Full Text
भार ीय सर्वोच्च न्यायालय सव च्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय सर्वोच्च न्यायालय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 6124-6125 सन् 2019
(एसएलपी (दीवानी) सं. 175-176 सन् 2019 से उद्भू )
……
डाक अ ीक्षक एवं अन्य सर्वोच्च न्यायालय अपीलार्थी#(गण)
बनाम
हनुमान विगरिर .......प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी#(गण)
विनण+य सर्वोच्च न्यायालय
न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय मूर्ति , ए.एस. बोपन्ना
अनुमति प्रदान की गई।
JUDGMENT
2. इसमें अपीलार्थी#गण इलाहाबाद उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय क े रिरट ए. सं. 9549/2011 में पारिर 19. 07. 2013 विदनांविक क े आदेश को चुनौ ी दे रहे हैं। उक्त mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आदेश से उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय ने य सर्वोच्च न्यायालय हां अपीलार्थी#गण द्वारा दाय सर्वोच्च न्यायालय र य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका को खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा। अपीलार्थी#गण द्वारा दाय सर्वोच्च न्यायालय र की गई पुनर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका को पश्चा व # 21.08.2017 विदनांविक आदेश क े द्वारा खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। इस आलोक में क ें द्रीय सर्वोच्च न्यायालय प्रशासविनक अति करण, इलाहाबाद न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय पीठ, इलाहाबाद (संक्षेप में "सीएटी") ओ. ए.नं. 888/2009 द्वारा 05.10.2010 विदनांविक आदेश में और सार्थी ही सी.ए.टी. द्वारा पुनर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका सं. 77/2010 में पारिर आदेश 17. 01. 2011 विदनांविक आदेश उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा स्वीक ृ है। य सर्वोच्च न्यायालय ह इस दृविJकोण में है, विक अपीलार्थी#गण इन अपीलों में उपरोक्त ब ाय सर्वोच्च न्यायालय े गय सर्वोच्च न्यायालय े आदेशों को चुनौ ी दे े हुए इस न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय क े समक्ष हैं।
3. संतिक्षप्त थ्य सर्वोच्च न्यायालय जो इन अपीलों क े विवचार करने हे ु सीविम करने क े लिलए लिलखा जाना है, विनम्नानुसार हैं।
4. य सर्वोच्च न्यायालय हां पर दूसरे अपीलक ा+, अर्थीा+ ् महाडाकपाल, कानपुर क्षेत्र, कानपुर य सर्वोच्च न्यायालय ू.पी पोस्टमैन क े पद पर पदोन्नति हे ु विवचार करने क े लिलए परीक्षा में उपस्थिस्र्थी होने क े लिलए अति रिरक्त विवभागीय सर्वोच्च न्यायालय विव रण एजेंटों (संक्षेप में 'विव रण एजेंटों') से य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका आमंवित्र कर े हुए 24. 05. 1991 की एक अति सूचना जारी की। विदनांक 18. 08. 1991 को आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज परीक्षा में प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# और अन्य सर्वोच्च न्यायालय समान रूप से रखे गए तिडलीवरी एजेंट उपस्थिस्र्थी हुए र्थीे। इस रह की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds अति सूचना क े अनुसार, मुख्य सर्वोच्च न्यायालय महाडाकपाल, य सर्वोच्च न्यायालय ूपी लखनऊ क े संभाग ने विदनांक 27. 07. 1992 को एक आदेश जारी विकय सर्वोच्च न्यायालय ा, सिजसमें विनदेशक, डाक सेवाओं कानपुर को सूतिच विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विक 18. 08. 1991 को बांदा, फ ेहपुर और फ ेहगढ़ संभाग में आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज परीक्षा को रद्द कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा। य सर्वोच्च न्यायालय द्य विप य सर्वोच्च न्यायालय हां प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# ने आपलिX नही ज ाय सर्वोच्च न्यायालय ी, लेविकन सभी पांच आवेदकों में से एक श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव सविह क ु छ अन्य सर्वोच्च न्यायालय तिडलीवरी एजेंटों ने 27. 06. 1992 क े उक्त आदेश को O. A सं. 546/1992 में सी.ए.टी से संपक + करक े पदोन्नति क े लिलए आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज परीक्षा को रद्द करने की चुनौ ी दी। उक्त O.A.No. 546/1992 को 05. 02. 1997 को विनस् ारण विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा, सिजसमें सी.ए.टी ने मुख्य सर्वोच्च न्यायालय महाडाकपाल द्वारा विदनांक 27. 07. 1992 को जारी विकए गए विनद[श को खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा और विनय सर्वोच्च न्यायालय मानुसार, कानपुर प्र ान काय सर्वोच्च न्यायालय ा+लय सर्वोच्च न्यायालय में 17 रिरक्त पदों क े विवरुद्ध पदोन्न होने वाले सभी सफल उम्मीदवारों क े परिरणाम को प्रकाशिश करने का विनद[श विदय सर्वोच्च न्यायालय ा। अपीलार्थी#गण द्वारा दाय सर्वोच्च न्यायालय र पुनर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका सं. 33/1997 को विदनांविक 31. 07. 2000 क े आदेश क े माध्य सर्वोच्च न्यायालय म से खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा। चूंविक सी.ए.टी क े आदेश का अनुपालन नहीं विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, इसलिलए उक्त श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव और चार अन्य सर्वोच्च न्यायालय ने सी.ए.टी क े समक्ष सं. 135/2002 पर अवमानना य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका दाय सर्वोच्च न्यायालय र विकय सर्वोच्च न्यायालय ा। सी.ए.टी द्वारा एक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उतिच रीक े से अवमानना य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका क े प्रति फल में श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव और अन्य सर्वोच्च न्यायालय लोगों द्वारा दीवानी विवविव य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका सं. 12990/2004 उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय क े समक्ष दाय सर्वोच्च न्यायालय र की गई। उक्त रिरट य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका की अनुमति दी गई र्थीी और मामले को नए सिसरे से विवचार क े लिलए सी.ए.टी को भेज विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा और उक्त प्रविaय सर्वोच्च न्यायालय ा में श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव को एक पोस्टमैन क े रूप में पदोन्न विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा।
5. इस रह क े मामले की उत्पलिX, 18. 08. 1991 को आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज परीक्षा में उपस्थिस्र्थी होने वाले प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# ने O. A No. 546/1992 में सी.ए.टी द्वारा जारी विदशा-विनद[श का लाभ लेने की मांग की, हालांविक वह इसमें एक पाट# नहीं र्थीी। दनुसार उन्होंने विदनांक 02. 07. 2007 को एक विवरो पत्र दाय सर्वोच्च न्यायालय र विकय सर्वोच्च न्यायालय ा और एक डाविकय सर्वोच्च न्यायालय ा क े रूप में पदोन्नति क े लिलए दावा विकय सर्वोच्च न्यायालय ा। य सर्वोच्च न्यायालय हाँ क े अपीलार्थी#गण ने समान रूप से इस पर विवचार नहीं विकय सर्वोच्च न्यायालय ा लेविकन उसे सूतिच विकय सर्वोच्च न्यायालय ा विक वह O. A. No. 546/1992 में आवेदक नहीं र्थीे और इस दृविJ से पदोन्नति क े लिलए आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज परीक्षा में परिरणाम घोविu नहीं विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। हालांविक, प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# ने सूचना का अति कार अति विनय सर्वोच्च न्यायालय म, 2005 क े ह विकए गए एक य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका क े माध्य सर्वोच्च न्यायालय म से अपने परिरणाम का विववरण मांगा और प्राप्त विकय सर्वोच्च न्यायालय ा और य सर्वोच्च न्यायालय ह जानने पर विक उसने 127. 5 अंक प्राप्त विकए र्थीे, शुरुआ में इस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds ारणा का र्थीा विक श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव सिजनका पदोन्न विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा, कम मे ावी र्थीे, हालांविक वास् व में उन्होंने 150 अंकों में से 137 अंक हासिसल विकए र्थीे। प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# का य सर्वोच्च न्यायालय ह मामला र्थीा विक उक्त अंकों क े माध्य सर्वोच्च न्यायालय म से जब से वह aम सूची में aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 12 में रखा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा और कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस में 17 रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ां र्थीीं, वह हकदार र्थीे। इसलिलए उन्होंने पोस्टमैन क े रूप में पदोन्नति की मांग की क्य सर्वोच्च न्यायालय ोंविक उनक े अनुसार aम सूची में उनकी रैंक रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों की संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा क े भी र र्थीी। य सर्वोच्च न्यायालय हाँ प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े उक्त दावे को य सर्वोच्च न्यायालय हां क े अपीलार्थी#गण द्वारा विनरस् कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, सिजसक े परिरणामस्वरूप प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# ने O A सं. 888/2009 में सी.ए.टी का दरवाजा खटखटाय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा।
6. उक्त काय सर्वोच्च न्यायालय +वाही में अपीलार्थी#गण ने य सर्वोच्च न्यायालय हां प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े दावे का विवरो विकय सर्वोच्च न्यायालय ा। सी.ए.टी ने प्रति द्वंद्वी क को संदर्भिभ कर े हुए, अपने आदेश विदनांक 05.
10. 2010 क े माध्य सर्वोच्च न्यायालय म से, O.A.No. 546/1992 (श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव एवं अन्य सर्वोच्च न्यायालय से संबंति ) में पारिर आदेश क े दाय सर्वोच्च न्यायालय रे पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान विदय सर्वोच्च न्यायालय ा, सिजसक े आ ार पर प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# दावा कर रहा र्थीा। चूंविक प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी#गण द्वारा इस आ ार पर प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े दावे को अस्वीकार कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा विक वह O A No. 546/1992 में आवेदक नहीं र्थीा, सी.ए.टी द्वारा विदनांक 05. 02. 1997 को आदेश विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा विक मुख्य सर्वोच्च न्यायालय महाडाकपाल, य सर्वोच्च न्यायालय ूपी द्वारा पारिर विदनांविक 27. 07. 1992 क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds आदेश द्वारा बांदा, फ ेहपुर और फर्थीेेहगढ़ संभाग क े क्षेत्र में आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज परीक्षा को पूरी रह से रद्द कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। अ: उक्त मामले में, चूंविक अपीलार्थी#गण को परीक्षा क े परिरणाम की घोuणा करने और सफल उम्मीदवारों को विनय सर्वोच्च न्यायालय ुविक्त देने क े लिलए विनद[शिश विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, सी.ए.टी का विवचार र्थीा विक परीक्षा क े लिलए उपस्थिस्र्थी होने वाले सभी उम्मीदवारों क े परिरणाम सिजनमें प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# भी शाविमल हैं, घोविu विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है और कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस में 17 रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों क े लिलए डाविकय सर्वोच्च न्यायालय ा क े रूप में पदोन्नति की आवश्य सर्वोच्च न्यायालय क ा र्थीी। उस रह से, य सर्वोच्च न्यायालय ह देख े हुए विक अपीलक ा+ द्वारा ऐसा नहीं विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, सी.ए.टी ने प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े मामले पर विवचार करने का विनद[श विदय सर्वोच्च न्यायालय ा। इस रह क े आदेश क े लिखलाफ अपीलार्थी#गण द्वारा पुनर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका को भी खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। य सर्वोच्च न्यायालय ह भी ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान विदय सर्वोच्च न्यायालय ा जाना चाविहए विक एकमात्र कारण प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े दावे को स्वीकार करने क े लिलए सिजसको सी.ए.टी द्वारा अपने विवचार में लिलय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा वह य सर्वोच्च न्यायालय ह है विक उसने श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव से अति क अंक प्राप्त करने का दावा विकय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, सिजसे ठीक उसी रह से पदोन्नति विमली सिजसे पहले अपनाय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा।
7. उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय ने रिरट य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका में डाली गई सामग्री पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान दे े हुए सी.ए.टी द्वारा विकए गए विवचार की बहु प्रक ृ ति क े लिलए विवज्ञापन विदय सर्वोच्च न्यायालय ा है जैसा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विक य सर्वोच्च न्यायालय हां नोट विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है और सी.ए.टी द्वारा पारिर आदेश को मंजूरी दी है। अपीलार्थी#गण द्वारा य सर्वोच्च न्यायालय हां दाय सर्वोच्च न्यायालय र की गई पुनर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका य सर्वोच्च न्यायालय द्य विप खारिरज कर विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, इस मामले क े एक पहलू पर प्रकाश डाला गय सर्वोच्च न्यायालय ा और स्पJ विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विक प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# द्वारा य सर्वोच्च न्यायालय ह दावा विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है विक वह श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव की ुलना में अति क मे ावी र्थीे, जैसा विक सही स्थिस्र्थीति नहीं र्थीी। श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव ने प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# द्वारा प्राप्त 127.[5] अंकों क े मुकाबले 137 अंक प्राप्त विकए र्थीे। हालाँविक, उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय की राय सर्वोच्च न्यायालय र्थीी विक भले ही वह स्थिस्र्थीति हो, सी.ए.टी द्वारा विकए गए मूल विवचार और इसक े आदेश में नोट विकए जाने पर भी परिरव +न नहीं हो ा है। उस दृविJकोण में जो बिंबदु य सर्वोच्च न्यायालय हां विवचार क े लिलए रहेगा, वह य सर्वोच्च न्यायालय ह विक क्य सर्वोच्च न्यायालय ा प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# का दावा, aम सूची में aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 12 पर र्थीा और इस रह वह पोस्टमैन क े 17 पदों की रिरविक्त क े लिखलाफ पदोन्न विकए जाने वाले तिडलीवरी एजेंटों में इस रूप में पदोन्न होने का हकदार र्थीा?
8. हमने अपीलार्थी#गण की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वव अपर महाति वक्ता श्री विवaमजी बनज#, प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# की ओर से उपस्थिस्र्थी विवद्वव अति वक्ता श्री एस.डी. सिसहं को बड़े पैमाने पर सुना है, और एक य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका क े सार्थी रिरकॉड+ पर लाए गए अति रिरक्त दस् ावेजों सविह अपील पत्रों का अनुशीलन विकय सर्वोच्च न्यायालय ा। हमने प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े विवद्व अति वक्ता द्वारा उठाए गए आपलिXय सर्वोच्च न्यायालय ों पर भी ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विदय सर्वोच्च न्यायालय ा विक त्काल काय सर्वोच्च न्यायालय +वाही में भरोसा विकए जाने वाले दस् ावेजों को भ # विकए गए थ्य सर्वोच्च न्यायालय ात्मक स्थिस्र्थीति क े लिखलाफ है। हालांविक, व +मान प्रक ृ ति क े एक मामले में जहां विनय सर्वोच्च न्यायालय ोक्ता द्वारा रिरकॉड+ बनाए रखा जा ा है, जब क विक उक्त दस् ावेज की प्रामाशिणक ा संदेह में नहीं है, इस अदाल क े लिलए उन दस् ावेजों पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान देने क े लिलए कोई बा ा नहीं होगी जो रिरकॉड+ क े उतिच रीका में लाए जा े हैं ।
9. उपरोक्त आ ार पर हम सभी प्रासंविगक सामग्री पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान देकर इस मुद्दे की जांच करने क े लिलए आगे बढ़ े हैं। उस संबं में ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान विदय सर्वोच्च न्यायालय ा जाने वाला मूल दस् ावेज 24. 05. 1991 की अति सूचना है सिजसक े माध्य सर्वोच्च न्यायालय म से पदोन्नति क े लिलए प्रविaय सर्वोच्च न्यायालय ा गति में विन ा+रिर की गई र्थीी। वही सभी पोस्टमास्टस+/सब पोस्ट मास्टस+/ब्रांच पोस्ट मास्टस+ को संबोति विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा; बांदा संभाग में सहाय सर्वोच्च न्यायालय क अ ीक्षक डाकघर, हमीरपुर और सभी संभागीय सर्वोच्च न्यायालय विनरीक्षक को 18.
08. 1991 को होने वाली परीक्षा क े बारे में सूतिच करने पर य सर्वोच्च न्यायालय ह संक े विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विक इस संभाग में पोस्टमैन क ै डर में कोई रिरविक्त नहीं है (जो बांदा संभाग का संदभ+ है क्य सर्वोच्च न्यायालय ोंविक उक्त अति सूचना बांदा संभाग से जारी की गई है )। इसलिलए य सर्वोच्च न्यायालय ोग्य सर्वोच्च न्यायालय उम्मीदवारों को रिरविक्त की उपलब् ा पर अन्य सर्वोच्च न्यायालय संभागों में जाना होगा। इसमें आगे कहा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है विक विकसी भी परिरस्थिस्र्थीति में बांदा संभाग में Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds कोई उम्मीदवार ैना नहीं होगा। हमारे विवचार में विदनांक 24. 05. 1991 की अति सूचना में विनविह उक्त विनद[शों को मामले क े अन्य सर्वोच्च न्यायालय पहलुओं की जांच कर े समय सर्वोच्च न्यायालय परिरप्रेक्ष्य सर्वोच्च न्यायालय में रखा जाना चाविहए क्य सर्वोच्च न्यायालय ोंविक प्रति द्वंद्वी क† से य सर्वोच्च न्यायालय ह महत्व को मान ा है और इस पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान देना प्रासंविगक होगा ाविक विनष्कu+ विनकाला जा सक े विक क्य सर्वोच्च न्यायालय ा कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस में 17 रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों क े लिखलाफ प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# को बांदा संभाग से संबंति aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 12 में aम सूची में उनक े रैंक क े आ ार पर पदोन्न विकय सर्वोच्च न्यायालय ा जाना चाविहए य सर्वोच्च न्यायालय ा क्य सर्वोच्च न्यायालय ा सभी संभाग क े तिडलीवरी एजेंटों से संबंति सामान्य सर्वोच्च न्यायालय aम सूची की पृष्ठभूविम में रिरविक्त की स्थिस्र्थीति पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान विदय सर्वोच्च न्यायालय ा जाना है? य सर्वोच्च न्यायालय द्य विप प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े विवद्व अति वक्ता ने बहस की माँग की, विक aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 12 में प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# की स्थिस्र्थीति को पहले की सभी काय सर्वोच्च न्यायालय +वाही में स्वीकार विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है और अपीलार्थी#गण को उक्त स्थिस्र्थीति से उबरने की अनुमति नहीं दी जा सक ी है, इस बा की जांच करना आवश्य सर्वोच्च न्यायालय क होगा विक क्य सर्वोच्च न्यायालय ा aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 12 में प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# की य सर्वोच्च न्यायालय ोग्य सर्वोच्च न्यायालय ा सभी संभाग की सामान्य सर्वोच्च न्यायालय aम सूची से संबंति है य सर्वोच्च न्यायालय ा क्य सर्वोच्च न्यायालय ा वह बांदा संभाग क सीविम aम सूची क े aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 12 में र्थीा। इस रह का विवचार, हमारे विवचार में, य सर्वोच्च न्यायालय ह आवश्य सर्वोच्च न्यायालय क है क्य सर्वोच्च न्यायालय ोंविक य सर्वोच्च न्यायालय ह एकमात्र मुद्दा है जो य सर्वोच्च न्यायालय हां विनण+य सर्वोच्च न्यायालय लेने क े उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय से सार्थी+क है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds
10. उस पृष्ठभूविम में, जैसा विक पहले से ही हमारे द्वारा नोट विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय े O.A.No. 546/1992 में मामले की उत्पलिX एक विवचार में विकय सर्वोच्च न्यायालय ा जा रहा है, उसमें विकए गए विवचार की प्रक ृ ति पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान देना आवश्य सर्वोच्च न्यायालय क होगा। उक्त काय सर्वोच्च न्यायालय +वाही में, श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव और अन्य सर्वोच्च न्यायालय आवेदकों ने य सर्वोच्च न्यायालय हां अपीलार्थी#गण की कार+वाई को स्वीकार कर े हुए कहा र्थीा विक बांदा संभाग क े उम्मीदवारों को कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस और कानपुर सिसटी पोस्टल संभाग की खाली रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों क े लिखलाफ न्य सर्वोच्च न्यायालय ूक्त विकय सर्वोच्च न्यायालय ा जा सक ा है। य सर्वोच्च न्यायालय ह कोई संदेह नहीं है विक उक्त विववाद का विवरो करने क े लिलए य सर्वोच्च न्यायालय हां क े अपीलार्थी#गण ने उक्त काय सर्वोच्च न्यायालय +वाही में कहा र्थीा विक कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस की 17 ने रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों को छोड़ विदय सर्वोच्च न्यायालय ा है जो ग्रुप ए पोस्ट ऑविफस है, को स्र्थीानीय सर्वोच्च न्यायालय डाक संभाग से मौजूदा विनय सर्वोच्च न्यायालय म क े अनुसार भरा जाना है और अन्य सर्वोच्च न्यायालय संभाग क े कम+चारिरय सर्वोच्च न्यायालय ों द्वारा नहीं भरा जा सक ा है। विनय सर्वोच्च न्यायालय मों पर ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान देने क े बाद सी.ए.टी द्वारा विनष्कu+ पर पहुंचा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है विक प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# द्वारा कोई प्रकर्थीन नहीं र्थीा विक कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस क े उन 17 रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों को अन्य सर्वोच्च न्यायालय स्र्थीानीय सर्वोच्च न्यायालय संभाग य सर्वोच्च न्यायालय ा विकसी अन्य सर्वोच्च न्यायालय संभाग से भरा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है। एक विनविह ार्थी+ से य सर्वोच्च न्यायालय ह ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विक कानपुर स्र्थीानीय सर्वोच्च न्यायालय डाक संभाग क े तिडलीवरी एजेंटों से शेu 17 रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों को भरने क े लिलए कोई और चय सर्वोच्च न्यायालय विन कम+चारी उपलब् नहीं र्थीा। उस परिरस्थिस्र्थीति में, य सर्वोच्च न्यायालय ह माना जा ा र्थीा विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds परिरणाम की घोuणा पर बांदा संभाग क े कम+चारी भी विनय सर्वोच्च न्यायालय मानुसार कानपुर प्र ान काय सर्वोच्च न्यायालय ा+लय सर्वोच्च न्यायालय की 17 रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों पर विवचार करने क े लिलए पात्र हो सक े हैं। इसलिलए, य सर्वोच्च न्यायालय ह माना जा ा है विक अपीलार्थी#गण द्वारा इस आशय सर्वोच्च न्यायालय का पक्ष लिलय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है विक कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस की रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों को कानपुर में स्थिस्र्थी अन्य सर्वोच्च न्यायालय संभाग क े कम+चारिरय सर्वोच्च न्यायालय ों द्वारा नहीं भरा जा सक ा है। उस परिरस्थिस्र्थीति में, य सर्वोच्च न्यायालय ह विनद[शिश विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा विक सभी संभाग से अन्य सर्वोच्च न्यायालय उम्मीदवारों क े परिरणाम घोविu विकए जाने हैं और 17 पदों को भरा जाना है। इसे य सर्वोच्च न्यायालय हाँ क े रूप में ठीक से आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा: "व +मान मामले में जैसा विक हमने पहले ारिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा, कानपुर प्रमुख डाकघरों क े 17 रिरक्त पदों को खाली छोड़ विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा और उसी को उपय सर्वोच्च न्यायालय ुक्त रूप में बांदा संभाग य सर्वोच्च न्यायालय ा विकसी अन्य सर्वोच्च न्यायालय संभाग क े सफल कम+चारिरय सर्वोच्च न्यायालय ों द्वारा भरा जाना चाविहए र्थीा।"
11. इसलिलए, उसक े पश्चा ् श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव क े पदोन्नति सविह बाद में सिजस आ ार पर विवचार विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा वह aम सूची में प्राप्त अंक पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds आ ारिर र्थीा। उस पहलू पर य सर्वोच्च न्यायालय ह ध्य सर्वोच्च न्यायालय ान विदय सर्वोच्च न्यायालय ा जाना चाविहए विक य सर्वोच्च न्यायालय द्य विप फ ेहपुर संभाग, फ ेहगढ़ संभाग और बांदा संभाग की aम सूची अलग से बनाए रखी जा ी है, लेविकन कानपुर क्षेत्र क े संबं में तिडलीवरी एजेंटों की एक सामान्य सर्वोच्च न्यायालय aम सूची सिजसमें फ ेहपुर संभाग, फ ेहगढ़ संभाग और बांदा संभाग शाविमल हैं, को वu+ 1991 में आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज परीक्षाओं से संबंति भी बनाए रखा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा। जैसा विक देखा गय सर्वोच्च न्यायालय ा है, विदनांविक 24. 05. 1991 की य सर्वोच्च न्यायालय र्थीाध्य सर्वोच्च न्यायालय ा ब्य सर्वोच्च न्यायालय अति सूचना से संक े विमल ा है विक य सर्वोच्च न्यायालय द्य विप परीक्षाएं आय सर्वोच्च न्यायालय ोसिज की जा ी हैं, य सर्वोच्च न्यायालय ोग्य सर्वोच्च न्यायालय उम्मीदवारों को रिरविक्त की उपलब् ा पर अन्य सर्वोच्च न्यायालय संभाग में जाना होगा क्य सर्वोच्च न्यायालय ोंविक बांदा संभाग में पोस्टमैन की कोई रिरविक्त नहीं र्थीी। य सर्वोच्च न्यायालय विद कानपुर हेड पोस्ट ऑविफस क े एकीक ृ 17 रिरविक्तय सर्वोच्च न्यायालय ों क े संबं में य सर्वोच्च न्यायालय ह स्थिस्र्थीति है, ो बांदा संभाग सविह सभी संभाग से वरिरय सर्वोच्च न्यायालय ा क े aम में व्य सर्वोच्च न्यायालय विक्त, सिजसमें प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# काम कर रहा र्थीा, सामान्य सर्वोच्च न्यायालय वरिरय सर्वोच्च न्यायालय ा सूची क े आ ार पर विवचार करने का हकदार होगा।
12. उस स्थिस्र्थीति में हालांविक बांदा संभाग श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव की aम सूची में aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 1 पर र्थीा और प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# य सर्वोच्च न्यायालय हां aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 12 में र्थीा, वरिरय सर्वोच्च न्यायालय ा aम सूची में श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 2 में र्थीे, जबविक प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# य सर्वोच्च न्यायालय हां aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 43 पर र्थीा। उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त क ु ल अंकों से संक े विमल ा है विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds उक्त सामान्य सर्वोच्च न्यायालय aम सूची में aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 17 में व्य सर्वोच्च न्यायालय विक्त ने 131 अंक प्राप्त विकए र्थीे और उक्त उम्मीदवार क े बाद कई अन्य सर्वोच्च न्यायालय उम्मीदवार हैं सिजन्होंने 128 क अंक प्राप्त विकए र्थीे, सिजसक े बाद प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# ने 127. 5 प्राप्त कर क े aम संख्य सर्वोच्च न्यायालय ा 43 में है। ऐसी स्थिस्र्थीति में दूसरों की अनदेखी कर े हुए, विकसी भी घटना में प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# को पदोन्न नहीं विकय सर्वोच्च न्यायालय ा जा सक ा है। इसलिलए सी.ए.टी द्वारा प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# क े पक्ष में विकए गए विवचार को उतिच नहीं ठहराय सर्वोच्च न्यायालय ा जाएगा। य सर्वोच्च न्यायालय द्य विप अं ः उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय क े समक्ष पुनर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका में य सर्वोच्च न्यायालय ह थ्य सर्वोच्च न्यायालय विक प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# ने श्री जगमोहन य सर्वोच्च न्यायालय ादव की ुलना में अति क अंक प्राप्त नहीं विकए र्थीे और स्पJ विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा विक अन्य सर्वोच्च न्यायालय र्थीा भी जारी विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा विनद[श उतिच र्थीा। हम पा े हैं विक उपरोक्त सभी कारकों क े बावजूद ऐसा प्र ी हो ा है विक O.A.NO. 888/2009 में सी.ए.टी क े विदमाग में क्य सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा, प्रत्य सर्वोच्च न्यायालय र्थी# की गल ारणा उस उम्मीदवार की ुलना में अति क मे ावी र्थीी सिजसे पहले क े आदेशों क े कारण लाभ विदय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा र्थीा।
13. य सर्वोच्च न्यायालय विद य सर्वोच्च न्यायालय ह स्थिस्र्थीति है, ो य सर्वोच्च न्यायालय हां विदए गए आदेश संवहनीय सर्वोच्च न्यायालय नहीं हैं। इसलिलए, विदनांविक 17. 01. 2011 क े आदेश को O.A.No. 888/2009 में पारिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा और विदनांविक 17. 01. 2011 आदेश को सी.ए.टी द्वारा पुर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका सं. 77/2010 में पारिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा और सार्थी ही विदनांविक 19. 07. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 2013 क े आदेश को रिरट य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका सं. 9549/2011 में पारिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा और
21. 08. 2017 विदनांविक क े आदेश को उच्च न्यायालय न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय ालय सर्वोच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा पुर्विवचार य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका सं. 285160/2013 में पारिर विकय सर्वोच्च न्यायालय ा गय सर्वोच्च न्यायालय ा।
14. दनुसार, त्वरिर अपील को विबना विकसी लाग क े आदेश क े सार्थी अनुमति दी जा ी है। सभी लंविब य सर्वोच्च न्यायालय ातिचका विनस् ारिर मानी जाय सर्वोच्च न्यायालय ेंगी। ……….(न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय मूर्ति.आर भानुमति ) ….……(न्य सर्वोच्च न्यायालय ाय सर्वोच्च न्यायालय मूर्ति, ए.एस.बोपन्ना ) नई विदल्ली, 06 अगस् 2013 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds