Rajasthan State Road Transport Corporation v. Paramjeet Singh

Supreme Court of India · 03 May 2019
D. Y. Chandrachud; Hemant Gupta
Civil Appeal No 4593 of 2019 @ SLP (C) No 10907 of 2017
labor appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that a purely contractual appointment terminable without notice can be ended without violating natural justice, allowing the employer's appeal and dismissing the employee's writ petition.

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रिपोर्टेबल
भारत का सर्वोच्च न्यायालय
सिविल अपीलीय अधिकारिता
सिविल अपील संख्या 4593/2019
(एसएलपी (सी) संख्या 10907/2017 से उत्पन्न)
राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम ...... अपीलकर्ता
बनाम
परमजीत सिंह ….. प्रतिवादी (ओं)
निर्णय
डॉ. धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश
JUDGMENT

1. अनुमति प्रदान की गई।

2. प्रतिवादी को अपीलकर्ता द्वारा 21 जनवरी, 2006 को संविदा क े आधार पर क ं डक्टर क े रूप में नियुक्त किया गया था। संविदात्मक नियुक्ति एक वर्ष की अवधि या चालकों की कमी को पूरा करने तक, जो भी पहले हो, क े लिए थी। वह समझौता (जिसे अनुबंध पत्र क े रूप में वर्णित किया गया है) जो अपीलकर्ता और प्रतिवादी क े बीच किया गया था, जो इस प्रकार निर्धारित किया गया थाः "11. क ं डक्टर क े रूप में काम करते हुए यदि रास्ते में वाहन क े निरीक्षण पर कोई यात्री बिना टिकट पाया जाता है तो ऐसी स्थिति में दूसरे पक्ष को अस्थायी रोजगार से हटा दिया जाएगा और नुकसान को पूरा करने क े लिए, वह मुख्यालय द्वारा निर्धारित राशि का भुगतान करने क े लिए भी उत्तरदायी होगा। इसक े अलावा, पहला पक्ष बिना टिकट यात्रा अधिनियम की रोकथाम क े तहत दूसरे पक्ष क े खिलाफ आगे बढ़ने क े लिए स्वतंत्र होगा।"

3. करार क े खंड 16 में यह निर्धारित किया गया है किः "16. प्रथम पक्ष को बिना किसी सूचना क े किसी भी समय प्रथम पक्ष की अस्थायी नियुक्ति को समाप्त करने का अधिकार होगा।"

4. प्रतिवादी की सेवाओं को 21 मार्च, 2007 को समाप्त कर दिया गया।

5. सेवाओं की समाप्ति क े आदेश को चुनौती देते हुए, प्रतिवादी ने एक रिट याचिका दायर की, जिसे 6 अप्रैल 2016 को राजस्थान उच्च न्यायालय क े एक विद्वान एकल न्यायाधीश द्वारा स्वीकार किया गया।उच्च न्यायालय की खण्ड पीठ ने 19 सितंबर 2016 को रिट अपील को खारिज कर दिया था।

6. प्रतिवादी पर तामील कर दी गई है, लेकिन हाजिर नहीं हुआ है।

7. एकमात्र आधार जिस पर रिट याचिका की अनुमति दी गई थी, वह यह था कि प्राक ृ तिक न्याय क े सिद्धांत का भंग हुआ था।

8. अपीलकर्ता की ओर से उपस्थित विद्वत अधिवक्ता ने तर्क दिये कि उच्च न्यायालय ने इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए कि नियुक्ति की प्रक ृ ति एक वर्ष की अवधि क े लिए या ड्राइवरों की कमी पूर्ण होने तक, जो भी पहले हो, विशुद्ध रूप से संविदात्मक थी, रिट स्वीकारने में गलती की। इसक े अलावा, अनुबंध में कहा गया है कि प्रतिवादी की सेवाओं को बिना किसी नोटिस क े समाप्त किया जा सकता है।

9. हम प्रस्तुत करने में योग्यता पाते हैं कि नियुक्ति की शर्तों से यह संक े त मिलता है कि प्रतिवादी विशुद्ध रूप से संविदात्मक नियुक्ति पर था और यह कि सेवाओं को किसी भी स्तर पर बिना नोटिस क े समाप्त किया जा सकता था ।

10. उच्च न्यायालय क े विद्वान एकल न्यायाधीश ने हरि राम मौर्य बनाम भारत संघ और अन्य क े मामले में इस न्यायालय क े निर्णय पर भरोसा किया। तथापि, उस मामले में विभेद किया जा सकता है क्योंकि इस न्यायालय द्वारा यह पाया गया कि हटाया जाना इस आधार पर था कि कर्मचारी, जो कि अस्थायी आधार पर लगा हुआ था, रिश्वत क े आरोप का दोषी था।

11. संविदात्मक अनुबंध की शर्तों को ध्यान में रखते हुए, हमारा विचार है कि अपीलकर्ता की कार्रवाई को गलत नहीं ठहराया जा सकता है। हम तदनुसार अपील को स्वीकार करते हैं और उच्च न्यायालय क े आक्षेपित निर्णय और आदेश को रद्द करते हैं। नतीजतन, प्रतिवादी द्वारा दायर की गई रिट याचिका खारिज की जाती है, हालांकि लागत क े बारे में कोई आदेश नहीं किया जाता है। डॉ. धनंजय वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश हेमंत गुप्ता, न्यायाधीश नई दिल्लीः 03 मई, 2019 यह अनुवाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल 'सुवास' क े जरिए अनुवादक की सहायता से किया गया है। अस्वीकरण: यह निर्णय पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीमित उपयोग क े लिए स्थानीय भाषा में अनुवादित किया गया है और किसी अन्य उद्देश्य क े लिए इसका उपयोग नहीं किया जा सकता है। सभी व्यावहारिक और आधिकारिक उद्देश्यों क े लिए, निर्णय का अंग्रेजी संस्करण ही प्रामाणिक होगा और निष्पादन और कार्यान्वयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करण ही मान्य होगा।