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भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 5820 सन् 2019
( S.L.P (सिसविवल)संo.10151 सन् 2014 द्वारा उद्भू )
लखनऊ विवकास प्राति करण एवं अन्य ....अपीलार्थी%गण(गण)
बनाम
गोपाल दास (मृ क) विवति क प्रति विनति ......प्रत्यार्थी%(गण)
एवं अन्य द्वारा
विनण-य
न्यायमूर्ति , हेमन् गुप्ता:
अनुमति प्रदान की गई।
JUDGMENT
2) अपीलार्थी%-लखनऊ विवकास प्राति करण[ संक्षेप में ‘ LDA’]’] जनवरी, 2014 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े लखनऊ खण्डपीठ द्वारा पारिर विनण-य और आदेश से व्यथिर्थी है, सिजसे एल.डी.ए द्वारा पारिर 29, जुलाई 2011 क े आदेश को खारिरज कर विदया गया र्थीा। अपीलक ा- को ₹ 1,00,000 /- की लाग का भुग ान करने क े लिलए भी उत्तरदायी बनाया गया र्थीा, जो mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अति कारिरयों से लाग वसूल करने की विदशा में र्थीे, जो विक आक्षेविप आदेश को पारिर करने में सहायक रहे हैं। 3) व -मान अपील क े प्रमुख थ्य यह हैं विक LDA ने क ु ल भूविम अति ग्रहण 168.592 हेक्टेयर (666 बीघा, 7 विबस्वा, 8 विबसवंसी, 8 कछवंसी) का अति ग्रहण विकया, सिजसकी अति सूचना 12 नवंबर, 1981 को भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 की ारा 4 क े ह आवासीय उद्देश्यों क े सी ापुर सड़क शहर विवस् ार योजना क े लिलए है। ारा 17 क े सार्थी पढ़ी गई ारा 6 क े ह अति सूचना 3 विदसम्बर, 1981 को जारी की गई र्थीी और यह पुरस्कार 15 जनवरी, 1986 को प्रकाथिश विकया गया र्थीा। (4) अति ग्रविह की गई भूविम क े विहस्से का 1.200 हेक्टेयर मापने वाले प्रत्यर्थी%गण की भूविम को उत्तर प्रदेश शहरी विनयोजन और विवकास अति विनयम,1973[संक्षेप में अति विनयम ] की ारा 17 क े ह राज्य सरकार से अति ग्रहण से मुक्त करने की माँग की गई र्थीी। यह भूविम 23 मई, 2011 को अति ग्रहण से जारी की गई र्थीी,सिजससे खसरा संo 416 और 417 क े प्रश्न में भूविम की बहाली का एक आदेश अति विनयम की ारा 17 क े संदभ- में विवकास शुल्क क े भुग ान क े आदेश क े सार्थी प्रत्यर्थी%ओं क े पक्ष में पारिर विकया गया र्थीा। प्रत्यर्थी%ओं को ₹ 1,57,22,056 की राथिश, एक सप्ताह क े भी र ₹ 1,38,780 अति ग्रहण की लाग क े रूप में और ₹ 1,55,83,276 विवकास शुल्क राथिश क े रूप में जमा करने का विनद[श विदया र्थीा। यह उक्त आदेश है सिजसे व -मान अपील में उच्च न्यायालय क े आक्षेविप आदेश द्वारा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अपास् विकया गया है। उच्च न्यायालय ने विनम्न रूप में आयोसिज विकया: “33. शब्द “विवकास” की पूव क्त व्याख्या क े मद्देनजर, यह व -मान मामले में LDA जैसे विवकास प्राति करणों की ओर से अविनवाय- होगा, ाविक भूविम पर वै ाविनक अति देश क े अनुसार क ु छ विवकास विकया जा सक े और इसक े आसपास क े क्षेत्र इस अति विनयम की ारा 17 की उप- ारा (1) क े अंति म रूप से विवकास शुल्क लगाने का हकदार है। इसक े अलावा, विवकास शुल्क विवकास गति विवति यों क े संबं में विकए गए व्यय क े सार्थी सह-सम्बन् रख ा है। विवकास गति विवति याँ आसपास क े क्षेत्र में होनी चाविहए जहाँ नागरिरकों क े प्लॉट, फ्ल ै ट्स या घर मौजूद हों। व -मान मामलें में, अथिभलेंख में रखी गई परिरस्थिस्र्थी ओं और सामग्री से ऐसा प्रति हो ा है विक रेलवे लाइन क े पतिhम की ओर कोई विवकास गति विवति यां नहीं की गई हैं। जो भी विवकास विकया गया है, वह रेलवे लाईन क े पूव% रफ योजना क े सेक्टर-A में विकया गया लग ा है। न ो विकसी भी सामग्री को रिरकॉड- पर लाया गया है और न ही रिरकॉड- पर कोई गुहार लगाई गई है विक LDA द्वारा विनर्मिम विबजली, सीवर लाइन, लड़क का उपयोग यातिचकाक ा- द्वारा विकया गया है। रिरकॉड- पर कोई सामग्री नहीं है जो यह साविब कर सक े विक एलडीए क े बुविनयादी ढांचे से यातिचकाका ा- क े परिरसर में विबजली कनेक्शन भी प्रदान विकया गया है। राष्ट्रीय राजमाग- संख्या 24 लखनऊ और सी ापुर को जोड़ने वाली पुरानी सड़क है और यह LDA की विवकास परिरयोजना का विहस्सा नहीं लग ी है। 34... भूविम पर विकए गए विवकास काय- और व्यय को स्र्थीाविप करने क े लिलए या अति विनयम क े ारा 8 और 9 क े संदभ- में अपने नज़दीकी क्षेत्र में विकए गए व्यय को स्र्थीाविप करने क े लिलए सिजससे विक यातिचकाक ा- लाभास्थिन्व हो सक ा है, अथिभलेख पर क ु छ भी नहीं खरीदा गया है। यातिचकाक ा- को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवकास प्राति करण या लखनऊ विवकास प्राति करण द्वारा विकए गए विवकास कायp क े लिलए कोई लाभ नहीं होने की स्थिस्र्थीति में, यातिचकाक ा- या नागरिरक को विवकास शुल्क क े भुग ान क े अ ीन नहीं विकया जा सक ा है।“ 5) पुनस्र्थीा-पना क े समय इस रह क े विवकास शुल्क अति विनयम की ारा 17(1) क े परं ुक पर विवचार विकए जा े हैं, जो विनम्न अनुसार है: “17. भूविम का अविनवाय- अति ग्रहण.- (1) यविद राज्य सरकार की राय में, राज्य सरकार को विवकास क े उद्देश्य से या विकसी अन्य उद्देश्य से ली गई कोई भूविम की आवश्यक ा हो ी है ो इस अति विनयम क े ह राज्य सरकार भूविम अति ग्रहण अति विनयम, 1894 क े प्राव ानों क े ह ऐसी भूविम का अति ग्रहण कर सक ी है। बश [ कोई भी व्यविक्त, सिजससे कोई भी भूविम इ नी अति ग्रही हो, पाँच वर्ष- की अवति की समाविप्त क े बाद, उस भूविम पर उस भूविम की पून-स्र्थीापना क े लिलए राज्य सरकार को इस रह क े अति ग्रहण की ारीख लागू हो ी है विक भूविम नहीं रही है इस प्रयोजन क े लिलए उपयोग विकया जा ा है, सिजसक े लिलए इसे अति ग्रविह विकया गया र्थीा और यविद राज्य सरकार उस प्रभाव से सं ुष्ट है, ो यह उन पर पुन-भुग ान क े लिलए भूविम की बहाली का आदेश देगा, जो व्याज क े सार्थी अति ग्रहण क े संब में विकए गए र्थीे। बारह प्रति श प्रति वर्ष- की दर से और इस रह क े विवकास शुल्क यविद कोई हो, जैसा विक अति ग्रहण क े बाद हो सक ा है। (2) जहाँ राज्य सरकार द्वारा कोई भूविम अति ग्रविह की गई हो, सरकार उस भूविम को प्राति करण या विकसी स्र्थीानीय प्राति कारी को भूविम हस् ां रिर करने क े बाद ले सक ी है, सिजसक े लिलए प्राति करण द्वारा भुग ान पर भूविम या उस अति विनयम क े ह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विदए गए मुआवजे क े स्र्थीाविनय प्राति करण और अति ग्रहण क े संबं में सरकार द्वारा लगाए गए आरोपों क े रह अति ग्रविह की गई है।” (6) अपीलार्थी%गण क े विवद्व अति वक्ता ने ब ाया विक प्रश्नग भूविम 138575.25 वग- फ ु ट, याविन 12878.741 वग- मीटर है और ऐशबाग-मेलानी खंड और राष्ट्रीय राजमाग- सं. 24 की रेलवे लाइन क े बीच स्थिस्र्थी है। चूंविक प्रश्नग भूविम एलडीए की विनयोसिज योजना का विहस्सा है, क्षेत्र में सभी आवश्यक बाहरी ढांचाग विवकास जैसे सड़क विनमा-ण, विवजली, पानी और सीवर लाइनों का विनमा-ण को उपलब् कराया गया है। यह भी कहा गया है विक अति विनयम क े ह विवकास का अर्थी- है पूरे क्षेत्र का समग्र रूप से विवकास करना न विक क े वल एक या दो भूस्वाविमयों की भूविम। प्रश्नग भूविम मुख्य योजना का विहस्सा है और क्षेत्र क े विवकास को टूकड़ो में नही देखा जा सक ा है। उच्च न्यायालय क े समक्ष लगाए गये आक्षेविप आदेश में सक्षम प्राति कारी ने विनम्नलिललिख क - प्रस् ु विकए है: “11.....प्रश्नग ् में सी ापुर शहरी विवस् ार योजना क े अनुसार, वर्ष- 1981 में 168.529 हेक्टेयर भूविम क े अति ग्रविह विकया गया र्थीा। यह भूविम पूण-: विवकसिस भूविम र्थीी और इस भूविम क े ह लगभग 97.1% भूविम की योजना बनाई गई र्थीी। सभी साव-जविनक सुविव ाएं जैसे सड़क, विवजली, पानी, सिसवर इत्याविद इस भूविम पर प्राति करण द्वारा उपलब् कराए गये हैं। रेलवे लाइन और राष्ट्रीय राजमागp क े बीच क ु ल 34-1-0-0 बीघा भूविम जो सड़क (राष्ट्रीय राजमाग-) से ढ़की है इसलिलए, यह विवकसिस भूविम की श्रेणी में आ ा है। चूंविक पहले से सड़क, विवजली, और पानी की सुविव ाएं उपलब् है। 19-6-0-0 बीघा क े छोड़कर क ु ल भूविम आंवविट की गई है। जो विक प्रश्नग भूविम भविवष्य क े विवकास क े लिलए आरतिक्ष है और इस संब में कोई भी विनण-य अथिभलेख में उपलब् नहीं है। विवचारा ीन भूविम सी ापुर शहर विवस् ार योजना क े अन् ग- आ ी है। रेलवे लाइन और राष्ट्रीय राजमाग- क े बीच स्थिस्र्थी भूविम का कोई भी क्षेत्रीय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds योजना मंजूर नही है लेविकन इस क्षेत्रों को जोड़कर “सड़क प्रसार योजना” सिजसमें सभी क्षेत्रों को विदखाया गया है, को मंजूरी प्रदान की गई है। उक्त योजना व -मान में मौजूद है और प्राति करण की अथिभविवन्यास योजना को नवीनीक ृ करने की कोई आवश्यक ा नही है।
12. ….प्राति करण क े अथिभलेख क े अनुसार, राष्ट्रीय राजमाग- लखनऊ सी ापुर रोड और रेलवे लाइन क े बीच लगभग 34 बीघा जमीन का अति ग्रहण विकया गया है, जो एक पेविटनुमा है और सिजसमें से 15 बीघा जमीन आवंविट और अनुमति है। 19 बीघा जमीन वैसी की वैसी ही बनी हुई है यातिचकाक ा- श्री गोपालदास की भूविम इस बीघा में शाविमल है और इस उक्त 19 बीघा भूविम में से 12 बीघा भूविम पर व्यविक्तग इमार ें आविद मौजूद है जो अति ग्रहण का कारण है। इस प्रकार से जब यातिचकाक ा- की भूविम की योजना नही बनाई गई और उसे आवंविट नही विकया गया और भूविम क े क ु छ विहस्से में उसका पेंट व्यवसाय चल रहा है, ो यह विकसी भी रह से न्यायसंग नही है विक भूविम का उपयोग लखनऊ विवकास प्राति करण द्वारा विकया गया है क्योंविक आवासीय प्राव ानों क े उपयोग क े लिलए यातिचकाक ा- क े प्रश्नग भूविम में लखनऊ विवकास प्राति करण द्वारा अति ग्रही की गई है, लेविकन उक्त प्राव ानों का उपयोग नहीं विकया गया है। इसलिलए, उपरोक्त सभी थ्यों और परिरस्थिस्र्थीति यों क े आ ार पर यातिचकाक ा- क े पक्ष में, विवचारा ीन भूविम क े हस् ां रण को यातिचकाक ा- क े पक्ष में उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विवकास अति विनयम 1973 की ारा 17 क े ह विवचार विकया जाना है।” (7) अपीलार्थी%गण क े विवद्व अति वक्ता ने कहा विक विवचारा ीन भूविम रेलवे लाइन और राष्ट्रीय राजमाग- क े बीच स्थिस्र्थी है,जो 34 बीघा मापी गई है, सिजसमें से 15 बीघा जमीन आवंविट नही की गई है। उक्त दावा पैरा 15 में विकया गया है सिजसे उच्च न्यायालय ने ध्यान में रखा और यह पाया विक विवकास शुल्क का दावा नही विकया जा सक ा क्योंविक प्रत्यर्थी% की की भूविम पर कोई भी विवकास काय- नही विकया गया। उक्त विनष्कर्ष- को सिजसे Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रत्यर्थी% क े वरिरष्ठ विवद्व अति वक्ता श्री वी. क े गग- द्वारा समर्थिर्थी करने की माँग की जा ी है। (8) प्रत्यर्थी%गण क े विवद्व अति वक्ता ने ब ाया की कु छ अन्य भूविम क े संब में, भूविम मुआवजा, पुनवा-स और पुनवा-स अति विनयम, 2013 में उतिच मुआवजा और पारदर्थिश ा की ारा 24 क े संदभ- में उसी अति ग्रहण का विहस्सा जारी विकया गया है। इसलिलए प्रत्यार्थी%गण से भेदभावपूण- रीक े से व्यवहार नही विकया जा सक े है। (9) हम यह नही पा े है विक उच्च न्यायालय द्वारा दज- विकए गए विनष्कर्ष- कानून में विटकाऊ है, उच्च न्यायालय क े समक्ष प्रति -शपर्थीपत्र में दायर विकए गये दावे क े अनुसार और आक्षेविप आदेश में भी, यह कहा गया है विक क ु ल भूविम का 97.1% विनयोसिज भूविम है। प्रत्यार्थी%गण की भूविम सविह 19 बीघा क े छोटे विहस्से में इस कारण से योजना नही बनाई गई है विक ऐसे क्षेत्र में इमार ें र्थीी। इसलिलए, जब अपीलार्थी%गण कह े है विक प्रत्यर्थी%गण की भूविम की योजना नही बनाई गई या आवंविट विकया गया है ो इस संदभ- में विक क्षेत्र का प्लाट नहीं विकया गया है। इसका म लब यह नही है विक अति ग्रविह भूविम पर अपीलार्थी%गण द्वारा कोई विवकास नही विकया गया है। यह नही है विक अति ग्रही भूविम का कु छ विहस्सा ध्यान में रखा जाना चाविहए, यह प ा लगाने क े लिलए विक क्या अति ग्रही भूविम में कोई विवकास नही विकया गया है। उच्च न्यायालय का यह विनष्कर्ष- विक प्रश्नग भूविम या अन्य आस पास क े क्षेत्र का विवकास नही विकया गया है। आक्षेविप आदेश का सही अध्ययन नहीं है क्योंविक यह स्पष्ट रूप से कहा गया है विक अति ग्रही भूविम का 97.1% विवकसिस विकया गया है। अति ग्रही भूविम क े संब में विवकास की जाँच की जानी चाविहएं। यह अपीलार्थी%गण का एक प्रकार का क - है विक उन्होंने सड़क का विनमाण- विकया है, विवजली, पानी और सिसवर लाइने प्रदान की है। इसलिलए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रत्यर्थी%गण अति विनयम की ारा 17 क े संदभ- में भूविम की बहाली क े लिलए विवकास शुल्क क े भुग ान से बच नही सक े है। (10) इसक े मद्देनजर, हम पा े है विक उच्च न्यायालय द्वारा पारिर विनण-य विवकास शुल्क की दावे की माँग को विनरस् करने वाला आदेश संवहनीय नही है। दनरूप, अपील को अनुमति प्रदान की जा ी है और उक्त विनष्कर्ष- अपास् विकये जा े है। (11) हम पा े है विक विवकास शुल्क की मात्रा ₹ 1,57,22,056 /- का विन ा-रण करने वाला आदेश प्रत्यार्थी%गण को सुनने का अवसर विदये विबना विदया गया र्थीा। त्पhा ्, मांग पत्र/आदेश 29 जुलाई 2011 विदनांविक अपीलार्थी%गण क े इस स्वंत्र ा क े सार्थी अपस् विकया जा ा है विक अति ग्रहण और विवकास शुल्क पर आये खच- को विवति क े अनुसार संसूतिच करे। विवति क े अनुरूप भूविम अति ग्रहण, पुनवा-स और पुनवा-स अति विनयम, 2013 में उतिच मुआवजा और पारदर्थिश ा का अति कार क े अन् ग- प्रत्यर्थी%गण क े लिलए उपचार पाने का विवकल्प होगा, यविद कोई हो,.......न्यायमूर्ति, (एल. नागेश्वर राव)........न्यायमूर्ति, (हेमन् गुप्ता ) नई विदल्ली 24 जुलाई 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds