Kailash Chand Sharma v. Rajasthan State

Supreme Court of India · 30 Apr 2019 · 2019 INSC 588
L. Nageswara Rao; Sanjiv Khanna
Civil Appeal No 3873 of 2010
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the illegality of bonus marks based on domicile in Rajasthan recruitments, limiting retrospective challenges to those filed before 18 November 1999, and emphasized finality and binding precedent in related cases.

Full Text
Translation output
रि पोर्टेबल
भा त का सर्वो च्च न्यायालय
सिसविर्वोल अपीलीय क्षेत्राधि का
सिसविर्वोल अपील संख्या 3873/2010
ाजस्थान ाज्य .. अपीलाथ, (गण)
बनाम
नेमी चंद महेला औ अन्य ….. प्रधितर्वोादी (गण) क
े साथ
सिसविर्वोल अपील संख्या 4491/2019
(विर्वोशेष अनुमधित याधिचका (सिसविर्वोल) संख्या 4562/2012 से उत्पन्न)
विनणBय
संजीर्वो खन्ना, न्याया ीश
JUDGMENT

1. विर्वोशेष अनुमधित याधिचका (सिसविर्वोल) संख्या 4562/2012 में अनुमधित प्रदान की गयी।

2. जैसा विक क ै लाश चंद शमाB बनाम ाजस्थान ाज्य औ अन्य[1] में विनदशिशत है भविर्वोष्यलक्षी विर्वोविनणBय क े सिसद्धांत की सत्य औ सही व्याख्या प उच्च न्यायालय क े विर्वोशिभन्न विनणBयों में प स्प विर्वो ो ी विर्वोचा ों क े परि णामस्र्वोरूप 1999 से उम्मीदर्वोा ों की इस पीड़ादायक औ तीखे मुकदमेबाजी का का ण विर्वोकर्टे परि स्थिस्थधित है। चार्ल्ससB 1(2002) 6 एससीसी 562 2019 INSC 588 धिUक ें स क े शब्दों में मुकदमेबाजी का यह "विबजूका", समय क े साथ इतना जविर्टेल हो गया है विक कोई जीविर्वोत व्यविZ नहीं जानता विक इसका क्या अथB है।"

3. र्वोषB 1998-99 क े दौ ान ाजस्थान ाज्य क े विर्वोशिभन्न सिजलों की सिजला परि षदों में प्राथविमक विर्वोद्यालय शिशक्षक क े पद प विनयुविZ की मांग क ने र्वोाले उम्मीदर्वोा ों को बोनस अंक देने क े विनणBय को ाजस्थान उच्च न्यायालय की पूणB न्यायपीठ ने 18 नर्वोंब, 1999 को क ै लाश चंद शमाB बनाम ाजस्थान ाज्य, रि र्टे याधिचका (सिसविर्वोल) संख्या 3928/1998 में असंर्वोै ाविनक घोविषत क विदया था, इस का ण से विक विकसी ाज्य सेर्वोा में सार्वोBजविनक ोजगा में जन्म स्थान, विनर्वोास या शह ी या ग्रामीण क्षेत्र का विनर्वोासी होने क े आ ा प विकसी भी प्रका का भा ांक औ लाभ अनुज्ञेय नहीं है। क ै लाश चंद शमाB क े मामले (पूर्वो Z) में पूणB पीठ ने दीपक क ु मा सुथा औ अन्य बनाम ाजस्थान ाज्य औ अन्य[2] में पहले पूणB पीठ क े फ ै सले का पालन विकया था सिजसमें ाज्य संर्वोगB में ग्रेU II औ ग्रेU III शिशक्षकों क े चयन में बोनस अंक देने क े लिलए इसी त ह की शतh को असंर्वोै ाविनक क ा विदया गया था। तथाविप, दीपक क ु मा सुथा (पूर्वो Z) क े मामले में, रि र्टे याधिचकाकताBओं को कोई पारि णाविमक औ ठोस ाहत नहीं दी गई थी क्योंविक पहले, उनक े पास योग्यता क े आ ा प चयन का मौका नहीं था, भले ही सफल उम्मीदर्वोा ों को बोनस अंक विदए जाने की अर्वोहेलना की गई थी औ दूस ा, इस प्रका चयविनत उम्मीदर्वोा ों को पक्षका क े रूप में शाविमल नहीं विकया गया था। तदनुसा, दीपक क ु मा सुथा (पूर्वो Z) र्वोाले मामले में पूणB न्यायपीठ ने अंधितम अनुच्छेद में विनम्नलिललिखत विनदश विदए थेः "44. मामले को उधिचत पीठ को भेजने क े बजाय, हम इस विनदश क े साथ इस याधिचका का विनपर्टेा ा क ना उधिचत 2(1999) 2 ाजस्थान विर्वोधि रि पोर्टेB 692 समझते हैं विक याधिचकाकताBओं को कोई ाहत नहीं दी जा सकती क्योंविक र्वोे शह ी क्षेत्र क े विनर्वोासी होने क े नाते 10 बोनस अंक प्राप्त क क े भी मेरि र्टे सूची में स्थान पाने में सफल नहीं हो सकते, सिजसक े र्वोे विनधिqत रूप से हकदा नहीं हैं। इसक े अलार्वोा, याधिचकाकताBओं ने चयविनत सूची में से विकसी भी व्यविZ को पक्षका नही बनाया है, यहां तक विक अंधितम चयविनत उम्मीदर्वोा को भी नहीं। इस प्रका, उन्हें इस तथ्य क े बार्वोजूद कोई ाहत नहीं दी जा सकती है विक आक्षेविपत परि पत्र क े अनुरूप की गई विनयुविZयां कानून क े अनुरूप नहीं हैं। हालाँविक, हम स्पष्ट क ते हैं विक पहले की गई कोई भी विनयुविZ इस विनणBय से प्रभाविर्वोत नहीं होगी औ यह भविर्वोष्यलक्षी रूप से लागू होगी।"

4. दीपक क ु मा सुथा क े मामले (पूर्वो Z) क े इन विनदशों का क े मामले (पूर्वो Z) में पूणB पीठ द्वा ा पालन विकया गया औ रि र्टे याधिचकाओं क े बैच का विनस्ता ण विकया गया।

5. क े मामले (पूर्वो Z) में पूणB पीठ क े फ ै सले क े बाद, नर्वोल विकशो द्वा ा सविहत बड़ी संख्या में रि र्टे याधिचकाएं ाजस्थान उच्च न्यायालय क े समक्ष दाय की गई ं । उनमें से क ु छ, क े मामले (पूर्वो Z) में पूणB न्यायपीठ द्वा ा विदए गए प्रर्वोतनBशील विनदशों क े बार्वोजूद, का विनस्ता ण अधि कारि यों को यह विनदश देक विकया गया था विक र्वोे 21 अक्र्टेूब, 1999 को या उसक े बाद विबना बोनस अंकों क े विनयुZ विकए गए उम्मीदर्वोा ों की नई योग्यता सूची बनाक तैया क ें। सुविर्वो ा क े लिलए हम इन मामलों को नर्वोल विकशो क े मामले क े रूप में विनर्दिदष्ट क ेंगे। नर्वोल विकशो का मामला (पूर्वो Z) 30 जुलाई, 2002 को तय विकया गया था।

6. क े मामले (पूर्वो Z) में पूणB न्यायपीठ का विनणBय औ विबना बोनस अंकों क े नई योग्यता सूची तैया क ने क े विनदश देने र्वोाले क ु छ विनणBय (लेविकन उन सभी मामलों में नहीं जहां ऐसे विनदश जा ी विकए गए थे) विर्वोशेष अनुमधित याधिचकाओं में चुनौती का विर्वोषय बन गए, सिजन्हें हमा े द्वा ा उपयुBZ अनुच्छेद 2 में विनर्दिदष्ट क े रूप में रि पोर्टेB विकए गए विनणBय में स्र्वोीका विकया गया औ विनणBय विदया गया। ाजस्थान उच्च न्यायालय की पूणB पीठ क े विनष्कषh की पुविष्ट क ते हुए, इस न्यायालय ने विनष्कषB विनकाला विक सिजलों क े विनर्वोासिसयों औ ग्रामीण क्षेत्रों क े विनर्वोासिसयों को बोनस अंक देना अस्र्वोीकायB भेदभार्वो है क्योंविक इस त ह क े अधि मानी बताBर्वो क े लिलए कोई तक B संगत आ ा नहीं था। तत्पqात इस न्यायालय ने, अनुच्छेद 36 से, दीपक क ु मा सुथा क े मामले (पूर्वो Z) में प्रर्वोतनBशील विनदशों को ध्यान में खते हुए क े मामले (पूर्वो Z) में विर्वोस्तृत औ स्पष्ट रूप से ाहत क े सर्वोाल प विर्वोचा विकया था। तथ्यात्मक मैविर्टेzक्स औ दजB विकए गए कई का णों को ध्यान में खते हुए, इस न्यायालय ने महसूस विकया विक प्रधितस्प, दार्वोों को संतुलिलत क ने की आर्वोश्यकता थी औ तदनुसा इस फ ै सले क े अनुच्छेद 45 औ 46 क े तहत भविर्वोष्यलक्षी विर्वोविनणBय क े सिसद्धांत को आंशिशक रूप से लागू विकया गया था, जो विनम्नानुसा पढ़ा जाता है: "45. एक औ बिंबदु सिजसका उल्लेख विकया जाना आर्वोश्यक है। क ु छ विर्वोद्वान अधि र्वोZाओं ने तक B विदया विक चयन में भाग लेने औ परि णाम की प्रतीक्षा क ने क े बाद, असफल आर्वोेदक को चयन प्रवि€या को उस हद तक चुनौती देने की अनुमधित नहीं दी जानी चाविहए, जो उनक े विहत क े विर्वोरुद्ध है। यह तक B विदया गया है विक अनुच्छेद 226 क े तहत ऐसे व्यविZयों को र्वोैर्वोेविकक ाहत नहीं दी जानी चाविहए। इस तक B क े समथBन में मदन लाल बनाम ाज्य जम्मू-कश्मी (1995) 3 एससीसी 486 औ अन्य मामलों में इस न्यायालय क े विनणBय प भ ोसा विकया गया है। दूस ी ओ, यह तक B विदया गया है विक असंर्वोै ाविनक भेदभार्वो को चुनौती देने क े मामले में उपमधित, विर्वोबं औ इसी त ह क े अन्य सिसद्धांत लागू नहीं होते हैं औ रि र्टे याधिचकाकताBओं से यह उम्मीद नहीं की जा सकती है विक र्वोे चयन से पहले आक्षेविपत परि पत्र क े संर्वोै ाविनक विनविहताथh को अच्छी त ह से जान लें। हम इस प्रश्न में जाने क े इच्छ ु क नहीं हैं क्योंविक इस त ह की याधिचका नहीं उठाई गई थी औ न ही उच्च न्यायालय क े समक्ष कोई तक B पेश विकया गया था।

46. उपयुBZ प्रधितद्वंद्वी दलीलों को ध्यान में खते हुए औ तथ्यात्मक परि दृश्य को ध्यान में खते हुए औ सैद्धांधितक रूप से भविर्वोष्यलक्षी विर्वोविनणBय की स्र्वोीक ृ धित क े आलोक में प्रधितस्प, दार्वोों को संतुलिलत क ने की आर्वोश्यकता को ध्यान में खते हुए, हम ाहत को क े र्वोल उन याधिचयों तक सीविमत क ना सही औ उधिचत मानते हैं सिजन्होंने उच्च न्यायालय का द र्वोाजा खर्टेखर्टेाया औ याधिचकाकताBओं क े दार्वोों क े अ ीन विकसी भी सिजले में 18-11-1999 को या उसक े बाद विनयुविZयां क ने क े लिलए। तदनुसा, हम विनदश देते है: "1. 18-11-1999 को या उसक े बाद विनयुZ विकए गए उम्मीदर्वोा ों या चयन सूची में शाविमल सिजन्हें अभी विनयुZ विकया जाना है क े मुक़ाबले में रि र्टे याधिचकाकताBओं क े दार्वोों प इस विनणBय क े आलोक में नए सिस े से विर्वोचा विकया जाना चाविहए। ऐसे विर्वोचा क े आ ा प, यविद उन रि र्टे याधिचकाकताBओं क े पास 10 प्रधितशत बोनस अंक औ /या 5 प्रधितशत अंक अपर्वोर्जिजत होने की स्थिस्थधित में बेहत योग्यता पाई जाती है, तो उन्हें 18-11-1999 को या उसक े बाद विनयुZ विकए गए उम्मीदर्वोा ों को विर्वोस्थाविपत क क े, यविद आर्वोश्यक हो, विनयुविZयां की जानी चाविहए।

2. 17-11-1999 तक की गई विनयुविZयों को इस विनणBय में अधि कशिथत कानून क े आलोक में विफ से खोलने औ पुनर्दिर्वोचा क ने की आर्वोश्यकता नहीं है

3. अनुच्छेद 32 क े तहत इस न्यायालय में दाय रि र्टे याधिचका संख्या 542/2000 एतद्द्वा ा खारि ज की जाती है क्योंविक यह उच्च न्यायालय क े फ ै सले क े लगभग एक साल बाद दाय की गई थी औ पूर्वोB मे उच्च न्यायालय का द र्वोाजा नहीं खर्टेखर्टेाने क े लिलए, अनुच्छेद 226 क े तहत, कोई स्पष्टीक ण नहीं विदया गया है।"

7. इस प्रका, अनुपात क े बार्वोजूद, 18 नर्वोंब, 1999 से पहले की गई विनयुविZयों को ब क ा औ सु धिक्षत खा गया। सिजन रि र्टे याधिचकाकताBओं ने 18 नर्वोंब, 1999 से पहले उच्च न्यायालय का द र्वोाजा खर्टेखर्टेाया था, र्वोे 18 नर्वोंब, 1999 को या उसक े बाद विनयुZ विकए गए उम्मीदर्वोा ों क े मुक़ाबले मे या चयन सूची में उन लोगों क े साथ ऐसे विनयुZ/चयविनत उम्मीदर्वोा ों को बोनस अंकों का लाभ विदए विबना, सिजसे असंर्वोै ाविनक घोविषत विकया गया था नए सिस े से विर्वोचा विकए जाने क े हकदा थे। क े र्वोल ऐसे रि र्टे याधिचकाकताBओं को, यविद र्वोे 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद विनयुZ या चयविनत सूची मे शाविमल लोगों की तुलना में योग्यता क े €म में उच्च पाए जाते हैं, तो ऐसे विनयुZ उम्मीदर्वोा ों को हर्टेाक, यविद आर्वोश्यक हो, तो विनयुविZ की पेशकश की जानी थी। उच्चतम न्यायालय द्वा ा चुनी गई ता ीख 18 नर्वोंब, 1999 र्वोह ता ीख थी, सिजस विदन ाजस्थान उच्च न्यायालय की पूणB न्यायपीठ ने क ै लाश चंद शमाB क े मामले (पूर्वो Z) में अपना फ ै सला सुनाया था। जैसा विक ऊप देखा गया है, क े मामले (पूर्वो Z) में पूणB न्यायपीठ क े फ ै सले क े बाद, उच्च न्यायालय क े समक्ष कई रि र्टे याधिचकाएं दाय की गई थीं, सिजसमें बोनस अंकों क े विबना नई मेरि र्टे सूची तैया क ने, नई चयन सूची क े अनुसा विनयुविZ आविद क े विनदश जा ी विकए गए थे। ये विनदश, क े मामले (पूर्वो Z) में इस न्यायालय द्वा ा विदए गए अनुपात औ विनदशों क े विर्वोप ीत होने क े का ण महत्र्वोहीन हो गए। इस हद तक, नर्वोल विकशो मामले (पूर्वो Z) औ इसी त ह क े अन्य मामलों में विनणBय को खारि ज/ विर्वोर्वोधिक्षत रूप से खारि ज क विदया गया।

8. क े मामले (पूर्वो Z) में उपयुBZ कथन औ विनदशों क े बार्वोजूद, यह स्पष्ट है विक कई मामलों में, नर्वोल विकशो क े समान 17 नर्वोंब, 1999 क े बाद उच्च न्यायालय क े अधि का क्षेत्र में आने र्वोाले उम्मीदर्वोा ों क े पक्ष में बोनस अंकों को छोड़क अंकों की पुनगBणना क े लिलए विनदश जा ी विकए गए थे। यहां तक विक अर्वोमानना की याधिचकाएं दाय की गई ं औ इस तथ्य क े बार्वोजूद विनदश जा ी विकए गए विक उZ रि र्टे याधिचकाकताBओं/याधिचकाकताBओं ने 17 नर्वोंब, 1999 को या उससे पहले रि र्टे याधिचकाएं दाय नहीं की थीं, यानी सिजस ता ीख को क े मामले (पूर्वो Z) का विनणBय पूणB न्यायपीठ द्वा ा लिलया गया था। क ु छ विनणBयों में, यह अशिभविन ाBरि त विकया गया था विक इस न्यायालय ने क ै लाश चंद शमाB क े मामले में (पूर्वो Z) ऐसे सभी उम्मीदर्वोा ों को ाहत देने से इनका नहीं विकया था सिजन्होंने 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद विकसी भी समय रि र्टे याधिचका दाय की हो।

9. इस न्यायालय द्वा ा मनमोहन शमाB बनाम ाजस्थान ाज्य औ अन्य[3] औ अन्य संबंधि त मामलों में अपने फ ै सले में विर्वोर्वोाद को संदेह से प े खा गया था। मनमोहन शमाB क े मामले (पूर्वो Z) में तथ्यात्मक मैविर्टेzक्स औ तकh से व्यापक रूप से विनपर्टेने क े बाद, यह विनम्नानुसा अशिभविन ाBरि त विकया गया था: "16. उपयुBZ को सार्वो ानीपूर्वोBक पढ़ने से इस बात में कोई संदेह नहीं ह जाता है विक (क) इस न्यायालय ने े सिसद्धांत का आह्वान विकया, सिजसका तात्पयB है विक इस न्यायालय द्वा ा घोविषत विर्वोधि क े र्वोल भार्वोी चयनों औ विनयुविZयों प लागू होगी, (ख) यद्यविप भविर्वोष्यलक्षी विर्वोविनणBय ने 18 नर्वोम्ब, 1999 से पूर्वोB की गई विनयुविZयों को अछ ू ता छोड़ विदया है, उच्च न्यायालय में आर्वोेदन क ने र्वोाले याधिचकाकताBओं को 18 नर्वोम्ब, 1999 को या उसक े बाद विनयुZ विकए गए उम्मीदर्वोा ों क े संबं में या जो चयविनत सूची मे हैं नए सिस े से विर्वोचा क ना होगा ऐसे विनयुZ/चयविनत उम्मीदर्वोा ों को परि पत्र क े तहत बोनस अंकों का लाभ विदए विबना, औ (ग) यविद र्वोे 18 नर्वोम्ब, 1999 क े बाद विनयुZ विकए गए उम्मीदर्वोा ों की तुलना में योग्यता में श्रेष्ठ पाए जाते हैं, तो उन्हें बाद में हर्टेाक, यविद आर्वोश्यक हो, विनयुविZयों की पेशकश की जाएगी।

17. अपीलकताBओं क े विर्वोद्वान र्वोकील द्वा ा यह दृढ़ता से तक B विदया गया था विक अनुच्छेद 46 (पूर्वो Z) में विदखाई देने र्वोाली अशिभव्यविZ "अपीलाथ, जो उच्च न्यायालय चले गए" पयाBप्त 3 दीर्वोानी अपील सं. 4294/ 2014, 01 अप्रैल, 2014 को तय व्यापक थी औ र्वोास्तर्वो में न क े र्वोल उन रि र्टे-याधिचकाकताBओं को शाविमल विकया गया था, सिजन्होंने क े मामले में इस न्यायालय द्वा ा तय विकए गए मामलों क े दो बैच में उच्च न्यायालय का द र्वोाजा खर्टेखर्टेाया था (पूर्वो Z) लेविकन ऐसे सभी उम्मीदर्वोा सिजन्होंने 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद विकसी भी समय रि र्टे याधिचका दाय की हो सकती है 30 जुलाई, 2002 क े बाद ऐसी याधिचका दाय क ने र्वोालों सविहत, जब इस अदालत ने क े मामले (पूर्वो Z) औ संबंधि त मामलों में अपील का फ ै सला विकया।

18. हमें उस तक B को प्रधितग्रहण क ना कविठन लगता है। क ै लाश चंद शमाB (पूर्वो Z) क े मामले में इस न्यायालय क े विनणBय में या उसक े अनुच्छेद 46 में जा ी विकए गए विनदशों में यह सुझार्वो देने क े लिलए क ु छ भी नहीं है विक यह न्यायालय 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद उच्च न्यायालय क े समक्ष दाय की गई विकसी रि र्टे याधिचका क े विर्वोचा ा ीनता होने क े बा े में या तो सचेत था या सूधिचत था। यह सुझार्वो देने क े लिलए क ु छ भी नहीं है विक इस न्यायालय ने अनुच्छेद 46 क े तहत विदए गए विनदश (1) क े तहत विदए गए लाभ का विर्वोस्ता न क े र्वोल उन ीर्टे- याधिचकाकताBओं को क ने का इ ादा विकया था सिजन्होंने क े मामले में (पुर्वो Z) उच्च न्यायालय का रुख विकया था औ नर्वोल विकशो औ अन्य द्वा ा दाय रि र्टे याधिचका में, बस्थिर्ल्सक उन सभी लोगों को लाभ पहुंचाने का इ ादा था सिजन्होंने विकसी भी समय उच्च न्यायालय का रुख विकया था या क चुक े है। इसक े विर्वोप ीत इस तथ्य का सका ात्मक संक े त है विक न्यायालय का विकसी भी अपीलकताB को लाभ देने का इ ादा नहीं था सिजसने 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद विकसी भी स्त प प्रदत्त बोनस अंक औ उसक े आ ा प चयन प्रवि€या को चुनौती दी थी। यह इस तथ्य से स्पष्ट है विक भा त क े संविर्वो ान क े अनुच्छेद 32 क े तहत इस न्यायालय में दाय रि र्टे याधिचका संख्या 542/2000 को इस न्यायालय द्वा ा अनुच्छेद 46 क े तहत विनदश (3) क े संदभB में इस आ ा प खारि ज क विदया गया था विक इसे उच्च े फ ै सले क े लगभग एक साल बाद दाय विकया गया। अशिभव्यविZ "जैसा विक यह उच्च न्यायालय क े फ ै सले क े बाद दाय विकया गया है" अनुच्छेद 46 क े तहत विनदश (3) में प्रदर्शिशत होने से स्पष्ट रूप से पता चलता है विक ाहत देने क े लिलए इस न्यायालय क े ध्यान मे क े र्वोल क े मामले (पूर्वो Z) में फ ै सले से पहले क े र्वोल याधिचका दाय की थी औ र्वोे नहीं जो 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद दाय की गयी थी, जब उZ विनणBय सुनाया गया था। इस न्यायालय की यह विर्टेप्पणी विक रि र्टे-याधिचकाकताBओं ने संविर्वो ान क े अनुच्छेद 226 क े तहत पूर्वोB में उच्च न्यायालय का द र्वोाजा न खर्टेखर्टेाने क े लिलए कोई स्पष्टीक ण नहीं विदया था, क े भी दो अलग- अलग पहलू हैं, अथाBत्, (1) रि र्टे याधिचका संख्या 542/2000 मे रि र्टे याधिचकाकताBओ को सामान्य रूप से उच्च न्यायालय का द र्वोाजा खर्टेखर्टेाना चाविहए था औ (2) उन्हें ऐसा पूर्वोB में क ना चाविहए था। इन का णों में से उत्त ाद्धB ने विफ से इस प जो विदया विक इस न्यायालय ने ाहत प्रदान क ने क े मामले में याधिचका दाय क ने में दे ी को महत्र्वो विदया है सिजन्होंने सही समय प चयन प्रवि€या को चुनौती नहीं दी, उन्हें कोई ाहत नहीं दी गई।"

10. मनमोहन शमाB क े मामले (पूर्वो Z) में न्यायपीठ ने पाया विक मामलों की दो श्रेशिणयां थीं; श्रेणी 1 में रि र्टे याधिचकाएं शाविमल हैं जो 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद औ 30 जुलाई, 2002 से पहले दाय की गई थीं औ श्रेणी II में रि र्टे याधिचकाएं शाविमल हैं, जो 30 जुलाई, 2002 क े बाद दाय की गई थीं। ता ीख 30 जुलाई, 2002 नर्वोल विकशो क े मामले (पूर्वो Z) में ाजस्थान उच्च न्यायालय क े विनणBय की ता ीख है। दो श्रेशिणयों की ओ से उठाए गए तकh को अस्र्वोीका क ते हुए, पीठ ने कहा विक क े मामले (पूर्वो Z) में इस न्यायालय ने भविर्वोष्यलक्षी विर्वोविनणBय क े सिसद्धांत का आह्वान क क े प्रधितस्प, दार्वोों को संतुलिलत क ने की आर्वोश्यकता को स्र्वोीका विकया था, सिजससे 17 नर्वोंब, 1999 को या उससे पहले की गई विनयुविZयों को सु धिक्षत विकया जा सक े औ क े र्वोल उन रि र्टे याधिचकाकताBओं को ाहत दी जा सक े सिजन्होंने 18 नर्वोंब, 1999 से पहले उच्च न्यायालय का द र्वोाजा खर्टेखर्टेाया था। इसक े अलार्वोा, क े मामले (पूर्वो Z) में विदए गए विनदश संविर्वो ान क े अनुच्छेद 141 क े तहत एक बाध्यका ी नज़ी थे। समानता क े सिसद्धांत प लाभ प्रदान क ने क े तक B क े संबं में, अथाBत समान लाभ, जैसा विक क े मामले (पूर्वो Z) में विनणBय क े बार्वोजूद क ु छ उम्मीदर्वोा ों को बोनस अंकों क े बविहष्क ण क े बाद योग्यता सूची को विफ से तैया क ने प विनयुZ विकया गया था, पीठ ने क े मामले (पूर्वो Z) में इस न्यायालय क े आदेश औ बाध्यका ी विनदशों क े विर्वोप ीत होने क े का ण विनर्वोेदन को व्यापक औ स्पष्ट रूप से खारि ज क विदया। मनमोहन शमाB क े मामले (पूर्वो Z) में, पीठ ने पाया विक क े मामले (पूर्वो Z) में जा ी विकए गए विनदशों का दाय ा दूस ों क े लिलए बढ़ाने की कोई आर्वोश्यकता नहीं थी औ न्यायालय समीक्षा याधिचका प सुनर्वोाई नहीं क हा था औ न ही न्यायालय क े मामले (पूर्वो Z) में इस न्यायालय द्वा ा पारि त आदेश को संशोधि त क सकता था। क ै र्टेेग ी II क े क ु छ याधिचकाकताBओं की दलील, सिजन्हें 18 नर्वोंब, 1999 क े बाद योग्यता क े आ ा प परि णाम की पुनगBणना प विनयुZ विकया गया था, क े मामले (पूर्वो Z) में इस े फ ै सले क े आलोक में अर्वोै औ अस्र्वोीकायB क े रूप में खारि ज क विदया गया था। समानता औ इसी त ह क े व्यर्वोहा क े अशिभर्वोचन औ प्रधितविर्वो ो को यह देखते हुए भी खारि ज क विदया गया विक गलत विनयुविZयों को तेजी से चुनौती दी जानी चाविहए औ दे से नहीं, औ ऐसी विनयुविZयों से कोई अधि का नहीं विमलेगा। इसक े अलार्वोा, यह मनमोहन शमाB क े मामले (पूर्वो Z) में दजB विकया गया था विक ाज्य ने बा में विकए गए तथ्यात्मक प्रस्तुधितयों का संतोषजनक ढंग से खंUन क ते हुए एक हलफनामा दाय विकया था।

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11. याधिचकाकताBओं क े विर्वोद्वान अधि र्वोZा ने मनमोहन शमाB क विनणBय क े अनुच्छेद 24 की ओ हमा ा ध्यान आकर्दिषत विकया था, जो एक दानर्वोी सिंसह क े मामले को संदर्शिभत क ता है, सिजसकी रि र्टे याधिचका की अनुमधित दी गई थी औ आदेश को अंधितम रूप विदया गया था क्योंविक इसे खण्U पीठ या उच्चतम े समक्ष चुनौती नहीं दी गई थी। तदनुसा, यह अशिभविन ाBरि त विकया गया था विक दानर्वोी सिंसह क े मामले में सेर्वोाओं का समापन उधिचत नहीं था औ कानून क े अनुसा था। दानर्वोी सिंसह क े मामले से संबंधि त मनमोहन शमाB क अनुच्छेद 24 औ 25 में विदए गए तक B पूर्वोB न्याय क े सिसद्धांत औ विमसाल क े कानून क े बीच क े अंत को दशाBएंगे। पूर्वोB न्याय का सिसद्धांत व्यविZगत रूप से संचालिलत होता है यानी समान पक्षों क े बीच का प्रश्नगत मामला पूर्वोB मुकदमेबाजी में, जबविक विमसाल का कानून ेम में संचालिलत होता है यानी एक बा तय विकया गया कानून उच्च न्यायालय औ सर्वो च्च न्यायालय क े अधि का क्षेत्र क े तहत सभी क े लिलए बाध्यका ी होता है। पूर्वोB न्याय का सिसद्धांत पक्षका ों को कायBर्वोाविहयों क े लिलए इस का ण बाध्य क ता है विक मुकदमेबाजी का अंत होना चाविहए औ इसलिलए, आगे की कायBर्वोाही मुकदमेबाजी क े पक्षका ों क े बीच र्वोर्जिजत है। इसलिलए, पूर्वोB न्याय का कानून इसी मामले से संबंधि त है, जबविक विमसाल का कानून इसी त ह क े मुद्दे प कानून क े लागू होने से संबंधि त है। पूर्वोB न्याय क े कानून में, विनणBय की शुद्धता सामान्य रूप से महत्र्वोहीन होती है औ इससे कोई फक B नहीं पड़ता विक विपछला विनणBय सही था या गलत, जब तक विक गलत अर्वो ा ण उस विनकाय क े अधि कारि ता संबं ी मामले से संबंधि त न हो। (मखीजा क ं स्र्टेzक्शन एंU इंजीविनयरिं ग प्राइर्वोेर्टे लिलविमर्टेेU बनाम इंदौ विर्वोकास प्राधि क ण औ अन्य देखें4 )। अपीलार्शिथयों क े विर्वोद्वान अधि र्वोZा ने ाजस्थान उच्च े कई विनणBयों की ओ हमा ा ध्यान आकर्दिषत विकया था सिजसमें उन रि र्टे याधिचकाकताBओं को ाहत प्रदान की गई है सिजन्होंने इस न्यायालय द्वा ा क ै लाश चंद शमाB क े मामले (पूर्वो Z) मे विन ाBरि त कर्टे-ऑफ धितशिथ,18 नर्वोंब, 1999, से पहले रि र्टे याधिचका दाय नहीं की थी। इनमें से क ु छ विनणBय 1 अप्रैल, 2014 को मनमोहन शमाB क े विनणBय क े बाद विकए गए थे। इसे र्टेाला जाना चाविहए था क्योंविक उच्चतम न्यायालय औ उच्च न्यायालय क े आधि कारि क विनणBयों का सम्मान विकया जाना चाविहए था औ उनका पालन विकया जाना चाविहए था क्योंविक इससे विकसी भी प्रका का विर्वोचलन अविनधिqतता, अनार्वोश्यक औ सट्टा मुकदमेबाजी का का ण बनेगा जैसा विक द्वारि क े श शुग इंUस्र्टेzीज लिलविमर्टेेU बनाम प्रेम हैर्वोी इंजीविनयरिं ग र्वोक्सB (पी) लिलविमर्टेेU[5] औ विबहा ाज्य स का माध्यविमक विर्वोद्यालय शिशक्षक संघ औ अन्य बनाम विबहा शिशक्षा सेर्वोा संघ औ अन्य[6] र्वोाले मामले में कठो शब्दों में अशिभविन ाBरि त विकया गया है। इसक े परि णामस्र्वोरूप, हम पाते हैं विक अभ्यर्शिथयों द्वा ा बड़ी संख्या में अशिभयोजन आर्वोेदन दाय विकए गए हैं जो उत्सुकता से इंतजा क हे हैं औ उम्मीद क हे हैं पु ोबंधि त औ आच्छाविदत मुकदमेबाजी में अनुक ू ल परि णाम 4 (2005) 6 एससीसी 304 5 (1997) 6 एससीसी 450 6 (2012) 13 एससीसी 33 की उम्मीद क हे हैं। र्वोे सफल नहीं हो सकते औ इन आर्वोेदनों को खारि ज क विदया जाता है। हमें सूधिचत विकया गया विक बड़ी संख्या में पद रि Z हैं औ इसलिलए, यह तक B विदया गया है विक लाभ बढ़ाया जाना चाविहए। हम सहमत नहीं हैं औ उZ विर्वोर्वोाद को स्र्वोीका नहीं क ना चाविहए क्योंविक यह गलत होगा औ स्पष्ट रूप से क ै लाश चंद शमाB औ मनमोहन शमाB क े मामलों (पूर्वो Z) क े अनुपात क े विर्वोप ीत होगा।

12. हमा ा ध्यान नी ज सक्सेना क े मामले की ओ भी खींचा गया, सिजसक े मामले में एकल न्याया ीश क े आदेश क े लिखलाफ ाज्य स का द्वा ा दाय रि र्टे अपील को दे ी औ विनस्थिष्€यता क े आ ा प खारि ज क विदया गया था। खण्U पीठ क े विनणBय क े लिखलाफ विर्वोशेष अनुमधित याधिचका को भी विर्वोलंब क े आ ा प खारि ज क विदया गया। नी ज सक्सेना मामले में खंUपीठ का यह फ ै सला औ दे ी क े आ ा प विर्वोशेष अनुमधित याधिचका को खारि ज क ने से विमसाल क े तौ प कोई अनुपात तय नहीं होता है। अधि क से अधि क, नी ज सक्सेना क े मामले में एकल न्याया ीश का विनणBय जैसा विक दानर्वोी सिंसह क े मामले में है, उन विर्वोशिशष्ट उम्मीदर्वोा ों प लागू होगा सिजनक े मामले में विनणBय पूर्वोB न्याय का सिसद्धांत क े रूप में कायB क ेगा। हालांविक, यह े सिसद्धांत का सहा ा लेने र्वोाले अनुपात औ विनदश को अथBहीन औ अक ृ त क ने का आ ा नहीं होगा, क े मामले (पूर्वो Z) में लागू, सिजसकी बाद में मनमोहन सिंसह क े मामले (पूर्वो Z) में इस न्यायालय द्वा ा पुविष्ट औ व्याख्या की गई थी।

13. पूर्वो Z चचाB क े मद्देनज, हम अशिभविन ाBरि त क ते हैं विक सिजन उम्मीदर्वोा ों ने 17 नर्वोंब, 1999 को या उससे पहले रि र्टे याधिचका दाय नहीं की थी, र्वोे चयविनत उम्मीदर्वोा ों क े अंकों से बोनस अंकों को अपर्वोर्जिजत क क े अंकों की पुनगBणना क ने प विनयुविZ क े हकदा नहीं होंगे। पूर्वो Z विनदश उन व्यविZगत मामलों प लागू नहीं होगा जहां पूर्वोB न्याय का सिसद्धांत लागू होगा, यानी जहां एकल न्याया ीश या खंUपीठ का विनणBय अंधितम हो गया है क्योंविक इसे खंUपीठ या इस न्यायालय क े समक्ष चुनौती नहीं दी गई थी। उच्च न्यायालय क े समक्ष अन्य सभी लंविबत रि र्टे याधिचकाएं औ अपीलें क ै लाश चंद्र शमाB, मनमोहन शमाB क े मामलों (पूर्वो Z) औ र्वोतBमान मामले में विनणBयों क े आ ा प विनपर्टेाई औ तय की जाएंगी, दे ी प माफी क े अ ीन, जब न्यायोधिचत ठह ाया औ संतोषजनक ढंग से समझाया गया।

14. उप ोZ शतh में अपील औ सभी लंविबत आर्वोेदनों का विनस्ता ण विकया जाता है। न्याया ीश (एल. नागेश्व ार्वो) न्याया ीश (संजीर्वो खन्ना) नई विदल्ली; 30 अप्रैल, 2019 (यह अनुर्वोाद आर्दिर्टेविफशिशयल इंर्टेेलिलजेंस र्टेूल 'सुर्वोास' क े जरि ए अनुर्वोादक की सहायता से विकया गया है।) अस्र्वोीक ण: यह विनणBय र्वोादी क े प्रधितबंधि त उपयोग क े लिलए उसकी भाषा में समझाने क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाविदत विकया गया है औ विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारि क औ आधि कारि क उद्देश्यों क े लिलए, विनणBय का अंग्रेजी संस्क ण प्रामाशिणक होगा औ विनष्पादन औ कायाBन्र्वोयन क े उद्देश्य से अंग्रेजी संस्क ण ही मान्य होगा।