Varun Pahwa v. Renu Chourie

Supreme Court of India · 01 Mar 2019
D. Y. Chandrachud; Hemant Gupta
Suo Motu Appeal No. 2431 of 2019 (SLP (C) No. 2792 of 2019)
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that procedural errors in pleadings can be amended under Order 6 Rule 17 CPC to reflect the true plaintiff, allowing the appeal and permitting amendment of the plaint.

Full Text
Translation output
प्रतिवेद्य
भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
ससवर्वल अपीलीय अधिकाररता
ससवर्वल अपील सं. 2431/2019
(S.L.P (C) सं. 2792/2019 से उदघृत)
र्वरुण पाहर्वा ..............अपीलार्थी
बनाम
श्रीमती रेनू चौिरी ...............प्रततर्वादी
तिर्णय
हेमंि गुप्िा, न्यायाधीश
JUDGMENT

1. अनुमतत प्रदान की जाती है |

2. प्रस्तुत अपील में चुनौती की वर्वषय र्वस्तु ददल्ली उच्च न्यायालय द्र्वारा ददनांक 20.08.2018 को पाररत आदेश है | उपरोक्त आदेश क े माध्यम से वर्वचारण न्यायालय द्र्वारा 23.01.2018 को पाररत आदेश क े वर्वरुद्ि एक याधचका ख़ाररज की गई र्थी, जजसमें र्वाद क े संशोिन हेतु अनुमतत मांगी गई र्थी |

3. अपीलार्थी ने ससद्िार्थथ गारमेंट्स प्राइर्वेट सलसमटेड क े बतौर तनदेशक, 25,00,000/- रुपये क े सार्थ-सार्थ र्वाद-कालीन एर्वं 28.05.2016 तक या लगभग क े भवर्वष्य काल ब्याज की र्वसूली हेतु र्वाद दायर ककया र्था | र्वादी ने दार्वा ककया, कक, कधर्थत रकम को 25,00,000/- रुपये क े क़र्थ क े रूप में प्रततर्वादी को 16.06.2013 को RTGS क े जररए, HDFC BANK, ददल्ली में प्रेवषत कर ददया गया र्था | यह भी बताया गया कक, र्वादी ने श्री नर्वनीत गुप्ता को मुख्तारनामा ददया है और इस मुख्तारनामा की प्रततसलवप संलधगत है |

4. प्रततर्वादी ने सलखित कर्थन में प्रारंसभक आपवि जताई कक, र्वाद को र्वादी द्र्वारा दायर नहीं ककया गया है और यह भी कहा कक, कधर्थत प्राधिकृ त प्रतततनधि ने कोई दस्तार्वेज दायर नहीं ककया है जजससे पता चलता हो कक उसे उपरोक्त र्वादी ने प्राधिकृ त ककया है | वर्वशेष मुख्तारनामा न र्वैि है और न ही स्र्वीकायथ |

5. 29.11.2016 को जब नर्वनीत गुप्ता ने कोटथ में िुद को PW-1 की हैससयत से परीक्षण करने हेतु र्वादी क े मुख्तारी अधिकारी क े रूप में पेश हुए र्थे | उस स्तर पर, वर्वचारण न्यायालय द्र्वारा र्वादी क े पते को प्रदान करने हेतु आदेश पाररत ककया गया र्था और यह भी कक, क्यों र्वादी को एक अधिर्वक्ता द्र्वारा परीक्षण ककया जाए जबकक र्वादी ददल्ली का ही स्र्थानीय तनर्वासी है | इससलए, इसक े बाद अपीलार्थी ने र्वाद संशोिन हेतु इस आिार पर एक प्रार्थनाथ पत्र दायर ककया र्था कक, अधिर्वक्ता ने असार्विानी से र्वाद का शीषथक गलत कर ददया र्था चूूँकक ऋण क ं पनी द्र्वारा ददया गया र्था, इससलए, र्वाद का नाम क ं पनी क े नाम पर होना र्था | इससलए, र्वादी ने र्वाद क े तनम्नसलखित पैरा(औं) द्र्वारा पैरा एक और पैरा दो को स्र्थानापन्न करना चाहा है, जैसा कक नीचे ददया गया है: “1. कक, र्वादी एक तनजी सलसमटेड क ं पनी है जजसका I-VA (संपतत न. XII) जर्वाहर नगर, ददल्ली में अपना पंजीकृ त कायाथलय है |

2. कक, प्रस्तुत र्वाद को र्वादी क े प्राधिकृ त प्रतततनधि अर्थाथत् नर्वनीत गुप्ता, तनर्वासी- 322, कोहट एन्क्लेर्व, पीतम पुरा, ददल्ली द्र्वारा दायर ककया गया है जजन्हें ससद्िार्थथ गारमेंट्स प्राइर्वेट सलसमटेड की तरफ से रेनू चौिरी क े खिलाफ़ जजसे 25 लाि रूपये का ऋण ददया गया र्था, की सभी क़ानूनी कायथर्वादहयों और न्यायालय क े मामलों में सभी दस्तार्वेजों, कागजों, सशकायतों, प्रार्थथना पत्रों, र्वाद, सलखित कर्थन, प्रततर्वाद, शपर्थ पत्रों, उिर, पुनरीक्षण, आदद को हस्ताक्षर, सत्यावपत, तनष्पादन और संस्र्थापन, अनुसरण, और साक्ष्य देने हेतु ददनांक 12.05.2016 क े बोडथ संकल्प (resolution) द्र्वारा प्राधिकृ त ककया गया है|”

6. वर्वचारण न्यायायल ने संशोिन को इस आिार पर इंकार ककया र्था कक, प्रार्थथना पत्र तनजी र्वैयजक्तक क े रूप में दायर र्वाद को तनजी सलसमटेड क ं पनी द्र्वारा दायर र्वाद क े रूप में पररर्वततथत करने की कोसशश है, जो अनुज्ञेय नहीं है क्योककं यह र्वाद की प्रकृ तत को पूणता: बदलता है | इस कधर्थत आदेश में उच्च न्यायालय द्र्वारा हस्तक्षेप नहीं ककया गया र्था |

7. हमने अपीलार्थी क े अधिर्वक्ता को सुना क्योकक प्रततर्वादी की तरफ से कोई उपजस्र्थत नहीं हुआ |

8. र्वाद को उधचत रूप से तैयार नहीं ककया गया क्योंकक पक्षकारों क े ज्ञापन(Memo of Parties) में र्वादी को र्वरुण पाहर्वा को ससद्िार्थथ गारमेंट्स प्राइर्वेट सलसमटेड क े तनदेशक द्र्वारा र्वखणथत ककया है जबकक इसे ससद्िार्थथ गारमेंट्स प्राइर्वेट सलसमटेड क े तनदेशक र्वरुण पाहर्वा क े माध्यम से होना चादहए र्था | इससलए, यह मामला अधिर्वक्ता की समझ की कमी क े कारण हुई गलती का है, कक, क ै से एक प्राइर्वेट सलसमटेड क ं पनी एक अधिम रकम की र्वसूली हेतु मुकद्दमा दायर कर सकती है |

9. पादटथयों क े ज्ञापन(Memo of Parties) से स्पष्ट है कक यह अधिर्वक्ता जजसने र्वाद तैयार ककया है, क े द्र्वारा अनजाने में की गई गलती है | ऐसी अनजाने में की गई गलती सही करने क े सलए मना नहीं ककया जा सकता जब गलती र्वाद पत्र पढ़ने से ही स्पष्ट है | प्रकिया क े तनयम न्याय क े सेर्वक है और यह पक्षकारों क े र्वास्तवर्वक अधिकारों को तनष्फल नहीं कर सकतें | यह भलीभांतत स्र्थावपत है कक, र्वाद-वर्वर्वाद क े संशोिन को क े र्वल इससलए अस्र्वीकार नहीं ककया जा सकता है क्योंकक कोई गलती, लापरर्वाही, असार्विानी या प्रकिया क े तनयमों का उलंघन हुआ है | न्यायालय हमेशा अनुमतत देती है र्वाद-वर्वर्वाद को संशोिन करने हेतु, तब भी जब कोई पक्षकार लापरर्वाह या असार्विान हो क्योंकक र्वाद-वर्वर्वाद में संशोिन की अनुमतत की शजक्त का लक्ष्य न्याय प्रदान करना है और यह ककसी भी ऐसे संकीणथ या तकनीकी सीमाओं द्र्वारा शाससत नहीं हैं | State of Maharastra vs. Hindustan Constructions Company Limited में, इस न्यायालय ने तनजम्नसलखित कहा र्था: “17. जहाूँ तक की ससवर्वल प्रकिया संदहता 1908 (लघु हेतु “CPC”) सम्बंधित है, आदेश 6 तनयम 17 र्वाद-वर्वर्वाद क े संशोिन को प्रदान करता है | यह कहता है कक, न्यायलय कायथर्वादहयों क े ककसी भी स्तर पर ककसी भी पक्षकार को अपने र्वाद-वर्वर्वाद को ऐसे तरीक ें और ऐसी शतों जो न्याय संगत हो, को पररर्वततथत अर्थर्वा संशोधित करने हेतु अनुमतत प्रदान कर सकता है, और ऐसे सभी संशोिन ककये जायेंगे जब यह पक्षकरों क े बीच वर्वर्वाददत असल प्रश्नों को तनखणथत करने क े पररयोजन हेतु अर्वश्यक होंगे |

18. र्वादों क े संशोिन से सम्बंधित मामले न्यायालयों क े समक्ष समय-समय पर वर्वचारण हेतु आए हैं | जैसा कक, 1984 में, Clarapede & Co. v. Commercial Union Assn. क े मामले में - एक अपील जो अपीलीय न्यायालय क े समक्ष प्रस्तुत हुई र्थी, Brett M.R. ने कहा र्था: “.......न्यायालय क े आचरण का तनयम ऐसे एक मामले में है की, यद्यवप गलती लापरर्वाही या असार्विानी से है, और, यद्यवप प्रस्तावर्वत संशोिन देरी से ही हो, संशोिन को स्र्वीकारा जायेगा यदद इसे करते समय ककसी भी पक्षकार क े सार्थ अन्याय न हो | र्वहां कोई अन्याय नहीं है अगर दूसरे पक्ष को कॉस्ट(cost) से क्षततपूततथ होती है; लेककन, संशोिन उन्हें ऐसी जस्र्थतत में ला दे कक, उन्हें नुकसान हो, तो इसे नहीं करना चादहए.......|”

19. Charan Das v. Amir Khan क े मामले में Privy Council ने क़ानूनी जस्र्थतत को उजागर ककया कक, र्वाद में र्वाद पत्र को संशोिन करने हेतु न्यायालय की शजक्त को तनयम क े रूप में इस्तेमाल नहीं करना चादहए, जहाूँ इसका आशय प्रततर्वादी से एक क़ानूनी अधिकार छीन लेना है जोकक उसे समय क े बीत जाने क े कारण उपाजजथत हुआ है, कफर भी ऐसे मामले है जजनमें वर्वर्वेचन मामले की वर्वशेष पररजस्र्थततयों द्र्वारा अधिक महत्त्र्वपूणथ साबबत हो गया है | ***** **** **** **** **** ****

22. Jai Jai Ram Manohar Lal क े मामले में यह न्यायालय एक मुद्दे से धचंततत र्था जजसमें र्वाद-पत्र में संशोिन इस आिार पर मना ककया गया र्था कक, संशोिन को पूर्वथव्यापी प्रभार्व से नहीं ककया जा सकता है और संशोिन की तारीि, पर कायथ, पररसीमा तनयम द्र्वारा बाधित र्था | यह कहा गया: (SSC p. 871, para 5) “5...... प्रकिया क े तनयमों को न्याय प्रदान करने हेतु सेर्वक समझा गया है | एक पक्ष को राहत महज इसीसलए इंकार नहीं की जा सकती है क्योंकक कोई त्रुदट, असार्विानी, चूक या प्रकिया क े तनयमों का उल्लंघन हुआ है | न्यायालय हमेशा एक पक्षकार को र्वाद-वर्वर्वाद में संशोिन हेतु अनुमतत देता है, जब तक नहीं जहाूँ र्वह संतुष्ट हो कक र्वांछनीय पक्षकार दुभाथर्वपूणथ व्यर्वहार कर रही र्थी, अर्थर्वा कक, उसकी गलती द्र्वारा, उसने अपने वर्वपक्ष को नुकसान पहुूँचाया जजसे (cost) कॉस्ट क े आदेश द्र्वारा भी क्षततपूततथ नहीं ककया जा सकता है| यद्यवप गलती लापरर्वाही या असार्विानी से हो और यद्यवप प्रस्तावर्वत संशोिन देरी से ही हो, संशोिन को अनुमतत दी जाएगी यदद अगर यह अन्य पक्ष क े सार्थ अन्याय ककये बबना ककया जा सकता है |” इस न्यायालय ने यह भी कहा (Jai Jai Ram Manohar Lal Case, SCC p.873, para 7): “7…… र्वाद-वर्वर्वाद क े संशोिन हेतु शजक्त का आशय न्याय प्रदान करना है और यह ऐसे ककसी संकीणथ या तकनीकी पररसीमा द्र्वारा शाससत नहीं है |”

10. Uday Shankar Triyar vs Ram Kalewar Prasad Singh & Another मामले में, इस न्यायलय ने कहा कक, प्रकियात्मक दोष और अतनयसमताएं जो साध्य है, को मूल अधिकारों को पराजजत अर्थर्वा अन्याय हेतु अनुमतत प्रदान नहीं करनी चादहए| प्रकिया को कभी भी न्याय प्रदान करने की मनाही हेतु या दमनात्मक अर्थर्वा दंडात्मक उपयोग हेतु स्र्थायी अन्याय का औजार नहीं बनाना चादहए | न्यायालय ने तनम्नसलखित कहा: - “17. र्वाद-वर्वर्वाद, अपील या राहत हेतु आर्वेदन पत्र या याधचका से सम्बंधित ककसी भी प्रकियात्मक आर्वश्यकता क े सार्थ गैर अनुपालन को स्र्वतः ख़ाररज या अस्र्वीकृ त नहीं करना चादहए, जब तक कक प्रासंधगक कानून या तनयम ऐसे आज्ञा न दे | प्रकियात्मक दोष और अतनयसमताएूँ जो साध्य है, को मूल अधिकारों को पराजजत अर्थर्वा अन्याय हेतु अनुमतत प्रदान नहीं करनी चादहए| प्रकिया, न्याय की एक सेवर्वका, को कभी भी न्याय प्रदान करने की मनाही हेतु या दमनात्मक अर्थर्वा दंडात्मक उपयोग हेतु स्र्थायी अन्याय का औजार नहीं बनाना चादहए| इस ससद्िांत क े भलीभांतत स्र्वीकृ त अपर्वाद हैं: (i) जहाूँ कानून प्रकिया को तनिाथररत करता है और गैर- अनुपालन क े पररणाम को भी वर्वशेष रूप से तनिाथररत करता हो; (ii) जहाूँ प्रकियात्मक दोष को सुिारा नहीं जाता, यहाूँ तक कक इसे बताने क े बाद भी और इसे सुिारने हेतु उधचत अर्वसर प्रदान करने क े बाद भी; (iii) जहाूँ गैर-अनुपालन या उल्लंघन को सुवर्वचाररत या शरारतपूणथ साबबत कर ददया गया हो; (iv) जहाूँ दोष का सुिार मामले क े गुणागुणों या न्यायालय की अधिकाररता को प्रभावर्वत करें; (v) अपील क े ज्ञापन क े मामले में, जब प्राधिकरण की पूणथ अनुपजस्र्थतत हो और जब अपील को अपीलार्थी क े ज्ञान, सहमतत और अधिकार क े बबना प्रस्तुत ककया हो |”

11. इससलए, हमनें देिा कक, र्वाद में असार्विानी से चूक हुई है जजससे वर्वचारण न्यायालय ने सही करने हेतु अनुमतत दे देनी चादहए र्थी अर्थर्वा प्राइर्वेट सलसमटेड क ं पनी को र्वादी क े रूप में मुकदमा दायर करने की अनुमतत प्रदान कर देनी चादहए र्थी क्योंकक मूल र्वादी ने कधर्थत प्राइर्वेट सलसमटेड क ं पनी क े बतौर तनदेशक र्वाद दायर ककया र्था | इससलए, पक्षकारों क े ज्ञापन(Memo of Parties) को सही करने हेतु की मनाही क े आदेश को वर्वधि में न्यायोधचत नहीं कहा जा सकता है |

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12. पररणामस्र्वरूप, उच्च न्यायालय क े 20.08.2018 और वर्वचारण न्यायालय क े 23.01.2018 आदेशों को अपास्त ककया जाता है और र्वादी द्र्वारा र्वाद-पत्र को संशोिन करने हेतु प्रार्थथना-पत्र को बबना कॉस्ट (cost) क े अनुमतत दी जाती है | अपील को अनुमतत प्रदान की जाती है |..............न्यायािीश (डॉ. डी. र्वाई. चंद्रचूड़)..............न्यायािीश (हेमंत गुप्ता) नई ददल्ली, माचथ 1, 2019 अस्वीकरण: देशी भाषा में निणणय का अिुवाद मुकद्द्मेबाज़ के निनमत प्रयोग हेतु ककया गया हैं ताकक, वो अपिी भाषा में इिे िमझ िके एवं यह ककिी अन्य प्रयोजि हेतु प्रयोग िहीं ककया जायगा | िमस्त कायाणलयी एवं व्यावहाररक प्रयोजिों हेतु निणणय का अंग्रेज़ी स्वरूप ही अनभप्रमानणत मािा जाएगा और कायाणन्वयि तथा लागू ककए जािे हेतु उिे ही वरीयता दी जाएगी |