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Supreme Court of India · 09 Apr 2019
Ranjan Gogoi; L. Nageswara Rao; Sanjay Kishan Kaul
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that courts at the place where a woman’s parental home is situated have exclusive jurisdiction to try Section 498A IPC offences when she leaves the matrimonial home due to cruelty and takes shelter there.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
आपराति क अपीलीय अति कारिर ा
क्रि क्रि नल अपील संख्या . 71 वर्ष" 2012
रूपाली देवी ...... अपीलार्थी(
बना
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ........
प्रत्यर्थी(गण
सह
क्रि क्रि नल अपील सं. 619 वर्ष" 2019
(क्रिव. अ. या. (क्रि .) सं. 5695/2010 से उद्भू )
क्रि क्रि नल अपील सं. 620 वर्ष" 2019
(क्रिव. अ. या. (क्रि .) सं. 8246/2010 से उद्भू )
क्रि क्रि नल अपील सं. 621 वर्ष" 2019
(क्रिव. अ. या. (क्रि .) सं. 7387/2011 से उद्भू )
क्रि क्रि नल अपील सं. 622 वर्ष" 2019
(क्रिव. अ. या. (क्रि .) सं. 5052/2014 से उद्भू )
क्रि क्रि नल अपील सं. 623 वर्ष" 2019
(क्रिव. अ. या. (क्रि .) सं. 5139/2014 से उद्भू ) mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
क्रिनण"य
न्याय ूर्ति रंजन गोगोई
JUDGMENT

1. " क्या कोई क्रिहला जिजसे अपना वैवाक्रिहक घर, ऐसे कायI एवं आचरण जो ू र ा की श्रेणी ें आ े हैं, क े आ ार पर छोड़ने को बाध्य क्रिकया गया हो न्यायालयों की अति कारिर ा ें ऐसी अवस्र्थीा ें जब उसे अपने ा ा-क्रिप ा या अन्य पारिरवारिरक सदस्यों क े यहां आश्रय लेने को बाध्य क्रिकया गया हो क्रिवति क प्रक्रि या की शरण ले काय"वाही प्रारम्भ कर सक ी है । " ठीक यही वह प्रश्न है जो इन अपीलों क े स ूह ें क्रिन ा"रण क े लिलए उठ ा है ।

2. उपरोक्त प्रश्न पर न्यायालय का क्रिवभाजिज होने क े कारण ऊपर क्रिनर्दिदष्ट प्रश्न पर क्रिवचार क े लिलए बड़ी बेंच को व " ान ें सन्दर्भिभ क्रिकया गया है ।

3. (i) वाई. अब्राह अजी एवं अन्य बना पुलिलस क्रिनरीक्षक चेन्नई एवं अन्य (2004) 8 SCC 100 (ii) र ेश एवं अन्य बना क्रि लनाडु राज्य (2005) 3 SCC 507 (iii) नीर्ष र न एवं अन्य बना ध्य प्रदेश राज्य एवं अन्य (2007) 1 SCC 262 (iv) अ रेन्दु ज्योति एवं अन्य बना छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य

क े वाद ें Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds यह व्यक्त क्रिकया गया है, क्रिक यक्रिद वैवाक्रिहक घर ें पत्नी क े प्रति की गई ू र ा क े कारण वह अपने पै ृक घर ें आश्रय ले ी है और यक्रिद पै ृक घर ें ू र ा कारिर करने का क्रिवशेर्ष क ृ त्य पति या उसक े क्रिकसी संबं ी क े कारण नहीं हुआ है, ो ारा 498 क क े अन् ग" ऐसे न्यायालय ें काय"वाही का आरम्भ, जिजसकी, जहां उसका पै ृक घर स्थिस्र्थी है, पर अति कारिर ा है, अनु न्य नही होगी । उपरोक्त ा लों ें जो ुख्य थ्य ध्यान देने योग्य है, वह यह है, क्रिक पीक्रिड़ पत्नी की ओर से वैवाक्रिहक घर छोड़ने क े पश्चा ् पै ृक घर ें ू र ा या उत्पीड़न कारिर करने का आरोप नहीं लगाया गया र्थीा । इन्हीं परिरस्थिस्र्थीति यों ें उपरोक्त ा लों ें यह व्यक्त क्रिकया गया र्थीा, क्रिक वैवाक्रिहक घर ें ू र ा का अपरा कारिर क्रिकया जाना, पै ृक घर, जहां पर बाद ें पीक्रिड़ पत्नी चली गई हो, ें अपरा क े चालू रहने क े बराबर नहीं है ।

4. सुजा ा ुखज( बना प्रशान् क ु ार ुखज( (1997) 5 SCC 30; सुनी ा क ु ारी कश्यप बना क्रिबहार राज्य एवं अन्य (2011) 11 SCC 301 और ध्य प्रदेश राज्य बना सुरेश कौशल एवं अन्य (2003) 11 SCC 126 क े ा लों ें स्पष्ट ः अलग दृक्रिष्टकोण अपनाया गया है । हालांक्रिक उक्त दृक्रिष्टकोण प्रत्येक प्रश्नग ् ा लों क े क्रिवशेर्ष थ्यों पर आ ारिर प्र ी हो सक ा है । उदाहरण क े लिलए सुजा ा ुखज( (उपरोक्त) क े ा ले ें एक क्रिवशेर्ष आरोप यह लगाया गया र्थीा, क्रिक पति ने वैवाक्रिहक घर ें ू र ा कारिर करने क े पश्चा पत्नी क े पै ृक घर जाकर, जहां पर उसने आश्रय लिलया र्थीा, उसका उत्पीड़न क्रिकया । उक्त थ्यों क े आ ार पर सुजा ा ुखज( (उपरोक्त) क े ा ले ें इस न्यायालय ने अव ारिर क्रिकया, क्रिक यह अपरा दं. प्र. सं. की ारा 178 (ग) क े अन् ग" एक स अपरा है । सुनी ा क ु ारी कश्यप (उपरोक्त) क े ा ले ें यह आरोप र्थीा, क्रिक पति क े द्वारा पत्नी से बुरा ब ा"व क्रिकया गया । जिजसने उसे उसक े पै ृक घर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds छोड़ क्रिदया और उसक े बाद पति ने उसक े बारे ें कोई खोजबीन नहीं की । आगे यह भी आरोप र्थीा, क्रिक जब पत्नी ने पति से सम्पक " करने का प्रयास क्रिकया, ो उसने कोई उत्तर नहीं क्रिदया । उक्त थ्यों ें न्यायालय ने यह व्यक्त क्रिकया, क्रिक पै ृक घर ें ारा 498 क क े अन् ग" अपरा क े क्रिनक्रिह ार्थी" घक्रि{ हुए और इसलिलए उस जगह की न्यायालय को दं. प्र. सं. की ारा 179 क े आलोक ें आरोक्रिप अपरा का संज्ञान लेने की अति कारिर ा होगी । इसी रह ध्य प्रदेश राज्य बना सुरेश कौशल (उपरोक्त) क े ा ले ें पत्नी को वैवाक्रिहक घर ें की गई ू र ा क े कारण उसक े पै ृक घर जबलपुर ें गभ"पा हो गया । यह अव ारिर क्रिकया गया, क्रिक पत्नी क े पै ृक घर क े स्र्थीान की न्यायालय को दं. प्र. सं. की ारा 179 क े अन् ग" परिरवाद की सुनवाई का क्षेत्राति कार होगा ।

5. उपरोक्त दो जिजस पर सन्दर्भिभ क्रिवद्व बेंच ने व " ान सन्दभ" दे े हुए क्रिवचार क्रिकया है, यर्थीा पूव" ः दृष्टव्य, न्यायलय क े स क्ष दो रह क े ा लों क े क्रिवशिशष्ट थ्यों पर आ ारिर र्थीे । ा लों क े थ्यों क े आलोक ें जिजस ें वे न्यायालय द्वारा व्यक्त क्रिकए गए र्थीे, दोनों ों की संवहनीय ा संभव र्थीी । प्रश्नग ् ा ले ें न्यायालय क े स क्ष हालांक्रिक अलग क्रिवर्षय है । क्या एक ऐसे ा ले ें जहां पति क े द्वारा या पति क े संबंति यों द्वारा वैवाक्रिहक घर ें ू र ा कारिर की गई हो और पत्नी वैवाक्रिहक घर छोड़कर अन्यत्र स्थिस्र्थी पै ृक घर ें आश्रय लिलया हो, क्या पत्नी क े पै ृक घर क े स्र्थीान पर स्थिस्र्थी न्यायालय को, ारा 498 क क े अन् ग", परिरवाद क े सुनवाई की अति कारिर ा होगी । यह एक ऐसी स्थिस्र्थीति ें, जहां पर पति क े द्वारा, पै ृक घर पर जहां पत्नी ने आश्रय लिलया है, ू र ा या उत्पीड़न क े स्पष्ट क ृ त्य का आरोप नहीं है ।

6. दण्ड प्रक्रि या संक्रिह ा 1973 ( दं.प्र.सं.) का आपराति क न्यायलयों की जाँच व क्रिवचारण संबं ी अति कारिर ा से संबंति अध्याय XIII क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उपबं ो पर एक दृक्रिष्टपा आवश्यक होगा । दण्ड प्रक्रि या संक्रिह ा की ारा 177 का यह उपबं है, क्रिक "प्रत्येक अपरा की जाँच और क्रिवचारण सा ान्य ः ऐसे न्यायालय द्वारा क्रिकया जाएगा, जिजसकी स्र्थीानीय अति कारिर ा क े अन् ग" वह क्रिकया गया है । " अ ः यह स्पष्ट है, क्रिक सा ान्य स्थिस्र्थीति यों ें जिजस न्यायालय की अति कारिर ा ें अपरा कारिर क्रिकया जा ा है उसी न्यायालय को प्रश्नग ् अपरा का संज्ञान लेने की शक्रिक्त और प्राति कार होगा ।

7. ारा 178 और 179 उपरोक्त क्रिनय क े अपरा हैं जो इस प्रकार हैं - "178. जाँच या क्रिवचारण का स्र्थीान, - (क) जहां यह अक्रिनश्च है, क्रिक कई स्र्थीानीय क्षेत्रों ें से क्रिकस ें अपरा क्रिकया गया है, अर्थीवा (ख) जहां अपरा अंश ः एक स्र्थीानीय क्षेत्र ें और अंश ः क्रिकसी दूसरे ें क्रिकया गया है, अर्थीवा (ग) जहां अपरा चालू रहने वाला हो और उसका क्रिकया जाना एक से अति क स्र्थीानीय क्षेत्रों ें चालू रह ा है, अर्थीवा (घ) जहां वह क्रिवशिभन्न स्र्थीानीय क्षेत्रों ें क्रिकए गए कायI से क्रि लकर बन ा है, वहां उसकी जाँच या क्रिवचारण ऐसे स्र्थीानीय क्षेत्रों ें से क्रिकसी पर अति कारिर ा रखने वाले न्यायालय द्वारा क्रिकया जा ा है । " "179. अपरा वहां क्रिवचारणीय होगा जहां काय" क्रिकया गया या परिरणा क्रिनकला - जब कोई काय" क्रिकसी की गई बा क े और क्रिकसी क्रिनकले हुए परिरणा क े कारण अपरा है, ब ऐसे अपरा की जाँच या क्रिवचारण ऐसे न्यायालय द्वारा क्रिकया जा सक ा है, जिजसकी स्र्थीानीय अति कारिर ा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क े अन्दर ऐसी बा की गई या परिरणा क्रिनकला । "

8. ारा 178 दूसरे स्र्थीानीय क्षेत्रों ें स्थिस्र्थी न्यायालयों को जहां अपरा अंश ः क्रिकया गया हो, को संज्ञान लेने की अनु ति देकर "सा ान्य क्रिनय " यर्थीा ारा 177 ें क्रिवक्रिह, का अपवाद सृजिज कर ी है और यक्रिद एक स्र्थीानीय क्षेत्र ें क्रिकया गया अपरा दूसरे स्र्थीानीय क्षेत्र ें चालू रह ा है, ो दूसरे स्र्थीानीय क्षेत्र ें स्थिस्र्थी न्यायालय ा ले का संज्ञान लेने ें सक्ष होगा । ारा 179 क े अन् ग" यक्रिद क्रिकसी आपराति क क ृ त्य से क्रिनकले परिरणा क े कारण कोई अपरा दूसरे क्षेत्राति कार ें हो ा है ो वहां पर स्र्थीानीय अति कारिर ा रखने वाला न्यायालय भी संज्ञान लेने ें सक्ष होगा । इस प्रकार यक्रिद अपरा अंश ः एक स्र्थीान पर क्रिकया गया हो और अंश ः दूसरे; या अपरा चालू रहने वाला अपरा हो या जहां क्रिकसी आपराति क क ृ त्य का परिरणा दूसरे स्र्थीान पर होने वाले अपरा क े रूप ें परिरण हो, "सा ान्य क्रिनय " का अपवाद लागू होगा और जिजस न्यायालय की अति कारिर ा ें आपराति क क ृ त्य क्रिकया जा ा है, उसकी अपरा का क्रिवचारण करने की अनन्य अति कारिर ा जा ी रहेगी ।

9. इस स्थिस्र्थीति ें 'चालू रहने वाले अपरा ' से क्या ात्पय" है, इस पर ध्यान देना आवश्यक होगा । यह क्रिवर्षय क्रिबहार राज्य बना देव करन नेन्सी (1972) 2 SCC 890 क े ा ले ें उत्तरिर होने क े कारण अक्रिनण( क्रिवर्षय नहीं है । पैराग्राफ 5 पर ध्यान देना उपयोगी होगा । "5. एक ' चालू रहने वाला अपरा ' वह है जिजसका सा त्य बो गम्य है और जो एक बार क्रिक े ए गए अपरा से पृर्थीक्करणीय है । यह उन अपरा ों ें से एक है, जो क्रिकसी क्रिनय या इसकी श I को ानने या उसका पालन करने ें क्रिवफल ा से उत्पन्न हो ा है और जिजस ें दण्ड का क्रिव ान हो ा है, जिजसका उत्तरदातियत्व ब क जारी रह ा है, जब क Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क्रिनय या इसकी श I का पालन नहीं हो जा ा । प्रत्येक ऐसे अवसर पर जब ऐसी अवज्ञा या गैर अनुपालन हो ा है और पुनः हो ा है ो अपरा कारिर हो ा है । दो रह क े अपरा ों क े बीच भेद ऐसे काय" या क्रिवलोप क े बीच हो ा है जिजस ें क्रिक एक अपरा एक बार हो ा है और एक ऐसा काय" या क्रिवलोप जो चालू रह ा है और इसलिलए प्रत्येक बार या प्रत्येक अवसर पर जब यह हो ा है, अपरा बन ा है । ' चालू रहने वाला अपरा ' क े ा ले ें अपरा क े सा त्य का त्व हो ा है, जो ऐसे अपरा क े ा ले ें अनुपस्थिस्र्थी हो ा है, जो ब घक्रि{ हो ा है जब कोई काय" या क्रिवलोप एक बार क े लिलए हो ा है । "

10. जो प्रश्न उत्तर क े लिलए उठा है, उसका ारा 178 (ख) या (ग) क े प्राव ानों से कोई लेना- देना नहीं है । जिजस बा का क्रिन ा"रण क्रिकया जाना है, वह यह है, क्रिक क्या ारा 179 द्वारा सृजिज अपवाद का उस न्यायालय को अति कारिर ा प्रदान करने ें कोई प्रयोग होगा, जो क्रिक उस जगह स्थिस्र्थी है जहां पत्नी का पै ृक घर अवस्थिस्र्थी है ।

11. इस प्रश्न का उत्तर देने क े लिलए आपराति क क्रिवति ( दूसरा संशो न अति क्रिनय, 1983 (अति क्रिनय 46 वर्ष" 1983) ) क े उद्देश्य और युक्रिक्तयुक्त ा कर्थीन को देखना होगा, जिजसक े द्वारा ारा 498 क को जोड़ा गया र्थीा । इस ारा क े सन्दभ" ें प्रर्थी ः ध्या व्य है: "498 क. क्रिकसी स्त्री क े पति या पति क े ना ेदार द्वारा उसक े प्रति ू र ा करना--- जो कोई, क्रिकसी स्त्री का पति या पति का ना ेदार हो े हुए, ऐसे स्त्री क े प्रति ू र ा करेगा, वह कारावास से, जिजसकी अवति ीन वर्ष" क की हो सक े गी, दस्थिण्ड क्रिकया जाएगा और जु ा"ने से भी दण्डनीय होगा । स्पष्टीकरण--- इस ारा क े प्रयोजनों क े लिलए, " ू र ा " से क्रिनम्नलिललिख अशिभप्रे है- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (क) जानबूझकर क्रिकया गया कोई आचरण जो ऐसी प्रक ृ ति का है जिजससे उस स्त्री को आत् हत्या करने क े लिलए प्रेरिर करने की या उस स्त्री क े जीवन, अंग या स्वास्थ्य को (जो चाहे ानजिसक हो या शारीरिरक) गंभीर क्षति या ख रा कारिर करने की संभावना है; या (ख) क्रिकसी स्त्री को ंग करना, जहां उसे या उससे संबंति क्रिकसी व्यक्रिक्त को क्रिकसी सम्पलित्त या ूल्यवान प्रति भूति क े लिलए क्रिकसी क्रिवति क्रिवरुद्ध ाँग को पूरी करने क े लिलए प्रपीक्रिड़ करने की दृक्रिष्ट से या उसक े अर्थीवा उससे संबंति क्रिकसी व्यक्रिक्त क े ऐसे ाँग पूरी करने ें असफल रहने क े कारण इस प्रकार ंग क्रिकया जा रहा है । "

12. भार ीय दण्ड संक्रिह ा की ारा 498 क को आपराति क क्रिवति (दूसरा संशो न) अति क्रिनय, 1983 क े द्वारा जोड़ा गया र्थीा । भार ीय दण्ड संक्रिह ा ें उपरोक्त संशो न क े अति रिरक्त दण्ड प्रक्रि या संक्रिह ा 1973 की ारा 174 और 176 क े, आत् हत्या क े द्वारा ृत्यु क े ा ले ें पुलिलस जाँच और ऐसी ृत्यु क े कारणों की जिजस्{्रे{ द्वारा जाँज संबं ी -- प्राव ानों को भी संशोति क्रिकया गया र्थीा । दण्ड प्रक्रि या संक्रिह ा ें ारा 498 क क े अन् ग" अपरा ों क े अशिभयोजन हे ु ारा 198 क को भी जोड़ा गया र्थीा । आगे दं.प्र.सं. की प्रर्थी अनुसूची ें संशो न द्वारा ारा 498 क क े अन् ग" अपरा को संज्ञेय और गैर- ज ान ी बनाया गया । आपराति क क्रिवति (दूसरा संशो न) अति क्रिनय, 1983 द्वारा भार ीय साक्ष्य अति क्रिनय ें ारा 113 क जोड़ा जाना अत्यति क हत्व का है, जो क्रिववाक्रिह स्त्री द्वारा आत् हत्या क े दुष्प्रेरण की उप ारणा क्रिकए जाने का उपबं कर ा है । यक्रिद ऐसी आत् हत्या क्रिववाक्रिह स्त्री क े क्रिववाह की ति शिर्थी क े सा वर्ष" की अवति क े भी र की गई है और उसक े सार्थी ू र ा की गई है । ारा 113 क इन शब्दों ें है: "113-क. क्रिववाक्रिह क्रिहला द्वारा आत् हत्या क े दुष्प्रेरण क े संबं ें Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उप ारणा- जब प्रश्न यह हो, क्रिक क्रिकसी स्त्री द्वारा की गई आत् हत्या उसक े पति द्वारा या पति क े क्रिकसी ना ेदार द्वारा दुष्प्रेरिर की गई र्थीी और यह दशा"या जा ा है, क्रिक उसने आत् हत्या क्रिववाह की ति शिर्थी क े सा वर्ष" की अवति क े भी र की र्थीी और यह क्रिक उसक े पति या पति क े क्रिकसी ना ेदार ने उसक े सार्थी ू र ा की र्थीी, ा ले क े अन्य परिरस्थिस्र्थीति यों क े दृक्रिष्टग ्, न्यायालय यह उप ारणा कर सक ा है, क्रिक ऐसी आत् हत्या उसक े पति या पति क े ऐसे ना ेदार द्वारा दुष्प्रेरिर की गई र्थीी । स्पष्टीकरण- इस ारा क े उद्देश्यों क े लिलए " ू र ा " का वही अर्थी" होगा जो क्रिक भार ीय दण्ड संक्रिह ा की ारा 498 क ें है । ( 45, वर्ष"

1860) "

13. उपरोक्त संशो न क े पीछे उद्देश्य स्त्री का या उससे संबंति क्रिकसी व्यक्रिक्त को क्रिकसी संपलित्त या क्रिवति क्रिवरूद्ध ाँग को पूरा करने क े लिलए उत्पीड़न क े ा ले से क्रिनप{ने क े अलावा क्रिनःसंदेह पत्नी पर पति और पति क े ना ेदारों द्वारा ू र ा क े बढ़ े ा लों का ुकाबला करना र्थीा । जिजससे क्रिक पत्नी आत् हत्या कर ले ी है या उसे गंभीर क्षति पहुंच ी है । संशो न क े उपरोक्त अशिभकशिर्थी उद्देश्य को प्रश्नग ् ा ले ें उठ े प्रश्नों का उत्तर दे े स य नजरअंदाज नही क्रिकया जा सक ा । अ ः न्यातियक प्रयास प्रश्नग ् उपबं ों को जोड़ने क े पीछे क े स्पष्य उद्देश्य क े आलोक ें यर्थीा पूव" ः ध्या व्य आपराति क क्रिवति (क्रिद्व ीय संशो न) अति क्रिनय, 1983 द्वारा जोड़ी गई क्रिवति यों क े उपबं ों को सदैव अति क परिरणा ोत्पादक और प्रभावी बनाना होना चाक्रिहए ।

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14. " ू र ा " को जो क्रिक भा.दं.सं. की ारा 498 क क े अन् ग" अपरा का सार है, ब्लैक्स लॉ तिडक्शनरी ें क्रिकसी जीक्रिव जीव क्रिवशेर्ष ः ानव पर ानजिसक या शारीरिरक कष्ट क े "सोद्देश्य" और दोर्षपूण" अति रोपण; बुरे ब ा"व; गुस्सा (गाली-गलौज, अ ानवीय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds व्यवहार, अ या"क्रिद आचरण) क े रूप ें परिरभाक्रिर्ष क्रिकया गया है । ू र ा शारीरिरक या ानजिसक दोनों प्रकार की ू र ा हो सक ी है । पति की या उसक े ना ेदारों की ओर से ऐसे स्पष्ट कायI का पत्नी क े ानजिसक स्वास्थ्य पर प्रभाव; वैवाक्रिहक घर से क्रिनकाले जाने की ानजिसक यंत्रणा और उसी घर ें बुरे ब ा"व क े भय क े चल े वापस जाने की उसकी असहाय ा, ऐसे आया हैं, जिजन्हें भार ीय दण्ड संक्रिह ा की ारा 498 क ें आने वाले " ू र ा" क े अर्थी" को स झ े स य नजरअंदाज नहीं क्रिकया जा सक ा । पत्नी पर भावनात् क अवसाद या नोवैज्ञाक्रिनक प्रभाव, चाहे शारीरिरक क्षति भले न हो, उसक े वैवाक्रिहक घर छोड़ने और पै ृक घर ें आश्रय लेने क े बाद भी या ना दे े रहेंगे । चाहे भले ही वैवाक्रिहक घर ें की जाने वाली शारीरिरक ू र ा रुक गई हो और पै ृक घर ें ऐसे क ृ त्य न हो े हों, इस ें कोई सन्देह नहीं क्रिक गाली-गलौज सक्रिह, यक्रिद ऐसा क ु छ हो ो, पति क े कायI, जिजसने पत्नी को वैवाक्रिहक घर छोड़ने और ा ा-क्रिप ा क े यहां आश्रय लेने को बाध्य क्रिकया र्थीा, द्वारा ानजिसक या ना और नोवैज्ञाक्रिनक अवसाद पै ृक घर ें भी जारी रहेंगे । शारीरिरक ू र ा से उत्पन्न ानजिसक ू र ा या गाली-गलौज पै ृक घर ें भी जारी रहेंगे चाहे ऐसे स्र्थीान पर स्पष्ट शारीरिरक ू र ा का कोई काय" भले न हो ।

15. क्रिहलाओं का घरेलू हिंहसा से संरक्षण अति क्रिनय, जैसा क्रिक इसक े अति क्रिनय न का उद्देश्य दर्भिश करेगा, भार ीय दण्ड संक्रिह ा की ारा 498 क क े अन् ग" दी गई आपराति क क्रिवति ें उपचार की ुलना ें घरेलू हिंहसा क े भुक्तभोक्रिगयों को जिसक्रिवल उपचार प्रदान करने क े लिलए है । क्रिहलाओं का घरेलू हिंहसा से संरक्षण अति क्रिनय, 2005 ें घरेलू हिंहसा की परिरभार्षा क्षति या उपहति जो स्वास्थ्य, सुरक्षा, जीवन, अंग या क ु शलक्षे, ानजिसक या शारीरिरक को ख रा हो, और भावनात् क दुव्य"वहार को ध्यान ें रखकर की गई है । उक्त परिरभार्षा का, उक्त कारणों से, क्रिनश्चय ही भार ीय दण्ड संक्रिह ा की ारा 498 क क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds स्पष्टीकरण क & ख क े सार्थी क्रिनक{ संबं है जो क्रिक ू र ा को परिरभाक्रिर्ष कर ी है । भार ीय दण्ड संक्रिह ा की ारा 498 क ें क्रिनक्रिह प्राव ान क्रिनःसंदेह पत्नी क े ानजिसक और शारीरिरक क ु शरक्षे को स ाक्रिवष्ट कर े हैं । पत्नी की खा ोशी ें भी भावनात् क अवसाद और ानजिसक व्यर्थीा का त्व हो सक ा है । पै ृक घर पर उसका कष्ट, वैवाक्रिहक घर पर पति द्वारा की गई ू र ा क े कारण हो सक ी है । जो क्रिक क्रिनःसंदेह वैवाक्रिहक घर पर क्रिकए गए कायI का परिरणा हो सक ा है । ऐसे परिरणा स्वंय पै ृक घर जहां पर उसने आश्रय लिलया है, पर अलग अपरा क े बराबर होंगे । पै ृक घर ें उसक े ानजिसक स्वास्थ्य पर पड़ने वाला प्रति क ू ल प्रभाव, यद्यक्रिप क्रिक वैवाक्रिहक घर पर क्रिकए गए कायI क े कारण, ह ारे सुतिचस्थिन् क्रिवचार से, पै ृक घर पर ारा 498 क क े अर्थीI ें ू र ा क्रिकए जाने क े बराबर होंगे । वैवाक्रिहक घर पर की गई ू र ा का परिरणा पै ृक घर पर एकाति क बार क्रिकए गए अपरा क े रूप ें हो ा है । यह उस प्रकार का अपरा है जो दं. प्र. सं. की ारा 179 ें कस्थिल्प है । जो क्रिक सी े व " ान ा ले ें उठाए गए प्रश्न क े उत्तर क े रूप ें लागू होगा ।

16. अ ः ह ारा ानना है, क्रिक उस स्र्थीान की न्यायालय जहां पर पत्नी पति द्वारा या उसक े ना ेदारों द्वारा ू र ा क े क ृ त्य की वजह से अपना वैवाक्रिहक घर छोड़ने या क्रिनकाले जाने क े बाद आश्रय ले ी है, का थ्यात् क परिरस्थिस्र्थीति क े आ ार पर भार ीय दण्ड संक्रिह ा की ारा 498 क क े अन् ग" कारिर अपरा ों क े आरोप क े परिरवाद की सुनवाई की भी अति कारिर ा होगी ।

17. उपरोक्त क े द्देनजर ें सभी अपीलों का क्रिनप{ारा क्रिकया जा ा है ।................................... Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (रंजन गोगोई, भार क े ुख्य न्याया ीश)................................... (न्याय ूर्ति एल. नागेश्वर राव)...................................... (न्याय ूर्ति संजय क्रिकशन कौल) नई क्रिदल्ली; अप्रैल 09, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds