Cantonment Board, Meerut v. Afzal

High Court of Allahabad
R. Subhash Reddy
Civil Appeal No. 3814 of 2019
2019 INSC 558
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The court upheld the High Court's quashing of demolition notices issued without jurisdiction and procedural compliance under the Cantonment Act, allowing fresh proceedings under the 2006 Act.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील सं. 3814/2019

ै न्टोनमेन्ट बोर्ड*, मेरठ व अन्य ...........अपीलार्थी.
बनाम
अफजल .............प्रत्यर्थी.

े सार्थी
सिसविवल अपील संख्याएँ 3815/2019; 3816/2019;
3817/2019; 3818/2019; 3819/2019;
3820/2019; 3821/2019; 3822/2019;
3823/2019; 3824/2019; 3825/2019;
3826/2019; 3827/2019; 3828/2019;
3829/2019; 3830/2019; 3831/2019;
3832/2019; 3833/2019; 3834/2019; mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
2019 INSC 558
3835/2019; 3836/2019; 3837/2019;
3838/2019; 3839/2019; 3840/2019;
3841/2019; 3842/2019; 3843/2019;
3844/2019; 3845/2019; 3846/2019;
3847/2019; 3848/2019; 3849/2019;
3850/2019; 3851/2019; 3852/2019;
3853/2019; 3854/2019; 3855/2019;
3856/2019; 3857/2019; 3858/2019;
3859/2019; 3860/2019; 3861/2019;
3862/2019; 3863/2019; 3864/2019;
3865/2019; 3866/2019; 3867/2019;
3868/2019; 3869/2019; 3870/2019;
3871/2019;
विनर्ण*य
न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी
JUDGMENT

1. इन अपीलों क े समूह को सिसविवल विमसलीविनयस रिरट यातिDका सं. 54929/2012 में मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पारिर सामान्य आदेश विदनांक 19.12.2013 से पीविJ क ै न्टोनमेन्ट बोर्ड*, मेरठ एवं अन्य द्वारा दायर विकया गया। सभी अपीलों को इस सामान्य विनर्ण*य क े द्वारा विनस् ारर्ण को साविब करेगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

2. मा. उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट यातिDकाओं में, प्रत्यर्थी.गर्णों-मूल यातिDकाक ा*ओं द्वारा कथिर्थी अनतिQक ृ विनमा*र्ण में वृतिS को रोकने क े लिलए अपीलार्थी.गर्णों द्वारा छावनी अतिQविनयम 1924 (संतिक्षप्त ः 1924 का अतिQविनयम) क े Qारा 185 क े अन् ग* जारी सूDना को रद्द करने क े लिलए प्रत्र्यर्थी.गर्णों-मूल यातिDकाक ा*ओं ने प्रार्थी*ना की, सार्थी ही सार्थी विनमा*र्ण क े ध्वस् ीकरर्ण क े लिलए जारी सूDनाओं को रद्द करने क े लिलए प्रार्थी*ना की। प्रत्यर्थी.गर्णों -रिरट यातिDकाक ा*ओं ने अपीलीय प्रातिQकारी द्वारा विनस् ारिर हो रहे अपीलों क े अतिQमान ः पारिर अपीलीय आदेश को रद्द करने क े लिलए भी प्रार्थी*ना की।

3. छावविनयों क े प्रशासन से सम्बन्धिन्Q कानून मूल ः 1924 क े अतिQविनयम द्वारा शासिस र्थीा। उक्त अतिQविनयम को छावनी अतिQविनयम 2006 (संतिक्षप्त ः 2006 का अतिQविनयम) की Qारा 360 क े आQार पर विनरसिस विकया गया है। 2006 अतिQविनयम 18.12.2006 की ति थिर्थी से लागू हुआ।

4. नये अतिQविनयम क े प्रभावी होने से पूव* 1924 अतिQविनयम की Qारा 184 एवं 185 क े अन् ग* छावनी काय*कारी अतिQकारी ने काय*वाविहयाँ शुरू कर दी हैं, इस आQार पर विक प्रत्यर्थी.गर्णों ने विबना विकसी पूव* अनुमति क े छावनी क्षेत्र क े अन्दर विनमा*र्ण काय* विनष्पाविद विकया है और कारर्ण ब ाओ नोविटस जारी विकया गया है विक कारर्ण ब ाएँ विक प्रत्यर्थी.गर्णों क े विवरूS कानूनी काय*वाही क्यों नहीं की जानी Dाविहए। विनराकरर्ण क े उद्देश्य क े लिलए हमें अफजल को जारी विकये गये सूDना का उल्लेख करेंगे जो विक सिसविवल अपील सं. 3814/2019 में प्रत्यर्थी. हैं। उक्त प्रत्यर्थी. को जारी की गयी सूDना को विनम्नानुसार पढ़ा गया – “ काया*लय छावनी बोर्ड* मेरठ, विदनांक 22 अगस् 2006 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds सेवा में अफजल अहमद पुत्र फखरूद्दीन, 55/pt घोसी मोहल्ला, बी. आई. बाजार, मेरठ क ै न्ट। विवषय: कारर्ण ब ाओ नोविटस। मुझे यह सूतिD विकया गया है विक आपक े द्वारा विबना विकसी पूव* अनुमति क े दुकान सं. 53-54 घोसी मोहल्ला बी. आई. बाजार मेरठ क ै न्ट में अनातिQक ृ विनमा*र्ण काय* विनष्पाविद विकया जा रहा है। प्रर्थीम ल कमरे क े माप 12' -11”X 15’ -7” X 15’ -7”X 15’ -7” का विनमा*र्ण दुकान सं. 53-54, घोसी मोहल्ला बी. आई. बाजार मेरठ क ै न्ट में विकया जा रहा है। जैसा विक यह छावनी अतिQविनयम, 1924 (संशोतिQ ) क े Qारा 184/185 क े अन् ग* एक दण्र्डनीय अपराQ है, क ृ पया इसकी प्राविप्त क े 3 विदनों क े अंदर कारर्ण ब ाएँ विक छावनी अतिQविनयम 1924 (संशोतिQ ) की उक्त Qारा क े प्रावQानों क े अन् ग* आपक े विवरूS क्यों कानूनी काय*वाही नहीं की जानी Dाविहए।"

5. कारर्ण ब ाओ नोविटस क े ार म्य में, अनातिQक ृ विनमा*ँ क े ध्वस् ीकरर्ण और आगे क े विनमा*र्ण काय* को रोनक े हेति 1924 अतिQविनयम क े Qारा 185 क े अन् ग* एक नोविटस विदनांक 02.09.2006 को जारी की गई। विदनांक 02.09.2006 की नोविटस से पीविJ होकर उसने सांविवतिQक अपील दायर की, जैसा विक 1924 अतिQविनयम की Qारा 274 क े अन् ग* परिरकन्धिyप है, अपील भी बखा*स् गी में समाप्त हो गयी। इस समूह में अन् र्निनविह सभी मामलों में प्रार्थीविमक एवं अपीलीय प्रातिQकारी द्वारा पारिर समरूप एवं रूविढ़वादी आदेश हैं।

6. अपीलीय प्रातिQकारी क े आदेश एवं 1924 की Qारा 185 क े अन् ग* जारी नोविटस को Dुनौ ी दे े हुए, प्रत्यर्थी.गर्णों-मूल यातिDकाक ा*ओं ने मा. उच्च Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिDका दायर की है। मा. उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट यातिDकाओं में आक्षेविप आदेश की Dुनौ ी मुख्य ः इस पर आQारिर र्थीी विक काय*कारी अतिQकारी को इस प्रकार की नोविटस जारी करने का कोई अतिQकार नहीं है और नोविटस न्यायक्षेत्र क े परे है। दूसरा आQार यह है विक ध्वस् ीकरर्ण की सूDना कथिर्थी विनमा*र्णों की ारीख से 12 महीनों क े अन्दर जारी विकया जाना Dाविहए। यह क * विदया गया र्थीा विक सूDना में विनमा*र्ण की ारीख का उल्लेख नहीं विकया गया र्थीा, इस प्रकार, सूDना परिरसीमन द्वारा वर्जिज कर विदया गया र्थीा। मा. उच्च न्यायालय क े समक्ष अन्य आQार यह र्थीा विक सूDनाएँ सामतियक रीक े में जारी विकए गये र्थीे और कारर्ण ब ाओ नोविटस का प्रत्युत्तर प्रस् ु करने क े बावजूद भी प्रार्थीविमक प्रातिQकारी ने पारिर आदेश एवं प्रत्युत्तरों पर विवDार नहीं विकया, यहाँ क विक अपीलीय प्रातिQकारी ने भी विबना कोई अवसर प्रदान विकये रूविढ़वादी आदेशों को पारिर कर विदया और सुनवाई हे ु ारीख य कर विदया। प्रत्यर्थी.गर्णों-रिरट यातिDकाक ा*ओं द्वारा उठाये गये प्रर्थीम दो आQारों को स्वीकार नहीं विकया गया परन् ु मा. उच्च न्यायालय ने माना है विक प्रत्यर्थी.गर्णों -मूल यातिDकाक ा*ओं द्वारा दायर प्रत्युत्तर पर विवDार नहीं विकया गया और आपलित्तयों को अस्वीकार करने क े विनय कारर्णों को नहीं ब ाया गया। आगे, यह भी माना गया विक अपीलीय प्रातिQकारी ने आदेशों को पारिर कर विदया है, जो विक कमोबेश समरूप है, और सुनवाई का कोई अवसर प्रदान विकये बगैर पूव* विनQा*रिर रीक े से पारिर विकया गया है। आक्षेविप आदेशों को रद्द कर े हुए मा. उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश विदनांक 19.12.2013 को विनर्ण*य को प्राप्त करने हे ु अवलोकनों क े आलोक में नये सिसरे से काय*वाविहयों को अपीलार्थिर्थीयों क े लिलए खुला छोJ विदया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

7. हमने इन मामलों क े समूह में अपीलार्थिर्थीयों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अतिQवक्ता रेखा पाण्र्डेय और प्रत्यर्थी.गर्णों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अतिQवक्तागर्णों को भी सुना।

8. इन अपीलों में अपीलार्थिर्थीयों की रफ से विवद्वान अतिQवक्ता ने यह क * विदया विक जब सक्षम प्रातिQकारी से अनुमति प्राप्त विकए विबना अनातिQक ृ ढंग से विनमा*र्ण काय* विकये जा े हैं ो ऐसे विनमा*र्णों क े ध्वस् ीकरर्ण क े लिलए प्रातिQकारिरयों क े आदेश सव*दा खुले रह े हैं, जो विक अवैQ रूप से प्रस् ु विकया गया है। आगे यह क * विदया गया विक कई अवसर प्रदान विकये जाने क े बावजूद प्रत्यर्थी.गर्णों -मूल यातिDकाक ा*गर्ण अपीलीय प्रातिQकारी क े समक्ष उपन्धिस्र्थी नहीं हुए, जैसे विक अपीलीय प्रातिQकारी क े मामले क े गुर्ण-दोषों पर विवDार विकया और आक्षेविप आदेश को पारिर कर विदया। आगे यह क * विदया गया है विक यहाँ क विक प्रार्थीविमक प्रातिQकारी ने कारर्ण ब ाओ नोविटस क े माध्यम से एक अवसर प्रदान करने क े पश्चा 1924 अतिQविनयम की Qारा 185 क े अन् ग* एक नोविटस जारी विकया। यह क * विदया गया विक प्रार्थीविमक स् र और अपीलीय स् र में अवसर प्रदान करने क े बावजूद मा. उच्च न्यायालय ने अथिभलिललिख गल ी से यह पाया विक विबना कोई अवसर प्रदान विकये आदेश पारिर कर विदए गए हैं और रिरट यातिDकाओं में आक्षेविप आदेशों को रद्द कर विदया गया है।

9. दूसरी ओर प्रत्यर्थिर्थीयों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अतिQवक्ता ने क * विदया विक अपीलार्थी.गर्णों क े द्वारा उठाये गये आपलित्तयों पर या ो प्रार्थीविमक प्रातिQकारी या अपीलीय प्रातिQकारी ने विवDार नहीं विकया और आक्षेविप आदेश पारिर हो गये। यह क * विदया गया विक कारर्ण ब ाओ नोविटस की आपलित्तयों को दायर करने क े बावजूद, छावनी काय*कारी अतिQकारी ने इस रह की आपलित्तयों को विनर्निदष्ट नहीं Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विकया और ध्वस् ीकरर्ण क े लिलए 1924 क े अतिQविनयम की Qारा 185 क े अन् ग* नोविटस जारी विकया। जब अपील सांविवतिQक उपाय क े उपयोग करने क े द्वारा अतिQमाविन है, जैसे अतिQविनयम क े अन् ग* परिरकन्धिyप है, यहाँ क विक अपीलीय प्रातिQकारी ने सुनवाई की य ारीख और आक्षेविप रूढ़वादी आदेशों को प्रत्यर्थी.गर्णों द्वारा अस्वीकार हो रहे अतिQमाविन अपीलों द्वारा एक अवसर प्रदान नहीं विकया। आगे यह क * विदया गया विक छावनी काय*कारी अतिQकारी का विकसी भी रह का विवतिQमान्य प्रति विनतिQ मंर्डल नहीं है और आक्षेविप सूDनाएँ विबना विकसी न्यायक्षेत्र क े जारी की गयी है।

10. विवद्वान अतिQवक्ता ने पक्षों को सुना, हमने मा. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश का अनुशीलन विकया और अन्य थ्यों को अथिभलिललिख विकया।

11. आरंभ में, यह ध्यान विदया गया है विक, मा. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर सामान्य आदेश से पीविJ होकर छावनी बोर्ड* एवं अन्य ने अपील दायर की और सामान्य आक्षेविप आदेश में अथिभलिललिख यहाँ पीविJ प्रत्यर्थी.गर्णों द्वारा कोई अपील दायर नहीं की गयी । न्यायक्षेत्र ने प्रत्यर्थी.गर्णों ने सवाल उठाया और अपीलार्थी.गर्णों क े प्रातिQकारी द्वारा 1924 अतिQविनयम की Qारा 185 क े अन् ग* जारी विकये जा रहे सूDना को मा. उच्च न्यायालय ने अस्वीकार कर विदया है। ठीक इसी रह से आगे क * विदया गया विक विनमा*र्ण की ारीख से 12 महीने की अवतिQ क े अन्दर काय*वाही न करने की यातिDका भी अथिभलेखन कारर्णों द्वारा अस्वीकार कर दी गयी । हम खास ौर पर प्रत्यर्थी.गर्णों-मूल यातिDकाक ा*ओं द्वारा अतिQमाविन विकसी भी अपीलों क े अभाव में, मा. उच्च न्यायालय द्वारा अथिभलिललिख विकये गए विनष्कष„ में कोई त्रुविट नहीं पा े हैं । इस समय, हम ऐसे दृविष्टकोर्ण पर हैं विक अपीलीय प्रातिQकारी द्वारा विकये गये आदेशों और 1924 अतिQविनयम की Qारा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 185 क े अन् ग* जारी सूDनाओं को रद्द करने क े लिलए मा. उच्च न्यायालय द्वारा अथिभलिललिख विवतिQमान्य और प्रभावशाली कारर्ण है । आक्षेविप आदेश में विनर्निदष्ट कारर्णों क े अति रिरक्त हमने अथिभलिललिख विकये गये अन्य थ्यों को भी सत्याविप विकया है। जहाँ क अफजल, जो विक सिसविवल अपील सं. 3814/2019 का प्रत्यर्थी. है, का सम्बन्Q है विदनांक 22.08.2006 को आरोविप कर े हुए कारर्ण ब ाओ नोविटस जारी विकया गया विक उसने दुकान सं. 53-54 घोसी मोहल्ला, बी. आर. बाजार मेरठ क ै न्ट में विनमा*र्ण काय* कराया है, लेविकन एकरूप नहीं है, यहाँ क विक विदनांक 02.09.2006 को जारी अंति म नोविटस में विनर्निदष्ट नहीं है। यह प्रत्यर्थी.गर्ण का मामला है विक आपलित्तयाँ दायर की गई, और उनक े आपलित्तयों पर भी विवDार नहीं विकया गया। कारर्ण ब ाओ नोविटस जारी होने पर प्रार्थीविमक प्रातिQकारी को ऐसे नोविटस और आपलित्तयों को विनर्निदष्ट करना Dाविहए र्थीा, यविद कोई हो ो ऐसी नोविटस जबविक विदनांक 02.09.2006 को अंति म सूDना जारी हो रही र्थीी । यह स्पष्ट है विक सूDनाएँ यांवित्रक और सामतियक प्रर्णाली से जारी की गयी र्थीी । यहाँ क विक अपीलीय प्रातिQकारी ने विदनांक 10.08.2006 की सव†क्षर्ण आख्या पर भरोसा कर े हुए कहा है विक सिसविवल अपील सं. 3814/2019 में उन्न प्रत्यर्थी. ने विकसी सक्षम प्रातिQकारी की अनुमति क े विबना ही दुकान क े प्रर्थीम ल का अनातिQक ृ रूप से विनमा*र्ण विकया । आगे यह कहा गया है विक इस रह का सव†क्षर्ण/विनरीक्षर्ण आख्या विकसी भी समय प्रत्यर्थी.गर्णों ने प्रस् ु नहीं की, यद्यविप ऐसी आख्या प्रत्यर्थी.गर्णों द्वारा अतिQमाविन की गयी अपीलों को अस्वीकार करने पर विनभ*र है । Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

12. मा. उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट यातिDकाओं में आक्षेविप आदेश में सूDनाओं को रद्द कर े हुए मा. उच्च न्यायालय ने अपीलार्थिर्थीयों को नये सिसरे से सूDना जारी करने व कानून क े ह विवDाराQीन प्रविˆया का पालन करने क े द्वारा यर्थीोतिD आदेश पारिर करने क े लिलए मुक्त कर विदया । मामले क े दृष्टकोर्ण में, जबविक यह अपीलार्थिर्थीयों क े लिलए प्रत्यर्थी.गर्णों क े विवरूS आरोपों को य करने पर नई कारर्ण ब ाओ नोविटस जारी करक े नये सिसरे से काय*वाविहयों का आरंभ करने क े लिलए हमेशा ही मुक्त हैं, लेविकन उसक े सार्थी सार्थी मा. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आक्षेविप आदेश में अथिभलिललिख कारर्णों क े सम्बन्Q में, हमें इन अपीलों में उन्हीं हस् क्षेप क े सार्थी ही सार्थी मा. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आदेशों में कोई त्रुविट नहीं विमल ी ।

13. ये अपील दनुसार विनस् ारिर की जा ी है, हालाँविक हम यह स्पष्ट कर े हैं विक उतिD आदेशों को पोविष करने क े लिलए नये सिसरे से काय*वाविहयों को आरंभ करने क े लिलए मा. उच्च न्यायालय द्वारा स्व ंत्र ा प्रदान की जा ी है । जैसा विक छावनी अतिQविनयम 2006 विदनांक 18.12.2006 से प्रभाव में आया, अपीलार्थी.गर्ण नये सिसरे से काय*वाही क े वल 2006 अतिQविनयम क े प्रावQानों क े अनुसार कर सक े हैं । नई कारर्ण ब ाओ नोविटस प्रत्येक प्रत्यर्थी.गर्णों को जारी पूव* की कारर्ण ब ाओ नोविटस क े ˆम में होगी । जब नई कारर्ण ब ाओ नोविटस जारी हो रही हो ो अपीलार्थी. प्रत्यर्थी.गर्णों को विनरीक्षर्ण आख्या की प्रति लिलविप प्रस् ु करेगा और प्रत्येक प्रत्यर्थी.गर्णों को पया*प्त अवसर प्रदान करेगा और आदेश को विवतिQसम्म पारिर करेगा । इसक े अति रिरक्त विनमा*र्णों का मामला अनातिQक ृ है अर्थीवा नहीं, इस रह क े मुद्दे को प्रातिQकारिरयों क े विवDारार्थी* छोJ विदया गया है ।