क े चबना है| इसचलए ररट र्ाचचकाओं में 19.09.2018 क े बाद हुई जााँच को अवैध और िेत्ाचधकार से बाहर घोचषत करने की प्रार्थाना की और बंदी प्रत्यिीकरण ररट द्वारा 10.12.2018 को हुई अवैध चगरफ़्तारी से बरी करने की प्रार्थाना भी की गई| दोनों र्ाचचकाओं में की प्रार्थानाएाँ लगभग एक जैसी और इस प्रकार है: क. “परमादेश ररट र्ा कोई और उचचत ररट/चनदेश/आदेश, ररट क े रूप में जारी कर घोचषत करें चक प्रत्यर्थी सं 2 से 4 की कम्पनी अचधचनर्म 2013 की धारा 2012(2) क े तहत समर् समाप्त होने क े पिात् जााँच करने की शक्ति अवैध और असंवैधाचनक है| ख. परमादेश ररट र्ा कोई और उचचत ररट/चनदेश/आदेश ररट क े रूप में जारी कर घोचषत करें चक आदेश सं- 07/115/2018- सीएल-II चदनांक 20.06.2018, 19.09.2018 क े बाद फ़ाइल सं गं.धो.जााँ.का/ आईएनवी/एओआई/2018-19- एचजसी & एल/ 842-966 में की गई जााँच अवैध व िेत्ाचधकार से बाहर है| ग. ररट/चनदेश/आदेश जारी कर घोचषत करें चक र्ाची की 10.12.2018 को नई चदल्ली में प्रत्यर्थी 2 क े कार्ाालर् में प्रत्यर्थी 3 द्वारा चगरफ़्तारी का एलान करते हुए और वहााँ से शुरू होनेवाली कार्ावाही िेत्ाचधकार से बाहर व अवैध है और र्ाची राहुल मोदी को तुरंत ररहा चकर्ा जाए| घ. बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका जारी कर अपीलार्थी राहुल मोदी की चदनांक 10.12.2018 को नई चदल्ली में अवैध चगरफ़्तारी से तुरंत ररहाई का चनदेश और पररणामस्वरूप प्रत्यर्थी 2 से 4 की अवैध चहरासत दे;

9. र्ह ररट र्ाचचकाएाँ उच्च न्यार्ालर् क े समि 18.12.2018 को आई और चनम्नचलक्तखत आदेश पाररत चकर्ा गर्ा: “भारत संघ की ओर से पेश हुई फ़ाचिल ए.एस.जी श्रीमती मचनंदर आचार्ा क े चनवेदन पर उन्हें चनदेशक गं.धो.जााँ.का द्वारा ररपोटा जमा होने की अवचध बढ़ाने तक र्ाचचकाओं की सुनवाई स्र्थचगत है|” उसी चदन अचभर्ुिगण को चवशेष न्यार्ालर् में पेश चकर्ा गर्ा और जााँच पूरी करने हेतु चहरासत में चलए जाना आवश्यक जान पड़ने क े बाद, दोचषर्ों को 21.12.2018 तक पुचलस चहरासत में भेज चदर्ा गर्ा| चवशेष न्यार्ालर् क े आदेश क े उचचत भाग इस प्रकार र्थे:- “2. गं.धो.जााँ.का ने अधोहस्तािरी क े समि पूणा चटप्पण कार्ावाही रखी चजसमें उनक े आखरी तारीख़ से आज तक क े अन्वेषण को दशाार्ा गर्ा है| जैसा चक चशकार्तकताा क े अचधविा द्वारा प्रस्तुत चकर्ा गर्ा और क े स डार्री को चटप्पण पचत्का क े रूप में देखते हुए चशकार्तकताा क े अचधविा की प्रस्तुचत क े अनुसार चजस चदन से आरोपी चशकार्तकताा की चहरासत में सौंपा गर्ा तब से आज तक की क े स डार्री का अध्यर्न नोचटंग शीट क े रूप में करने क े पिात र्ह सामने आर्ा चक चनस्ंदेह पूरे घोटाले से जुड़ी क ु छ और बातों का खुलासा आरोपी द्वारा चकर्ा गर्ा जो अप्रकाचशत संपचत्त क े प्रकटन का नर्ा मामला उत्पन्न करता है और इस प्रकार आरोचपत व्यक्तिर्ों की आगे की चहरासत प्रार्थाना को आगामी साक्ष्य और क्तस्र्थचत क े सम्मुख रखना अपेचित है और मामले की आगे की जााँच आरोपी द्वारा अत्यचधक पैसे की वसूली क े तथ्यों क े प्रकटन अनुसार, 14.12.2018 क े आदेश को मद्ेनिर रखते हुए| इस प्रकार, इस प्रार्थाना को उचचत पाते हुए और चहरासतीर् पूछताछ की प्रार्थाना अचनवार्ा जााँच को न्यार्संगत रूप में अंत करने हेतु आवश्यक होने क े कारण प्रस्तुत आवेदन को मंिूर कर तीनों आरोचपर्ों को गं.धो.जााँ.का की आगे की चहरासत में 21.12.2018 क े दोपहर 2 बजे तक भेजा जाता है|”

10. ररट र्ाचचकाएाँ चदनांक 20.12.2018 को उच्च न्यार्ालर् क े समि आई| उच्च न्यार्ालर् ने एक नोचटस जारी चकर्ा जो उसे 31.01.2019 को वापसी र्ोग्य बनाता र्था| उसक े बाद उच्च न्यार्ालर् ने इस पर चवचार चकर्ा चक प्रत्यर्थी को जल्द ररहा कर अंतररम राहत देनी चाचहए र्ा नहीं| दोनों पिों को सुना गर्ा और ररट र्ाचचकाओं में चवचार हेतु उिी समस्याओं को इस प्रकार चलखा गर्ा: “क. र्चद सिम प्राचधकार की ओर से चमला कार्ोतर चवस्तार चवचध अनुसार सही है र्ा नहीं, और ख. र्चद अपीलार्थी क े पि में बने चनचहत अचधकार, बीच में, कचर्थत रूप से जब अपीलार्थी क े क्तखलाफ जााँच करने हेतु कोई कानूनी स्वीक ृ ती नहीं र्थी चजससे उपरोि कार्ावाही और खासकर उनकी चगरफ्ताररर्ााँ गैरकानूनी है, चबना िेत्चधकाररता व कानून क े चवपरीत है|”

11. अंतररम राहत प्रदान करने क े पररपेक्ष्य में जब इस मुद्े पर चवचार हुआ, जैसा चक अपीलार्थी(गण) क े आवेदन में प्रार्थाना की गई ररट र्ाचचका सं. 3842/2018 क े आवेदन आ.चत.आवे सं. 50035/2018 और ररट र्ाचचका (आप.) में सं 3843/2018 चनम्नचलक्तखत इस प्रकार कहा गर्ा है: “15. पिकारों की ओर से प्रस्तुचतर्ों को मद्ेनिर रखते हुए वतामान आवेदनों में चवचरण हेतु जो समस्याएं उत्त्पन्न हुई वह इस प्रकार है:- “क. क्ा र्ह न्यार्ालर् भारतीर् संचवधान क े अनुच्छे द 226 क े तहत बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका की कार्ावाही में सिम मैचजस्टिेट द्वारा पाररत ररमांड क े आदेश की सत्यता, वैधता और चवचधमन्यता का परीिण कर सकती है/और ख. क्ा इस न्यार्ालर् क े पास वतामान बंदी प्रत्यिीकरण का न्यार् चनणार्न करने का िेत्ाचधकार है, इस पररक्तस्र्थचत क े मद्ेनिर चक गुरुग्राम क े समि मैचजस्टिेट द्वारा चदए गए ररमांड आदेश चजस पर चवशेषकर कोई हमला नहीं चकर्ा गर्ा?”

12. उच्च न्यार्ालर् ने अपने आदेश चदनांचकत 20.12.2018 में ररट र्ाचचकाओं क े लम्बन क े दौरान उनक े 5 लाख की दो अलग अलग व्यक्तिगत बंधपत् दो स्र्थानीर् प्रचतभूचतर्ों क े सार्थ प्रस्तुत करते हुए आदेश में अपने आदेश कचर्थत राहुल मोदी और मुक े श मोदी की अंतररम बेल पर ररहाई का चनदेश उक्तल्लक्तखत शतों क े अधीन है| अपने आदेश क े दौरान उच्च न्यार्ालर् द्वारा चनम्नगत चटप्पचणर्ााँ अनुच्छे द 22 से 30 तक इस प्रकार है:- “22. उपरोि चनणार्ों क े आधार पर और पिकारों द्वारा पेश बहसों को मद्ेनिर रखते हुए, हमें इस स्तर पर र्ह पता करना है चक क्ा अपीलार्थीगणों की चगरफ़्तारी गैरकानूनी और चवचध क े प्राचधकार से बाहर है; और क्ा वतामान आवेदनों में चमला आगामी ररमांड आदेश जो चगरफ़्तारी को पूरा करता है इस न्यार्ालर् की परीिण सीमा से बाहर है|

23. इस तथ्य को नकारा नहीं जा सकता चक, सिम प्राचधकार क े आदेश चदनांचकत 20.06.2018 द्वारा गं.धो.जााँ.का को लोकचहत क े चवषर् में कचर्थत संस्र्थानों की कार्ावाही की जााँच चनदेचशत है, पररक्तस्र्थचत से कोई मतभेद नहीं है चक सिम प्राचधकार द्वारा चदनांचकत 20.06.2018 क े आदेश में जो समर् सीमा चनर्चमत की गई वह 19.09.2018 को समाप्त हो गई| इस तथ्य से भी कोई मतभेद नहीं है चक गं.धो.जााँ.का ने सिम प्राचधकार से आगे की जााँच हेतु कचर्थत अचधचनर्म क े धारा 212 क े प्रावधानों क े अचधदेश अनुसार 13.12.2018 को समर् सीमा क े चवस्तार की मााँग की जो सिम प्राचधकार द्वारा इस आशर् में चदए गए समर् क े ढाई महीने बाद का समर् है|

24. पररक्तस्र्थचत से कोई मतभेद नहीं है चक, सिम प्राचधकार द्वारा कार्ोत्तर चवस्तार 14.12.2018 को पवाव्यापी रूप में ही चदर्ा गर्ा| इसचलए, प्रर्थम दृष्टर्ा र्ह चसद्ध है चक 10.12.2018 को जब अपीलकताा गं.धो.जााँ.का द्वारा चगरफ़्तार हुए, तब 20.06.2018 क े आदेश में जााँच क े बाद ररपोटा जमा करने हेतु चनचित समर् सीमा पहले ही समाप्त हो चुकी र्थी| आगे र्ह कहना उचचत है चक उि आदेश में उस समर् पर गं.धो.जााँ.का ने ना ही कार्ोत्तर समर् का चवस्तार मााँगा और न ही उनक े द्वारा कार्ोत्तर समर् का चवस्तार प्राप्त चकर्ा गर्ा|

25. इन पररक्तस्तचर्थर्ों में, गं.धो.जााँ.का क े द्वारा चनधााररत चनर्मों क े सार्थ पढ़ा गर्ा चजसमें क ें द्र सरकार द्वारा जााँच-पड़ताल को दी समर् सीमा में पूरा करने का अचधकार चदर्ा| चक हमारी दृचष्ट से चगरफ़्तारी आदेश गैरकानूनी, अवैध व िेत्ाचधकार से बाहर है|

26. एक क़ानूनी चनकार् इन मानकों पर आर्ोचजत हो चजससे र्ह अपने संचालन को न्याचर्त करने का दावा कर पाएाँ |

27. आवेदकों की अवैध चहरासत, हमारी निर में, संबंचधत मैचजस्टिेट द्वारा पाररत ररमांड आदेश से सही साचबत नहीं हो सकती| आवेदकों का गं.धो.जााँ.का द्वारा सख्ती और ईमानदारी से अपने कार्ा करने व हर चवचध और चनर्म का पालन करने क े आग्रह का अचधकार पूणा रूप से सही है| आवेदकों की 10.12.2018 को हुई चगरफ़्तारी पूवावती पररक्तस्र्थचतर्ों और मौजूदा व्यक्ति को ध्यान में रखते हुए अवैध व कानूनी मंिूरी और चवचध िेत्ाचधकार से बाहर है|

28. र्ह न्यार्ालर् बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका द्वारा आवेदकों की लगातार अवैध चहरासत को उचचत साचबत नहीं कर सकती; उन पररक्तस्र्थचतर्ों पर चजन पर मैचजस्टिेट ने ररमांड आदेश पाररत चकर्ा| आवेदकों की चहरासत हमारी निर में भारतीर् संचवधान क े अनुच्छे द 21 क े व्यक्तिगत स्वतंत्ता क े उद्ेश्यों का उल्लंघन करती है| आवेदकों की चनरंतर चहरासत कानूनी मंिूरी से परे है|

29. अन्यर्था भी, चदनांक 14.12.2018 क े ररमांड आदेश में चनम्नगत बातें उक्तल्लक्तखत हैं:- “6..........इस मामले में, जब टीम ने जााँच पूणा कर ररपोटा सिम प्राचधकार (चनदेशक, गं.धो.जााँ.का) को प्रस्तुत की, तो उन्होंने टीम को आरोचपत व्यक्तिर्ों को चगरफ्तार कर आगे की जााँच करने का चनदेश चदर्ा, जो चक प्रस्तुत तथ्यों और पररक्तस्र्थचतर्ों क े चहसाब से चवस्तार र्ोग्य है|” र्ह गलत, त्ुचटपूणा और चवचध व आचधकाररक ररकॉडा क े चवरुद्ध है|

30. र्ह पररक्तस्र्थचत से अलग है चक, आवेदक नई चदल्ली क्तस्र्थत गं.धो.जााँ.का क े कार्ाालर् से चदनांक 10.12.2018 को चगरफ्तार चकए गए र्थे जो गुरुग्राम द्वारा पाररत ररमांड आदेश को चवचध िेत्ाचधकार से बाहर घोचषत करते है|”

13. इसचलए, वास्तचवक ररट र्ाचचकाकताा राहुल मोदी और मुक े श मोदी िमानत पर ररहा हुए| उच्च न्यार्ालर् द्वारा पाररत उपरोि आदेश चदनांचकत 20.12.2018 वतामान में चुनौती क े तहत है| दोनों ही आपराचधक र्ाचचकाओं में अपीलार्थी गं.धो.जााँ.का. की और से श्री तुषार मेहता, फ़ाचिल महा-सॉचलचसटर पेश हुए जबचक मूल ररट र्ाचचकाकताागण को श्री कचपल चसब्बल, श्री मुक ु ल रोहतगी और श्री चसद्धार्था लूर्थरा, वररष्ठ अचधविाओं ने प्रस्तुत चकर्ा| दोनों पिों ने चलक्तखत प्रस्तुचतर्ााँ दार्र की है|

14. फ़ाचिल महा-सॉचलचसटर ने अन्य बातों क े सार्थ प्रस्तुत चकर्ा: (क) 2013 अचधचनर्म क े प्रावधानों क े अनुसार, जााँच तब शुरू हुई जब वतामान मामला 2013 अचधचनर्म की धारा 212(1) क े तहत गं.धो.जााँ.का को सौंपा गर्ा और अचधचनर्म की धारा 212(12) क े अनुसार जााँच तब समाप्त होगी जब गं.धो.जााँ.का द्वारा जााँच ररपोटा दार्र की जाएगी| र्ह मानना गलत है चक चदनांक 20.06.2018 से तीन महीने पुरे होने पर जााँच का अचधदेश र्ा चगरफ्तार करने की शक्ति समाप्त हो जाती है| (ख) 2013 अचधचनर्म क े धारा 212(3) क े अंतगात “आदेश में चदए गए समर् में ररपोटा क ें द्र सरकार क े समि प्रस्तुत करना” पूणा रूप से चनदेचशत है| (ग) 2013 अचधचनर्म की धारा 212(8) क े अंतगात चनदेशक, अचतररि चनदेशक और सहार्क चनदेशक को चमली चगरफ़्तारी की शक्ति चकसी समर् सीमा से बाचधत नहीं है और जब तक उप-धारा में दी गई शतों को पूरा चकर्ा जा रहा है तब तक चगरफ़्तारी की शक्ति पूणा रूप से प्रर्ोग होगी| (घ) बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका चदल्ली उच्च न्यार्ालर् में चलाने र्ोग्य नहीं क्ोंचक मूल ररट र्ाचीगण न्याचर्क मैचजस्टिेट, गुरुग्राम क े समि चदनांक 11.12.2018 को चगरफ़्तारी क े बाद पेश हुए और न्याचर्क आदेश क े तहत चहरासत में भेजे गए| इसक े बाद, उन्हें चदनांक 14.12.2018 को चवशेष न्यार्ालर् गुरुग्राम में पेश चकर्ा गर्ा और चवशेष न्यार्ालर्, गुरुग्राम क े न्याचर्क आदेश क े अंतगात पुनः चहरासत में भेज चदर्ा गर्ा| (ङ) क्ोंचक प्रमुख क ं पनी का पंजीक ृ त कार्ाालर् गुरुग्राम में र्था, तो उनको गुरुग्राम क े मैचजस्टिेट और चवशेष न्यार्ालर् क े समि पेश करना िीक रहा| अगर बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका दार्र होनी है तो पंजाब और हररर्ाणा न्यार्ालर् में होगी ना चक चदल्ली उच्च न्यार्ालर् में| (च) बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका में जााँच का मुख्य चबंदु वापसी की तारीख होती है कार्ावाही का आरम्भ नहीं| वतामान मामले में, जब चदनांक 18.12.2018 को र्ाचचकाओं पर सोच-चवचार हुआ तो न चसफ ा क ें द्र सरकार द्वारा पाररत चवस्तार आदेश चदनांचकत 14.12.2018 चमला बक्ति गुरुग्राम क े न्याचर्क मैचजस्टिेट द्वारा पाररत आदेश चदनांचकत 11.12.2018 और गुरुग्राम चवशेष न्यार्ालर् द्वारा पाररत आदेश चदनांचकत 18.12.2018 और 14.12.2018 भी चमले|

15. वररष्ठ अचधविागण श्री चसब्बल, श्री रोहतगी और श्री लूर्थरा द्वारा मूल ररट र्ाचीगण की तरफ से अन्य बातों क े सार्थ पेश चकर्ा गर्ा:- (क) 2013 अचधचनर्म की धारा 212 क े अंतगात एक चवशेष िेत्ाचधकार बनार्ा गर्ा चजसक े तहत चकसी भी क ं पनी क े कॉपोरेट कार्ों की जााँच गं.धो.जााँ.का द्वारा की जा सकती है, चजसक े दूरगामी पररणाम हो सकते है| इसी कारण से जााँच पूरी करने हेतु समर् सीमा तर् की जाती है और जााँच को एक अंतहीन कार्ा बनाने से रोका जा सक े | इसचलए, प्रर्थम आदेश में चमली समर् सीमा को बारीकी से देखा जाए और कचर्थत समर् सीमा क े अंत पर अचधदेश ख़त्म चकर्ा जाए| इसचलए, पहले आदेश में दी समर् सीमा को बारीकी से देखा गर्ा और कचर्थत समर् सीमा क े अंत पर अचधदेश ख़त्म हो गर्ा| (ख) गं.धो.जााँ.का एक चवशेष संस्र्थान है चजसका इस मामले से अचतररि जााँच का िेत्ाचधकार नहीं है, इसचलए, अचधदेश क े मानदंडों में रहते हुए कार्ा करे और कोई भी चगरफ़्तारी समर् सीमा क े बाद मान्य नहीं हो सकती| (ग) कोई भी चगरफ़्तारी समर् सीमा क े बाद िेत्ाचधकार से बाहर है और उच्च न्यार्ालर् द्वारा वतामान मामले में दी गई राहत उचचत है| (घ) ररट र्ाचचकाओं ने मुख्यतः चगरफ़्तारी आदेशों को िेत्ाचधकार से बाहर होने की चुनौती दी और ररट र्ाचचकाओं में चसफ ा चौर्थी प्रार्थाना में ही बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका जारी करने की बात कही गई| (ङ) गं.धो.जााँ.का द्वारा जााँच क े चलए आदेश नई चदल्ली में पाररत हुआ, गं.धो.जााँ.का नई चदल्ली में क्तस्र्थत है, चगरफ़्तारी आदेश भी नई चदल्ली में पाररत हुआ, ररट र्ाचीगण भी चदल्ली में चगरफ्तार हुए और गं.धो.जााँ.का कार्ाालर् की चहरासत में चदल्ली में र्थे और जैसे चक उच्च न्यार्ालर् का िेत्ाचधकार रहा उसी तरह ररट र्ाचचकाओं पर चवचार कर राहत प्रदान की गई| (च) आगे की जााँच क े चवस्तार क े अभाव में, चगरफ़्तारी की शक्ति का प्रर्ोग 10.12.2018 को नहीं हो सकता र्था| कोई भी चवस्तार प्रारंचभक चगरफ़्तारी को सत्याचपत नहीं कर सकता| इस प्रकार की चगरफ़्तारी चकसी उचचत अचधदेश से असमचर्थात है, जो चक अवैध कार्ा है, जो अनुच्छे द 21 का उल्लंघन करता है|

16. वतामान मामले क े मूल तथ्यों का संिेप इस प्रकार है:- (क) गं.धो.जााँ.का को जााँच 20.06.2018 क े आदेश द्वारा सौंपा गर्ा| इस आदेश क े अनुच्छे द 6 में र्ह अनुबंचधत चकर्ा गर्ा चक चनरीिक अपनी जााँच पूरी करें और ररपोटा क े न्द्रीर् सरकार को तीन महीने क े अन्दर पेश करें| (ख) तीन महीने की अवचध 19.09.2018 को समाप्त हुई| (ग) गं.धो.जााँ.का क े चनदेशक क े समि तीनों अचभर्ुिों को चगरफ्तार करने का प्रस्ताव पेश हुआ और 2013 अचधचनर्म की धारा 212(8) क े तहत आवश्यकताओं की पूचता सुचनचित करने क े पिात् चनदेशक गं.धो.जााँ.का ने चदनांक 10.12.2018 को मंजूरी दी| (घ) चदनांक 10.12.2018 को चगरफ़्तारी क े पिात्, अचभर्ुिों को न्याचर्क मैचजस्टिेट क े समि पेश चकर्ा गर्ा चजन्होंने अपने चदनांक 11.12.2018 क े आदेश द्वारा अचभर्ुिों को 14.12.2018 तक चहरासत में भेजा और उन्हें 14.12.2018 को चवशेष न्यार्ालर् में पेश होने का आदेश चदर्ा| (ङ) 13.12.2018 को गं.धो.जााँ.का द्वारा 57 मामलों व वतामान मामले की जााँच पूरी करने हेतु समर् सीमा का चवस्तार प्रस्ताव पेश चकर्ा गर्ा| (च) 14.12.2018 को ही गुरुग्राम चवशेष न्यार्ालर् ने अचभर्ुि को चदनांक 18.12.2018 तक चहरासत में भेज चदर्ा र्था| (छ) उसी चतचर्थ पर अर्थाात 14.12.2018 को ही क े न्द्रीर् सरकार ने ग्रुप से सम्बंचधत और चवस्तरण से सम्बंचधत चवस्तार प्रस्ताव को 30.06.2019 को स्वीक ृ ती दी| (ज) 17.12.2018 को वतामान ररट र्ाचचकाओं को वरीर्ता दी गई जो उच्च न्यार्ालर् क े समि पहली बार 18.12.2018 को आई र्थी| (झ) 18.12.2018 को ही अचभर्ुिों को आगे 21.12.2018 तक पुचलस चहरासत में भेज चदर्ा गर्ा| (ञ) 20.12.2018 को ररट र्ाचचकाओं पर चवचार हुआ और वतामान आवेदन क े तहत आदेश पाररत हुआ| (ट) उि आदेश क े अनुसार, मूल ररट र्ाचीगण िमानत पर ररहा हुए| इन तथ्यों की पृष्ठभूचम में, उच्च न्यार्ालर् द्वारा पार्ा गर्ा चक अंतररम राहत पाने हेतु एक क े स बनार्ा गर्ा| इस मामले की मुख्य समस्या र्ह है चक क्ा उच्च न्यार्ालर् द्वारा र्ाचचका पर चवचार उचचत व न्यार्संगत है और अपील क े तहत आदेश पाररत करना सही है?

17. इस पर चवचार करने हेतु चक क्ा ररट र्ाचीगण चकसी अंतररत राहत क े हकदार र्थे, उच्च न्यार्ालर् द्वारा अपने आदेश क े अनुच्छे द 15 में दो सवाल पूछे गए| मामले को उि दोनों प्रश्ों क े पररप्रेक्ष्य से चवचारण से पूवा, फ़ाचिल महा-सॉचलचसटर द्वारा चजस समस्या पर िोर चदर्ा गर्ा है उसे पहले संबोचधत करना िरूरी है| र्ह उनक े द्वारा प्रस्तुत चकर्ा गर्ा चक जो तारीख चजसक े सन्दभा में चनरोध को बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका की कार्ावाही से चुनौती दी जा सकती है वह वो तारीख है चजसमें कार्ावाही की वापसी दार्र की गई है न चक कार्ावाही शुरू होने की| उन्होंनें फ े डरल े चनणार् बसांिा िांद्रा घोषे बनाम तक ां ग एम्परर[1] में चदए चनणार् पर चवश्वास चकर्ा, जो इस प्रकार है: - “......अगर चकसी समर् न्यार्ालर् द्वारा निरबंदी की ररहाई क े चनदेश से पूवा, चहरासत का मान्य आदेश प्रस्तुत होता है, तो न्यार्ालर् उसकी ररहाई का चनदेश चसफ ा इस आधार पर नहीं दे सकता चक शुरूआती पड़ाव में चहरासत का कोई वैध कारण नहीं र्था......”” इसी प्रकार क े प्रश् चवचार हेतु नरांजन तसांह नथावन बनाम पांजाब राज्य[2], राम नारायर् तसांह बनाम तदल्ली राज्य[3], ए.क े. गोपालन बनाम भारि सरकार[4], प्रर्व िैटजी बनाम तबहार राज्य व अन्य[5], िातलब हुसैन बनाम जम्मू कश्मीर राज्य[6], कनणल िॉ. बी.रामािांद्रन राव बनाम ओतिसा व अन्य[7] में आए| र्ह चनणार् कन्नू सान्याल बनाम तिला मैतजस्ट्रेट, दातजणतलांग व अन्य[8] में चवचाररत हुए| सन्दभा: आधार क व ख

4. र्ह दोनों आधार र्ाचचकाकताा की चिला कारावास, दाचजाचलंग में शुरुआती निरबंदी की वैधता से सम्बंचधत है| हमें लगता है इन्हें चनचणात करना अनावश्यक है| अब र्ह अच्छी तरह से तर् हो गर्ा है चक सन्दभा क े सार्थ सबसे शुरुआती तारीख़, चजसमें बंदी प्रत्यिीकरण कार्ावाही को चुनौती दी गई है, की वैधता की जााँच की जा सकती है, चजस चतचर्थ पर बंदी प्रत्यिीकरण क े चलए आवेदन न्यार्ालर् में चकर्ा जाता है| इस न्यार्ालर् ने न्यार्ा. वांछु (जैसा उन्होंनें तब कहा) द्वारा ए.क े. गोपालन बनाम भारत सरकार में कहा चक:- “र्ह पूणात स्र्थाचपत है चक न्यार्ालर् बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका क े चनपटान क े समर् र्ह देखेगी चक क्ा न्यार्ालर् में आवेदन करने की चतचर्थ पर चहरासत वैध है, अगर आवेदन की चतचर्थ और सुनवाई की चतचर्थ में कोई अन्य हस्तिेप नहीं हुआ है तो|” इस न्यार्ालर् क े पूवा दो चनणार्ों में नरंजन चसंह बनाम पंजाब राज्य[2] और राम नारार्ण चसंह बनाम चदल्ली राज्य[3] में न्यार्ालर् ने र्थोड़े अलग चवचार व्यि चकए और न्यार्ालर् द्वारा बी.आर राव बनाम ओचड़सा राज्य[7] में चवचार दोहरार्ा चजसमें कहा गर्ा (चबं. 259, अनुच्छे द 7): “बंदी प्रत्यिीकरण कार्ावाही में न्यार्ालर् की वैधता क े अर्थवा चफर वापसी क े समर् पर चनरुद्धता क े सम्बन्ध में एवं कार्ावाही की प्रचतष्ठापन क े सन्दभा में नहीं|”” और इस न्यार्ालर् क े अन्य चनणार् ताचलब हुसैन बनाम जम्मू कश्मीर राज्य[6] में न्यार्ाधीश श्री दुआ, एकल न्यार्ाधीश ने अवकाशकाल में देखा चक (चबं. 121, अनुच्छे द 6) में:- “बंदी प्रत्यिीकरण कार्ावाही में न्यार्ालर् को सुनवाई की चतचर्थ पर रोक की वैधता पर चवचार करना होता है|” अलग अलग समर् पर न्यार्ालर् द्वारा चलए गए इन तीन चवचारों में, दूसरा चवचार इंग्लैंड क े कानून और अभ्यास क े अनुरूप है और भारत में सबसे अचधक स्वीक ृ चत का माप समझा जा सकता है| हालांचक, तीसरा चवचार भी गलत मान रद्ध नहीं चकर्ा जा सकता, क्ोंचक क्ा बंदी प्रत्यिीकरण आवेदन की सुनवाई चतचर्थ पर चनरोध चवचधक है र्ा नहीं, इसकी पूछताछ उचचत रहेगी| चकसी कारणवश अगर रोक उस चतचर्थ पर वैध है तो, न्यार्ालर् उस व्यक्ति की ररहाई का आदेश नहीं दे सकती जो बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका जारी कर चनरुद्ध हो| परन्तु, वतामान मामले क े उद्ेश्य हेतु, र्ह अभौचतक है चक इन तीनों में से कौन सा चवचार सही माना जाए, क्ोंचक र्ह साफ़ है चक, जो भी सही चवचार हो, रोक की वैधता क े पररिण क े सन्दभा में जल्द तारीख चजसक े सन्दभा में चनरुद्धता की वैधता का पररिण चकर्ा जाए बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका क े दार्र करने की चतचर्थ है और न्यार्ाधीश श्री दुआ क े बी.आर राव बनाम ओचड़सा राज्य[7] में, “कचर्थत शब्द चक “न्यार्ालर् कार्ावाही की शुरुआत से पूवा चकसी चतचर्थ में बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका से सम्बंचधत नहीं है|” अभी वतामान मामले में ररट र्ाचचका जनवरी 6, 1973 को दार्र हुई और उस चतचर्थ पर र्ाची चवशाखापट्नम क े न्द्रीर् कारावास की चहरासत में र्था| र्ाची की शुरूआती चहरासत, दाचजाचलंग चिला कारावास में ररट र्ाचचका क े दार्र होने से पूवा समाप्त हो चुकी र्थी| इसचलए, र्ह अनावश्यक है चक र्ाची की चिला कारावास, दाचजाचलंग में चहरासत र्ा वैधता का परीिण चकर्ा जाए| चसफ ा एक सवाल जो चवचार र्ोग्य है वह र्ह चक क्ा र्ाची की क े न्द्रीर् कारावास में चहरासत वैध है र्ा नहीं| अगर हम र्ह मान भी लें चक आधार क और ख सही रूप से आधाररत है और र्ाची की दाचजाचलंग चिला कारावास में निरबंदी में अदृढता र्थी तो भी र्ाची की क े न्द्रीर् जेल चवशाखापट्नम क े न्द्रीर् कारावास में आगामी निरबंदी को अमान्य नहीं कर सकती| बी.आर. राव बनाम ओचड़सा राज्य में े चनणार् क े अनुच्छे द 7 को देखें| चवशाखापट्नम क े न्द्रीर् कारावास में र्ाची की निरबंदी की वैधता उनक े गुणागुण पर तर् होगी| इसचलए, हम आधार ‘क’ और ‘ख’ पर चवचार- चवमशा अनावश्यक मानते हैं और उन पर चनणार् इंकार करते है|”” इस प्रकार कानून साफ़ है चक “बंदी प्रत्यिीकरण कार्ावाही में न्यार्ालर् को वैधता र्ा वापसी क े समर् निरबंदी क े संबंध में चवचार करना होता है ना चक कार्ावाही क े प्रचतष्ठापन क े सन्दभा में|” कन्नू सान्याल[8] में र्ाची की दाचजाचलंग चिला कारावास में निरबंदी की वैधता इस न्यार्ालर् द्वारा चवचाररत नहीं है और र्ह देखा गर्ा चक र्ाची की चिला कारावास दाचजाचलंग में निरबंदी में अदृढता र्ाची की चवशाखापट्नम क े न्द्रीर् कारावास में आगामी निरबंदी अमान्य नहीं है|

18. इस चरण पर, हमें इस न्यार्ालर् द्वारा चनचणात तीन मामलों से चनपटान करना होगा:- (क) मन्नु भाई रतिलाल पटेल द्वारा उषाबेन बनाम गुजराि राज्य व अन्य[9] में इस े खंड न्यार्पीि ने चपछले चनणार्ों क े चबन्दुओं में इस मामले क े सन्दभा में चवचार चकर्ा| वह एक समस्या से भी जूंझे चक क्ा न्याचर्क मैचजस्टिेट द्वारा पाररत आदेश क े चवरुद्ध बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका पर चवचार हो सकता है| इस न्यार्ालर् की रार् अनुच्छे द 20 से 24 और अनुच्छे द 31 इस प्रकार से है:

20. र्ह कहने क े बाद, कन्नू सान्याल मामले8 में न्यार्पीि ने चवचार चदर्ा चक इस मामले क े न्यार्चनणार् में, र्ह मानना बेकार है चक तीनों चवचारों में से कौन सही है व अंत में बी. रामिांद्रा राव[7] क े अनुच्छे द 7 से संदचभात न्यार्ालर् ने इस प्रकार चवचार चदर्ा चक: (एस.सी.सी. चबं. 259) “7.... बंदी प्रत्यिीकरण कार्ावाही में न्यार्ालर् को वैधता र्ा वापसी क े समर् निरबंदी से सम्बंचधत हो और कार्ावाही क े प्रचतष्ठापन से सम्बंचधत ना हो|” अंत में न्यार्पीि ने चनणार् चदर्ा चक: (कन्नू सान्याल मामला8, एस.सी.सी. चबं. 148, अनुच्छे द 5) “5.... इसचलए र्ाची की चवशेष न्यार्ाधीश, चवशाखापट्नम क े समि प्रस्तुचतकरण अवैध नहीं माना जा सकती| और उसकी आगामी निरबंदी चवशाखापट्नम क े न्द्रीर् कारावास में जो चक चवशेष न्यार्ाधीश चवशाखापट्नम क े आदेश अनुसार वैध करने हेतु लंचबत कार्ावाही होनी चाचहए| इस न्यार्ालर् ने कनणल.बी. रामिांद्रा राव बनाम ओतिसा राज्य[7] में इंचगत चकर्ा चक बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका जारी नहीं की जा सकती| ‘जहााँ एक व्यक्ति को कारावास की चहरासत में सिम न्यार्ालर् द्वारा चदए आदेश में चमला जो प्रर्थमदृष्ट्या में िेत्ाचधकार से बाहर व पूणातः अवैध नहीं है’|”

21. कन्नू सान्याल[8] क े चदए चसद्धांत, इस प्रकार है चक शुरूआती पड़ाव पर र्ाची की निरबंदी में अहटता उसकी आगामी निरबंदी को अवैध नहीं कर सकती व उसका चनणार् उसक े गुणागुणों पर होगा|

22. इस चबंदु पर, हम सफलतापूवाक स्र्थापना बैंच क े सांजय दत्त बनाम राज्य, सीबीआई द्वारा, बॉम्बे(II)10 क े चदए चनणार् में चवचार चदर्ा चक (एस.सी.सी. चबं. 442, अनुच्छे द 48) “48....स्र्थापना बैंच क े चनणार् द्वारा र्ह फ ै सला हुआ चक बंदी प्रत्यिीकरण ररट क े चलए दार्र र्ाचचका, अचभर्ुि क े चनरोध अर्थवा ररमांड की अनुपक्तस्र्थचत क े आधार पर बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका को खाररि करना पड़ेगा, र्चद चनणार् की वापसी की चतचर्थ पर चहरासत अर्थवा चनरोध वैध आधार पर हो|”

23. उपरोि दी गई अवधारणाओं को बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका क े सन्दभा में रखते हुए, खासकर अचभर्ुि क े प्रस्तुचतकरण क े समर् पर फ़ाचिल मैचजस्टिेट द्वारा पाररत आदेश से सम्बंचधत, ररमांड सम्बंचधत, संचहता क े तहत र्ोजनाबद्ध चबन्दुओं को चनदेचशत करना आवश्यक है| संचहता क े तहत ररमांड क े दो प्रावधान है अर्थाात् धारा 167 और 309| संचहता की धारा 167(2) क े तहत मैचजस्टिेट को अचभर्ुि की चहरासत अर्थाात् पुचलस र्ा न्याचर्क निरबंदी का चनदेश देने का प्राचधकार है अगर उन्हें आगे निरबंदी आवश्यक प्रतीत होती है|

24. अचभर्ुि की ररमांड का चनदेश मूल्यत: एक न्याचर्क कार्ा है| अचभर्ुि की निरबंदी क े आदेश चनदेचशत करते हुए मैचजस्टिेट कार्ाकारी िमता में नहीं होते| र्ह न्याचर्क क ृ त्य करते समर्, मैचजस्टिेट की ओर से र्ह आवश्यक है चक वह सुचनचित करे चक उनक े समि प्रस्तुत सामानों से ररमांड का औचचत्य साचबत हो रहा है र्ा और चकसी तरह से कहें तो, क्ा अचभर्ुि को चहरासत में रखने व ररमांड बढ़ाने का कोई उचचत आधार है| धारा 167 क े तहत ररमांड का उद्ेश्य है चक जााँच 24 घंटे में पूरी नहीं की जा सकती| र्ह मैचजस्टिेट को ररमांड की आवश्यकता बतलाता है| र्ह आवश्यक है चक जााँच एजेंसी ररमांड ररपोटा क े सार्थ क े स डार्री भेजें ताचक मैचजस्टिेट तथ्यात्मक पररदृश्य को सराह क े अपना मक्तस्तष्क लगाए चक क्ा पुचलस ररमांड का वारंट र्ा न्याचर्क ररमांड का औचचत्य र्ा ररमांड की कोई आवश्यकता नहीं है| मैचजस्टिेट की ओर से र्ह आवश्यक है चक वह अपना मक्तस्तष्क लगाए और स्वतः र्ा र्ांचत्क तरीक े से ररमांड आदेश पाररत ना करें|............

31. वतामान मामले में, र्ह साचबत करने लार्क है चक चगरफ्तारी अवरोध/रोक आदेश पाररत होने क े एक चदन पहले हो गई र्थी| र्ह िाचहर है चक फ़ाचिल मैचजस्टिेट द्वारा प्रार्थचमकी में चदए आरोपों क े आधार पर ररमांड आदेश पाररत चकर्ा गर्ा, ना चक सामान्य र्ा र्ांचत्क रूप| इस बात का ध्यान रखना आवश्यक है चक उच्च न्यार्ालर् की जााँच पर रोक का प्रभाव चसफ ा एजेंसी क े कार्ा पर पड़ेगा| ररमांड आदेश जो चक न्याचर्क कार्ा है, हमारे चवचार में चकसी अदृढ़ता से पीचड़त नहीं है| क े वल एक ही आधार जो उच्च न्यार्ालर् और इस न्यार्ालर् क े समि उभारा गर्ा है वह र्ह है चक एक बार जााँच पर रोक, ररमांड आदेश पर अचत संवेदनशील रहेगी और इसचलए ताचक ा क पररणामस्वरूप, निरबंदी उचचत नहीं होगी| र्ह ध्यान देने र्ोग्य है चक जााँच पहले ही शुरू हो गई र्थी और पररणामस्वरूप, अचभर्ुि चगरफ्तार चकर्ा जा चुका र्था| इसचलए, हम र्ह चवचार करने हेतु बाध्य है चक ररमांड आदेश क़ानून क े अनुसार अक्तस्र्थर नहीं माना जा सकता| र्ह एक मान्य चसद्धांत है चक बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका तब नहीं सुनी जाता जब सिम न्यार्ालर् द्वारा व्यक्ति को न्याचर्क र्ा पुचलस चहरासत में रखा जाए उस आदेश से जो प्रर्थमदृष्ट्या में िेत्ाचधकार से बाहर र्ा पूरी तरह से र्ांचत्क र्ा अवैध रूप से पाररत चकर्ा गर्ा हो| जैसा चक बी. रामचंद्रा राव[3] और कन्नू सान्याल[9] में कहा गर्ा है चक, न्यार्ालर् को निरबंदी का आदेश र्ा वैधता की छानबीन करनी आवश्यक है| जब तक न्यार्ालर् सुचनचित न कर ले चक व्यक्ति को चजस आदेश क े अनुसार कारावास की चहरासत में रखा गर्ा वह िेत्ाचधकार से बाहर और पूणा रूप से अवैध है, बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका नहीं दी जा सकती| र्ह नोट करना उचचत है चक इस न्यार्ालर् क े चवचभन्न प्राचधकार द्वारा चनपटाई गई जााँच ना तो पूछताछ है और ना ही परीिण| र्ह पुचलस क े जााँच करने क े अनन्य डोमेन में है और मैचजस्टिेट क े चकसी भी चनर्ंत्ण से स्वतंत् है| गचतचवचध का िेत् स्पष्ट और सीमांचकत है| इस प्रकार देखा गर्ा चक उच्च न्यार्ालर् द्वारा पाररत आदेश चजसमें बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका देने से इंकार इस आधार पर चकर्ा गर्ा चक मैचजस्टिेट द्वारा चदए गए न्याचर्क आदेश जो आरोचपत को चहरासत में रखे वह कानूनी रूप में वैध है, हमारी निर में त्ुचटमुि है|” ख). सौरभ क ु मार बनाम जेलर, कोनाएला कारावास व अन्य11 में अग्रणी चनणार् क े अनुच्छे द 13 में मुद्ा चनपटार्ा गर्ा”-

13. तथ्यों क े उि प्रकर्थन से साफ है चक र्ाची न्याचर्क चहरासत में न्याचर्क मैचजस्टिेट द्वारा पाररत आदेश क े कारण है| र्ही बात मूल अचभलेख से चफर सुचनचित हुई जो इस न्यार्ालर् में अपने आदेश चदनांचकत 09.04.2014 में, अचतररि मुख्य न्याचर्क मचजस्टिेट, दलचसंहसरार्, चिला समस्तीपुर, चबहार क े न्यार्ालर् से माँगार्ा गर्ा| इसचलए, र्ाची क े फ़ाचिल अचधविाओं का तक ा चक, चबना चकसी मामले क े अवैध चनरोध र्था, पर चववाद गलत है| इसचलए, अचभर्ुि द्वारा मााँगी गई राहत नहीं दी जा सकती| जबचक उपरोि कचर्थत तथ्यों क े चवचार से ररट र्ाचचका में कई अनेक मुद्े उिाए गए, चजन पर चवचार करना अनावश्यक है| हालााँचक, र्ाची को आिादी है चक वह अपने 2013 क े आपराचधक क े स सं. 129 जो फ़ाचिल अचतररि मुख्य न्याचर्क मैचजस्टिेट दलचसंहसरार् की न्यार्ालर् में चवचाराधीन है में आवेदन कर सकते है|” िाक ु र, न्या.(मुख्य न्यार्ाधीश जब र्थे) जो रमन्ना, न्यार्ा. द्वारा चदए चनणार् से सहमत र्थे उन्होंनें भी मामले से चनपटान अनुच्छे द 22 में सुचवचाररत रार् इस प्रकार है: “22. उपरोि क्तस्र्थचत में एकल सवाल चजससे हम चचंचतत है चक क्ा र्ाची कहने को अवैध चहरासत में है| हमारा उत्तर इस प्रश् हेतु नकारात्मक है| चजन अचभलेख को हमने इस्तेमाल चकर्ा है वह दशााते है चक र्ाची एक अचभर्ुि है जो अपने अपराधों क े चलए सिा पा रहा है, चजसमें संज्ञान सिम न्यार्ालर् द्वारा चलर्ा जा चुका है| वह वतामान में न्यार्ालर् क े ररमांड आदेश क े अनुसार चहरासत में है| बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका, इस क्तस्र्थचत में पूरी तरह गलत है| र्ह कहने क े बाद, हमारा चवचार है चक र्ाची वास्तव में िमानत हेतु आवेदन दार्र कर सकता है र्ा चनचित रूप से की होगी जो न्यार्ालर् द्वारा मंिूर हो सकती है, जो चक र्ाची और पररक्तस्र्थचतर्ों द्वारा चकए अपराध की प्रक ृ चत क े सन्दभा में है| र्ाची ने ना जाने चकन कारणों से र्ह करना नहीं चुना है| इसक े बजार्, उसे सलाह दी गई है चक वतामान र्ाचचका इस न्यार्ालर् में दार्र करें जो उसकी चहरासत की वृक्तद्ध का कोई चवकल्प नहीं है|” ग). इस न्यार्ालर् की तीन फ़ाचिल न्यार्ाधीशों की बेंच ने महाराष्ट्र राज्य बनाम िसतनम ररजवान तसद्दीकी12 में इसक े तहत चनष्कषा चदर्ा चक:- “10. र्ह प्रश् चक एक व्यक्ति जो िेत्ाचधकाररत मैचजस्टिेट द्वारा पाररत ररमांड आदेश क े तहत जााँच अधीन अपराध चहरासत में है, क्ा हैचबर्स कॉपास ररट पा सकता है, इस मुद्े पर चवचार सौरभ क ु मार बनाम जेलर, कोनेला कारावास11 और मनुभाई रचतलाल पटेल[9] बनाम गुजरात राज्य में चकर्ा गर्ा है| र्ह अब अचनणीत चवषर् नहीं है| वतामान मामले में, जब बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका जारी करने हेतु प्रत्यर्थी द्वारा ररट र्ाचचका 18.03.2018/19.03.2018 को दार्र की गई और 21.03.2018 को उच्च न्यार्ालर् द्वारा चनचणात हुआ चक उसक े पचत ररिवान आलम चसद्ीकी को मैचजस्टिेट द्वारा पाररत आदेश अनुसार प्रार्थचमकी सं.I-31 चदनांचकत 17.03.2018 से सम्बंचधत 23.03.2018 को पुचलस ररमांड में अभर्स्त चकर्ा| आगे, चबना मैचजस्टिेट क े आदेश को चुनौती चदए, बंदी प्रत्यिीकरण तक सीचमत ररट र्ाचचका दार्र की गई| मामले को उस दृचष्टकोण से देखने पर, र्ह मामला लगातार अवैध निरबंदी का नहीं र्था परन्तु पदधारी को न्याचर्क चहरासत में न्याचर्क मैचजस्टिेट द्वारा पाररत आदेश क े कारण रखा गर्ा र्था, जो आपराचधक मामले में जााँच क े दौरान पुचलस ररमांड प्रदान करता र्था|

11. आिेचपत चनणार् में चदए तीखे अवलोकनों की प्रार्थाना क े जवाब में खासकर अनुच्छे द 4-6 में पहले पेश चकर्ा गर्ा चक उि अवलोकन पूरी तरह से अनुचचत र्थे क्ोंचक सम्बंचधत पुचलस उपार्ुि जो न्यार्ालर् में उपक्तस्र्थत र्थे, ररिवान आलम चसद्ीकी की मैचजस्टिेट द्वारा पाररत न्याचर्क आदेश से छ ू ट चदला कर ररहाई नहीं करवा पाए जो पुचलस चहरासत चनदेचशत करते हुए मैचजस्टिेट द्वारा पाररत न्याचर्क आदेश चदनांक 23.03.2018 तक र्थे| इसक े अचतररि, र्ह स्पष्ट है चक उच्च न्यार्ालर् चबना कोई अवसर चदए, अवलोकन बनाने आगे बढ़ गई, जो चक शपर्थ पत् क े तथ्यात्मक क्तस्र्थचत को पुचलस अचधकाररर्ों को समझाने से सम्बंचधत ररट र्ाचचका 18.03.2018 /19.03.2018 को दार्र हुई और चदनांक 20.03.2018 को जब न्यार्ालर् ने अपीलार्थी क े अचधविा को अगले चदन चदनांक 21.03.2018 को ररपोटा प्रस्तुत करने हेतु बुलार्ा र्था| आिेचपत आदेश चदनांक 21.03.2018 को पाररत हुआ, जो चदनांक 23.03.2018 तक संचाचलत होने वाले न्याचर्क ररमांड आदेश क े सार्थ सहमती नहीं रखता| हमारे चवचार में, उच्च न्यार्ालर् को पुचलस उपार्ुि की ओर से की गई प्रस्तुचतर्ााँ चक प्रत्यर्थी क े पचत को न्यार्ालर् क े चनदेश पर बरी चकर्ा जा सकता है, इस बात का सार्ा नहीं लेना चाचहए| उपरोि अनुसार, पु.उपा. को ऐसी प्रस्तुचत करने क े अलावा कोई और चवकल्प नहीं र्था| क्ोंचक वह इस अचभर्ुि को चजसे वह न्याचर्क आदेश क े तहत पुचलस चहरासत में रख रहे र्थे, उसे स्वेच्छा से बरी नहीं कर सकते| उच्च न्यार्ालर् को जााँच अचधकारी क े चवरुद्ध तीखे अवलोकन नहीं बनाने चाचहए र्थे, चबना उन्हें अपने सफ़ाई शपर्थ-पत् द्वारा प्रस्तुत चकए|

12. ध्यान देने र्ोग्य है चक क्ोंचक वतामान मामले क े तथ्यों की पररक्तस्र्थचत को ध्यान रख बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका जारी नहीं की जा सकती, उच्च न्यार्ालर् को चगरफ़्तारी क े फार्दों पर ध्यान देने क े अचनच्छु क है जो मैचजस्टिेट द्वारा चदनांक 23.03.18 क े पुचलस चहरासत की मंिूरी प्रदान करने क े न्याचर्क आदेश को चुनौती देने की अनुपक्तस्र्थचत में चगरफ्तारी क े गुणों तक पुचलस चहरासत प्रदान करने क े अभाव क े हुआ और खासकर क े उन कारणों की वजह से जो मैचजस्टिेट क े आदेश में उल्लेक्तखत है| क ु छ इसी तरह की क्तस्र्थचत में, इस न्यार्ालर् ने पुतलस तनरीक्षक द्वारा प्रस्तुि राज्य व अन्य बनाम एन.एम.टी. जॉय इमैक्युलेट13 में, जााँच अचधकारी व उसकी जााँच उपेिाजनक और जचटल चटपण्ण को नामंजूर चकर्ा| तदानुसार, हमें वतामान मामले क े तथ्यों में सम्बंचधत पुचलस अचधकाररर्ों क े क्तखलाफ लगाए गए चनणार् क े अनुच्छे द 4 से 6 में की गई चटप्पचणर्ों को उजागर करने में कोई चहचक नहीं है|

19. अचभर्ुि की ररमांड चनदेचशत करने क े कार्ा को न्याचर्क प्रचिर्ा कहा माना जाता है एवं ररमांड आदेश को चुनौती पर बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका में चवचार नहीं चकर्ा जाता | उच्च न्यार्ालर् क े द्वारा उिार्ा गर्ा पहला प्रश् का उत्तर माना जाता है | वतामान मामले में, उस तारीख़ पर जब मामले को उच्च न्यार्ालर् द्वारा चवचार चकर्ा गर्ा र्था एवं आदेश पाररत चकर्ा गर्ा र्था तब न क े वल न्याचर्क मचजस्टिेट क े एवं चवशेष न्यार्ालर्,गुरुग्राम क े द्वारा पाररत ररमांड आदेश र्थे बक्ति क सरकार क े द्वारा चदनांक 14.12.2018 क े द्वारा पाररत चवस्त्ररण आदेश भी र्थे| मूल र्ाचचकाकताा आदेश र्ा ररमांड की चवचधमान्यता, वैधता व शुद्धता को उचचत कार्ावाही दार्र कर चुनौती दे सकते र्थे | मगर उन्होंने ऐसी कोई चुनौती सिम अपील र्ा पुनरीिण फोरम क े सामने नहीं रखी | ररमांड क े आदेश पाररत करने वाले न्याचर्क मचजस्टिेट और चवशेष न्यार्ालर्, गुरुग्राम द्वारा मामले की गुणवत्ता का चनपटारा चकर्ा और देखा र्चद अचभर्ुि की निरबंदी न्यार्ोचचत है र्ा नहीं| गुणवत्ता क े आधार पर सुसंगत मुद्ों की जााँच करने पर अचभर्ुिों को आगे की पुचलस चहरासत क े चलए ररमांड दे दी गर्ी | इन आदेशों को उच्च न्यार्ालर् में चुनौती नहीं दी गई र्थी| इसचलए इन आदेशों की सत्यता क े सम्बन्ध में दी गई चुनौती पर संज्ञान करने का चवकल्प उच्च न्यार्ालर् क े चलए मौजूद नहीं र्था मगर उच्च न्यार्ालर् ने इस मामले को प्रारंचभक चगरफ्तारी क े ही आदेश की वैधता होने र्ा ना होने क े दृचष्टकोण से परखा और पार्ा की ररमांड क े आदेश द्वारा वैधता को नहीं दी जा सकती | मुख्य रूप से उच्च न्यार्ालर् क े समि उिार्ा गर्ा मुद्ा र्था चक जााँच की अवचध क े बाद भी चगरफ्तारी की जा सकती है जैसा चक 20.06.2018 क े उि आदेश में चनधााररत र्था| |अगला मुद्ा समर् क े चवस्तारण का र्था चजसकी स्वीक ृ चत 14.12.2018 को दी गई र्थी| र्ह सच है की चगरफ्तारी अवचध की समाक्तप्त क े बाद हुई र्थी पर जब तक उच्च न्यार्ालर् ने र्ाचचका पर संज्ञान चकर्ा, तब तक क े न्द्रीर् सरकार द्वारा 14.12.2018 को चवस्तारण का आदेश पाररत हो चुका र्था| इसक े सार्थ ही न्याचर्क मचजस्टिेट व चवशेष अदालत, गुरुग्राम द्वारा न्याचर्क आदेश पाररत हो चुक े र्थे, चजसने की अचभर्ुि को चहरासती ररमांड चदला दी र्थी | र्चद हम पूरी तरह से इस न्यार्ालर् द्वारा बंदी प्रत्यिीकरण र्ाचचका क े सम्बन्ध में अचधकाररकता क े प्रर्ोग क े सम्बन्ध में चनधााररत क़ानून क े चहसाब से चलें जो चक है, उच्च न्यार्ालर् द्वारा र्ाचचका पर संज्ञान करना और आदेश पाररत करना न्यार्ोचचत नहीं र्था |

20. हालााँचक हमें मूल ररट र्ाचचकाकतााओं की ओर से पहले से दी गई प्रस्तुचत से चनपटारा करना चाचहए चक बंदी प्रत्यिीकरण क े सम्बन्ध में ररर्ार्त की प्रार्थाना दूसरे दजे की र्थी, जबचक सैद्धांचतक प्रस्तुचतर्ों का सम्बन्ध र्ाचचका की पहली तीन प्रार्थानाओं से र्था | प्रस्तुत चकर्ा र्था चक अवचध चक समाक्तप्त क े सार्थ ही पूरा अचधदेश खत्म हो गर्ा और तभी कोई चगरफ्तारी नहीं हो सकती र्थी और इस चसलचसले में अवैधता बनी रहेगी चाहे र्चद चवस्तारी का आगे कोई आदेश भी जारी चकर्ा गर्ा हो | ररट र्ाचचकाकतााओं क े फ़ाचिल अचधविाओं चक प्रस्तुचत क े अनुसार इस प्रकार चक चवस्ताररता अंतचनचहात दोष को िीक नहीं कर सकती और इसचलए उच्च न्यार्ालर् का र्ाचचका पर संज्ञान करना उचचत र्था |हम उि पैराग्राफ 15 में उच्च न्यार्ालर् द्वारा प्रस्तुत दू सरे प्रश् पर चवचार करने क े बाद इस मुद्े से चनपट सकते हैं|

21. चदनांक 20.06.2018 क े पहले आदेश में ही संक े त चदर्ा गर्ा है चक मूल क ं पनी का पंजीक ृ त कार्ाालर् हररर्ाणा क े गुरुग्राम में र्था। 2013 क े अचधचनर्म की धारा 435 में अपराधों क े शीघ्र सुनवाई क े चलए चवशेष न्यार्ालर्ों की स्र्थापना करने पर चवचार चकर्ा गर्ा है। धारा 436 में प्रावधान चकर्ा गर्ा है चक "धारा 435 की उपधारा (1) में चवचनचदाष्ट सभी अपराध चसफ़ ा उन्हीं चवशेष न्यार्ालर् में चवचारणीर् होंगे चजनकी स्र्थापना र्ा चनर्ुक्ति उस िेत् में है, चजसमें उस क ं पनी का पंजीक ृ त कार्ाालर् है चजसका सम्बन्ध में अपराध चकर्ा गर्ा है... |" चगरफ्तारी क े तुरंत बाद, आरोचपर्ों को 11.12.2018 को न्याचर्क मचजस्टिेट, गुरुग्राम क े समि पेश चकर्ा गर्ा, चजन्होंने उन्हें 14.12.2018 तक चहरासती ररमांड में भेज चदर्ा और चनदेश चदर्ा चक उन्हें 14.12.2018 को चवशेष अदालत, गुरुग्राम क े समि पेश चकर्ा जाए। तदनुसार, अचभर्ुिों को चवशेष न्यार्ालर्, गुरुग्राम क े समि पेश चकर्ा गर्ा, चजसने उसक े बाद पहले उन्हें 18.12.2018 तक और चफर 21.12.2018 तक चहरासती ररमांड में भेज चदर्ा। गुरुग्राम क े चवशेष न्यार्ालर् धारा 436 क े अंतगात इस मामले से चनपटने क े चलए सिम होती। लेचकन ररट र्ाचचकाकतााओं क े फाचिल अचधविाओं क े अनुसार क्ोंचक आरोचपर्ों को चदल्ली में चगरफ्तार चकर्ा गर्ा र्था और उन्हें चदल्ली में चहरासत में रखा गर्ा और एसएफआईओ कार्ाालर् चदल्ली में है इसचलए चदल्ली उच्च न्यार्ालर् ररट र्ाचचकाओं पर संज्ञान और चवचार करने क े चलए सिम है और इसचलए उसे ररट र्ाचचकाकतााओं द्वारा चुना गर्ा। नवीनिांद्र एन. मजीतिया बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य14 क े मामले में उन्होंने इस न्यार्ालर् द्वारा चदए गए चनणार् पर भरोसा रखा |

22. नवीनिांद्र मजीतिया14 में, दलों क े बीच सभी लेन-देन बंबई उच्च न्यार्ालर् क े िेत्ाचधकार में हुआ | हालााँचक, र्ाचचकाकताा क े क्तखलाफ चशलांग में चशकार्त दजा की गई र्थी, चजसक े चलते जााँच चशलांग पुचलस द्वारा की गई। र्ह कहा गर्ा चक इस तरह की जााँच पूरी तरह से गलत और अनुचचत र्थी और बंबई क े उच्च न्यार्ालर् में एक ररट र्ाचचका दार्र की गई ताचक चशलांग में दार्र चशकार्त को रद् चकर्ा जा सक े र्ा उसक े चवकल्प में मुंबई पुचलस की चकसी उपर्ुि जााँच अचभकरण को जााँच स्र्थानांतररत हो सक े । चनणार् क े पैरा 29 से पता चलता है चक मामले क े चवचचत् तथ्यों की क्तस्र्थचत में, इस अदालत ने चनदेश चदर्ा चक चशलांग में दजा चशकार्तों क े संबंध में आगे की जााँच मुंबई पुचलस द्वारा की जाए। न्यार्ाधीश र्थॉमस, जो न्यार्ाधीश डी.पी. महापात् द्वारा चलक्तखत अग्रचनणार् से सहमत र्थे, ने चनम्नानुसार अपनी सहमचत रार् दी: "44. मौजूदा मामले में, एक बड़ी संख्या में घटनाएाँ बम्बई में हुई हैं, चजनका सम्बन्ध चशलांग में दजा एफ.आई.आर. में चनचहत अचभर्ोगों से है| र्चद ररट र्ाचचका में चदए गए प्राख्यान सही हैं तो तथ्यों क े बड़े चहस्े ने, चजसक े कारण एफआईआर दिा हुई, बम्बई में स्र्थान चलर्ा र्था| उन घटनाओं का चफर पुनक ा र्थन अनावश्यक है जब मोहपात्ा, ज. ने उनका सटीकता और आवश्यक चववरण क े सार्थ उल्लेख चकर्ा है|”

45. पूवाकचर्थत क्तस्र्थचत में र्ह मानना लगभग असंभव है चक वाद हेतुक का कोई भी चहस्ा बम्बई में उत्पन्न नहीं हुआ है, चजस कारण र्ाचचकाकताा द्वारा दार्र ररट र्ाचचका पर संज्ञान करने क े पूणा िेत्ाचधकार से बम्बई उच्च न्यार्ालर् को वंचचत चकर्ा जा सक े | र्हााँ तक चक र्े ही तथ्य चक एफ.आई.आर. में दजा क े स चक जााँच का ज्यादातर चहस्ा बम्बई में ही करार्ा जाना है, दशााता है चक वाद हेतुक बम्बई उच्च न्यार्ालर् की िेचत्क सीमाओं से बाहर नहीं जा सकता|

23. दशरथ रूपतसांह रािौि बनाम महाराष्ट्र राज्य और अन्य15 में, इस न्यार्ालर् क े तीन फाचिल न्यार्ाधीशों की एक न्यार्पीि को परािम्य चलखत अचधचनर्म, 1881 और क े अधीन आपराचधक चशकार्तों क े संबंध में न्यार्ालर्ों क े िेत्ीर् अचधकाररता क े सवालों पर चवचार करने क े चलए गचित चकर्ा गर्ा र्था एवं चनणार् क े पैरा 13 में नवीनिांद्र एन. मजीतिया14 में पूवा चनणार् को नोट चकर्ा और चनम्नानुसार चटप्पणी की: "13. हम उन संभाचवत असंगचतर्ों क े बारे में सचेत हैं जो चक नागररक कानून से सम्बंचधत चनणार्ों को अपराचधक कानून में उपर्ोचजत करने में फ ं सी हुई हैं, चजसमें चक नागररक कानून की “वाद हेतुक” चक अवधारणा का अपराचधक कानून में ग्रहण करना भी शाचमल है, चजसमें चक अचनवार्ा रूप से उस जगह की पररकल्पना है जहााँ अपराध चकर्ा गर्ा है, उस जगह क े न्यार्ालर् को िेत्ाचधकार से सशि करती है| नवीनचंद्र एन मजीचिर्ा बनाम महाराष्टि राज्य14 में इस न्यार्ालर् को भारत क े संचवधान क े अनुच्छे द 226 (2) क े अधीन उच्च न्यार्ालर्ों की शक्तिर्ों पर चवचार करना र्था। उसमें मौजूद वाक्ांश “वाद हेतुक” पर चवचार करते हुए र्ह स्पष्ट चकर्ा गर्ा चक क्ोंचक चशकार्त में उल्लेक्तखत अचभकचर्थत अपराध की जााँच चक क ु छ महत्वपूणा घटनाओं ने मुंबई में स्र्थान चलर्ा है और चवशेषतः क्ोंचक मौचलक चशकार्त चशलांग में दजा चशकार्त का गलत होना र्था तो बम्बई उच्च न्यार्ालर् को ररट िेत्ाचधकार चनचवावाचदत रूप से उपलब्ध र्था| “वाद हेतुक” की अवधारणा क े अपराचधक व्यवस्र्था में चनषेचन ने और अचधक उलझन पैदा कर दी है जो की उच्च न्यार्लर्ों द्वारा स्वीकार कर ली गर्ी है | हमें ऐसा प्रतीत होता है चक “क े भास्करन बनाम संकरन वैद्यान वैद्यन बालान और अन्य 16 ” ने चशकार्तकताा को कई मौक े प्रदान चकर्े हैं, जो चक इस े कानून को सुगम करने चक इच्छा क े प्रचतक ू ल है| न्यार्ालर्ों को आदेचशत है चक वह कानून चक इस प्रकार व्याख्या करे चक उसकी अस्पष्टता और संचदग्धता को चमटार्ा जा सक े और र्े सुचनचित चकर्ा जाए चक क़ानूनी कार्ावाही का इस्तेमाल प्रताड़ना क े साधन क े तौर पर ना चकर्ा जाए| चाहे वो कानून क े चकसी स्पष्ट रूप से उल्लंघन करने वाले का ही क्ों न हो | कानून का प्रर्ास अपराचधर्ों को दंड देना और पीचड़त पि को सहार्ता प्रदान करना है न चक अपराचधर्ों को तंग करने वाली कार्ावाही से प्रताचड़त करना | इसचलए सटीकता और चनचितता आवश्यक है, चवशेषकर जहां मुकदमें क े स्र्थान का सवाल है”|

24. र्ह सच है चक दशरथ रूपतसांह रािौि15 में चलर्ा गर्ा चनणार् परिाम्य चलखत अचधचनर्म की धारा 138 क े अधीन आपराचधक चशकार्त क े संदभा में र्था एवं ररट र्ाचचका क े चल सकने क े मुद्े से चनपटने क े चलए संचवधान क े अनुच्छे द 226 क े अधीन नहीं र्था इसचलए र्ह नहीं कहा जा सकता की मौजूदा मामले में उच्च न्यार्ालर् क े पास र्ाचचका पर संज्ञान करने का पूरी तरह से िेत्ाचधकार नहीं र्था। हालांचक, क्ोंचक न्याचर्क मचजस्टिेट और चवशेष न्यार्ालर् गुरुग्राम द्वारा पाररत ररमांड आदेशों क े अनुसरण हेतु निरबंदी क े संबंध में चुनौती र्थी अत: हमारी सुचवचाररत रार् है चक उच्च न्यार्ालर् को इस चुनौती पर संज्ञान नहीं करना चाचहए र्था। र्चद ररमांड का चनदेशन मूलतः एक न्याचर्क कार्ा है, तो ऐसे आदेशों की शुद्धता र्ा वैधता चक परख र्चद करनी ही हो तो उसे चकसी अपीलीर् र्ा पुनरीिण मंच क े समि उचचत रूप से स्र्थाचपत की गई कार्ावाही क े रूप में चकर्ा जा सकता है। र्हााँ तक चक ऐसी पररक्तस्र्थचतर्ों में भी जहााँ चगरफ्तारी उच्च न्यार्ालर् क े िेत्ाचधकार में ही हुई हो, क्ोंचक 2013 क े अचधचनर्म की धारा 435, 436 क े अनुपालन में अचभर्ुिों को एक सिम अदालत क े समि पेश चकर्ा गर्ा र्था, उच्च न्यार्ालर् को ररट र्ाचचका स्वीकार नहीं करनी चाचहेए र्थी। चफर भी, क्ोंकी उच्च न्यार्ालर् ने इस मामले पर इस दृचष्ट से चवचार चकर्ा चक चगरफ्तारी का प्रारंचभक आदेश मान्य र्था भी र्ा नहीं और चफर पार्ा चक इस तरह चक अवैधता को आगे क े ररमांड आदेश द्वारा वैध नहीं िहरार्ा जा सकता है, हम उस प्रश् से अब चनपट सकते हैं।

25. शुरुआत में हम सुसंगत कानूनी प्रावधान उद् धृत करते हैं। क) 2013 अचधचनर्म की धारा 211 और 212 इस प्रकार हैं: - “211 गांभीर िोखाििी जााँि कायाणलय की स्थापना-(1)क ें द्रीर् सरकार, चकसी क ं पनी से सम्बंचधत धोखाधड़ी की जााँच करने क े चलए अचधसूचना द्वारा गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् क े नाम से ज्ञात एक कार्ाालर् की स्र्थापना करेगी: परन्तु जब तक उपधारा (1) क े अधीन धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् स्र्थाचपत नहीं चकर्ा जाता है, तब तक भारत सरकार क े संकल्प सं. 45011/16/2003- प्रशा.- I, तारीख 2 जुलाई, 2003 क े चनबंधनों में क ें द्रीर् सरकार द्वारा स्र्थाचपत गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् को इस धारा क े प्रर्ोजनों क े चलए गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् समझा जाएगा| (2) गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् का प्रमुख एक चनदेशक होगा और क ें द्रीर् सरकार द्वारा चनर्ुि चकर्े जाने वाले ऐसे व्यक्तिर्ों में से चनम्नचलक्तखत िेत्ों क े चवशेषज्ञों की ऐसी संख्याओं से चमलकर बनेगा, जो चनम्नचलक्तखत िेत् में र्ोग्यता, सत्यचनष्ठा और अनुभव रखते हों,- (i) बैंककारी; (ii) कॉरपोरेट कार्ा; (iii) कराधान; (iv) न्यार्ालचर्क संपरीिा; (v) पूाँजी बािार; (vi) सूचना प्रौद्योचगकी; (vii) चवचध; र्ा (viii) ऐसे अन्य िेत् जो चवचहत चकर्े जाएं | (3) क ें द्रीर् सरकार, गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् में अचधसूचना द्वारा कॉरपोरेट कार्ा में सम्बंचधत चवषर्ों में ज्ञान और अनुभव रखने वाले ऐसे चनदेशक को चनर्ुि करेगी जो भारत सरकार में संर्ुि सचचव से नीचे की पंक्ति का अचधकारी नहीं होगा | (4) क ें द्रीर् सरकार गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् क े ऐसे चवशेषज्ञ और अन्य अचधकारी और कमाचारी चनर्ुि कर सक े गी जो इस अचधचनर्म क े अधीन उसक े क ृ त्यों क े दि चनवाहन क े चलए आवश्यक समझे| (5) गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् क े चनदेशक, चवशेषज्ञों और अन्य अचधकाररर्ों तर्था कमाचाररर्ों क े चनबंधन और सेवा शतें ऐसी होंगी जो चवचहत की जाएाँ | 212 गांभीर िोखाििी जााँि कायाणलय द्वारा क ां पनी क े कायों का अन्वेषर्- (1) धारा 210 क े उपबंधों पर प्रचतक ू ल प्रभाव डाले चबना, जहााँ क ें द्रीर् सरकार की रार् है चक गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् द्वारा क ं पनी क े कार्ों का अन्वेषण करना आवश्यक है, वहााँ- (क) धारा 208 क े अधीन रचजस्टिार र्ा चनरीिक की ररपोटा प्राप्त होने पर; (ख) क ं पनी द्वारा पाररत चवशेष संकल्प की संसूचना पर चक क ं पनी क े चिर्ाकलापों का अन्वेषण चकर्ा जाना अपेचित है; (ग) लोकचहत में, र्ा (घ) क े न्द्रीर् सरकार र्ा राज्य सरकार क े चकसी चवभाग से अनुरोध पर; क े न्द्रीर् सरकार आदेश स्वर उि क ं पनी क े चिर्ाकलापों क े अन्वेषण को गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् को सौंप सक े गी और इसका चनदेशक ऐसी संख्या में चनरीिकों को अचभचहत कर सक े गा जो वह अन्वेषण क े प्रर्ोजन क े चलए आवश्यक समझें | (2) जहााँ कोई मामला क े न्द्रीर् सरकार द्वारा इस अचधचनर्म क े अधीन क े अन्वेषण क े चलए गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् को सौंपा गर्ा है, वहााँ क ें द्रीर् सरकार र्ा कोई राज्य सरकार का कोई अन्य अन्वेषण अचभकरण इस े चलए कपट अन्वेषण कार्ाालर् को सौंपा गर्ा है, वहााँ क ें द्रीर् सरकार र्ा कोई राज्य सरकार का कोई अन्य अन्वेषण अचभकरण इस े अधीन चकसी अपराध की बाबत ऐसे मामले पर अन्वेषण की कार्ावाही नहीं करेगा और र्चद ऐसा अन्वेषण पहले से आरंभ है तो र्ह आगे कार्ावाही नहीं करेगा और र्चद ऐसा अन्वेषण पहले से आरंभ है तो र्ह आगे कार्ाावाही नहीं करेगा और सम्बद्ध अचभकरण इस अचधचनर्म क े अधीन ऐसे अपराधों की बाबत सुसंगत दस्तावेजों और अचभलेखों को गंभीर कपट अन्वेषण कार्ाालर् को अन्त्तररत करेगा| (3) जहााँ क ें द्रीर् सरकार द्वारा क ं पनी क े कार्ों का अन्वेषण, गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् को सौंपा गर्ा वहााँ र्ह अन्वेषण ऐसी रीचत में करेगा और ऐसी प्रचिर्ा का अनुसरण करेगा जो इस अध्यार् में उपबंचधत है; और ऐसी अवचध में जो आदेश में चवचनचदाष्ट की जाए, क े न्द्रीर् सरकार को अपनी ररपोटा, सौंपेगा | (4) गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् का चनदेशक, अन्वेषण अचधकारी द्वारा क ं पनी क े कार्ों का अन्वेषण कराएगा चजसक े पास धारा 217 क े अधीन चनरीिक की शक्ति होगी | (5) क ं पनी और इसक े अचधकारी और कमाचारी, जो क ं पनी क े चनर्ोजन में है र्ा रहे हैं, अन्वेषण अचधकारी को सभी जानकारी, स्पष्टीकरण, दस्तावेि और सहार्ता प्रदान करने क े चजम्मेदार होंगे जो उसे अन्वेषण क े संचालन क े चलए अपेचित हों | (6) दंड प्रचिर्ा संचहता, 1973 (1974 क े 2)17 में अन्तचवाष्ट चकसी बात क े होते हुए भी, इस अचधचनर्म की (धारा 447 में चनचहत अपराध) संज्ञेर् होंगे और इन धाराओं क े अधीन चकसी अपराध क े चलए अचभर्ुि व्यक्ति को जमानत र्ा उसक े स्वर्ं क े बंधपत् पर तब तक चनमुाि नहीं चकर्ा जाएगा जब तक- (i) ऐसी चकसी चनमुाक्ति क े चलए आवेदन का चवरोध करने क े चलए लोक अचभर्ोजक को अवसर न चदर्ा गर्ा हो; और (ii) जहााँ लोक अचभर्ोजन आवेदन का चवरोध करता है वहााँ न्यार्ालर् का वह समाधान हो गर्ा चक र्ह चवश्वास करने क े र्ुक्तिर्ुि आधार हैं चक वह ऐसे अपराध का दोषी नहीं है और जमानत में रहते हुए उसक े द्वारा कोई अपराध चकर्े जाने की संभावना नहीं है: परन्तु कोई व्यक्ति, जो सोलह वषा की आर्ु से कम है र्ा कोई मचहला है र्ा रुग्ण र्ा दुबाल है, उसे जमानत पर चनमुाि चकर्ा जा सक े गा र्चद चवशेष न्यार्ालर् ऐसा चनदेश देता है: परन्तु र्ह और चक चवशेष न्यार्ालर् इस उपधारा में चनचदाष्ट चकसी अपराध का संज्ञान चनम्नचलक्तखत द्वारा चलक्तखत में पररवाद चकर्े जाने पर ही लेगा अन्यर्था नहीं- (i) चनदेशक, गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर्; र्ा (ii) चलक्तखत में साधारण र्ा चवशेष आदेश द्वारा उस सरकार द्वारा इस चनचमत्त प्राचधक ृ त क ें द्रीर् सरकार का कोई अचधकारी| (7) उपधारा (5) में चवचनचदाष्ट जमानत की मंजूरी पर पररसीमा, जमानत मंजूर करने पर दंड प्रचिर्ा संचहता, 1973 (1974 का 2) र्ा तत्समर् प्रवृत्त चकसी अन्य चवचध क े अधीन पररसीमाओं क े अचतररि होगी | (8) र्चद साधारण र्ा चवशेष आदेश द्वारा क े न्द्रीर् सरकार द्वारा इस चनचमत्त प्राचधक ृ त गंभीर कपट अन्वेषण कार्ाालर् का चनदेशक, अपर चनदेशक र्ा सहार्क चनदेशक, अपने कब्जे में सामग्री क े आधार पर र्ह चवश्वास करने का कारण (ऐसे चवश्वास क े कारण चलक्तखत में अचभचलक्तखत चकर्े जाएाँ ) रखता है चक कोई व्यक्ति उपधारा (6) में चनचदाष्ट धाराओं क े आधीन दंडनीर् चकसी अपराध का दोषी रहा है तो ऐसे व्यक्ति को चगरफ्तार कर सक े गा और ऐसी चगरफ्तारी क े आधारों को, र्र्थाशीघ्र, उसे सूचचत करगा | (9) उपधारा (8) क े अधीन ऐसे व्यक्ति की चगरफ्तारी क े िीक पिात गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् क े चनदेशक र्ा सहार्क चनदेशक उस उपधारा में चनचदाष्ट अपने कब्जे की सामग्री क े सार्थ आदेश क े एक प्रचत गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् को, मुहरबंद चलफाफ े में ऐसी रीचत में अग्रेचषत करेंगे जो चवचहत की जाए और गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् ऐसे आदेश और सामग्री को ऐसी अवचध क े चलए रखेगा,जो चवचहत की जाए | (10) उपधारा (8) क े अधीन चगरफ्तारी व्यक्ति को चौबीस घंटो क े भीतर आचधकाररता रखने वाले, र्र्थाक्तस्र्थचत, न्याचर्क मचजस्टिेट र्ा महानगर मचजस्टिेट क े समि लार्ा जाएगा: परन्तु चगरफ्तारी क े स्र्थान से मचजस्टिेट क े न्यार्ालर् तक की र्ात्ा क े चलए आवश्यक समर् चौबीस घंटों की अवचध से अपवचजात रहेगा | (11) क े न्द्रीर् सरकार र्चद ऐसा चनदेश देती है तो गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर्, क ें द्रीर् सरकार को एक अंचतम ररपोटा प्रस्तुत करेगा | (12) अन्वेषण क े पूरा होने पर, गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर्, क े न्द्रीर् सरकार को अन्वेषण ररपोटा प्रस्तुत करेगा | (13) इस अचधचनर्म र्ा तत्समर् प्रवृत्त चकसी चवचध में अंतचवाष्ट चकसी बात क े होते हुए भी, अन्वेषण ररपोटा की एक प्रचत इस सम्बन्ध में न्यालार् को आवेदन करक े चकसी सम्बद्ध व्यक्ति द्वारा प्राप्त की जा सक े गी| (14)अन्वेषण ररपोटा की जााँच क े पिात (और ऐसी चवचधक सलाह देने क े पिात जो वह िीक समझे) क ं पनी और इसक े अचधकारी और कमाचारी, जो क ं पनी क े चनर्ोजन में हैं र्ा रहे हैं र्ा कोई अन्य व्यक्ति जो क ं पनी क े कार्ों से प्रत्यि र्ा अप्रत्यि रूप से संबध है, क े चवरुद्ध अचभर्ोजन आरम्भ करने क े चलए गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् को चनदेश दे सक े गी| (15) इस अचधचनर्म र्ा तत्समर् प्रवृत्त चकसी अन्य चवचध में अंतचवाष्ट चकस बात क े होते हुए भी आरोपों की चवरचना क े चलए चवशेष न्यार्ालर् में फाइल की गई अन्वेषण ररपोटा को दंड प्रचिर्ा संचहता, 1973 (1974 की 2) की धारा 173 क े अधीन पुचलस ऑचफसर द्वारा फाइल की गई ररपोटा समझी जार्ेगी | (16) इस अचधचनर्म में अंतचवाष्ट चकसी बात क े होते हुए भी, क ं पनी अचधचनर्म, 1956 (1956 की 1) क े उपबंधों क े अधीन गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् द्वारा कोई अन्वेषण र्ा की गई अन्य कारवाई र्ा आरम्भ की गई कार्ावाही इस े अधीन अग्रसर होने क े चलए इस प्रकार जारी रहेगी मानो र्ह अचधचनर्म पाररत न हुआ हो | (17) (क) र्चद इस अचधचनर्म क े अधीन गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् चकसी अपराध का अन्वेषण कर रहा है तो ऐसे अपराध क े सम्बन्ध में सूचना र्ा दस्तावेि रखने वाला कोई अन्य अन्वेषण अचभकरण, राज्य सरकार, पुचलस प्राचधकारी, आर्-कर प्राचधकारी गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् को ऐसी उपलब्ध सूचना र्ा दस्तावेि प्रदान करेंगे | (ख) गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् चकसी अन्वेषण अचभकरण, राज्य सरकार, पुचलस प्राचधकारी र्ा आर्-कर प्राचधकाररर्ों क े पास उपलब्ध चकसी जानकारी र्ा दस्तावेजों को साझा कर सक ें गे जो ऐसे अन्वेषण अचभकरण, राज्य सरकार पुचलस प्राचधकारी र्ा आर्-कर प्राचधकारी क े चलए चकसी अन्य चवचध क े अधीन चकसी अपराध र्ा मामले की बाबत चकर्े जा रहे अन्वेषण र्ा जााँच क े चलए सुसंगत र्ा उपर्ोगी हो | ख) अचधचनर्म 2008 की धारा 43 चनम्नानुसार है- “43. सीतमि दातयत्व भागीदारी क े कामकाज का अन्वेषर्– (1) क सरकार सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े कामकाज क े अन्वेषण और उस पर ऐसी रीचत में, जो वह चनदेश दे, ररपोटा देने क े चलए चनरीिक क े रूप में एक र्ा अचधक सिम व्यक्तिर्ों को चनर्ुि करेगी, र्चद- (क) अचधकरण, र्ा तो स्व: प्रेरणा से र्ा सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े भागीदारों की क ु ल संख्या क े एक बटा पांच से अन्यून भागीदारों से प्राप्त चकसी आवेदन पर, आदेश द्वारा र्ह घोचषत करता है चक सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े कामकाज का अन्वेषण चकर्ा जाना चाचहए; र्ा (ख) कोई न्यार्ालर्, आदेश द्वारा र्ह घोषणा करता है चक चकसी सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े कामकाज का अन्वेषण चकर्ा जाना चाचहए| (2) क ें द्रीर् सरकार चकसी सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े कामकाज का अन्वेषण करने और उस पर ऐसी रीचत में जो वह चनदेश दे, ररपोटा देने क े चलए, चनरीिक क े रूप में एक र्ा अचधक सिम व्यक्तिर्ों को चनर्ुि कर सक े गी | (3) उपधारा (2) क े अनुसरण में चनरीिक की चनर्ुक्ति चनम्नचलक्तखत दशा में की जा सक े गी,- (क) र्चद सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े भागीदारों की क ु ल संख्या क े एक बटा पांच से अन्यून भागीदारी समर्थाक साक्ष्य और ऐसी प्रचतभूचत रकम क े सार्थ, जो चवचहत की जाए, आवेदन करते हैं; र्ा (ख) र्चद सीचमत दाचर्त्व भागीदारी ऐसा आवेदन करती है चक सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े कामकाज का अन्वेषण चकर्ा जाना चाचहए; र्ा (ग) र्चद क े न्द्रीर् सरकार की रार् में, र्ह सुझाव देने वाली पररक्तस्र्थचतर्ााँ हैं चक- (i) सीचमत दाचर्त्व भागीदारी का कारोबार उसक े लेनदारों, भागीदारों र्ा चकसी अन्य व्यक्ति को कपट वंचचत करने क े आशर् से र्ा अन्यर्था चकसी कपटपूणा र्ा चवचधचवरुद्ध प्रर्ोजन क े चलए र्ा उसक े चकन्हीं र्ा चकसी भागीदार क े प्रचतक ू ल चकसी अन्यार्पूणा र्ा अनुचचत रीचत में चकर्ा जा रहा है र्ा चकर्ा गर्ा है र्ा सीचमत दाचर्त्व भागीदारी चकसी कपटपूणा र्ा चवचधचवरुद्ध प्रर्ोजन क े चलए बनाई गई र्थी; र्ा (ii) सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े कामकाज इस अचधचनर्म क े उपबंधों क े अनुसार नहीं चकर्े जा रहे हैं; र्ा (iii) रचजस्टिार र्ा चकसी अन्वेषण र्ा चवचनर्ामक अचभकरण की ररपोटा प्राप्त होने पर, पर्ााप्त कारण हैं चक सीचमत दाचर्त्व भागीदारी क े कामकाज का अन्वेषण चकर्ा जाना चाचहए |”

26. 2013 अचधचनर्म क े प्रावधानों को पढ़ने से पता चलता है चक अध्यार् 29 में क ु छ धाराएाँ िमशः 447, 448, 449 और 452 क े अधीन धोखाधड़ी, झूिे बर्ान, झूिे सबूत और संपचत्त को रोकने जैसे अपराधों क े चलए सजा चनधााररत की गई है। कम से कम 10 लाख रूपर्े की राचश र्ा कम्पनी क े टनाओवर क े 1 प्रचतशत क े बराबर की राचश से जुड़े धोखाधड़ी सिा में 10 साल तक की जेल हो सकती है| चकसी क ं पनी क े कार्ों क े संबंध में धोखाधड़ी का अपराध एक गंभीर अपराध माना जाता है और ररट र्ाचचकाकताा अचभकचर्थत रूप से इस तरह क े अपराध क े दोषी र्थे| 2013 क े अचधचनर्म का अध्यार् 14 चनरीिण, पूछताछ और जााँच से संबंचधत है। धारा 210 क े अधीन क ं पनी क े कार्ों की जााँच की जा सकती है। धारा 211 गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् (एसएफआईओ) की स्र्थापना क े संबंध में चवचार करता है, चजसकी अध्यिता चकसी चनदेशक द्वारा की जानी है और चजसमें र्ोग्यता, सत्यचनष्ठा और बैंचक ं ग, कॉपोरेट मामलें, कराधान, फोरेंचसक ऑचडट, पूंजी बाजार, सूचना प्रौद्योचगकी, क़ानून र्ा ऐसे अन्य िेत् में अनुभव रखने वाले चवशेषज्ञ शाचमल होने हैं। चनदेशक क े नेतृत्व वाली एसएफआईओ इस प्रकार से एक सुगचित और सिम इकाई है चजसमें चवचभन्न िेत्ों में चवशेषज्ञ शाचमल है। धारा 212 क ें द्रीर् सरकार को चकसी क ं पनी क े कार्ा की जााँच का काम एसएफआईओ को सौंपने का अचधकार देती है। ऐसा कार्ा चमलने पर एसएफआईओ का चनदेशक उप-धारा (1) क े अधीन ऐसी संख्या क े चनरीिक नाचमत कर सकता है और क ं पनी क े कार्ों की जााँच उप-धारा (4) क े अधीन जााँच अचधकाररर्ों द्वारा करवा सकता है| उप-धारा (1) में प्रर्ुि अचभव्यक्ति "जााँच सौंपना" है। उप-धारा (2) में एक महत्वपूणा चसद्धांत शाचमल है चक क ें द्र सरकार द्वारा एसएफआईओ को इस तरह की अन्वेषण सौंपे जाने पर, क ें द्र सरकार र्ा चकसी भी राज्य सरकार की कोई अन्य अन्वेषण अचभकरण 2013 क े अचधचनर्म क े अधीन चकसी भी दंडनीर् अपराध क े संबंध में जााँच क े चलए आगे अग्रसर नहीं हो सकती और 2013 अचधचनर्म क े अधीन इस तरह क े अपराध क े संबंध में दस्तावेजों और अचभलेखको एसएफआईओ को अंतररत करने क े चलए बाध्य है ।

27. उपधारा (3) क े अधीन जहां जााँच क ें द्र सरकार द्वारा एसएफआईओ को इस प्रकार सौंपी जाती है, जााँच का संचालन अध्यार् में दी गई रीचत और प्रचिर्ा क े अनुसार चकर्ा जाना चाचहए और इस संबंध में एक ररपोटा चवचनचदाष्ट अवचध क े भीतर क ें द्र सरकार को सौंपी जानी चाचहए। र्ह प्रावधान ररपोटा को चवचनचदाष्ट अवचध क े भीतर सौंपने पर चवचार करता है । इसक े बाद क े प्रावधान चफर उप-धारा (8) क े अधीन चगरफ्तारी सचहत जााँच क े चवचभन्न चरणों पर चवचार करता है और र्ह अगर र्ह उप धारा (11) क े अधीन चनदेचशत है तो एसएफआईओ क ें द्र सरकार को एक अंतररम ररपोटा प्रस्तुत करेगा। इसक े अलावा, उप-धारा (12) क े अनुसार, जााँच पूरी होने पर, एसआईएफओ द्वारा क ें द्र सरकार को "जााँच ररपोटा" सौंपी जाएगी। उप-धारा (12) क े अधीन इस ररपोटा क े आधार पर आगे की कार्ावाही की जा सकती है। उप-धारा (13) क े अधीन "जााँच ररपोटा" की फ़ोटोकॉपी चकसी भी संबंचधत व्यक्ति द्वारा न्यार्ालर् में इस संबंध में आवेदन करक े प्राप्त की जा सकती है, जबचक उप-धारा (14) क े अधीन "जााँच ररपोटा" प्राप्त होने पर क ें द्रीर् सरकार क ं पनी क े क्तखलाफ अचभर्ोजन शुरू करने क े चलए एसएफआईओ को चनदेश दे सकती है। उप-धारा (12) क े अधीन जााँच क े पूरा होने पर "जााँच ररपोटा" प्रस्तुत चकर्ा जाना होगा, जबचक उप-धारा (11) क े अधीन ररपोटा का स्वरूप अंतररम ररपोटा का होगा और क ें द्र सरकार क े चनदेशानुसार प्रस्तुत चकर्ा जाएगा। इन प्रावधानों की पृष्ठभूचम में अब हमें इस बात पर चवचार करना चाचहए चक क्ा उपधारा (3) क े अधीन क ें द्र सरकार को ररपोटा प्रस्तुत करने क े चलए चजस अवचध क े ऊपर चवचार चकर्ा गर्ा है वह अचनवार्ा है और इस तरह क े अनुबंध का दार्रा और सीमा क्ा है। र्हां र्ह भी बतार्ा जाना चाचहए चक 2008 अचधचनर्म की धारा 43(2) क े प्रावधान ऐसी चकसी भी अवचध को मान नहीं लेते और एसएफआईओ को वतामान मामले में जााँच सौंपना 2013 अचधचनर्म क े संबंचधत प्रावधानों क े सार्थ-सार्थ 2008 अचधचनर्म क े अधीन र्था।

28. 2013 क े अचधचनर्म की धारा 212(3) अपने आप में ररपोटा प्रस्तुत करने क े चलए कोई चनचित अवचध नहीं है चजसमें जााँच पूरी की जानी है । र्हां तक चक उप-धारा (12) क े अधीन जो "जााँच ररपोटा" क े बारे में है, में भी चकसी अवचध का कोई अनुबंध नहीं है। वास्तव में उप-धारा (12) क े अधीन जााँच पूरी की जाने पर ररपोटा प्रस्तुत की जानी है एवं जााँच पूरी करने क े चलए कोई अवचध चनधााररत नहीं है जो चक साधारण चवचध क े अधीन सामान्य चसद्धांतों क े अनुरूप है। उदाहरण क े चलए, ऐसी कोई चनचित अवचध नहीं है चजसक े भीतर दंड प्रचिर्ा संचहता क े अधीन जााँच पूरी होनी चाचहए। र्चद जााँच लंबी अवचध तक चलती है, तो संचहता की धारा 167 क े अधीन क ु छ अचधकार अचभर्ुि क े पि में जा सकते हैं। लेचकन ऐसा कदाचप चवचारनहीं है चक र्चद चकसी चनचित अवचध क े भीतर जााँच खत्म नहीं हुई है, तो जााँच करने का अचधकार समाप्त हो जाएगा। पुनः, 2013 क े अचधचनर्म की धारा 213 की उप-धारा (2) ऐसी चकसी अवचध की बात नहीं करती चजसमें चक अन्य जााँच अचभकरणों को हार्थ र्थामें रखना है, न ही र्ह प्रावधान सुसंगत दस्तावेजों और अचभलेखों को एसएफआईओ से उि जााँच अचभकरणों को चकसी अवचध र्ा चकसी घटना क े पिात सौंपें जाने का उल्लेख है। उदाहरण क े चलए, राष्टिीर् अन्वेषण अचभकरण अचधचनर्म, 2008 (संचिप्त में "एनआईए अचधचनर्म") की धारा 6 क े अधीन क ें द्र सरकार अचभकरण (एनआईए) को एनआईऐ अचधचनर्म क े अधीन अनुसूचचत अपराध की जााँच सौंप सकती है और जहां इस तरह का चनदेश चदर्ा गर्ा है, वहां राज्य सरकार को चकसी भी लंचबत जााँच को आगे नहीं बढ़ाना है और सुसंगत दस्तावेज और अचभलेखों को तत्काल अचभकरण (एनआईए) को प्रेचषत करने हैं|लेचकन एनआईए अचधचनर्म की धारा 7 क े अधीन, अचभकरण चपछली मंजूरी क े सार्थ, अपराध की जााँच और अपराध क े चवचारण क े चलए मामले को राज्य सरकार को हस्तांतररत कर सकती है।

29. 2013 क े अचधचनर्म की धारा 212 (3) चक उक्ति "सौंपना" सभी उद्ेश्यों क े चलए जााँच क े हस्तांतरण पर चवचार करती है चजसक े बाद क ें द्र सरकार र्ा चकसी राज्य सरकार क े मूल जााँच अचभकरण उन अपराधों क े सम्बन्ध में जााँच का संचालन करने र्ा जााँच खत्म करने क े चलए चकसी भी शक्ति से वंचचत हो जाती हैं चजन पर उनमें चवचार चकर्ा गर्ा है| उप-धारा (2) क े पूणा हस्तांतरण करने का चवचार है। धारा 213 की उप-धारा (2) क े अधीन हस्तांतरण चकसी भी आकक्तिकता में रद् र्ा वापस नहीं होगा। र्चद कोई समर् सीमा चनधााररत की जाती है र्ा उस पर चवचार चकर्ा जाता है चजसक े भीतर जााँच पूरी होनी चाचहए, तो ताचक ा क रूप से, प्रावधान इस बात का चनपटारा करते चक र्चद समर् सीमा का पालन नहीं चकर्ा जाता है तो उस क्तस्र्थचत में क्ा होगा| कानून को ऐसी क्तस्र्थचत पर भी जरूर चवचार करना र्था जहााँ क ें द्र सरकार र्ा राज्य सरकार की चकसी भी जााँच अचभकरण द्वारा की गई एक वैध जााँच चजसे एसएफआईओ को हस्तांतररत चकर्ा हो, उसे चफर से उि जााँच अचभकरणों को पुनः हस्तांतररत चकर्ा जाना हो। लेचकन कानून में इसका कोई उल्लेख नहीं चकर्ा गर्ा है। र्ह हस्तांतरण अपररवतानीर् है और चकसी भी तरीक े से वापस नहीं चलर्ा जा सकता है। एक बार सौंपे जाने क े बाद, एसएफआईओ क े पास जााँच का संचालन करने और उसे पूरा करने का अचधकार है| र्चद ऐसा है, तो क्ा चनधााररत अवचध क े भीतर जााँच पूरी नहीं होने पर ऐसे अचधकार को घटार्ा र्ा कम चकर्ा जा सकता है। क़ानून ने जााँच पूरी करने क े चलए कोई चनधााररत अवचध नहीं की है। वतामान मामले में चनधााररकरण चदनांक 20.06.2018 क े आदेश में सामने आर्ा। मुद्ा र्ह है चक क्ा आदेश में चदए गए चनधााररकरण से एसएफआईओ की शक्तिर्ां को कम चकर्ा जा सकता है।

30. र्ह सवाज्ञात है चक चकसी चनचित प्रचिर्ा को र्ोजना क े समर् र्चद ऐसी प्रचिर्ा चक अव्हेलना होने चक क्तस्र्थचत में चकसी नकारात्मक र्ा प्रचतक ू ल पररणाम पर चवचार नहीं चकर्ा जाता है, तो सुसंगत प्रावधान को आम तौर पर अचनवार्ा नहीं चनदेचशका माना जाता है। इसक े अलावा, ऐसे प्रावधान को उसी संदभा में देखा जाना चाचहए चजसमें र्ह कानून में पाए जाते हैं। इस मामले में तीन बुचनर्ादी चवशेषताएं मौजूद हैं: -

1. 2013 अचधचनर्म की धारा 212 (2) क े संदभा में एसएफआईओ को जााँच का पूणा हस्तांतरण और इस तरह क े हस्तांतरण पर सभी दस्तावेजों और अचभलेखों को बाकी सभी जााँच अचभकरणों द्वारा को हस्तांतररत चकर्ा जाना आवश्यक है।

2. धारा 212 की उप-धारा (12) जााँच पूरी करने क े चलए कोई अवचध चनचित नहीं करती है।

3. धारा 212 की उप-धारा (11) क े अधीन चनदेश चदए जाने पर अंतररम ररपोटा प्रस्तुत की जा सकती है। इन तीन मुख्य चवशेषताओं चक दृचष्ट से र्ह नहीं कहा जा सकता है चक धारा 212 की उप- धारा (3) क े अधीन वह चनधााररत अवचध चजसक े अन्दर एसएफआईओ को ररपोटा प्रस्तुत करनी है, वह अवचध जााँच पूरी करने क े चलए है और उस अवचध की समाक्तप्त पर एसएफआईओ क े पि में आदेश खत्म हो जाएगा| खत्म होने चक क्तस्र्थचत में, कानून ने क ु छ पररणामों पर चवचार चकर्ा होगा, चजसमें मूल जााँच अचभकरणों को जााँच को पुनः हस्तांतररत करना शाचमल होता, चजन्हें धारा 212 की उप-धारा (2) क े अधीन पूरे अचभलेख को हस्तांतररत करने क े चलए चनदेचशत चकर्ा गर्ा र्था। चकसी भी स्पष्ट अनुबंध क े आभाव में, हमारे चवचार में, र्ह व्याख्या की अवचध की समाक्तप्त क े सार्थ, एसएफआईओ क े पि में आदेश समाप्त हो जाना चाचहए, कानून प्रणाली क े चलए बड़ी हाचन का कारण होगा| अगर ऐसी व्याख्या को स्वीकारा जाए तो जााँच क े हस्तांतरण क े सार्थ धारा 212 की उप धारा (2) क े अधीन मूल जााँच अचभकरणों से जााँच का अचधकार से वंचचत कर चदर्ा जार्ेगा और अचधदेश की समाक्तप्त क े सार्थ ही एसअफआईओ भी अशि हो जार्ेगा और इस से ऐसी बेतुकी पररक्तस्र्थचत उत्पन्न हो जाएगी जहााँ गंभीर धोखाधड़ी क े अपराध जााँच से बाहर रहेंगे | ऐसा कभी भी चवचार नहीं हो सकता र्था| इसचलए जो एकमात् अर्था चनकाला जा सकता है वह र्ह है की उस अवचध का चनधाारण चजसक े अंतगात धारा 212 की उप-धारा (3) क े अधीन क ें द्रीर् सरकार को ररपोटा जमा करनी है वह पूणा रूप से चनदेचशत है| इस अनुबद्ध समर् क े पूरे होने क े बाद भी, एसअफआईओ क े पि में अचधदेश और उप-धारा (1) क े सौंपे जाने पर रोक नहीं लगेगी| चवचारा गर्ा एकमात् ताचक ा क अंत जााँच की समाक्तप्त क े बाद अंचतम ररपोटा र्ा “जााँच ररपोटा” को धारा 212 की उप-धारा (12)अधीन जमा करार्ा जाना है| इसचलए मौजूदा क े स में र्ह नहीं कहा जा सकता की अचधदेश चदनांक 19.09.2018 को समाप्त हो गर्ा र्था और एसअफआईओ चनदेशक क े आदेश क े अधीन 10.12.2018 से लागू चगरफ्तारी वैसे भी अवैध और गैरकानूनी र्थी | वैसे भी वतामान क े स में क ें द्रीर् सरकार ने चदनांक 14.12.2018 में समर् बढ़ाने की मंजूरी दे दी र्थी| पर र्ह बात पूणा रूप से मुद्े से परे है क्ोंचक मूल चगरफ़्तारी अपने आप में चकसी भी प्रकार से अवैध नहीं र्थी| हमारे सुचवचाररत मत में, उच्च न्यार्ालर् से उस आधार पर कार्ावाही करने में और अपील क े ऊपर आदेश पाररत करने में पूणा रूप से भूल हुई र्थी|

31. अत: इन अपीलों को स्वीक ृ त चकर्ा जाता है एवं अपील क े अंतगात आदेश को रद् चकर्ा जाए| क्ोंचक ररट र्ाचचकाकतााओं को अंतररम राहत क े द्वारा िमानत पर ररहाई का चनदेश र्था, हम नीचे चनदेचशत करते हैं चक- (अ) उच्च न्यार्ालर् द्वारा चदनांक 20.12.2018 को ररट र्ाचचका (फौजदारी) नं. 3842/2018 एवं र्ाचचका (फौजदारी) नं. 3843/2018 में पाररत आदेश को रद् चकर्ा जाता है | (ब) राहुल मोदी और मुक े श मोदी नामक ररट र्ाचचकाकतााओं को आत्मसमपाण करने क े चलए और चदनांक 01.04.2019 पर सुबह 11 बजे चवशेष न्यार्ालर्, गुरुग्राम क े समि मौजूद रहने क े चलए चनदेचशत चकर्ा जाता है | इसक े बाद चवशेष न्यार्ालर् मामले पर गुणों क े आधार पर चवचार करे और देखे क े र्चद आरोचपर्ों को चहरासत में डालने की जरुरत है| (स) र्चद उि ररट र्ाचचकाकताा ऊपर चदए गए अनुबद्ध चदन और समर् पर नहीं मौजूद होते तो उनक े द्वारा प्रस्तुत व्यक्तिगत बंधपत् और प्रचतभूचत बंधपत् को जब्त कर चलर्ा जार्ेगा और अपीलकताा को ररट र्ाचचकाकताा को चगरफ्तार कराने का अचधकार होगा| (द) ररट र्ाचचकाकताा इस न्यार्ालर् में चदनांक 08.04.2019 तक अनुपालन शपर्थ-पत् जमा करेंगे |

32. स्र्थानांतरण र्ाचचका (फ़ौजदारी) नं. 35/2019 को गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् (एसअफआईओ) और उप चनदेशक, एसअफआईओ (मूल प्रत्यर्थी गण द्वारा ररट र्ाचचका (फौिदारी) नं. 3960/2018 क े स्र्थानांतरण की मांग करने क े चलए दार्र चकर्ा गर्ा र्था | चदनांक

21. 12. 2018 को उि ररट र्ाचचका को वरीर्ता देने वाले चववेक हरीव्यासी ने दावा चकर्ा चक उच्च न्यार्ालर् द्वारा चदनांक 21.12.2018 को ररट र्ाचचका (फौिदारी) नं. 3842 और 3843/2018 में उसी प्रकार की राहत दी गर्ी र्थी| हालांचक इससे पहले चक र्ाचचका पर चवचार चकर्ा जाता चदनांक 20.12.2018 क े चदल्ली उच्च न्यार्ालर् क े चनणार् को इस न्यार्ालर् क े समि चुनौती दी गई और ररट र्ाचचका (फौिदारी) नं. 3960/2018 क े स्र्थानांतरण की मांग करने वाली स्र्थानांतरण र्ाचचका (फ़ौजदारी) नं. 35/2019 को भी वरीर्ता दी गर्ी|

33. चदनांक 08.03.2019 को चववेक हरीव्यासी क े फ़ाचिल अचधविा ने प्रस्तुत चकर्ा चक उनक े मुवक्तिल सुसंगत न्यार्ालर् क े समि जमानत क े चलए आवेदन की र्ाचना करेंगे और इस न्यार्ालर् द्वारा चनम्नचलक्तखत चनदेश पाररत चकर्ा गर्ा र्था: “स्र्था. र्ा. (फौ.) सं. 35/20-19 में प्रत्यार्थी सं. 1 जमानत क े चलए आवेदन दे सकता है और अगर ऐसा आवेदन चदर्ा जाता है तो प्रश्गत सम्बंचधत न्यार्ालर् र्हााँ आिेचपत उच्च न्यार्ालर् क े आदेश में दी गई चटपण्णी से चबना प्रभाचवत हुए गुणवत्ता क े आधार पर अपना चनणार् देगा”

34. चवशेष अनुमचत र्ाचचका (फौज.) सं. 94- 95- 2019 से उत्पन्न फौिदारी अपीलों में हमारी उपर्ुाि चनणार्ों की दृचष्ट में इस स्र्थान्तरण र्ाचचका में चकसी पृर्थक आवेदन की आवश्यकता नहीं है अतः स्र्थानांतरण र्ाचचका चनपटाई जाती है|

35. अंत में आवश्यक रूप से हम कहेंगे की इस मामले क े गुणवत्ता क े चवषर् में ना हमने कोई चवचार व्यि चकर्ा है जो सम्बंचधत न्यार्ालर् स्वतंत् रूप से स्वर्ं देखेंगे और ना ही ऐसा माना जाना चाचहए|......न्यार्. (अभर् मनोहर सप्रे)......न्यार् (उदर् उमेश लचलत) नई चदल्ली माचा 27,2019 अस्वीकरण: देशी भाषा में चनणार् का अनुवाद मुकद् ् मेबाि क े सीचमत प्रर्ोग हेतु चकर्ा गर्ा है ताचक वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एवं र्ह चकसी अन्य प्रर्ोजन हेतु प्रर्ोग नहीं चकर्ा जाएगा| समस्त कार्ाालर्ी एवं व्यावहाररक प्रर्ोजनों हेतु चनणार् का अंग्रेजी स्वरूप ही अचभप्रमाचणत माना जाएगा और कार्ाान्वर्न तर्था लागू चकए जाने हेतु उसे ही वरीर्ता दी जाएगी| प्रतिवेद्य भारतीर् सवोच्चर् न्यार्ालर् फौिदारी अपीलीर् िेत्ाचधकार फौिदारी अपील संख्या नं. 538- 539/2019 (चव. अनु. र्ा. (फौ.) सं. 94-95/2019 से उत्पन्न) गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर्......... अपीलार्थी (गण) बनाम राहुल मोदी एवं अन्य.......... प्रत्त्यर्थी (गण) सह स्थानाांिरर् यातिका (फौ.) सां. 35/2019 (गंभीर धोखाधड़ी जााँच कार्ाालर् एवं अन्य बनाम चववेक हररव्यासी एवं अन्य) तनर्णय न्या. अभय मनोहर सप्रे

1. अपने सम्मानीर् सार्थी न्यार्मूचता उदर् उमेश लचलत द्वारा चवस्तृत, सुचवचाररत एवं चवद्वत चनणार् को पढ़ने का लाभ मुझे चमला|

2. मैं अपने चवद्वान सार्थी क े तक ा एवं चनष्कषा से पूणातः सहमत हाँ जो चवचशष्ट रूप से तक ा की स्पष्ट प्रचिर्ा पर आधाररत है| तर्थाचप चववाद की प्रवृचत्त को ध्यान में रखते हुए मैं अपने क ु छ शब्द जोड़ना चाहाँगा|

3. इन अपीलों में चवचारण हेतु उिार्े गए प्रश्ों में से एक प्रश् जो दोनों पिधरों क े फ़ाचिल वररष्ठ अचधविा द्वारा र्ुक्तिर्ुि रूप से बहस भी चकर्े गए वो क ं पनी अचधचनर्म (एतत पिात “अचधचनर्म” क े रूप में चनदेचशत) 2013 की धारा 212 की व्यापकता, चवस्तार एवं प्रर्ोजन से सम्बंचधत र्था एवं क्ा चवशेष रूप से अचधचनर्म की धारा 212 की उपधारा (3) का पालन अचनवार्ा है अर्थवा चनदेचशक है और र्चद ऐसा है तो क्ों|

4. जैसा चक मेरे फ़ाचिल दताश्री न्या. लचलत द्वारा उचचत रूप से तक ा चदर्ा है चक अध्यार् 14 (अचधचनर्म की धारा 206 से 229) में रेखांचकत अचधचनर्म की र्ोजना को ध्यान में रखते हुए चक अध्यार् 29 क े सार्थ कम्पनी क े चनरीिण, जााँच और अन्वेषण से सम्बंचधत मामलों का चनपटारा करता है जो चक अचधचनर्म में चनचदाचष्टत: चवचभन्न अपराधों क े चलए दंड/ जुमााना चनधााररत करता है, अचधचनर्म की धारा 212 की उप- धारा (3) का अनुपालन पूणातः चनदेशात्मक प्रक ृ चत का है|

5. र्चद प्रत्यर्थीगण (ररट र्ाचीगण) क े फ़ाचिल अचधविा का चनवेदन है चक ररपोटा क े प्रस्तुत करने से सम्बंचधत अचधचनर्म की धारा 212 की उप-धारा (3) क े अनुपालन क े अचनवार्ा होने को मान चलर्ा जाए (जो मुझे भर् है चक मैं स्वीक ृ त नहीं कर सकता) हमारे चवचार में, धारा 212 को लागू करने का प्रर्ोजन चवफल हो जाएगा और व्यर्था बन जाएगा|

6. चनस्ंदेह, जब मैं सप्रर्ोजन व्याख्या का चवख्यात चसद्धांत सुसंगत प्रावधान की सार्थ में व्याख्या करने में लगाता हाँ और र्ह मानता हाँ चक अचधचनर्म की धारा 212 की उप-धारा (3) की प्रवृचत्त चनदेचशक है, र्ह उस कानूनी प्रर्ोजन की पूचता करता है, चजसक े चलए अध्यार् 29 लागू चकर्ा गर्ा र्था|

7. मैं, इसचलए सार्थी न्यार्धीश लचलत क े तक ा और चनष्कषा से सहमत हाँ जो चक उनक े द्वारा अचधचनर्म की धारा 212 की उपधारा (3) की व्याख्या क े चलए चदए गए र्थे|

8. उपत्युाि क े आधार पर, प्रत्यर्थीगण क े फ़ाचिल अचधविाओं की बाकी तकों पर गौर नहीं चकर्ा जाएगा|

9. जहााँ तक बाकी मुद्ों का सवाल है, सार्थी न्या. लचलत ने उन्हें संचिप्त और स्पष्ट रूप से चनपटार्ा है| मैं पूणा रूप से उनसे सहमत हाँ|......न्या. (अभर् मनोहर सप्रे) नई चदल्ली माचा 27, 2019 अस्वीकरण: देशी भाषा में चनणार् का अनुवाद मुकद् ् मेबाि क े सीचमत प्रर्ोग हेतु चकर्ा गर्ा है ताचक वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एवं र्ह चकसी अन्य प्रर्ोजन हेतु प्रर्ोग नहीं चकर्ा जाएगा| समस्त कार्ाालर्ी एवं व्यावहाररक प्रर्ोजनों हेतु चनणार् का अंग्रेजी स्वरूप ही अचभप्रमाचणत माना जाएगा और कार्ाान्वर्न तर्था लागू चकए जाने हेतु उसे ही वरीर्ता दी जाएगी|