Shailendra Kumar Jain v. Prakash Jain & Ors.

Supreme Court of India · 09 Apr 2019
Uday Umesh Lalit; Indu Malhotra
Civil Appeal No 3587 of 2019
civil appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the validity of a family partition and dismissed the appeal challenging ownership rights over ancestral properties, emphasizing the binding nature of family settlements and the doctrine of res judicata.

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Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सर्वोच्च न्यायालय सव च्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय सर्वोच्च न्यायालय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 3587/2019
(विवशेष अवकाश य सर्वोच्च न्यायालय ाति का (दीवानी) सं. 3490/2019 से उद्भू )
शैलेंद्र क
ु मार जैन एवं अन्य सर्वोच्च न्यायालय ...अपीलार्थी+गण
बनाम
माय सर्वोच्च न्यायालय ा प्रकाश जैन एवं अन्य सर्वोच्च न्यायालय ...प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी+गण
विनण0य सर्वोच्च न्यायालय
न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय मूर्ति , उदय सर्वोच्च न्यायालय उमेश ललिल
JUDGMENT

1. अवकाश अनुदत्त।

2. य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 156/2016 इलाह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ाबाद उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारिर विदनांक 19. 07. 2018 क े विनण0य सर्वोच्च न्यायालय की औचित्य को चुनौती औति त्य सर्वोच्च न्यायालय को चुनौती ुनौ ी दे ी ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै।

3. विवनय सर्वोच्च न्यायालय प्रकाश जैन ने उप-न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ा ीश, प्रर्थीम श्रेणी, विदल्ली न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय लय सर्वोच्च न्यायालय में वाद संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 92/ 1966 (संक्षेप में '1966 वाद') दाय सर्वोच्च न्यायालय र विकय सर्वोच्च न्यायालय ा, सिजसमें घो चुनौतीषणा की औचित्य को चुनौती गई कि विक उनक े विप ा अम्बा प्रसाद, उनकी औचित्य को चुनौती मां श्रीम ी देवी जैन और ीन भाइय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े बी विवभाजन क े बाद क ु छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईं संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ां उनक े विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्से में आ गईं गई कि ं, सिजनमें से सभी को चुनौती प्रति वादी संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 1 से 5 क े रूप में रखा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। वाद में श्रीम ी श्रीकां जैन सविह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ार बह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या नों के बीच को चुनौती भी प्रति वादी सं. 6 से 9 क े रूप में रखा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

4. विव ारण न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 23. 02. 1966 सन् 1966 क े मुकदमे में एक आ गईंदेश पारिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, सिजसमें पक्षकारों के बीच क े बी समझौ ा विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, सिजसक े लिलए मुकदमा आ गईंज्ञविK कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। आ गईंदेश का प्रासंविगक भाग विनम्नानुसार र्थीा: 'वादी ने प्रार्थी0ना की औचित्य को चुनौती ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै विक एक घो चुनौतीषणा की औचित्य को चुनौती जाए विक वह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या वाद (गैरकानूनी) की औचित्य को चुनौती वादी में संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच का मालिलक ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै। वादी और प्रति वादी सं. 1 से 5 क े बी (गैरकानूनी) में उक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ां उसक े विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्से में आ गईं गई कि र्थीीं। प्रति वाविदय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच ने आ गईंज अपने अति वक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गईा श्री विवजय सर्वोच्च न्यायालय विकशन क े माध्य सर्वोच्च न्यायालय म से वादी क े दावे को चुनौती स्वीकार कर े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ुए लिललिख बय सर्वोच्च न्यायालय ान दाय सर्वोच्च न्यायालय र विकय सर्वोच्च न्यायालय ा। प्रति वाविदय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े अति वक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गईा ने न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय में एक बय सर्वोच्च न्यायालय ान भी विदय सर्वोच्च न्यायालय ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै विक आ गईंज्ञविK क े लिलए प्रार्थी0ना क े रूप में पारिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा जाना ाविह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ए। परिरणाम:, मैं इस आशय की घोषणा के लिए इस आ गईंशय सर्वोच्च न्यायालय की औचित्य को चुनौती घो चुनौतीषणा क े लिलए एक आ गईंज्ञविK पारिर कर ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ूं विक वादी मालिलक ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै और वादी क े पैरा संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 11 क े खंड (ए) में उसिल्ललिख संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े कब्जे में ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै। पक्ष मुकदमे की औचित्य को चुनौती अपनी लाग वह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या न कर े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए। ” सुनाय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा।

5. प्रति वादी संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 5 सन् 1966 क े वाद य सर्वोच्च न्यायालय ानी माय सर्वोच्च न्यायालय ा प्रकाश में उसक े बाद दीवानी जज (सीविनय सर्वोच्च न्यायालय र तिड वीजन), मेरठ न्यायालय में मुकदमा संख्या न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय में मुकदमा संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 464 /2006 दाय सर्वोच्च न्यायालय र विकय सर्वोच्च न्यायालय ा, सिजसमें अन्य सर्वोच्च न्यायालय बा ों के बीच क े सार्थी-सार्थी प्रस् ु विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उपरो चुनौतीक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई आ गईंज्ञविK विदनांक 23. 02. 1966 क े बाद घर और अन्य सर्वोच्च न्यायालय संय सर्वोच्च न्यायालय ुक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े विवभाजन क े संबं में 05. 11. 2005 को चुनौती अंबा प्रसाद जैन क े सभी बेटों के बीच क े बी में एक और पारिरवारिरक समझौ ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ुआ गईं। कह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ा जा ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै विक य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या समझौ ा श्रीम ी ंद्रकां ा जैन, श्री ड ी.पी. जैन, श्रीम ी पद्मकां जैन और श्री अलिखलेश जैन की औचित्य को चुनौती उपस्थिस्र्थीति में आ गईंय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या दावा विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा विक पक्षकार उक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई विनपटान विदनांक

05. 11. 2005 से बं े र्थीे और इसक े बाद कह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विक माय सर्वोच्च न्यायालय ा प्रकाश जैन 2006 क े उक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई अभिभय सर्वोच्च न्यायालय ो चुनौतीग में अनुसू ी में उसिल्ललिख क ु छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईं संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े अनन्य सर्वोच्च न्यायालय मालिलक र्थीे।

6. 1966 क े वाद में मूल प्रति वादी संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 8 द्वारा य सर्वोच्च न्यायालय ानी श्रीकां जैन एक आ गईंवेदन प्रदश0 92 क को चुनौती अति माविन विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, जो चुनौती 2006 क े पूव क्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई वाद संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 464 में प्रति वाविदय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच में से एक क े रूप में अपने विनविह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ार्थी0 की औचित्य को चुनौती मांग कर रह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ा र्थीा। य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या क 0 विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा विक उसक े मा ा-विप ा य सर्वोच्च न्यायालय ानी अम्बा प्रसाद जैन और श्रीम ी देवी जैन की औचित्य को चुनौती मृत्य सर्वोच्च न्यायालय ु क े बाद, आ गईंवेदक उस संपलित्त का ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या कदार र्थीा सिजसे मा ा- विप ा द्वारा पीछ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंे छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंो चुनौतीड़ दिया गया था और आवेदक एक आवश्यक पक्ष है जिसे उसे विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा और आ गईंवेदक एक आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क पक्ष ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै सिजसे उसे एक वाद संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 464 /2006 में प्रति वादी क े रूप में प्रस् ु विकय सर्वोच्च न्यायालय ा जाना ाविह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ए। आ गईंवेदन की औचित्य को चुनौती लंबन क े दौरान, श्रीम ी श्रीकां जैन की औचित्य को चुनौती मृत्य सर्वोच्च न्यायालय ु ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौती गई कि और अपीलक ा0ओं, य सर्वोच्च न्यायालय ानी उनक े कानूनी उत्तराति कारिरय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच को चुनौती उनक े स्र्थीान पर प्रति स्र्थीाविप विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा।

7. आ गईंवेदन को चुनौती विव ारण न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय ने विदनांक 10. 03. 2016 क े आ गईंदेश को चुनौती खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या देखा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विक आ गईंवेदक श्रीम ी श्रीकां जैन को चुनौती 1966 वाद का ज्ञान र्थीा, लेविकन उनक े मा ा-विप ा और भाइय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े बी मौलिखक पारिरवारिरक विवभाजन क े आ गईं ार पर पारिर आ गईंज्ञविK क े लिखलाफ अपील करने के लिए अपील करने क े लिलए को चुनौतीई कि कदम नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं उठ न्यायालय में मुकदमा संख्यााय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा और इस रह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या क े आ गईंवेदन को चुनौती खारिरज करने की औचित्य को चुनौती आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क ा र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

8. अपीलक ा0 व्य सर्वोच्च न्यायालय भिर्थी ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौतीने क े कारण, उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय में 2016 क े दीवानी रिरवीजन संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 156 को चुनौती प्रार्थीविमक ा दी गई कि र्थीी, सिजसे उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय ने

19. 07. 2018 विदनांविक आ गईंदेश को चुनौती रद्द कर दिया था। इसे निम्नानुसार देखा कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। इसे विनम्नानुसार देखा गय सर्वोच्च न्यायालय ा: " ूंविक, जैसा विक ऊपर उसिल्ललिख विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै, य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या मुकदमा जह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ां इस संशो चुनौती न से मूल रूप से उद्भू ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौती ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै, 1966 क े वाद संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 92 में पह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ले क े आ गईंज्ञविK क े काय सर्वोच्च न्यायालय ा0न्वय सर्वोच्च न्यायालय न का प्रय सर्वोच्च न्यायालय ास कर ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै, सिजसने उनक े बी एक कभिर्थी मौलिखक विवभाजन की औचित्य को चुनौती स्वीक ृ ति पर, पक्षकारों के बीच क े शेय सर्वोच्च न्यायालय रों के बीच को चुनौती विन ा0रिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, और ूंविक वाद क े लिलए पक्ष क े वल वे ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए सिजनक े शेय सर्वोच्च न्यायालय रों के बीच को चुनौती अलग विकय सर्वोच्च न्यायालय ा जाना ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै, अ ीनस्र्थी न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय लय सर्वोच्च न्यायालय ने इस्थिम्पलिलड ेड आ गईंवेदन को चुनौती खारिरज करने में को चुनौतीई कि अवै ा नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं की औचित्य को चुनौती ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै, य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या पा े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ुए विक काय सर्वोच्च न्यायालय 0वाह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ी में संशो चुनौती नवादी आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क पक्ष नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए।"

9. ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या मने अपीलार्थी+गण क े अति वक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गईा श्री ड ी.क े. गग0 और प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी+गण क े वरिरष्ठ अधिवक्ता श्री जितेन्द्र मोहन शर्मा को सुना। अति वक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गईा श्री सिज ेन्द्र मो चुनौतीह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या न शमा0 को चुनौती सुना।

10. ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ालिलय सर्वोच्च न्यायालय ा मुकदमा एक बेटे ने अपने मा ा-विप ा, ीन भाइय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच और ार बह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या नों के बीच क े लिखलाफ अपील करने के लिए दाय सर्वोच्च न्यायालय र विकय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। वादी, मा ा-विप ा और ीन भाइय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े बी समझौ ा करने क े संदभ0 में, संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच को चुनौती पारस्परिरक रूप से छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या व्य सर्वोच्च न्यायालय विक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गईय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े बी विवभासिज विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। ूंविक अंबा प्रसाद जैन और श्रीम ी देवी जैन जीविव र्थीे, इसलिलए संय सर्वोच्च न्यायालय ुक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई परिरवार की औचित्य को चुनौती संपलित्त क े विवभाजन की औचित्य को चुनौती राह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या क े लिलए एक कार0वाई कि में उति पक्ष, हिंह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या दू कानून क े त्कालीन प्र लिल सिसद्धां ों के बीच से जा रह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या े र्थीे, क े वल पति, पत्नी और उनक े बेटे र्थीे। परिरवार में बेविटय सर्वोच्च न्यायालय ां, अर्थीा0 ्, प्रति वादी सं. 6 से 9 क, अति कार क े रूप में, संय सर्वोच्च न्यायालय ुक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई परिरवार की औचित्य को चुनौती संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच का विवभाजन ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौतीने पर विकसी भी विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्से का दावा नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं कर सक ी र्थीीं। ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ालांविक, य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या अच्छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंी रह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या से य सर्वोच्च न्यायालय विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै[देखें: लक्ष्मी ंद खजुरिरय सर्वोच्च न्यायालय ा एवं अन्य सर्वोच्च न्यायालय बनाम इश्रो चुनौती देवी-(1977) 2 एससीसी 501 पैरा 14] विक अगर उसक े पति और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds बेटों के बीच क े बी एक विवभाजन ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौती ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै, ो चुनौती एक पत्नी एक बेटे क े बराबर विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्सा प्राK करने क े लिलए (दतिक्षण भार को चुनौती छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंो चुनौतीड़ दिया गया था और आवेदक एक आवश्यक पक्ष है जिसे उसेकर) ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या कदार ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै और अपने पति [मुल्ला पर हिंह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या दू कानून- विद्व ीय सर्वोच्च न्यायालय संस्करण पृष्ठ अधिवक्ता श्री जितेन्द्र मोहन शर्मा को सुना। 496] से भी अलग से उस विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्से का आ गईंनंद ले ी ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै। इसलिलए, य सर्वोच्च न्यायालय विद वादी और प्रति वादी सं. 1 से 5 क े बी समझौ ा विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, ो चुनौती इसक े बारे में क ु छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईं भी अनुति नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं र्थीा। परिरस्थिस्र्थीति य सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच में, 1966 वाद में आ गईंज्ञविK क े लिलए विकसी भी ुनौ ी का अभाव अप्रासंविगक र्थीा। थ्य सर्वोच्च न्यायालय की औचित्य को चुनौती बा क े रूप में, आ गईंवेदक श्रीकां जैन 1966 क े वाद में आ गईंज्ञविK को चुनौती ुनौ ी नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं दे सक े र्थीे।

11. विप ा और मा ा की औचित्य को चुनौती मृत्य सर्वोच्च न्यायालय ु पर, य सर्वोच्च न्यायालय विद उनकी औचित्य को चुनौती मृत्य सर्वोच्च न्यायालय ु ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौती जा ी ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै, ो चुनौती हिंह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या दू उत्तराति कार अति विनय सर्वोच्च न्यायालय म क े सिसद्धां ों के बीच क े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या, बेविटय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच सविह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय ेक वग0 I वारिरस, अपने मा ा-विप ा द्वारा पीछ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंे छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंो चुनौतीड़ दिया गया था और आवेदक एक आवश्यक पक्ष है जिसे उसेी गई कि संपलित्त में विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्सेदारी का ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या कदार ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौतीगा। य सर्वोच्च न्यायालय ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ठ न्यायालय में मुकदमा संख्याीक इसी विगन ी पर ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै विक आ गईंवेदक श्रीकां जैन का दावा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै विक वे उन संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच में विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्सा पाने क े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या कदार ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए सिजन्ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ें अंबा प्रसाद जैन और श्रीम ी देवी जैन को चुनौती आ गईंवंविट विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। 1966 क े वाद में आ गईंज्ञविK करने क े लिलए विवभाजन का असर ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ुआ गईं, विकसी भी रह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या से, उसे अपने विप ा और मां की औचित्य को चुनौती संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच में विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्सेदारी का दावा करने से रो चुनौतीक नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं सक ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै। पूव क्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गई परिरसर में, श्रीकां जैन विनतिe रूप से माय सर्वोच्च न्यायालय ा प्रकाश जैन द्वारा दाय सर्वोच्च न्यायालय र विकए गए बाद क े मुकदमे में विनविह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौतीने क े लिलए एक आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क और उति पक्ष र्थीी।

12. ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ालाँविक, प्रति वादी संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 1 क े उपस्थिस्र्थी वरिरष्ठ अधिवक्ता श्री जितेन्द्र मोहन शर्मा को सुना। विवद्व अति वक्त संपत्तियां उसके हिस्से में आ गईा श्री सिज ेन्द्र मो चुनौतीह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या न शमा0 द्वारा प्रति वाद विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, विक विप ा और मा ा, अर्थीा0 ्, अंबा प्रसाद जैन और श्रीम ी देवी जैन ने विवल्स को चुनौती पीछ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंे छ संपत्तियां उनके हिस्से में आ गईंो चुनौतीड़ दिया गया था और आवेदक एक आवश्यक पक्ष है जिसे उसे विदय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, सिजसक े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या उनकी औचित्य को चुनौती संपलित्त विवकसिस ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ुई कि र्थीी बेटों के बीच विवशेष रूप से वसीय सर्वोच्च न्यायालय नामा का उति विनष्पादन अभी क प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी+ द्वारा साविब नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ुआ गईं ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै। य सर्वोच्च न्यायालय विद वसीय सर्वोच्च न्यायालय नामा साविब नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौती े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए, ो चुनौती बेविटय सर्वोच्च न्यायालय ां वग0-I वारिरस ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौतीने क े ना े, संपलित्तय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच में विह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या स्सेदारी की औचित्य को चुनौती ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या कदार ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ों के बीचगी। इसलिलए, बेविटय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच को चुनौती काय सर्वोच्च न्यायालय 0वाह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ी क े लिलए आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क पक्ष ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए। व 0मान Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds मामले में, य सर्वोच्च न्यायालय विद वसीय सर्वोच्च न्यायालय नामा प्रस् ाविव साविब ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौती जा े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए, ो चुनौती वे उत्तराति कार क े सामान्य सर्वोच्च न्यायालय रीक े एवं बेविटय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच क े पूवा0ग्रह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या क े अलावा उत्तराति कार क े अलग पर्थी प्रदर्शिश करेंगे। इस रह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या की औचित्य को चुनौती कार0वाई कि य सर्वोच्च न्यायालय ा व्य सर्वोच्च न्यायालय वह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ार में, वग0 I वारिरस ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौतीने वाली बेविटय सर्वोच्च न्यायालय ां आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क एवं उति पक्ष ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए और उन्ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ें प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय ारो चुनौतीविप करने की औचित्य को चुनौती आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क ा ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ै।

13. इस प्रकार, मामले को चुनौती विकसी भी दृविlको चुनौतीण से देख े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ुए, आ गईंवेदक श्रीकां जैन एक आ गईंवश्य सर्वोच्च न्यायालय क और उति पक्ष र्थीी। मुकदमे में प्रति वाविदय सर्वोच्च न्यायालय ों के बीच में से एक क े रूप में प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय ारो चुनौतीविप विकए जाने वाले उसक े आ गईंवेदन को चुनौती अ ीनस्र्थी न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गल रीक े से खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। इसलिलए, ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या म इस अपील की औचित्य को चुनौती अनुमति दे े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए, अ ीनस्र्थी न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पारिर आ गईंदेश को चुनौती अपास् कर े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए, और 2006 क े वाद संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 464 में आ गईंवेदक श्रीकां जैन द्वारा दज0 विकए गए आ गईंदेश 1 विनय सर्वोच्च न्यायालय म 10 सीपीसी क े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या दाय सर्वोच्च न्यायालय र आ गईंवेदन प्रदश0 92 क को चुनौती अनुमति दे े ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ैं इस आशय की घोषणा के लिए। को चुनौतीई कि लाग नह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ीं।.............न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ामूर्ति (उदय सर्वोच्च न्यायालय उमेश ललिल ).................न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय मूर्ति (इंदु मल्ह अपील दीवानी पुनरीक्षण संख्या ो चुनौतीत्रा) नई कि विदल्ली; 09 अप्रैल 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds