Dr. Professor Rajendra Chourie v. State of Uttar Pradesh & Ors.

High Court of Allahabad · 28 Aug 2019
L. Nageswara Rao; Hemant Gupta
Civil Appeal Nos. 6667-6668 of 2019 arising out of Civil Appeal Nos. 24803-24804 of 2018
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the validity of reservation and the increase of the upper age limit to 65 years for direct recruitment of professors in Uttar Pradesh government medical colleges, dismissing challenges to these measures.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार की सव च्च न्यायालय
दीवानी अपील क्षेत्राति कार
दीवानी अपील संख्याः 6667-6668 वर्ष# 2019
विवशि*ष्ट दीवानी अपील संख्या 24803-24804 वर्ष# 2018 से उत्पन्न।
डॉ. प्रोफसर राजेंद्र चौ री और अन्य। ...अपीलार्थी> (गण)
बनाम
उत्तर प्रदे* राज्य एवं अन्य। ...प्रत्यर्थी> (गण)
विनण#य
माननीय न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव।
अनुमति अनुदत्त।
JUDGMENT

1. उपरोक्त अपील में विववाद उत्तर प्रदे* राज्य में मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों क े पदों पर सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए लागू विकए जाने वाले आरक्षण और अति क म आयु सीमा 45 वर्ष# से बढ़ाकर 65 वर्ष# करने क े संबं में है। 2015 से पहले 12 वर्षV क े लिलए 12 सरकारी मेतिडकल कॉलेजों (एलोपैर्थीी) में प्राध्यापकों क े पदों पर कोई सी ी भ > नहीं र्थीी। उत्तर प्रदे* लोक सेवा आयोग द्वारा 21.12.2015 को एक mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवज्ञापन जारी विकया गया र्थीा जिजसमें विवशिभन्न एलोपैशिर्थीक मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों क े 47 रिरक्त पदों पर सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त हे ु आवेदन माँगे गये र्थीे। उक्त विवज्ञापन उच्च न्यायालय इलाहाबाद में दायर एक रिरट यातिचका में चुनौ ी का विवर्षय र्थीा। अन्य आ ारों क े अलावा, रिरट यातिचकाक ा#ओं द्वारा उठाया गया मुख्य बिंबदु यह र्थीा विक अनुसूतिच जाति, अनुसूतिच जनजाति और अन्य विपछड़ा वग# क े उम्मीदवारों क े लिलए कोई पद आरतिक्ष नहीं र्थीा। रिरट यातिचका में अति क म आयु सीमा को 45 वर्ष# से बढ़ाकर 65 वर्ष# करने पर इस आ ार पर आपलित्त की गयी विक यह उत्तर प्रदे* राज्य मेतिडकल कॉलेज शि*क्षक सेवा (विद्व ीय सं*ो न) विनयम, 2005 (संक्षेप में, 'सेवा विनयम') क े उल्लंघन में है। *ैतिक्षक योग्य ा से संबंति पात्र ा मानदंड को सं*ोति कर े हुए 24. 10. 2017 को एक अन्य विवज्ञापन जारी विकया गया र्थीा।

2. उच्च न्यायालय ने आरक्षण और अति क म आयु सीमा को बढ़ाने क े संबं में पे* विकये गये कV को नहीं माना और यातिचका को खारिरज कर विदया। अ ः, ये पुनया#चनाएँ।

3. इन पुनया#चनाओं में हमारे विवचारार्थी# दो बिंबदु हैं: a) क्या रिरट यातिचका में आक्षेविप विवज्ञापन उत्तर प्रदे* लोक सेवा (अनुसूतिच जाति, अनुसूतिच जनजाति और अन्य विपछड़ा वग# क े लिलए आरक्षण) अति विनयम, 1994 का उल्लंघन कर ा है (संक्षेप में 'आरक्षण अति विनयम); और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds b) क्या सी ी भ > द्वारा प्राध्यापकों क े पद पर विनयुविक्त क े लिलए अति क म आयु सीमा में वृतिr उत्तर प्रदे* मेतिडकल कॉलेज शि*क्षक सेवा (द्व ीय सं*ो न) विनयम, 2005 क े विवपरी है। प्राध्यापकों क े पद पर सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए आरक्षण: -

4. आरतिक्ष श्रेशिणयों से संबंति रिरट यातिचकाक ा#ओं का मुख्य क # यह है विक सरकारी मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों क े पद पर सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए जारी विकया गया विवज्ञापन आरक्षण अति विनयम क े विवपरी है क्योंविक आरतिक्ष वग# क े लिलए आरक्षण का प्राव ान नहीं र्थीा। उन्होंने यह प्रस् ु करने क े लिलए आरक्षण अति विनयम की ारा 3 पर विनभ#र ा ज ायी विक साव#जविनक सेवा में सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए आरक्षण आज्ञापक है। विनयुविक्त हे ु आरक्षण का प्रति * ारा 3 (5) क े अनुसार रोस्टर क े विहसाब से बनाया जाए जो इस प्रकार हैः  अनुसूतिच जाति 21 प्रति * क  अनुसूतिच जनजाति 2 प्रति *  अन्य विपछड़ा वग# 27 प्रति * क विववाद को अच्छी रह से समझने क े लिलए आरक्षण अति विनयम की ारा 3 को पुन: प्रस् ु करना प्रासंविगक है जो इस प्रकार है: “ ारा 3: अनुसूतिच जाति यों, अनुसूतिच जनजाति यों और अन्य विपछड़े वगV क े लिलए आरक्षण आरक्षण। – (1) लोक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds सेवाओं और पदों में, सी ी भ > क े प्रक्रम पर, विनम्नलिललिख रिरविक्तयों का प्रति *, जिजनक े लिलए भर्ति यां अनुसूतिच जाति यों, अनुसूतिच जनजाति यों और जनजाति यों क े व्यविक्तयों क े पक्ष में उप ारा (5) में विनर्दिदष्ट रोस्टर क े अनुसार की जानी हैं, आरतिक्ष विकया जाएगा। (क) अनुसूतिच जाति क े मामले में -२१ प्रति *; (ख) अनुसूतिच जनजाति यों की द*ा में: दो प्रति *; (ग) अन्य विपछड़े वगV की द*ा मेंः २७ प्रति * । ब* • विक खंड (ग) क े ह आरक्षण अनुसूची II में विनर्दिदष्ट अन्य विपछड़ा वग# क े नागरिरकों की श्रेणी में लागू नहीं होगा: आगे प्रति बं यह है विक सभी श्रेशिणयों क े व्यविक्तयों क े लिलए रिरविक्तयों का आरक्षण उस वर्ष# की कु ल रिरविक्तयों क े पचास प्रति * से अति क न हो, सार्थी ही उस सेवा क े क ै डर की क्षम ा का पचास प्रति * हो, जिजसमें भ > की जानी है: (2) xxx (3) xxx (4) xxx Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (5) राज्य सरकार आरक्षण लागू करने क े लिलए,एक अति सूतिच आदे* द्वारा उप- ारा (1) क े ह एक रोस्टर जारी करेगी जिजसमें साव#जविनक सेवा या पद की कु ल क ै डर क्षम ा *ाविमल है, जिजसमें आरतिक्ष बिंबदुओं और जारी विकए गए रोस्टर का संक े विदया गया है और इस प्रकार जारी रोस्टर को वर्ष#-दर-वर्ष# एक चालू खा े क े रूप में ब क लागू विकया जाएगा जब क विक उप- ारा (1) में उजिल्ललिख व्यविक्तयों की विवशिभन्न श्रेशिणयों क े लिलए आरक्षण प्राप्त नहीं हो जा ा है और रोस्टर और रबिंनग खा े का संचालन, उसक े बाद, समाप्त हो जाएगा, और जब लोक सेवा या उसी पद में रिरविक्त उत्पन्न होगी ो उसको उस श्रेणी क े लोगों को भरा जाएगा जो रोस्टर में उस पद से संबंति है।´

5. अपीलक ा#ओं ने सेवा विनयमावली को हमारे समक्ष प्रस् ु विकया जो सरकारी मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों क े पदों पर भ > को संचालिल कर ी है। सेवा विनयमावली का विनयम 5 उपबंति कर ा है विक प्राध्यापकों पर भ > सी ी भ > द्वारा परिरशि*ष्ट अ में श्रेणी ब द्वारा आच्छाविद है। सेवा विनयमावली का परिरशि*ष्ट 'अ' सरकारी मेतिडकल कॉलेज में सभी विवभागों/विव*ेर्ष विवभागों में स्वीक ृ पदों से संबंति है। परिरशि*ष्ट 'अ' में दो श्रेशिणयां हैं। श्रेणी 'क' उन पदों से संबंति है जिजन्हें व्यविक्तग पदोन्नति द्वारा भरा जाना है और श्रेणी 'ख' उन पदों से संबंति है जिजन्हें सी ी भ > द्वारा भरा जाना है। अपीलक ा#ओं क े अनुसार, पूरे क ै डर में पदों और रिरविक्तयों की क ु ल सं. को प्राध्यापकों क े पदों पर विनयुविक्त हे ु आरक्षण प्रदान प्रदान विकया Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जाए इस बा का ध्यान ध्यान विदया जाए । उनका आरोप है विक प्रत्य > द्वारा इस आ ार पर आरक्षण न देना विक उपलब् रिरविक्तयों की संख्या प्रत्येक विव*ेर्ष ा/विवभाग में चार से कम र्थीी, जो विक अनुतिच र्थीा।

6. प्रत्यर्थी> संख्या 1 और 2 ने प्राध्यापकों क े पदों पर सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए आरक्षण न देेने को उतिच ठहराया। विनयमानुसार, 75 प्रति * पद व्यविक्तग पदोन्नति द्वारा भरे जाएंगे और *ेर्ष 25 प्रति * सी ी भ > द्वारा होंगे। अनुसूतिच जाति यों, अनुसूतिच जनजाति और अन्य विपछड़ा वग# से संबंति आरक्षण सेवा विनयमावली क े विनयम 6 में विदया गया है। आरक्षण अति विनयम को सेवा विनयमों क े संदभ# में *ाविमल विकया गया है। राज्य का क # है विक विनयम 6 क े लिलए महत्वपूण# है। प्रति बं यह स्पष्ट कर ा है विक श्रेणी 'अ' में प्रत्येक विव*ेर्ष ा/विवभाग से संबंति पदों की क ु ल सं. को एकल इकाई माना जाएगा। दूसरे *ब्दों में, श्रेणी 'अ' में भरे जाने वाले पदों क े लिलए आरक्षण विव*ेर्ष ा/विवभागवार होगा। आरक्षण अति विनयम की ारा 3 क े संदभ# लेकर क # विकया गया है विक य रिरविक्त का प्रति * क े वल क े वल सी ी भ > की स् र पर संबंति होगी। परिरशि*ष्ट 'अ' क े नोट पर भरोसा ज ाकर, प्रत्यर्थिर्थीयों ने प्रार्थी#ना की विक सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए आरक्षण क े वल भी लागू विकया जा सक ा है जब प्रत्येक विवभाग में चार से अति क पद उपलब् हों। प्रत्यर्थिर्थीयों का क # है विक सभी विवभागों में उपलब् पद चार से कम र्थीे। हालांविक जनरल मेतिडजिसन एंड जनरल सज#री स्पेशि*एलिलटी में पांच पद र्थीे, लेविकन उच्च न्यायालय इलाहाबाद रिरट संख्या 7190 वर्ष# 2006 द्वारा पारिर अं रिरम आदे* क े मद्देनजर प्रत्येक विवभाग में भरे जाने वाले पदों की संख्या क े वल दो र्थीी। अ ः राज्य ने क # विदया विक सेवा विनयमावली क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अनुरूप विवज्ञविप्त में आरक्षण नहीं विदया जा सक ा र्थीा। अपने क # क े समर्थी#न में उत्तर प्रदे* राज्य बनाम चट्टोपाध्याय(2004) 12 एस.एस.सी. 333 क े मामले में में इस न्यायालय द्वारा पारिर आदे* पर भरोसा ज ाया और कहा विक आरक्षण प्रदान करने क े लिलए पूरे क ै डर पर विवचार नहीं विकया जा सक ा है। उक्त कV क े समर्थी#न में प्रत्यर्थी> ने हीरा लाला बनाम उत्तर प्रदे* राज्य एवं अन्य (2010) 82 एल.एल. आर. 453 (एफ बी) क े मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायलय की पूण# पीठ द्वारा पारिर विनण#य पर भरोसा ज ाया।

7. सेवा विनयमावली का विनयम 6 प्राध्यापकों क े पदों पर सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए आरक्षण लागू कर ा है। यहां कोई विववाद नहीं है विक परं ुक यह कह ा है विक प्रवग# “क” में प्रत्येक विव*ेर्षज्ञ ा/विवभाग को एकल इकाई समझा जाएगा। पदोन्नति क े लिलए श्रेणी 'क' संवग# से काडर पद का 75 प्रति * क होगी। *ेर्ष 25 प्रति * जो श्रेणी 'ख' में संबंति है को सी ी भ > द्वारा भरा जाएगा। सेवा विनयमों क े परिरशि*ष्ट 'क' की श्रेणी 'ख' क े अवलोकन से यह प्रकट होगा विक प्राध्यापकों की विनयुविक्त हे ु दो विवभागों यर्थीा- जेनरल मेतिडजिसन एवं जेनरल सज#री को छोड़कर विवज्ञापन जारी विकया गया र्थीा। इन दो विवभागों में, प्रत्येक विवभाग में प्राध्यापकों क े क े वल दो पद भरे जाने क े लिलए उपलब् र्थीे। इसलिलए, 21. 12. 2015 क े विवज्ञापन क े अनुसार सी ी भ > द्वारा भरे जाने क े लिलए प्रत्येक विवभाग में क े वल चार पद उपलब् र्थीे। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

8. डॉ. जुही सिंसघल एंड अन्य बनाम उत्तर प्रदे* राज्य, सेवा पीठ संख्या 4292 वर्ष# 2016 क े मामलें में में विदये गये उच्च न्यायालय इलाहाबाद क े फ ै सले का उल्लेख करना प्रासंविगक है जिजसने विवज्ञापन, जिजसे विदनांक 21.

12. 2015 को चुनौ ी विदया गया र्थीा और जो इन अपील की विवर्षय वस् ु है, की जांच की। यह ारिर कर े हुए विक सेवा विनयमावली का कहीं भी उल्लंघन नहीं है उच्च न्यायालय ने अति सूचना को बरकरार रखा ।

9. उच्च न्यायालय इलाहाबाद की पूण# पीठ ने आरक्षण अति विनयम क े ह अनुसूतिच जाति यों क े आरक्षण की प्रयोज्य ा पर, जैसा सहाय ा प्राप्त संस्र्थीानों में लागू है, को विवचार में लिलया। यह ारिर विकया गया विक आरक्षण अति विनयम को सेवा में नहीं लागू विकया जा सक ा है जहां पर काडर में पद की संख्या 5 से कम है। हमारे समक्ष अपीलक ा#ओं और प्रत्यर्थिर्थीयों की ओर से प्रस् ु विकए गए थ्यों एवं कV पर विवचार करने क े बाद, हम सं ुष्ट हैं विक सरकारी मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों क े पद पर सी ी भ > द्वारा विनयुविक्त क े लिलए आरक्षण प्रदान नहीं करने में उत्तरदा ाओं द्वारा कोई त्रुविट नहीं की गई है। विनयुविक्त की इकाई विव*ेर्षज्ञ ा /विवभाग है और प्रत्येक विव*ेर्षज्ञ ा/विवभाग में उपलब् पदों की सं. पांच से कम है। सेवा विनयमों क े परिरशि*ष्ट 'क' में श्रेणी 'ख' सी ी भ > को ब ा ा है जो विवज्ञापन का विवर्षयवस् ु है। अपीलक ा#ओं का यह क # विक सभी विवभागों में े क ै डर को आरक्षण प्रदान करने क े लिलए ध्यान में रखा जाना चाविहए, इस क # को उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने खारिरज कर विदया,जो सही है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अति क म आयु सीमा का विवस् ारः

10. सेवा विनयमावली क े विनयम 9 में यह प्राव ान है विक प्राध्यापकों क े पद पर विनयुविक्त क े लिलए अति क म आयु सीमा 45 वर्ष# है। अपीलार्थी> की अति क म आयु क े मामलें में विवज्ञापन द्वारा 65 वर्ष# वर्ष# विवविह है जो सेवा विनयमावली क े विनयम 9 क े विवरूr है। अपीलक ा#ओं ने क # विदया विक ऊपरी आयु सीमा में वृतिr एक सरकारी आदे* विदनांक 06. 02. 2015 द्वारा की गई र्थीी। उनक े अनुसार,भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 309 क े परं ुक क े अ ीन बनाए गए विनयम को काय#पालिलका क े आदे* द्वारा अध्यारोही नहीं विकया जा सक ा।

11. प्रत्यर्थिर्थीयों ने क # विदया विक शि*क्षकों की न्यून म योग्य ा क े लिलए मेतिडकल संस्र्थीान विवविनयम, 1998 (संक्षेप में, 'विवविनयम') को मेतिडकल काउंजिसल ऑफ इंतिडया (एमसीआई) द्वारा ैयार की गया र्थीा जो मेतिडकल कॉलेज में प्राध्यापकों की विनयुविक्त को *ाजिस कर ा है। उन्हें समय -समय पर सं*ोति विकया गया है। उक्त सं*ोति विवविनयमों क े अनुसार, अति क म आयु 70 वर्ष# विन ा#रिर की गई है। सरकार ने प्राध्यापकों क े पद पर सी ी भ > की विनयुविक्त क े लिलए ऊपरी आयु सीमा को 45 वर्ष# से बढ़ाकर 65 वर्ष# करना उपयुक्त माना। आयु बढ़ाने क े 06. 02. 2015 को जारी सरकारी आदे* को अपीलक ा#ओं द्वारा चुनौ ी नहीं दी गई है। प्रत्यर्थिर्थीयों ने उच्च न्यायालय द्वारा पारिर डॉ. जुही सिंसघल(उपरोक्त) क े मामले में विनभ#र ा जाविहर की है जो उसी विवज्ञापन से संबंति है और जो इन पुनया#चनाओं की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवर्षय वस् ु है। नवयुग अशिभयान सविमति बनाम उत्तर प्रदे* राज्य में में पारिर विनण#य पर भी भरोसा ज ाया गया। उक्त मामले में, उच्च न्यायालय क े समक्ष जो प्रश्न र्थीा वह प्राध्यापक (एलोपैर्थीी) क े पद पर विनयुविक्त से संबंति र्थीा और यातिचकाक ा#ओं ने जो चुनौ ी दी गयी वह अति क म आयु सीमा 65 वर्ष# क बढ़ाने से संबंति र्थीी। खण्डपीठ ने एमसीआई विवविनयमों क े प्राव ानों की जांच की जिजसका उपर उजिल्ललिख है, जिजसक े द्वारा बिंप्रजिसपल क े पद क े लिलए अति क म आयु 70 वर्ष# विन ा#रिर की गई र्थीी और यह ारिर विकया विक विनयुविक्त क े लिलए आयु, जैसा एमसीआई द्वारा विवविनयमों में विवविह है, वह सेवा विनयमावली क े विनयम 9 से अति क महत्वपूण# होगा। उक्त विनण#य क े विवरूr दायर विव*ेर्ष अनुमति यातिचका को विदनांक 08. 05. 2019 को इस न्यायालय ने खारिरज कर विदया गया। सरकार की ओर से कहा गया विक सरकारी मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों क े पदों पर सी ी भ > 2015 से पहले 12 वर्षV से नहीं की जा सकी क्योंविक योग्य और सक्षम व्यविक्त चयन में भाग लेने क े लिलए आगे नहीं आगे नहीं आये। प्राध्यापकों क े पदों पर चयन क े लिलए बडे़ पैमाने पर भागीदारी सुविनति’ करने क े लिलए, सरकार का विवचार र्थीा विक ऊपरी आयु सीमा 65 साल क बढ़ाया जाना चाविहए। सरकार की ओर आगे क # विदया गया विक अति क म आयु में बढ़ोत्तरी करक े यातिचकाक ा#ओं को कोई पूवा#ग्रह कारिर नहीं विकया गया है।

12. पक्षकारों द्वारा प्रस् ु कV पर विवचार करने क े उपरान्, हम उच्च न्यायालय द्वारा रिरकाड# विकये गये थ्यों को मंजूरी प्रदान कर े हैं जिजसमें उनका अति क म आयु सीमा को 45 वर्ष# से बढ़ाकर 65 वर्ष# करने का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विनण#य दूविर्ष नहीं है। उच्च न्यायालय ने डॉ. जूही सिंसघल (उपरोक्त) क े मामले में में प्राध्यापकों क े पद पर सी ी भ > क े लिलए अति क म आयु सीमा को बढ़ाने की चुनौ ी को यह ारिर कर े हुए खारिरज कर विदया विक एमसीआई द्वारा बनाए गए विवविनयम सेवा विनयमों पर प्रभावी होंगे। उक्त विनण#य में, उच्च न्यायालय का म यह र्थीा विक सरकारी आदे* विदनांक 06. 02. 2015 क े वल विनयमों क े पूरक है और वे उनका स्र्थीान नहीं ले सक े है। उच्च न्यायालय ने आगे अवलोकन विकया विक जो आयु में छ ू ट दी गयी र्थीी वह मेतिडकल संस्र्थीानों में शि*क्षकों की कमी क े चल े दी गयी र्थीी जिजन्होंने े पदों पर विनयुविक्त क े लिलए अह ा# प्राप्त कर ली है। अति क म आयु सीमा की छ ू ट क े वल उन विवभागों पर लागू हो ी र्थीी जहां 25 प्रति * या अति क पद खाली हो और अन्य विवभागों क े संबं में, राज्य सरकार ने उन्हें नहीं भरने का फ ै सला विकया। नवयुग अशिभयान सविमति (उपरोक्त) में, उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने सरकारी मेतिडकल कॉलेजों में प्राचायV क े पद क े लिलए अति क म आयु सीमा में वृतिr पर विवचार कर े हुए एक ही क # का पालन विकया। हमारे समक्ष उच्च न्यायालय से असहमति का कोई कारण नहीं है। इसमें विकसी प्रकार का संदेह नहीं है विक मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों की सेवा की * V से संबंति एमसीआई द्वारा बनाए गए विवविनयम उत्तर प्रदे* राज्य द्वारा बनाए गए सेवा विनयमावली पर प्रभाव डालेंगे। विदनांक 06. 02. 2015 क े सरकारी आदे* को अपीलक ा#ओं द्वारा चुनौ ी नहीं दी गई है, जिजस कारण से वे उसक े क े बारे में कोई शि*काय नहीं कर सक े हैं। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

13. 2015 से पहले अयोग्य व्यविक्तयों द्वारा 15 साल क सरकारी मेतिडकल कॉलेजों में प्राध्यापकों क े पद उत्तर प्रदे* राज्य में तिचविकत्सा शि*क्षा क े मामलों की चिंच ाजनक स्थिस्र्थीति को इंविग कर े हैं। इस गंभीर स्थिस्र्थीति से विनपटने क े लिलए, राज्य सरकार ने अति क म आयु सीमा में बढ़ोत्तरी करक े विनयुविक्तयां करने का विनण#य लिलया है। यह ारिर कर े हुए प्राध्यापकों क े पद से कोई परिरणाम प्राप्त नहीं हुआ है क्योंविक वाद जिजनमें विवज्ञापन को चुनौ ी दी गयी र्थीी वे लंविब हैं, इसलिलए राज्य सरकार ने अह ा# प्राप्त डॉक्टर की भ > करने का प्रयास ईमानदारी से विकया है। प्रत्यर्थिर्थीयों को आदेशि* विकया जा ा है विक प्राध्यापकों क े पद हे ु चयन प्रविक्रया में ेजी लायें और जिज ना जल्दी हो विनयुविक्त करें।

14. उपरोक्त कारणों से अपील खारिरज की जा ी है।................................ न्यायमूर्ति, एल. नागेश्वरा राव।................................. न्यायमूर्ति, हेमन् गुप्ता। नई विदल्ली, 28 अगस्, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds