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भार ीय सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 1299 वर्ष! 2009
चंवि$का (मृ ) द्वारा विव.प्र.गण ...............अपीलार्थी- (गण)
बनाम
सुदामा (मृ ) द्वारा विव.प्र. एवं अन्य ..................प्रत्यर्थी- (गण)
विनण!य
न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे
JUDGMENT
1. यह अपील उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा सिसविवल प्रकीण! रिरट यातिचका सं. 10553 वर्ष! 1983 में विदए गए अंति म विनण!य एवं 24.01.2005 विदनांविक विनण!य क े विवरूद्ध है । सिCसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने मूल अपीलार्थी- द्वारा दायर उक्त रिरट यातिचका को विनरस् कर विदया और 29.07.1977, 12.06.1978 और 04.05.1983 विदनांविक क्रमशः चकबंदी अति कारी, सेटलमेंट अति कारी चकबंदी और चकबंदी उपविनदेशक क े विनण!यों की पुविN की ।
2. क ु छ थ्यों, सिCनमें संतिQप्त विबन्दु शाविमल हैं, अपील क े विनस् ारण हे ु उनका उल्लेख यहां आवश्यक है ।
3. उच्च न्यायालय (एकल CC) ने आQेविप आदेश द्वारा मूल अपीलार्थी- द्वारा दायर रिरट यातिचका को खारिरC कर विदया और राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा उ. प्र. Cो ों की चकबंदी अति विनयम 1953 (ए सिXनपश्चा "अति विनयम " क े रूप में संदर्भिभ ) क े अन् ग! विदये गये ीनों विनण!यों - चकबंदी अति कारी द्वारा विदनांक 29.07.1977, सेटलमेंट अति कारी चकबंदी द्वारा विदनांक 12.06.1978 और उपविनदेशक चकबंदी द्वारा विदनांक 04.05.1983, की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अभिभपुविN की ।
4. अ ः, संतिQप्त प्रश्न Cो असफल रिरट याची द्वारा दायर इस अपील में उठ ा है, वह यह है विक, क्या उच्च न्यायालय द्वारा अपीलार्थी- की रिरट यातिचका विनरस् करना न्यायोतिच र्थीा और राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा अति विनयम क े अन् ग! विदए गए ीनों आदेशों की अभिभपुविN भी न्यायोतिच र्थीी ।
5. विववाद भिशव सहाय क े परिरवार की दो शाखाओं क े सदस्यों क े बीच है । एक शाखा का प्रति विनति बेचू है Cो विक प्रत्यर्थी- है और दूसरी शाखा का प्रति विनति राCबलिल है Cो विक अपीलार्थी- का हक पूवा!ति कारी है । विववाद ग्राम- हेति मपुर, परगना- शाहCहाँपुर, हसील- देवरिरया स्थिस्र्थी भूविम (प्लाट नं. 248, 521, 289, 290, 294, 563, 564, 854) से सम्बंति है । सिCसका विववरण विवशेर्ष अनुमति यातिचका क े संलग्नक P-1 से संलग्नक P-7 क विवविनर्दिदN है ।
6. विववाद प्रत्यर्थी-गण द्वारा अति विनयम की ारा 9-क(2) क े अन् ग! चकबंदी अति कारी क े समQ यह कह े हुए उठाया गया र्थीा, विक मूल अपीलार्थी- क े विप ा स्व. राCबलिल ने चोरी-भिछपे विबना विकसी अति कार, कानूनी हक और विह क े प्रश्नग भूविम को राCस्व रिरकार्ड! में अपना नाम अंविक करा विदया । इसी विवर्षय की Cाँच राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा की गई र्थीी । हालांविक रिरट न्यायालय सविह सभी राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा मूल प्रत्यर्थी- क े हक -अति कारी क े विवरूद्ध प्रत्यर्थी-गण क े पQ में फ ै सला विदया गया ।
7. राCस्व प्राति कारिरयों ने यह माना विक राCबलिल Cो विक मूल अपीलार्थी- का हक -पूवा!ति कारी है, का नाम राCस्व रिरकार्ड! में विकसी अति कार, हक या भूविम में विह क े कारण नहीं दC! कराया Cा सका । इसे द्नुरूप राCस्व रिरकार्ड! से हटाने का विनदnश विदया गया ।
8. इस आदेश को मूल अपीलार्थी- क े हक-पूवा!ति कारी और विफर मूल अपीलार्थी- द्वारा प्रर्थीम अपीलीय प्राति कारी, विद्व ीय अपीलीय प्राति कारी और अन् में उच्च न्यायालय में असफल चुनौ ी दी गई । सिCससे विक यह अपील रिरय याची द्वारा इस न्यायालय में विवशेर्ष अनुमति क े माध्यम से दायर की गई ।
9. इस अपील क े लम्बन क े दौरान अपीलार्थी- की मृत्यु हो गई और उसका विवति क प्रति विनति विवचारा ीन वाद को लड़ने क े लिलए रिरकार्ड! पर लाया गया । Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
10. अपीलार्थी-गण की ओर से विवद्वान अति वक्ता श्री टी. एन. सिंसह और प्रत्यर्थी-गण की ओर से विवद्वान अति वक्ता श्री पी. नरसिसम्ह, को सुना ।
11. पQों क े विवद्वान अति वक्ताओं को सुनने और मामले क े रिरकार्ड! का अवलोकन करने क े पश्चा हमें इस अपील में कोई भी गुणागुण नहीं विमला ।
12. हमारे सुचिंचति विवचार से इस अपील में आQेविप विनष्कर्ष! थ्य का अनुव - विनष्कर्ष! होने क े कारण उच्च न्यायालय द्वारा ठीक ही उच्च न्यायालय पर इसकी रिरट अति कारिर ा में बाध्यकारी माना गया, यह इस न्यायालय पर भी बाध्यकारी है, अ ः इसमें हस् Qेप की कोई आवश्यक ा नहीं है । अन्यर्थीा भी गुणागुण क े आ ार पर विनम्नलिललिख कारणों से आQेविप विनष्कर्ष! में हस् Qेप का कोई मामला नहीं विदख ा है ।
13. आQेविप आदेश क े अवलोकन पर हम पा े हैं, विक प्रश्नग भूविम राCस्व रिरकार्डv में बेचू क े नाम पर लगा ार दC! र्थीी । सिCससे प्रत्यर्थी-गण ने अपना अति कार, हक और भूविम में विह का दावा विकया र्थीा ।
14. Cहां क मूल अपीलार्थी- क े हक-पूवा!ति कारी राCबलिल क े दावे का संबं र्थीा, वह लालCी (बेचू का भाई), Cैसा विक वंशावली चाट! से स्पN है, क े माध्यम से परिरवार की अन्य शाखा का प्रति विनति त्व करने का दावा विकया है । अ ः यह ठीक ही अव ारिर विकया गया, विक राCबलिल को बेचू क े विहस्से में कोई अति कार, हक और विह नहीं र्थीा क्योंविक बेचू का विहस्सा उसक े विवति क प्रति विनति यों अर्थीा! ् प्रत्यर्थी-गण को स्र्थीानान् रिर हो गया ।
15. हमारे दृविNकोण से उपरोक्त विनष्कर्ष! थ्यात्मक Cाँच पर आ ारिर है; दूसरा, यह साक्ष्यों क े सम्यक ् मूल्यांकन पर आ ारिर है, Cो विक राCस्व प्रविवविNयाँ हैं; ीसरा, यह विकसी विवति क प्राव ान या मामले क े रिरकार्ड! क े विवरुद्ध नहीं पाया गया है; और अं में, यह क ! से समर्भिर्थी है । अ ः हमें इन विनष्कर्षv में हस् Qेप का कोई आ ार नहीं विमल ा है ।
16. अपीलार्थी-गण ( रिरट याची ) क े विवद्वान अति वक्ता ने हालांविक थ्य क े आ ार पर रखा है लेविकन Cैसा हम ऊपर अव ारिर कर चुक े हैं, उसक े आलोक में, उनकी प्रार्थी!ना में कोई गुणागुण नहीं है ।
17. पूव!व - बहस क े दृविNग ् अपील गुणागुण से रविह पायी गयी है । यह असफल है और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds द्नुरूप विनरस् की Cा ी है ।................................... (न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे).......................................... (न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी ) नई विदल्ली; अप्रैल 15, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds