Full Text
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील सं. 3399/2019
( एस. एल. पी. (सी) सं. 21469/2012 से उद्भू )
भगवान दास गोयल (मृ ) क
े माध्यम से ...........अपीलार्थी1 (गण)
उसक
े विवति3क प्रति विनति3 एवं अन्य
बनाम
प्यारे विकशन अग्रवाल ............प्रत्यर्थी1 (गण)
विनण9य
न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गयी।
2. यह अपील रिरट सी. सं. 14839/1993 क े ह मा. उच्च न्यायालय इलाहाबाद क े अन्तिन् म विनण9य क े विवरूद्ध विनदFशिश है सिIसे अपीलार्थिर्थीयों द्वारा दायर रिरट यातिMका को मा. उच्च न्यायालय ने खारिरI कर विदया और ओ. एस. सं. 140/1992 में सिसविवल न्याया3ीश, झाँसी द्वारा पारिर आदेश विदनांक 18.03.1993 को सही ठहराया।
3. इस अपील क े विनस् ारण हे ु यहाँ नीMे क ु छ विबन्दुओं का उल्लेख विकया Iाना अत्यावश्यक है, Iो विक छोटे विवन्दु में शाविमल हैं।
4. प्रत्यर्थी1गण मूल प्रति वादीगणों क े विवति3क प्रति विनति3 हैं और प्रत्यर्थी1 इसक े अनुक ू ल वादी हैं Iो विक इस अपील से उद्भू है।
5. प्रत्यर्थी1 ने अपीलार्थिर्थीयों क े विवरूद्ध पूव9व 1 शीर्ष9क में मध्यस्र्थी ा अति3विनयम 1940 (अब बदली Iा Mुकी ) क े 3ारा 20 क े ह एक प्रार्थी9ना पत्र दायर विकया। प्रार्थी9ना पत्र परस्पर आरोपों में पाई गयी विक विदनांक 05.07.1960 को पूव9व 1 शीर्ष9क में अपीलार्थी1 और प्रत्यर्थी1 क े बीM “गुप्ता बस सर्विवस” में भागीदारी र्थीी।
6. र्थीाविप, इस व्यवसाय-प्रति ष्ठान (गुप्ता बस सर्विवस) क े भागीदारों क े बीM विववाद पैदा हुई, सिIसक े परिरणामस्वरूप इसका विवघटन हुआ। यह आरोविप हुआ विक पक्षों और भागीदारों क े बीM विववादों की उत्पन्न ा क े संकल्प क े लिलए खण्ड 11 क े भागीदारी विवलेख मध्यस्र्थी द्वारा / पंM द्वारा प्रदान हुआ। अ ः प्रत्यर्थी1 ने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रर्थी9ना की विक भागीदारी विवलेख क े खणड 11 की श n में विववादों क े विनण9य हे ु,. Iो विक भागीदारी सम्बन्3ी पक्षों क े बाM उत्पन्न हो, एक मध्यस्र्थी की विनयुविp हो।
7. प्रत्यर्थी1 (प्रति वादी) ने प्रर्थीम ः यहाँ सेवा बढ़ोत्तरी का विववाद उठने पर आपलित्त Iाविहर विकया, Mूँविक Iहाँ क भागीदारी का प्रश्न है, भागीदारी अति3विनयम की 3ारा 20 क े ह आवेदन अपंIीक ृ भागीदारी क े रूप में पाया गया, अ ः बार में विनविह भागीदारी अति3विनयम क े 3ारा 69(3) क े आलोक में प्रत्यर्थी1 द्वारा दायर आवेदन पोर्षणीय नहीं र्थीा, अ ः यह यर्थीा सदृश विनस् ारिर होने क े लिलए उत्तरदायी र्थीा।
8. अपीलार्थी1 (प्रति वादी) द्वारा उठाये गये आपलित्त को दीवानी न्याया3ीश क े आदेश विदनांक 18.03.1993 द्वारा खारिरI कर विदया गया और प्रत्यर्थी1 (वादी) द्वारा दायर आवेदन पोर्षणीय है सिIसे रखा गया। अपीलार्थी1 (प्रति वादी) ने पीविv महसूस विकया और भार ीय संविव3ान क े अनुच्छेद 227 क े ह मा. उच्च न्यायालय में रिरट यातिMका दायर की।
9. आक्षेविप आदेश द्वारा मा. उच्च न्यायालय ने रिरट यातिMका को खारिरI कर विदया और दीवानी न्याया3ीश क े आदेश, Iो विक प्रत्यर्थी1 द्वारा इस न्यायालय में विवशेर्ष अनुमति क े माध्यम से दायर अपील की वृतिद्ध की Iा रही र्थीी, को सही ठहराया। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
10. इसलिलए, संक्षेप में इस अपील क े उदय पर विवMार कर े हुए विक क्या अपीलार्थी1 क े रिरट यातिMका क े विनस् ारण में मा. उच्च न्यायालय न्यायोतिM र्थीा।
11. मामले क े अशिभलेख क े परिरशीलन और पक्षों को विवद्व अति3वpा ने सुना, हम इस अपील की अनुमति क े लिलए प्रक ृ हैं और Iबविक अपास् हो रहे आक्षेविप आदेश को बुविनयादी अवलोकनों क े आलोक में रिरट यातिMका को नये सिसरे से गुण दोर्षों पर विनण9य लेने क े लिलए मामले को मा. उच्च न्यायालय को प्रति प्रेर्षण विकया गया।
12. हमारे विवMार क े दृविyग, मामले क े प्रति प्रेर्षण को अवसर की आवश्यक ा है क्योंविक हमने पाया विक मा. उच्च न्यायालय ने मुद्दे का विनण9य नहीं विकया, Iो रिरट यातिMका की विवर्षय-वस् ु र्थीी, क ृ ष्णा मोटर सर्विवस द्वारा इसक े भागीदार बनाम एM. बी. विवट्टल कामर्थी, 1996(10) एससीसी 88 क े मामले में इस न्यायालय द्वारा कानून को ध्यान में रख े हुए प्रति पाविद विकया।
13. हमारी दृविy में, यहाँ मा. उच्च न्यायालय को पूव9कशिर्थी विनण9य सूतिM करना Mाविहए और दनुसार कानून क े आलोक में विनण[1] प्रश्न प्रति पाविद हों। दुभा9ग्य से मा. उच्च न्यायालय ने उp विनण9य को ध्यान में नहीं रखा और इस रह से यह न्यायालय हस् क्षेप की अपेक्षा में एक त्रुविट करने को प्रति बद्ध हुई। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
14. इस कारणवश, हमारे विवMार क े दृविyग, क ृ ष्णा मोटर सर्विवस (उपरोp) क े मामले में इस न्यायालय द्वारा कानून की दृविy में प्रति पाविद नये सिसरे से गुण दोर्षों को ध्यान में रख े हुए रिरट यातिMका क े विनण9य क े लिलए मामला मा. उच्च न्यायालय को प्रेविर्ष होना Mाविहए।
15. पूव9व 1 बहस क े दृविyग, यह अपील सफल और दनुसार अनुमन्य हो ा है, आक्षेविप आदेश अपास् हो ा है। मामला मा. उच्च न्यायालय को रिरट यातिMका क े विनण9य हे ु प्रति प्रेविर्ष की Iा ी है। Iहाँ से इस यातिMका का उद्भव हुआ है, नये सिसरे से गुण दोर्षों पर उपरोp क े रूप में अवलोकन की Iा ी है।
16. Mूँविक मा. उच्च न्यायालय को मामले क े प्रति प्रेर्षण क े एक म गविठ होने क े बIाय इस अपील क े थ्यों में प्रर्थीम ः मुद्दे क े विनण9य हे ु उसक े गुण दोर्षों पर अभ्यास करने से हम लोग बM Iा े। अ ः मा. उच्च न्यायालय द्वारा यह आदेश और आक्षेविप आदेश की वि•या में विकसी भी अवलोकनों द्वारा अप्रभाविव विवति3सम्म सख् ी से मामला विनण[1] होगा।
17. Mूँविक मामला काफी पुराना है, हम मा. उच्च न्यायालय से इस रिरट यातिMका को यर्थीा संभव शीघ्र ा से अति3मान ः 6 माह क े अंदर विनपटान करने का विनवेदन कर े हैं।.................................... न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds..................................... न्यायमूर्ति विदनेश माहेश्वरी नई विदल्ली 04 अप्रैल 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds