Full Text
भारति क
े उच्चतिम न्यायालय क
े समक
आपरािधक अपीलीय केत्रािधकािरतिा
आपरािधक अपील क.473-474/2019
िवषेष अनुमिति यािचतिा (आपरािधक) क. 2453-2454/2016 से उदूति
सिचन क
ु मार िसंहराहा अपीलाथी
बनाम
मध्य प्रतदेश शासन प्रतत्यथीगण
िनणरय
न्यायमूितिर मोहन.एम. शांतिनागोदर, स्थानीय भाषा मे िनणरय क
े अनुवाद का आशय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क
े उपयोग
तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं
कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा
कायारन्वयन क
े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा ।
अनुमिति अनुज्ञाति।
JUDGMENT
2. िवषेष सेषन िवचारण क. 41/2015 यथा िनणरय िदनांक 06.08.2015 मे, प्रतथम अितििरक सेषन न्यायालय, मैहर, िजला सतिना, म.प्रत. ने भा.द. संिहतिा क े अंतिगरति धारा 363, 376 (1),302 एवं 201 (11) (संकेप मे भं. द. सं) तिथा लैिगक अपराधो से बालको क े संरकण अिधिनयम, 2012 (संकेप मे ‘‘ पाकसो अिधिनयम‘‘) की धारा 5 (आई),[5] (एम), सहपिठिति धारा (6) क े अंतिगरति दण्डनिनय अपराध से अिभयुक/अपीलाथी को दोषिसद िकया तिथा एवं मृत्युदण्डन की सजा सुनाई ।
3. िवचारण न्यायालय का िनणरय उच्च न्यायालय जबलपुर म.प्रत. द्वारा आपरािधक िनदेष क. 5/2012 तिथा आपरािधक अपील क. 2205/2015 मे 03.03.2016, से पुष िकया गया. भ.द.सं की धारा 363 से सम्बंिधति अपराध को छोडनकर अथारति् उच्च न्यायालय द्वारा भ.द.सं की धारा 363 क े अंतिगरति अिभयुक को दोषमुक िकया गया है । यह अपीले िसददोष अिभयुक द्वारा दायर की गई है ।
4. संकेप मे अिभयोजन का मामला यह है िक, िदनांक 23.02.2015, को अ. स.[4] 1⁄4 पीिड़ितिा क े िपतिा क े बड़िे भाई 1⁄2 पीिड़ितिा बािलक को गाड़िी िजसका रिजस्टेषन क. डनण्च्ण् 19 टी 2374 है, मे स्क ू ल छोड़िने अपने गांव से आए थे, जो अिभयुक/अपीलाथी को स्वािमत्व मे है तिथा उसक े द्वारा ही चलाई गई जातिी है । अ.स.[4] अिभयुक/अपीलाथी क े आष्वासन पर की उसे पीिडनतिा बािलका क े साथ उसक े स्क ू ल जाना है, चूिक ं उसे अपनी पूत्री की फीस जमा करना है, सब्जी मन्डनी मे उतिार िदया बािलका अिभयुक /अपीलाथी क े साथ गाड़िी मे अपने स्क ू ल की ओर चली गई, परन्तिु उस िदन वह घर वापस नही आई उसक े मातिा-िपतिा िरष्तिेदार एवं स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । गांव वालो क े उन्मत खोज क े बावजूद पीिडनति बािलका का पतिा नही लगाया जा सका । मृितिका क े िपतिा ने शक िकया िक अिभयुक/अपीलाथी ने उसकी बेटी को कही और छोड़ि िदया होगा तिथािप, अज्ञाति अपराधी क े िवरूद प्रतथम सूचना प्रतितिवेदन (प्रत.पी.1) दजर कराई गई थी तिथा अिभयुक/अपीलाथी को दो िदन क े बाद िगरफतिार िकया गया था । िवचारण क े उपरांति, जैसा की पुवोक विणरति है, अिभयुक/अपीलाथी को िवचारण न्यायालय द्वारा दोषिसद िकया गया इस दोषिसदी क े आदेष को उच्च न्यायालय द्वारा संपुष िकया गया ।
5. श्री मृगेन्द िसंह, िवद्वान विरष अिधवका जो की अिभयुक/अपीलाथी की ओर से उपित स्थति है, ने हमे अिभलेख पर सामग्री से अवगति कराया तिथा िनवेदन िकया िक अिभयोजन का मामला मुख्यतिः अंितिम बार देखे जाने की पिरित स्थिति पर िटका हुआ है, परन्तिु किथति पिरित स्थिति समयक रूप से िसद नही हुई है, यह इसिलए िक अ.स.[5] रामजी शुक्ला क े साक्ष्य को ध्यान मे रखतिे हूए। अ.स.[4] क े िवरूद भी गंभीर संदेह उदूति होतिा है । यह भी िनवेदन करतिा है िक साक्ष्य िजसक े कारण शव की बरामदगी हो सकी जो अिभयुक/अपीलाथी ये संस्वीक ृ िति पर आधािरति है, इस आधार पर अस्वीकार िकये जाने योग्य है िक पंचनामा पुलीस आने पर बनाया गया था ना की शव क े बरामदगी क े स्थान पर, और यह िक अनुसंधान अिधकारी जान बूझकर मूल अपराधी को िछपाने की कोिशश की है तिथा अिभयुक/अपीलाथी को फसाया है, और अनवेषण क े दौरान किथति कमी न्याय क े संतिुलन को आरोिपयो/अपीलाथीयो क े पक मे झुकाएगी । अनुकल्पतिः, वह यह प्रताथरना करतिा है िक यह मामला ’’िवरल से िवरलतिम’’ मामला की पिरभाषा क े अंतिगरति नही आतिा इिसिलए, अिभयुक/अपीलाथी को मृत्यूदण्डन से दित ण्डनति नही िकया जाना चािहए। स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा। दूसरी ओर, राज्य क े िवद्वान अिधवका ने न्यायालय क े िनणरय क े समथरन मे तिक र िकया।
6. वतिरमान मामला पिरित स्थितिजन्य साक्ष्य पर आधािरति है, अिभयोजन मुख्यतिः िनम्निलिखति पिरित स्थितियो पर भरोसा करतिा है: (अ) अ.स.[4] मृतिक क े चाचा तिथा मृति बािलका गाड़िी से िजस पर अिभयुक/अपीलाथी का स्वािमत्व था तिथा उसक े द्वारा चलाई गई थी, अपने जन्म स्थान से मैहर तिक गए। (ब) अ.स.[4] ने बािलका की अिभरका अिभयुक/अपीलाथी को इस आश्वासन पर दे थी िक वह बच्ची को सुरिकति स्क ू ल ले जाएगा। (स) अ.स.[4] ए एवं 5 क े द्वारा मृितिका अंितिम बार अिभयुक/अपीलाथी क े साथ देखी गई । (द) मृितिका स्क ू ल का बस्तिा एवं षव, अिभयुक/अपीलाथी क े प्रतकटन कथन क े अनुसार ही बरामद िकये गये । (द) द.प्रत.स. की धारा 313 क े अंतिगतिर अिभिलिखति बयान मे अिभयुक/अपीलाथी ने झुठिे स्पषीकरण पेष िकये ।
7. इस सूस्थािपति प्रतस्तिाव पर कोई िववाद नही हो सकतिा िक पिरित स्थितियां िजससे दोषी होने क े िनष्कषर को िनकालना है, पूरी तिरह से स्थािपति हो या ’’होना चािहए’’ और न क े वल ’’हो सकतिा है ’’पर। स्थािपति िकए गए तिथ्य क े वल आरोिपंयो क े दोिषतिा क े अनुरूप होना चािहए, अथाति्र, उन्हे िकसी अन्य पिरकल्पना क े माध्यम से पतिा लगाने योग्य नही होना चािहए िसवाय इसक े िक अिभयुक दोषी था और तिो और पिरित स्थितियां िनश्चयात्मक प्रतक ृ िति की होना चािहए. आरोपी की बेगुनाही क े अनुरूप िकसी स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा। भी उिचति आधार को नही,छोडनने क े िलए, साक्ष्यो की श्रृखंला पूणर होनी चािहए और यह िदखाना होगा की सभी मानवीय संभावनाओं मे अपराध आरोपी क े द्वारा िकया गया था ।
8. अिभलेख से पतिा चलतिा है िक इटमा (मृितिका क े गांव) तिथा मैहर (शहर जहाँ उसका स्क ू ल था) क े बीच लगभग 9 िक.मी. की दूरी थी। मृितिका न्यू होरीजन पित ब्लक स्क ू ल, मैहर मे एल.क े.जी. मे पढ़तिी थी तिथा अपराध घिटति होतिे समय वह 5 साल 2 माह की थी । अिभयुक/अपीलाथी गाड़िी का रिजित स्टंक ृ ति स्वामी है िजसमे वह पीिडनतिा क े साथ अंितिम बार देखा गया था। तिथा घटना क े िदन वह गाडनी चला रहा था उसकी पुत्री भी मृितिका की तिरह उसी स्क ू ल मे िवधाथी थी उपरोकविणरति सभी तिथ्य िववािदति नही है । वास्तिव मे यह भी हमारे समक बचाव क े अिधवका द्वारा िववािदति नही है िक यह स्पषतिः बािलका क े रेप एवं मृत्यू का मामला है। तिथािप, बचाव क े अनुसार,अिभयुक/अपीलाथी अपराध क े िलए उतरदाई नही है ।
9. अ.स.[1] मृितिका क े िपतिा है, अ.स.4, अ.स.[1] क े बड़िे भाई है। चूँिक अ.स.[4] मैहर शहर मे लाइट की दुकान मे िबजली िमस्त्री क े रूप मे काम करतिे थे, अ.स.[1] मे अपने बच्ची की (मृितिका) को अ.स.[4] क े साथ उस स्क ू ल जो मैहर मे है छोडनने क े िलए भेजा था। लगभग 10 बजे, अ.स.[4] मृितिका क े साथ अिभयुक/अपीलाथी की गाड़िी मे घर से िनकला और मैहर गया था । अ.स. 4 ने कहा है िक अिभयुक/अपीलाथी द्वारा उससे यह कहा गया था िक उसे अपनी बच्ची की फीस जमा करने िपिडनतिा क े स्क ू ल जाना है, और उसकी बातिो पर िवश्वास कर, अ.स.[4] ने स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । अिभयुक/अपीलाथी से पीिडनति बािलका को स्क ू ल ले जाने क े िलए आग्रह िकया । अिभयुक/अपीलाथी ने अ.स.[4] को आष्वस्ति िकया िक वह िपिडनतिा को स्क ू ल छोड़ि देगा। अतिः अ.स.[4] पीिडनति बािलका को अिभयुक/अपीलाथी क े संरकण मे छोडनकर गाड़िी से उतिर गया। अतिः अ.स.4, अंितिम बार देखे जाने की पिरित स्थिति, क े संबंध मे बतिाने वाला मुख्य साकी है । अ.स.[4] उसक े िवस्तिृति प्रतितिपिरकण मे ित स्थर रहा एवं इसक े माध्यम से उसक े साक्ष्य मे कोई बड़िी िवसंगिति नही िनकाली गई ।
10. जबिक, बचाव की ओर से िवद्वान विरष अिधवका ने तिक र िदया था िक शक की सुई अ.स.[4] की ओर भी झुकतिी है, यद्यपिप अ.स.[5] ने बतिाया था िक उसने अिभयुक/अपीलाथी, मृितिका एवं अ.स.[4] को एक साथ अिभयुक/अपीलाथी की गाड़िी मे सब्जी मंडनी क े पास एक जगह देखा था। िवद्वान अिधवका क े अनुसार, यिद अ.स.[4] सब्जी मंडनी पर ही गाड़िी से वास्तिव मे उतिरा होतिा, तिो अ.स.[5] क े द्वारा किथति जगह नही देखा गया होतिा। उक आधार पर, वह िनवेदन करतिा है िक अ.स.[4] की साक्ष्य पर भरोसा नही िकया जा सकतिा, चूंिक न्यायालय क े समक उसका बयान क े वल स्वयं को बचाने क े िलए है। अपने िववेक को संतिुष करने क े िलए हम ध्यान से अ.स.[5] क े साक्ष्यो से गए, एवं पाया िक अ.स.[5] क े साक्ष्यो क े मूल्यांकन पर िवचारण न्यायालय एवं उच्च न्यायालय, ने उिचति ही िनष्कषर िनकाला है िक यह अिभयोजन क े कथन का समथरन करतिा है। अतिः यह तिक र जैसा िक ऊपर उठिाया गया है स्वीकार नही िकया जा सकतिा । अ.स.[5] ने कहा है िक लगभग 9:30 बजे उसने अिभयुक/अपीलाथी को गाड़िी की डनंाायवर सीट पर तिथा पीिडनतिा को स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । स्क ू ल की डनरेस पहने उसक े बाजू मे बैठिे देखा था। अ.स.[5] की साक्ष्य (प्रत. डनी.4) मे मृितिका गाडनी की सामने की सीट पर बैठिे होने को लेकर िवरोधाभास है, जो िक हमारे अनुसार तिाित त्वक नही है दुव्रभाग्यवष,िवचारण न्यायालय अ.स.[5] क े बयान क े एक िविषष िहस्से को िचित न्हति करने क े बजाय, जहाँ उन्होने उपरोक कथन से संबंिधति अपने पूवर मे िकए गए कथन का खंडनन िकया था, ने पुिलस क े द्वारा अिभिलिखति संपूणर कथन दण्डन प्रतिकया संिहतिा 1⁄4 संकेप मे द.प्रत.सं1⁄2 की धारा 161 क े अंतिगरति िचित न्हति िकया, जैसा िक यह हो सकतिा है, इस प्रतकार िचित न्हति िवराधोभास क े वल अिभयुक/अपीलाथी की सीट क े बाजू मे बैठिै बािलका क े संबंध मे देखा जाना चािहए यह । देखतिे हुए िक यह याददास्ति मे कमी क े कारण और यह िकसी भी मामले मे तिाित त्वक खंडनन नही है, िवचारण न्यायालय एवं माननीय उच्च न्यायालय ने इस खंडनन को स्पष िकया अ.स.[5] ने अपने प्रतिति पिरकण ने बतिाया िक उसने अिभयुक/अपीलाथी, मृितिका एवं अ.स. 4 को अिभयुक/अपीलाथी की गाडनी मे एक साथ देखा है। अ.स.[5] क े इस कथन पर आधािरति होकर बचाव क े अिधवका ने कठिोरतिा से तिक र िकया िक अ.स.5, अ.स.[4] क े साक्ष्य को पूणरतिः खंिडनति करतिी है जैसा की उन्होने अ.स.[4] को ऐसे स्थान पर देखे जाने का कथन िकया, जहाँ उन्होने अिभयुक/अपीलाथी क े गाडनी से नीचे उतिरने का दावा िकया था। जबिक, अ.स.[5] की साक्ष्य मे हम कोई भ्रम नही पातिे, क्योिक उसने अनरूपतिा से यह कहा है िक उसने अिभयुक/अपीलाथी, मृितिका एवं अ.स.[4] को अिभयुक/अपीलाथी की गाड़िी मे, सब्जी मंडनी केत्र मे देखा है. यह अिभयोजन क े मामले से िभन नही है िक उपरोक किथति सभी तिीन व्यिक अिभयुक/अपीलाथी की गाड़िी मे इटमा गांव से िनकले और अ.स.[4] को सब्जी मंडनी क े पास उतिार िदया। ग्रामीणे बयान की देहातिी प्रतक ृ िति को ध्यान मे रखतिे हुए न्यायालय को उसक े समक आए साक्ष्य का मूल्यांकन करना होगा, जो गिणतिीय सटीकतिा क े साथ सटीक भौगोिलक स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । स्थान क े बारे मे नही बतिा सकतिे । इस प्रतक ृ िति की िवसंगितियां जो मामले की वह तिक नही जातिी अन्यथा स्वीकायर साक्ष्यो को अिभलोपन नही करतिी यह बतिाने की आवष्यकतिा नही है िक अब यह सूस्थािपति है गवाही की िवष्वसनीयतिा का आकलन एवं अिभयोजन क े कथन का पूणरतिः सामंजस्य करतिे समय मामूली िवसंगितियो को िवचार मे नही िलया जाना चािहए। इस मामले को देखतिे हुए हमारे िवचार मे, अ.स.[5] की साक्ष्य, अ.स.[4] की साक्ष्य एवं अिभयोजन क े मामले को पूणरतिः समथरन करतिी है।
11. अिभयोजन का मामला अ.स.[6] क े द्वारा भी समिथरति िकया गया, जो िक इटमा गांव क े भी िनवासी है । लगभग 11 बजे, जब वह पान की दुकान पर बैठिे थे, उन्होने मृितिका को अिभयुक/अपीलाथी क े साथ गाड़िी मे कटनी रोडन की ओर जातिे देखा था।
12. अ.स.[2] एवं अ.स.[3] ने अिभयुक/अपीलाथी द्वारा िकये गए प्रतकटन कथन क े आधार पर षव क े बरामदगी क े बारे मे एवं बािलका क े स्क ू ल बैग क े बारे मे बतिाया था। यह कहने की आवष्यकतिा नही, िक कथन का क े वल वह भाग जो ष्षव एवं स्क ू ल बस्तिे की बरामदगी को प्रतेिरति करतिा है भारतिीय साक्ष्य अिधिनयम की धारा 27 क े अंतिगरति साक्ष्य मे ग्राहय है । दोनो ही सािकयो ने बतिाया है िक अिभयुक/अपीलाथी ने कहा है िक अिभयुक/अपीलाथी क े प्रतकटन कथन अिभिलिखति करने क े पश्चाति् वह पुिलस एवं सािकयो (अ.स.[2] एवं अ.स.3) को घटना स्थान पर ले गया जहाँ स्क ू ल का बस्तिा एवं ष्षव को नष िकया था । परसवारा नहर क े पास ित स्थति क ु ऍं मे शव पाया गया उस समय, शव पर क े वल जांिघया मौजूद थी। पुिलस ने क ु ऍं से मृितिका क े शव को बाहर िनकाला, और बरामदगी क े पश्चाति, बरामदगी ज्ञापन प्रत.पी.[7] अिभिलिखति स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । िकया एवं सािकयो क े हस्तिाकर िलए। इसक े पश्चाति् अिभयुक/अपीलाथी पुिलस एवं सािकयो को दूबेही ित स्थति स्क ू ल पर ले गया िजसक े छति पर उसने िपिडनतिा का स्क ू ल का बस्तिा छ ु पाया था। स्क ू ल बस्तिे की बरामदगी ज्ञापन प्रत.पी 8 घटना स्थल पर बनाया गया एवं सािकयो क े हस्तिाकर िलए गए । यद्यपिप क ु छ सुझाव अ.स.[2] को िदए गए, िजससे उसने इनकार िकया है। अ.स.[2] क े साक्ष्य, हमारे मति मे अपिरवितिरति रहे । अ.स. 3 क े साक्ष्य अ.स.[2] क े साक्ष्य से लगभग समान है अपने प्रतितिपिरकण क े अ.स.[3] ने बतिाया िक पुिलस ने पुिलस कागजाति कई जगहो मे बनाए, जैसे परसवारा गांव एवं पुिलस थाने पर । अ.स.[3] द्वारा यह भी स्वीकारा गया िक मृत्यू समीका पंचनाम पुिलस थाने पर बनाया गया जबिक, अ.स. 3 की यह स्वीक ृ ितिया प्रत.पी.[7] एवं प्रत.पी.[8] जो की बरामदगी ज्ञापन है और सािकयो द्वारा समयक रूप से हस्तिाकािरति है, क े प्रतभाव को खत्म नही करतिी अ.स.[2] एवं अ.स.[3] क े साक्ष्यो से यह स्पष है िक जैसे ही शव को क ु ऍं से बाहर िनकाला गया एवं स्क ू ल बस्तिे को दूबेही ित स्थति स्क ू ल की छति से बरामद िकया गया, घटना ित स्थति पर ही बरामदगी ज्ञापन प्रत.पी.[7] एवं प्रत.पी.[8] तिैयार िकये गए एवं उन पर सािकयो क े हस्तिाकर िलये गए। जैसे की पूवर मे उल्लेिखति है, अ.स.[3] ने अपने प्रतितिपिरकण मे कहा है की क ु छ पुिलस कागजाति परसवारा गांव मे तिैयार िकए गए और तिो और पुिलस थाने पर एवं मृत्यु समीका पंचनामा पुिलस थाने पर बाद मे बनाया गया था । जबिक,इस आधार पर, अिभयोजन का समपूणर मामले पर संदेह नही, िकया जा सकतिा, इससे ना तिो मृितिका की मृत्यु ना ही उसका मृत्यु स्थान िववादग्रस्ति है। बरामदगी से संबंिधति साक्ष्य यह दषारने क े िलए िक अिभयुक/अपीलाथी क े कहने पर क ु छ सामग्री बरामद हुई है, सुसंगति है, और यह िक अपराध क े बाद अिभयुक/अपीलाथी षव क े फ े क े जाने क े स्थान क े बारे मे एवं स्क ू ल क े बस्तिे क े बारे मे जानतिा था हम यह पातिे है िक अ.स.[2] एवं अ.स.[3] की स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । साक्ष्य अिभयोजन क े कथन से संगति है । अतिः क े वल घटना स्थल पर मृत्यु समीका पंचनामा ना बनाने क े अनवेषण अिधकारी क े त्रुिट पर आधािरति होकर हम साक्ष्य को अस्वीकार नही करतिे, िवशेष रूप से (प्रत. पी.[7] एवं प्रत.पी.8) जो की घटना स्थान पर बनाए गए थे को ध्यान मे रखकर । इस मोड़ि पर, हम यह स्मरण करना चाहेगे िक यह सूस्थािपति है िक अनवेषषण अिधकारी द्वारा की गई तिुच्छ गलितियो क े कारण आपरािधक न्याय िनणरयन को अपकषर नही बनना चािहए हम यहाँ यह जोडनने की जल्दबाजी कर सकतिे है िक यिद अन्वेषण अिधकारी क ु छ अिभलेख को बनाकर एक नया मामला बनाने क े िलए वास्तििवक घटना को दबा देतिा है तिब न्यायालय िनित श्चति रूप से कडनक तिौर पर जांच अिधकारी की ऐसी कायरवाई क े िवरूद आएगा इस पर कोई िववाद नही हो सकतिा की संदह का लाभ जो अनवेषण मे प्रतमुख दोषो से उदूति होतिा है, न्यायालय क े मन मे संदेह पैदा करेगा और इसक े पिरणामस्वरूप इस तिरह की अकम्य जााॅच से अिभयुको को लाभ उदूति होगा। जैसा की इस न्यायालय द्वारा एच.पी. राज्य बनाव लेख राज (2000) (1) एस.सी.सी. 247 क े मामले मे देखा गया है, एक आपरािधक िवचारण की बराबरी एक स्टंट िफल्म क े नकली दृष्य से नही की जा सकतिी अिभयुक की दोिाषतिा या िनदोिषतिा को अिभिनित ष्चति करने क े िलए इस प्रतकार का िवचारण िकया जातिा है तिथा सत्य से संबंिधति एक िनष्कषर पर पहुचने मे, न्यायालय को तिक र संगति दृिषकोण अपनाने और साक्ष्यो को उसक े आंतििरक मूल्य एवं सािकयो की िवदेषपूणर भावना को आंकने की आवष्यकतिा है। न्यायालयो को अिभयोजन को सहारा देने क े िलए प्रतयास करने या अिभयुक क े पक मे कानून बनाने क े िलए बाध्य नही िकया जाएगा । पारंमपिरक िसदांतिवादी हायपरटेित क्नकल दृिषकोण को स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्रधािरति करेगा । आपरािधक िवचारण मे न्यायिनणरमन क े िलए एक तिक र संगति, यथाथरवादी और वास्तििवक दृिषकोण द्वारा प्रतितिस्थािपति िकया जाना है. मामले को देखतिे हुए, हम अिभयुक/अपीलाथी क े कहने पर की गई बरामदगी क े पिरित स्थितियो पर न्यायालय द्वारा िकये गए िवश्वास मे कोई त्रुिट नही पातिे।
13. डनाक्टरो क े साक्ष्यो को देखने पर, अ.स.10 एवं अ.स.11, यह स्पष है िक िपिडनतिा पर लैिगक हमला हुआ था। बचाव की ओर से िवद्वान विरष अिधवका, ने िनष्पक रूप से,डनाक्टरो की साक्ष्य क े प्रतितिक ू ल तिक र नही िकया था।
14. अंितिम पिरित स्थिति, जो िक वास्तिव मे पिरित स्थितियो मे श्रंखला मे एक अितििरक पिरित स्थिति है, वह यह है िक अिभयुक/अपीलाथी ने िपिडनतिा का साथ छोडने जाने क े संबंध मे िमथ्या स्पषीकरण िदया है, अिभयुक/अपीलाथी द्वारा जो स्पषीकरण िदया गया है वह यह है िक बािलका को स्क ू ल पर छोडनकर वह उसक े साथ से अलग हो गया था और इिसिलए उसे नही पतिा की बाद मे क्या हुआ । अिभयुक/अपीलाथी द्वारा िदया गया यह स्पषीकरण गलति है, प्रतहलाद पटेल क े साक्ष्य को देखतिे हुए, अ.स.8, जो स्क ू ल को प्रतबंधक एवं स्क ू ल का िषकक है एवं उसक े द्वारा प्रतस्तिुति अिभलेख (उपित स्थिति रिजस्टर) जो प्रत.पी.15 है, फरवरी माह, 2015 क े िलए है, जो स्पषतिः यह प्रतकट करतिी है िक घटना क े िदन बािलका स्क ू ल नही आई थी । क्योिक उस िदन की घटनाओं क े बारे मे अिभयुक/अपीलाथी ने िमथ्या स्पषीकरण िदये है, अंितिम बार देखे जाने की पिरित स्थिति क े बारे मे, उसक े िवरूद एवं स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । प्रतितिक ू ल िनष्कषर िनकाले जाने की बहुति ही िवषेष रूप से आवष्यकतिा है।
15. यद्यपिप बचाव ने ब.स.[1] क े साक्ष्य को भी देखा,जहाँ तिक की मृत्यू एवं बलात्कार का संबंध है, उसकी साक्ष्य अिभयोजन सािकयो की साक्ष्य को नष करने क े िलए सूसंगति नही है। चूंिक यह मुख्य रूप से आरोपी/अपीलाथी की िगरफ्तिारी की तिारीख से संबंिधति है । न्यायालय द्वारा यह उिचति ही देख गया है, िक ब.स.[1] की साक्ष्य न्यायालय क े मित स्तिष्क मे िकसी भी प्रतकार का संदह नही उत्पन करतिी एवं प्रतश्नगति अपराध क े िकए जाने से सूसंगति नही है ।
16. मामले की तिथ्य एवं पिरित स्थयो की संपूणरतिा को देखतिे हुए, हमारे िवचार मे, िवचारण न्यायालय एवं उच्च न्यायालय ने उिचति दी िनष्कषर िनकाला है िक अिभयोजन अपना मामला उस अपराध क े िलए िजससे अिभयुक/अपीलाथी को आरोिपति िकया गया है संदेह से परे सािबति करने मे सफल रहा है । हमारे मति मे अिभयोजन द्वारा िवश्वास िक गई सभी पिरित स्थितियां संदह से परे सािबति हो चूंिक है और पिरणामस्वरूप पिरित स्थितियो की श्रंखला पूणर होकर न्यायालय की मित स्तिष्क मे ऐसा कोई संदेह नही छोडनतिी िक प्रतष्नगति अपराध अिभयुक और क े वल अिभयुक ने ही कािरति िकया है। यह बाति दोहराने लायक है िक यद्यपिप साक्ष्य मे क ु छ िवसंगितियां एवं प्रतिकयात्मक किमयां अिभलेख पर लाई गई है। उससे अिभयुक/अपीलाथी को संदेह का लाभ नही होगा यह याद होना चािहए िक प्रतमाण क े िनयम का अितिरंिजति पालन कर न्याय को कठिोर नही बनाया जा सकतिा, चूंिक अिभयुक को िमला संदेह का लाभ हमेशा युिकयुक होना चािहए, ना की काल्पिनक। स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा ।
17. जबिक, हमारे िवचार मे अिभयुक/अपीलाथी पर मृत्यू दंडनादेश को अिधरोिपति करने मे न्यायालय न्यायसंगति नही रहे होगे। जैसा की यह सूस्थािपति है, आजीवन कारावास एक ऐसा िनयम है िजसमे मृत्युदण्डन एक अपवाद है । अपराध की सूसंगति तिथ्य एवं पिरित स्थयो को देखतिे हुए, मृत्यूदण्डन तिभी अिधरोिपति िकया जाना चािहए जबिक आजीवन कारावास पूरी तिरह से अनुिचति सजा प्रततिीति हो । चूंिक संतिोष क ु मार िसंह बनाम राज्य, सी.बी.आई क े माध्यम से, (2010) 9 एस.सी.सी 747 क े मामले मे न्यायालय द्वारा यह अिभिनधारिरति िकया गया है िक, सजा देना एक मुित श्कल काम है और न्यायालय क े मित स्तिष्क को कष देतिा है, परन्तिु जहाँ भी आजीवन कारावास एवं मृत्युदण्डन क े बीच िवकल्प है, यिद न्यायालय स्वयं इसे एवं अन्य को अिधरोिपति करने मे किठिनाई महसूस करतिा है, तिब यह उिचति है िक कम सजा अिधरोिपति की जाए।
18. हमने अिभयुक/अपीलाथी पर मृत्युदण्डन अिधरोिपति करने क े िलए िवकट एवं प्रतशमनकरी पिरित स्थितियो को िवचार मे िलया । िजस तिरह िपिडनतिा की अिभरका दािखल करने क े लए उसने अ.स.[4] को झूठिा बहाना बतिाया उससे यह दिषरति होतिा है की उसने पूवारिचन्तिन तिरीक े से जघन्य अपराध कािरति िकया है, । उसने ना क े वल अ.स.[4] द्वारा उस पर िकये गए िवष्वास को गाली दी, अिपतिु 5 वषर की उम क े एक बच्चे की मासूिमयति और असहायतिा का भी षोषण िकया उसी समय, पूवरवतिी आपरािधक इितिहास और उसक े समग्र आचरण को ध्यान मे रखतिे हुए हम आष्वस्ति नही है िक अिभयुक क े सुधार की संभावना कम है। स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा ।
19. अतिः मामले की संपूणर तिथ्य एवं पिरित स्थितियां क े संबंध मे हमारा िवचार है िक प्रतश्नगति अपराध उस मामले की श्रेणी मे आएगा िजसमे मृत्युदण्डन अिधरोिपति करना आवश्यक हो। यद्यपिप, जैसा िक उपरोक संदिभरति है, अपराध की िवकट पिरित स्थितियो को ध्यान मे रखतिे हुए हम यह महसूस करतिे है की वतिरमान मामले मे सादा आजीवन कारावास की सजा समस्ति रूप से अपयारप है । इस संबंध मे, हम अपने हाल ही क े िनणरय िदनांक 19.02.2019 परशुराम बनाम म.प्रत. राज्य 1⁄4 िकिमनल अपील क 314-315/20131⁄2 मे अपिरहायर सजा क े पहलू पर अपने अवलोकन को संदिभरति करना चाहेगे। “13. जैसा की स्वामी श्रदानंद (2) बनाम कनारटक राज्य, (2008)13 एस.सी.सी. 767, मे इस न्यायालय द्वारा स्थािपति िकया गया, एवं भारति संध बनाम श्री हरन (2016) 7 एस.सी.सी.[1] मे इस न्यायालय की संवैधािनक पीठि द्वारा पष्चातिवतिी रूप से पुष िकया गया, यह न्यायालय मृत्यु दण्डन को 14 वषर की अवधी से अनािधक कारावास द्वारा िविधक रूप से प्रतितिस्थािपति कर सकतिा है, तिथा इस सजा को पिरहार क े परे रख सकतिा है। इस प्रतकार की सजा कई अवसरो पर इस न्यायालय द्वारा दी जा चुकी है, और हमे क ु छ िनणरयो को स्पषीकरण क े माध्यम से लाभकारी रूप मे देखा जाना चािहए। िसबेसिटयन उफ र चेिविथयन बनाम क े रल राज्य (2010) 1 एस.सी.सी. 58, 2 वषर की बािलका क े बलात्कार एवं मृत्यु से संबंिधति मामला है, मे इस न्यायालय ने मृत्यु की सजा को अपीलाथीगण क े ष्षेष जीवन काल क े कारावास मे उपातिंिरति कर िदया था । राजक ु मार बनाम म.प्रत. राज्य (2014) 5 एस.सी.सी. 353, 14 वषर की आयु की बािलका से बलातिसंग एवं मृत्यु से संबंिधति मामले मे इस न्यायालय ने अपीलाथी को कम से कम 35 वषर जेल मे स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । िबना पिरहार क े भुगतिाए जाने का िनदेष िदया । सेलवाम बनाम राज्य (2014) 12 एस.सी.सी. 273 मे इस न्यायालय ने 9 वषर की बािलका क े बलात्कार से संबंिधति मामले मे िबना पिरहार से 30 वषर जेल मे रहने की सजा अिधरोिपति की टटटू लोधी बनाम म.प्रत. राज्य (2016) 9 एस.सी.सी. 675, मे िजसमे अिभयुक 7 वषर की आयू की छोटी बािलका की मृत्यू कािरति करने का दोषी पाया गया था, न्यायालय ने, इस िनदेष क े साथ की अिभयुक को कारागार से तिब तिक मुक ना िकया जाए जब तिक वह 25 वषर की अविध का कारावास पूणर ना कर ले, आजीवन कारावास की सजा अिधरोिपति की है।"
20. वतिरमान क े मामले मे भी हम 1⁄4 िबना पिरहार क े 1⁄2 कम से कम 25 वषर क े आजीवन कारावास की सजा अिधरोिपति करना उिचति समझतिे है । अिभयुक/अपीलाथी द्वारा पहले ही भोगी गई, लगभग 4 वषर का कारावास अपास्ति िकया जाए । अिभयुक/अपीलाथी की आयु को िवचार करने पर ही, जो की वतिरमान मे लगभग 38 से 40 वषर है हम इस िनष्कषर पर पहुचे है।
21. तिद्नुसार िनम्निलिखति आदेष िदया:- भा.द.संिहतिा की धारा 376 (ए),302 एवं 201 (11) एवं पोकसो अिधिनयम‘‘ की धारा 5 (आई), (एम), सहपिठिति धारा (6) से दण्डनिनय अपराध क े िलए अिभयुक/अपीलाथी की दोषिसद को समथरन देने वाला उच्च न्यायालय का िनणरय एवं आदेष पुष रहा। यद्यपिप दण्डनादेष को उपांतििरति िकया गया है । एतिद्द्वारा अिभयुक/अपीलाथी को 25 वषर क े कारावास (िबना पिरहार क े ) भुगतिाए जाने को िनदेिषति िकया स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । गया। पूवर मे भोगी गई सजा अपास्ति को जाए । तिद्नुसार अपील िनपटाई गई। न्यायमूितिर एन.वी. रमना न्यायमूितिर मोहन एम. शांतिनागोदर न्यायमूितिर इंदरा बैनरजी नई िदल्ली 12 माचर 2019 स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतयोजनाथर, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा । (अ) अ.स.[4] मृतिक क े चाचा तिथा मृति बािलका गाड़िी से िजस पर अिभयुक/अपीलाथी का स्वािमत्व था तिथा उसक े द्वारा चलाई गई थी, अपने जन्म स्थान से मैहर तिक गए । (ब) अ.स.[4] ने बािलका की अिभरका अिभयुक/अपीलाथी को इस आष्वासन पर दे थी िक वह बच्ची को सुरिकति स्क ू ल ले जाएगा। (स) अ.स.[4] ए एवं 5 क े द्वारा मृितिका अंितिम बार अिभयुक/अपीलाथी क े साथ देखी गई । (द) मृितिका स्क ू ल का बस्तिा एवं षव, अिभयुक/अपीलाथी क े प्रतकटन कथन क े अनुसार ही बरामद िकये गये । (द) द.प्रत.स. की धारा 313 क े अंतिगतिर अिभिलिखति बयान मे अिभयुक/अपीलाथी ने झुठिे स्पषीकरण पेष िकये । स्थानीय भाषा मे िनणरय क े अनुवाद का आषय, पककारो को इसे अपनी भाषा मे समझने क े उपयोग तिक ही सीिमति है और अन्य प्रतायोजनाथर इसका उपयोग नही िकया जा सकतिा । समस्ति व्यवहािरक एवं कायारलयीन प्रतायोजनाथर्, िनणरय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रतामािणक होगा एवं िनष्पादन तिथा कायारन्वयन क े प्रतयोजनाथर केत्र धािरति करेगा ।