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भार की सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय क्षेत्राति कार
दीवानी अपील सं. 4489 वर्ष 2019
[एसएलपी (सी) सं. 23505 वर्ष 2017 से उद्भू ]
नरेन्द्र क
ु मार ......अपीलक ा
बनाम
सिसडिं)क
े ट बैंक अध्यक्ष और प्रबन् निनदेशक और अन्य .....प्रत्यर्थी2गण
निनणय
माननीय न्यायमूर्ति संजय निकशन कौल
JUDGMENT
1. अनुमति अनुदत्त।
2. अपीलक ा सन् 1979 में एक निवति अति कारी क े रूप में सिंसति)क े ट बैंक, प्रत्यर्थी2 संख्या 1 की सेवा में निनयुनि> हुआ। वह निदनांक 25.3.1996 से ीन साल की अवति क े लिलए सतिBव/रसिजस्ट्रार क े रूप में ऋण वसूली न्यायाति करण, इलाहाबाद में प्रति निनयुनि> पर गया, सिजस अवति को एक वर्ष क बढ़ाया गया र्थीा जब वह इलाहाबाद में उस पद पर mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ैना निकया गया र्थीा। इसक े बाद अपीलक ा को Bार साल बाद प्रत्यर्थी2 क े मूल निवभाग में प्रत्यावर्ति कर निदया गया।
3. अपीलार्थी2 को निJर से निदनांक 29.11.2001 को एक वर्ष क े लिलए ऋण वसूली अपीलीय न्यायाति करण, इलाहाबाद क े सतिBव/रसिजस्ट्रार क े रूप में प्रति निनयुनि> पर भेजा गया, सिजस अवति को दो बार, प्रत्येक एक वर्ष का, बढ़ाया गया र्थीा। ऋण वसूली अपीलीय न्यायाति करण, इलाहाबाद क े अध्यक्ष क े अनुरो में प्रति निनयुनि> क े आगे निवस् ार क े लिलए अनुरो निकया गया र्थीा, हालांनिक, प्रत्यर्थी2 संख्या 1, उनक े मूल निवभाग द्वारा अस्वीकार कर निदया गया र्थीा। लेनिकन अध्यक्ष द्वारा सिंसति)क े ट बैंक क े कायकारी निनदेशक को लिललिL पत्र से निदनांनिक 10.2.2005 की एक अति सूBना द्वारा अपीलक ा को निदनांक 28.5.2005 क छह महीने का और निवस् ार निदया गया।
4. निदनांक 26.6.2005 को ऋण वसूली न्यायाति करण, लLनऊ में पीठासीन अति कारी क े पद क े लिलए रिरनि>यों को अति सूतिB कर े हुए एक निवज्ञापन प्रकाशिश निकया गया र्थीा, सिजसक े लिलए अपीलक ा ने प्रति निनयुनि> की अवति क े दौरान निदनांक 12.4.2005 को आवेदन निकया र्थीा। इसक े शीघ्र पश्चा ् प्रति निनयुनि> को आगे बढ़ाकर निदनांक 28.11.2005 क कर निदया गया। निवत्त मंत्रालय, भार संघ, प्रत्यर्थी2 संख्या 4 ने प्रत्यर्थी2 संख्या 1 को संबोति निदनांक 2.8.2005 क े एक पत्र द्वारा सिजसमें अपीलक ा को ऋण वसूली न्यायाति करण, लLनऊ में पीठासीन अति कारी क े पद क े निवBार क े लिलए एक 'अनापलित्त प्रमाण पत्र' अग्रेनिर्ष करने का अनुरो निकया गया र्थीा और उ> 'अनापलित्त प्रमाणपत्र' प्रत्यर्थी2 संख्या 1 द्वारा निदनांक 24.8.2005 को जारी निकया गया र्थीा। इस निवकास क े मद्देनजर अपीलक ा ने प्रत्यर्थी2 बैंक से निदनांक 6.10.2005 को एक वर्ष की अवति क े लिलए प्रति निनयुनि> की अवति क े निवस् ार क े लिलए अनुरो निकया, लेनिकन इसकी बैंक से कोई प्रति निZया नहीं निमली। निदनांक 22.10.2005 को अपीलार्थी2 निदनांनिक 10.10.2005 क े उसे संबोति पत्र क े अनुसरण में इस न्यायालय क े माननीय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd न्याया ीश की अध्यक्ष ा में Bयन सनिमति क े समक्ष बा Bी क े लिलए उपस्थिस्र्थी हुआ। ऋण वसूली न्यायाति करण, इलाहाबाद क े अध्यक्ष ने इस निवकास क े मद्देनजर निदनांक 18.11.2005 को प्रति निनयुनि> पर अपीलक ा क े निवस् ार क े लिलए भार संघ से अनुरो निकया और अं ः प्रति निनयुनि> की अवति को निदनांनिक 1.12.2005 की अति सूBना द्वारा निदनांक 29.11.2005 से 28.5.2006 क भू लक्षी प्रभाव से बढ़ा निदया गया।
5. अपीलक ा को पीठासीन अति कारी, ऋण वसूली न्यायाति करण, लLनऊ क े पद क े लिलए Bयनिन निकया गया और निदनांक 20.01.2006 को निनयुनि> पत्र जारी निकया गया और अपीलक ा व ऋण वसूली अपीलीय न्यायाति करण, इलाहाबाद क े अध्यक्ष को समर्थिर्थी प्रति क े सार्थी प्रत्यर्थी2 संख्या 1 बैंक क े अध्यक्ष और प्रबं निनदेशक को संबोति पत्र जारी निकया गया र्थीा। इस निनयुनि> पत्र क े संदभ में, अपीलक ा को पत्र जारी करने की ारीL से एक महीने क े भी र पीठासीन अति कारी क े रूप में कायभार संभालने क े लिलए बुलाया गया र्थीा। इस प्रकार, अपीलक ा ने निदनांक 25.1.2006 को प्रत्यर्थी2 संख्या 1 बैंक को पत्र लिलLकर उ> नए पद का प्रभार लेने की अनुमति देने का अनुरो निकया। इस पत्र पर बैंक द्वारा कोई प्रति निZया नहीं भेजी गई। अध्यक्ष, ऋण वसूली अपीलीय न्यायाति करण ने अपीलक ा को निदनांक 27.1.2006 को निनमु> कर निदया और उसक े बाद अपीलक ा ने पीठासीन अति कारी क े पद का कायभार संभाला। भार संघ/प्रत्यर्थी2 संख्या 4 ने प्रत्यर्थी2 संख्या 1 बैंक को उसि_लिL प्रति क े सार्थी निदनांक 9.2.2006 की अति सूBना जारी की गयी जो अपीलक ा क े पदभार ग्रहण करने क े निदनांक 30.1.2006 से पांB साल की अवति क े लिलए र्थीी या जब क वह प्रति क े सार्थी 62 वर्ष की आयु प्राप्त नहीं कर ले ा।
6. लगभग ग्यारह महीनों क े अं राल क े बाद निदनांक 15.12.2006 को अपीलक ा को उ> निनयुनि> क े संबं में प्रति वादी संख्या 1 बैंक से एक पत्र प्राप्त हुआ, जो निनम्नानुसार है: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd "हमारे पास भार सरकार, निवत्त मंत्रालय, आर्थिर्थीक काय निवभाग (बैंकिंकग प्रभाग) पत्र सं. ए-15012/1/2005-)ीआरटी निदनांनिक 20.01.2006 का संदभ है जो आपकी )ीआरटी, लLनऊ में पीठासीन अति कारी क े रूप में निनयुनि> का है। आपकी उ> निनयुनि> की श d क े अनुसार, आप ऋण वसूली न्यायाति करण (वे न, भत्ता और पीठासीन अति कारी की सेवा क े अन्य निनयम और श e) निनयम, 1998 में निन ारिर निनयम व श d द्वारा शासिस हो े हैं और आपकी सेवानिनवृलित्त की आयु 62 वर्ष है। इसक े अलावा, आपको बैंक द्वारा )ीआरटी, इलाहाबाद में निदनांक 29.11.2001 को प्रति निनयु> निकया गया है और बैंक क े बो) द्वारा निदनांक 29.11.2005 क श d को एक निवशेर्ष मामले क े रूप में बढ़ाया गया र्थीा। जैसा निक आप बैंक की सेवा से राह लिलये निबना और हमारी सहमति क े निबना )ीआरएटी, इलाहाबाद से राह क े बाद )ीआरटी, लLनऊ में शानिमल हुए हैं, आपकी नई निनयुनि> क े परिरणामस्वरूप, सक्षम प्राति कारी ने हमें बैंक की सेवा से आपकी सेवानिनवृलित्त लेने का निनदgश निदया है। कृ पया अपना आवेदन ुरं अग्रेनिर्ष करें। ”
7. अपीलक ा ने निदनांक 12.1.2007 को इस पत्र का जवाब दे े हुए कहा निक वह सेवानिनवृलित्त क े लिलए एक आवेदन प्रस् ु कर रहा है सिजसक े लिलए प्रति वादी संख्या 4 से अनुमोदन की आवश्यक ा र्थीी सिजसक े लिलए उसने उसी निदनांक को एक पत्र भी निदया र्थीा। हालाँनिक निदनांक 19.2.2007 को प्रति वादी संख्या 1 बैंक ने अपीलक ा को बैंक की सेवा से इस् ीJा देने क े लिलए बुलाया जैसा निक उसने ऋण वसूली न्यायाति करण क े पीठासीन अति कारी क े रूप में पदभार ारण निकया र्थीा। इस संबं में कु छ संप्रेर्षण का आदान प्रदान निकया गया र्थीा, लेनिकन यह कहने क े लिलए पयाप्त है निक अं ः अपीलक ा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ने इस् ीJा दे निदया और प्रति वादी संख्या 1 बैंक क े पत्र निदनांक 10.3.2008 द्वारा इस् ीJा स्वीकार कर लिलया गया। उ> पत्र ने अपीलक ा को सूतिB निकया निक उसे त्काल प्रभाव से स्वैस्थिkछक सेवानिनवृलित्त क े लिलए उसक े अनुरो को स्वीकार करक े बैंक की सेवाओं से मु> निकया जा रहा है। हालाँनिक, निववाद जो व मान कायवाही की निवर्षयवस् ु है, इस पत्र क े उत्तरव 2 भाग से उत्पन्न हुआ जो निनम्नानुसार है: "क ृ पया ध्यान दें निक यद्यनिप आपने सिंसति)क े ट बैंक कमBारी पेंशन निवनिनयम 1995 क े ह पेंशन का निवकल्प Bुना है, निJर भी निनम्नलिललिL का पालन न करने क े मद्देनजर आप निकसी पेंशन लाभ क े हकदार नहीं हैं: -
1. एसबीईपीआर-1995 क े Lं) सं. 22(2) में कहा गया है निक "बैंक कमBारी की सेवा में रुकावट उसकी निपछली सेवा को जब् कर ले ी है।" आपको निदनांक 27.01.2006 को )ीआरएटी से मु> कर निदया गया और आपको इसक े ुरं बाद हमारी सेवाओं में शानिमल होना Bानिहए र्थीा, लेनिकन आप ऐसा करने में निवJल रहे हैं। बैंक में शानिमल होने और बैंक की सेवाओं से मु> होने क े बजाय, आप सी े ऋण वसूली न्यायाति करण, लLनऊ में शानिमल हो गए, जो हमारे बैंक में आपक े लिलए लागू सेवा श d क े मानदं)ों का उ_ंघन कर े र्थीे। इसलिलए निदनांक 28.01.2006 से आपकी अनुपस्थिस्र्थीति को सेवा का जानबूझकर परिरत्याग/अनति क ृ अनुपस्थिस्र्थीति माना जा ा है।
2. एसबीईपीआर-1995 क े Lं) सं. 29 की श d में, 'नवंबर 1993 क े प्रर्थीम निदन या उसक े बाद, निकसी भी समय जब निकसी कमBारी ने 20 साल की अहकारी सेवा पूरी कर ली है, ो वह लिललिL रूप में 3 महीने से कम नहीं, की सूBना देकर निनयुनि> प्राति कारी सेवा से सेवानिनवृत्त हो जा ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd जबनिक जैसा पैरा 1 में निन ारिर निकया गया है, निबना निकसी सूBना/नोनिटस क े आप )ीआरटी, लLनऊ में शानिमल हो गए और आप बैंक की सेवाओं से स्वयं को ठीक से निनमुनि> नहीं कर पाए और इस रह आपने एसबीईपीआर- 1995 क े निवनिनयमन सं. 29 का उ_ंघन निकया है।"
8. निदनांक 6.5.2008 को अपीलक ा को सूतिB निकया गया निक अपीलक ा को क े वल 18 वर्ष और 10 महीने की सेवा की क ु ल अवति क े आ ार पर रु. 2,41,800/- की राशिश देय र्थीी। इस प्रकार, प्रभावी रूप से प्रति वादी संख्या 1 बैंक ने 9 साल क े अपीलक ा की सेवाओं को जब् कर लिलया और 18 साल की सेवा क े आ ार पर अपीलक ा को ग्रेkयुटी का लाभ निदया। इसे अपीलक ा क े पत्रांक निदनांक 10.7.2008 द्वारा यह इंनिग कर े हुए निववानिद निकया गया निक उसकी सेवा 29 वर्ष और 2 महीने की र्थीी क्योंनिक )ीआरटी और )ीआरएटी में प्रति निनयुनि> की अवति ग्रेkयुटी क े उद्देश्य से मूल निवभाग की निनरं र सेवा का निहस्सा र्थीी। पेंशन लाभों का अनुरो पत्रांक निदनांक 15.7.2008 द्वारा निकया गया र्थीा, लेनिकन इसकी कोई सकारात्मक प्रति निZया नहीं निमली। इस प्रकार, अपीलक ा ने प्रति वादी संख्या 4 को एक पत्र संबोति निकया, सिजसने बैंक को अपीलक ा क े मामले पर सहानुभूति पूण निवBार करने की मांग कर े हुए संप्रेनिर्ष निकया। लेनिकन अं ः अपीलक ा क े अनुरो को प्रति वादी संख्या 1 बैंक ने निदनांक 31.5.2010 क े पत्रांक द्वारा अस्वीकार कर निदया र्थीा।
9. अपीलक ा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय, लLनऊ बेंB क े समक्ष एक रिरट यातिBका संख्या 947(एसबी)/2010 दायर की, सिजसमें निनम्नलिललिL प्रार्थीना की गई: “ए. उत्प्रेर्षण लेL की प्रक ृ ति में रिरट, आदेश या निनदgश जारी करने क े लिलए, सिजससे निदनांक 31.05.2010 और निदनांक 10.03.2008 क े आक्षेनिप Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd आदेश को रद्द कर निदया गया, जैसा निक निवपक्षी पक्षकार संख्या 1 और 2 द्वारा पारिर रिरट यातिBका में संलग्नक-1 और संलग्नक-2 में निननिह है। बी. यातिBकाक ा को पेंशन लाभ देने और यातिBकाक ा को ब्याज क े सार्थी पूरे बकाया का भुग ान करने क े लिलए निवपक्षी पक्षकार 1 और 2 को आदेशिश कर े हुए परमादेश की प्रक ृ ति में रिरट, आदेश या निनदgश जारी करना।" निदनांक 15.7.2010 को अपीलार्थी2 क े पक्ष में अं रिरम आदेश निदए गए र्थीे, जो निदनांक 31.05.2010 और 10.03.2008 क े आक्षेनिप आदेशों क े संBालन पर रोक लगा े र्थीे।
10. बैंक ने रिरट यातिBका का निवरो निकया और अशिभकर्थीन पूरे हो गए। कु छ पूरक हलJनामे भी दायर निकए गए र्थीे और उसी क े सार्थी, अपीलक ा ने निदनांक 25.7.2013 का एक पत्रांक दायर निकया, जो प्रति वादी संख्या 4 द्वारा प्रति वादी संख्या 1 बैंक को संबोति र्थीा सिजसे आरटीआई क े माध्यम से प्राप्त निकया गया र्थीा, सिजसका प्रासंनिगक निहस्सा निनम्नानुसार है: "उपयु> घटनाओं से, यह देLा जा सक ा है निक बैंक से उतिB अनापलित्त और स क ा मंजूरी क े बाद श्री कु मार की निनयुनि> की गई र्थीी। निदनांक 20.01.2006 को निनयुनि> प्रस् ाव भी उन्हें भेज निदया गया र्थीा, सिजसमें स्पष्ट श दी गई र्थीी निक श्री क ु मार से अनुरो है निक वे निन ारिर अवति क े भी र पद का प्रभार ग्रहण करें। जब श्री कु मार ने पद ारण निकया, ो निदनांक 09.02.2006 को एक अति सूBना जारी की गई सिजसे बैंक को भी भेजा गया। निदनांक 20.01.2006 क े निनयुनि> पत्र जारी करने और अति सूBना निदनांक 09.02.2006 क े बाद बैंक से कोई संBार नहीं हुआ। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd बैंक ने 6 महीने से अति क क े बाद पहली बार मंत्रालय क े सार्थी निदनांक 17.7.2006 क े पत्रांक द्वारा मामला उठाया। यह भी देLा जा सक ा है निक मंत्रालय और बैंक क े बीB पूण पत्राBार क े दौरान श्री क ु मार की सेवा क े ब ाव क े बारे में कोई संक े नहीं र्थीा और यह बैंक क े निनदgश पर र्थीा निक श्री कु मार ने बैंक की सेवा से सेवानिनवृलित्त ले ली। इस प्रकार, अनति क ृ अनुपस्थिस्र्थीति क े रूप सेवानिनवृलित्त की ारीL से जनवरी 2006 क श्री क ु मार की सेवा को मानना और पेंशन लाभ से इनकार करने में बैंक की कारवाई उतिB नहीं है।" [प्रभाववर्ति ] प्रति वादी संख्या 4 द्वारा प्रति वादी संख्या 1 को संबोति संBार से हालांनिक कोई प्रति निZया नहीं निमली।
11. ति)वीजन बेंB ने रिरट यातिBका को निदनांक 31.3.2017 को सुना और Lारिरज कर निदया। यही वह आदेश है सिजसे व मान अपील में Bुनौ ी दी गयी है। आक्षेनिप आदेश में कहा गया है निक सिंसति)क े ट बैंक कमBारी पेंशन निवनिनयम, 1995 (इसक े बाद 'पेंशन निवनिनयम' क े रूप में संदर्थिभ ) क े Lं) 22(2) क े कशिर्थी गैर-अनुपालन क े मद्देनजर अपीलक ा को पेंशन नहीं दी गई र्थीी, क्योंनिक उसे निदनांक 27.1.2006 को )ीआरटी से मु> होने पर बैंक की सेवा में शानिमल होना Bानिहए र्थीा, लेनिकन वह सी े )ीआरटी, लLनऊ क े पीठासीन अति कारी क े पद पर शानिमल हो गया। निदनांक 28.1.2006 की अवति से सेवा को जानबूझकर परिरत्याग माना गया। पेंशन निवनिनयमों का प्रासंनिगक उद्धरण निनम्नानुसार है: "22 सेवा की जब् ीः - (1)........... Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (2) बैंक कमBारी की सेवा में रुकावट उसकी निपछली सेवा को जब् कर ी है, सिसवाय निनम्नलिललिL मामलों क े, अर्थीा ्-"
12. आक्षेनिप आदेश यह मान ा है निक Bयन प्रनिZया में भाग लेने क े लिलए 'अनापलित्त प्रमाण पत्र' अपीलक ा द्वारा प्राप्त निकया गया र्थीा, लेनिकन यह थ्य निक वह अपने मूल निवभाग को रिरपोट निकए निबना पीठासीन अति कारी, )ीआरटी क े पद में शानिमल हो गया र्थीा, का घा क माना गया र्थीा। अपीलक ा क े आBरण को बैंक सेवा क े परिरत्याग क े रूप में माना गया र्थीा।
13. हमने पूव > थ्यात्मक स्थिस्र्थीति क े संदभ में अपीलक ा क े निवद्व अति व>ा और प्रति वादी संख्या 1 क े निवद्व अति व>ा द्वारा प्रस् ु कd का परीक्षण निकया है। हमारे निवBार में, प्रति वादी संख्या 1 बैंक क े आक्षेनिप J ै सले कानून में पूरी रह से अनुतिB और अपोर्षणीय हैं और यहाँ क की पेंशन निवनिनयमों क े अनुसार भी।
14. अपीलक ा समय-समय पर प्रति निनयुनि> पर र्थीा। पीठासीन अति कारी क े पद क े लिलए आवेदन करने से पहले, प्रति वादी संख्या 1 बैंक से एक 'अनापलित्त प्रमाणपत्र' प्राप्त निकया गया र्थीा। अपीलक ा की प्रति निनयुनि> की अवति को इस थ्य को ध्यान में रL े हुए बढ़ाया गया र्थीा निक उसने पहले ही पद क े लिलए आवेदन निकया र्थीा और उसका आवेदन निवBारा ीन र्थीा। यह निवस् ारिर अवति क े दौरान है निक अपीलक ा को निदनांक 20.1.2006 को निनयुनि> पत्र जारी निकया गया र्थीा। क े वल कहने क े लिलए, यह एक उच्च कनीकी दृनिष्टकोण है निक अपीलक ा को कु छ निदनों क े लिलए प्रति वादी संख्या 1 बैंक में शानिमल होना Bानिहए र्थीा, स्वयं को निनमु> कराना र्थीा और निJर पीठासीन अति कारी, )ीआरटी क े कायालय में शानिमल होना र्थीा। इस प्रकार, यह सेवा क े अनौतिBत्य या अवै ा क े निकसी भी मामले क े बजाय एक अहंकार का मुद्दा अति क प्र ी हो ा है। अपीलक ा ने प्रति वादी संख्या 1 बैंक को पीठासीन अति कारी क े नये पद को ारण करने क े लिलए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd अनुमति लेने क े लिलए निदनांक 25.1.2006 को एक पत्र लिलLकर एहति या बर ी, सिजस पद को उसे एक महीने की अवति क े भी र ारण करना र्थीा, जैसा निक पूव > में निदनांक 20.1.2006 को पत्र जारी करने की ति शिर्थी पर कहा गया र्थीा। इस पत्र की 11 महीने क कोई प्रति निZया नहीं निमली, प्रति वादी संख्या 1 बैंक की ओर से एक स्पष्ट शिशशिर्थील ा र्थीी। इस प्रकार, अपीलक ा पीठासीन अति कारी क े पद पर शानिमल हो गया। इस संबं में अपीलक ा क े आBरण पर कोई गल ी नहीं )ाली जा सक ी है।
15. अब, पेंशन निवनिनयमों क े Lं) 22(2) क े आ ार पर अपीलक ा की र्थीाकशिर्थी कनीकी की ओर देL े हुए, इसे उसकी निपछली सेवा को जब् करने क े लिलए बैंक कमBारी की सेवा में निकसी भी रह की रुकावट की आवश्यक ा हो ी है। हमारे निवBार में, बैंक कमBारी की सेवा में कोई रुकावट नहीं र्थीी जो इस रह की ज़ब् ी करे। अपीलक ा ब प्रति निनयुनि> पर र्थीा जब उसे निनयु> निकया गया और नया पद ारण निकया। यह थ्य निक उन्होंने क ु छ निदनों क े लिलए बैंक को वापस रिरपोट नहीं निकया, स्वयं को मु> करा लिलया और निJर इस पद में शानिमल होने को निकसी भी प्रकार से 'सेवा में रुकावट' क े रूप में वग2क ृ नहीं निकया जा सक ा है। जैसा निक ऊपर देLा गया है, अपीलक ा ने पहले ही निदनांक 25.1.2006 को प्रति वादी संख्या 1 बैंक को एक संBार संबोति निकया र्थीा सिजसकी 11 महीने क कोई प्रति निZया नहीं निमली। हम यह भी जोड़ सक े हैं निक निवत्त मंत्रालय, प्रति वादी संख्या 1 बैंक का मूल मंत्रालय निटप्पणी कर े हुए लाभ का निवस् ार नहीं करने की अनुपयु> ा को बैंक क े ध्यान में लाया गया र्थीा, जैसा निक पूव > है। यह नोट निकया गया है निक निदनांक 20.1.2006 को निनयुनि> पत्र जारी करने और निदनांक 9.2.2006 को अति सूBना क े बाद बैंक से कोई संBार नहीं हुआ, जब क निक बैंक द्वारा 6 महीने से अति क क े बाद निदनांक 17.7.2006 को पहली बार मंत्रालय क े समक्ष मामला नहीं उठाया गया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd
16. यह दुभाग्यपूण है निक बैंक द्वारा निकसी क े अनुतिB अहंकार क े लिलए इस रह का स्टैं) लेने की मांग की गई र्थीी, सिजससे अपीलक ा को भारी पीड़ा हुई। इस प्रकार, हमारा यह दृनिष्टकोंण हैं निक रिरट यातिBका सं. 947(एसबी)/2010 में आक्षेनिप आदेश और प्रति वादी संख्या 1 बैंक द्वारा जारी निकए गए आदेश अपोर्षणीय हैं और दनुसार, रद्द निकए जा े हैं। अपीलार्थी2 द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट यातिBका अनुमति देने योग्य है और ति)वीजन बेंB क े आक्षेनिप आदेश को अपास् निकया जा ा है। अपील को अनुमति दी जा ी है।
17. हम प्रति वादी संख्या 1 बैंक पर निनय लाग 25,000 रुपये लगाना भी उपयु> मान े हैं, सिजसक े दृनिष्टग हमने पूव > BBा की है। अपीलक ा को बकाया राशिश ब्याज क े सार्थी, मानदं)ों क े अनुसार, और लगाई गई लाग को आज से 2 महीने की अति क म अवति क े भी र प्रत्यर्थी2 संख्या 1 द्वारा अपीलक ा को निदया जाए।.......................................... [न्यायमूर्ति एस.ए.बोब)े]......................................... [न्यायमूर्ति संजय निकशन कौल]....................................... [न्यायमूर्ति इंनिदरा बनज2] नई निद_ी। 30 अप्रैल 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd