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High Court of Allahabad · 15 Apr 2019
Abhay Manohar Sapre; Vidnesh Maheshwari
Civil Appeal No. 1299 of 2009
property appeal_dismissed

AI Summary

The Supreme Court dismissed the appeal upholding the validity of mutation entries and revenue authorities' orders under the Uttar Pradesh Zamindari Abolition and Land Reforms Act, confirming the appellant had no proprietary right in the disputed land.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 1299 वर्ष! 2009
चंवि$का (मृ ) द्वारा विव.प्र.गण ...............अपीलार्थी- (गण)
बनाम
सुदामा (मृ ) द्वारा विव.प्र. एवं अन्य ..................प्रत्यर्थी- (गण)
विनण!य
न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे
JUDGMENT

1. यह अपील उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा सिसविवल प्रकीण! रिरट यातिचका सं. 10553 वर्ष! 1983 में विदए गए अंति म विनण!य एवं 24.01.2005 विदनांविक विनण!य क े विवरूद्ध है । सिCसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने मूल अपीलार्थी- द्वारा दायर उक्त रिरट यातिचका को विनरस् कर विदया और 29.07.1977, 12.06.1978 और 04.05.1983 विदनांविक क्रमशः चकबंदी अति कारी, सेटलमेंट अति कारी चकबंदी और चकबंदी उपविनदेशक क े विनण!यों की पुविN की ।

2. क ु छ थ्यों, सिCनमें संतिQप्त विबन्दु शाविमल हैं, अपील क े विनस् ारण हे ु उनका उल्लेख यहां आवश्यक है ।

3. उच्च न्यायालय (एकल CC) ने आQेविप आदेश द्वारा मूल अपीलार्थी- द्वारा दायर रिरट यातिचका को खारिरC कर विदया और राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा उ. प्र. Cो ों की चकबंदी अति विनयम 1953 (ए सिXनपश्चा "अति विनयम " क े रूप में संदर्भिभ ) क े अन् ग! विदये गये ीनों विनण!यों - चकबंदी अति कारी द्वारा विदनांक 29.07.1977, सेटलमेंट अति कारी चकबंदी द्वारा विदनांक 12.06.1978 और उपविनदेशक चकबंदी द्वारा विदनांक 04.05.1983, की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अभिभपुविN की ।

4. अ ः, संतिQप्त प्रश्न Cो असफल रिरट याची द्वारा दायर इस अपील में उठ ा है, वह यह है विक, क्या उच्च न्यायालय द्वारा अपीलार्थी- की रिरट यातिचका विनरस् करना न्यायोतिच र्थीा और राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा अति विनयम क े अन् ग! विदए गए ीनों आदेशों की अभिभपुविN भी न्यायोतिच र्थीी ।

5. विववाद भिशव सहाय क े परिरवार की दो शाखाओं क े सदस्यों क े बीच है । एक शाखा का प्रति विनति बेचू है Cो विक प्रत्यर्थी- है और दूसरी शाखा का प्रति विनति राCबलिल है Cो विक अपीलार्थी- का हक पूवा!ति कारी है । विववाद ग्राम- हेति मपुर, परगना- शाहCहाँपुर, हसील- देवरिरया स्थिस्र्थी भूविम (प्लाट नं. 248, 521, 289, 290, 294, 563, 564, 854) से सम्बंति है । सिCसका विववरण विवशेर्ष अनुमति यातिचका क े संलग्नक P-1 से संलग्नक P-7 क विवविनर्दिदN है ।

6. विववाद प्रत्यर्थी-गण द्वारा अति विनयम की ारा 9-क(2) क े अन् ग! चकबंदी अति कारी क े समQ यह कह े हुए उठाया गया र्थीा, विक मूल अपीलार्थी- क े विप ा स्व. राCबलिल ने चोरी-भिछपे विबना विकसी अति कार, कानूनी हक और विह क े प्रश्नग भूविम को राCस्व रिरकार्ड! में अपना नाम अंविक करा विदया । इसी विवर्षय की Cाँच राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा की गई र्थीी । हालांविक रिरट न्यायालय सविह सभी राCस्व प्राति कारिरयों द्वारा मूल प्रत्यर्थी- क े हक -अति कारी क े विवरूद्ध प्रत्यर्थी-गण क े पQ में फ ै सला विदया गया ।

7. राCस्व प्राति कारिरयों ने यह माना विक राCबलिल Cो विक मूल अपीलार्थी- का हक -पूवा!ति कारी है, का नाम राCस्व रिरकार्ड! में विकसी अति कार, हक या भूविम में विह क े कारण नहीं दC! कराया Cा सका । इसे द्नुरूप राCस्व रिरकार्ड! से हटाने का विनदnश विदया गया ।

8. इस आदेश को मूल अपीलार्थी- क े हक-पूवा!ति कारी और विफर मूल अपीलार्थी- द्वारा प्रर्थीम अपीलीय प्राति कारी, विद्व ीय अपीलीय प्राति कारी और अन् में उच्च न्यायालय में असफल चुनौ ी दी गई । सिCससे विक यह अपील रिरय याची द्वारा इस न्यायालय में विवशेर्ष अनुमति क े माध्यम से दायर की गई ।

9. इस अपील क े लम्बन क े दौरान अपीलार्थी- की मृत्यु हो गई और उसका विवति क प्रति विनति विवचारा ीन वाद को लड़ने क े लिलए रिरकार्ड! पर लाया गया । Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

10. अपीलार्थी-गण की ओर से विवद्वान अति वक्ता श्री टी. एन. सिंसह और प्रत्यर्थी-गण की ओर से विवद्वान अति वक्ता श्री पी. नरसिसम्ह, को सुना ।

11. पQों क े विवद्वान अति वक्ताओं को सुनने और मामले क े रिरकार्ड! का अवलोकन करने क े पश्चा हमें इस अपील में कोई भी गुणागुण नहीं विमला ।

12. हमारे सुचिंचति विवचार से इस अपील में आQेविप विनष्कर्ष! थ्य का अनुव - विनष्कर्ष! होने क े कारण उच्च न्यायालय द्वारा ठीक ही उच्च न्यायालय पर इसकी रिरट अति कारिर ा में बाध्यकारी माना गया, यह इस न्यायालय पर भी बाध्यकारी है, अ ः इसमें हस् Qेप की कोई आवश्यक ा नहीं है । अन्यर्थीा भी गुणागुण क े आ ार पर विनम्नलिललिख कारणों से आQेविप विनष्कर्ष! में हस् Qेप का कोई मामला नहीं विदख ा है ।

13. आQेविप आदेश क े अवलोकन पर हम पा े हैं, विक प्रश्नग भूविम राCस्व रिरकार्डv में बेचू क े नाम पर लगा ार दC! र्थीी । सिCससे प्रत्यर्थी-गण ने अपना अति कार, हक और भूविम में विह का दावा विकया र्थीा ।

14. Cहां क मूल अपीलार्थी- क े हक-पूवा!ति कारी राCबलिल क े दावे का संबं र्थीा, वह लालCी (बेचू का भाई), Cैसा विक वंशावली चाट! से स्पN है, क े माध्यम से परिरवार की अन्य शाखा का प्रति विनति त्व करने का दावा विकया है । अ ः यह ठीक ही अव ारिर विकया गया, विक राCबलिल को बेचू क े विहस्से में कोई अति कार, हक और विह नहीं र्थीा क्योंविक बेचू का विहस्सा उसक े विवति क प्रति विनति यों अर्थीा! ् प्रत्यर्थी-गण को स्र्थीानान् रिर हो गया ।

15. हमारे दृविNकोण से उपरोक्त विनष्कर्ष! थ्यात्मक Cाँच पर आ ारिर है; दूसरा, यह साक्ष्यों क े सम्यक ् मूल्यांकन पर आ ारिर है, Cो विक राCस्व प्रविवविNयाँ हैं; ीसरा, यह विकसी विवति क प्राव ान या मामले क े रिरकार्ड! क े विवरुद्ध नहीं पाया गया है; और अं में, यह क ! से समर्भिर्थी है । अ ः हमें इन विनष्कर्षv में हस् Qेप का कोई आ ार नहीं विमल ा है ।

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16. अपीलार्थी-गण ( रिरट याची ) क े विवद्वान अति वक्ता ने हालांविक थ्य क े आ ार पर रखा है लेविकन Cैसा हम ऊपर अव ारिर कर चुक े हैं, उसक े आलोक में, उनकी प्रार्थी!ना में कोई गुणागुण नहीं है ।

17. पूव!व - बहस क े दृविNग ् अपील गुणागुण से रविह पायी गयी है । यह असफल है और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds द्नुरूप विनरस् की Cा ी है ।................................... (न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे).......................................... (न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी ) नई विदल्ली; अप्रैल 15, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds