Sh. Chand v. State (N.C.T.) Delhi & Ors.

Supreme Court of India · 12 Mar 2019
Abhay Manohar Sapre; Dinesh Maheshwari
Criminal Appeal Nos. 469-470 of 2019 @ Special Leave Petition (Criminal) Nos. 227-228 of 2019
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court remanded the matter to the High Court to reconsider quashing of FIR for electricity theft in light of compounding provisions under Section 152 of the Electricity Act, 2003 following a Lok Adalat settlement.

Full Text
Translation output
प्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायालय
दाण्डिक अपीलीय अधिकाररिा
दाण्डिक अपील सं. 469-470/2019
(ववशेष अनुमति याधचका (दाण्डिक) सं 227-228/2019 से उत्पन्न)
मुक
े श चंद ............अपीलार्थी (गण)
बनाम
राज्य (एन.सी.टी.) ददल्ली एवं अन्य ................प्रत्यर्थी (गण)
तनणणय
न्या., अभय मनोहर सप्रे,
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान

2. यह अपीलें Crl. M. C. No. 2757/2018 में Crl. M. A. No. 49292/2018 में ददल्ली उच्च न्यायालय द्वारा ददनाांक 10.12.2018 को पाररि हुए अांतिम तनर्णय एवां आदेश क े ववरुद्ध तनदेशशि होिी हैं जिसमें उच्च न्यायालय ने इसमें अपीलार्थी द्वारा दायर ककए आवेदन को ख़ाररि ककया र्था |

3. इन अपीलों क े तनपटान हेिु क ु छ िथ्यों को यहााँ नीचे उल्लेख करने की आवश्यकिा है, जिसमें एक छोटा िथ्य है |

4. अपीलार्थी बििली का एक उपभोक्िा र्था | इसशलए उसने अपने व्यावसातयक पररसर हेिु प्रत्यर्थी सां. 2 - िी.एस.ई.एस. रािधानी पावर शलशमटेड (अि से िी.एस.ई.एस. कहा िाएगा) से एक बििली का कनेक्शन शलया |

5. प्रत्यर्थी सां. 2 - िी.एस.ई.एस. ने अपीलार्थी को ददनाांक 22.09.2014 को 3,54,598.21/- रुपये का बििली खपि करने का बिल भेिा | िी.एस.ई.एस. क े अनुसार, अपीलार्थी ने बििली की चोरी की र्थी और पिा चलने पर, प्रश्नगि बिल अपीलार्थी को भेिा गया र्था |

6. चाँकक अपीलार्थी बिल की रकम अदा करने में असफल रहा, िी.एस.ई.एस. ने उसक े ववरुद्ध बििली अधधतनयम, 2003 (अि से ‘अधधतनयम’ कहा िाएगा) की धारा 135 क े िहि प्रर्थम इत्तला ररपोटण दिण की िर्था अधधतनयम क े िहि बििली चोरी क े दोष हेिु अपीलार्थी क े अशभयोिन की मााँग की| इसको दांड प्रकिया सांदहिा 1973, की धारा 41 क े िहि (अि से “Crl. P.C.” कहा िायेगा) ददए नोदटस क े द्वारा भी अनुसरर् ककया गया |

7. हााँलाकक, अपीलार्थी और िी.एस.ई.एस. ने मामले को 11.02.2018 को आयोजिि ववशेष लोक अदालि में क ु ल 1,60,000/- रूपये की क ु ल राशश पर समझौिा कर शलया र्था | िदानुसार लोक अदालि द्वारा 11.02.2018 को एक आदेश पाररि ककया गया | अपीलार्थी क े अनुसार उसने सहमति रकम को दो ककश्िों में िमा करा ददया र्था |

8. अपीलार्थी ने इसशलए ददल्ली उच्च न्यायालय में दांड प्रकिया सांदहिा की धारा 482 क े िहि एक याधचका दायर की जिसमें िी.एस.ई.एस. द्वारा उस पर उपरोक्ि वववाद से सम्िांधधि दिण की गई प्रर्थम इत्तला ररपोटण को रद्द करने हेिु मााँग की गई र्थी |

9. आक्षेवपि आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने याधचका को ख़ाररि कर ददया जिसने इस न्यायालय में ववशेष अनुमति द्वारा इन अपीलों को अपीलार्थी (उपभोक्िा) द्वारा दायर करने हेिु िढ़ावा ददया है |

10. अपीलार्थी क े फ़ाजिल अधधवक्िा श्री वी.क े.शमाण और प्रत्यर्थी सां.-1 क े फ़ाजिल सहायक सोशलशसटर िनरल श्री क े.एम.नटराि और प्रत्यर्थी सां. 2- िी.एस.ई.एस. क े फ़ाजिल अधधवक्िा श्री सोनल िैन को सुना गया |

11. अपीलार्थी (उपभोक्िा) क े फ़ाजिल अधधवक्िा ने लोक अदालि क े ददनाांक 11.02.2018 क े आदेश (सांलग्नक पी-5) की शिण (iii) को ििािे हुए यह प्रतिवाद ककया कक, पक्षों क े िीच हुए समझौिे में िी.एस.ई.एस. ने यह माना र्था कक, वह अपीलार्थी क े ववरुद्द उनक े द्वारा दायर ककये सभी मामलों, प्रर्थम इत्तला ररपोटण और दाजडडक मामले को िो उसक े ववरुद्द िी.एस.ई.एस ने दायर ककये हैं, सभी को, लोक अदालि में हुए समझौिे की शिों क े अनुसार ही तनपटाया िाएगा |

12. प्रतिउत्तर में, प्रत्यर्थी सां.[2] - िी.एस.ई.एस. क े अधधवक्िा ने यह प्रतिवाद ककया कक, प्रश्नगि मुद्दे को अधधतनयम की धारा 152 की आवश्यकिाओां क े मद्देनिर ही तनर्र्णि ककया िाए |

13. पक्षकारों क े अधधवक्िाओां को सुनने और मामले क े ररकॉडण की िााँच क े िाद, हम अपीलों को मांिर करिे हैं और आक्षेवपि आदेश को अपास्ि करिे हुए मामले को अधधतनयम की धारा 152 क े प्रावधानों को ध्यान में रखिे हुए याधचका को पुनः तनर्र्णि करने हेिु उच्च न्यायालय को प्रतिप्रेवषि करिे हैं |

14. िैसा कक प्रत्यर्थी सां.-1 क े फ़ाजिल सहायक सोशलशसटर िनरल श्री क े.एक.नटराि द्वारा सही इांधगि ककया गया, कक, प्रश्नगि मुद्दे को अधधतनयम की धारा 152, िो अधधतनयम क े िहि अपराधों क े शमन से सम्िांधधि हैं, क े अनुसार ववतनजश्चि ककया िाना चादहए|

15. चांकक हमने देखा कक, उच्च न्यायालय ने अधधतनयम की धारा 152, क े मद्देनिर मुद्दे को नहीां िााँचा, इसशलए हम मामले को अधधतनयम की धारा 152 क े प्रावधानों को ध्यान में रखिे हुए इस मुद्दे को पुनः परीक्षर् करने हेिु उच्च न्यायालय को प्रतिप्रेवषि करिे हैं िर्था कानन क े अनुसार उसमें सजम्मशलि िथ्यों पर मामले की आवश्यकिानुसार उधचि आदेशों को पाररि करें |

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16. पवणविी पररचचाण को ध्यान में रखिे हुए अपीलों को स्वीकार ककया िािा है, आक्षेवपि आदेश को अपास्ि ककया िािा है िर्था मामले को पुनः तनर्र्णि करने हेिु उच्च न्यायालय को प्रतिप्रेवषि ककया िािा है |

17. हम यह स्पष्ट करिे हैं कक मामले को प्रतिप्रेवषि करने क े मि पर हमने मामले क े गुर्ागुर् पर ध्यान नहीां ददया है | अिः उच्च न्यायालय, इस आदेश में हमारे द्वारा ककए गए ककसी भी प्रेक्षर् से अप्रभाववि हुए बिना, मामले का फ ै सला पर्ण रूप से कानन क े अनुसार करेगा | न्या.................. (अभय मनोहर सप्रे) न्या.................. (ददनेश महेश्वरी) नई ददल्ली, माचण 12, 2019 अस्वीकरर्: देशी भाषा में तनर्णय का अनुवाद मुकद्द्मेिाि क े सीशमि प्रयोग हेिु ककया गया है िाकक वो अपनी भाषा में इसे समझ सक ें एवां यह ककसी अन्य प्रयोिन हेिु प्रयोग नहीां ककया िाएगा| समस्ि कायाणलयी एवां व्यावहाररक प्रयोिनों हेिु तनर्णय का अांरेज़ेिी स्वरूप ही अशभप्रमार्र्ि माना िाएगा और कायाणन्वयन िर्था लाग ककए िाने हेिु उसे ही वरीयिा दी िाएगी |