Narad Patel v. State of Chhattisgarh

High Court of Chhattisgarh · 10 May 2019
Arun Dhimeshra; Uday Umesh Lalil
Criminal Appeal No 883/2019
2019 INSC 675
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court acquitted the appellant under the SC/ST Act due to lack of caste-based abuse evidence but upheld his conviction under Section 294 IPC for obscene language.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार का सव च्च न्यायालय
दाण्डि क अपीलीय क्षेत्राधि कार
दाण्डि क अपील संख्या 883/2019
[तिवशेष अनुमति याधिचका (आपराधि क) संख्या 1907/2019 से उत्पन्न]
नारद पटेल ... अपीलार्थी+
बनाम
छत्तीसगढ़ राज्य ... प्रति वादी
तिनर्ण4य
उदय उमेश ललिल , न्याया ीश
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गई ।

2. यह अपील छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, तिबलासपुर द्वारा आपराधि क अपील संख्या 1101/2002 में पारिर अंति म तिनर्ण4य और आदेश दिदनांक 27/11/2018 की वैद्य ा को चुनौ ी दे ी है ।

3. अपीलार्थी+ पर भार ीय दं संतिह ा की ारा 294, 506-बी और अनुसूधिच जाति और अनुसूधिच जनजाति (अत्याचार तिनवारर्ण) अधि तिनयम, 1989 ("अधि तिनयम", संक्षेप में) की ारा 3(1)(x) क े अं ग[4] दं नीय अपरा क े आरोप में तिवशेष न्याया ीश, रायगढ़, छत्तीसगढ़ की फाइल क े तिवशेष वाद संख्या 13/2002 क े ह मुकदमा चलाया गया। आरोप र्थीा तिक दिदनांक 30/09/2001 और 01/10/2001 की मध्यरातित्र में अपीलार्थी+ ने लिशकाय क ा4 देशीराम क े ान क े खे की मेड़ (मे ) को काट दिदया, 2019 INSC 675 जिजसक े परिरर्णामस्वरूप देशीराम क े खे में पानी नहीं पहुंच पाया। अगले दिदन दिदनांक 01/10/2001 को, पंचाय बुलाई गई जिजसमें अपीलार्थी+ ने लिशकाय क ा4 देशीराम और उसक े भाई श्याम सुंदर को कलिर्थी ौर पर अपशब्द कहे और उन्हें जान से मारने की मकी दी। आरोप र्थीा तिक अपीलार्थी+ ने उक्त लिशकाय क ा4 देशीराम और उनक े भाई, जो अनुसूधिच जनजाति क े सदस्य र्थीे, को अपशब्द कहे और इस प्रकार अधि तिनयम की ारा 3(1)(x) क े अं ग[4] अपरा कारिर तिकया। मुकदमे क े दौरान, पंचाय की बैठक में भाग लेने वाले क ु छ गवाहों को परीक्षिक्ष तिकया गया और तिवशेष न्याया ीश, रायगढ़ ने अपने तिनर्ण4य और आदेश दिदनांक 23/09/2002 द्वारा अपीलार्थी+ को भार ीय दं संतिह ा की ारा 294 और अधि तिनयम की ारा 3(1)(x) क े ह अपरा ों क े लिलए दोषी पाया। अपीलार्थी+ को पहले अपरा क े लिलए ीन महीने और दूसरे अपरा क े लिलए छह महीने की कठोर कारावास, जुमा4ना और व्यति क्रम पर सजा सुनाई गई। हालांतिक अपीलार्थी+ को भार ीय दं संतिह ा की ारा 506 क े आरोप से तिवमुक्त कर दिदया गया।

4. उपरोक्त दोषलिसजिX एवं सजा से उद्भू दाण्डि क अपील संख्या 1101/2002 में, उच्च न्यायालय ने तिवशेष न्याया ीश द्वारा लिलए गए दृति\कोर्ण की पुति\ की और अपील को अपने तिनर्ण4य और आदेश दिदनांक 27/11/2018 द्वारा खारिरज कर दिदया, जो व 4मान में अपील क े ह है।

5. हमने अपीलार्थी+ की ओर से तिवद्वान अधि वक्ता श्री तिवक्रां सिसंह बैस और प्रति वादी की ओर से तिवद्वान अधि वक्ता श्री तिनजाम पाशा को सुना।

6. अक्षिभलेखानुसार, अपीलार्थी+ पहले ही चार महीने से अधि क का कारावास भुग चुका है।

7. यह पाया गया है तिक अपीलार्थी+ भार ीय दं संतिह ा क े ारा 506 क े ह अपरा का दोषी नहीं र्थीा और अक्षिभयोजन पक्ष द्वारा उस सम्बन् में प्रस् ु मामले को पूरी रह से खारिरज कर दिदया गया र्थीा। अक्षिभलेखानुसार, अपीलक ा4 द्वारा तिनय क ृ त्य क े पश्चा पंचाय बुलाई गई, जिजसमें अपीलार्थी+ द्वारा क ु छ अपशब्द कहे गए र्थीे। लिशकाय क ा4 देशीराम क े कर्थीन क े अनुसार, तिववाद क े दौरान अपीलार्थी+ द्वारा प्रयोग तिकए जाने वाले वाक्यांशों में लिशकाय क ा4 से सम्बंधि जाति या जनजाति का उल्लेख नहीं र्थीा, हालांतिक इस रह क े अक्षिभकर्थीन अन्य साक्षिक्षयो क े साक्ष्य में आये हैं।

8. इस प्रकार, यह थ्य स्प\ है तिक अपीलार्थी+ ने लिशकाय क ा4 देशीराम को अपशब्द कहे और इस प्रकार भार ीय दं संतिह ा क े ारा 294 क े ह दी गई उसकी दोषलिसजिX और सजा पूरी रह से उधिच र्थीी । हालाँतिक, लिशकाय क ा4 देशीराम क े अक्षिभकर्थीन में उसक े जाति या जनजाति का कोई उल्लेख नहीं र्थीा अ ः अधि तिनयम की ारा 3 (1) (x) क े आरोप का लिसफ 4 संदेह है।

9. ऐसी परिरण्डिस्र्थीति में, अपीलार्थी+ की भार ीय दं संतिह ा की ारा 294 क े ह दोषलिसजिX और सजा की पुति\ कर े हुए उसे संदेह का लाभ दिदया जा ा है और उसे अधि तिनयम की ारा 3(1)(x) क े आरोप से दोषमुक्त तिकया जा ा है।

10. उपरोक्त सीमा क अपील स्वीकार की जा ी है। जब क तिकसी अन्य मामले में अपीलार्थी+ की तिहरास की आवश्यक ा न हो, उसे मुक्त तिकया जाये।........................न्याया ीश (अरुर्ण धिमश्रा)........................न्याया ीश (उदय उमेश ललिल ) नई दिदल्ली, 10 मई, 2019 खं न (धि स्क्लेमर): स्र्थीानीय भाषा तिनर्ण4य क े अनुवाद का आशय, पक्षकारों को इसे अपनी भाषा में समझने क े उपयोग क ही लिसधिम है और अन्य प्रयोजनार्थी4 इसका प्रयोग नहीं तिकया जा सक ा. समस् व्यावहारिरक एवं काया4लयीन प्रयोजनार्थी4, तिनर्ण4य का अंग्रेजी संस्करर्ण ही प्रामाक्षिर्णक होगा एवं तिनष्पादन र्थीा काया4न्वयन क े प्रयोजनार्थी4 क्षेत्र ारिर करेगा I