Full Text
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील सं. 5265/2019
(यथा एस.एल.पी. (सी) सं. 36624/2017 से उद्भू )
रमन सिंसह ...........अपीलाथ/ (गण)
बनाम
सि3ला विवद्यालय विनरीक्षक
3ालौन, उरई व अन्य ..............प्रत्यथ/ (गण)
विनण9य
न्यायमूर्ति डाॅ.धनं3य वाई चंद्रचूड़
JUDGMENT
1. अनुमति प्रदान की गई।
2. यह अपील अपीलाथ/ द्वारा दाखिGल विवशेष अपील को विनरस् कर े हुए और एकल न्यायाधीश क े विदनांक 9 अक्टूबर 2013 क े विनण9य को पुष्ट mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कर े हुए माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद क े तिडवी3न बेन्च क े विनण9य विदनांक 30 अक्टूबर 2017 से उद्भू है।
3. अपीलक ा9 प्रबंधन सविमति द्वारा 11 अगस् 1993 अपीलाथ/ को ीसरे प्रत्यथ/ की प्रबंधन सविमति द्वारा विदनांक 11 अगस् 1993 को एक अल्प अवतिध रिरक्त क े सापेक्ष अंग्रे3ी क े एक दथ[9] प्रवक्ता क े रूप में विनयुक्त विकया गया 3ो विक 3 माह क े अवकाश क े अनुदान पर Gाली हुआ था। विदनांक 1 अक्टूबर 1993 को विनयविम प्रवक्ता की विनयुविक्त 3ो अवकाश पर थे, मृत्यु हो गई। परिरणामस्वरूप अपीलाथ/ सेवा में प्रविवर रहा। विदनांक 30 3ून 1994 को प्रबंधन ने अपीलाथ/ को मूल रिरविक्त में समाविह करने की मांग की 3ो विक विनयविम विनयुक्त अभ्यथ/ की मृत्यु से उत्पन्न हुई।
4. अपीलाथ/ का मामला यह है विक 2 3ुलाई 1994 और दुबारा 18 माच[9] 1996 को प्रबंधन ने सि3ला विवद्यालय विनरीक्षक (डीआईओएस) से अनुमोदन मांगा, किंक ु कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई। पीविड़ अपीलाथ/ ने अप्रैल 1996 में माननीय उच्च न्यायालय क े समक्ष, उसकी दथ[9] विनयुविक्त को स्थाई आधार पर विनयुविक्त क े रूप में मान े हुए परमादेश मांग े हुए और राज्य को उसका वे न देने का विनदbश देने क े खिलए एक रिरट यातिचका दाखिGल की, चूँविक संस्था एक सहाय ा प्राप्त संस्था है।
5. माननीय उच्च न्यायालय ने 16 अप्रैल 1996 को इस आशय का अं रिरम आदेश 3ारी विकया विक सुनवाई की अगली ति थिथ क या एक विनयविम विनयुक्त भ / क े उपलब्ध होने क, 3ो पहले हो, प्राथ/ को बकाया वे न का भुग ान विकया 3ा ा रहे।
6. विदनांक 30 3ून 1997 को एक अभ्यथ/ नेम सिंसह की विनयुविक्त उत्तर प्रदेश माध्यविमक थिशक्षा सेवा चयन बोड[9] द्वारा की गई। राज्य क े अनुसार, चयविन अभ्यथ/ को पद धारिर क े खिलए अपीलाथ/ और प्रबंधन की सांठगांठ से रोक विदया गया, यद्यविप यह एक विववाद का मामला है। उप थिशक्षा विनदेशक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क े पत्र विदनांविक 31 3ून 1997 में यह कहा गया है विक नेम सिंसह स्कू ल का चा39 नहीं ले सक े थे क्योंविक उन्होंने स्कू ल से कोई संपक 9 नहीं विकया। स्वीक ृ स्थिस्थति यह है विक चयविन अभ्यर्थिथयों ने पद धारण नहीं विकया था। सि3सक े परिरणामस्वरूप अपीलाथ/ विनयोसि3 पद पर काय9र रहा। अपीलाथ/ का वे न रोक विदया गया था।
7. अभ्यथ/ द्वारा दायर रिरट यातिचका विदनांक 9 अक्टूबर 2013 को माननीय उच्च न्यायालय क े विवद्व एकल न्यायाधीश द्वारा विनरस् कर विदया गया। यातिचका क े विनरस् ीकरण क े विवरुद्ध अपीलाथ/ ने विवशेष यातिचका दायर की।
8. विवशेष यातिचका क े लंबन क े दौरान अं रिरम इस अं रिरम सुरक्षा क े श n की रह अपीलाथ/ क े पक्ष में एक अं रिरम आदेश 3ो विक 16 अप्रैल 1996 क े पूव[9] माननीय उच्च न्यायालय क े एकल न्यायाधीश द्वारा प्रदान की गई। आक्षेविप आदेश विदनांक 30 अक्टूबर 2017 द्वारा विवशेष यातिचका तिडवी3न बेंच द्वारा विनरस् कर दी गई थी। माननीय उच्च न्यायालय ने पाया विक कविठनाई विनवारण आदेश विद्व ीय 1981 की श n में अपीलाथ/ की विनयुविक्त एक अवकाश की रिरक्त में हुई थी। माननीय उच्च न्यायालय ने माना विक सक्षम प्रातिधकारी द्वारा उनकी विनयुविक्त क े अनुमोदन क े अभाव में उनकी सेवा को बनाए रGने एवं वे न क े भुग ान का आगे कोई विनदbश देना विवतिध में स्वीकाय[9] नहीं है।
9. माननीय उच्च न्यायालय क े आदेश से यह प्र ी हो ा है विक प्रति शपथपत्र दायर विकया गया सि3समें डीआईओएस की रफ से यह कहा गया विक विदनांक 14 3ुलाई 1994 को पत्र क े माध्यम से प्रत्यथ/ की विनयुविक्त क े अनुमोदन को मना कर विदया गया था क्योंविक यह आदेश उत्तर प्रदेश माध्यविमक थिशक्षा सेवा चयन बोड[9] अतिधविनयम 1982 की धारा 18 क े प्रावधानों एवं कविठनाई विनवारण आदेश क े संग नहीं था। परिरणामस्वरूप एकल पीठ क े विनण9य से सहम तिडवी3न बेन्च ने विनदbश विदया विक पारिर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विनण9य की ति थिथ क भुग ान विकया गया अतिधक वे न पुनप्रा9प्त नहीं विकया 3ाएगा, लेविकन अपीलक ा9 आगे का कोई अन्य पारिरश्रविमक पाने का हकदार नहीं होगा।
10. इस विवशेष अपील में तिडविव3न बेंच क े विनण9य को अपास् कराने क े खिलए प्रत्यथ/ ने भार सरकार क े अनुच्छेद 136 क े ह इस न्यायालय में शरण खिलया। विदनांक 10 3नवरी 2018 को 3ब विवशेष अनुमति यातिचका न्यायालय क े समक्ष प्रस् ु हुई ो प्राथ/ की रफ से विनम्नखिलखिG कथन विकया गया। "यातिचकाक ा9 की रफ से विवद्वान अतिधवक्ता ने कहा विक यातिचकाक ा9 विवद्यालय में प्रवक्ता क े पद क े अति रिरक्त अन्य विकसी अतिधकार का दावा नहीं कर ा है, लेविकन क े वल इ ना कह ा है विक यातिचकाक ा9 को विनयविम या अन्य विनयुविक्त होने क उसकी सेवा में बने रहने विदया 3ा सक ा है।"
11. इसक े बाद 13 अगस् 2018 को न्यायालय द्वारा विनदbश विदया गया विक सि3 ने समय क अपीलाथ/ ने सेवा की है उसे उ ने समय क का वे न विदया 3ाना चाविहए। इस बा को माना गया विक विनदbशों का पालन विकया गया है।अपीलाथ/ अपनी सेवा में है और उसक े वे न का भुग ान कर विदया गया है।
12. अपीलाथ/ क े वरिरष्ठ विवद्वान अतिधवक्ता मीनाक्षी अरोरा ने क 9 विदया विक प्राथ/ ने डीआईओएस क े इस कथन को गंभीर ा से विववाविद विकया है विक उसकी सेवाओं को विदनांक 14 3ुलाई 1994 को 3ारी पत्र द्वारा अस्वीकृ कर विदया गया था। प्राथ9ना की गयी है विक विवद्व एकल न्यायाधीश क े समक्ष इस पत्र को संदर्थिभ नहीं विकया गया था और यह क े वल ब संदर्थिभ विकया गया 3ब तिडवी3न बेंच क े समक्ष विवशेष अपील में प्रति शपथ पत्र प्रस् ु विकया गया था विक विवभाग ने इस पत्र को 3ारी न कर े हुए अनुमोदन पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवचार विकया। यह प्राथ9ना की गई है विक यविद इसक े परिरणाम स्वरूप यद्यविप माननीय उच्च न्यायालय क े अं रिरम आदेश क े ह अपीलाथ/ वरिरष्ठ अध्यापक क े रूप में 1993 से क ृ क 9व्यों क े विनव9हन और शेष सेवाओं को 3ारी रGे, प्रबंधन ने अपीलाथ/ को प्रधानाचाय[9] का पदभार ग्रहण करने क े रूप में प्रस् ाविव विकया।
13. दूसरी ओर प्रथम प्रत्यथ/ क े वरिरष्ठ विवद्वान अतिधवक्ता श्री न्मय अग्रवाल ने क 9 विदया है विक माननीय उच्च न्यायालय का विनष्कष[9] सही है विक अपीलाथ/ की दथ[9] विनयुविक्त विकसी भी परिरस्थिस्थति में उस समय क े पद धारक की मृत्यु पर मौखिलक विनयुविक्त नहीं हो सक ी थी। यह प्राथ9ना की गई है विक विनयविम विनयुविक्त करने में विकसी भी प्रविxया का पालन नहीं विकया गया है और क्योंविक यह सिसद्धां प्रविमला विमश्रा बनाम उप थिशक्षा विनदेशक (1997 (2) ESC 1284, ALL(FB) क े मामले में माननीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने अपने पूण[9] पीठ क े विनण9य में धारिर विकया है। यह अस्थाई विनयुविक्त पद धारक की मृत्यु पर अल्पकाखिलक रिरविक्त क े समाप्त होने पर आवश्यक रूप से Gत्म हो गई। अ ः यह प्राथ9ना की गई की अपीलाथ/ की विनयविम विनयुविक्त या इस विवषय पर सेवा में बने रहने का दावा का कोई विनविह अतिधकार नहीं था।
14. अपीलाथ/ को इस संस्थान में रिरक्त पद पर पूण[9] ः अस्थाई ौर पर विनयुक्त विकया गया। अस्थाई रूप से अभ्यथ/ की विनयुविक्त हो े ही रिरक्त पद समाप्त हो 3ा ा है। मूल रिरविक्त क े उत्पन्न होने पर, इसे विवतिधसम्म भरा 3ाना अपेतिक्ष है। इस अपीलाथ/ को ना कोई अतिधकार है और ना ही वह इस हक का दावा कर सक ा है विक रिरक्त पद पर अस्थाई ौर पर उसकी विनयुविक्त मूल रिरक्त में परिरवर्ति कर विदया 3ाना चाविहए। यह दृविष्टकोण एकल पीठ क े विवद्वान न्यायाधीश और तिडवी3न बेन्च क े अपील में खिलया गया है वह दोषपूण[9] नहीं हो सक ा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
15. यह स्पष्ट है विक अभ्यथ/ द्वारा दावाकृ विनयुविक्त को मूल रिरविक्त में बदले 3ाने में डीआईओएस द्वारा अनुमोदन नहीं विकया गया था। डीआईओएस ने अपीलाथ/ को 24 वष[9] पूव[9] मूल पद पर समायोसि3 करने क े प्रबन्धन की अभ्यावेदन को इस आधार पर Gारिर[3] कर विदया था विक उसकी विनयुविक्त प्रयोज्य विवतिध का उल्लंघन होगा। हालाँविक अपीलाथ/ ने काय9वाही प्रारंभ विकया और विवद्वान न्यायाधीश, एकल पीठ एवं उसक े बाद तिडवी3न बेन्च में वाद क े लंबन क े दौरान पारिर विकए गए रिरट यातिचका में अं रिरम आदेश क े ह सेवा में काय9र है। इन काय9वाविहयों की लंबन क े दौरान उसक े कथनों क े संबंध में 3ो उसने 10 3नवरी 2018 को विकये हैं, वहाँ पर 13 अगस् 2018 को उसक े द्वारा क ृ काय[9] क े खिलए वे न क े भुग ान का विनदbश 3ारी विकया गया था। अं में प्रबंधन ने उसे प्रभावी प्रधानाचाय[9] क े रूप में विनयुक्त करने का आश्वासन विदया। नेम सिंसह सि3न्हें वष[9] 1997 में विवतिध सम्म विनयुक्त विकया गया उन्हें कथिथ रूप से पदभार ग्रहण करने से रोका गया। अपीलाथ/ और प्रबंधन द्वारा 3ो रीका अपनाया गया वह कानून की न3र में नहीं विटक सक ा।
16. अ ः हमारा म यह है विक न्याय क े लक्ष्य को भी पूरा विकया 3ाएगा 3ब पद को भरने क े खिलए यथासंभव विनयविम रूप से एक विनदbश 3ारी विकया 3ा ा है विक इस आदेश की प्रमाथिण प्रति की प्राविप्त से 4 माह क े अंदर आवश्यक कदम उठाए 3ाएं। इस बा को आश्वस् करने क े खिलए विक शैतिक्षक संस्थान में काय[9] संबंधी कोई अव्यवस्था ना हो, अपीलाथ/ मामले क े थ्य एवं परिरस्थिस्थति यों को ध्यान में रG े हुए स्थाई रूप से अभ्यथ/ क े चयन ना हो 3ाने क, को शुद्ध ः अस्थाई ौर पर काय[9] करने विदया 3ाना चाविहए। हम भार क े संविवधान क े अनुच्छेद 142 द्वारा प्रदत्त शविक्त का प्रयोग कर, यह विनदbश दे े हैं विक उनक े द्वारा उस अवतिध में कृ काय[9], 3ब क स्थाई विनयुविक्त नहीं हो 3ा ी है विक वे न का भुग ान विकया 3ाना चाविहए।
17. हम यह स्पष्ट कर े हैं विक अपील क े विनस् ारण हे ु प्रबंधन ने प्रति विनतिधत्व प्राप्त करने क े खिलए सि3स रीक े को अपनाया है उन रीकों को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवतिध सम्म एवं उपरोक्त स्पष्ट ः व्यक्त सिसद्धां ों क े अनुरूप सक्षम प्रातिधकारिरयों द्वारा विवचार में खिलया 3ाना चाविहए।
18. यह अपील दनुरूप उपरोक्त श n क े आधार पर विनस् ारिर की 3ा ी है। यविद कोई आवेदन लंविब रह ा है ो भी वह विनस् ारिर माना 3ाएगा, Gचb क े खिलए कोई आदेश नहीं होगा। न्यायमूर्ति डाॅ.धनं3य वाई चंद्रचूड़ …………………………….. न्यायमूर्ति इंविदरा बैन3/ …..………………………... नई विदल्ली 8 3ुलाई, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds