Raman Singh v. District Inspector of Schools, Jalaun and Others

High Court of Allahabad · 08 Jul 2019 · 2019 INSC 730
D. Y. Chandrachud; Indira Banerjee
Civil Appeal No. 5265 of 2019 @ SLP (Crl) No. 36624 of 2017
2019 INSC 730
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the High Court's dismissal of the appellant's claim for regularization of a temporary appointment without competent authority approval, limiting relief to salary for the interim period only.

Full Text
Translation output
प्रति�वेद्य
समक्ष भार�ीय सव�च्च न्यायालय
सिसविवल अपील न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील सं. 5265/2019
(यथा एस.एल.पी. (सी) सं. 36624/2017 से उद्भू� )
रमन सिंसह ...........अपीलाथ/ (गण)
बनाम
सि3ला विवद्यालय विनरीक्षक
3ालौन, उरई व अन्य ..............प्रत्यथ/ (गण)
विनण9य
न्यायमूर्ति� डाॅ.धनं3य वाई चंद्रचूड़
JUDGMENT

1. अनुमति� प्रदान की गई।

2. यह अपील अपीलाथ/ द्वारा दाखिGल विवशेष अपील को विनरस्� कर�े हुए और एकल न्यायाधीश क े विदनांक 9 अक्टूबर 2013 क े विनण9य को पुष्ट mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2019 INSC 730 कर�े हुए माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद क े तिडवी3न बेन्च क े विनण9य विदनांक 30 अक्टूबर 2017 से उद्भू� है।

3. अपीलक�ा9 प्रबंधन सविमति� द्वारा 11 अगस्� 1993 अपीलाथ/ को �ीसरे प्रत्यथ/ की प्रबंधन सविमति� द्वारा विदनांक 11 अगस्� 1993 को एक अल्प अवतिध रिरक्त क े सापेक्ष अंग्रे3ी क े एक �दथ[9] प्रवक्ता क े रूप में विनयुक्त विकया गया 3ो विक 3 माह क े अवकाश क े अनुदान पर Gाली हुआ था। विदनांक 1 अक्टूबर 1993 को विनयविम� प्रवक्ता की विनयुविक्त 3ो अवकाश पर थे, मृत्यु हो गई। परिरणामस्वरूप अपीलाथ/ सेवा में प्रविवर� रहा। विदनांक 30 3ून 1994 को प्रबंधन ने अपीलाथ/ को मूल रिरविक्त में समाविह� करने की मांग की 3ो विक विनयविम� विनयुक्त अभ्यथ/ की मृत्यु से उत्पन्न हुई।

4. अपीलाथ/ का मामला यह है विक 2 3ुलाई 1994 और दुबारा 18 माच[9] 1996 को प्रबंधन ने सि3ला विवद्यालय विनरीक्षक (डीआईओएस) से अनुमोदन मांगा, किंक�ु कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई। पीविड़� अपीलाथ/ ने अप्रैल 1996 में माननीय उच्च न्यायालय क े समक्ष, उसकी �दथ[9] विनयुविक्त को स्थाई आधार पर विनयुविक्त क े रूप में मान�े हुए परमादेश मांग�े हुए और राज्य को उसका वे�न देने का विनदbश देने क े खिलए एक रिरट यातिचका दाखिGल की, चूँविक संस्था एक सहाय�ा प्राप्त संस्था है।

5. माननीय उच्च न्यायालय ने 16 अप्रैल 1996 को इस आशय का अं�रिरम आदेश 3ारी विकया विक सुनवाई की अगली ति�थिथ �क या एक विनयविम� विनयुक्त भ�/ क े उपलब्ध होने �क, 3ो पहले हो, प्राथ/ को बकाया वे�न का भुग�ान विकया 3ा�ा रहे।

6. विदनांक 30 3ून 1997 को एक अभ्यथ/ नेम सिंसह की विनयुविक्त उत्तर प्रदेश माध्यविमक थिशक्षा सेवा चयन बोड[9] द्वारा की गई। राज्य क े अनुसार, चयविन� अभ्यथ/ को पद धारिर� क े खिलए अपीलाथ/ और प्रबंधन की सांठगांठ से रोक विदया गया, यद्यविप यह एक विववाद का मामला है। उप थिशक्षा विनदेशक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क े पत्र विदनांविक� 31 3ून 1997 में यह कहा गया है विक नेम सिंसह स्कू ल का चा39 नहीं ले सक�े थे क्योंविक उन्होंने स्कू ल से कोई संपक 9 नहीं विकया। स्वीक ृ � स्थिस्थति� यह है विक चयविन� अभ्यर्थिथयों ने पद धारण नहीं विकया था। सि3सक े परिरणामस्वरूप अपीलाथ/ विनयोसि3� पद पर काय9र� रहा। अपीलाथ/ का वे�न रोक विदया गया था।

7. अभ्यथ/ द्वारा दायर रिरट यातिचका विदनांक 9 अक्टूबर 2013 को माननीय उच्च न्यायालय क े विवद्व� एकल न्यायाधीश द्वारा विनरस्� कर विदया गया। यातिचका क े विनरस्�ीकरण क े विवरुद्ध अपीलाथ/ ने विवशेष यातिचका दायर की।

8. विवशेष यातिचका क े लंबन क े दौरान अं�रिरम इस अं�रिरम सुरक्षा क े श�n की �रह अपीलाथ/ क े पक्ष में एक अं�रिरम आदेश 3ो विक 16 अप्रैल 1996 क े पूव[9] माननीय उच्च न्यायालय क े एकल न्यायाधीश द्वारा प्रदान की गई। आक्षेविप� आदेश विदनांक 30 अक्टूबर 2017 द्वारा विवशेष यातिचका तिडवी3न बेंच द्वारा विनरस्� कर दी गई थी। माननीय उच्च न्यायालय ने पाया विक कविठनाई विनवारण आदेश विद्व�ीय 1981 की श�n में अपीलाथ/ की विनयुविक्त एक अवकाश की रिरक्त में हुई थी। माननीय उच्च न्यायालय ने माना विक सक्षम प्रातिधकारी द्वारा उनकी विनयुविक्त क े अनुमोदन क े अभाव में उनकी सेवा को बनाए रGने एवं वे�न क े भुग�ान का आगे कोई विनदbश देना विवतिध में स्वीकाय[9] नहीं है।

9. माननीय उच्च न्यायालय क े आदेश से यह प्र�ी� हो�ा है विक प्रति� शपथपत्र दायर विकया गया सि3समें डीआईओएस की �रफ से यह कहा गया विक विदनांक 14 3ुलाई 1994 को पत्र क े माध्यम से प्रत्यथ/ की विनयुविक्त क े अनुमोदन को मना कर विदया गया था क्योंविक यह आदेश उत्तर प्रदेश माध्यविमक थिशक्षा सेवा चयन बोड[9] अतिधविनयम 1982 की धारा 18 क े प्रावधानों एवं कविठनाई विनवारण आदेश क े संग� नहीं था। परिरणामस्वरूप एकल पीठ क े विनण9य से सहम� तिडवी3न बेन्च ने विनदbश विदया विक पारिर� Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विनण9य की ति�थिथ �क भुग�ान विकया गया अतिधक वे�न पुनप्रा9प्त नहीं विकया 3ाएगा, लेविकन अपीलक�ा9 आगे का कोई अन्य पारिरश्रविमक पाने का हकदार नहीं होगा।

10. इस विवशेष अपील में तिडविव3न बेंच क े विनण9य को अपास्� कराने क े खिलए प्रत्यथ/ ने भार� सरकार क े अनुच्छेद 136 क े �ह� इस न्यायालय में शरण खिलया। विदनांक 10 3नवरी 2018 को 3ब विवशेष अनुमति� यातिचका न्यायालय क े समक्ष प्रस्�ु� हुई �ो प्राथ/ की �रफ से विनम्नखिलखिG� कथन विकया गया। "यातिचकाक�ा9 की �रफ से विवद्वान अतिधवक्ता ने कहा विक यातिचकाक�ा9 विवद्यालय में प्रवक्ता क े पद क े अति�रिरक्त अन्य विकसी अतिधकार का दावा नहीं कर�ा है, लेविकन क े वल इ�ना कह�ा है विक यातिचकाक�ा9 को विनयविम� या अन्य विनयुविक्त होने �क उसकी सेवा में बने रहने विदया 3ा सक�ा है।"

11. इसक े बाद 13 अगस्� 2018 को न्यायालय द्वारा विनदbश विदया गया विक सि3�ने समय �क अपीलाथ/ ने सेवा की है उसे उ�ने समय �क का वे�न विदया 3ाना चाविहए। इस बा� को माना गया विक विनदbशों का पालन विकया गया है।अपीलाथ/ अपनी सेवा में है और उसक े वे�न का भुग�ान कर विदया गया है।

12. अपीलाथ/ क े वरिरष्ठ विवद्वान अतिधवक्ता मीनाक्षी अरोरा ने �क 9 विदया विक प्राथ/ ने डीआईओएस क े इस कथन को गंभीर�ा से विववाविद� विकया है विक उसकी सेवाओं को विदनांक 14 3ुलाई 1994 को 3ारी पत्र द्वारा अस्वीकृ � कर विदया गया था। प्राथ9ना की गयी है विक विवद्व� एकल न्यायाधीश क े समक्ष इस पत्र को संदर्थिभ� नहीं विकया गया था और यह क े वल �ब संदर्थिभ� विकया गया 3ब तिडवी3न बेंच क े समक्ष विवशेष अपील में प्रति� शपथ पत्र प्रस्�ु� विकया गया था विक विवभाग ने इस पत्र को 3ारी न कर�े हुए अनुमोदन पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवचार विकया। यह प्राथ9ना की गई है विक यविद इसक े परिरणाम स्वरूप यद्यविप माननीय उच्च न्यायालय क े अं�रिरम आदेश क े �ह� अपीलाथ/ वरिरष्ठ अध्यापक क े रूप में 1993 से क ृ � क�9व्यों क े विनव9हन और शेष सेवाओं को 3ारी रGे, प्रबंधन ने अपीलाथ/ को प्रधानाचाय[9] का पदभार ग्रहण करने क े रूप में प्रस्�ाविव� विकया।

13. दूसरी ओर प्रथम प्रत्यथ/ क े वरिरष्ठ विवद्वान अतिधवक्ता श्री �न्मय अग्रवाल ने �क 9 विदया है विक माननीय उच्च न्यायालय का विनष्कष[9] सही है विक अपीलाथ/ की �दथ[9] विनयुविक्त विकसी भी परिरस्थिस्थति� में उस समय क े पद धारक की मृत्यु पर मौखिलक विनयुविक्त नहीं हो सक�ी थी। यह प्राथ9ना की गई है विक विनयविम� विनयुविक्त करने में विकसी भी प्रविxया का पालन नहीं विकया गया है और क्योंविक यह सिसद्धां� प्रविमला विमश्रा बनाम उप थिशक्षा विनदेशक (1997 (2) ESC 1284, ALL(FB) क े मामले में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने पूण[9] पीठ क े विनण9य में धारिर� विकया है। यह अस्थाई विनयुविक्त पद धारक की मृत्यु पर अल्पकाखिलक रिरविक्त क े समाप्त होने पर आवश्यक रूप से Gत्म हो गई। अ�ः यह प्राथ9ना की गई की अपीलाथ/ की विनयविम� विनयुविक्त या इस विवषय पर सेवा में बने रहने का दावा का कोई विनविह� अतिधकार नहीं था।

14. अपीलाथ/ को इस संस्थान में रिरक्त पद पर पूण9�ः अस्थाई �ौर पर विनयुक्त विकया गया। अस्थाई रूप से अभ्यथ/ की विनयुविक्त हो�े ही रिरक्त पद समाप्त हो 3ा�ा है। मूल रिरविक्त क े उत्पन्न होने पर, इसे विवतिधसम्म� भरा 3ाना अपेतिक्ष� है। इस अपीलाथ/ को ना कोई अतिधकार है और ना ही वह इस हक का दावा कर सक�ा है विक रिरक्त पद पर अस्थाई �ौर पर उसकी विनयुविक्त मूल रिरक्त में परिरवर्ति�� कर विदया 3ाना चाविहए। यह दृविष्टकोण एकल पीठ क े विवद्वान न्यायाधीश और तिडवी3न बेन्च क े अपील में खिलया गया है वह दोषपूण[9] नहीं हो सक�ा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

15. यह स्पष्ट है विक अभ्यथ/ द्वारा दावाकृ � विनयुविक्त को मूल रिरविक्त में बदले 3ाने में डीआईओएस द्वारा अनुमोदन नहीं विकया गया था। डीआईओएस ने अपीलाथ/ को 24 वष[9] पूव[9] मूल पद पर समायोसि3� करने क े प्रबन्धन की अभ्यावेदन को इस आधार पर Gारिर[3] कर विदया था विक उसकी विनयुविक्त प्रयोज्य विवतिध का उल्लंघन होगा। हालाँविक अपीलाथ/ ने काय9वाही प्रारंभ विकया और विवद्वान न्यायाधीश, एकल पीठ एवं उसक े बाद तिडवी3न बेन्च में वाद क े लंबन क े दौरान पारिर� विकए गए रिरट यातिचका में अं�रिरम आदेश क े �ह� सेवा में काय9र� है। इन काय9वाविहयों की लंबन क े दौरान उसक े कथनों क े संबंध में 3ो उसने 10 3नवरी 2018 को विकये हैं, वहाँ पर 13 अगस्� 2018 को उसक े द्वारा क ृ � काय[9] क े खिलए वे�न क े भुग�ान का विनदbश 3ारी विकया गया था। अं� में प्रबंधन ने उसे प्रभावी प्रधानाचाय[9] क े रूप में विनयुक्त करने का आश्वासन विदया। नेम सिंसह सि3न्हें वष[9] 1997 में विवतिध सम्म� विनयुक्त विकया गया उन्हें कथिथ� रूप से पदभार ग्रहण करने से रोका गया। अपीलाथ/ और प्रबंधन द्वारा 3ो �रीका अपनाया गया वह कानून की न3र में नहीं विटक सक�ा।

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16. अ�ः हमारा म� यह है विक न्याय क े लक्ष्य को �भी पूरा विकया 3ाएगा 3ब पद को भरने क े खिलए यथासंभव विनयविम� रूप से एक विनदbश 3ारी विकया 3ा�ा है विक इस आदेश की प्रमाथिण� प्रति� की प्राविप्त से 4 माह क े अंदर आवश्यक कदम उठाए 3ाएं। इस बा� को आश्वस्� करने क े खिलए विक शैतिक्षक संस्थान में काय[9] संबंधी कोई अव्यवस्था ना हो, अपीलाथ/ मामले क े �थ्य एवं परिरस्थिस्थति�यों को ध्यान में रG�े हुए स्थाई रूप से अभ्यथ/ क े चयन ना हो 3ाने �क, को शुद्ध�ः अस्थाई �ौर पर काय[9] करने विदया 3ाना चाविहए। हम भार� क े संविवधान क े अनुच्छेद 142 द्वारा प्रदत्त शविक्त का प्रयोग कर, यह विनदbश दे�े हैं विक उनक े द्वारा उस अवतिध में कृ � काय[9], 3ब �क स्थाई विनयुविक्त नहीं हो 3ा�ी है विक वे�न का भुग�ान विकया 3ाना चाविहए।

17. हम यह स्पष्ट कर�े हैं विक अपील क े विनस्�ारण हे�ु प्रबंधन ने प्रति�विनतिधत्व प्राप्त करने क े खिलए सि3स �रीक े को अपनाया है उन �रीकों को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवतिध सम्म� एवं उपरोक्त स्पष्ट�ः व्यक्त सिसद्धां�ों क े अनुरूप सक्षम प्रातिधकारिरयों द्वारा विवचार में खिलया 3ाना चाविहए।

18. यह अपील �दनुरूप उपरोक्त श�n क े आधार पर विनस्�ारिर� की 3ा�ी है। यविद कोई आवेदन लंविब� रह�ा है �ो भी वह विनस्�ारिर� माना 3ाएगा, Gचb क े खिलए कोई आदेश नहीं होगा। न्यायमूर्ति� डाॅ.धनं3य वाई चंद्रचूड़ …………………………….. न्यायमूर्ति� इंविदरा बैन3/ …..………………………... नई विदल्ली 8 3ुलाई, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds