Baljeet Singh v. State of Uttar Pradesh

Supreme Court of India
M. R. Shah
Special Leave Petition (Civil) Nos. 30404-30442/2017
property petition_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court dismissed petitions seeking condonation of a 21-year delay and enhancement of compensation in land acquisition cases, holding that such delay is excessive and the petitioners waived their rights by accepting earlier awards.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपील न्यायक्षेत्र
विवशेष अनुमति याति का (सी) संख्याएँ 30404-30442/2017
बलजी सिंसह (मृ ) द्वारा विवति3क प्रति विनति3
एवं अन्य इत्यावि6 क
े माध्यम से ...........अपीलार्थी:
बनाम
उत्तर प्र6ेश राज्य एवं अन्य ..............प्रत्यर्थी:

े सार्थी
विवशेष अनुमति याति का (सी) संख्याएँ 30455-30460/2017
विवशेष अनुमति याति का (सी) संख्याएँ 23522-23530/2018
विन र्णB य
न्यायमूर्ति एम. आर. शाह
JUDGMENT

1. विवशेष अनुमति याति का को पुनः 6ायर करने में क्रमशः 193, 224 एवं 142 वि6नों क े विवलंब की माफी प्र6त्त की जा ी है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

2. प्रर्थीम अपील संख्या 919/1993 एवं इससे जुड़ी अन्य अपीलों में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा वि6नांक 2.4.1996 को पारिर समान आक्षेविप विनर्णBय एवं आ6ेश से 6ुखी एवं असं ुष्ट मूल 6ावे6ारों क्रमशः भू स्वाविमयों ने प्रस् ु विवशेष अनुमति याति का को 6ायर करने का ुनाव विकया है।

3. विवशेष मूल 6ावे6ारों भू स्वाविमयों ने विवशेष अनुमति याति का 6ायर करने का ुनाव विकया है। शुरुआ से ही यह ध्यान वि6या जाना अपेतिक्ष है विक माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आ6ेश एवं समान आक्षेविप विनर्णBय को ुनौ ी 6े े हुए इस न्यायालय क े समक्ष विवशेष अनुमति याति काओं को वरीय ा 6ेने में क्रमशः 7534 7542 एवं 7886 वि6नों (लगभग 21 वषB) का विवलंब अत्यति3क है। विवशेष अनुमति याति काओं को पुनः प्रस् ु विकए जाने में क्रमशः 193, 224 एवं 142 वि6नों का और अति3क विवलंब है।

3.1. विवलंब हे ु माफी की प्रार्थीBना क े लिलए प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा यहां पर जोर6ार रीक े से विवरो3 विकया गया। अ ः इस न्यायालय से अपेक्षा है विक वह याति काक ाBओं/प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा 6ालिखल आवे6न/आवे6नों सिजसमें उन्होंने विवशेष अनुमति याति काओं को ुनने में क्रमशः 7534, 7542 एवं 7886 वि6नों क े विवलंब को माफ करने की प्रार्थीBना कर े हुए प्रत्यर्थिर्थीयों द्वारा प्रार्थीBनाएं 6ायर करने पर इस न्यायालय से अपेतिक्ष है विक न्यायालय विव ार एवं विनर्णBय करें। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

4. वा6ी पक्षों क े विवद्वान अति3वक्ता श्री ऋविष मल्होत्रा ने जोर6ार रीक े से यह माना है विक अलग-अलग वावि6यों की जमीनों को भूविम अति3ग्रहर्ण अति3विनयम क े प्राव3ानों क े अं गB अविनवायB रूप से अति3ग्रहर्ण विकया गया, और अ ः वे अति3गृही जमीन क े ब6ले उति मुआवजा पाने क े हक6ार हैं। यह माना गया विक विववा6 ति ल्प ा और गुल्सिल्स ापुर की अति3गृही भूविमयों क े सम्बन्3 में है, जो ग्राम कासना से क े वल 4 विकमी. 6ूर है। यह माना गया विक ग्राम गुल्सिल्स ापुर और ति ल्प ा की जमीनें स्र्थीान क े विहसाब से अच्छी जगह र्थीी और राष्ट्रीय राजमागB यर्थीा, नोएडा-6ा6री मागB से सटी र्थीी। यह माना गया विक ग्राम कासना ग्राम गुल्सिल्स ापुर से 4 विकमी. पीछे पड़ ा है। यह माना गया विक कासना ग्राम की अति3गृही जमीन क े लिलए वि6नांक 1.3.1989 को 3ारा 4 की सू ना जारी की गई और ₹65 प्रति वगB गज क े विहसाब से क्षति पूर्ति प्र6ान विकया गया सिजसकी न्यायालय ने वि6नांक 5.12.2016 को अपने विवस् ृ आ6ेश में पुविष्ट की। यह माना गया विक वा6ीगर्ण गुल्सिल्स ापुर और ति ल्प ा ग्राम की अति3गृही जमीनों क े लिलए उति हजाBना पाने क े हक6ार हैं जो विक ₹ 65 प्रति वगB गज कासना ग्राम क े भू स्वाविमयों क े समान है। अ ः यह माना गया विक क ृ षकगर्ण अति3गृही भूविम क े लिलए मुआवजा पाने की हक6ार हैं। यह माना गया विक भूविम क े अविनवायB अति3ग्रहर्ण क े लिलए विवलंब क े कारर्ण वावि6यों को मुआवजा पाने क े मूल्यवान अति3कारों को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds असफल नहीं होना ाविहए। यह माना गया विक वा6ीगर्णों को भूविम अति3ग्रहर्ण अति3विनयम क े अं गB विवलंब क े 6ौरान ब्याज एवं अन्य वै3ाविनक लाभों को नहीं वि6या जा सक ा है।

4.1. उपरोक्त क े प्रस् ुति करर्ण एवं इस न्यायालय क े विनर्णBयों यर्थीा माक o ट कविमटी, होडाल बनाम क ृ ष्र्ण मुरारी (1996) 1 एससीसी 311, 3ीरज सिंसह बनाम हरिरयार्णा राज्य (2014) 14 एससीसी 127, और क े. सुब्बारायुडू बनाम स्पेशल तिडप्टी कलेक्टर (भूविम अति3गृहर्ण) (2017) 12 एससीसी 840, क े मामलों क े विनर्णBयों पर विनभBर रह े हुए यह प्रार्थीBना कर े हैं विक विवशेष अनुमति याति का गुर्ण-अवगुर्ण पर विव ार विकया जाए एवं हुए विवलंब को क्षमा विकया जाए।

5. इन सभी प्रार्थीBना पत्रों का प्रत्यर्थी: संख्या 3- उत्तर प्र6ेश राज्य औद्योविगक विवकास कारपोरेशन यूपीएसआईडीसी और प्रत्यर्थी: संख्या 4-ग्रेटर नोएडा औद्योविगक विवकास प्राति3करर्ण की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्तागर्णों द्वारा जोर6ार रीक े से विवरो3 विकया गया है। विवलंब की माफी हे ु प्रस् ु प्रार्थीBना पत्रों पर आपलित्त कर े हुए प्रत्यर्थी: संख्या 3 एवं 4 की रफ से प्रति शपर्थी पत्र 6ायर विकया गया।

5.1. प्रत्यर्थी:गर्णों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्ता द्वारा जोर6ार रीक े से यहां पर यह कहा गया विक विवशेष अनुमति याति काओं में रजीह 6ेने में 21 वषs Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds का असामान्य विवलंब है। यह माना गया है विक माननीय उच्च न्यायालय द्वारा वि6ए गए मुआवजे की पयाBप्त ा क े सम्बन्3 में क्रमशः वा6ीगर्ण द्वारा इससे पूवB कोई शिशकाय नहीं की गई।

5.2. प्रत्यर्थी:गर्ण की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्ता द्वारा आगे कहा गया है विक लगभग 21 वषs क े 6ीर्घB विवलंब क े लिलए कोई पयाBप्त कारर्ण की व्याख्या नहीं की गई है। यह कहा गया है विक क े वल अन्य गांव क े अति3गृही भूविम क े मामले में क्रमव: विनर्णBय क े दृविष्टकोर्ण से सिजस पर विवश्वास कर े हुए वा6ीगर्ण द्वारा व Bमान याति का पर रजीह 6ी गई। लगभग 21 वषB का 6ीर्घB विवलंब को माफ नहीं विकया जा सक ा है।

5.3. प्रत्यर्थिर्थीयों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्ता ने आगे यह माना विक यहां क विक उच्च न्यायालय क े विनर्णBयों पर भी विनभBर ा और यह न्यायालय पूर्णB ः अलग-अलग ग्राम यानी ग्राम कासना क े संबं3 में है और वह भी भूविम क े संबं3 में जो याति काक ाBओं की भूविम क े अति3ग्रहर्ण क े लगभग ार साल बा6 अति3ग्रहर्ण विकया गया र्थीा। इसीलिलए यह क B वि6या गया विक ग्राम कासना की भूविम का अति3ग्रहर्ण गुल्सिल्स ापुर और ति ल्प ा की भूविम की ुलना में विबल्कु ल भी ुलनात्मक नहीं है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

5.4. आगे यह माना गया विक जहां क वि6नांक 2.4.1996 का आ6ेश एवं समान प्रश्नग न्याय का संबं3 है ऐसे जैसे विक 6ोनों अपने अंति म पड़ाव पर आ ुक े हैं। यह माना गया विक वा6ीगर्ण ने न क े वल हजाBना प्राप्त विकया अविप ु विनर्णBय माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर करने क े उपरां कोई भी विवशेष छ ू ट याति का इन वषs में व Bमान वा6ीगर्णों द्वारा 6ालिखल नहीं की गई है। यह माना गया विक उन्होंने माननीय उच्च न्यायालय क े आ6ेश एवं आक्षेविप समान विनर्णBय को विबना विवरो3 क े स्वीकार विकया है।

5.5. प्रत्यर्थिर्थीयों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्ता ने यह माना विक प्रति वावि6यों द्वारा आ6ेश को पुनः खोले जाने का व्यापक प्रभाव होगा, जहां हर एक पक्षकार सिजसका गुल्सिल्स ापुर और ति ल्प ा ग्राम की अति3गृही भूविम क े संबं3 में कशिर्थी अति3सू ना द्वारा भूविम को अति3गृही कर ली गई हो वह सब ₹65 प्रति वगB गज क े विहसाब से मुआवजा मांगना प्रारंभ करेंगे। यह माना गया विक अन्य भू- स्वाविमयों की रह सिजनकी भूविम 1985 से 89 वषs क े मध्य अलग-अलग गांवों क े अति3गृही की गई वे भी समान 6र से मुआवजा मांगना प्रारम्भ कर 6ेंगे।

5.6. आगे प्रत्यर्थिर्थीयों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्ता द्वारा यह माना गया विक अति3ग्रहर्ण क े उपरां भूविम का विवकास विवविनमाBर्ण और बुविनया6ी सुविव3ा युक्त है। वे अनुरतिक्ष हैं। विवकसिस भूविम एक 6शक पहले आवंविट की गई हैं। यह माना Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds गया विक आवंटन की 6र भी विनमाBर्ण करने में विवकास, विवकास में हुए ख B की राशिश और अति3ग्रहर्ण क े ख s पर आ3ारिर है। यह माना गया विक यवि6 अति3ग्रहर्ण का मूल्य बढ़ा हो ा ो आवंटन क े 6शकों बी जाने क े पश्चा यह राशिश आवंविटयों से पुनः क ै से प्राप्त की जाएगी। अ ः यह माना गया विक लगभग 21 वषs की अवति3 उपरां व Bमान याति का पर विव ार करने और मुआवजे की राशिश को बढ़ाने पर व्यापक असर होगा।

5.7. आगे यह माना गया है विक यह विववावि6 एवं वंति ग्राम गुल्सिल्स ापुर की भूविम ग्राम कासना की भूविम से श्रेष्ठ है। यह माना गया है विक ग्राम कासना मुख्य सड़क पर अवल्सिस्र्थी है जो ग्राम गुल्सिल्स ापुर की भूविम से शिभन्न अं6र ल्सिस्र्थी ग्रेटर नोएडा से जनप[6] बुलं6शहर क े सिसक ं 6राबा6 से जोड़ ी है।

5.8. अब जहां क यहां पर सं6र्थिभ प्रत्यर्थी:गर्ण की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्ता द्वारा इस न्यायालय क े विनर्णBयों पर विवश्वास का संबं3 है प्रत्यर्थी:गर्ण की रफ से प्रस् ु विवद्वान अति3वक्ता ने जोर6ार रीक े से इस बा पर जोर वि6या है विक इस न्यायालय का उपरोक्त कोई भी विनर्णBय मामले क े सिजम्में थ्यों पर लागू नहीं होगा। यह माना गया है विक प्रस् ु मामले में लगभग 21 वषs का असामान्य विवलंब है। यह माना गया है विक प्रस् ु मामले में वा6ीगर्ण विवशेष अनुमति याति काओं क े ुनाव में लगभग 21 वषs क े 6ीर्घB विवलंब की माफी हे ु उति Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds कारर्ण ब ाने में असफल हो ुक े हैं। यह माना गया है विक इस मामले में न्यायालय विवलंब क े समुति कारर्णों पर सं ुष्ट हुआ। यह क B प्रस् ु विकया गया विक मामलों पर विनभBर उति अति3सू ना की अति3गृही भूविम क े संबं3 में पक्षकारों द्वारा 6ावा विकया गया और यह इंविग विकया विक क ु छ भू-स्वाविमयों, सिजनकी भूविम समान अति3सू ना द्वारा अति3गृही कर ली गई। गरीबी और आर्थिर्थीक समस्याओं क े ल े पूवB में अपील करने को प्रार्थीविमक ा नहीं 6े सक े र्थीे और उन्होंने बा6 में अपील को प्रार्थीविमक ा 6ी और उति अति3सू ना क े अं गB अति3गृही भूविम क े सं6भB में मुआवजे की बराबरी का 6ावा विकया। यह क B प्रस् ु विकया गया विक प्रस् ु मामले में वा6ीगर्ण अन्य ग्राम की अति3गृही भूविम क े संबं3 में मुआवजे की बराबरी का 6ावा कर रहे हैं और कशिर्थी ग्राम की भूविम भी 4 वषs की अवति3 क े पश्चा अति3गृही कर ली गई और ल्सिस्र्थीति आवि6 क े विहसाब से वह भूविमयाँ शिभन्न हैं। अ ः यह क B प्रस् ु विकया गया विक वे समान थ्य उन मामलों क े सिजम्मे लागू नहीं होंगे।

23,664 characters total

5.9. उपरोक्त कs को प्रस् ु कर े हुए न्यायालय से विवलंब की माफी क े लिलए प्रस् ु प्रार्थीBना पत्रों को खारिरज करने एवं विवशेष अनुमति याति काएँ जो परिरसीमा द्वारा बंति3 हैं, को खारिरज करने की प्रार्थीBना की जा ी है।

6. हमने सभी पक्षकारों क े विवद्वान अति3वक्ताओं को विवस् ारपूवBक सुना है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

6.1. प्रारंभ ः यहां पर यह ध्यान वि6या जाना अपेतिक्ष है विक इस न्यायालय क े समक्ष मा. उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आ6ेश एवं समान आक्षेविप विनर्णBय सिजसे वषB 1996 में पारिर विकया गया को ुनौ ी 6े े हुए विवशेष अनुमति याति काओं को प्रार्थीविमक ा 6ेने में लगभग 21 वषs का असामान्य विवलंब है। यह भी ध्यान वि6ए जाने की अपेक्षा की जा ी है विक ग्राम गुल्सिल्स ापुर और ति ल्प ा में अवल्सिस्र्थी भूविम क े सं6भB में भूविम अति3ग्रहर्ण अति3विनयम की 3ारा 4 क े अं गB अति3सू ना को वषB 1985 में जारी विकया गया; कब्जा वषB 1987 क े जनवरी माह में लिलया गया भू- अति3ग्रहर्ण अति3कारी ने वषB 1988 में ₹8-10 प्रति वगB गज की 6र से मुआवजा प्र6ान करने की र्घोषर्णा की। यहां पर वा6ी गर्ण क े रूप में मूलभू स्वामीगर्णों को भूविम अति3ग्रहर्ण की 3ारा18 क े अं गB संबंति3 न्यायालय क े समक्ष सं6र्थिभ विकया गया। वि6नांक 22.03.1993 को वि6ए गए मुआवजे एवं विनर्णBय से संबंति3 न्यायालय ने ₹30 प्रति वगB गज की 6र से मुआवजा बढ़ा वि6या। हालांविक अपील में अशिभलेख पर उपल्सिस्र्थी थ्यों को ध्यान में रख े हुए मा. उच्च न्यायालय ने अपने आ6ेश और सामान प्रश्नग विनर्णBय द्वारा ₹22-20 प्रति वगB गज मुआवजे की राशिश को र्घटा वि6या इसक े उपरां, लगभग 21 वषs की अवति3 बी जाने क े उपरां अब वा6ीगर्णों ने अन्य ग्राम कासना क े भू-स्वाविमयों को वि6ए गए मुआवजे से संग मुआवजे की मांग कर े हुए प्रस् ु याति का को प्रार्थीविमक ा 6ी है। यह ध्यान वि6या Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds जाना अपेतिक्ष है विक जहां क ग्राम कासना की भूविम क े अति3ग्रहर्ण का संबं3 है, वषB 1989 में भू-अति3ग्रहर्ण अति3विनयम की 3ारा 4 क े अं गB अति3सू ना जारी की गई, जैसे 4 वषs क े उपरां और इन वषs क े मध्य विनतिश्च विनमाBर्ण कायB का होना परिरलतिक्ष हुआ।

7. विवलंब की माफी हे ु प्रार्थीBनापत्र/ प्रार्थीBनापत्रों प्रकर्थीन पर विव ार करने क े उपरां हमारा म है विक या ीगर्ण 21 वषs क े 6ीर्घB विवलंब की माफी को उसी रूप में समझाने में 6यनीय रूप से विवफल हो ुक े हैं। 21 वषs क े 6ीर्घB विवलंब की माफी हे ु कोई पयाBप्त कारर्ण नहीं 6शाBया गया है। यह ध्यान वि6या जाना आवश्यक है विक या ी द्वारा प्रार्थीBनापत्र में उसी रूप में यह क B प्रस् ु विकया गया विक यहां न्यायालय क आने में जो विवलंब है वह अत्यति3क है। 21 वषs क े उपरां न्यायालय में आने का एकमात्र स्पष्टीकरर्ण प्रस् र -3 में वि6या गया है जो विनम्नलिललिख है- “यह विक समय पर माननीय न्यायालय क े समक्ष में पहुं ने का कारर्ण का थ्य यह र्थीा विक यह क े वल वि6संबर 2016 र्थीा, ग्राम कासना क े 6ावे6ार गर्ण को ₹65 प्रति वगB गज क े विहसाब से माननीय न्यायालय द्वारा बढ़ा हुआ मुआवजा विमला। यहां पर या ीगर्णों को जनवरी 2017 में उपरोक्त थ्यों का प ा ला सिजससे न क े वल उनको अत्यति3क 6ुख हुआ बल्सिल्क उन पर संकट आया। इससे न क े वल प्रभाविव परिरवारों से समर्थीBन लेने में बहु साहस का सामना करना पड़ा बल्सिल्क इसमें एक सार्थी त्वरिर विवशेष अनुमति याति का सिजसमें या ी गर्ण ना क े वल बढ़े हुए मुआवजे बल्सिल्क ग्राम कासना जो उनक े सह ग्रामवासी हैं में बराबर मुआवजा वि6ए जाने की माँग कर रहे हैं, को 6ायर करने में याति का को काफी समय लगा। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

7.1. यह विक 6ोपरां या ीगर्णों ने यह कहा विक यद्यविप ₹ 65 प्रति वगB गज की 6र से बढ़े हुए मुआवजे को प्राप्त करने का या ी गर्णों द्वारा बनाया गया एक उति मामला है, लेविकन न्यायसम्य क े सं ुलन में पयाBप्त है, यह न्यायालय माननीय उच्च न्यायालय क े विनर्णBय की ारीख से ब्याज को प्र6ान नहीं कर सक ी जैसे विक 2.4.1996 क विवशेष अनुमति याति का इस न्यायालय क े समक्ष 6ायर हुई। प्रस् र-3 में स्पष्टीकरर्ण क े सिसवाय इसक े उपरोक्त प्रति लिलविप प्रस् ु है विक लगभग 21 वषs क े 6ीर्घB विवलंब क े लिलए सिज ना स्पष्टीकरर्ण है उसक े अति रिरक्त कोई अन्य स्पष्टीकरर्ण नहीं है। न ही विकसी विन3Bन ा का न विकसी आर्थिर्थीक समस्या का अशिभव न है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर आ6ेश और आक्षेविप सामान्य विनर्णBय क े पश्चा कोई भी रिरकॉडB नहीं है विक या ीगर्णों ने मुआवजे की पयाBप्त ा क े संबं3 में कोई अन्य शिशकाय की र्थीी सिजसको माननीय उच्च न्यायालय ने विन3ाBरिर विकया र्थीा। इसक े विवपरी संबंति3 न्यायालय द्वारा विन3ाBरिर ₹30 प्रति वगB गज की 6र से सभी या ीगर्णों ने विनर्णBयानुसार मुआवजे को स्वीकार विकया। यह प्र ी हो ा है विक क ु छ भू-स्वाविमयों क े अलग-अलग मुआवजे की रकम की पुनप्राBविप्त क े संबं3 में याति काओं का विनस् ारर्ण लंविब है जो सं6र्थिभ न्यायालय और माननीय उच्च न्यायालय द्वारा विन3ाBरिर है जैसा विक माननीय उच्च न्यायालय ने अपने विनर्णBय में मुआवजे की राशिश को ₹30 प्रति वगB गज की 6र से र्घटाकर ₹22 प्रति वगB गज Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds कर वि6या है। मामले से संबंति3 थ्य जैसा विक इसे होना ाविहए अभी भी शेष है। माननीय उच्च न्यायालय द्वारा पारिर समान अाक्षेविप आ6ेश एवं विनर्णBयोपरां न्यायालय द्वारा विन3ाBरिर हजाBने की अपयाBप्त ा क े संबं3 में याति काक ाB द्वारा कोई भी शिशकाय नहीं की गई। अ ः यह कहा जा सक ा है विक लगभग 21 वषs की अवति3 में याति काक ाB द्वारा न्यायालय क े समक्ष कोई शिशकाय नहीं की गई। इसलिलए सहमति क े सिसद्धां को हम यह मान े हैं विक याति काक ाB शिशकाय करने क े अपने अति3कार को खो ुक े हैं। यह सिसद्धां सहमति क े सिसद्धां पर आ3ारिर है सिजसका अर्थीB यह है विक ऐसे मामले में विकसी 6ूसरे पक्षकार द्वारा विकए गए कशिर्थी 6ोषपूर्णB कायB पर कोई पक्षकार सहमति 6े ा है एवं उसका विवरो3 नहीं कर ा है ो उस पक्षकार को उस 6ोषपूर्णB कायB क े प्रति शिशकाय का कोई अति3कार नहीं हो ा है।

8. इस मामले में अन्य पक्ष यर्थीा लैशेस एवं विवलंब से जां की जाने की अपेक्षा है। यह विवति3शास्त्र का अत्यं मान्य ाप्राप्त सिसद्धां है विक अति3कार यवि6 लंबे समय क न प्रयोग विकया गया हो ो वह समाप्त हो जा ा है और जहां पर विकसी प्रविक्रया से संबंति3 विकसी संविवति3 में विवविह कोई परिरसीमा अवति3 ना हो, वहां पर ऐसे मामलों में न्यायालय ने 6ेरी एवं विवलंब का सिसद्धां सार्थी ही सार्थी सहमति का सिसद्धां प्रति पावि6 विकया गया है वा6कारी, सिजन्होंने याति का नहीं की और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अयुविक्तयुक्त विवलंब क े उपरां एवं विबना न्यायोति स्पष्टीकरर्ण क े मामले पर कायBवाही हे ु 6ेरी से न्यायालय क े समक्ष आए। उन मामलों में, जहां पर विकसी मामले पर न्यायालय में कायBवाही विकए जाने हे ु कोई समय सीमा विवविह हो, यवि6 उस विवविह समय सीमा क े अं6र कायBवाही नहीं की गई ो पीविड़ पक्षकार उस विवविह समय सीमा क े बी जाने क े उपरां उप ार को खो 6े ा है और अपने विवति3क अति3कार का प्रव Bन नहीं करा सक ा। हालांविक विवलंब की माफी हे ु प्रार्थीBना क े अध्य3ीन और यवि6 पीविड़ पक्षकार परिरसीमा अवति3 क े बी जाने क े उपरां कायBवाही करने हे ु कोई न्यायोति स्पष्टीकरर्ण एवं पयाBप्त कारर्ण 6शाB वि6या जाए ो न्यायालय हुए विवलंब को माफ कर सक ा है। ऐसे मामले में जहां पर परिरसीमा अवति3 विन3ाBरिर है और कायBवाही ऐसे परिरसीमा अवति3 में नहीं की जा ी है और परिरसीमा अवति3 बी जाने क े उपरां सार्थी ही सार्थी विवलंब की माफी हे ु प्रार्थीBना की कायBवाही प्रारंभ की जा ी है, ऐसी परिरल्सिस्र्थीति में या ी को उति स्पष्टीकरर्ण क े सार्थी विवलंब क े कारर्ण को न्यायोति ठहराना एवं पयाBप्त कारर्ण ब ाना पड़ ा है। ऐसा प्रत्येक मामलों में नहीं हो ा है विक विवलंब को उति रीक े से स्पष्ट करने एवं उनका पयाBप्त कारर्ण ब ाने क े बावजू6 न्यायालय विवलंब का कारर्ण बन सक ी है। या ी को पयाBप्त कारर्णों को ब ाना पड़ ा है जो उसे परिरसीमा अवति3 क े भी र कायBवाही करने से रोक े हैं नहीं ो वह र्घोर उपेक्षा का Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 6ोषी होगा। यवि6 पीविड़ पक्षकार परिरसीमा अवति3 क े भी र विबना पयाBप्त कारर्ण 6शाBए कायBवाही प्रारंभ कर ा है ो उसे अस्पष्टीक ृ विवलंब और 6ेरी एवं इस उप3ारर्णा की उस व्यविक्त ने अपने अति3कारों को त्याग वि6या है या उस आ6ेश से अपनी सहमति व्यक्त की है, क े आ3ार पर उसे कोई अनु ोष प्र6ान नहीं विकया जा सक ा है। यह सिसद्धां लोकनीति को सुदृढ़ करने क े सिसद्धां पर आ3ारिर है विक यवि6 कोई व्यविक्त लंबे समय क अपने अति3कारों का प्रयोग नहीं कर ा ो ऐसे अति3कार समाप्त हो जा े हैं।

9. अब जहां क न्यायालय द्वारा विनर्मिम मामलों में, यर्थीा माक o ट कविमटी होडाल (उपरोक्त); 3ीरज सिंसह (उपरोक्त); क े. सुब्बारायुडु (उपरोक्त) मामलों में विनभBर होकर या ीगर्णों की रफ से उपल्सिस्र्थी वरिरष्ठ विवद्वान अति3वक्ता का संबं3 है, उपरोक्त विनर्णBयों को ध्यान में रख े हुए उपरोक्त कोई भी विनर्णBय व Bमान मामले क े थ्यों पर लागू नहीं होगा और उपरोक्त कोई भी विनर्णBय या ीगर्णों की म66 नहीं करेगा। सवBप्रर्थीम, इन मामलों में विनभBर होकर यहां पर लगभग 21 वषs में असामान्य विवलंब नहीं र्थीा। उपरोक्त मामलों क े दृविष्टग यह न्यायालय विवलंब क े लिलए पयाBप्त कारर्णों पर सं ुष्ट र्थीा। मामलों की विनभBर ा में भूविम अति3सू ना क े ह अति3गृही भूविम क े संबं3 में पक्षकार ने 6ावा विकया र्थीा और यह 6शाBया र्थीा विक क ु छ भू-स्वामीगर्ण, गरीबी और आर्थिर्थीक कविठनाई क े ल े, सिजनकी भूविम इस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अति3सू ना क े ह अति3गृही कर ली गई र्थीी, पहले अपील में नहीं गए और इसक े उपरां उन्होंने अपील विकया और समान अति3सू ना क े अं गB अति3गृही भूविम क े बराबर मुआवजे का 6ावा विकया। यहाँ यह भी उल्लेख करना अपेतिक्ष है विक ऐसे उक्त विकसी भी मामले में न्यायालय ने नहीं माना विक यवि6 वह राज्य को बढ़ा हुआ मुआवजा 6ेने का विन6oश 6े ी है ो राज्य पर विवपरी असर पड़ ा है। प्रस् ु मामले में जमीनें और मुआवजा 1988 में विवशेष भूविम अति3ग्रहर्ण अति3कारी द्वारा र्घोविष विकया गया, सं6र्थिभ न्यायालय ₹30 प्रति वगB गज की 6र से मुआवजे की राशिश को बढ़ाकर सिजसे 1996 में माननीय उच्च न्यायालय ने अपने विनर्णBय द्वारा कम कर वि6या। यह भी ध्यान 6ेना अपेतिक्ष है विक जमीनों को औद्योविगक विवकास हे ु अति3गृही विकया गया र्थीा। यह विक अति3ग्रहर्ण क े उपरां भूविम का आ3ारभू संर ना का विवकास विकया गया एवं सुविव3ासंपन्न बनाया गया और विवकसिस भूविम को लगभग 30 वषB पहले आवंविट कर वि6या जा ुका है। प्रत्यर्थी:गर्णों की रफ से प्रस् ु मामला विवशेष है विक आवंटन का 6र भू-अति3ग्रहर्ण की लाग, विवकास पर विकए गए ख B एवं आ3ारभू संर ना क े लगाने पर आ3ारिर र्थीा। अ ः यवि6 अब अति3ग्रहर्ण की लाग बढ़ जा ी है र्थीा राज्य/अति3ग्रहर्णक ाB को बढ़े हुए हजाBना 6ेने का विन6oश वि6या जाए ो उस अवस्र्थीा में, आवंटन क े उपरां आवंविटयों से हजाBने की राशिश का अं र भी पुनप्राBविप्त में कविठन होगी। अति3गृही ा बजट में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अति रिरक्त प्राव3ान करने होंगे और जैसे विक यहां 6र्थिश है इ ने वषs क े उपरां आवंविटयों से हजाBने की राशिश क े अं र को पुनः प्राप्त करने में अति3गृही ा को काफी कविठनाई का सामना करना पड़ेगा। इन सब पहलुओं और इनका राज्य अति3ग्रहर्ण विवकास पर पड़ने वाले प्रभाव, यवि6 वषs बा6 उन्हें अति रिरक्त मुआवजा 6ेने का विन6oश वि6या जाए, ो याति काक ाBओं क े विवद्वान अति3वक्ता की ओर से उद्धृ विनर्णBय में इस न्यायालय द्वारा विव ार नहीं विकया गया है। यवि6 याति काक ाBओं को इन विवलंविब अवति3 क े लिलए जैसा विक याति काक ाBओं क े विवद्व अति3वक्ता द्वारा विनवेवि6 है, ब्याज और/या अन्य वै3ाविनक लाभों का भुग ान 6ेने से मना कर वि6या जा ा है, उस ल्सिस्र्थीति में भी राज्य/अति3ग्रहर्ण करने वाले विनकाय को वर्ति3 क्षति पूर्ति का भुग ान वषs बा6 (21 वषB) क्षति पूर्ति की बढ़ी हुई राशिश का भुग ान करने का विन6oश अ ार्मिकक होगा और उन पर यर्थीाउपरोक्त अांकलिल अति रिरक्त आर्थिर्थीक भार डालेगा और राज्य अति3ग्रहर्ण करने वाले विवकास क े लिलए आवंविटयों से प्राप्त करना कविठन होगा। इन परिरल्सिस्र्थीति यों में उपरोक्त कोई भी विनर्णBय प्रश्नग मामले क े थ्यों पर लागू नहीं होगा और/या याति काक ाBओं क े लिलए विकसी भी प्रकार से सहायक होगा।

10. उपरोक्त कशिर्थी कारर्णों क े दृविष्टग, हम विवशेष अनुमति याति का को 6ायर करने में क्रमशः 7534, 7542, और 7886 वि6नों क े 6ीर्घB विवलंब को माफ करने Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds से मना कर े हैं। 6नुसार विवलंब की माफी हे ु प्रार्थीBनाएं विनरस् की जा ी हैं। परिरर्णामस्वरूप सभी विवशेष अनुमति याति काएं परिरसीमा अवति3 क े आ3ार पर विनरस् की जा ी हैं। हालांविक मामले क े थ्यों और परिरल्सिस्र्थीति यों में व्ययों से संबंति3 कोई आ6ेश नहीं पारिर विकया जाएगा।