Praveen Singh Ramakan Bhadouriya v. Neelam Praveen Singh Bhadouriya

Supreme Court of India · 01 May 2019
R. Bhanumati; S. Abdul Nazeer
Civil Appeal No. 4541 of 2019 @ Special Leave Petition (Civil) No. 30555 of 2013
family appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court dissolved the marriage by mutual consent under Article 142, recording the parties' settlement including maintenance and withdrawal of all pending cases.

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प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय में
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं.-४५४१ सन् २०१९
(विवशेष अनुमति याति+का (सिसविवल) संख्या ३०५५५ सन् २०१३)
प्रवीन सिंसह रमाकान् भदौरिरया ...अपीलार्थी3 (गण)
बनाम
नीलम प्रवीन सिंसह भदौरिरया ... प्रत्यर्थी3 (गण)
विनण8य
न्यायमूर्ति आर. भानुमति
JUDGMENT

1. अनुमति दी गई। २. माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विद्व ीय अपील संख्या ६४१ सन् २०१३ में पारिर अंति म विनण8य और आदेश विदनांविक २९.०५.२०१३ से व्यथिर्थी है सिFसमें अपीलार्थी3 द्वारा की गयी अपील को माननीय उच्च न्यायालय ने खारिरF कर विदया र्थीा इस प्रकार विववाह को विवच्छेद करने से इन्कार कर विदया। ३. अपीलार्थी3 और प्रत्यर्थी3 का विववाह ०७.०५.१९९८ को हुआ र्थीा उक्त विववाह से एक बालिलका का Fन्म हुआ और अब वह १८ वष[8] की है नावपूण[8] सम्बन् ों क े कारण, पक्षकार अलग-अलग रह रहे हैं अपीलार्थी3- पति ने परिरवार न्यायालय, मुम्बई क े समक्ष विववाह की समाविW क े लिलए वाद दायर विकया Fो बाद में इटावा सिFला न्यायालय उ.प्र. में स्र्थीानान् रिर हुआ। विव+ारण mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्यायालय ने अपीलार्थी3 द्वारा दायर की गयी विववाह-विवच्छेद की याति+का को विदनांक ०९-११- २००९ क े विनण8य द्वारा खारिरF कर विदया। अपीलार्थी3 द्वारा की गयी अपील भी सिFला न्यायालय द्वारा विदनांक २९-११-२०१२ क े विनण8य द्वारा खारिरF कर दी गयी। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा भी अपीलार्थी3-पति की विद्व ीय अपील को खारिरF कर विदया। अपीलार्थी3 व्यथिर्थी होने से हमारे समक्ष है। ४. हमने अपीलार्थी3 की ओर से विवद्वान अति वक्ता श्री अशोक मार्थीुर सार्थी ही सार्थी प्रत्यर्थी3 की प्रत्यर्थी3 की ओर से प्रस् ु विवद्वान अति वक्ता श्री राFेश अग्रवाल को सुना। ५. Fब मामला इस न्यायालय क े समक्ष विव+ारा ीन र्थीा पक्षकारों को सुलह समझौ ा क े लिलए भेFा गया और पक्षकारों ने मैत्रीपूण[8] ढंग से मामला सुलझा लिलया। पक्षकारों ने आपसी सहमति से भी विववाह विवच्छेद क े लिलए भार ीय संविव ान क े अनुच्छेद १४२ का प्रयोग कर अलग-अलग प्रार्थी8ना पत्र दालिखल विकया। पक्षकारों क े बी+ समझौ े क े ह, अपीलार्थी3-पति प्रत्यर्थी3-पत्नी क े मासिसक भरण पोषण भू कालीन, व 8मान और भविवष्य क े उसक े दावे क े पूरी और अन्तिन् म समझौ े में और सभी, अन्य दावों को पूरी रह से वापस लेने पर, १० लाख ₹ (आF प्रत्यर्थी3 पत्नी नीलम सिंसह क े पक्ष में आहरिर उत्तर विदनांविक +ेक संख्या ०००२७८ विदनांविक ११ मई २०१९ बैंक ऑफ बड़ौदा से आहरिर भुग ान विकया) देने को सहम हो गया। इसक े सार्थी ही, अपीलार्थी3 अपनी बेटी क े नाम ३लाख ₹, एफडीआर क े माध्यम से आF से ीन महीने क े अन्दर भुग ान करने को सहम हुए हैं। पक्षकार इस पर भी सहम हुए हैं विक पक्षकारों क े बी+ सभी विव+ारा ीन वाद वापस ले लिलये Fायेंगें अर्थीवा वे अपने अपने वाद रद्द करने को सहम होंगें। ६. +ूँविक पक्षकारों ने मामले को मैत्रीपूण[8] ढंग स्र्थीाविप कर लिलया है, वाद क े थ्यों और परिरन्तिस्र्थीति यों पर विव+ार करने पर, भार ीय संविव ान क े अनु. १४२ क े अन् ग[8] अपनी शविक्त का प्रयोग कर अपीलार्थी3 और प्रत्यर्थी3 की विदनांक ०७.०५.१९९८ को सम्पन्न विववाह को समाW विकया Fा ा है। पक्षकारों क े बी+ समझौ े की विनम्नलिललिख श m इस विनण8य क े भाग होंगें Fो- "४. समझौ े क े न्द्र क े समक्ष दोनों पक्षकार ने मैत्रीपूण[8] ढंग से पारस्परिरक सहमति विनम्नलिललिख विनयम र्थीा श p पर आपसी समझौ ा कर लिलया र्थीा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ५. पक्षकारों क े बी+ यह सहमति हुई विक वे पारस्परिरक समझौ े क े अनुसार माननीय न्यायालय/न्यायालयों क े समक्ष विनम्नलिललिख विव+ारा ीन वादों को विनरस् / रद्द करने की प्रार्थी8ना करेंगें: i. मुख्य न्यातियक मसिFस्ट्रेट न्यायालय, इटावा, उ.प्र. में, प्रकरण सं. १५३७/२००९ नीलम बनाम प्रवीन (अन् ग[8] ारा १२५ सीआर.पी.सी.), माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद क े समक्ष इसकी अपील क े सार्थी, ii. अपर मुख्य न्यातियक मसिFस्ट्रेट न्यायालय, इटावा में प्रकरण सं. १८६ सन् २००९ नीलम बनाम प्रवीन (अन् ग[8] घरेलू हिंहसा अति विनयम) iii. मसिFस्ट्रेट, दस्यु प्रभाविव क्षेत्र क े समक्ष प्रकरण सं. ३२३ सन् २००६ प्रवीन बनाम रामेन्दर iv. माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद क े समक्ष विव+ारा ीन वाद अन् ग[8] ारा ३९६ आइ.पी.सी. v. मुख्य न्यातियक मसिFस्ट्रेट क े समक्ष प्रकरण सं. ६५ सन् २००२ नीलम बनाम प्रवीन और अन्य अन् ग[8] ारा ४९८-क आइ.पी.सी vi. अपर मुख्य न्यातियक मसिFस्ट्रेट इटावा क े समक्ष प्रकरण सं. ५०६ सन् २००२ नीलम बनाम प्रवीन और अन्य, अन् ग[8] ारा ४०६ आइ.पी.सी. vii. विकन्हीं अन्य न्यायालयों क े समक्ष, पक्षकारों क े बीF कोई अन्य वाद, यविद कोई हो, ६. पक्षकार माननीय न्यायालय क े समक्ष भार ीय संविव ान क े अनुच्छेद १४२ क े अन् ग[8] शविक्त क े प्रयोग में आपसी सहमति द्वारा विववाह विवच्छेद की तिडक्री पारिर करने क े लिलए प्रार्थी8ना करेगा। ७. या+ी-पति प्रत्यर्थी3-पत्नी को मासिसक भरण पोषण भू कालीन, व 8मान और भविवष्य क े उसक े सभी दावों स्त्री न, सामान और कोई अन्य दावे Fो हों, क े पूरे और अन्तिन् म समझौ े क े रूप में १० लाख ₹ देने को सहम हुए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ८. प्रार्थी3 पत्नी ने अपनी बेटी क े विववाह और थिशक्षा क े ख+8 क े लिलए एक अविग्रम राथिश एफडीआर क े रूप में बेटी Fान्हवी सिंसह क े नाम Fमा कराने की इच्छा +ाही। Fब अन्तिन् म दो सुनवाई में माननीय न्यायालय क े ज्ञान में उक्त परिरप्रेक्ष्य को लाया गया, विवपक्षी पक्षकार इस पर मौलिखक सहम हुआ, और मामला आवश्यक दस् ावेFों को दालिखल करने क े लिलए स्र्थीविग विकया गया र्थीा। ८क. ीन लाख ₹ की एक एफडीआर बेटी को ीन महीन क े अन्दर देय होगी और १लाख ₹ बेटी क े विववाह क े समय देय होगा। ७. Fहाँ क अन्य वादों का सम्बन् है, Fैसे और Fब प्रार्थी8ना पत्र न्यायालय क े समक्ष विदया गया, सम्बन्तिन् न्यायालय पक्षकारों क े बी+ समझौ े क े दृवि€ग उति+ आदेश पारिर कर सक े गा। ८. समझौ े की श p क े अपालन की न्तिस्र्थीति में, पक्षकार इस न्यायालय की अवमानना क े सार्थी-सार्थी विवति द्वारा प्रदत्त उप+ार क े लिलए दायी होगा। ९. दनुसार तिडक्री ैयार करेंगे। १०. उपरोक्त श p क े अ ीन अपील विनरस् की Fा ी है।..................................… [न्यायमूर्ति, आर. भानुमति ].................................. [न्यायमूर्ति, एस. अब्दुल नFीर] नई विदल्ली, १ मई, २०१९ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds