Shuma Devi v. Shishupati Devi & Ors.

Supreme Court of India · 08 Apr 2019
Abhay Manohar Sapre; Vidnesh Maheshwari
Civil Appeal Nos. 3448-3449 of 2019 (SLP (C) Nos. 7837-7838 of 2014)
2019 INSC 475
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court set aside the non-speaking order of the Allahabad High Court dismissing a writ petition and remanded the matter for fresh adjudication, emphasizing the necessity of reasoned judicial orders under Article 227.

Full Text
Translation output
अ-प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपीलीय सं. 3448-3449/2019
(SLP (C) सं. 7837-7838/ 2014 से उत्पन्न)

ु शुमा देवी ........ अपीलार्थी#(गण)
बनाम
शिशवपति देवी (डी) और अन्य .......... प्रत्यर्थी#(गण)
विनण+य
न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे,
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गर्इ+।

2. यह अपील उच्च न्यायालय र्इलाहाबाद क े सी.एम.डब्लू.पी. संख्या 3231/ 2002 क े 27. 07. 2012 विदनाविक आैर सी.एम.आर.ए संख्या 247546/ 2013 क े 16. 01. 2013 विदनांविक पारिर आदेश क े विवरूद्घ दाखि<ल की गर्इ+ है vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2019 INSC 475

3. र्इन अपीलों क े विनस् ारण क े खिलए क ु छ थ्यों का उल्ले< यहां विकया जाना चाविहए सिजसमें एक छोटा बिंबदु शाविमल है।

4. अपीलक ा+ ने प्रत्यर्थी#ओं क े खि<लाफ एक विनष्कासन यातिचका दायर की। प्रकीण+ क े स नंबर 18/1990 क े विदनांविक 19. 04. 1996 क े आदेश से, सिसविवल न्याया ीश ने मुकदमे का फ ै सला विकया और प्रत्यर्थी#ओं क े खि<लाफ बेद<ली क े खिलए फ ै सला सुनाया। उक्त आदेश से प्रत्यर्थी# व्यशिर्थी हुए और अपर सिजला न्याया ीश, कोट+ नंबर 8, फ ेहपुर की अदाल में रेंट अपील नंबर 4/1996 दायर विकया। 04. 12. 2001 क े आदेश से पहले अपीलीय अदाल ने अपील को अनुमति दी और अपीलक ा+ द्वारा दायर विनष्कासन यातिचका को <ारिरज कर विदया। उक्त विनण+य से अपीलक ा+ व्यशिर्थी हुए और र्इलाहाबाद क े उच्च न्यायालय में एक रिरट यातिचका दायर की। 27. 07. 2012 क े आक्षेविप आदेश द्वारा, उच्च न्यायालय ने रिरट यातिचका को <ारिरज कर विदया और विदनांविक 4. 12. 2001 अति रिरक्त सिजला न्याया ीश, न्यायालय सं. 8, फ ेहपुर द्वारा अपीलार्थी# की अनुपस्थिस्र्थीति में पारिर आदेश की पुविN की । अपीलक ा+ ने 27. 07. 2012 क े आदेश को वापस लेने क े खिलए एक आवेदन दायर विकया। विदनांविक 16. 01. 2013 क े आदेश से उच्च न्यायालय ने उक्त आवेदन को <ारिरज कर विदया। अपीलक ा+ ने उक्त आदेशों से व्यशिर्थी हुए और र्इस अदाल में विवशेष अनुमति क े माध्यम से ये अपील दायर की है। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk: '' आक्षेविप आदेश से गुजरने क े बाद, मुझे हस् क्षेप करने क े खिलए कोर्इ+ स्पN अवैद्य ा या अविनयविम ा नहीं विमली। थ्य की <ोज दज+ की गई है सिजन्हें रिरकॉड+ पर सामग्री क े विवपरी या विवपरी नहीं विद<ाया गया है। र्इसखिलए मुझे हस् क्षेप करने का कोई कारण नहीं विमल ा है। दीवानी मेस में र्इस न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 227 क े ह न्यातियक समीक्षा का दायरा बहु सीविम और संकीण+ है। 1991 की रिरट यातिचका सं. 27433 (लाला राम नारायण बनाम एक्सएच अति रिरक्त सिजला न्याया ीश, मुरादाबाद और अन्य) ने 13. 07. 2012 को विनण+य खिलया। ऐसा क ु छ भी नहीं है जो कानून क े विनष्कासन क े आलोक में र्इस रिरट यातिचका में लगाए गए आदेश की न्यातियक समीक्षा को सही ठहरा सक ा है, जैसा विक उपरोक्त विनण+य में चचा+ की गई है। '’

6. संतिक्षप्त प्रश्न, जो र्इन अपीलों में विवचार क े खिलए उठ ा है, यह है विक उपरोक्त आक्षेविप आदेश कानूनी रूप से संवहनीय है या नहीं।

7. पक्षकारों क े विवद्व अति वक्ता को सुनने और मामले क े अशिभले< क े अवलोकन पर, हम र्इन अपीलों को अनुज्ञा करने क े खिलए विववश हैं, आक्षेविप आदेशों को अपास् कर दे े हैं और अपीलार्थी# की रिरट यातिचका को विवति क े अनुसार गुणागुण क े आ ार पर नए सिसरे से विवविनति^ करने क े खिलए उच्च न्यायालय में मामला प्रति प्रेविष कर े हैं vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk

8. मामले को उच्च न्यायालय में भेजने की आवश्यक ा र्इसखिलए हुई है क्योंविक ऊपर उसिल्लखि< 27. 07. 2012 क े लगाए गए आदेश क े अवलोकन से, हम पा े हैं विक यह एक अनुतिच आदेश है। दूसरे शब्दों में, उच्च न्यायालय ने न ो मामले में उत्पन्न होने वाले मुद्दों पर चचा+ की, न ही पार्टिटयों द्वारा आग्रह विकए गए विकसी भी प्रस् ुति करण से विनपटा और न ही कोई कारण ब ाया विक र्इसने रिरट यातिचका को <ारिरज क्यों विकया है।

9. र्इस न्यायालय ने लगा ार यह विन ा+रिर विकया है विक न्यायालय/न्यायाति करण/प्राति करण द्वारा पारिर प्रत्येक न्यातियक या/और अ + न्यातियक आदेश, जो पार्टिटयों क े बीच काय+वाहीयों क े द्वारा विनण+य विकया जाना चाविहएे आैर उसक े विनष्कष+ का सम+र्थीन करने क े खिलए उसक े कारणों का समर्थी+न अवश्य विकया जाना चाविहए। पक्षकार काय+वाही क े दौरान और र्इसखिलए भी आदेश की शुद्ध ा की जांच कर े समय अपीलीय/पुनरीक्षणीय न्यायालय को यह जानने का अति कार है विक विकस आ ार पर आदेश में एक विवशेष विनष्कष+ विनकाला गया है। विकसी भी चचा+ क े अभाव में, कारणों और प्रस् ुति याँ पर विनष्कषf का आग्रह विकया गया, यह जानना संभव नहीं है विक र्इस रह क े विनष्कष+ पर पहुंचने क े खिलए न्यायालय /न्यायाति करण/प्राति करण का क्या ने ृत्व विकया। (यह भी दे<ें महाराN्र राज्य बनाम विवट्ठल राव प्रीति राव चवान, (1981) 4 एससीसी 129, जवाहर लाल सिंसह बनाम नरेश सिंसह एंड अन्य (1987) 2 एससीसी 222, यू.पी. राज्य बनाम बट्टन और अन्य राज्य, (2001) 10 एससीसी 607, राज विकशोर झा बनाम विबहार राज्य और अन्य, (2003) 11 एससीसी 519 और उड़ीसा राज्य बनाम नीराम लुहार, (2004) 5 एससीसी 568)। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk

10. र्इन अपीलों में लगाए गए आदेश पूव क्त त्रुविट से ग्रस् हैं, क्योंविक, जैसा विक आदेश क े अवलोकन से स्पN होगा, उच्च न्यायालय ने लगाए गए आदेश को पारिर कर े हुए क े वल विबना विकसी चचा+, विनष्कष+ और कारण क े रिरट यातिचका को <ारिरज कर विदया।

11. र्इसखिलए, हमारा विवचार यह हैं विक र्इस रह का आदेश कानूनी रूप से विटकाऊ नहीं है और र्इसखिलए अपास् करने क े योग्य है।

12. पूव क्त चचा+ क े मद्देनजर, अपील सफल हो ी है और दनुसार अनुमति दी जा ी है। आक्षेविप आदेशों को अपास् विकया गया है। मामले को उच्च न्यायालय में रिरट यातिचका को नए सिसरे से य करने क े खिलए भेजा जा ा है,, कानून क े अनुसार उपरोक्त कर्थीनों को विवचार में र< े हुए र्इसक े विनपटान क े खिलए सिजसमें से ये अपीलें उत्पन्न हो ी हैं

13. चूंविक हमने मामले को गुणागुण क े आ ार पर नए सिसरे से विनपटान क े खिलए उच्च न्यायालय को भेजने क े खिलए एक राय बनाई है, हमने र्इन अपीलों को य कर े समय मामले की गुणागुण पर कोई राय व्यक्त नहीं की है। उच्च न्यायालय, र्इसखिलए, र्इस न्यायालय द्वारा र्इस आदेश में विकए गए विकसी भी अवलोकन से अप्रभाविव रिरट यातिचका को छह महीने क े भी र संभव रूप से अति मान ः य करेगा। vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA...................................... [न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे]...................................... [ न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी] नई विदल्ली; 08 अप्रैल, 2019. vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk