Barez Khan @ Guddu v. State of Uttar Pradesh & Ors.

High Court of Allahabad · 05 Apr 2019
Abhay Nohar; Kridnesh Shaheshwari
Criminal Appeal No. 602 of 2019
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court allowed the appeal and quashed the criminal complaint against appellants under Sections 498A IPC and Dowry Prohibition Act, holding that no prima facie case existed to sustain the proceedings.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
आपराति क अपीलीय अति कारिर ा
क्रि क्रि नल अपील सं. 602 वर्ष" 2019
(क्रिवशेर्ष अनु ति याति(का (क्रि .) सं. 8074 वर्ष" 2018 से उद्भू )
बरेज खान @ गुड्डू एवं अन्य ....... अपीलार्थी7 (गण)
बना
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ......... प्रत्यर्थी7 (गण)
क्रिनण"य
न्याय ूर्ति अभय नोहर सप्रे
JUDGMENT

1. अनु ति प्रदान की गई ।

2. यह अपील इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा प्रार्थी"ना पत्र सं. 3514 वर्ष" 2018 ें क्रिदए गए 06.02.2018 क्रिदनांक्रिक अंति क्रिनण"य व आदेश क े क्रिवरुद्ध दायर की गई है । जिजस ें उच्च न्यायालय ने ुकद ा सं. 3065 वर्ष" 2016 र्थीा 10.03.2017 क्रिदनांक्रिक ए. सी. जे. ए., कोर्ट" सं. 8, वाराणसी द्वारा उपरोक्त ा ले ें क्रिदए गए स न क े आदेश को रद्द करने से इन्कार कर क्रिदया ।

3. इस अपील क े क्रिनस् ारण क े लिलए क ु छ थ्यों का उल्लेख आवश्यक है, जिजस ें संतिXप्त क्रिबन्दु शाक्रि ल हैं ।

4. प्रत्यर्थी7 सं. 2 का क्रिववाह वर्ष" 2000 ें ोहम् द परवेज से हुआ र्थीा । अपीलार्थी7 सं. 3 ोहम् द परवेज की ां है और प्रत्यर्थी7 सं. 2 की सास है । अपीलार्थी7 सं. 1 और 2 ोहम् द परवेज क े भाई हैं और प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े देवर हैं ।

5. प्रत्यर्थी7 सं. 2 ने अपीलार्थी7गण और अपने पति ोहम् द परवेज क े लिखलाफ ए.सी.जे. ए., कोर्ट" सं. 8, वाराणसी क े न्यायालय ें ुकद ा दज" क्रिकया है। जिजस ें अपीलार्थी7गण द्वारा प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े सार्थी भार ीय दण्ड संक्रिह ा 1860 ( ए जि`न्पश्चा " भा दं सं " mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े रूप ें सन्दर्भिभ ) की ारा 498 क, 323, 504, 506 सपक्रिd ारा 3/4 डी.पी. एक्र्ट क े अन् ग" अपरा कारिर क्रिकए जाने की शिशकाय की गई है । ा ला अभी लम्बिम्ब है ।

6. उक्त परिरवाद का स न प्राप्त होने पर अपीलार्थी7गण ने व्यशिर्थी होकर दण्ड प्रक्रि या संक्रिह ा, 1973 (संXेप ें " दं प्र सं " से सन्दर्भिभ ) की ारा 482 क े अन् ग" उच्च न्यायालय ें प्रार्थी"ना पत्र दालिखल क्रिकया और परिरवाद को उनकों परिरवाद का स न जारी करने क े आदेश को रद्द करने की ांग की ।

7. आXेक्रिप आदेश द्वारा उच्च न्यायालय ने उपरोक्त ा ले ें ुकद ा सं. 3065 वर्ष" 2016 और ए.सी.जे.ए. कोर्ट" सं. 8, वाराणसी द्वारा 10.03.2017 क्रिदनांक्रिक स न करने क े आदेश को रद्द करने से इन्कार कर क्रिदया । जिजससे अपीलार्थी7गण द्वारा इस न्यायालय ें क्रिवशेर्ष अनु ति क े ाध्य से इस अपील का दायर क्रिकया जाना उद्भू हुआ है ।

8. अ ः संतिXप्त प्रश्न जो इस अपील ें क्रिव(ार क े लिलए उd ा है वह यह है, क्रिक क्या उच्च न्यायालय द्वारा अपीलार्थी7गण द्वारा दं प्र सं की ारा 482 क े अन् ग" दालिखल क्रिकए गए प्रार्थी"ना पत्र को ना ंजूर करना न्यायोति( र्थीा ।

9. अपीलार्थी7गण क े क्रिवद्व अति वक्ता श्री अक्रि पवन और प्रत्यर्थी7 सं. 1- राज्य, की ओर से क्रिवद्व अपर हाति वक्ता श्री क्रिवनोद क्रिदवाकर को सुना । प्रत्यर्थी7 सं. 2 की ओर से स न देने क े बावजूद कोई उपम्बिस्र्थी नही हुआ ।

10. अपीलार्थी7गण और प्रत्यर्थी7 सं. 1 क े क्रिवद्वान अति वक्ता को सुनने और ा ले क े रिरकाड" क े अवलोकन क े पश्चा ् ह इस अपील को अनु ति देने क े हा ी हैं और आXेक्रिप आदेश को अपास् कर े हैं, दं प्र सं की ारा 482 क े अन् ग" अपीलार्थी7गण की ओर से दालिखल प्रार्थी"ना पत्र को स्वीक ृ ति प्रदान कर े हैं और प्रत्यर्थी7 सं. 2 की ओर से दालिखल उपरोक्त परिरवाद को जहां क क्रिक यह अपीलार्थी7गण से सम्बम्बिन् है, रद्द कर े हैं ।

11. ह ने परिरवाद ें क्रिकए गए प्रकर्थीनों को देखा और इसक े अवलोकन क े पश्चा ्, अपीलार्थी7गण क े क्रिवरूद्ध काय"वाही न्यायोति( नहीं प्र ी हो ी ।

12. दूसरे शब्दों ें, ह ारी दृक्रिu ें अपीलार्थी7गण क े क्रिवरुद्ध सार्थी-सार्थी या सा ूक्रिहक काय"वाही का परिरवाद ें उनक े क्रिवरूद्ध आरोक्रिप अपरा ों क े लिलए कोई औति(त्य या / और प्रर्थी दृष्ट्या ा ला नहीं क्रिदख ा । वास् व ें परिरवाद ें अपीलार्थी7गण क े क्रिवरुद्ध ब ाए गए थ्यों से उनक े क्रिवरुध्द यर्थीा आरोक्रिप कोई ा ला नहीं बन ा । Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds

13. पूव"गा ी बहस क े दृक्रिuग ् अपील सफल है और द्नुरूप स्वीक ृ की जा ी है । आXेक्रिप आदेश को अपास् क्रिकया जा ा है । परिरणा स्वरूप, प्रत्यर्थी7 सं. 2 द्वारा अपीलार्थी7गण क े क्रिवरुद्ध दायर परिरवाद को ए द्द्वारा क्रिनरस् क्रिकया जा ा है । 14.हालांक्रिक ह यह स्पu कर दे े हैं, क्रिक ोहम् द परवेज खान- प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े पति क े रूप ें, का परिरवाद इस न्यायालय द्वारा क्रिकए गये अवलोकनों से अप्रभाक्रिव रहकर क्रिवति क े अनुसार संबंति जिजस्र्ट्रेर्ट द्वारा गुणागुण क े आ ार पर क्रिकया जाएगा क्योंक्रिक ह ने प्रत्यर्थी7 सं. 2 क े ा ले की उसका पति होने क े कारण, परीXण नहीं क्रिकया है जो क्रिक न ो इन काय"वाक्रिहयों ें एक पX है और न ही उसने स्वयं क े क्रिवरूद्ध दायर परिरवाद को (ुनौ ी देने वाली कोई याति(का दायर की है ।..................................... (न्याय ूर्ति अभय नोहर सप्रे).................................. (न्याय ूर्ति क्रिदनेश ाहेश्वरी) नई क्रिदल्ली; अप्रैल 05, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds