Wasim v. National Capital Territory of Delhi

Supreme Court of India · 18 Jul 2019 · 2019 INSC 776
L. Nageswara Rao; Hemant Gupta
Criminal Appeal No. 1061 of 2019 @ SLP (Crl) No. 193 of 2019
2019 INSC 776
criminal appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court acquitted the appellant of dowry cruelty and abetment of suicide charges due to insufficient evidence, clarifying the distinct requirements for convictions under Sections 498A and 306 IPC.

Full Text
Translation output
अप्रतिवेद्य
भारिीय सवोच्च न्यायालय
दाांडिक अपीलीय अधिकाररिा
द ांडिक अपील सां. 1061/2019
(एसएलपी (द ांडिक) सां. 193/2019 से उत्पन्न)
वसीम ................अपीलार्थी
बन म
र ष्ट्रीय र जध नी क्षेत्र ददल्ली र ज्य ....................प्रत्यर्थी
तिर्णय
एल. िागेश्वर राव, न्यायािीश
अनुमति दी ज िी है |
JUDGMENT

1. ददन ांक 27.10.2015 को आत्महत्य क े ब रे में सूचन ममलने पर, पी िब्लू- 23 थ न अमन ववह र क े उप-तनरीक्षक बबजेंदर ददहय तनठ री ग ाँव, ददल्ली पहुांचे| उनक े पहुाँचने िक मृिक मोतनय की ल श को लटकी हुई स्थथति से नीचे उि र ज चुक थ | मृिक क े भ ई अश्वनी (पी िब्लू-12) मृिक क े स थ बैठे ममले| अपील थी क े बड़े भ ई भी मौजूद थे| एक आत्म हत्य पत्र भी जब्ि ककय गय | पी िब्लू-23 ने मृिक क े शव को मृत्योपर ांि परीक्ष क े मलए भेज | अश्वनी क बय न पी िब्लू-23 द्व र मलख गय | अगले ददन क ययप लक दांि धधक री द्व र ज ांच कर ई गई। पोथटम टयम क े अनुस र, मोतनय की मृत्यु दम घुटने क े क रण हुई थी। 2019 INSC 776

2. ददन ांक 04.11.2015 को मृिक की म ि सुनीि (पीिब्ल्यू-11) क े बय न पर एफआईआर दजय की गई। 05.02.2016 को च जयशीट द खखल की गई थी। ब द में अपील थी क े ववरुद्ध भ रिीय दांि सांदहि, 1860 (इसक े पश्च ि ‘IPC’) की ध र 498A/304B क े अांिगयि आरोप िय ककये गए| अपील थी क दोष मसद्ध करने क े मलए अमभयोजन पक्ष द्व र 23 स क्षक्षयों की परीक्ष ली गई िथ बहुि से दथि वेजों पर भरोस ककय गय | ववच रण न्य य लय ने अपील थी को IPC की ध र 498A िथ 306 क े अांिगयि दोषमसद्ध ककय | अपील थी को ध र 498A IPC क े अांिगयि अपर ध हेिु िीन वषय िथ ध र 306 IPC क े अांिगयि अपर ध हेिु च र वषों क े स म न्य क र व स की सज दी गई| अपील थी द्व र द यर की गई अपील उच्च न्य य लय द्व र आांमशक रूप से थवीक र की गई| अपील थी को ध र 306 IPC क े अांिगयि अपर ध से दोषमुक्ि ककय गय | ध र 498A क े िहि दोषमसद्धध एवां सज को उच्च न्य य लय ने बरकर र रख | अिः, यह अपील की गई|

3. मृिक मोतनय जो एक अध्य वपक क े रूप में क ययरि थी, क ववव ह अपील थी से ददन ांक 02.05.2015 को हुआ| पी िब्लू-11 सुनीि ने बय न ददय कक उनकी पुत्री मोतनय को अपील थी द्व र दहेज़ क े मलए प्रि डड़ि ककय ज रह थ | उन्होंने न्य य लय में बय न ददय कक उन्होंने मृिक को दो ब र रु. 40,000/- िथ रु. 50,000/- अपील थी को उसकी दहेज़ की म ांग पूर करने क े मलए देने क े मलए ददए| उन्होंने बय न ददय कक इस ब रे में उन्होंने न िो अपने पति को और न ही अपने पुत्र को बि य और उन्होंने यह भुगि न अपनी थवयां की बचि से ककय | उन्होंने एक बड़ी क र की म ांग क े ब रे में भी बि य | अपील थी न गेकोइल स्जल, िममलन िु में क ययरि थ और वह अपने क यय थथल पर ज ने क े मलए हव ई जह ज से य त्र क ककर य म ांग रह थ | पी िब्लू-11 ने आगे कह कक मृिक ने उन्हें बि य थ कक अपील थी क े पूनम न म की एक लड़की क े स थ ववव हेिर सम्बन्ध हैं और वह मृिक को छोड़कर पूनम क े स थ श दी करन च हि है|

4. पी िब्लू-12 अश्वनी क बय न घटन क े ददन दजय ककय गय स्जसमें उसने अपील थी द्व र दहेज़ की म ांग क े ववषय में क ु छ नहीां बि य | उसने बि य कक मृिक अपील थी क े व्यवह र से दुखी थी| मृिक क े वपि सुखबीर, पी िब्लू-10, जो घटन थथल पर पहुांचे थे, उन्होंने भी अपील थी पर दहेज़ की म ांग क कोई आरोप नहीां लग य | घटन थथल से जब्ि ककये गए आत्महत्य नोट को मृिक क े थक ू ल क े ररकॉिय से ली गई हैंि र इदटांग से िुलन कर स बबि ककय गय । आत्महत्य क े नोट में भी अपील थी द्व र दहेज की म ांग करने क कोई आरोप नहीां लग थ । ववच रण न्य य लय क े फ ै सले में जो आत्महत्य नोट पुन: पेश ककय गय थ, वह इस प्रक र है: “ररश्िे सपनों पर प्रह र बने” हमेश सर उठ कर स्जय और कभी कोई ऐस क म नहीां ककय स्जसक े क रण मुझे सर झुक न पड़े| मैं अपने वपि और भ ई से बहुि प्य र करिी हूाँ| आज उनकी आाँखों में आांसू हैं| मैं अन्दर से टूट चुकी हूाँ| मैं अपने पेशे और पढ ई से बहुि प्य र करिी हूाँ| मैंने क ु छ नहीां ककय इसमलए मैं सहन नहीां कर सकिी मैं अपनी स्जांदगी म थटर जी क े स थ जीन च हिी हूाँ, उन्होंने भी च ल की से क म ककय | मुझे ककसी से कोई मशक यि नहीां है|”

5. ररकॉिय पर उपलब्ध स क्ष्य क े अध्ययन क े पश्च ि ववच रण न्य य लय इस तनष्ट्कषय पर पहुांच कक दहेज़ की म ांग मसद्ध नहीां हुई| ह ल ांकक ववच रण न्य य लय को यकीन थ कक अमभयोजन पक्ष ने पूनम क े स थ अपील थी क े ववव हेिर सांबांध स बबि कर ददए। अपील थी द्व र उसक े ववव हेिर सम्बन्ध क े ब रे में मृिक को बि ने व ले मौखखक स क्ष्य को ववच रण न्य य लय द्व र थवीक र कर मलय गय | यह पि लगने पर कक अपील थी म नमसक तनदयतयि क दोषी है, ववच रण न्य य लय ने अपील थी को भ रिीय दांि सांदहि की ध र 498A क े अांिगयि दोषमसद्ध कर ददय | ह ल ांकक 306 IPC क े िहि कोई आरोप नहीां थ, इस अद लि क े तनणययों पर तनभयर करिे हुए ववच रण न्य य लय की र य थी कक ध र 306 IPC क े िहि दोषमसद्धध अनुज्ञेय है। ववच रण न्य य लय ने प य कक अपील थी क े खखल फ ध र 306 IPC क े िहि अपर ध मसद्ध हुआ और उसे दोषी कर र ददय गय ।

6. तनचली अद लि क े फ ै सले क े खखल फ अपील में उच्च न्य य लय ने स्जस मुख्य मुद्दे पर ववच र ककय थ, वह थ बबन ककसी आरोप क े ध र 306 IPC क े िहि सज की सत्यि । अपील थी ने उच्च न्य य लय क े समक्ष दलील दी कक उनक े खखल फ जो आरोप िय ककय गय है वह ध र 304B, IPC क े िहि है और उसे ध र 306 IPC क े िहि दोषी नहीां ठहर य ज सकि थ । इस न्य य लय क े तनणययों पर भरोस रखिे हुए, यह म न गय कक ध र 306 IPC क े िहि दोषमसद्धध की अनुमति है, यह ां िक कक ककसी ऐसे म मले में आरोप लग ए बबन भी कक आरोपी पर ध र 304 बी IPC क े िहि आरोप लग य गय है उच्च न्य य लय ने म न कक इस िरह की दोषमसद्धध न्य य की ववफलि नहीां होगी। ह ल ांकक, उच्च न्य य लय को कोई ठोस सबूि नहीां ममल कक अपील थी ने मृिक को आत्महत्य हेिु उकस य । अपील थी को ध र 306 IPC क े िहि अपर ध क े मलए इस आध र पर बरी कर ददय गय थ कक ऐस कोई सबूि नहीां है स्जससे पि चलि हो कक मृिक उसकी मौि से पहले म नमसक य श रीररक क्र ू रि की मशक र थी। उच्च न्य य लय ने यह म निे हुए कक अमभलेख पर दहेज़ की म ांग क े सम्बन्ध में पय यप्ि स क्ष्य हैं, ध र 498A IPC क े िहि अपील थी को दोषी ठहर य ।

7. ध र 306 IPC क े िहि अपील थी को बरी करन तनस्श्चि हो गय है क्योंकक उच्च न्य य लय क े फ ै सले क े खखल फ र ज्य द्व र कोई अपील नहीां की गई है। सुश्री ऐश्वय य भ टी, ववद्व न ् वररष्ट्ठ वकील ने, प्रथिुि तनदेशों पर, तनवेदन ककय कक अपील थी ध र 498A IPC क े िहि पहले ही सज भुगि चुक है, इस िथ्य को ध्य न में रखिे हुए अपील द यर नहीां करने क तनणयय मलय गय । अपील थी क े ववद्व न वकील ने कह कक ध र 306 IPC क े मलए बरी होने क े ब द ध र 498A क े िहि उनकी दोषमसद्धध अनुधचि है। उन्होंने ववच रण न्य य लय द्व र दहेज की म ांग से सांबांधधि कोई स क्ष्य उपलब्ध न होने क े सांबांध में ददए गए क रणों पर भरोस जि य ।

8. र ज्य क े मलए ववद्व न वररष्ट्ठ वकील सुश्री भ टी ने कह कक मृिक क े पररजनों क े स क्ष्यों से यह थपष्ट्ट है कक अपील थी द्व र दहेज़ की म ांग की गई थी और उच्च न्य य लय द्व र अपील थी को ध र 498A क दोषी कर र ददय ज न न्य योधचि थ ।

9. ववच रण न्य य लय द्व र ध र 498A क े िहि अपील थी की दोषमसद्धध दहेज की म ांग क े मलए नहीां थी। ध र 498A क े िहि यह दोषमसद्धध अपील थी द्व र ववव हेिर सांबांध बन ने में म नमसक क्र ू रि और मृिक को उसक े द्व र दी गई धमककयों कक वह उसे छोड़कर पूनम से श दी कर लेग, क े क रण की गई।

10. उच्च न्य य लय ने अपील थी को ध र 306 IPC क े िहि स क्ष्यों क े आध र पर तनष्ट्कषय पर पहुांचकर बरी कर ददय कक अपील थी की ओर से आत्महत्य क े मलए उकस ने क आरोप स बबि नहीां हुआ। दहेज की म ांग से सांबांधधि स क्ष्यों की चच य ककए बबन और दहेज की म ांग क े सांबांध में ववच रण न्य य लय द्व र दजय ककए गए तनष्ट्कषों से तनपटे बबन, उच्च न्य य लय ने म न कक ध र 498A क े िहि अपर ध ककय गय थ ।

11. क्र ू रि क े ब रे में ध र 498A क े थपष्ट्टीकरण में चच य की गई है जो इस प्रक र है: [498A. ककसी थत्री क े पति य पति क े न िेद र द्व र उसक े प्रति क्र ू रि करन - जो कोई, ककसी थत्री क पति य पति न िेद र होिे हुए, ऐसी थत्री क े प्रति क्र ू रि करेग, वह क र व स से, स्जसकी अवधध िीन वषय िक की हो सक े गी, दस्डिि ककय ज एग और जुम यने से भी दांिनीय होग | थपष्ट्टीकरण-इस ध र क े प्रयोजनों क े मलए, “क्र ू रि ” से अमभप्रेि है:-- (क) ज नबूझकर ककय गय कोई आचरण जो ऐसी प्रक ृ ति क है स्जससे थत्री को आत्महत्य करने क े मलए य उसक े जीवन, अांग य थव थथ्य (म नमसक य श रीररक) क े प्रति गांभीर क्षति य खिर क ररि करने क े मलए उसे प्रेररि करने की सम्भ वन है; य (ख)ककसी थत्री को िांग करन, जह ाँ उसे य उससे सम्बांधधि ककसी व्यस्क्ि को ककसी सांपवि य मूल्यव न प्रतिभूति क े मलए ककसी ववधधववरुद्ध म ांग को पूर करने क े मलए प्रपीडड़ि करने की दृस्ष्ट्ट से य उसक े अथव उससे सम्बांधधि ककसी व्यस्क्ि क े ऐसी म ांग पूरी करने में असफल रहने क े क रण इस प्रक र िांग ककय ज रह है|]

12. ध र 498A IPC क े िहि दोष एक मदहल क े प्रति क्र ू रि करने क े मलए है। क्र ू रि की व्य ख्य ज नबूझकर ककए गए ककसी ऐसे आचरण क े रूप में की ज िी है स्जससे ककसी मदहल को आत्महत्य करने य गांभीर चोट य जीवन, अांग य थव थथ्य क े मलए खिर होने की सांभ वन होिी है । दहेज की गैरक नूनी म ांग से मदहल क उत्पीड़न भी 'क्र ू रि ' क े ही सम न है। ध र 498A क े पठन से थपष्ट्ट है कक ध र 498A IPC क े मलए दोषमसद्धध ज नबूझकर ककए गए ऐसे आचरण क े मलए हो सकिी है स्जससे ककसी मदहल को आत्महत्य करने क े मलए मजबूर करने की सम्भ वन है य दहेज की म ांग क े मलए हो सकिी है। यह म न ज ि है कक दहेज की म ांग क कोई सबूि नहीां है, ववच रण न्य य लय ने अपील थी को उसक े ज नबूझकर ककए आचरण, स्जसने मृिक को आत्महत्य करने क े मलए मजबूर कर ददय, क े मलए ध र 498A IPC क े िहि दोषी ठहर य । अपील थी को ध र 306 IPC क े िहि भी दोषी ठहर य गय क्योंकक ववच रण न्य य लय ने प य कक उसे मृिक द्व र आत्महत्य क े मलए उकस य गय है।

13. ध र 306 IPC में क र व स क े स थ सज क प्र वध न है जो दस स ल िक की हो सकिी है। ध र 306 IPC क े िहि दोषमसद्धध हेिु अपर ध करने की थपष्ट्ट आपर धधक मनः स्थथति होनी च दहए। इसक े मलए एक सकक्रय य प्रत्यक्ष कृ त्य की भी आवश्यकि होिी है स्जसक े क रण मृिक को आत्महत्य करने क कोई ववकल्प नहीां ददख ई ददय और यह कृ त्य इस उद्देश्य से ककय गय हो स्जससे स्जसने मृिक को आत्महत्य क े मलए मजबूर कर ददय - देखें एम. मोहन बन म र ज्य। उकस ने की स मग्री को आकवषयि करने क े मलए, मृिक को आत्महत्य करने क े मलए सह यि य उकस ने य उकस ने क आरोपी क इर द आवश्यक है- देखें पल्लेम िेतनल ववक्टरल यांस ववक्टर मैंटर बन म आांध्र प्रदेश र ज्य । जबकक ज नबूझकर ककय गय कोई भी आचरण जो मदहल को आत्महत्य करने क े मलए मजबूर करे, ध र 498A IPC क े िहि दोषमसद्धध क े मलए पय यप्ि है । इस म मले में उच्च न्य य लय ने थपष्ट्ट तनष्ट्कषय दजय ककय कक अपील थी की ओर से न िो म नमसक और न ही श रीररक क्र ू रि स बबि हुई। इसमलए, ध र 498A IPC क े िहि दोषमसद्धध ज नबूझकर आचरण क े मलए नहीां है स्जसने मृिक को आत्महत्य करने क े मलए मजबूर कर ददय । उच्च न्य य लय ने म न कक ह ल ांकक मौि से ठीक पहले दहेज की म ांग नहीां की गई, अमभयोजन पक्ष ने श दी क े िुरांि ब द अपील थी द्व र दहेज की म ांग स बबि कर दी।

14. उच्च न्य य लय को ररकॉिय पर स क्ष्यों की ववथिृि चच य ककए बबन दहेज की म ांग क े मलए ध र 498A क े िहि अपील थी को दोषी नहीां ठहर न च दहए थ, ख सकर जब ववच रण न्य य लय ने प य कक ररकॉिय पर कोई ऐस सबूि नहीां है स्जससे यह पि चल सक े कक दहेज की कोई म ांग थी| उच्च न्य य लय ने ववच रण न्य य लय क े ऐसे तनष्ट्कषों और इसकी अथवीकृ ति क े क रणों क उल्लेख नहीां ककय ।

15. उपयुयक्ि क रणों से, उच्च न्य य लय क तनणयय ख़ ररज ककय ज ि है। अपील मांजूर की ज िी है।..............................न्यायािीश [एल. िागेश्वर राव]..............................न्यायािीश [हेमांि गुप्िा] िई ददल्ली, जुलाई 18, 2019 अथवीकरण: देशी भ ष में तनणयय क अनुव द मुकद्द्मेब ज़ क े सीममि प्रयोग हेिु ककय गय है ि कक वो अपनी भ ष में इसे समझ सक ें एवां यह ककसी अन्य प्रयोजन हेिु प्रयोग नहीां ककय ज एग | समथि क य यलयी एवां व्य वह ररक प्रयोजनों हेिु तनणयय क अांग्रेज़ी थवरूप ही अमभप्रम खणि म न ज एग और क य यन्वयन िथ ल गू ककए ज ने हेिु उसे ही वरीयि दी ज एगी |