Full Text
सिसविर्वोल अपीलीय अधि कारिरता
सिसविर्वोल अपील संख्या 3086/2016
राजस्थान राज्य और अन्य अपीलकता%
बनाम
मुक
े श शमा% प्रधितर्वोादी
क
े साथ
सिसविर्वोल अपील संख्या 3092/2016
बनाम
गुरबख्श सिंसह उर्फ़
% बक्षी सिंसह प्रधितर्वोादी
सिसविर्वोल अपील संख्या 3087/2016
बनाम
बीरबल राम प्रधितर्वोादी
सिसविर्वोल अपील संख्या 3088/2016
रतन लाल प्रधितर्वोादी
सिसविर्वोल अपील संख्या 3089/2016
बनाम
राम गोपाल प्रधितर्वोादी
सिसविर्वोल अपील संख्या 3091/2016
राजस्थान राज्य और एक अन्य अपीलकता%
बनाम
बीरबल महारिरया प्रधितर्वोादी
सिसविर्वोल अपील संख्या 3090/2016
बनाम
तेज सिंसह उर्फ़
% संर्वोत सिंसह प्रधितर्वोादी
सिसविर्वोल अपील संख्या 3093/2016
बनाम
राम अर्वोतार खवि8क और अन्य प्रधितर्वोादी
बनाम
राम रतन और अन्य प्रधितर्वोादी
सिसविर्वोल अपील संख्या 3095/2016
राजस्थान राज्य अपीलकता%
बनाम
अजु%न प्रधितर्वोादी
विनर्ण%य
न्याया ीश, नर्वोीन सिसन्हा
अपीलों क
े इस बैच में विर्वोचार क
े लिलए कानून का एक सामान्य सर्वोाल उठता है
इसलिलए व्यविFगत तथ्य विनर्ण%य क
े लिलए प्रासंविगक नहीं हैं। यह देखना पया%प्त है विक
अलग-अलग असम्बद्ध घ8नाओं से उत्पन्न विर्वोभिभन्न सत्र परीक्षर्णों में संबंधि त अपीलों
में प्रत्येक प्रधितर्वोादी को भारतीय दंड संविहता की ारा 302 और अन्य प्रार्वो ानों क
े
तहत दोषी ठहराया गया था और आजीर्वोन कारार्वोास की सजा सुनाई गई थी। उन्होंने
यह कहते हुए व्यविFगत रिर8 याधिचकाएं दायर कीं विक उन्होंने 14 साल से अधि क
समय तक विहरासत में सेर्वोा की है, लेविकन जेल अधि कारिरयों द्वारा उनकी सजा को
कम करने और समय से पहले रिरहाई क
े लिलए राज्य सलाहकार बोड\ क
े समक्ष उनक
े
मामले नहीं रखे गए।राजस्थान कारागार (सजा कम करना) विनयमार्वोली, 2006 क
े
विनयम 8(2)(i) की संर्वोै ाविनक र्वोै ता को चुनौती दी गई थी, सिजसमें उनक
े मामलों
े लिलए रोक लगा दी गई थी, जब तक विक उन्होंने माफी
को छोड़कर र्वोास्तविर्वोक कारार्वोास क
े 14 साल पूरे करने क
े बाद कम से कम चार
साल की माफी अर्जिजत नहीं कर ली थी, क्योंविक यह दंड प्रविfया संविहता की ारा
433-ए क
े विर्वोपरीत था। विकसी अन्य मुद्दे का आग्रह नहीं विकया गया था।
JUDGMENT
2. जेल अधि विनयम, 1894 की ारा 59 (1) की ारा (2) और (5) क े तहत शविFयों का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार द्वारा विनयम, 2006 बनाए गए थे (इसक े बाद अधि विनयम क े रूप में संदर्भिभत)। उच्च न्यायालय ने माना विक अधि विनयम की ारा 59 (2) क े अनुसार राज्य क े विर्वो ानमंडल क े समक्ष विनयम नहीं रखे जाने से र्वोै ाविनक बल प्राप्त नहीं हुआ। इसक े अधितरिरF, मारू राम बनाम भारत संघ, 1981 (1) एस. सी. सी. 107 र्वोाले मामले में संविर्वो ान पीठ क े विर्वोविनश्चय पर भरोसा करते हुए दंड प्रविfया संविहता, 1973 की ारा 433-क क े विर्वोपरीत विनयम नहीं बनाए जा सकते थे।
3. विर्वोविहत विर्वोधि क े इस प्रश्न को ध्यान में रखते हुए, विर्वोचार क े लिलए उत्पन्न होने र्वोाले र्वोै ाविनक प्रार्वो ानों को विन ा%रिरत करना उधिचत होगा- " ारा59. विनयम बनाने की शविF- (1) राज्य सरकार सरकारी राजपत्र में अधि सूचना द्वारा इस अधि विनयम क े अनुरूप विनयम बना सक े गी- X X X (2) कारागार अपरा ों क े र्वोगqकरर्ण को गंभीर और छो8े अपरा ों क े रूप में विन ा%रिरत करना; (5) आचरर्ण अंक देने और सजा को कम करने क े लिलए; X X X (2) इस खंड क े अ ीन बनाया गया प्रत्येक विनयम, बनाए जाने क े पश्चात् यथाशीघ्र, राज्य विर्वो ानमंडल क े समक्ष रखा जाएगा। "विनयम 8 (2) उपविनयम (i) में विकसी बात क े होते हुए भी (i) एक क ै दी सिजसे विकसी भी अपरा क े लिलए आजीर्वोन कारार्वोास की सजा सुनाई गई है, सिजसक े लिलए मौत की सजा कानून द्वारा दी गई सजा में से एक है या सिजसे मौत की सजा दी गई है, किंकतु दंड प्रविfया संविहता, 1973 की ारा 433 क े अ ीन इस दंडादेश को आजीर्वोन कारार्वोास में लघुक ृ त कर विदया गया है, उस पर क े र्वोल तब विर्वोचार विकया जाएगा जब उसने माफी को छोड़कर किंकतु जांच, अन्र्वोेषर्ण या विर्वोचारर्ण क े दौरान विबताई गई विनरो की अर्वोधि सविहत, र्वोास्तविर्वोक कारार्वोास की 14 र्वोष% की अर्वोधि पूरी कर ली है, इस शत% पर विक ऐसे क ै दी को भी विर्वोचाराथ% पात्र होने क े लिलए कम से कम 4 र्वोष% की माफी प्राप्त करनी होगी। ारा 433- क. क ु छ मामलों में माफी और लघुकरर्ण की शविFयों पर प्रधितबं - ारा 432 में विकसी बात क े होते हुए भी, जहां विकसी अपरा क े लिलए विकसी व्यविF की दोषसिसधिद्ध पर आजीर्वोन कारार्वोास का दंडादेश अधि रोविपत विकया जाता है, सिजसक े लिलए मृत्यु विर्वोधि द्वारा उपबंधि त दंडों में से एक है, या जहां विकसी व्यविF पर अधि रोविपत मृत्यु दंडादेश को ारा 433 क े अ ीन आजीर्वोन कारार्वोास में लघुक ृ त विकया गया है, र्वोहां ऐसे व्यविF को तब तक कारार्वोास से नहीं छोड़ा जाएगा जब तक उसने कम से कम चौदह र्वोष% का कारार्वोास नहीं भुगत लिलया हो।
4. अपीलकता%ओं क े लिलए विर्वोद्वान र्वोरिरष्ठ र्वोकील डॉ. मनीष सिंसघर्वोी ने प्रस्तुत विकया विक उच्च न्यायालय ने विनयम 8 (2) (i) क े बाद र्वोाले विहस्से को खारिरज कर विदया, सिजसमें दोनों मामलों में विहरासत में 14 साल पूरा करने क े बाद न्यूनतम चार साल की छ ू 8 की आर्वोश्यकता है।विर्वो ाधियका क े समक्ष नहीं रखने क े लिलए विनयम को विनरस्त करने की घोषर्णा करते हुए, यह प्रस्तुत विकया गया विक विनयमों में पूर्वो% शत% क े रूप में प्रख्यापन से पहले विर्वो ाधियका क े समक्ष रखने पर विर्वोचार नहीं विकया गया था। '' जैसे ही '' शब्दों का उपयोग राज्य विर्वो ानमंडल क े समक्ष रखे जाने क े लिलए कोई विनधिश्चत समय अर्वोधि नहीं देता है। विर्वो ाधियका क े समक्ष विनयमों को न रखने क े लिलए कोई परिरर्णाम प्रदान नहीं विकया गया था, और सिजसक े अभार्वो में यह लागू नहीं हो सका। इसलिलए यह प्रार्वो ान विनद}शक था और न विक अविनर्वोाय%। अतः विर्वो ाधियका क े समक्ष विनयमों को रखने में कोई चूक विनयमों को अविर्वोधि मान्य नहीं बनाती है। विकसी भी स्थिस्थधित में ये विनयम बाद में विर्वो ाधियका क े समक्ष रखे गए थे। डॉ. सिंसघर्वोी ने मैसस% ए8लस साइविकल इंडस्8्रीज लिलविम8ेड और अन्य बनाम हरिरयार्णा राज्य, (1979) 2 एस. सी.196 पर भरोसा विकया।
5. आगे यह प्रस्तुत विकया गया विक 14 र्वोष% की अभिभरक्षा पूरी होने क े पश्चात् माफी अधि कार का विर्वोषय नहीं था, बस्थि•क यह कई बातों पर विनभ%र थी। मारु राम (उपरोF) की ठीक से सराहना नहीं की गई है। आजीर्वोन कारार्वोास का अथ% आमतौर पर उम्र क ै द होता है। दंड प्रविfया संविहता की ारा 433-ए में यह उपबं है विक जहां ऐसे अपरा क े लिलए आजीर्वोन कारार्वोास का दंड अधि रोविपत विकया जाता है सिजसक े लिलए मृत्युदंड एक दंड है, र्वोहां ऐसे व्यविF को कारार्वोास से तब तक रिरहा नहीं विकया जाएगा जब तक उसने कम से कम चौदह र्वोष% का कारार्वोास नहीं भोगा हो। इस प्रकार, राज्य अपने विर्वोर्वोेक से आसानी से यह प्रार्वो ान कर सकता है विक आजीर्वोन कारार्वोास विकसी छ ू 8 क े अ ीन नहीं होगा या उस पर सीमाओं का प्रार्वो ान नहीं विकया जाएगा। र्वोत%मान मामले में छ ू 8, राज्य क े अधि कार क्षेत्र में आने र्वोाले र्वोै ाविनक विनयमों में शाविमल राज्य की नीधित का मामला होने क े कारर्ण, मौलिलक अधि कार क े मामले क े रूप में दार्वोा नहीं विकया जा सकता है। मोहम्मद मुन्ना बनाम भारत संघ और अन्य, (2005) 7 एससीसी 417 पर भरोसा विकया गया था। अतः राज्य सरकार आजीर्वोन कारार्वोास का दंड भुगत रहे विकसी दोषी की समयपूर्वो% रिरहाई से पूर्वो% न्यूनतम र्वोष\ क े लिलए आग्रह कर सकती है।
6. प्रधितर्वोाविदयों क े विर्वोद्वान र्वोकील ने प्रस्तुत विकया विक राज्य सरकार की छ ू 8 नीधित भारत क े संविर्वो ान क े अनुच्छेद 14 क े विर्वोपरीत थी क्योंविक एक मॉडल क ै दी को 4 साल की छ ू 8 प्राप्त करने क े लिलए लगभग 18 साल की क ै द की आर्वोश्यकता होगी, सिजससे ारा 433-ए क े संदभ% में सजा को कम करने क े लिलए विर्वोचार करना लगभग असंभर्वो हो जाता है। विनयम 8 (2) (i) मारू राम (पूर्वो F) को ध्यान में रखते हुए दंड प्रविfया संविहता की ारा 433-क क े स्पष्ट रूप से विर्वोपरीत था विक यह 14 र्वोष\ क े बाद माफी क े लिलए विर्वोचार को प्रधितबंधि त करता है।
7. हमने संबंधि त प्रस्तुधितयों पर विर्वोचार विकया है। ारा 59 (2) की सादी भाषा यह प्रक[8] करती है विक प्रख्यापन से पूर्वो% विर्वो ान मंडल क े समक्ष विनयमों को रखने की कोई आर्वोश्यकता नहीं है। रखने क े लिलए कोई समय सीमा विन ा%रिरत नहीं की गई है। जैसा विक उधिचत रूप से आग्रह विकया गया है, 'जैसे ही हो' शब्दों का उपयोग और न रखने क े लिलए विकसी परिरर्णाम की अनुपस्थिस्थधित में प्रार्वो ान विनद}भिशका को अविनर्वोाय% नहीं बनाती है। ए8लस साइविकल (उपरोF) में यह देखा गया थाः “22....र्वोत%मान मामले में, यह देखा जा सकता है विक अधि विनयम की ारा 3 की उप- ारा (6) में क े र्वोल यह प्रार्वो ान विकया गया है विक क ें द्र सरकार या क ें द्र सरकार क े विकसी अधि कारी या प्राधि करर्ण द्वारा ारा 3 क े तहत विकया गया प्रत्येक आदेश, इसे विकए जाने क े बाद ज•द से ज•द संसद क े दोनों सदनों क े समक्ष रखा जाएगा। इसमें यह प्रार्वो ान नहीं है विक यह संसद क े विकसी भी सदन द्वारा नकारात्मक या सकारात्मक प्रस्तार्वो क े अ ीन होगा। इसमें यह भी प्रार्वो ान नहीं है विक संसद अधि विनयम की ारा 3 क े तहत विकए गए आदेश को अनुमोविदत या अस्र्वोीक ृ त करने क े लिलए स्र्वोतंत्र होगी। इसमें यह भी नहीं कहा गया है विक यह विकसी संशो न क े अ ीन होगा सिजसे संसद का कोई भी सदन अपने विर्वोर्वोेक से आर्वोश्यक समझे। इसमें यह भी विनर्दिदष्ट नहीं विकया गया है विक आदेश विकस अर्वोधि क े लिलए संसद क े समक्ष रखा जाना है और न ही इसमें आदेश को संसद क े समक्ष रखने क े बारे में विनद}शों का पालन न करने या अनुपालन न करने क े लिलए कोई दंड का प्रार्वो ान है। यह भी ध्यान विदया जाएगा विक संसद क े समक्ष आदेश रखने की आर्वोश्यकता पूर्वो% शत% नहीं है बस्थि•क आदेश देने क े बाद की है। दूसरे शब्दों में, संसद क े अनुमोदन क े विबना आदेश देने पर कोई रोक नहीं है। इन परिरस्थिस्थधितयों में, हमारा स्पष्ट विर्वोचार है विक अधि विनयम की ारा 3 की उप- ारा (6) में विनविहत आर्वोश्यकता पहली श्रेर्णी क े भीतर आती है यानी "सा ारर्ण रखना" और विनद}भिशका अविनर्वोाय% नहीं है। अंत में, यह माना गया विक विर्वो ाधियका का इरादा कभी नहीं था विक अधि विनयम की ारा 3 की उप- ारा (6) द्वारा परिरकस्थि•पत की गई आर्वोश्यकता क े अनुपालन क े आदेश को रद्द कर विदया जाए।
8. राजस्थान कारागार विनयमार्वोली, 1951 क े भाग-3 में छ ू 8 प्रर्णाली शीष%क क े अंतग%त विनयम 1(ई) में प्रार्वो ान है विक आजीर्वोन कारार्वोास या आजीर्वोन कारार्वोास की सजा का अथ% 20 र्वोष% का कारार्वोास माना जाएगा।
9. विनयम 2006 क े विनयम 2 (ई) में सजा को कम करने का अथ% क ै दी की सजा की उस अर्वोधि को कम करना है जो उसे न्याधियक रूप से घोविषत सजा पर राज्य की ओर से अनुग्रह क े रूप में और जेल में उसक े अच्छे व्यर्वोहार की मान्यता क े रूप में जेल में सेर्वोा करनी है।
10. दंड प्रविfया संविहता क े तहत आजीर्वोन कारार्वोास या जीर्वोन पय‹त क े लिलए सजा का मतलब होगा विक दोषी क े प्राक ृ धितक जीर्वोन को गोपाल विर्वोनायक गोडसे बनाम महाराष्ट्र राज्य (1961) 3 एससीआर 440 क े मद्देनजर और विर्वोस्तार की आर्वोश्यकता नहीं है। मारू राम (सुप्रा) क े पैरा 72 (4) में विनम्नानुसार है: “5......आजीर्वोन विनर्वोा%सन या आजीर्वोन कारार्वोास की सजा को प्रथम दृष्टया दोषी व्यविF क े प्राक ृ धितक जीर्वोन की पूरी शेष अर्वोधि क े लिलए विनर्वोा%सन या कारार्वोास माना जाना चाविहए।"
11. दंड प्रविfया संविहता की ारा 432 दंडादेश को विनलंविबत करने या ह8ाने और उसे अस्र्वोीकार करने की शविF प्रदान करता है। दंड प्रविfया संविहता की ारा 433 (ख) आजीर्वोन कारार्वोास क े दंड को 14 र्वोष% में लघुक ृ त करने का उपबं करती है। दंड प्रविfया संविहता की ारा 433-ए में यह उपबं विकया गया है विक माफी या लघुकरर्ण कारार्वोास से दोषी की रिरहाई को तब तक सक्षम नहीं बनाएगा जब तक विक व्यविF ने कम से कम 14 र्वोष% कारार्वोास की सजा का8ी हो। इसलिलए, यह एक न्यूनतम अर्वोधि विन ा%रिरत करता है सिजसक े पहले माफी पर विर्वोचार नहीं विकया जा सकता है। कोई भी विनयम, जो 14 साल से पहले माफी पर विर्वोचार करने का प्रार्वो ान कर सकता है, स्पष्ट रूप से संविहता में विनविहत र्वोै ाविनक प्रार्वो ान को देखते हुए ख़राब होगा। भारत संघ बनाम र्वोी. श्रीहरन, (2016) 7 एस. सी. सी. 1 में यह मत व्यF विकया गया थाः "79. इस संदभ% में, सीआरपीसी की ारा 433-ए की व्याख्या पर विर्वोद्वान सॉलिलसिस8र जनरल की प्रस्तुधित महत्र्वोपूर्ण% है। उनका तक % था विक सीआरपीसी की ारा 433-ए क े तहत जो विन ा%रिरत विकया गया है र्वोह क े र्वोल न्यूनतम है और इसलिलए, 14 साल से अधि क की विकसी भी अर्वोधि में और अपने जीर्वोन क े अंत तक इसे तय करने क े लिलए कोई प्रधितबं नहीं है। हमें उF तक % में सार विमलता है। जब हम ारा 433- क क े प्रधित विनद}श करते हैं, तो हम पाते हैं विक उF खंड में प्रयुF अभिभव्यविF, दोषी ठहराए गए और आजीर्वोन कारार्वोास से गुजरने क े लिलए विनदेभिशत विकए गए विकसी व्यविF से संबंधि त माफी की मंजूरी क े प्रयोजन क े लिलए, यह अनुबंधि त करती है विक ऐसे व्यविF को कारार्वोास से तब तक रिरहा नहीं विकया जाएगा जब तक विक उसने कम से कम चौदह र्वोष% का कारार्वोास न का8 लिलया हो (ज़ोर विदया गया )। इसलिलए, जब क़ानून क े तहत न्यूनतम कारार्वोास विन ा%रिरत विकया जाता है, तो अदालत क े लिलए हर औधिचत्य होगा जो उस अपरा की प्रक ृ धित पर विर्वोचार करता है सिजसक े लिलए अपरा ी को सजा दी जाती है सिजसक े लिलए अपरा की सजा या तो मृत्यु या आजीर्वोन कारार्वोास की सजा दी जाती है, यह माना जाना चाविहए विक जनता और समाज क े विहत में यह सुविनधिश्चत करने क े लिलए अदालत क े पास हर औधिचत्य और अधि कार होगा विक ऐसे व्यविF को विबना विकसी छ ू 8 क े 14 साल से भी अधि क समय क े लिलए कारार्वोास की सजा भुगतनी चाविहए। र्वोास्तर्वो में, उF ारा 433-ए क े शीष%क क े अनुसार, यह क ु छ मामलों में छ ू 8 या रूपांतरर्ण की शविFयों पर प्रधितबं लगाता है।
12. स्पष्ट रूप से माफी अधि कार का मामला नहीं है, 14 साल की विहरासत पूरी होने पर ही नहीं, बस्थि•क इस संबं में बनाए गए विनयमों क े अ ीन है, सिजसमें राज्य की नीधित क े रूप में विर्वोविनर्दिदष्ट परिरस्थिस्थधितयों में इसे पूरी तरह से अस्र्वोीकार करना शाविमल है, राज्य को विनयम 8 (2) (i) द्वारा विकए गए तरीक े से माफी क े दार्वोों पर विर्वोचार करने क े लिलए प्रधितबं लगाने से क ु छ भी नहीं रोकता है। मारू राम (पूर्वो F) र्वोाले मामले में इस न्यायालय ने अभिभविन ा%रिरत विकयाः “30. आजीर्वोन कारार्वोास की तुलना 20 र्वोष% क े कारार्वोास से करने पर इस चचा% में एक संभाविर्वोत भ्रम पैदा हो जाता है।इस उद्देश्य क े लिलए आईपीसी की ारा 55 और विर्वोभिभन्न माफी योजनाओं में परिरभाषाओं पर भरोसा विकया गया है।जैसा विक गोडसे में स्पष्ट रूप से बताया गया है, हमें क े र्वोल इतना कहने की आर्वोश्यकता है विक ये समतु•य अभिभकलन क े सीविमत उद्देश्य क े लिलए हैं ताविक राज्य को क ु ल माफी की अपनी व्यापक शविFयों का उपयोग करने में मदद विमल सक े । यविद उपार्जिजत छ ू 8 क ु ल विमलाकर 20 र्वोष% तक की है, विफर भी राज्य सरकार क ै दी को रिरहा कर सकती है या नहीं कर सकती है और जब तक आजीर्वोन कारार्वोास क े शेष भाग को माफ करने का ऐसा आदेश पारिरत नहीं विकया जाता है, क ै दी अपनी स्र्वोतंत्रता का दार्वोा नहीं कर सकता है। कारर्ण यह है विक उम्रक ै द आजीर्वोन कारार्वोास से कम नहीं है। इसक े अलार्वोा, जुमा%ना तब और अब समान है- आजीर्वोन कारार्वोास। और जब सजा आजीर्वोन कारार्वोास हो तो माफी देने का कोई अधि कार नहीं है। ारा 433-ए द्वारा मूल रूप से अपरा से जुड़े कानून की तुलना में कोई बड़ी सजा नहीं दी जाती है। न ही 14 साल की जेल की अविनर्वोाय% सजा से छ ू 8 का कोई विनविहत अधि कार रद्द हो जाता है, जब हमें इस बात का एहसास हो जाता है विक उम्रक ै द की सजा पूरे जीर्वोन की सजा है।
13. अतः यह अभिभविन ा%रिरत विकया जाता है विक उच्च न्यायालय ने दोनों मामलों में विनयम, 2006 क े विनयम 8 (2) (i) को रद्द करक े गलती की।विनयम को र्वोै और कानून क े अनुरूप माना जाता है। उच्च न्यायालय क े आक्षेविपत आदेशों को रद्द कर विदया जाता है और अपीलों की अनुमधित दी जाती है। न्याया ीश (अरुर्ण विमश्रा) न्याया ीश (नर्वोीन सिसन्हा) नई विदल्ली, 22 अप्रैल, 2019 यह अनुर्वोाद आर्दि8विफभिशयल इं8ेलिलजेंस 8ूल 'सुर्वोास' क े जरिरए अनुर्वोादक की सहायता से विकया गया है। अस्र्वोीकरर्ण: यह विनर्ण%य पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीविमत उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाविदत विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारिरक और आधि कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण%य का अंग्रेजी संस्करर्ण ही प्रामाभिर्णक होगा और विनष्पादन और काया%न्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करर्ण ही मान्य होगा।