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भारतीय सर्वोच्च न्यायालय
दाांडिक अपीलीय अधिकाररता क्षेत्र
दाांडिक अपील सां.. 1014 of 2019
(एस एल पी (द ांडिक) सां. 9396 of 2018 से उत्पन्न)
सीि र म अपील र्थी(गण)
बन म
र ष्ट्रीय र जध नी क्षेत्र ददल्ली प्रत्यर्थी(गण)
तनणणय
भानुमतत, न्यायािीश:
अनुमति प्रद न की ज िी है |
JUDGMENT
(2) यह अपील ददल्ली उच न न्य य लय, नई ददल्ली क े क्रिममनल अपील सां. 333/2002 में तनणणय एवां आदेश ददन ांक 15.02.2018 से उत्पन्न है एवां जजसक े द्व र उच न न्य य लय ने भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 एवां 323 सहपदिि ध र 34 क े अांिगणि अपील र्थी सीि र म (A-2) को दोषमसद्ध कर ददय है एवां उसे आजीवन क र व स की सज़ दी गई | (3) सांक्षेप में अमभयोजन की िरफ से बि य गय है क्रक 2 जुल ई, 1990 को र ि क े 10:00 बजे, मृिक मांगल मसांह की पत्नी घ यल कल विी (PW-19) अपने पति क े स र्थ कदणम पुरी में न य की दुक न बांद करने क े ब द घर ज रही र्थी| जब वे गगरध री ल ल (A-1) की दुक न क े प स पहुुँने, िो अपील र्थी सीि र म (A-2), र म प ल (A-3) एवां र म फल (A-3) वहीीँ उपजथर्थि र्थे| मृिक मांगल मसांह ने गगरध री ल ल (A-1) से कह क्रक उसक े घर से जुड़े बबजली क े खांभे से बबजली मि नोरी करो| गगरध री ल ल (A-1) गुथसे में आ गय एवां मृिक मांगल मसांह क े कहने क ववरोध करने लग एवां सभी अमभयुकगण मृिक मांगल मसांह से ग ली गलौन करने लगे| र म प ल (A-3) ने मृिक मांगल मसांह क े मसर में घांस म र एवां सीि र म (A-2) एवां र म फल (A-4) ने िांिे एवां हॉकी 2019 INSC 738 जथिक इत्य दद से मृिक मांगल मसांह को म र | मृिक की पत्नी कल विी (PW-19) ने बीन में हथिक्षेप करने की कोमशश की िो उसक े ह र्थ में नोि आई| शोर सुनकर बृजमोहन (A-5) भी वह ां पर आ गय | जब र जक ु म र (PW-9), लील विी (PW-4) एवां जय मसांह (PW-14) उसे बन ने आये िो अन्य अमभयुक्िगण ने जय मसांह (PW-14) एवां र जक ु म र (PW-9) एवां लील विी (PW-4) को घ यल क्रकय | बृजमोहन (A-5), सुभ ष (A-9) एवां र जेंदर (A-6) ने र जक ु म र (PW-9) पर हमल क्रकय और उसको भी नोिें आई| घ यलों को अथपि ल ले ज य गय | मांगल मसांह घ यल होने क े क रण मर गय | र जक ु म र (PW-9) द्व र दजण मशक यि पर, भ रिीय दांि सांदहि की ध र 147,148,307 एवां 323 क े अांिगणि एफ.आई. आर दजण की जो ब द में भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 में पररवतिणि हो गयीां| िॉ. एम.पी. स रांगी (PW-6) ने मृिक मांगल मसांह क े शव क पोथि मोिेम क्रकय | उसने मसर क े ऊपर 3 cm x 0.[5] cm आक र क एक खुल हुआ घ व देख; मसर क े र ईि पैरीिो िेम्पोरल रीजन में 2 cm x 3 cm आक र क खुल हुआ घ व; द दहने क न क े उपरी भ ग क े ऊपर 1 cm x 5 cm क खुल हुआ घ व इत्य दद| उसने कह क्रक नोि सां. 1 से 3 स म न्यि: मृत्यु होने क े मलए घ िक एवां पय णप्ि र्थे | ज ांन परी होने पर, A-1 से A-4 क े ववरुद्ध भ रिीय दांि सांदहि की ध र 325, 323 एवां 302 की सहपदिि ध र 34 क े अांिगणि न जणशीि फ इल की गयी र्थी | (4) अमभयुक्ि क े अपर ध को मसद्ध करने हेिु, अमभयोजन ने मृिक की पत्नी कल विी (PW-
19) एवां मृिक क बेि र जक ु म र (PW-9), लील विी (PW-4), जय मसांह (PW-14), ववजय क ु म र (PW-13) एवां अन्य नश्मदीद गव ह क परीक्षण क्रकय | मौखखक एवां दथि वेज़ी स क्ष्य पर ववन र करिे हुए, ववन रण न्य य लय ने भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 सहपदिि ध र 34 क े अांिगणि A-2 से A-4 को दोषमसद्ध बि य एवां उन्हें आजीवन क र व स की सज़ दी | बृजमोहन (A-5), र जेंदर (A-6) एवां सुभ ष (A-9) को भ रिीय दांि सांदहि की ध र 323 सहपदिि ध र 34 क े अांिगणि दोषमसद्ध क्रकय गय एवां उनको छ: महीने क किोर क र व स की सज़ दी गयी | र जेश (A-7) एवां मनफल (A-8) को ररह कर ददय | गगरध री (A-1) ववन रण क े दौर न मर गय र्थ एवां उसक े ववरुद्ध लगे आरोप ख़ ररज हो गये|| (5) व्यगर्थि होकर, अमभयुक्ि ने उच न न्य य लय क े समक्ष अपील की | उच न न्य य लय ने आक्षेवपि तनणणय ददन ांक 15.02.2018 द्व र सीि र म (A-2) द्व र दजण अपील ख़ ररज की इस प्रक र ववन रण न्य य लय द्व र दोषमसद्ध करिे हुए आजीवन क र व स की सज़ दी| उच न न्य य लय क े समक्ष अपील की लांबबि होने क े दौर न, र म प ल (A-3) एवां र म फल (A-4) मर गए एवां उनक े ववरुद्ध लगे आरोप ख़ ररज हो गए| बृजमोहन (A-5), र जेंदर (A-6) एवां सुभ ष (A-9) द्व र की गई अपील आांमशक रूप से थवीकृ ि की गई | उच न न्य य लय ने भ रिीय दांि सांदहि की ध र 323 सहपदिि ध र 34 क े अांिगणि उनकी दोषमसद्गध की पर उनकी सज़ उनक े द्व र क र व स में बबि ई अवगध िक कम कर दी एवां रूपये 10,000/- िक जुम णन बढ़ ददय र्थ | अपनी अपील क े ख़ ररज होने से व्यगर्थि होकर, अपील र्थी सीि र म (A-2) ने यह अपील की| (6) हम अपील र्थी की ओर से उपजथर्थि ववद्व न अगधवक्ि श्रीमिी भ रिी त्य गी एवां प्रत्यर्थी- र ज्य की ओर से उपजथर्थि ववद्व न ् अतिररक्ि सोमलमसिर जनरल श्री क े. एम. निर ज को सुन नुक े हैं एवां आक्षेवपि तनणणय एवां ररकॉिण पर स क्ष्य/िथ्यों को ध्य न से पढ़ नुक े हैं| (7) घ यल नश्मदीद गव ह कल विी (PW-19) एवां र जक ु म र (PW-9) क स क्ष्य ववववक्षक्षि रूप से लील विी (PW-4) एवां जय मसांह (PW-14) क े स क्ष्य की पुजष्ट्ि करिे हैं| क्योंक्रक कल विी घ यल हुई र्थी, घ यल गव ह होने क े न िे, कल विी क स क्ष्य सबसे महत्वपणण म न ज येग | सभी गव हों क े स क्ष्य प्रभ वश ली एवां दृढ हैं क्रक अमभयुक्ि सां. 1 से 4 िक ने मृिक मांगल मसांह पर हॉकी जथिक एवां िांिे से हमल क्रकय गय | अमभयुक्ि गगरध री (A-1), र मप ल (A-3) एवां र मफल (A-4) मर गए हैं| (8) अपील र्थी सीि र म (A-2) की ओर से प्रथिुि ववद्व न ् अगधवक्ि श्रीमिी भ रिी त्य गी ने कह क्रक घिन पहले से पवणतनयोजजि नहीां र्थी एवां मसफ ण मृिक मांगल मसांह एवां उसकी पत्नी कल विी (PW-19) ने न य की दुक न से अपने घर की िरफ लौििे हुए गगरध री को बबजली की नोरी करने क े सम्बन्ध में प्रश्न क्रकय जजसक े पररण मथवरूप मौखखक झगड़ हुआ एवां इसी प्रक र, परी घिन आवेश में आने क े क रण हो गयी र्थी एवां इस प्रक र, उच न न्य य लय अपील र्थी को भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 सहपदिि 34 क े अांिगणि दोषमसद्गध करने में सही नहीां र्थ एवां अमभयुक्ि क कृ त्य भ रिीय दांि सांदहि की ध र 300 क े अपव द 4 क े अांिगणि आि है| (9) प्रत्यर्थी-र ज्य की ओर से प्रथिुि ववद्व न अतिररक्ि सोमलमसिर जनरल श्री क े.एम निर ज ने हम र ध्य न स क्ष्य की िरफ ददल य है एवां उच न न्य य लय क े तनष्ट्कषण को ब र ब र दुहर िे हुए कह क्रक उच न न्य य लय ने भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 सहपदिि 34 क े अांिगणि अपील र्थी सीि र म (A-2) को सही दोषमसद्ध क्रकय है एवां उच न न्य य लय क े आक्षेवपि तनणणय में हथिक्षेप करने क कोई आध र नहीां है| (10) ववन र करने क मसफ ण एक यही प्रश्न है क्रक भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 सहपदिि 34 क े अांिगणि अपील र्थी की दोषमसद्गध को बरक़र र क्रकय ज सकि है य नहीां | जैस क्रक अपील र्थी की ओर से प्रथिुि ववद्व न अगधवक्ि ने कह क्रक घिन पवणतनयोजजि नहीां र्थी| 2 जुल ई, 1990 को र ि 10:00 बजे जब मृिक मांगल मसांह अपनी पत्नी कल विी (PW-19) क े स र्थ अपनी न य की दुक न बांद करने क े ब द अपने घर लौि रह र्थ, र थिे में उन्होंने गगरध री को बबजली क े खांभे से बबजली नुर ने क े सम्बन्ध में प्रश्न क्रकय | इसक े क रण पक्षक रों क े बीन मौखखक कह सुनी हो गयी, जजसक े दौर न अपील र्थी सीि र म (A-2), गगरध री (A-1), र मप ल (A-3) एवां र मफल (A-4) ने मृिक मांगल मसांह पर हॉकी जथिक एवां िांिे से हमल क्रकय | इस पर ध्य न ददय गय है क्रक अमभयुक्ि क े प स पहले से कोई शथत्र य हगर्थय र नहीां र्थ; यह लगि है क्रक उन्होंने हॉकी जथिक एवां िांिे लड़ ई क े दौर न उि ये हैं| (11) भ रिीय दांि सांदहि की ध र 300 क े अपव द 4 क े मलए तनम्नमलखखि भ ग को होन न दहए| (i) अपर ध पवणतनयोजजि नहीां होन न दहए| (ii) यह अन नक से हुई लड़ ई में आवेश में होने क े क रण होन न दहए| (iii) अपर धी को अनुगनि ल भ नहीां लेन न दहए| (iv) अपर धी क जुमण बहुि िर और अस म न्य नहीां होन न दहए| (12) जैस क्रक पहले ववन र ववमशण क्रकय गय क्रक घिन पवणतनयोजजि नहीां र्थी एवां पक्षक रों क े बीन िोध क े आवेश में अन नक से लड़ ई शुरू हो गई र्थी| घिन हुई र्थी जब मृिक मांगल मसांह अपने व पस घर क े र थिे पर गगरध री (A-1) को खांभे से बबजली नुर ने क े ववषय में सव ल क्रकय र्थ | अपील र्थी सीि र म (A-2) एवां अन्य अमभयुक्ि क े प स पहले से शथत्र नहीां र्थे| यद्दवप, नोि 1 से 3 जो मसर पर लगी नोिें र्थी, उनक े अल व मृिक मांगल मसांह क े अगधक से अगधक 9 नोिें र्थी एवां अन्य नोिें मसर, क ां धे, ब हों पर र्थी| (13) मृिक मांगल मसांह क े नोिों पर ववन र करिे हुए, यह नहीां कह ज सकि क्रक अपील र्थी सीि र म (A-2) एवां अन्य अमभयुक्ि ने मृिक मांगल मसांह पर हमल करने में अनुगनि ल भ उि य | म मले क े िथ्यों एवां गांभीरि को ध्य न में रखिे हुए, हम रे ववन र में, भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 सहपदिि ध र 34 क े अांिगणि अपील र्थी सीि र म (A-2) की दोषमसद्गध को भ रिीय दांि सांदहि की ध र 304 भ ग II क े अांिगणि सांशोगधि क्रकय ज ि है| (14) पररण मथवरूप, भ रिीय दांि सांदहि की ध र 302 सहपदिि 34 क े अांिगणि अपील र्थी की दोषमसद्गध भ रिीय दांि सांदहि की ध र 304 भ ग II क े अांिगणि सांशोगधि की ज िी है| अपील र्थी सीि र म को 8 वषों क किोर क र व स की सज़ दी ज िी है| अपील आांमशक रूप से थवीकृ ि है|............न्यायािीश (आर. भानुमतत)..........न्यायािीश (ए.एस. बोपन्ना) नई ददल्ली, 09 जुल ई, 2019 अथवीकरण: देशी भ ष में तनणणय क अनुव द मुकद्द्मेब ज़ क े सीममि प्रयोग हेिु क्रकय गय है ि क्रक वो अपनी भ ष में इसे समझ सक ें एवां यह क्रकसी अन्य प्रयोजन हेिु प्रयोग नहीां क्रकय ज एग | समथि क य णलयी एवां व्य वह ररक प्रयोजनों हेिु तनणणय क अांग्रेज़ी थवरूप ही अमभप्रम खणि म न ज एग और क य णन्वयन िर्थ ल ग क्रकए ज ने हेिु उसे ही वरीयि दी ज एगी |