Full Text
भार ीय सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 2628 वर्ष! 2017
नगरआयुक्त, नगर विनगम, कानपुर .....अपीलार्थी, बनाम
श्री मुजीब उल्ला खान और अन्य ....... प्रत्यर्थी,(गण)
सह
सिसविवल अपील सं. 2629 वर्ष! 2017
नगर विनगम, गोरखपुर .....अपीलार्थी, बनाम
राम शंकर यादव एवं अन्य ....प्रत्यर्थी, (गण)
विनण!य
न्यायमूर्ति हेमन् गुप्ता
JUDGMENT
1. सिसविवल अपील सं. 2628 वर्ष! 2017 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े विवद्व एकल बेंच क े 19.04.2007 विदनांविक आदेश को चुनौ ी दी गई है, सिजसक े द्वारा विनयंत्रक प्राति कारी, कानपुर द्वारा ग्रैच्युटी भुग ान अति विनयम, 1972[1] क े अन् ग! 08.12.2006 विदनांविक आदेश में हस् क्षेप नहीं विकया गया र्थीा । 1 अति विनयम mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2019 INSC 449
2. सिसविवल अपील सं. 2629 वर्ष! 2017 को भी व !मान अपील क े सार्थी विवचार क े लिलए लिलया गया है, सिजसमें उच्च न्यायालय क े 02.05.2007 विदनांविक आदेश को चुनौ ी दी गयी है सिजसक े द्वारा विनयंत्रक प्राति कारी (अति रिरक्त श्रमायुक्त, गोरखपुर, उ.प्र.) द्वारा अति विनयम क े अन् ग! प्रत्यर्थी, क े पक्ष में ग्रेच्युटी हे ु यातिचका को मंजूरी दी गयी र्थीी ।
3. अपीलार्थी,, कानपुर नगर विनगम, उत्तर प्रदेश नगर विनगम अति विनयम, 1959 2 से शासिस हो ा है, जबविक प्रत्यर्थी, अपीलार्थी, का कम!चारी है । दोनों मामलों में कम!चारिरयों ने अति विनयम क े अन् ग! विनयंत्रक प्राति कारिरयों की अति कारिर ा का आश्रय लेकर ग्रेच्युटी का दावा विकया है । विवद्व एकल बेंच क े समक्ष अपीलार्थी, का क ! यह है, विक ग्रेच्युटी का भुग ान 1959 क े अति विनयम की ारा 548 विदनांक 11.01.1988 को यर्थीा संशोति क े अन् ग!, सेवा विनवृलित्त लाभों और सामान्य भविवष्य विनति विनयामकों 1962 3 क े अनुरूप विकया जा ा है । ऐसे विनयामक ग्रेच्युटी का भुग ान 16.[5] महीनों क े लिलए 15 विदन प्रति माह क े वे न क े आ ार पर य कर े हैं । उच्च न्यायालय ने यह पाया विक इस मामले में अति विनयम ही लागू हो ा है सिजसक े द्वारा ग्रेच्युटी की गणना 15 विदन प्रति माह क े वे न क े आ ार पर प्रत्येक पूरे विकए गए वर्ष! क े लिलए महीनों या उसक े विहस्से की सीमा विबना क े विकया जा ा है । 2 1959 का अति विनयम 3 1962 क े विनयामक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
4. अपीलार्थी, द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष विदया गया क ! यह है, विक गेच्युटी 1959 क े अति विनयम की ारा 548 (1), विदनांक 11.01.1988 को यर्थीा संशोति क े अन् ग! प्रकाशिश वर्ष! 1962 क े विनयामकों क े विनयम 4(1) क े ह देय हो ी है । अ ः विनगमों क े कम!चारीगण ऐसे विनयामकों क े ह ही ग्रेच्युटी क े हकदार हैं, अति विनयम क े अन् ग! नहीं ।
5. विदल्ली नगर विनगम बनाम रम प्रकाश शमा! एवं अन्य 4 क े आ ार पर उच्च न्यायालय ने माना विक क े वल क े न्द्र सरकार या राज्य सरकार क े कम!चारिरयों को ही अति विनयम की प्रयोज्य ा से छ ू ट है इसलिलए अपीलार्थी,गण क े कम!चारी अति विनयम से शासिस होंगे और उसमें उसिल्ललिख स्क े ल क े आ ार पर ग्रेच्युटी क े हकदार हैं । यह अव ारिर विकया गया, विक अति विनयम की ारा 2 (ङ) क े अन् ग! ‘कम!चारी’ की परिरभार्षा क े संबं ों में अति विनयम मात्र क े न्द्र सरकार या राज्य सरकार क े कम!चारिरयों पर ही लागू नहीं हो ा । अ ः विनगमों क े कम!चारी अति विनयम क े उपबं ों क े अनुसार ग्रेच्युटी क े हकदार हैं ।
6. उ.प्र. दुकान एवं वाशिणज्य अति ष्ठान अति विनयम, 1962 5 की ारा 3 क े आ ार पर अपीलार्थी, का यह मानना है, विक ऐसे अति विनयम सरकारी या स्र्थीानीय विनकायों क े काया!लयों पर लागू नहीं होंगे ।
5 1962 का अति विनयम Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अ ः ऐसे वै ाविनक प्राव ान क े बल पर यह क ! विदया गया, विक अति विनयम विनगमों क े संबं में लागू नहीं होगा । अपीलार्थी, कोई कारखाना, खान, ेलक्षेत्र, बागान, पो और रेलवे कम्पनी नहीं है । यह विक अति विनयम की ारा 1 (3) उपबं (ग) में यर्थीा अनुबद्ध कोई अति सूचना नहीं है । इसलिलए विनगमों क े कम!चारी 1959 क े अति विनयम की ारा 548 की शविक्तयों क े प्रयोग में बनाए गए विनयामकों क े ह ग्रेच्युटी क े हकदार हैं । अति विनयम क े अन् ग! नहीं ।
7. दूसरी ओर प्रत्यर्थी, क े विवद्वान अति वक्ता ने यह दर्शिश विकया है, विक क े न्द्र सरकार ने अति विनयम की प्रयोज्य ा को विनगमों क बढ़ाने हे ु 08.01.1982 को अति विनयम की ारा 1(3) (ग) क े ह अति सूचना प्रकाशिश विकया है । इस प्रकार अति विनयम विनगमों पर भी लागू हो ा है । अति विनयम क े प्रासंविगक प्राव ान इस प्रकार है: “1. संतिक्षप्त नाम, विवस् ार, प्रयोज्य ा और प्रव !न- (1) इस अति विनयम को ग्रैच्युटी भुग ान अति विनयम, 1972 कहा जाएगा । (2) इस का विवस् ार पूरे भार वर्ष! में होगा: सिसवाय जहां क यह बागानों या पो ों क े संबं में है, यह जम्मू और कश्मीर राज्य में लागू नहीं होगा । (3) यह लागू होगा – () प्रत्येक कारखाना, खान, ेलक्षेत्र, बागान, पो और रेलवे कम्पनी; () राज्य में दुकानों और प्रति ष्ठानों क े संबं में त्समय प्रवृत्त Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवति क े अर्थी! में प्रत्येक दुकान या प्रति ष्ठान सिजसमें पूव! क े बारह महीनों क े विकसी भी विदन दस या अति क लोग विनयोसिज हों या विनयोसिज रहे हों; () ऐसे अन्य प्रति ष्ठान या प्रति ष्ठानों की कोविट सिजसमें पूव! क े बारह महीनों क े विकसी भी विदन क े न्द्र सरकार द्वारा इस संबं में यर्थीा अति सूतिच दस या अति क कम!चारी विनयोसिज हों या विनयोसिज रहे हों । ”
8. उपरोक्त प्राव ानों का अवलोकन यह दर्शिश करेगा, विक अति विनयम विनम्न पर लागू हो ा है । (1) प्रत्येक कारखाना, खान, ेलक्षेत्र, बागान, पो और रेलवे कम्पनी; (2) राज्य में दुकानों और प्रति ष्ठानों क े संबं में त्समय प्रवृत्त विवति क े अर्थी! में प्रत्येक दुकान या प्रति ष्ठान सिजसमें दस या अति क लोग विनयोसिज हों, उक्त प्राव ान की दो श u हैं, जो हैं - (i) ) राज्य विवति क े अर्थीw में कोई दुकान या प्रति ष्ठान और (i) i) ) सिजसमें दस या अति क लोग विनयोसिज हों; और (3) प्रति ष्ठान या प्रति ष्ठानों की कोविट सिजसे क े न्द्र सरकार अति सूतिच करे ।
9. अपीलार्थी, अति विनयम की ारा 1(3) क े उपखंड (क) और (ख) द्वारा रतिक्ष नहीं हैं । उपखंड (क) प्राव ान पर लागू नहीं हो ा, लेविकन 1962 क े अति विनयम की ारा 3 (ग) क े दृविzग उपखंड (ख) भी लागू नहीं हो ा क्योंविक ऐसा अति विनयम सरकारी या स्र्थीानीय विनकायों क े काया!लयों पर लागू नहीं हो ा है । स्र्थीानीय प्राति कारी का अर्थी! है कोई नगर पालिलकीय कमेटी, तिडस्ट्रिस्ट}क्ट बोड! आविद या सा ारण खण्ड अति विनयम, 1897 की ारा 3 (31) क े ह नगर पालिलकीय या स्र्थीानीय विनति क े विनयंत्रण या प्रबं न में संलग्न विनकाय ।
10. उपरोक्त क े संबं में अति विनयम की ारा 1 (3) (ग) क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ह क े न्द्र सरकार ने 08.01.1982 को एक अति सूचना प्रकाशिश की और ऐसे स्र्थीानीय विनकायों को विवविनर्दिदz विकया सिजसमें प्रति ष्ठान की कोविट क े रूप में, सिजस पर यह अति विनयम लागू हो ा है, पूव! क े बारह महीने क े विकसी भी विदन दस या अति क लोग विनयोसिज हों या विनयोसिज रहे हों । 08.01.1982 विदनांविक उक्त अति सूचना इस प्रकार है । “ नई विदल्ली, 8 जनवरी 1982 अति सूचना S.O. No. 239 …. ग्रैच्युटी भुग ान अति विनयम, 1972 (39 वर्ष! 1972) की ारा 1 की उप ारा (3) क े खंड (ग) द्वारा प्रदत्त शविक्तयों क े प्रयोग में क े न्द्र सरकार ए द्द्वारा ‘स्र्थीानीय विनकायों’ को विवविनर्दिदz कर ी है सिजसमें पूव! क े बारह महीनों क े विकसी भी विदन दस या अति क लोग विनयोसिज हों या रहे हों, प्रति ष्ठान की एक कोविट क े रूप में सिजस पर उक्त अति विनयम इस अति सूचना क े राज्यपत्र में प्रकाशन की ति शिर्थी से लागू होगा । Sd/. (आर.क े.ए. सुब्रामण्या) अति रिरक्त सतिचव (F.No.S- 70020/16/77-FPG)”
11. हम पा े हैं, विक 8.01.1982 विदनांविक अति सूचना को उच्च न्यायालय क े समक्ष सन्दर्शिभ नहीं विकया गया र्थीा । ऐसी अति सूचना विबल्क ु ल स्पz कर दे ी है, विक अति विनयम स्र्थीानीय विनकाय अर्थीा! ् नगर विनगमों पर लागू हो ा है । अति विनयम की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ारा 14 ने विकसी अन्य अति विनयम में विकसी असंग प्राव ान पर अध्यारोही प्रभाव प्रदान विकया है । उक्त प्राव ान इस प्रकार है: “14. अति विनयम का अन्य अति विनयमनों पर अध्यारोही होना, इत्याविद – इस अति विनयम क े प्राव ान या इसक े अन् ग! बनाया गया कोई विनयम इस अति विनयम क े अलावा विकसी अति विनयम में या विकसी लिलख या संविवदा में विनविह इस अति विनयम से अलग अति विनयम होने क े कारण प्रभाव रखने वाले इससे असंग विकसी उपबं पर अध्यारोही प्रभाव रहेगा ।
12. अति विनयम की ारा 14 क े दृविzग, ग्रेच्युटी क े भुग ान संबं ी राज्य अति विनयम का प्राव ान स्र्थीानीय विनकाय क े कम!चारिरयों पर लागू नहीं होगा ।
13. विदल्ली नगर विनगम (उपरोक्त) क े मामले में विदए गए विनण!य में अति विनयम की ारा 2 (ङ) को ही सन्दर्शिभ विकया गया र्थीा । उक्त विनण!य CCS (पेंशन) विनयम 1972 6 क े सन्दभ! में है,
6. 1972 का विनयम Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जो स्पz ः पेंशन और ग्रेच्युटी क े भुग ान का उपबं कर ा है। अति विनयम नगर पालिलकाओं पर लागू हो ा है, इसलिलए यविद 08.01.1982 विदनांविक अति सूचना को संदर्शिभ न भी विकया गया हो, ो इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ ा ।
14. अपीलार्थी, का समस् क ! यह है, विक राज्य अति विनयम क े न्द्रीय अति विनयम की ुलना में ग्रेच्युटी का विनब!न् नात्मक लाभ प्रदान कर ा है । ऐसा क ! अति विनयम की ारा 14 क े आलोक में मान्य नहीं है । और ग्रेच्युटी का उदार भुग ान कम!चारिरयों क े विह में है । इस प्रकार ग्रेच्युटी अति विनयम क े अन् ग! देय होगी । ऐसा ही दृविzकोण विनयंत्रक प्राति कारी द्वारा अपनाया गया है ।
15. उपरोक्त क े दृविzग हम पा े है विक अति विनयम क े अन् ग! विनयंत्रक प्राति कारिरयों द्वारा विदए गये और उच्च न्यायालय द्वारा अशिभपुz आदेशों में कोई त्रुविट नहीं है । परिरणामस्वरुप अपील विनरस् की जा ी है । …………….. (न्यायमूर्ति मोहन एम. शां नागौदर) ……………….. (न्यायमूर्ति हेमं गुप्ता) नई विदल्ली अप्रैल 2, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds