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भार ीय सव च्च न्यायालय
आपराति क अपीलीय अति कारिर ा
क्रि क्रि नल अपील सं. 602 वर्ष" 2019
(क्रिवशेर्ष अनु ति याति(का (क्रि .) सं. 8074 वर्ष" 2018 से उद्भू )
बरेज खान @ गुड्डू एवं अन्य ....... अपीलार्थी7 (गण)
बना
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ......... प्रत्यर्थी7 (गण)
क्रिनण"य
न्याय ूर्ति अभय नोहर सप्रे
JUDGMENT
1. अनु ति प्रदान की गई ।
2. यह अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा प्रार्थी"ना पत्र सं. 3514 वर्ष" 2018 ें क्रिदए गए 06.02.2018 क्रिदनांक्रिक अंति क्रिनण"य व आदेश क े क्रिवरुद्ध दायर की गई है । जिजस ें उच्च न्यायालय ने ुकद ा सं. 3065 वर्ष" 2016 र्थीा 10.03.2017 क्रिदनांक्रिक ए. सी. जे. ए., कोर्ट" सं. 8, वाराणसी द्वारा उपरोक्त ा ले ें क्रिदए गए स न क े आदेश को रद्द करने से इन्कार कर क्रिदया ।
3. इस अपील क े क्रिनस् ारण क े लिलए क ु छ थ्यों का उल्लेख आवश्यक है, जिजस ें संतिXप्त क्रिबन्दु शाक्रि ल हैं ।
4. प्रत्यर्थी7 सं. 2 का क्रिववाह वर्ष" 2000 ें ोहम् द परवेज से हुआ र्थीा । अपीलार्थी7 सं. 3 ोहम् द परवेज की ां है और प्रत्यर्थी7 सं. 2 की सास है । अपीलार्थी7 सं. 1 और 2 ोहम् द परवेज क े भाई हैं और प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े देवर हैं ।
5. प्रत्यर्थी7 सं. 2 ने अपीलार्थी7गण और अपने पति ोहम् द परवेज क े लिखलाफ ए.सी.जे. ए., कोर्ट" सं. 8, वाराणसी क े न्यायालय ें ुकद ा दज" क्रिकया है। जिजस ें अपीलार्थी7गण द्वारा प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े सार्थी भार ीय दण्ड संक्रिह ा 1860 ( ए जि`न्पश्चा " भा दं सं " mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े रूप ें सन्दर्भिभ ) की ारा 498 क, 323, 504, 506 सपक्रिd ारा 3/4 डी.पी. एक्र्ट क े अन् ग" अपरा कारिर क्रिकए जाने की शिशकाय की गई है । ा ला अभी लम्बिम्ब है ।
6. उक्त परिरवाद का स न प्राप्त होने पर अपीलार्थी7गण ने व्यशिर्थी होकर दण्ड प्रक्रि या संक्रिह ा, 1973 (संXेप ें " दं प्र सं " से सन्दर्भिभ ) की ारा 482 क े अन् ग" उच्च न्यायालय ें प्रार्थी"ना पत्र दालिखल क्रिकया और परिरवाद को उनकों परिरवाद का स न जारी करने क े आदेश को रद्द करने की ांग की ।
7. आXेक्रिप आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने उपरोक्त ा ले ें ुकद ा सं. 3065 वर्ष" 2016 और ए.सी.जे.ए. कोर्ट" सं. 8, वाराणसी द्वारा 10.03.2017 क्रिदनांक्रिक स न करने क े आदेश को रद्द करने से इन्कार कर क्रिदया । जिजससे अपीलार्थी7गण द्वारा इस न्यायालय ें क्रिवशेर्ष अनु ति क े ाध्य से इस अपील का दायर क्रिकया जाना उद्भू हुआ है ।
8. अ ः संतिXप्त प्रश्न जो इस अपील ें क्रिव(ार क े लिलए उd ा है वह यह है, क्रिक क्या उच्च न्यायालय द्वारा अपीलार्थी7गण द्वारा दं प्र सं की ारा 482 क े अन् ग" दालिखल क्रिकए गए प्रार्थी"ना पत्र को ना ंजूर करना न्यायोति( र्थीा ।
9. अपीलार्थी7गण क े क्रिवद्व अति वक्ता श्री अक्रि पवन और प्रत्यर्थी7 सं. 1- राज्य, की ओर से क्रिवद्व अपर हाति वक्ता श्री क्रिवनोद क्रिदवाकर को सुना । प्रत्यर्थी7 सं. 2 की ओर से स न देने क े बावजूद कोई उपम्बिस्र्थी नही हुआ ।
10. अपीलार्थी7गण और प्रत्यर्थी7 सं. 1 क े क्रिवद्वान अति वक्ता को सुनने और ा ले क े रिरकाड" क े अवलोकन क े पश्चा ् ह इस अपील को अनु ति देने क े हा ी हैं और आXेक्रिप आदेश को अपास् कर े हैं, दं प्र सं की ारा 482 क े अन् ग" अपीलार्थी7गण की ओर से दालिखल प्रार्थी"ना पत्र को स्वीक ृ ति प्रदान कर े हैं और प्रत्यर्थी7 सं. 2 की ओर से दालिखल उपरोक्त परिरवाद को जहां क क्रिक यह अपीलार्थी7गण से सम्बम्बिन् है, रद्द कर े हैं ।
11. ह ने परिरवाद ें क्रिकए गए प्रकर्थीनों को देखा और इसक े अवलोकन क े पश्चा ्, अपीलार्थी7गण क े क्रिवरूद्ध काय"वाही न्यायोति( नहीं प्र ी हो ी ।
12. दूसरे शब्दों ें, ह ारी दृक्रिu ें अपीलार्थी7गण क े क्रिवरुद्ध सार्थी-सार्थी या सा ूक्रिहक काय"वाही का परिरवाद ें उनक े क्रिवरूद्ध आरोक्रिप अपरा ों क े लिलए कोई औति(त्य या / और प्रर्थी दृष्ट्या ा ला नहीं क्रिदख ा । वास् व ें परिरवाद ें अपीलार्थी7गण क े क्रिवरुद्ध ब ाए गए थ्यों से उनक े क्रिवरुध्द यर्थीा आरोक्रिप कोई ा ला नहीं बन ा । Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds
13. पूव"गा ी बहस क े दृक्रिuग ् अपील सफल है और द्नुरूप स्वीक ृ की जा ी है । आXेक्रिप आदेश को अपास् क्रिकया जा ा है । परिरणा स्वरूप, प्रत्यर्थी7 सं. 2 द्वारा अपीलार्थी7गण क े क्रिवरुद्ध दायर परिरवाद को ए द्द्वारा क्रिनरस् क्रिकया जा ा है । 14.हालांक्रिक ह यह स्पu कर दे े हैं, क्रिक ोहम् द परवेज खान- प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े पति क े रूप ें, का परिरवाद इस न्यायालय द्वारा क्रिकए गये अवलोकनों से अप्रभाक्रिव रहकर क्रिवति क े अनुसार संबंति जिजस्र्ट्रेर्ट द्वारा गुणागुण क े आ ार पर क्रिकया जाएगा क्योंक्रिक ह ने प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े ा ले की उसका पति होने क े कारण, परीXण नहीं क्रिकया है जो क्रिक न ो इन काय"वाक्रिहयों ें एक पX है और न ही उसने स्वयं क े क्रिवरूद्ध दायर परिरवाद को (ुनौ ी देने वाली कोई याति(का दायर की है ।..................................... (न्याय ूर्ति अभय नोहर सप्रे).................................. (न्याय ूर्ति क्रिदनेश ाहेश्वरी) नई क्रिदल्ली; अप्रैल 05, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds