Anupal Singh & Ors. v. Principal Technical Services Department, U.P. State & Ors.

High Court of Allahabad · 30 Sep 2019
R. Bhanumati; A. A. Bopanna
Civil Appeal Nos. 4815/2019 and others
2019 INSC 1099
administrative appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the High Court's quashing of a recruitment process due to irregularities in reservation roster maintenance and directed fresh interviews in compliance with statutory reservation provisions.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार का उच्च म न्यायालय
सि विवल अपील अति कारिर ा
सि विवल अपील ंख्या 4815 वर्ष! 2019
अनुपाल सिं ह एवं अन्य. अपीलार्थी,(गण)
बनाम
प्रमुख ति3व व्यवि5ग विवभाग, उ.प्र. राज्य एवं अन्य क
े माध्यम े प्रत्यर्थी,(गण)
ार्थी में
सि विवल अपील ंख्या 4817/2019, सि विवल अपील ंख्या
4816/2019, सि विवल अपील ंख्या 4819/2019, सि विवल अपील
ंख्या 4818/2019, सि विवल अपील ंख्या 4821/2019, सि विवल
अपील ंख्या 4820/2019, सि विवल अपील ंख्या 4830/2019, सि विवल अपील ंख्या 4829/2019, सि विवल अपील ंख्या
4833/2019, सि विवल अपील ंख्या 4825/2019, सि विवल अपील
“क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क
े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क
े लिलए है और
विक ी अन्य उद्देश्य क
े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क

लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क
े उद्देश्यों क

लिलए मान्य होगा।"
2019 INSC 1099
ंख्या 4827/2019, सि विवल अपील ंख्या 4834/2019, सि विवल
अपील ंख्या 4828/2019, सि विवल अपील ंख्या 4824/2019, सि विवल अपील ंख्या 4835/2019, सि विवल अपील ंख्या 4822-
23/2019, सि विवल अपील ंख्या 4836/2019, सि विवल अपील ंख्या
4826/2019, सि विवल अपील ंख्या 4832/2019, सि विवल अपील
ंख्या 4831/2019.
विन ण! य
न्यायमूर्ति आर. भानुमति
प्रस् ु अपीलें रिरट याति3का (सि विवल)-34196 वर्ष! 2015 में पारिर विनण!य
वि>नांविक 10.02.2017 और उच्च न्यायालय इलाहाबा> द्वारा पारिर मूह रिरट
याति3का े उत्पन्न हुयी हैं सिज क
े द्वारा न्यायालय ने क
ृ विर्ष विवभाग में टेक्नि_नकल
असि स्टेंट मूह-ग क
े लिललिख परीक्षा क
े परिरणाम को बरकारार रख े हए लिललिख
परीक्षा क
े बा> की 3यन प्रविOया को खारिरज कर वि>या और मुख्य ति3व, उ.प्र.
राज्य को विन>aश जारी विकया विक वह मुति3क आँकड़ा और ंवग! क्षम ा क
े ार्थी
विवणिभन्न श्रेणिणयों में काय!र वास् विवक व्यवि5यों की ंख्या का अति या3न उ .प्र.
“क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क
े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क
े लिलए है और
विक ी अन्य उद्देश्य क
े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क

लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क
े उद्देश्यों क

लिलए मान्य होगा।"
लोक ेवा आयोग को प्रेविर्ष करें सिज े नये सि रे े ाक्षात्कार कराकर 3यन
प्रविकया पूरी की जा क
े ।
JUDGMENT

2. मामले क े ंतिक्षप्त थ्य इ प्रकार हैः- उ. प्र. लोक ेवा आयोग ने विवज्ञापन ंख्या ए-5, ई-1/2013 वि>नांविक 22.10.2013 जारी कर अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा ंवग!-3 क े लिलए 6628 प>ों क े ापेक्ष आवे>न की मांग की। उ[5] अति या3न में क ु ल 6628 प>ों का अति या3न विकया गया। श्रेणीवार प>ों की ंख्या इ प्रकार हैः- विवज्ञापन ंख्या अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा, ंवग!-3 ( कनीकी हायक मूह-ग) क े प>ों हे ु रिरवि5यां विवज्ञापन ंख्या ए-5, ई 1/2013 वि>नांकः22.10.2013 क ु ल रिरवि5यांः 6628 ामान्य ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. मूल अति या3न में क्षैति ज आरक्षण इ प्रकार हैः- मविहला वि>व्यांग स्व ंत्रा ेनानी आणिश्र भू पू्व ैविनक “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 1325 253 132 131 अपीलार्थिर्थीयों और प्राइवेट प्रत्यर्थिर्थीयों ने 30.03.2014 को आयोसिज लिललिख परीक्षा क े लिलए आवे>न विकया। उ.प्र. लोक ेवा (ए. ी., ए.टी. र्थीा अन्य विपछड़ा वग! हे ु आरक्षण ) अति विनयम, 1994 ( ंक्षेप में, उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994) क े अनु ार, रिरवि5यों क े विवणिशष्ट प्रति श को विवणिभन्न श्रेणिणयों हे ु आरतिक्ष विकया गया है, जै े, (क) ए. ी.- 21 प्रति श (ख) ए.टी.- 2 प्रति श (ग) अ.विप.व.- 27 प्रति श । इ बा को राज्य रकार क े ज्ञान में लाया गया विक पूव! अति या3न में श्रेणीवार रिरवि5यों की ंख्या में गल गणना की गयी और इ लिलए पूव! अति या3न में ु ार विकया जाना अपेतिक्ष र्थीा। कनीकी हायक मूह-ग की ंवग! क्षम ा और विवणिभन्न श्रेणिणयों में काय!र व्यवि5यों की वास् विवक क्षम ा क े बारे में विवस् ृ जां3 करने क े उपरान् यह पाया गया विक प्रारम्भ में ामान्य/अनारतिक्ष और अ.विप.व. में अति याति3 अभ्यर्थिर्थीयों की ंख्या की गल गणना की गयी। यह पाया गया विक सिजन तिrप्लोमा ारी को ामान्य कोटा में विनयु5 विकया जाना र्थीा विकन् ु उन्हें गल ी े अ.विप.व. कोटे में विनयु5 कर लिलया गया और इ ी का ु ार विकया जाना र्थीा। राज्य क े अनु ार तिrप्लोमा ारी को “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ामान्य कोटे क े ापेक्ष मायोसिज करने और आरक्षण ंबं ी ंवै ाविनक और ांविवति क विनयमों को लागू करने क े उपरान् राज्य रकार ने विवणिभन्न श्रेणिणयों की रिरवि5यों को माप्त कर वि>या है और विवणिभन्न श्रेणिणयों की रिरवि5यों क े लिलए ंशोति अति या3न प्रेविर्ष विकया। व्यवि5ग विवभाग की राय लेने क े उपरान् राज्य रकार ने अपने आ>ेश वि>नांविक 20.08.2014 द्वारा विवणिभन्न श्रेणिणयों क े व्यवि5यों की ंशोति रिरवि5यों को लागू आरक्षण विनयमों क े अनुरूप अनुमोवि> विकया और >नुरूप अति या3न को ंशोति विकया। क ृ विर्ष विवभाग ने उ[5] आ>ेश वि>नांक 20.08.2014 क े आ ार पर अपने पत्र ंख्या ए. ी./101 वि>नांविक 20.08.2014 द्वारा उ.प्र. लोक ेवा आयोग को 6628 प>ों क े ापेक्ष ंशोति अति या3न को प्रेविर्ष विकया जो इ प्रकार हैः- विवज्ञापन ंख्या अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा, ंवग!-3 ( कनीकी हायक मूह-ग) क े प>ों हे ु रिरवि5यां शा कीय आ>ेश ंख्या 912/12-04-14- 1992/2014 ामान्य ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वि>नांकः20.08.2014 क ु ल रिरवि5यांः 6628 ंशोति अति या3न में क्षैति ज आरक्षण इ प्रकार हैः- मविहला वि>व्यांग स्व ंत्रा ेनानी आणिश्र भू पू्व ैविनक 1325 253 132 131 उ[5] ंशोति अति या3न क े आ ार पर उ.प्र. रकार ने वि>नांक 15.09.2014 को लिललिख परीक्षा क े परिरणाम की घोर्षणा की जहां अपीलार्थी, (गण) और प्राइवेट प्रत्यर्थी, (गण) फल घोविर्ष कर वि>ये गये। उ. प्र. रकार ने लिललिख परीक्षा क े परिरणाम की घोर्षणा क े उपरान् काया!लय ज्ञापन वि>नांक 22.102014 जारी विकया सिज में शा कीय आ>ेश वि>नांविक 20.08.2014 े ंग ामान्य/अनारतिक्ष -2515, ए. ी.- 1882, ए.टी.- 201, अ.विप.व.- 2030 प>ों का विवज्ञापन विनकाला। लिललिख परीक्षा को पा करने वाले फल अभ्यर्थी, 27.10.2014 े शुरू ाक्षात्कार में शाविमल हुए। अन् में, वि>नांक “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 21.05.2015 को फल अभ्यर्थिर्थीयों की जारी ू3ी हुई सिज में प्राइवेट प्रत्यर्थी, (गण) लिललिख परीक्षा पा नहीं कर पाये।

3. अ फल अभ्यर्थिर्थीयों द्वारा प्रत्यर्थी, 1 और 4 क े विवरूद्ध अनेक रिरट याति3काएं उच्च न्यायालय क े मक्ष >ायर की गयीं सिज में उन्होंने यह अणिभव3न विकया विक फल अभ्यर्थी, काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 का उल्लंघन कर े है और वि>नांक 21.05.2015 को घोविर्ष विकये गये परिरणाम को खारिरज कर वि>या जाना 3ाविहए। उन्होंने आगे वि>नांविक 12.10.2014 क े काया!लय ज्ञापन क े विबना महत्व वि>ये नये सि रे े परिरणाम ैयार करने क े लिलए प्रत्यर्थी, 1 और 4 को विन>aश वि>ये जाने की प्रार्थी!ना विकया। यह क ! वि>या गया विक विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न करना अवै ाविनक है और यह 3यन प्रविOया क े मध्य में खेल क े विनयमों में ब>लाव करने क े बराबर है। आक्षेविप परिरणाम इ आ ार पर भी >ूविर्ष र्थीा विक यह उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 की ारा 3(1) और उ.प्र. अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा विनमयमावली, 1993 का विनयम 15(3) क े विवपरी है और ए. ी., ए.टी. अ.विप.व. को वि>ये जाने वाले आरक्षण की 50 प्रति श की ीमा को पार कर गया। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

4. आरक्षण क े मुद्दे पर विनण!यों का ं>भ! >ेकर उच्च न्यायालय ने आक्षेविप विनण!य द्वारा रिरट याति3काओं को अनुज्ञा प्र>ान कर विनम्नानु ार ारिर विकयाः-  प्रस् ु मामले में रिरवि5यां तिrप्लोमा ारिरयों की पकड़ में आ 3ुका है जहां पर 1749 तिrप्लोमा को वर्ष! 1998 में विवभाग में मायोसिज /विनयविम ीकरण विकया गया। उनक े विनयम ीकरण क े मय भी उनक े उनकी गणना की गयी और जो उनक े विनयविम ीकरण आ>ेश क े प्र>र्थिश हो ा है और जब एक बार जब उनकी गणना उनक े श्रेणी में कर ली गयी और आरतिक्ष श्रेणी में मुख्य रूप े अ.विप.व. वग! क े व्यवि5यों पया!प्त रूप े जगह >े >ी गयी ब तिrप्लोमा ारी को ामान्य वग! में रखने का कोई औति3त्य नहीं है।  वि>नांक 15.09.2014 को लिललिख परीक्षा क े परिरणाम आने क े उपरान् विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या में ब>लाव करना विवज्ञापन क े लंविब रहने क े >ौरान क ृ विर्ष ेवा विनयमावली क े विनयम 15(3) का उल्लंघन है और इ प्रकार और 3303 ामान्य श्रेणी क े अभ्यर्थिर्थीयों को ाक्षात्कार में शाविमल भी न >ेना और 4392 अ.विप.अ. क े अभ्यर्थिर्थीयों को 3यन हे ु ाक्षात्कार में शाविमल होने >ेना 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयमों में ब>लाव करने क े बराबर है।  आयोग ने वि>नांक 21.05.2015 को अक्निन् म परिरणाम की घोर्षणा की सिज में आरतिक्ष श्रेणिणयों क े 88 प्रति श अभ्यर्ति यों को फल घोविर्ष कर वि>ये गये जबविक ामान्य श्रेणी क े 12 प्रति श अभ्यर्थी, फल घोविर्ष हुए। यह म्पूण! 3यन उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 और क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 क े विनयम 15(3) क े विवरूद्ध है। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उ[5] विनष्कर्ष{ एवं क{ क े आ ार पर उच्च न्यायालय ने रिरट याति3काओं को अनुज्ञा प्र>ान कर वि>या और कहा विक लिललिख परीक्षा क े परिरणाम की घोर्षणा क े उपरान् की म्पूण! 3यन प्रविOया >ूविर्ष है और यह पोर्षणीय नहीं है। यूविनयन ऑफ इक्नि}ड़या एवं अन्य बनाम 3O र (2002) 3 ए. ी. ी. 146 का अवलम्ब लेकर उच्च न्यायालय ने ारिर विकया विक जब न्यायालय इ विनष्कर्ष! पर पहुं3े विक म्पूण! 3यन प्रविOया >ूविर्ष है ब व्यवि5ग ू3ना >ेने की कोई आवश्यक ा नहीं रह जा ी है इ रह म्पूण! 3यन प्रविOया को माप्त विकया जा क ा है। उच्च न्यायालय ने प्र ान ति3व, उ.प्र. राज्य को विन>aश जारी कर कहा विक वे मग्र आँकड़ो विह ंवग! क्षम ा एवं विवणिभन्न श्रेणिणयों में काय! कर रहे व्यवि5यों की वास् विवक ंख्या त्काल लोक ेवा आयोग क े भेंजे ाविक जल्> े जल्> ाक्षात्कार कराया जा क े और यह भी कहा विक म्पूण! प्रविOया 3ार माह में पूण! करें।

5. आक्षेविप विनण!य े >ुःखी अपीलार्थी,/ 3यविन अभ्यर्थी, अपने-अपने प>ों पर पहले ही विनयु5 हो 3ुक े हैं औ उन्होंने न्यायालय क े मक्ष यह अपीलें की हैं। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" न्यायालय ने वि>नांक 03.03.2017 को आ>ेश जारी कर मामले में यर्थीाक्निस्र्थीति बरकरार रखने को कहा है जै ा विक उ[5] ति णिर्थी पर र्थीा।

6. इन अपीलों को विवस् ारपूव!क ुना गया और ुनवाई कई ारीखों क 3ली। हमने अपीलार्थिर्थीयों क े विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा श्री पी.ए. पटवालिलया, विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा श्री एम. करपागा विवनयगम, विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा श्री गुरू क ृ ष्ण क ु मार, विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा श्रीम ी महालक्ष्मी पवानी, विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा श्रीम ी विवभा >त्ता मखीजा, विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा मेहुल एम. गुप्ता और विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा श्री ए. ुब्बाराव को ुना। हमने अपीलार्थिर्थीयों-प्रत्यर्थिर्थीयों क े विवद्वान अति व5ा श्री आलोक विमश्रा, विवद्वान अति व5ा श्री परमेश्वर, विवद्वान अति व5ा श्री अविनल नौरिरया, विवद्वान अति व5ा श्रीम ी ुविम ा हजारिरका और विवद्वान अति व5ा श्री वि>नेश क ु मार ति वारी को ुना। अपीलार्थिर्थीयों द्वारा प्रस् ु विकये गये क !

7. वरिरष्ठ अति व5ा श्री पी.ए. पटवालिलया: ने क ! >ेकर कहा विक ंशोति अति या3न उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े प्राव ानों क े अनुरूप है और “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 3यन प्रविOया को >ूविर्ष करने वाले >ुभा!वनापूण!/मनमानापूण! विक ी प्रकार क े आरोप नहीं लगाये गये है। यह क ! वि>या गया विक राज्य विपछड़ा आयोग द्वारा प्राप्त परिरवा> क े आ ार पर क ृ विर्ष विवभाग ने जां3 विकया है और पाया विक श्रेणीवार रिरवि5यों की गल गणना की गयी है और इ े ंशो न अपेतिक्ष है। विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने कर्थीन विकया विक उ.प्र. लोक ेवा आयोग का काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 क ृ विर्ष विवभाग क े अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 पर आ ारिर है और क े वल श्रेणीवार रिरवि5यों का बंटने का काय! कर उ े ंशोति विकया गया है और ऐ ा कर े मय उच्च न्यायालय यह कहने में गल ी विकया विक 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयमों को ब>ला गया है सिज े 3यन >ूविर्ष हुआ है। यह कर्थीन विकया गया विक योग्य ा को पूरी रह े नहीं ब>ला गया है और उच्च न्यायालय ने लिललिख परीक्षा की घोर्षणा करने क े स् र े 3यन प्रविOया रद्द करने क े लिलए क े. मंजूश्री बनाम आन्ध्र प्र>ेश राज्य एवं अन्य (2008) 3 ए. ी. ी. 512 एवं विहमानी मल्होत्रा बनाम वि>ल्ली उच्च न्यायालय (2008) 7 ए. ी. ी 11 का अवलम्ब लेने में गल ी पारिर विकया है। विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने आगे कर्थीन विकया विक प्राइवेट प्रत्यर्थी,/ हस् क्षेपक ा! ाक्षात्कार में भाग लिलया और और यह पाया विक वे अ फल घोविर्ष हो 3ुक ें हैं ब उन्होंने रिरट याति3काओं को >ालिखल “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विकया है और वे काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 और 3यन प्रविOया को 3ुनौ ी >ेने े विवबंति हैं।

8. विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा श्री एम करपागगा ने कर्थीन विकया विक उ.प्र. लोक ेवा आयोग का काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 क ृ विर्ष विवभाग द्वारा भेजे गये अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 पर आ ारिर र्थीा और जब प्राइवेट प्रत्यर्थिर्थीयों ने पाया विक वे अ फल घोविर्ष हो गयें हैं ब उन्होंने काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 को 3ुनौ ी >ी। विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने आगे कर्थीन विकया विक रिरवि5यों की ंख्या में विकये गये परिरव !न का विवरो नहीं विकया है और 3ूंविक अपीलार्थी, 3यन पा 3ुक ें हैं और व !मान में काय! कर रहे हैं, यवि> म्पूण! 3यन प्रविOया को रद्द विकया जा ा है ो उन पर बहु बड़ा पूवा!ग्रह होगा।

9. वरिरष्ठ अति व5ा श्री गुरू क ृ ष्ण क ु मार ने कर्थीन विकया विक राज्य रकार ने विवस् ृ प्रति शपर्थीपत्र >ालिखल कर अति या3न को ंशोति करने क े कारणों को स्पष्ट कर ब ाया विक इ को क े वल उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े ांविवति क प्राव ानों और आरक्षण क े ंवै ाविनक प्राव ानों को पूरा करने क े लिलए विकया गया। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" उच्च न्यायालय ने इ पक्ष को उति3 रूप े विव3ारिर नहीं विकया है। विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने आगे कर्थीन विकया विक प्राइवेट प्रत्यर्थिर्थीयों ने यह नहीं ब ाया विक अ.विप.व. श्रेणी क े प>ों की ंख्या बढ़ाने वे क ै े प्रभाविव हुए हैं। यह क ! वि>या गया विक फल अभ्यर्थिर्थीयों को रिरट याति3का में न जोड़ना घा क है और उच्च न्यायालय यह कहने गल र्थीा विक क ु छ फल अभ्यर्थिर्थीयों को जोड़ा जाना पया!प्त है। विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने आगे कर्थीन विकया विक खेल क े विनयमों को नहीं ब>ला गया क े वल श्रेणीवार रिरवि5यों की ंख्या में ब>लावा विकया गया और राज्य रकार क े पा शवि5 है विक वे उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े ांविवति क प्राव ानों और आरक्षण क े ंवै ाविनक प्राव ानों को पूरा करने क े लिलए अति याति3 रिरवि5यों की ंख्या को ंशोति कर क ी है।

10. वरिरष्ठ अति व5ा श्रीम ी महालक्ष्मी पवानी ने उ[5] कर्थीनों को >ोहरा े हुए कहा विक टेक्नि_नकल असि स्टेंट- मूह ग क े 3यन हे ु योग्य ा मानक में ब>लाव नहीं विकया गया है, बक्निल्क क े वल श्रेणीवार रिरवि5यों का वग,करण विकया गया है और उच्च न्यायालय अपीलार्थिर्थीयों को 3यन को जो अपास् विकया है वह ही नहीं र्थीा। यह कर्थीन विकया गया विक फल अभ्यर्थी, ीन वर्ष{ े काम कर रहे हैं और वे “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" श्रेणिणयों में मेरिरट क े आ ार पर 3यविन और विनयुवि5 हुए हैं और पूरी 3यन प्रविOया को अपास् नहीं विकया जा क ा है।

11. वरिरष्ठ अति 5ा श्रीम ी विवभा >त्ता मखीजा उ[5] कर्थीनों को >ोहराया और कहा विक पूव! अति या3न वि>नांविक 03.10.2012 को जारी करने क े उपरान् विवभाग ने उ की जां3 कर पाया विक श्रेणीवार रिरवि5यों में जो गल गणना की गयी र्थीी वह गल र्थीी। उन्होंने आगे कहा विक अन्य विपछड़ा वग! आयोग क े मक्ष एक परिरवा> विकया गया र्थीा और सिज क े बा> राज्य रकार क े विन>aश पर क ृ विर्ष विवभाग ने जां3 विकया और पाया विक श्रेणीवार रिरवि5यों की ंख्या में गल गणना की गयी र्थीी और पूव! अति या3न में ंशो न विकये जाने की जरूर र्थीी। यह कहा गया विक जब विक ी रह क े >ुभा!वना/भे>भाव क े आरोप नहीं लगाये गये ब म्पूण! 3यन प्रविOया को अपास् नहीं विकया जा क ा है।

12. विवद्वान अति व5ा श्री मेहुल गुप्ता एवं श्री ुब्बा राव ने उ[5] क{ को >ोहराया...श्री मेहुल गुप्ता ने न्यायालय े यह प्रार्थी!ना की विक वह भार क े ंविव ान क े “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 142 क े ह प्र>त्त शवि5 का प्रयोग कर 906 अभ्यर्थिर्थीयों क े विनयुवि5 आ>ेश जारी करें। राज्य क े क !

13. वरिरष्ठ अति व5ा श्री ए. आर. सिं ह ने राज्य द्वारा >ालिखल प्रति शपर्थीपत्र की विवणिशविष्टयों को हमारे मक्ष प्रस् ु कर विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने कहा विक उच्च न्यायालय यह कहने में ही नहीं र्थीा विक अति या3न को ंशोति करने का अर्थी! 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयमों में ब>लाव करना है। विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने कर्थीन विकया विक श्रेणीवार रिरवि5यों की गणना में हुई गल ी को ु ारने मात्र े 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयमों में ब>लाव करना नहीं हो ा है। विवद्वान वरिरष्ठ अति व5ा ने तिrप्लोमा ारी को ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष मायोसिज विकये जाने ंबं ी कर्थीनों को भी स्पष्ट विकया है। यह कर्थीन विकया गया विक विनयुवि5 को ंवै ाविनक ीमाओँ क े ह लाने क े लिलए क े लल 6599 अभ्यर्थिर्थीयों को विनयुवि5 >ी गयी और 29 अभ्यर्थिर्थीयों को उनक े द्वारा प्रपत्रों को न जमा कर पाने क े कारण रोक वि>या गया है। यह कर्थीन विकया गया विक 906 अभ्यर्थिर्थीयों को विनयुवि5 “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" इ लिलए नहीं प्र>ान की गयी _योंविक यह उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े अनुज्ञेय ंवै ाविनक ीमा क े परे 3ला जाएगा। प्राइवेट प्रत्यर्थिर्थीयों क े क !

14. विवद्वान अति व5ा ने क ! वि>या विक श्रेणीवार रिरवि5यों में ब>लाव करना ंवै ाविनक प्राव ानों और क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 क े विनयम 15(3) क े ंवै ाविनक प्राव ानों क े उल्लंघन है और इ े ंवै ाविनक विनयम भंग हो े हैं और विवणिभन्न श्रेणिणयों में प>ों की ंख्या में ंशो न कर काफी अभ्यर्थिर्थीयों को ाक्षात्कार में शाविमल होने े अवै ाविनक रूप े रोका गया र्थीा। यह क ! वि>या गया विक काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 सिज क े द्वारा श्रेणीवार रिरवि5यों में ब>लाव विकया गया वह भे>भावपूण! है और उच्च न्यायलय ने ारिर विकया विक 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयमों को ब>ला गया र्थीा जो ही है। उच्च न्यायालय ने उति3 आँकड़ा, ंवग! क्षम ा और वास् विवक रूप े काय! कर रहे लोगों की क्षम ा क े आ ार पर नये सि रे े ाक्षात्कार कराये जाने का विन>aश >ेकर 3यन प्रविOया को अपास् कर वि>या जो ही है। विवद्वान अति व5ा ने आगे कर्थीन विकया विक 3ूंविक विनयमों का उल्लंघन विकया गया और ंवै ाविनक आ>ेश को भंग विकया गया जै ा विक भार ंघ एवं अन्य बनाम ओ. 3O र (2002) 3 ए. ी. ी. 146 में ारिर “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विकया गया विक 3यविन अभ्यर्थिर्थीयों को व्यवि5ग नोविट वि>ये जाने की आवश्यक ा नहीं है और 3यविन अभ्यर्थिर्थीयों को व्यवि5ग नोविट न >ेना आक्षेविप विनण!य की शुद्ध ा को प्रभाविव नहीं करेगा।

15. विवद्वान अति व5ा श्री क े. परमेश्वर विवद्वान अति व5ा ने कर्थीन विकया विक उ.प्र. लोक ेवा आयोग द्वारा जारी काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 और 3यन प्रविOया अंति म 3यन ू3ी को भी 3ुनौ ी >ेकर कई रिरट याति3काएं >ायर की गयी और अपीलार्थिर्थीयों ने प्रमुख प्रकरण रिरट याति3का (सि विवल) ं. 34196 वर्ष! 2015 एवं अन्य रिरट याति3काएं जै े रिरट याति3का (सि विवल) ं. 38399 वर्ष! 2015, रिरट याति3का (सि विवल) ं. 45822 वर्ष! 2015, रिरट याति3का (सि विवल) ं. 47894 वर्ष! 2015, 50878 वर्ष! 2015 एवं ए.पी.एल.ए.rी. ंख्या 283 वर्ष! 2015 में पारिर विनण!य को 3ुनौ ी >ी है और अभ्यर्थिर्थीयों ने अन्य रिरट याति3काओं में पारिर विनण!य को 3ुनौ ी नहीं वि>या है सिज को अभी भी 3ुनौ ी वि>या जाना शेर्ष है और जो प्रांगन्याय की भांति काय! कर रहा है। अपने कर्थीन क े मर्थी!न में विवद्वान अति व5ा ने श्री गंगई विवनयागर मंवि>र एवं अन्य बनाम मीनाक्षी अम्मल एवं अन्य (2015) 3 ए. ी. ी. 624 का अवलम्ब लिलया है। जहां क “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क्षैति ज आरक्षण का प्रश्न है विवद्वान अति व5ा ने आगे क ! वि>या विक क्षैति ज आरक्षण उपलब् नहीं र्थीा, उनको उध्व! आरक्षण े भरा गया र्थीा जो विवति और उच्च म न्यायालय द्वारा लगा ार लिलये जा रहे दृविष्टकोण क े अनुरूप नहीं है। विवद्वान अति व5ा ने कर्थीन विकया विक 3यन प्रविOया में अनेक अविनयविम ाओं पर विव3ार कर उच्च न्यायालय ने लिललिख परीक्षा क े परिरणाम को घोर्षणा की बा> की 3यन प्रविOया को अपास् कर वि>या है जो ही है और आक्षेविप विनण!य में हस् क्षेप विकये जाने की आवश्यक ा नहीं है।

16. विव>वान अति व5ा अविनल नौरिरया ने कर्थीन विकया विक 3यन हे ु विनयम एवं श { को विवज्ञापन में प्रकाणिश विकया गया र्थीा और 3यन हे ु अभ्यर्थिर्थीयों क े अति कारों को विवज्ञापन की ति णिर्थी पर मौजू>ा विनयमों क े अनुरूप विव3ारिर विकया जाएगा। अपने क{ क े मर्थी!न में विवद्वान अति व5ा ने एन.टी.rेविवन कट्टी एवं अन्य बनाम कना!टक लोक ेवा आयोग एवं अन्य (1990) 3 ए. ी. ी. 157 का अवलम्ब लिलया। विवद्वान अति व5ा ने आगे कर्थीन विकया विक ामान्य कोटे क े ापेक्ष तिrप्लोमा ारी को मायोसिज करक े विवणिभन्न श्रेणी की रिरवि5यों क े अति या3न को ंशोति करने में राज्य ने गल ी विकया सिज े उन अभ्यर्थिर्थीयों क े विह प्रभाविव “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" हुए सिजन्होंने लिललिख परीक्षा में शाविमल होकर उ े पा कर लिलया र्थीा। उच्च न्यायाल ने ठीक ही लिललिख परीक्षा की घोर्षणा क े बा> क े 3यन प्रविOया को अपास् कर वि>या। भार रकार, भार ति3व क े माध्यम े एवं अन्य बनाम रविव प्रकाश गुप्ता एवं अन्य (2010) 7 ए. ी. ी. 626 का अवलम्ब लिलया गया।

104,043 characters total

17. विवद्वान अति व5ा श्री वि>नेश क ु मार ति वारीः ने हमारा ध्यान उ. प्र. लोक ेवा आयोग (रेगूलेशन ऑफ प्रो ीजर ए}ड़ कन्r_ट ऑफ विबजने ) अति विनयम, 1974 की ओर आकर्षिर्ष कर कर्थीन विकया विक उ.प्र. लोक ेवा आयोग क े काय! इ अति विनयम क े प्राव ानों क े ंग होने 3ाविहए और विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न करने वाले ंशोति काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 पोर्षणीय नहीं है, और उच्च न्यायालय ने इ को अपास् कर वि>या है जो ही है और 3यन प्रविOया को जारी रखने का विन>aश वि>या गया और राज्य को विन>aणिश विकया विक वे उ. प्र. लोक ेवा आयोग को उति3 आँकड़ा, ंवग! क्षम ा ार्थी ही ार्थी विवणिभन्न श्रेणी में काय! कर लोगों की ंख्या क े आ ार पर अति या3न भेजे। क े. मुखज, क े वा> का अवलम्ब लिलया गया। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

18. उ[5] कर्थीनों, आक्षेविप विनण!य एवं अणिभलेख पर मौजू> अन्य ामविग्रयों पर विव3ार करने क े उपरान् विनम्नलिललिख विबन्>ु उत्पन्न हो े हैं सिजन्हें य विकया जाना हैः (i) _या ंशोति अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 और काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 श्रेणीवार रिरवि5यों की गल गणना का ंशो न मात्र है? (ii) _या ंशोति काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 भे>भाव े ग्रसि है सिज का प्रति वावि>यों ने क ! वि>या है? (iii) _या काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 सिज में रिरवि5यों क े बंटवारे को ंशोति विकया गया 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयमों को ब>लने की कोविट में आएगा? (iv) श्रेणीवार रिरवि5यों क े ंशो न की पूण! जानकारी रखकर और ाक्षात्कार में भाग लेने क े उपरान् _या अ फल -अभ्यर्थी,गण प्रत्यर्थी,गण-हस् क्षेपक ा!गण फल अभ्यर्थिर्थीयों क े 3यन को 3ुनौ ी >ेने े बाति हो जा े हैं? (v) जब तिrप्लोमा ारकों को विनयम ीकरण को वर्ष! 2015 में >ायर रिरट याति3काओं में 3ुनौ ी नहीं वि>या गया र्थीा ब _या उच्च न्यायालय तिrप्लोमा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ारकों को विनयम ीकरण की वै ा पर विव3ार करने और ामान्य कोटा े ापेक्ष तिrप्लोमा ारिरयों क े मायोजन क े ंबं में प्रति क ू ल विनष्कर्ष! विनकालने पर ही र्थीा? (vi) _या श्रेणीवार रिरवि5यों की ंख्या का ंशोति अति या3न ामान्य/अनारतिक्ष अभ्यर्थिर्थीयों क े प्रति पूवा!ग्रह े ग्रसि हुआ है सिज का प्रत्यर्थिर्थीयों ने क ! वि>या हैैैै ? (vii) _या 906 अभ्यर्थी, विनयुवि5 आ>ेश जारी करने क े लिलए विन>aश प्राप्त करने क े हक>ार हैं? ंशोति अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 और काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 सिज में उ.प्र. आरक्षण अति विनयम,1994 एवं उ. प्र. अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा विनयमावली,1993 (उ. प्र. ेवा विनयमावली, 1993) े ंग विवणिभन्न श्रेणिणयों में ंशोति रिरवि5यों की ंख्या का विवज्ञापन वि>या गया।

19. टेक्नि_नकल असि स्टेंट ग्रेr-III का प> ृ ीय श्रेणी का प> है जो क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 े शासि हो ा है। इन प>ों की पुनः र3ना की गयी जो “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 25.10.2017 े प्रभावी र्थीा। उ[5] प>ों का वे नमान 3200-4900 य विकया गया और टेक्नि_नकल असि स्टेंट ग्रेr-III क े क ु ल 10531 प> स्वीक ृ विकये गये। इन प>ों की पुनर!3ना क े बा> रिरवि5यों क े विववरण पर काय! विकया गया सिज में यह पाया गया विक 10531 प> स्वीक ृ विकये गये र्थीे सिज में े 5860 व्यवि5 काय! कर रहे र्थीे। इ आ ार पर क ु ल 4671 रिरवि5यां विन ा!रिर की गयीं, और शा कीय आ>ेश वि>नांविक 05.03.2002 क े अनु ार 2% रिरवि5यों की ंख्या घटाने पर क ु ल प>ों की ंख्या 4578 >र्थिश कर वि>नांक 03.10.2012 को उ. प्र. लोक ेवा आयोग को अति या3न भेजा गया। इ क े उपरान् क ु ल 2092 प> बढ़ गये सिज में े शा कीय आ>ेश वि>नांविक 05.03.2002 क े अनु ार 2% घटा >ी गयी र्थीीं और अति या3न वि>नांविक 30.04.2013 द्वारा एक अति या3न भेजा गया सिज में 2050 बढ़े हुए प> >णिश र्थीे उ में े ओ.बी. ी. कोटा क े ापेक्ष क ु ल रिरवि5यां 554 र्थीीं। पूव! अति या3न वि>नांविक 03.10.2012 में ओ.बी. ी. कोटा क े ापेक्ष क ु ल रिरवि5यों की ख्या 12 र्थीीं। इ प्रकार >ू रे अति या3न में ओ.बी. ी. कोटा क े ापेक्ष क ु ल रिरवि5यों की ंख्या 554+12=566 >र्थिश र्थीी। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

20. क ृ विर्ष विवभाग ने वर्ष! 2013 की मौजू>ा रिरवि5यों को भरने क े लिलए रिरवि5यों को विन ा!रिर कर राज्य रकार को भेज वि>या। >नुरूप राज्य रकार ने उ.प्र. रकार को क ु ल 6628 प>ों काअति या3न भेजा सिज में े ामान्य श्रेणी क े लिलए 3616 ए. ी. क े लिलए 2211 र्थीा ए.टी. क े लिलए 235 और 566 प> ओ.बी. ी को लिलए >र्थिश र्थीे >नुरूप उ. प्र लोक ेवा आयोग ने वि>नांक 22.10.2013 को विवज्ञापन जारी विकया।

21. इन रिरवि5यों क े विवज्ञापन जारी होने क े बा> उ. प्र. विपछड़ा आयोग क े मक्ष एक परिरवा> >ायर विकया गया सिज में णिशकाय की गयी विक अ.विप.व. की आरक्ष श्रेणी में वास् विवक रिरवि5यों को >शा!ने क े बजाय 566 प>ों को विवज्ञापन में वि>खाया गया है। इ परिरवा> पर क ृ विर्ष विवभाग र्थीा उ. प्र. लोक ेवा आयोग े उ[5] परिरवा> का जवाब मांगा गया। इ क े उपरान क ृ विर्ष विवभाग ने जां3 की और पाया विक श्रेणीवार रिरवि5यों की गल गणना क े 3ल े पू्व! अति या3न में ंशो न विकया जाना अपेतिक्ष र्थीा। प्राति कारी क े विन>aश पर की जां3 में यह पाया गया विक ामान्य श्रेणी क े अभ्यर्थिर्थीयों की गल गणऩा कर प>ो की ंखया 2622 वि>खाया गया जबविक वास् व में 1749 कम!3ारी (979 अ.विप.व. एवं 770 अन्य) शाविमल “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विकये गये र्थीे 3ूंविक उन्होंने वर्ष! 1981 का राजकीय क ृ विर्ष विवद्यालय े तिrप्लोमा विकया र्थीा उनकी भी गणना ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष विकया जाना अपेतिक्ष र्थीा।

22. राजकीय क ृ विर्ष विवद्यालय, बुलं>शरहर, राजकीय क ृ विर्ष विवद्यालय, 3रगवाँ- गरखपुर राजकीय क ृ विर्ष विवद्यालय, झाँ ी क ृ विर्ष विवभाग द्वारा ं3ालिल र्थीे। ये विवद्यालय >ो वर्ष,य क ृ विर्ष प्र ार तिrप्लोमा प्र>ान कर रहे र्थीे और सिजन अभ्यर्थी, 1981-1987 क े >ौरान तिrप्लोमा विकया र्थीा उन्हें विबना विक ी 3यन क े विनयु5 विकया जा क ा र्थीा। हालांविक विफर भी क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 क े प्रव !न क े पश्चा 3ूंविक1981-1987 क े >ौरान सिजन अभ्यर्थिर्थीयों ने तिrप्लोमा विकया र्थीा उन्हें नहीं विनयु5 विकया जा का इ लिलए विन>ेशालय ने अपने पत्र वि>नांविक 22.01.1998 द्वारा राज्य रकार े वि>शा विन>aश वि>ये जाने की मांग विकया है। राज्य रकार ने अपने पत्र वि>नांविक 04.06.198 क े द्वारा छ ू ट प्र>ान कर 1822 तिrप्लोमा ारिरयों को विनयु5 विकये जाने को विन>aणिश विकया सिज में े 1749 वर्ष! 1998 क ज्वाइन कर 3ुक े र्थीे। 3ूंविक रिरवि5यों क े विन ा!रण क े मय सिजन अ.विप.व. क े अभ्यर्थिर्थीयों को क ृ विर्ष तिrप्लोमा प्रमाणपत्र क े आ ार पर विनयु5 विकया गया र्थीा उनकी गणना अ.विप.व. श्रेणी में रिरवि5 क े ापेक्ष की गयी जबविक ऐ ा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" करना अपेतिक्ष नहीं र्थीा इ लिलए यह गणना गल है। पू्व! में जो अति या3न भेजा गया उ में अ.विप.व. क े ापेक्ष 566 रिरवि5यां र्थीी जबविक वास् व में इ में2030 रिरवि5यां होनी 3ाविहए र्थीी _योंविक भी तिrप्लोमा ारिरयों को ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष विनयु5 विकया गया र्थीा न विक अ.विप.व. क े ापेक्ष विनयु5 विकया गया र्थीा। विवभाग क े अनु ार बा> में भेजा गया अति या3न पूव! में विकये गये गल ी का ु ार मात्र र्थीा। विवज्ञापन क े वि>न अ.विप.व. की वास् विवक रिरवि5 2030 र्थीी विकन् ु विवभाग की गल गणना क े 3ल े 566 रिरवि5यों का विवज्ञापन विनकाला गया।

23. यह अ.विप.व. क े कोटा में गल गणना क े 3ल े हुआ, पू्व! अति या3न में अ.विप.व. क े ापेक्ष.. रिरवि5यों का अति या3न भेजा गया, जबविक वास् व में अ.विप.व. क े कोटा क े ापेक्ष रिरवि5यों की ंख्या.. 3ाविहए। इ ं>भ! में, विवभाग ने विवणिभन्न श्रेणिणयों की रिरवि5यों की ंख्या पर पुनः मंर्थीन कर ंशोति अति या3न भेजा जो इ प्रकार हैः क ु ल स्वीक ृ प> 50% ामान्य 21% अनु ूति3 2% अनु ूति3 27% अन्य “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" श्रेणी जाति जनजाति विपछड़ा वग! 10559 5280 2217 211 2851 काय!र कमा!3री- 3796 2713 297 6 780 रिर[5] प> -6763 2567 1920 205 2071 शा कीय आ>ेश क े अनु ार 2% कटौ ी क े उपरान् रिर[5] प>- 6628 2515 1882 201 2030

24. वैयवि5क विवभाग की राय लेने क े उपरान् प्रर्थीम प्रत्यर्थी, ने आ>ेश वि>नांविक … द्वारा प्रायोज्य क ृ विर्ष ेवा विनयमावली एवं भेजे गये ंशोति अति या3न क े अनुरूप विवणिभन्न श्रेणी क े लिलए व्यवि5यों क े लिलए रिरवि5यों का अनुमो>न कर अति या3न भेजा जो इ प्रकार हैः विवज्ञापन ंख्या अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा, ंवग!-III में रिरवि5यां (टेक्नि_नकल असि स्टेंट ग्रुप- ी) “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" शा कीय आ>ेश ंख्या 941/12-04-14- 1992/2014 वि>नांक 20.08.2014 क ु ल रिरवि5यों की ख्याः ामान्य अनु ूति3 जाति अनु ूति3 जनजाति अन्य विपछड़ा वग! उ[5] शा कीय आ>ेश वि>नांक 20.08.2014 क े आ ार पर क ृ विर्ष विवभाग ने अपने पत्र ं. ए. ी./101 वि>नांविक 20.08.2014 द्वारा उ.प्र. लोक ेवा आयोग को उपरो5 ंशोति अति या3न भेजा। राज्य रकार क े अनु ार भी ंबंति विवभागों कार्षिमक विवभाग और प्रशा विनक विवभाग क े प्रति विनति यों की मीटिंटग क े बा> ही श्रेणीवार रिरवि5यों की क्निस्र्थीति में परिरव !न विकया गया और यह पाया गया विक पूव! में श्रेणीवार रिरवि5यों की गल गणना भेजी गयी र्थीी सिज े क ृ विर्ष विवभाग में टेक्नि_नकल असि स्टेंट ग्रेr-III क े क ु ल ंवग! क्षम ा में प्रत्येक श्रेणी क े क ु ल प्रति विनति त्व में अ ंग ा की परिरणति ंभाव्य र्थीी। इ लिलए प्रशा विनक विवभाग ने “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वि>नांक 20.08.2014 को ंशोति अति या3न विन>ेशक, क ृ विर्ष को भेजा सिजनको ब>ले में विन>aश हुआ विक वह इ मामले को उ.प्र. लोक ेवा को ं ूति3 करें।

25. वि>नांक 15.09.2014 को जारी लिललिख परीक्षा का परिरणाम क े वल उ[5] ंशोति अति या3न पर आ ारिर र्थीा। जो लिललिख परीक्षा का परिरणाम घोविर्ष विकया गया वह प>ों क े ंशोति अति या3न पर आ ारिर र्थीा। उ. प्र. लोक ेवा आयोग ने राज्य रकार क े ंशोति अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 अनुरूप काय! विकया। अभ्यर्थिर्थीयों को ाक्षात्कार में बुलाये जाने े पूव! विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या को ंशोति कर उ. प्र. लोक ेवा आयोग द्वारा काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 जारी विकया गया। इ प्रकार उ. प्र. लोक ेवा आयोग राज्य रकार द्वारा भेजे गये अति या3न े परे नहीं गया।

26. राज्य रकार ने ंशोति अति या3न क े माध्यम े उ. प्र. लोक ेवा आयोग ( अनु ूति3 जाविन, अनु ूति3 जनजाति, अन्य विपछड़ा वग! आरक्षण) अति विनयम, 1994 क े अनुरूप आरक्षण क े उद्देश्यों को प्राप्त करने का प्रया विकया। मूल विवज्ञापन में ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष 3616 प>ों का और अ.विप.व. श्रेणी क े ापेक्ष “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 566 प>ों का विवज्ञापन वि>या गया र्थीा जो अ.विप.व. क े य प्रति श े काफी कम र्थीा। उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 की ारा 3(1) क े प्राव ानों क े अनु ार विवणिभन्न श्रेणिणयों क े लिलए रिरवि5यों का विवविनर्षि>ष्ट प्रति श आरतिक्ष विकया गया है।उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 का ारा 3 इ प्रकार हैः

3. अनु ूति3 जाति, अनु ूति3 जनजाति एवं अन्य विपछड़े वग! को विमला आरक्षणः- (1) लोक ेवाओं एवं प>ों में ी ी भ, क े स् र पर आरक्षण का प्राव ान होगा, अनु ूति3 जाति, अनु ूति3 जनजाति एवं अन्य विपछड़ा वग! े आने वाले अभ्यर्थिर्थीयों क े पक्ष में उप ारा (5) में विनर्षि>ष्ट रोस्टर क े अनुरूप भ, की जाने वाली रिरवि5यों का प्रति श विनम्नलिललिख हैः- (a) अनु ूति3 जाति - 21 प्रति श (b) अनु ूति3 जनजाति - 2 प्रति श (c) अन्य विपछड़ा वग!- 27 प्रति श बश a उपख}ड़ (c) क े ह आरक्षण अनु ू3ी II में विनर्षि>ष्ट अन्य विपछड़े वग! क े नागरिरकों पर लागू नहीं होगा। आगे प्रति बं यह है विक भी श्रेणी क े व्यवि5यों क े लिलए रिरवि5यों का आरक्षण विक ी भी वर्ष! की भ, में उ वर्ष! की क ु ल रिरवि5यों क े 50 प्रति श े अति क “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" नहीं होगी और सिज ेवा क े लिलए भ, की जा रही है उ की भी ंवग! क्षम ा क े 50 प्रति श े अति क नहीं होगा। (2) यवि> विक ी वर्ष! की भ, क े ं>भ! में, उप ारा (1) क े ह विक ी भी श्रेणी क े लिलए आरतिक्ष कोई रिरवि5 नहीं भर पा ी है ब ऐ ी रिरवि5 अग्रेसि कर वि>या जाएगा और इ को उ वर्ष! विवशेर्ष भ, अर्थीवा अगले वर्ष! अर्थीवा विवशेर्ष वग! की रिरवि5 क े रूप में भ, वर्ष{ क े माध्यम े भरी जाएंगी। एे े वग! की रिरवि5यों को उ वर्ष! की रिरवि5यों को सिज वर्ष! यह भरी े गयी हैं, और उ वर्ष! की क ु ल रिरवि5 क े प3ा प्रति श आरक्षण क े बन् को विन ा!रिर करने क े उद्देश्यों क े लिलए भी विव3ारिर विकया जाएगा।

27. उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 की ारा 4 >}ड़ का प्राव ान कर ी है। ारा 5 उपबंति कर ी है विक कोई विनयुवि5 प्राति कारी अर्थीवा अति कारी को ारा 4 (1) क े ह सिजम्मे>ारी >ी जा ी है ो यवि> वह शा य इ अति विनयम क े उद्देश्यों क े ार्थी छेड़छाड़ कर ा है अर्थीवा विवफल करने का काय! कर ा है ो >ोर्षसि तिद्ध पर ीन माह क े कारावा या कारावा े >क्नि}ड़ विकया जाएगा।......... उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 की ारा 2(अ) क े अनु ार, लोक ेवा अर्थीवा प> क े ंबं में विनयुवि5 प्राति कारी े अणिभप्रे ऐ े प्राति कारी े है सिज े ऐ ी ेवाओं अर्थीवा प>ों में विनयुवि5 हे ु श[5] विकया गया है। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

29. जै ा विक पू्व! में ब ाया गया है कनीकी हायक वग! -3 का प> क ृ विर्ष ेवा विनयमावली,1993 े शासि हो ा है। इ विनयमावली क े विनयम 15 क े अनु ार विनयुवि5 प्राति कारी उ वर्ष! भरी जाने वाली रिरवि5यों ंख्या को विनयम 6 क े ह ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. क े अभ्यर्थिर्थीयों क े लिलए विन ा!रिर करेगा। विनयम 15 इ प्रकार हैः-

15. रिरवि5यों का विन ा!रण भ, प्राति कारी वर्ष! क े >ौरान भरी जाने वाली रिरवि5यों की ंख्या का विन ा!रण करेगा और विनयम 6 क े ह ए. ी., ए.टी. और अन्य वग{ क े लिलए रिरवि5यों की ंख्या भी विन ा!रिर करेगा। ी ी भ, क े लिलए रिरवि5यों को उ मय प्र3लिल विनयमों और आ>ेशों क े अनु ार आयोग को ूति3 करेगा अर्थीवा रोजगार काया!लय को अति ूति3 विकया जाएगा। क ृ विर्ष ेवा विनमयमावली, 1993 का विनयम 6 श ! आरोविप कर ा है विक ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. को आरक्षण विनयुवि5 क े मय शा कीय आ>ेश क े अनुरूप वि>या जाए। इ प्रकार क ृ विर्ष ेवा विनमयमावली, 1993 े स्पष्ट े यह श ! आरोविप कर ा है विक विनयुवि5 प्राति कारी उ वर्ष! भरे जाने वाले प>ों को विन ा!रिर “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" और विनयम 6 क े ह क े ए. ी. ए.टी अ.विप.व क े रिरवि5यों की ंख्या का भी विन ा!रण करें। श्रेणीवार रिरवि5यों की गल गणना का प ा 3लने पर प्राति कारी गल गणना में ु ार करने और उ े उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1993 और क ृ विर्ष ेवा विनमयमावली, 1993 क े अनुरूप ंशोति अति या3न भेजने क े लिलए श[5] हैं।

30. आर. क े. भरवाल बनाम पंजाब राज्य एवं अन्य (1995) 2 ए. ी. ी. 745 क े मामले में उच्च म न्यायलय ने इ ुस्र्थीाविप सि द्धान् को >ोहराकर अणिभविनण, विकया विक आरक्षण का प्रति श को प>ों की ंख्या क े ंबं में य विकया जाना 3ाविहए सिज े ंवग! क्षम ा का विनमा!ण हो ा है, यह सि द्धान् प्रकार हैः-

6. काय!कारी विन>aशों में ामान्य ौर पर प्रयु5 अणिभव्यवि5 प> और रिरवि5यां जो आरक्षण का उपबं कर ी है वह मस्यात्मक है। प> का अर्थी! है विनयुवि5 नौकरी, काया!लय, रोजगार सिज प> विक ी व्यवि5 की विनयु5 की जा ी है। रिरवि5 का अर्थी! है खाली प> अर्थीवा काया!लय। इ का ी ा म लब यह स्पष्ट कर ा है विक रिरवि5 क े होने क े लिलए प> का होना अविनवाय! है। ंवग! क्षम ा हमेशा प>ों की ंख्या े मापी जा ी है सिज में ंवग! शाविमल है। विनयुवि5 हे ु विव3ार विकये जाने क े अति कार का >ावा क े वल ंवग! में प>ों क े ंबं में ही विकया जा क ा है। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" परिरणामस्वरूप आरक्षण क े प्रति श े ंबंति मस्या का मा ान ंवग! क्षम ा का गविठ करने वाली प>ों की ंख्या क े ंबं विकया जाना 3ाविहए। आरक्षण क े प्रति श को य करने में रिरवि5 क े अव ारणा का कोई महत्व नहीं है।

31. अणिभलेख पर मौजू> ामाग्री े प ा 3ल ा है विक क ु ल स्वीक ृ प> 10599 है सिज का ए. ी. कोटे का 21 प्रति श 2217 प> हो ा है सिज में े 297 व्यवि5 काय! कर रहे हैं जो ए. ी. कोटे क े 2.81 प्रति श है। शेर्ष रिर[5] प> 1920 है जो 18.18 प्रति श है और शा कीय आ>ेशानु ार 2 प्रति श की कटौ ी करने पर ए. ी. कोटे क े ापेक्ष 1882 प>ों क े लिलए ंशोति अति या3न जो विक 18.18 प्रति श है, भेज वि>या गया। इ ी प्रकार क ु ल उत्कीण! 10599 प>ों में े 2 प्रति श ए.टी. क े ापेक्ष े 211 प> र्थीे और काय! कर लोगों की ंख्या 6 है जो 0.05 प्रति श है। 205 में े शेर्ष ब3ा प> 1.94 प्रति श है, और शा कीय आ>ेशानु ार 2 प्रति श की कटौ ी क े उपरान् ए.टी. कोटे क े 201 प>ों का ंशोति अति या3न भेजा गया। जहां क 27 प्रति श अ.विप.व. का ंबं है जो 10599 प>ों में 2851 प> हो ा है और काय! कर रहे लोगों की ंख्या 780 है जो 7.38 प्रति श है और ब3ा हुआ 2071 प>

19.61 प्रति श है। इ ी प्रकार 2713 कम!3ारी ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष काय! “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" कर रहें हैं जो 25.69 प्रति श है और 50 प्रति श कोटा को पूरा करने क े लिलए अपेतिक्ष प> 2567 यानी 24.31 प्रति श है। यह विनम्नलिललिख 3ाट! क े माध्यम े अच्छे े स्पष्ट विकया जा क ा हैः- क ु ल स्वीक ृ प> 50% ामान्य श्रेणी 21% अनु ूति3 जाति 2% अनु ूति3 जनजाति 27% अन्य विपछड़ा वग! 10559 5280 2217 211 2851 काय!र कमा!3री- (25.69%) (2.81%) (0.05%) (7.38%) रिर[5] प> -6763 2567 (24.31%) (18.18%) (1.94%) (19.61%) शा कीय आ>ेश क े 2515 1882 201 2030 “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अनु ार 2% कटौ ी क े उपरान् रिर[5] प> - (23.81%) (17.82%) (1.90%) (19.22%) उ[5] ालिलका े स्पष्ट है विक ंशोति अति या3न उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 की ारा 3 क े अनुपालन को ुविनतिश्च करने क े लिलए है। उच्च न्यायालय द्वारा इ परिरप्रेक्ष्य का भी उति3 रूप े मूल्यांकन नहीं विकया गया है।

32. अ.विप.व. श्रेणी में 2030 रिरवि5यों की ंख्या का ंशो न ामान्य श्रेणी क े अभ्यर्थिर्थीयों क े अति कार का उल्लंघन नहीं कर ा है _योंविक विव ानमंrल ने आरक्षण का प्राव ान कर े हुए भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 16(4) को ध्यान में रखकर आरक्षण अति विनयम, 1994 ंख्यांक 4 पारिर कर वि>या है। अति या3न को ंशोति कर प्रश्नग प>ों पर 3यन हे ु आरक्षण क े उद्देश्यों को प्राप्त करने क े लिलए राज्य ने ामान्य श्रेणी क े अभ्यर्थिर्थीयों क े प्रति विबना पूवा!ग्रह क े रिरवि5यों पर काय! विकया है। इ प्रकार उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े उद्देश्यों को प्राप्त “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" करने क े लिलए राज्य द्वारा ंशोति अति या3न उ की शवि5 की ीमा में र्थीा। इ क े अति रिर[5] जै ा विक अभ्यर्थिर्थीयों ने क ! वि>या है रिरवि5यों की क ु ल ंख्या में ो परिरव !न विकया गया है और नही ही ंशो न, वह ही है।

33. मुति3 प्राति कारी ने टेक्नि_नकल असि स्टेंट ग्रेr-III की ंवग! क्षम ा को उ वर्ष! रोस्टर ं3ालन में यह अव ारिर करने क े लिलए विक _या वि>ये गये मूह अर्थीवा वग! का ेवा में मुति3 प्रति विनति त्व है, एक ईकाई क े ौर पर लिलया है। क ृ विर्ष विवभाग द्वारा जारी ंशोति अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 राज्य की शवि5 की ीमा में र्थीा। इ क े अति रिर[5] क ु ल 6628 रिरवि5यों को न ो परिरवर्ति विकया गया और न ही ंशोति विकया गया है।

34. जै ा विक पू्व! में उल्लेख विकया गया है, श्रेणीवार रिरवि5यों की क्निस्र्थीति में परिरव !न भी ंबंति विवभागों, सिज में कार्षिमक विवभाग र्थीा प्रशा विनक विवभाग क े प्रति विनति शाविमल र्थीे, की मीटिंटग हो जाने क े उपरान् विकया गया और यह पाया गया विक पूव! में श्रेणीवार रिरवि5यों की गल गणना भेजी गयी र्थीी। यवि> मूल अति या3न वि>नांविक 22.10.2013 को पुनः प्राप्त करना हो ा ो इ े श्रेणीवार “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" रिरवि5यों में अविनयविम ा उत्पन्न हो जा ी सिज क े उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े प्राव ान भंग हो जा े। इ लिलए वि>नांक 22.10.2013 प्राशा विनक विवभाग ने क ृ विर्ष विन>ेशक को ंशोति अति या3न भेजा सिजन्होंने ब>ले में इ को उ. प्र. लोक ेवा आयोग को ं ूति3 कर वि>या। विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की रिरवि5यों ंशोति अति या3न विक ी भी विनयम को भंग नहीं कर ा है, >ू री रफ, यह ंशो न विवणिभन्न श्रेणी में रिरवि5यों की गणना में ु ार करने और उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े अनुरूप विवणिभन्न श्रेणिणयों में आरक्षण क े अपेतिक्ष कोटा का पालन करने क े है। उच्च न्यायालय द्वारा इ पक्ष का मुति3 मूल्यांकन नहीं विकया गया।

35. आक्षेविप विनण!य क े प्रस् र 68 में यद्यविप उच्च न्यायालय ने ारिर विकया विक रकार को ंवग! क्षम ा को उ वर्ष! रोस्टर ं3ालन में यह अव ारिर करने क े लिलए विक _या वि>ये गये मूह अर्थीवा वग! का ेवा में मुति3 प्रति विनति त्व है, एक ईकाई क े ौर पर लिलया है, लागू करना होगा। ंशोति अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 और उ. प्र लोक ेवा आयोग का काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 क े वल उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 का अनुपालन करने “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वि>या गया र्थीा और यह ुविनतिश्च विकया जा क े विक श्रेणीवार रिरवि5यों का उल्लंघन न हो सिज को उच्च न्यायालय क े ंज्ञान में नहीं लाया गया। तिrप्लोमा ारिरयों का मायोजन

36. इ विनण!य क े प्रस् र 68 में उच्च न्यायलय ने अवलोकन विकया विक म्पूण! छल कपट तिrप्लोमा ारी की आड़ में घविट हुआ है सिज में वर्ष! 1998 में उ विवभाग में 1749 तिrप्लोमा ारी मायोजन/विनयविम ीकरण विकया गया और ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष तिrप्लोमा ारी को रखने का कोई अव र नहीं र्थीा और रिरवि5यों क े मायोजन की आड़ में पूरे खेल को ब>ल वि>या गया और इ प्रकार ामान्य श्रेणी की म्पूण! रिरवि5यों को हड़प लिलया गया है। उच्च न्यायलय ने अणिभविनण, विकया विक तिrप्लोमा ारी को ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष मायोसिज नहीं विकया जाना 3ाविहए र्थीा ाविक ामान्य श्रेणी क े ह विवज्ञाविप प>ों की ंख्या में ब>लाव न हो।

37. जै ा विक पूव! में उल्लेख विकया गया है, जो पूव! अति या3न भेजा गया र्थीा उ में अ.विप.व. क े ापेक्ष क े वल 566 रिरवि5यां >र्थिश र्थीीं जबविक वास् व में इ े 2030 “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" होना 3ाविहए र्थीा, 3ूंविक भी तिrप्लोमा ारी अ.विप.व. में न विनयु5 कर ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष विनयु5 विकया गया र्थीा। इ ं>भ! में, हम उपविन>ेशक, क ृ विर्ष (प्रणिशक्षण) द्वारा वि>नांक 17.03.2015 उच्च न्यायालय में प्रस् ु शपर्थीपत्र का ं>भ! >ेना 3ाहेगें जो उपयोगी ाविब हो क ा है, वह इ प्रकार हैः- “....राजकीय क ृ विर्ष विवद्यालय, बुलं>शहर; राजकीय क ृ विर्ष विवद्यालय, 3रगवाँ गोरखपुर; राजकीय क ृ विर्ष विवद्यालय, झां ी का ं3ालन क ृ विर्ष विवभाग द्वारा विकया जा रहा र्थीा। ये विवद्यालय >ो वर्ष,य क ृ विर्ष तिrप्लोमा प्र>ान कर रहा र्थीा और सिजन व्यवि5यों 1981- 1987 क े बी3 तिrप्लोमा विकया र्थीा उन्हें विबना विक ी 3यन क े ी े विनयु5 विकया जा क ा र्थीा। विफर भी क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 लागू होने क े बा> सिजन व्यवि5यों 1981-1987 क े बी3 तिrप्लोमा विकया र्थीा उन्हें नहीं विनयु5 विकया जा का, इ लिलए विन>ेशालय ने पत्र वि>नांविक 22-01-1998 क े माध्यम े राज्य रकार े वि>शा-विन>aश मांगा है। राज्य रकार ने अपने पत्र वि>नांविक 04-06-1998 द्वारा छ ू ट प्र>ान कर उन 1882 तिrप्लोमा ारी की विनयुवि5 हे ु विन>aश वि>या सिज में े 1749 ने 1998 क ज्वाइन कर लिलया र्थीा। 3ूंविक रिरवि5यों क े विन ा!रण क े मय अ.विप.व. क े सिजन अभ्यर्थिर्थीयों को क ृ विर्ष तिrप्लोमा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ारी क े 3ल े विनयु5 विकया गया र्थीा उनकी भी गणना अ.विप.व. क े ापेक्ष कर लिलया गया जबविक उनकी गणना अ.विप.व. क े ापेक्ष अपेतिक्ष नहीं र्थीी, इ लिलए गल गणना कारिर हुई। जो पूव! अति या3न भेजा गया र्थीा उ में अ.विप.व. क े ापेक्ष क े वल 566 रिरवि5यां >र्थिश र्थीीं जबविक वास् व में इ े 2030 होना 3ाविहए र्थीा, 3ूंविक भी तिrप्लोमा ारी अ.विप.व. में न विनयु5 कर ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष विनयु5 विकया गया र्थीा। बा> का अति या3न पूव! में विकये गये गल ी का ु ार मात्र र्थीा। विवज्ञापन की ति णिर्थी पर अ.विप.व. क े वास् व में क ु ल 2030 प> रिर[5] र्थीे जबविक गल गणना क े 3ल े 566 प>ों का विवज्ञापन वि>या गया...........”

38. वर्ष! 1998 में तिrप्लोमा ारी क े मायोजन क े मय ंबंति विवभाग में अ.विप.व. क े आरक्षण हे ु कोई प्राव ान नहीं र्थीा; क े वल उ. प्र. आरक्षण ( ंशो न) अति विनयम, 2002 क े बल पर ंबंति विवभागों क आरक्षण को बढ़ाया विकया गया इ लिलए तिrप्लोमा ारी को ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष विव3ार करना होगा। जै ा की उपविन>ेशक, क ृ विर्ष (प्रणिशक्षण) द्वारा प्रस् ु शपर्थीपत्र े विववि> हो ा है विक तिrप्लोमा ारी की गणना अ.विप.व. क े ापेक्ष अपेतिक्ष नहीं र्थीी;गल गणना क े “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" 3ल े उनको अ.विप.व. क े ापेक्ष मायोसिज कर लिलया गया है जो विवति में स्वीकाय! नहीं है _योंविक आरक्षण भू लक्षी प्रभाव नहीं प्र>ान विकया जा क ा है। ंशोति अति या3न क े माध्यम े राज्य ने इ गल ी को ु ारने की ु ार की मांग की सिज क े परिरणामस्वरूप ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष उपलब् रिरवि5यों की ंख्या में ब>लाव हुआ। इ ु ार को करने में रकार गल नहीं है और इ आ ार पर आक्षेविप विवज्ञापन को वाप लेकर नया विवज्ञापन जारी नहीं विकया जा क ा है। हमारे विव3ार में उच्च न्यायलय को इ मामले में व्यावहारिरक दृविष्टकोण अपनाना 3ाविहए और इ थ्य पर विव3ार करना 3ाविहए विक ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न क े वल ामान्य श्रेणी में तिrप्लोमा ारी क े मायोजन और अ.विप.व रिरवि5यों क े ापेक्ष मायोजन की गल ी क े ु ार क े 3ल े हुआ। _या काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 सिज में श्रेणीवार रिरवि5यों की मीक्षा की गयी, 3यन प्रविOया क े शुरू होने क े उपारान् खेल क े विनयमों को ब>लने की कोविट में आ ा है। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

39. उच्च न्यायलय ने ारिर विकया विक वि>नांक को अति या3न >ेने क े बा> रिरवि5यों की श्रेणी में ब>लाव 3यन प्रविOया क े उपरान् खेल क े विनयमों को ब>लने की कोविट में आएगा, यह स्वीकाय! नहीं है। उच्च न्यायालय ने म>न मोहन शमा! बनाम अन्य बनाम राजस्र्थीान राज्य एवं अन्य (2008) 3 ए. ी. ी. 724 का अवलम्ब लिलया। प्राइवेट प्रत्यर्थी, क े विवद्वान अति व5ा ने कर्थीन विकया विक विवणिभन्न श्रेणी की रिरवि5यों में परिरव !न अवै है और यह 3यन प्रविOया क े मध्य में खेल क े विनयमों में ब>लाव करने की कोविट में आ ा है। अपने क ! क े मर्थी!न में, विवद्वान अति व5ा ने विहमानी मल्होत्रा बनाम क े. मंजूश्री का अवलम्ब लिलया।

40. क े. मंजूश्री क े मामले में इ अपील का मुख्य विवर्षय विवज्ञापन वि>नांविक 28.05.2004 अनु रण में आन्ध्र प्र>ेश उच्च र न्यातियक ेवा में सिजला एवं त्र न्याया ीश ग्रेr (II) क े > प>ों पर 3यन र्थीा। 3यन का आ ार लिललिख परीक्षा एवं ाक्षात्कार र्थीा। ाक्षात्कार को पा करने क े लिलए कोई न्यून म अंक विन ा!रिर नहीं र्थीा। 3यन प्रविOया पूरी करने क े उपरान् ाक्षात्कार कमेटी ने 3यविन अभ्यर्थिर्थीयों की ू3ी ैयार की सिज को प्रशा विनक कमेटी ने अनुमोवि> “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" विकया। जब यह मामला पूण! पीठ क े मक्ष रखा गया ब पूण! पीठ ने मुख्य न्याया ीश को सिजला एवं त्र न्याया ीश ग्रेr (II) क े प> विनयु5 होने वाले अभ्यर्थिर्थीयों की ू3ी ैयार करने क े लिलए न्यायमूर्ति यों वाली एक कमेटी गविठ करने क े लिलए प्राति क ृ विकया। >नुरूप मुख्य न्यायमूर्ति ने >ो न्यायमूर्ति यों वाली एक उप-कमेटी गविठ की सिज ने ाक्षात्कार क े लिलए न्यून म अंक विवविह कर े हुए अभ्यर्थिर्थीयों की विनयुवि5 क े लिलए नयी ू3ी ैयार की। उप- विमति का यह म र्थीा विक लिललिख परीक्षा में न्यू म कट ऑफ अंक को लागू करने क े अलावा इ े ाक्षात्कार में भी लागू विकया जाना 3ाविहए, और जो अभ्यर्थी, इ कट-ऑफ को न प्राप्त कर पायें उन्हें अ फल घोविर्ष कर वि>या जाना 3ाविहए। इ प्रकार उप - विमति ने नयी मेरिरट ू3ी ैयार की। उन थ्यों और परिरक्निस्र्थीति यों में उच्च म न्याायलय ने उ 3यन ू3ी को अपास् कर वि>या और कहा विक जब म्पूण! 3यन प्रविOया पूरी हो गयी हो ाक्षात्कार क े लिलए न्यून म कट ऑफ अंक का य विकया 3यन प्रविOया क े लगभग पूरी हो जाने क े उपरान् खेल क े विनयमों को ब>लने की कोविट में आ ा है, जो स्वीकाय! नहीं है। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

41. विहमानी मल्होत्रा क े मामले में वि>ल्ली उच्च र न्यातियक ेवा क े लिललिख परीक्षा का परिरणाम वि>ल्ली उच्च न्यायालय द्वारा घोविर्ष नहीं विकया गया र्थीा और याति3काक ा!ओं को व्यवि5ग रूप े ूति3 विकया गया र्थीा सिज में उनको ाक्षात्कार क े लिलए 3यन की ू3ना >ी गयी। पां3 अभ्यर्थिर्थीयों को विवणिभन्न ति णिर्थीयों पर ाक्षात्कार क े लिलए बुलाया गया और उनकों इ ति णिर्थी क े स्र्थीविग विकये जाने की ू3ना >ी गयी जै े 20.09.2006 को होने वाले ाक्षात्कार को बा> में 29.11.2006, 07.12.2000[6], 23.01.2007, 05.02.2007 ति णिर्थीयों को ब>ला गया और अन् में 27.02.2007 को कराया गया। इ ी बी3 13.12.2006 को पूण! पीठ क े प्रस् ाव द्वारा ामान्य/अ.विप.व. क े अभ्यर्थिर्थीयों क े लिलए 55 प्रति श र्थीा ए. ी. एवं ए.टी. क े लिलए 50 ाक्षात्कार हे ु न्यून म कट ऑफ अंक विन ा!रिर विकया गया। इन थ्यों और परिरक्निस्र्थीति यों में न्यून म कट ऑफ अंक खारिरज कर वि>या गया _योंविक इ े 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयम ब>ल जा े है। प्रारम्भ में लिललिख परीक्षा क े लिलए न्यून म कट ऑफ अंक विन ा!रिर विकया गया र्थीा न विक ाक्षात्कार क े लिलए। ाक्षात्कार क े लिलए न्यून म कट ऑफ अंक को लिललिख परीक्षा होने क े उपरान् विवविह विकया गया सिज े अस्वीकाय! घोविर्ष कर वि>या गया। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

42. यह मामला उन मामलों े े अलग है जहां पर 3यन प्रविOया पूरी/शुरू होने क े उपरान् कट-ऑफ अंक य कर 3यन प्रविOया की रीति को ब>ला गया, जबविक व !मान मामले में उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े प्राव ानों क े अनुरूप विवणिभन्न श्रेणिणयों क े ापेक्ष प्रति श आरक्षण को ं ुष्ट करने क े लिलए विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या की क े वल गल गणना को ु ारा गया र्थीा। इ प्रकार यह नहीं कहा जा क ा है विक खेल क े विनयम में ब>लाव विकया गया। योग्य ा मानक में ब>लाव नहीं विकया गया।

43. यह भी उल्लेख करना महत्वपूण! है विक विवति का सि द्धान् विक खेल क े विनयमों को 3यन प्रविOया क े शुरु हो जाने क े बा> नहीं ब>ला जा क ा है इ बा को ेज प्रकाश पाठक एवं अन्य बनाम राजस्र्थीान उच्च न्यायालय एवं अन्य (2013) 4 ए. ी. ी. 450 पुनः विव3ार हे ु वृह> पीठ ं>र्थिभ कर वि>या गया है। ेज प्रकाश क े मामले में जब इ मामले को वृह> पीठ क े पा ं>र्थिभ विकया गया विक ब उच्च म न्यायालय ने 'खेल क े विनयमों में ब>लवाल' की परिरति की व्याख्या की जो इ प्रकार हैः- “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" “11. वे मामले जो ऐ ी परिरक्निस्र्थीति यों का ामना कर े हैं जहां पर राज्य ने विनम्नलिललिख में ब>लाव 3ाहा (1) रोजगार की मांग कर रहे अभ्यर्थिर्थीयों क े योग्य ा मानक, अर्थीवा (2) मुति3 अभ्यर्थी, को 3यन करने का ढ़ंग। बा> वाले को 3यन हे ु पालन की जाने वाली प्रविOया की ंज्ञा >ी गयी, जै े, अभ्यर्थी, द्वारा लिललिख अर्थीवा ाक्षात्कार परीक्षा में प्राप्त विकये जाने वाले न्यून म कट- ऑफ अंक विवविह करना जै ा विक क े. मुखज, बनाम आन्ध्र प्र>ेश राज्य (2008) 3 ए. ी. ी. 512 मामले में विकया गया अर्थीवा रोजगार की प्रक ृ ति े ंबंति परीक्षा े गुजरने क े लिलए अभ्यर्थिर्थीयों को बुलाना (जै े विक महाराष्ट्र ए.आर.टी. ी. बनाम राजेन्द्र भीमराव मंrेव 2001 10 ए. ी. ी. 51 क े मामले में r्राइटिंवग टेस्ट हे ु अभ्यर्थिर्थीयों को बुलाया गया)

15. इ में कोई ं>ेह नहीं है विक यह एक कल्याणकारी सि द्धान् है जो राज्य और इ की मशीनरी को खेल क े विनयमों में ब>लाव करने की अनुमति नहीं >े ा है। जहां क योग्य ा मानक को लागू विकये जाने का प्रश्न है ो ऐ ा ी. 3न्नाबा वै बनाम मै ूर राज्य ए.आई.आर. 1965 ए. ी. 1293 क े मामले में 3यन प्रविOया और इ क े परिरणाम में छेड़छाड़ े ब3ने क े लिलए विकया गया। _या “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ऐ े सि द्धान् को खेल क े विनयमों में ब>लाव क े ं>भ! में लागू विकया जाना 3ाविहए.”

44. जै ा विक पूव! में 33ा! विकया गया है, व !मान मामला क े. मुखज, (उपरो5) और विहमानी मल्होत्रा (उपरो5) े पूरी रह अलग है। तिrप्लोमा ारी को अ.विप.व. की रिरवि5यों क े ापेक्ष गल रीक े े गन ी कर ली गयी; जबविक उनकी गणना अ.विप.व. क े ापेक्ष नहीं विकया जा क ा र्थीा और ऐ ा करक े गल गणना की गयी और तिrप्लोमा ारी को ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष विगन ी कर इ को ु ारना होगा।

45. यह भी उल्लेख विकया जाना 3ाविहए विक विवज्ञापन वि>नांविक 22.10.2013 में विन>aश ंख्या 7 अनुबंति कर ा है विक रिरवि5यों की ंख्या घट अर्थीवा बढ़ क ी है। क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 स्पष्ट रूप े अनुबंति कर ा है यह राज्य रकार का विवशेर्षाति कार है विक वह विनयमों क े मु ाविब रिरवि5यों की ंख्या का विन ा!रण करे। क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 क े विनयम 15 अनु ार, भ, प्राति कारी विनयम 6 क े ह ए. ी., ए.टी., अ.विप.व. श्रेणी क े लिलए रिरवि5यों की “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ंख्या को विन ा!रिर करेगें। विनयम 6 अनुबंति कर ा है विक ए. ी., ए.टी., अ.विप.व. को आरक्षण रकारी आ>ेश क े मु ाविब प्र>ान विकया जाएगा जो विनयुवि5 क े मय प्रा ांविगक हो।

46. क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 का विनयम 15(3) फल अभ्यर्थिर्थीयों को ाक्षात्कार हे ु बुलाये जाने का उपबं कर ा है यह ध्यान रख े हुए विक विनयम 6 क े ह अपेतिक्ष आरतिक्ष श्रेणी की रिरवि5 को ध्यान में रखकर लिललिख परीक्षा क े परिरणाम की घोर्षणा क े उपरान् और प्रत्येक श्रेणी क े मुति3 प्रति विनति त्व क े लिलए क ु ल रिरवि5 का ीन गुना ाक्षात्कार क े लिलए बुलाया जाना अपेतिक्ष है। इ प्रकार ामान्य श्रेणी क े लिलए क ु ल विवज्ञाविप प>ों की ंख्या पर 3616*3=10848 अभ्यर्थी, क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 का विनयम 15(3) क े ह ाक्षात्कार हे ु पात्र र्थीे।

47. इ आक्षेविप विनण!य में उच्च न्यायलय ने अवलोकन विकया ामान्य श्रेणी की ीटों में कमी करक े ामान्य श्रेणी क े अभ्यर्थिर्थीयों क े अवै रूप े ाक्षात्कार में शाविमल होने े वंति3 विकया गया। उच्च न्यायालय ने यह भी अवलोकन विकया विक “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अ.विप.व. की ीटों को बढ़ाकर ाक्षात्कार क े लिलए अति क अभ्यर्थिर्थीयों को बुलाया गया भले ही विवज्ञापन वि>नांविक 22.10.2013 क े अनु ार वे पात्र नहीं र्थीे, इ प्रकार प्रत्येक श्रेणी में रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न करने े उन अभ्यर्थिर्थीयों क े प्रति महान पू्वा!ग्रह कारिर हुआ सिजनको ाक्षात्कार क े लिलए बुलाया जाना 3ाविहए। उच्च न्यायालय द्वारा विनकाला गया महत्वपूण! विनष्कर्ष! इ प्रकार हैः- "…इ प्रकार ामान्य श्रेणी क े लिलए क ु ल विवज्ञाविप प>ों की ंख्या पर यानी 3616*3=10848 क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 का विनयम 15(3) क े ह ाक्षात्कार हे ु पात्र र्थीे। विफर भी, पत्र वि>नांविक 20.08.2014 द्वारा प>ों की ंख्या को घटाकर, 2515*3=7545 अभ्यर्थिर्थीयों को ाक्षात्कार क े लिलए बुलाया गया, इ प्रकार 10848- 7545=3303 अभ्यर्थी, ाक्षात्कार में शाविमल होने े अवै रूप े वंति3 रह गये। हालांविक अ.विप.व. में क े वल 566 प>ों पर विवज्ञापन जारी विकया गया सिज क े ापेक्ष क े वल 1698 अभ्यर्थी, ाक्षात्कार मेंं शाविमल होने क े लिलए पात्र है। विफर भी रिरवि5यों की ंख्या 2030 अवै रूप े बढ़ाकर 6090 अभ्यर्थिर्थीयों को ाक्षात्कार क े लिलए बुलाया गया। इ प्रकार अ.विप.व. में 6090-1698=4392 अति क अभ्यर्थिर्थीयों को ाक्षात्कार हे ु बुलाया गया, भले ही वे विवज्ञापन वि>नांविक 22.10.2013 क े अनु ार ाक्षात्कार क े लिलए पात्र नहीं र्थीे। इ प्रकार रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न करने े क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" का विनयम 15(3) का उल्लंघन हो ा है। विवज्ञापन क े लंबन क े >ौरान और इ प्रकार 3303 ामान्य श्रेणी क े अभ्यर्थी, को ाक्षात्कार में शाविमल भी न होने >ेना और अ.विप.व. क े 4392 अति क अभ्यर्थिर्थीयों को 3यन हे ु विव3ार में लेना 3यन प्रविOया क े >ौरान खेल क े विनयम ब>लने की कोविट में आ ा है। …" 48.हमने इ मामले में ाव ानीपू्व!क विव3ार विकया और उच्च न्यायालय इ दृविष्टकोण े विक रिरवि5यों में ंख्या में परिरव !न कर 3303 अभ्यर्थी, ाक्षात्कार में शाविमल होने े अवै रूप े रोक कर और अ.विप.व. क े अभ्यर्थिर्थीयों को लाभ पहुं3ाया गया र्थीा, हमारा ंयम खो जा ा है। इ का भी उल्लेख विकया जाए विक रिरट याति3काएं ाक्षात्कार में क्निम्मलिल होने वाले अभ्यर्थिर्थीयों द्वारा >ायर की गयी जो अ फल हो गया र्थीे। यह ज्ञा नहीं है विक रिरट याति3काक ा!/अभ्यर्थिर्थीयों ने विक ने अंक प्राप्त विकये र्थीे और योग्य ा ू3ी उनकी _या क्निस्र्थीति र्थीी। रिरट याति3का >ायर करने वाले अ फल अभ्यर्थिर्थीयों ने यह नहीं ब ाया विक ामान्य श्रेणी अ.विप.व. श्रेणी क े रिरवि5यों में परिरव !न े क ै े वह पूवा!ग्रह रूप े ग्रसि हुए। उच्च न्यायालय व्यापक विनष्कर्ष! विनकालने में ही नहीं र्थीा विक ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष रिरवि5यों की “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ंख्या में घटाने े 3303 अभ्यर्थी, ाक्षात्कार में शाविमल होने े अवै रूप े वंति3 रह गये हैं।

49. उ. प्र. लोक ेवा आयोग द्वारा जारी अति ू3ना वि>नांविक 12.10.2014 रिरवि5यों क े ंशोति अति या3न पर आ ारिर है सिज का आ>ेश प्रशा विनक विवभाग ने वि>नांविक 20.08.2014 वि>या र्थीा। हमारे दृविष्टकोण में यह न ो 3यन प्रविOया प्रारम्भ हो जाने क े उपरान् खेल क े विनयमों को ब>लने की कोविट में आया होगा और न ही योग्य ा मानक में ब>लाव करने े इ ने 3यन प्रविOया को प्रभाविव विकया होगा।

50. प्राइवेट प्रत्यर्थी, ाक्षात्कार में शाविमल होने क े उपरान् काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 और 3यन प्रविOया को 3ुनौ ी नहीं >े क े हैं। अपीलार्थिर्थीयों की रफ े यह क ! वि>या गया विक ंशोति अति या3न वि>नांविक 12.10.2014 क े जारी होने क े उपरान् प्राइवेट प्रत्यर्थिर्थीयों ने विबना विक ी विवरो क े ाक्षात्कार में भाग लिलया और जब परिरणाम जारी विकया गया ब अ फल होने पर उन्होंने ंशोति अति या3न वि>नांविक 12.10.2014 को 3ुनौ ी >ी और इ प्रकार प्राइवेट प्रत्यर्थी, 3यन प्रविOया को 3ुनौ ी >ेने े बाति हैं। यह “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ुस्र्थीाविप विवति है विक कोई भी व्यवि5 ाक्षात्कार में भाग लेकर मुकर नहीं क ा है और 3यन प्रविOया को 3ुनौ ी नहीं >े क ा है।

51. म>न लाल एवं अन्य जम्मू कश्मीर राज्य एवं अन्य (1995) 3 ए. ी. ी. 486 क े मामले में यह अवलोकन कर विनम्नानु ार अणिभविनण, विकया विक ाक्षात्कार क े परिरणाम को उ अभ्यर्थी, द्वारा 3ुनौ ी नहीं >ी जा क ा है सिज े ाक्षात्कार में क्निम्मलिल होकर 3यन पाने का मौका विमला है और अन् में वह अ फल घोविर्ष हो गया हैः-

9. आयोग क े ंबंति >स्यों द्वारा कराये गये ाक्षात्कार में याति3काक ा! भी क्निम्मलिल हुए सिजन्होंने याति3काक ा!ओँ क े ार्थी ही ार्थी मुक>मा लड़ रहे ंबंति प्रत्यर्थिर्थीयों का ाक्षात्कार लिलया। इ प्रकार उ[5] ाक्षात्कार में क्निम्मलिल होकर 3यविन होने का अव र विमला। जब उन्होंने पाया विक वे लिललिख परीक्षा और ाक्षात्कार में अ फल हो 3ुक े हैं ो उन्होंने यह रिरट याति3का >ायर कर वि>या। अब यह ुस्र्थीाविप है विक कोई अभ्यर्थी, परिरकलिल अव र प्राप्त कर ाक्षात्कार में ाक्निम्मलिल हो ा है ब क े लव इ क े कारण अपने बा े पीछे नहीं हट क ा विक ाक्षात्कार परिरणाम उ क े अनुरूप नहीं र्थीा, और बा> में क ! >े ा है विक “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ाक्षात्कार की प्रविOया अनुति3 र्थीी अर्थीवा 3यन विमति गठन उति3 रूप े नहीं विकया गया र्थीा।.....

52. क े. ए[3]. सि राज बनाम क े रल उच्च न्यायलय एवं अन्य (2006) 6 ए. ी. ी. 395 में विनम्नु ार अणिभविनण, विकया गयाः- “73. अपीलार्थी,-याति3काक ा! इ पृष्ठभूविम पर ाक्षात्कार में क्निम्मलिल हो और जब वे अ फल हो जाएं ो अपनी बा े पलट जाएं और यह क ! >ें विक ाक्षात्कार क े लिलए न्यून म अंक का प्राव ान उति3 नहीं र्थीा...........”

53. भार ंघ एवं अन्य बनाम विवनो> क ु मार एवं अन्य (2007) 8 ए. ी. ी. 100 क े मामले में विनम्नु ार ारिर विकया गयाः- “19. 3ंद्र प्रकाश ति वारी बनाम शक ु न् ला शुक्ला (2002) 6 ए. ी. ी. 127 क े मामले में आगे अवलोकन विकया गयाः- “34. इ प्रकार कोई ं>ेह नहीं है विक आ3रण द्वारा विवबं प्रा ांविग थ्यों उत्पन्न न हो ा जबविक विवति ुस्र्थीाविप प्र ी हो ी है, कोई अभ्यर्थी, ाक्षात्कार में क्निम्मलिल हो ा है और क े वल इ कारण विक ाक्षात्कार का परिरणाम उ क े अनुक ू ल नहीं है ब वह अपनी बा े नहीं पलट क ा है और बा में क ! >े ा है विक ाक्षात्कार की प्रविOया अनुति3 र्थीी और उ प्रविOया में क ु छ कमी र्थीी। " “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" इ ी सि द्धान् को >ानन्> हलो एवं अन्य बनाम मुम ाज अली शेख एवं अन्य (2008) 4 ए. ी. ी. 619 में >ोहराकर विनम्नानु ार अणिभविनण, विकया गयाः- “59. यह भी ुस्र्थीाविप है विक फल अभ्यर्थी, अपनी बा ो े पीछे हटकर 3यन प्रविOया को 3ुनौ ी नहीं >े क े हैं। इ न्यायालय ने इ ामान्य सि द्धान् क े प्रति क ु छ अपवा> ृसिज विकये हैं। इ क्निस्र्थीति क े इ न्यायालय ने अपने द्वारा पारिर हाल क े विनण!य भार ंघ बनाम ए. विवनो> क ु मार (2007) 8 ए. ी. ी. 100 क े मामले में >ोहराया..... न्यायालय ने ओम प्रकाश शुक्ला बनाम अलिखलेश क ु मार शुक्ला 1986 प्लीमेंट्री ए. ी. ी. 285 में पारिर विकये गये विनण!य का भी ं>भ! वि>या जहां पर विवशेर्ष ौर पर यह अणिभविनण, विकया गया है विक जब कोई अभ्यर्थी, विबना विवरो क े विक ी परीक्षा में क्निम्मलिल हो ा है और बा> उ परीक्षा में स्वयं को अ फल पा ा है ब ऐ ी परीक्षा को 3ुनौ ी >ेने वाली रिरट याति3का को स्वीकार करने का प्रश्न नहीं उठेगा।..............”

54. वि>नांक 15.09.2014 क े लिललिख परीक्षा क े परिरणाम को जारी करने े पूव! राज्य रकार ने अपने शा कीय आ>ेश वि>नांविक 20.08.2014 द्वारा विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या ंशोति कर अति या3न को ंशोति विकया। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वि>नांक 12.10.2014 को उ. प्र. लोक ेवा आयोग ने काया!लय ज्ञापन जारी विकया सिज में राज्य रकार द्वारा भेजे गये अति या3न क े अनुरूप विवणिभन्न श्रेणिणयों में भेजी जाने वाली रिरवि5यों की ंख्या का उल्लेख विकया। वि>नांक 12.10.2014 को उ. प्र. लोक ेवा आयोग द्वारा प्रकाणिश काया!लय ज्ञापन इ प्रकार हैः- उ. प्र. लोक ेवा आयोग ाक्षात्कार काय!Oम माहः अ_टूबर/नवम्बर 2014 (24) काया!लय ज्ञापन

98. प>ः अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा वग! 3 (प्रोविवजनल हायक मूह-ग, क ृ विर्ष विवभाग उ. प्र. आरक्षण ामान्य-2515 ए. ी. 1882 ए.टी. 201 अ.विप.व. 2030 अ_टूबर-27,28,29,30 नवम्बर-05, 07, 10, 11, 12, 13, 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 25, 26, 27, 28, 29 वि> म्बर-01, 02, 03, 04, 05, 06, 08, 09, 10, 11, 12, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 22, 23, 24, 2014 “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" पे स्क े लः5200–20200/- रू ग्रेr पेः 2400/- रू विवज्ञापन ंख्या ए-5/ई- 1/2013 अक्निन् म ति णिर्थीः 21.11.2013 पूवा!ह्न 10.00 े पूव! वि>नांक 12.10.2014 इ प्रकार स्पष्ट है विक ाक्षात्कार में भाग लेने वाले अभ्यर्थिर्थीयों को विवणिभन्न श्रेणी में टेक्नि_नकल असि स्टेंट की रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न / मीक्षा क े विवर्षय में अच्छे े प ा र्थीा। प्राइवेट प्रत्यर्थी,/आवे>कों पूण! जागरूक ा इ जानकारी क े ार्थी क्निम्मलिल हुए विक विवणिभन्न श्रेणिणयों में ंशोति रिरवि5यां भरी जाएंगी। विबना विक ी विवरो क े ाक्षात्कार में शाविमल हो जाने क े उपरान् अभ्यर्थी, 3यन प्रविOया को इ आ ार को 3ुनौ ी नहीं >े क े हैं विक विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न विकया गया र्थीा और वे विवबं क े सि द्धान् क े आ ार पर इ को 3ुनौ ी नहीं >े क े हैं। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"

55. प्राइवेट प्रत्यर्थी, जान े र्थीे विक वि>नांक 12.10.2014 को अति ू3ना द्वारा विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न कर वि>या गया है और इ बा को जान े हुए वे विबना विक ी विवरो क े ाक्षात्कार में क्निम्मलिल होने का अव र प्राप्त विकया। ाक्षात्कार में क्निम्मलिल होने और अक्निन् म परिरणाम में अ फल होने पर प्रत्यर्थी, अपनी बा े पीछे हटकर ंशोति अति ू3ना वि>नांविक 12.10.2014 और विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या क े ंशोति अति या3न को 3ुनौ ी नहीं >े क े हैं। उच्च म न्यायलय द्वारा लिलये गये दृविष्टकोण को म्मान >े े हुए उच्च न्यायालय को प्राइवेट प्रत्यर्थिर्थीयों/याति3काक ा!ओं को विक ी भी प्रकार का अनु ोर्ष नहीं प्र>ान करना 3ाविहए र्थीा। क्षैति ज आरक्षण क े रिर[5] प>ों को उध्व! आरक्षण क े अभ्यर्थिर्थीयों द्वारा भरा गया

56. प्राइवेट प्रत्यर्थिर्थीयों ने कर्थीन विकया विक ांविवति क अपेक्षा क े अनुरूप क्षैति ज आरतिक्ष रिरवि5यां नहीं भरी गयी और उन रिरवि5यों को अन्य अभ्यर्थिर्थीयों उध्व! आरक्षण क े द्वारा भरा गया जो ांविवति क प्राव ानों क े उल्लंघन में है और म्पूण! 3यन प्रविOया को >ूविर्ष कर ा है। उ. प्र. लोक ेवा आयोग की रफ े विवद्वान अति व5ा श्री श्रीश क ु मार विमश्रा क्षैति ज श्रेणी क े लिलए आरतिक्ष रिरवि5यों की ंख्या “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" और उपयु5 पाये गये अभ्यर्थिर्थीयों की ंख्या की बाब विववरण प्रस् ु कर उन्हें उनक े अलग-अलग श्रेणिणयों में रखा है। उ[5] विववरण इ प्रकार हैः- श्रेणी रिरवि5यों की ंख्या 3यविन अभ्यर्थिर्थीयों की ंख्या मविहला 1325 156 स्व ंत्र ा ेनानी 132 45 भू पूव! ैविनक 330 -- पूण! अं े व्यवि5 84 84 भाग ः बति र व्यवि5 84 57 एक हार्थी वाले व्यवि5 42 42 एक पैर वाले व्यवि5 42 42 उ. प्र. लोक ेवा आयोग की रफ े यह क ! वि>या गया विक क्षैति ज आरक्षण क े ंबं में राज्य रकार की नीति यों में े एक नीति यह है विक क्षैति ज आरक्षण क े ऐ े प> पर आरतिक्ष रिरवि5 को भरने क े लिलए उपयु5 अभ्यर्थी, न विमले ो यह रिरवि5 अग्र ारिर हो जा ा है ब इ को ऊध्व! आरतिक्ष श्रेणी क े अभ्यर्थिर्थीयों में े उ की मेरिरट क े आ ार पर अन्य मुति3 अभ्यर्थी, द्वारा भरा जा ा है। यह क ! “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वि>या गया विक रिर[5] रह गयी क्षैति ज आरक्षण की रिरवि5यों को राज्य रकार क े नीति यों क े अनुरूप उनकी मेरिरट क े आ ार पर ऊध्व! श्रेणी क े मुति3 अभ्यर्थी, द्वारा भरा गया। उच्च न्यायालय क्षेति ज आरक्षण क े लिलए आरतिक्ष रिरवि5यों को ऊध्व! आरक्षण क े अन्य अभ्यर्थिर्थीयो े भरने क े ार्थी गल ी विनकालने में ही नहीं र्थीा। पूव! न्याय की >लील

57. प्रत्यर्थिर्थीयों ने यह क ! >ेकर उच्च न्यायालय े पूव! न्याय क े सि द्धान् क े आह्वान विकये जाने की मांग की गयी विक उच्च न्यायलय द्वारा पारिर मान विनण!य वि>नांविक 1.02.2017 में 88 याति3काएं शाविमल र्थीीं सिज े न्यायालय ने विन>aश क े ार्थी अनुज्ञा कर वि>या जो आक्षेविप विनण!य क े प्रस् र (75) वि>या गया है। इ न्यायलय क े मक्ष >ालिखल 21 अपीलों में े क े वल सिजन 6 रिरट याति3काओं में उच्च न्यायायलय ने विनण!य वि>या उनको 3ुनौ ी वि>या गया है वे रिरट याति3काएं इ प्रकार हैः rब्ल्यू.पी.(सि विवल) 38399/2015 rब्ल्यू.पी.(सि विवल) 45822/2015 rब्ल्यू.पी.(सि विवल) 47894/2015 rब्ल्यू.पी.(सि विवल) 50878/2015 ए.पी.एल.ए.rी. 283/2016 राज्य अर्थीवा अपीलार्थिर्थीयों क े द्वारा अन्य मामलों को 3ुनौ ी नहीं वि>या गया है। विवद्वान अति व5ा एम.क े. परमेश्वर “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ने कर्थीन विकया है विक जबविक अपीलार्थिर्थीयों ने 88 रिरट याति3काओं में पारिर विकये गये मान विनण!य और व !मान अपीलों को 3ुनौ ी नहीं वि>या है, क े वल rब्ल्यू.पी. (सि विवल) 34196/2015 और अन्य रिरट याति3काओं को 3ुनौ ी वि>या है, 3ूंविक अन्य रिरट याति3काओं को 3ुनौ ी नहीं वि>या गया इ लिलए वह अक्निन् म हो 3ुका है और पूव! न्याय की रह काय! कर रहा है। अपने क{ क े मर्थी!न में श्री गंगई विवनायगर मंवि>र का अवलम्ब लिलया है जहां पर उच्च म न्यायालय ने यह अणिभविनण, विकया विक जब एक या अति क वा>ों में मान विनण!य पारिर विकया गया हो और एक या अति क वा>ों में पारिर विकये गये विनण!य या तिrOी 3ुनौ ी न वि>या गया हो ब पूव! में पारिर वा> को 3ुनौ ी नहीं वि>या जा क ा है और वह पूव! न्याय की रह काय! कर ा है। इ लिलए यह क ! वि>या गया विक इ काय!वाही में पूव! न्याय का सि द्दान् उत्पन्न होगा 3ूंविक अपीलार्थिर्थीयों अन्य रिरट याति3काओं में पारिर विकये गये मान विनण!य को 3ुनौ ी नहीं वि>या है।

58. उ[5] क{ में मेरिरट का आभाव है। श्री गंगई विवनायगर मंवि>र क े मामले में ओ.ए. ंख्या 5/1978 (व्या>ेश क े लिलए वा>) ओ.ए. ंख्या 6/1978 (वा> में न ंबं ी >ावा) ओ.ए. ंख्या 7/1978 (वा> में न एवं कब्जा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" ंबं ी >ावा) क े मामले में ीन अलग अलग तिrविOयां पारिर विकया गया। अणिभ ारी ने क े वल ओ.ए. ंख्या 6/1978 में पारिर विकये गये विनण!य को 3ुनौ ी वि>या है जबविक ओ.ए. ंख्या 5/1978 और ओ.ए. ंख्या 7/1978 को 3ुनौ ी नहीं वि>या है। उच्च म न्यायलय ने उ ी मामले में अणिभविनण, विकया विक >ो तिrविOयों को 3ुनौ ी न >ेना पूव! न्याय की कोविट में नहीं आएगा। श्री गंगई विवनयागर मंवि>र क े मामले थ्यों और परिरक्निस्र्थीयों और ओ.ए. ंख्या 5/1978 और ओ.ए. ंख्या 7/1978 को 3ुनौ ी नहीं वि>ये जाने पर विव3ार कर उच्च म न्यायलय ने यह दृविष्टकोण लिलया विक ओ.ए. ंख्या 5/1978 और ओ.ए. ंख्या 7/1978 क े वा> में अपील न कर पाने क े कारण उ मामले क े अणिभ ारी- प्रत्यर्थी, पूव! न्याय क े सि द्धान् क े 3ल े उ वा> हे ुक पर पुनः वा> नहीं ला क े है।

59. यहां यह उल्लेख करना अविनवाय! है विक श्री गंगई विवनयागर मंवि>र क े मामले न्यायलय का यह अवलोकन विक क े वल एक अपील >ायर कर >ेने म्पूण! विववा> पुनः विव3ारा ीन हो जा ा है, उच्च म न्यायलय ने प्रस् र 27 में विनम्नानु ार ारिर विकया हैः- “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" “27. प्रविOयात्मक विवति और इ की बारीविकयां वर्ष{ बा> विवकसि हो ी हैं। और उनको नजरअं>ाज करने े कम महत्व >ेने े न्याय विवफल हो जा ा है। विवशेर्षकर उ मामले में जहां पर मेकीकरण आ>ेश पारिर विकया गया है वहां पर यवि> मान विनण!य वि>या जा ा है ो हमारे विव3ार में यह ही नहीं है विक एक अपील करने े पूरा विववा> विव3ारा ीन वा> की कोविट में आ जाएगा।...”

60. व !मान मामले में उच्च न्यायालय क े मक्ष एक ही बा ही बा उठायी गयी और एक ही क ! वि>या गया है। उच्च न्यायलय ने मूह याति3काओं पर विव3ार कर मान विनण!य द्वारा भी को विनस् ारिर कर वि>या। 3ूंविक इन मान विनण!यों में मान क ! वि>या गया इ लिलए हमारे मक्ष की गयी मूह अपीलें अ ंग तिrOी अर्थीवा आ>ेश का परिरणाम नहीं >ेगी _योंविक वे भी मान विनण!य े उत्पन्न हो ी है और उन भी में विनण!य क े ौर एक ही बा कही कही गयी है।

61. न्यायालय द्वारा पारिर विकये गये अनेक विनण!यों क े प्रकाश में उ[5] क{ पर विव3ार कर पाय विक यह क ! खारिरज कर वि>ये जाने योग्य है श्री णिशनाय ए}ड़ कम्पनी सिज का प्रति विनति त्व उ क े भागी>ार ने बेले श्रीविनवा राय स्ट्रीट, बंगलौर “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" एवं अन्य बनाम वाणिणज्य कर अति कारी, परिरक्षेत्र-2, बंगलौर एवं अन्य (1985) 2 ए. ी. ी. 512 क े मामले में उच्च न्यायाल ने अनेक रिरट याति3काओं को अनुज्ञा विकया। विफर भी राज्य ने क े वल उ ी मामले में अपील विकया सिज े उ[5] मामले में उच्च म न्यायलय ने अनुज्ञा विकया। उ >शा में न्यायाल ने यह दृविष्टकोण लिलया विक इ न्यायालय का विनण!य उच्च न्यायलय क े मक्ष भी विनण!यों पर बाध्यकारी है भले ही वे उच्च म न्यायलय क े मक्ष की गयी अपील में प्रत्यर्थी, न रहे हों। श्री णिशनाय ए}ड़ कम्पनी इ प्रकार अणिभविनण, विकया गयाः- “22. यद्यविप उ अति विनयम को 3ुनौ ी >े े हुए बड़ी ंख्या में रिरट याति3काएं >ालिखल की गयी विफर भी उच्च न्यायलय ने उन ब को एक ार्थी ुनकर मान विनण!य द्वारा विनस् ारिर कर वि>या। विक ी भी याति3काक ा! ने इ े 3ुनौ ी नहीं >ी। ंक्षेप में, राज्य और याति3काक ा! क े मध्य झगड़ा कोई व्यवि5ग अर्थीवा वैयवि5क विह नहीं है। अति विनयम, 1979 को 3ुनौ ी >ी गयी है उ में भी याति3काक ा!ओं ने जो आ ार लिलया है वह मान है। यह 3ुनौ ी उच्च न्यायालय द्वारा मान विनण!य द्वारा स्वीकार कर लिलया गया और यही मान विनण!य कना!टक बनाम हं ा कॉरपोरेशन वा> (1980) 4 ए. ी. ी. 697 क े मामले उच्च न्यायलय क े मक्ष विवर्षय वस् ु बन गया। जब उच्च म न्यायालय ने इ 3ुनौ ी को खारिरज कर अति विनयम को वै करार वि>या ब इ क े ब>ले में उच्च न्यायलय ने क े वल हं ा क े मामले में अपीलों को विनस् ारिर ही “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" नहीं विकया बक्निल्क आ ारहीन आ ारों पर ने याति3काक ा!ओं को परमा>ेश रिरट जारी कर कहा विक अति विनयम, 1979 ंवै ाविनक रूप े अमान्य है। इ लिलए यह क ! >ेना मूख! ापूण! है विक इ न्यायालय द्वारा प्रति पावि> विवति विक क े वल हं ा कॉपªरेशन में यह विनण!य बाध्यकारी होगा न विक उन याति3काक ा!ओं क े लिलए सिजनक े विवरूद्ध कना!टक राज्य ने अपील नहीं विकया र्थीा। ऐ ा करना ंविव ान क े अनुच्छे> 141 क े ह न्यायालय क े इ विनण!य क े बाध्यकारी प्रक ृ ति को नजरअं>ाज करना है।

26. हं ा कॉरपोरेशन क े मामले में इ न्यायालय द्वारा पारिर विनण!य भी ंबंति पक्षकारों पर बाध्यकारी है 3ाहे वह इ विनण!य क े पक्षकार हो अर्थीवा नहीं। हम स्पष्ट करना 3ाहेंगे विक जोटिंग>र सिं ह वा> ए.आई.आर. 1963 ए. ी. 913 माखनलाल वजा मामला (1971) 1 ए. ी. ी. 749 क े मामले में इ न्यायालय द्वारा विनष्कर्ष! में कोई अ ंग ा नहीं है। विनण!य में मान अनुपा है और जोटिंग>र सिं ह क े वा> में उ[5] >र्थिश कारणों क े 3ल े इ न्यायालय क े कति पय विनष्कर्ष{ का अपीलार्थी, लाभ नहीं उठा क ा है। "

62. rायरे_टर ऑफ ेटलमेंट आन्ध्र प्र>ेश एवं अन्य बनाम एम. आर. अपराओं एवं अन्य (2002) 4 ए. ी. ी. 638 उ[5] सि द्दान् ों को >ोहराकर न्यायालय ने विनम्नानु ार ारिर विकया हैः- “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" “7. जहां क प्रर्थीम प्रश्न का ंबं है ंविव ान का अनुच्छे> 141 स्पष्ट कर ा है विक उच्च म न्यायालय द्वारा प्रति पावि> विवति भार क े भी न्यायालयों पर बाध्यकारी होगा। उ[5] अनुच्चे> उच्च म न्यायालय को विवति बनाने की शवि5 प्र>ान कर ा है। इ लिलए न्यायालय का मुख्य काय! विव ानमंrल द्वारा बनेय गये विवति का विनव!3न करना है। विवति े णिभन्न थ्यों ंबं ी मामलों में न्यायालय क े कर्थीन बाध्यकारी बल नहीं रख े हैं _योंविक >ो मामलों क े थ्य मान नहीं हो क े हैं। लेविकन _या बाध्यकारी होगा यह विनण!य क े अनुपा पर विनभ!र कर ा है न विक थ्य पर। यह वही सि द्दान् है जो न्यायालय क े मक्ष विव3ार हे ु प्रश्नों क े प्रकाश में अनुपा न विक शब्> विवशेर्ष अर्थीवा वा_य विवशेर्ष गविठ करने वाले म्पूण! विनण!य को पढ़कर विनकाला गया है।......न्यायालय क े विक ी विनण!य को उन प्रश्नों क े ं>भ! में पढ़ना 3ाविहए जो उ मामले में विव3ार हे ु उत्पन्न हुए सिज में विनण!य पारिर विकया गया......इ लिलए अनुच्छे> 141 क े ह बाध्यकारी विवति उ मामले में न्यायालय द्वारा विकये गये अवलोकनों और विनण!यों क विवस् ृ है। " उ[5] विनण!य का ं>भ! >ेकर माननीय न्यायालय ने विफ>ा हु ैन एवं अन्य मुरा>ाबा> विवका प्राति करण एवं अन्य (2011) 12 ए. ी. ी. क े मामले मान सि द्धान् प्रति पावि> विकया।

63. अ फल अभ्यर्थिर्थीयों ने उच्च न्यायालय क े मक्ष कई रिरट याति3काओं क े माध्यम े ंशोति अति या3न वि>नांविक 12.10.2014 और परीक्षा परिरणाम “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" वि>नांविक 21.05.2015 को 3ुनौ ी वि>या। यह परिरणाम 22.05.2015 को जारी हुआ र्थीा। भी रिरट याति3काओं को मान विनण!य द्वारा विनस् ारिर कर वि>या गया। भी वा> विबन्>ुओँ को मान थ्यों और मान क{ पर विनस् ारिर विकया गया। इ क ! में कोई मेरिरट नहीं है विक इ न्यायालय द्वारा पारिर विनण!य क े वल रिरट - ी ंख्या 34196/2015 क े पक्षकारों पर बाध्यकारी है और इ न्यायालय द्वारा पारिर अन्य विनण!य पूव! न्याय की रह काय! करेगा। जै ै विक श्री शेनाय ए}ड़ कम्पनी अन्य विनण!यों में अणिभविनण, विकया गया विक ऐ ा करना ंविव ान क े अनुच्छे> 141 क े ह इ न्यायालय क े विनण!य की बाध्यकारी प्रक ृ ति को नजरअं>ाज करना है। फल अभ्यर्थिर्थीयों का रिरट याति3का में आक्षेप न लगाना

64. अपीलार्थिर्थीयों की ओर े कई बार कहा गया विक फल पक्षकारों पर आक्षेप न लगाना 3यविन और विनयु5 हो 3ुक े फल अभ्यर्थिर्थीयों क े अति कार प्रभाविव नहीं करेगा। इ ंबं में उच्च न्यायालय ने भार ंघ एवं अन्य बनाम ओ.3O र (2002) 3 ए. ी. ी. 146 का अवलम्ब लेकर अणिभविनण, विकया विक रिरट याति3का में भी फल अभ्यर्थिर्थीयों पर आक्षेप लगाना आवश्यक नहीं है और इ लिलए फल अभ्यर्थिर्थीयों पर आरोप न लगाना रिरट याति3का की पोर्षणीय ा को “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" प्रभाविव नहीं करेगा। अपीलार्थिर्थीयों क े विवद्वान अति व5ा ने कर्थीन विकया विक ओ. 3O र क े मामले में 3यन में >ुरा3रण क े 3ल े म्पूण! 3यन प्रविOया >ूविर्ष र्थीी और व !मान मामले में >ुरा3रण,कपट अर्थीवा अन्य कोई त्व नहीं है जो म्पूण! 3यन प्रविOया को >ूविर्ष करे। यह कर्थीन विकया गया विक प्रत्येक श्रेणी में विवज्ञाविप रिरवि5यों की ंख्या में क े वल परिरव !न क े 3ल े आगे 3यन में कमी विनकालकर उच्च न्यायालय ने स्वयं लिललिख परीक्षा क े परिरणाम का मर्थी!न विकया है।

65. मामले क े थ्यों और परिरक्निस्र्थीयों क े आ ार पर जब फल अभ्यर्थिर्थीयों क े 3यन को 3ुनौ ी >ी जा ी है ब फल अभ्यर्थिर्थीयों को ध्यान आ ा है............. … इ मामले में उच्च न्यायालय द्वारा वि>नांक 04.06.2018 रिरट याति3का (सि विवल) ंख्या 34196/015 में पारिर आ>ेश क े दृविष्टग इ प्रश्न पर हम विव3ार न कर उच्च न्यायालय ने रिरट याति3काक ा!/प्राइवेट प्रत्यर्थी, क े अति व5ा े पक्षकार क े रूप में प>ों पर आ ीन अभ्यर्थिर्थीयों पर वा> 3लाये जाने को कहा जो प्रश्नग प>ों पर 3यविन हो 3ुक े हैं। उ. प्र. लोक ेवा आयोग की पैरवी कर रहे विवद्वान अति व5ा श्री अजय क ु मार ने कर्थीन विकया वह उच्च न्यायालय को कम े कम > अभ्यर्थिर्थीयों क े नाम उनक े विववरण विह >ेना 3ाह े है इ पर न्यायालय ने आ>ेश जारी कर रिरट याति3काक ा!ओं क े अति व5ा को विन>aश वि>या विक वे उन “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" > ों अभ्यर्थिर्थीयों को नोविट जारी करें। इन थ्य और परिरक्निस्र्थीति यों में रिरट याति3का में भी फल अभ्यर्थिर्थीयों पर वा> 3लाने अर्थीवा नहीं 3लाने ंबं ी प्रश्न पर हम नहीं जाना 3ाह े हैं।

66. कर्थीन- 906 अभ्यर्थिर्थीयों को विनयुवि5 पत्र नहीं जारी विकया गया और भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 141 क े ह प्र>त्त शवि5 का प्रयोग विकये जाने की >लील >ी गयीः ाक्षात्कार क े माप्त होने क े उपरान् उ.प्र. लोक ेवा आयोग ने 6599 अभ्यर्थिर्थीयों का 3यन कर लिलया है और आयोग द्वारा इ प्रकार अनुमोवि> अभ्यर्थिर्थीयों का श्रेणीवार विनम्नव हैः क ु ल रिरवि5यां ामान्य ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. 6599 2488 1881+176 ए.टी. अभ्यर्थिर्थीयों की अनउपलब् ा क े 3ल े+2057 25 2029

67. उ.प्र. लोक ेवा आयोग ने 29 अभ्यर्थिर्थीयों क े परिरणाम को रोक वि>या है। उ.प्र. लोक ेवा आयोग द्वारा इ प्रकार विकया गया अनुमो>न उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 आरक्षण का स्वीक ृ प्रति श क े आति _य में र्थीा। वास् व में, “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" यह रिरट याति3का में 3यविन ू3ी को आक्षेविप करने क े आ ारों में े एक र्थीा। प्र ान ति3व, वैयवि5क, उ. प्र. रकार ने जवाब>ावा में कर्थीन विकया विक रिरवि5यों में विकये गये परिरव !न को उ.प्र. लोक ेवा आयोग( ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. हे ु आरक्षण) अति विनयम, 1994 की श { क े आ ार पर आगे जां3ा गया। यह पाया गया विक विवणिभन्न वग{ क े मध्य मैत्रीपू्ण! अर्थीा!न्वयन की जरूर है । प्र ान ति3व, वैयवि5क, उ. प्र. रकार ने प्रति शपर्थीपत्र में कहा विक क ु ल 6628 रिरवि5यां य प्रति श ीमा े अति क र्थीी और उ[5] शपर्थीपत्र का महत्वपूण! अंश इ प्रकार हैः- इ प्रकार श्रेणीवार रिरवि5यों की क्निस्र्थीति में पुनः परिरव !न विकया गया और माननीय उच्च न्यायालय क े आ>ेश क े अनुरूप क ु ल 6628 रिरवि5यों को प्रति श आरक्षण क े आ ार पर उपविवभासिज विकया गया है परिरणामस्वरूप सिज की घोर्षणा उ. प्र. लोक ेवा आयोग ने की वह य प्रति श ीमा े अति क र्थीा जो इ प्रकार हैः 2 प्रति श कटौ ी क े उपरान् उपलब् प> ामान्य (50%) ए. ी. (21%) ए. टी. (2%) अ.विप.व. (27%) 6628 3316 1391 132 1789 “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" इ क े उपरान्, स्व ंत्र ा ेनानी आणिश्र, भू पूव! ौविनक आणिश्र, वि>व्यांग एवं मविहला को क्षैति ज आरक्षण प्र>ान विकये जाने का आवे>न वि>या गया जो इ प्रकार हैः- स्व ंत्र ा ेनानी आणिश्र मविहला भू पूव! ौविनक आणिश्र वि>व्यांग व्यवि5 132 1325 331 252 68.क ु छ फल अभ्यर्थिर्थीयों ने विनयुवि5 पत्र जारी विकये जाने क े लिलए रिरट याति3का ंख्या 621122/2015 >ायर विकया और उच्च न्यायालय ने अपने आ>ेश वि>नांविक 15.12.2015 द्वारा अति कारिरयों को विनयुवि5 आ>ेश जारी करने का विन>aश वि>या। उच्च न्यायालय ने आगे स्पष्ट विकया विक ऐ ी विनयुवि5 और 3यविन ू3ी को ऐ े विक ी आ>ेश का पालन विकया जाना 3ाविहए सिज े ख}ड़पीठ जारी कर क े गा। उ[5] आ>ेश क े अनु रण में प्र ान ति3व, उ.प्र. रकार वि>नांक 22.12.2015 को अपने पत्र ंख्या 1161/12.04.2015 माध्यम े विवभाग को विन>aश जारी विकया विक 3यविन अभ्यर्थिर्थीयों को विनयु5 पत्र जारी विकया जाए और इ विनयुवि5 को इ न्यायालय क े अक्निन् म विनण!य का पालन करना 3ाविहए। >नुरूप वि>नांक 30.01.2016 को 3यविन अभ्यर्थिर्थीयों को विनयुवि5 पत्र जारी विकया गया जो इ प्रकार हैः- “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क्निस्र्थीति ामान्य अनु ूति3 जाति अनु ूति3 जनजाति अन्य विपछड़ा वग! क ु ल क ृ विर्ष विवभाग द्वारा जरी विनयुवि5 आ>ेश 2478 1385 22 1784 5669 उ.प्र. लोक ेवा आयोग द्वारा प्रपत्रों को रोक वि>या जाना 10 06 03 05 24 क ु ल प> 2488 1391 25 1789 5693 विनयुवि5 पत्र न जारी विकये गये अभ्यर्थिर्थीयों की ंख्या --- 490 176 240 906 यह विनयुवि5 रिरट याति3काओं क े विनण!यों पर आ ारिर र्थीी। इ प्रकार 5669 अभ्यर्थिर्थीयों को विनयुवि5 पत्र जारी विकया गया; 24 अभ्यर्थिर्थीयों क े विनयुवि5 आ>ेश “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" को रोक वि>या गया _योंविक उनक े प्रपत्रों को उ.प्र. लोक ेवा आयोग ने रोक वि>या र्थीा।

69. विवद्वान अति व5ा श्री मेहुल एम. गुप्ता ने कहा विक यद्यविप उत्तर प्र>ेश लोक ेवा आयोग ने उपलब् रिरवि5यों क े आ ार पर 6599 उम्मी>वारों की सि फारिरश की है, 906 उम्मी>वारों को छोड़ वि>या गया र्थीा और उन्हें विनयुवि5 आ>ेश जारी नहीं विकया गया र्थीा और उन्होने यह विन>aश >ेने क े लिलए प्रार्थी!ना की विक 906 उम्मी>वारों को विनयुवि5 आ>ेश जारी विकया जाए। यह ध्यान >ेने योग्य है विक कार्षिमक विवभाग द्वारा विन ा!रिर आरक्षण ीमा क े ह इन 906 उम्मी>वारों को उनकी ंबंति श्रेणी में अंति म 3यविन उम्मी>वार की ुलना में मेरिरट ू3ी में विन3ला स्र्थीान वि>या गया र्थीा, इ लिलए उन्हें विनयुवि5 आ>ेश जारी नहीं विकए गए र्थीे। इ े मनमानी या भे>भाव नहीं कहा जा क ा _योंविक उम्मी>वारों का 3यन मेरिरट लिलस्ट क े आ ार पर र्थीा। इ क े अलावा, ंशोति अति या3न वि>नांक 20.08.2014, सिज क े आ ार पर आक्षेविप काया!लय ज्ञापन स्वयं जारी विकया गया र्थीा, अत्यति क अति या3न का मामला र्थीा, जो विक उत्तर प्र>ेश आरक्षण अति विनयम, 1994 द्वारा विन ा!रिर अनुमेय ीमा े अति क र्थीा। इ अत्यति क “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अति या3न क े कारण अनुशंसि 906 अति रिर[5] अभ्यर्थिर्थीयों को पुनरीक्षण क े बा> विनयुवि5 आ>ेश जारी नहीं विकया जा का।

70. जै ा विक पहले ब ाया गया है, ंशोति अति या3न वि>नांक 20.08.2014 और यूपी लोक ेवा आयोग की ंशोति अति ू3ना ही उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े अनु ार आरक्षण की अनुमेय ीमा े अति क र्थीी। हम अति शेर्ष उम्मी>वारों को मायोसिज करने क े लिलए विन>aश पारिर नहीं कर क े _योविक उम्मी>वारों क े रूप में यह अति विनयम द्वारा विन ा!रिर अनुमेय ीमा े अति क होगा और उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े वै ाविनक प्राव ानों क े अनु ार आरक्षण की विन ा!रिर ीमा का उल्लंघन होगा। भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह शवि5 का प्रयोग कर े हुए, अगर हमें 906 उम्मी>वारों को विनयु5 करने का विन>aश जारी करना है, ो यह 50% आरक्षण की ीमा को पार कर जाएगा जो ंवै ाविनक प्राव ानों और उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 का उल्लंघन होगा। यहां क विक यह मान े हुए विक प्रति वा>ी राज्य विवणिभन्न श्रेणिणयों में मौजू>ा काय!र क्षम ा क े उति3 मात्रात्मक आँकड़ों को काया!क्निन्व करने और विवणिभन्न श्रेणिणयों क े ह रिरवि5यों की क्निस्र्थीति का प ा लगाने में ाव ान नहीं र्थीा, “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" इ को >ुहराने की कोई आवश्यक ा नहीं है विक एक गल ी को एक और गल ी करक े ठीक नहीं विकया जा क ा है।

71. यह ुस्र्थीाविप है विक 3यविन उम्मी>वारों को विनयुवि5 का कोई अपरिरहाय! अति कार नहीं है। जै ा विक विबहार राज्य और अन्य बनाम अमरेंद्र क ु मार विमश्रा (2006) 12 ए ी ी 561 में अव ारिर विकया गया र्थीा, क े वल इ लिलए विक उम्मी>वारों क े नाम अनंति म 3यन ू3ी में शाविमल विकए गए र्थीे, उन्हें विनयु5 होने का कोई अपरिरहाय! अति कार नहीं विमल ा है। क े वल इ लिलए विक उ.प्र. लोक ेवा आयोग ने 906 उम्मी>वारों क े नामों की सि फारिरश की है, उन्हें विनयुवि5 क े लिलए कोई अपरिरहाय! अति कार प्राप्त नहीं हो ा है।

72. उत्तर प्र>ेश राज्य द्वारा >ालिखल प्रति शपर्थीपत्र में यह कहा गया है विक सिजन उम्मी>वारों का 3यन विकया गया र्थीा, लेविकन विनयुवि5 पत्र जारी नहीं विकया गया र्थीा, उन्होंने रिरट याति3का ंख्या 6198 वर्ष! 2016 >ायर की और उ पर उच्च न्यायालय ने वि>नांक 02.03.2016 क े आ>ेश क े माध्यम े याति3काक ा!ओं क े पक्ष में विनयुवि5 पत्र जारी करने क े लिलए राज्य को विन>aश वि>या है। क ृ विर्ष विवभाग क े अनुरो पर, रकार ने मुख्य स्र्थीायी अति व5ा की राय लेने क े बा> आ>ेश वि>नांक 02.03.2016 को 3ुनौ ी >े े हुए ख}ड़ पीठ क े मक्ष विवशेर्ष अपील “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" >ायर की है। उ[5] विवशेर्ष अपील को 2015 क े रिरट- ी ंख्या 34196 क े ार्थी जोड़ वि>या गया र्थीा। 3ूंविक 2015 क े रिरट- ी ंख्या 34196 में, उच्च न्यायालय ने ंशोति अति या3न वि>नांक 12.10.2014 और परिरणाम को रद्द कर वि>या और लिललिख परीक्षा की घोर्षणा क े बा> की पूरी 3यन प्रविOया को रद्द कर वि>या, परिरणामस्वरूप विवशेर्ष अपील खारिरज कर >ी गई।

73. जहां क राज्य द्वारा >ायर प्रति शपर्थीपत्र में व !मान रिरवि5यों की क्निस्र्थीति का प्रश्न है वहां पर यह कहा गया है विक कु ल 4838 रिरवि5यां खाली हैं और 2050 अभ्यर्थिर्थीयों को 3यविन करने क े लिलए अगली 3यन प्रविOया भेज >ी गयी है। राज्य द्वारा न्यायालय क े मक्ष प्रस् ु प्रति शपर्थीपत्र महत्वपूण! अंश इ प्रकार हैः- “……….यह उल्लेख करना आवश्यक है विक विवभाग में व !मान मय में मौजू> क ु ल रिरवि5 4838 है, और >नुरूप 2059 अभ्यर्थिर्थीयों को 3यविन करने क े लिलए अति या3न अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा को भेज वि>या गया है। इ लिलए आज क े प्रभाव े 2779 रिरवि5 का अति या3न अब भी नहीं विकया गया है यह ध्यान रख े हुए विक 959 (906+53) प> विव3ारा ीन है सिज पर विनयुवि5 पत्र जारी नहीं विकये गये। उ[5] वर्थिण 2059 प>ों का मौजू>ा अति या3न का वग,करण इ प्रकार हैः- “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" अति याति3 रिरवि5यों की ंख्या ामान्य ए. ी/ए.टी. अ.विप.व. 2059 1031 473 555 उपरो5 रिर[5] प>ों को भरने क े उपरान् प्रति श क्षम ा क े अनुरूप उ[5] प>ों पर रिरवि5यां इ प्रकार हैः 2779 1761 534 484

74. विवद्वान अति व5ा श्री मेहुल गुप्ता ने क ु छ अभ्यर्थिर्थीयों की रफ े न्यायालय े प्रार्थी!ना विकया है भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 क े लाभकारी प्राव ानों का प्रयोग उन 906 अभ्यर्थिर्थीयों क े ार्थी हुए अन्याय को कम करने क े लिलए विकया जाना 3ाविहए सिजन्हें विनयुवि5 पत्र नहीं जारी विकये गये र्थीे। यह कर्थीन विकया गया विक अति या3न में जो कनीकी गल ी हुयी र्थीी वह आरक्षण की विवविह ीमा क े आति _य में र्थीी जो आरक्षण अति विनयम, 1996 क े ह स्वीकाय! ीमा े परे र्थीी और इ को भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 का प्रयोग कर ु ारा जा क ा है। विवद्वान अति व5ा ने कर्थीन विकया विक विवणिभन्न श्रेणिणयों जै े ए. ी., ए.टी., अ.विप.व. क े 906 अभ्यर्थिर्थीयों ने “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" फल ापूव!क लिललिख परीक्षा र्थीा ाक्षात्कार को पा लिलया है और इन फल अभ्यर्थिर्थीयों को कनीकी खाविमयों े कोई लेना >ेना नहीं है, और इ लिलए न्यायालय े प्रार्थी!ना की जा ी है विक पूण! न्याय करने क े लिलए ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 का प्रयोग विकया जाए। अपने क{ क े मर्थी!न में विवद्वान अति व5ा श्री मेहुल गुप्ता ने भार ंघ एवं अन्य बनाम परमान्> सिं ह 1999 ए. ी. ी. (एल. ए}ड़ ए.) 625 एवं rी.एम. प्रेमक ु मारी बनाम म्भागीय आयु5, मै ूर ंभाग एवं अऩ्य (2009) 12 ए. ी. ी. 267 क े मामले का अवलम्ब लिलया है।

75. इ थ्य का उल्लेख कर विक व !मान में भी 2779 रिरवि5यां है और 906 रिरवि5यां भरीं नहीं गयी हैं, विवद्वान अति व5ा श्री मेहुल गुप्ता ने कर्थीन विकया विक 906 अभ्यर्थिर्थीयों को उ ति णिर्थी पर मौजू>ा उपरो5 2779 रिरवि5यों में मायोसिज विकया जा क ा है। इ क ! में मेरिरट का आभाव है। व !मान में 4838 रिरवि5यां उपलब् हैं। 2779 रिरवि5यां भविवष्य की रिरवि5यां हैं सिज को नये अति ू3ना और 906 अभ्यर्थिर्थीयों और अन्य अ फल अभ्यर्थिर्थीयों विह भी योग्य अभ्यर्थिर्थीयों क े द्वारा भरा जाएगा। उ ति णिर्थी को मौजू>ा 2779 रिरवि5यां वर्ष! 2019 की वे रिरवि5यां “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" हैं सिजन्हें उन अभ्यर्थिर्थीयों क े द्वारा नहीं भरा जा क ा है सिजन्होंने 2013- 2014 क े विवज्ञापन क े अनु रण में 3यन हो गया है।

76. भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 141 उच्च म न्यायालय को पक्षकारों क े ार्थी न्याय करने क े लिलए विवस् ृ शवि5 प्र>ान कर ा है। यद्यविप अनुच्छे> 141 क े ह उच्च म न्यायालय को विमली शवि5 बहु विवस् ृ है, इ लिलए इ शवि5 का प्रयोग कर ऐ ा आ>ेश पारिर नहीं विकया जा क ा है जो मौलिलक विवति क े ंवै ाविनक व्य[5] प्राव ानों े अ ंग हैं। रामजी वीरजी पटेल एवं अन्य बनाम म्भागीय कर अति कारी एवं अन्य (2011) 106 ए. ी. ी.43 क े मामले में उच्च म न्यायालय ने अणिभविनण, विकया विक भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 का प्रयोग बहु ही ाव ानी े करना 3ाविहए। भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 का प्रयोग पक्षकारों क े ार्थी पूण! न्याय करने क े लिलए विकया जा क ा है। हालांविक, उच्च म न्यायालय द्वारा बार ए ोसि एशन बनाम भार ंघ एवं अन्य (1998) 4 ए. ी. ी. 409 क े मामले में यर्थीाविनण,,यद्यविप भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 की प्रक ृ ति >}ड़ात्मक है, विफर भी इ का अर्थी! यह नहीं लगाया जा क ा है विक उ शवि5 का उ मामले में लागू मौलिलक विवति की म>> करने क े लिलए विकया जा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" क ा है। प्रस् ु मामले में, यर्थीापूव! 3र्ति3, उ. प्र. लोक ेवा (ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. हे ु आरक्षण) अति विनयम, 1994 क े अनु ार रिरवि5यों क े विवविनर्षि>ष्ट प्रति श विवणिभन्न श्रेणिणयों क े लिलए आरतिक्ष विकया गया है जै े -ए. ी.-21 प्रति श, ए.टी.- 2 प्रति श, अ.विप.व.- 27 प्रति श । विक ी भी भ, में 50 प्रति श े अनति क आरक्षण की इ ंवै ाविनक स्वीक ृ ीमा को बरकरार रखा जाना 3ाविहए। भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 का प्रयोग उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े ह ंवै ाविनक प्राव ानों की म>> करने क े लिलए नहीं विकया जा क ा है। हमारे दृविष्टकोण में,भार क े ंविव ान क े अनुच्छे> 142 क े ह प्र>त्त शवि5 क े प्रयोग में राज्य रकार को 906 अभ्यर्थिर्थीयों को विनयुवि5 आ>ेश जारी करने का विन>aश नहीं जारी विकया जा क ा है।

77. विनष्कर्ष! का ारांश (1) रिरवि5यों की मीक्षा करने क े लिलए उ. प्र. लोक ेवा आयोग द्वरा जारी काया!लय ज्ञापन वि>नांविक 12.10.2014 रकार क े ंशोति अति या3न वि>नांविक 20.08.2014 पर आ ारिर है। रकार का ंशोति अति य3न वि>नांविक 20.08.2014 विवणिभन्न श्रेणिणयों की रिरवि5यों की गल गणना में ु ार करने क े लिलए और उ. प्र. लोक ेवा “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" आयोग (ए. ी. ए.टी. अ.विप.व. हे ु आरक्षण) अति विनयम, 1994 क े अनुरूप विवणिभन्न श्रेणिणयों क े लिलए अपेतिक्ष आरक्षण क े कोटे का प्रति श का अनुपालन करने क े लिलए र्थीा। (2) उ. प्र. अ ीनस्र्थी क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 क े विनयम 15 एवं 6 क े दृविष्टग भ, प्राति करण गल गणना को ु ार करने क े लिलए और उ. प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 एवं क ृ विर्ष ेवा विनयमावली, 1993 े ंग विवणिभन्न श्रेणिणयों में रिरवि5यों की ंख्या को अति याति3 करने क े लिलए श[5] है। (3) तिrप्लोमा ारिरयों को क े वल ामान्य कोटा क े ापेक्ष मायोजन अपेतिक्ष र्थीा। उच्च न्यायालय यह कहने में ही नहीं र्थीा विक तिrप्लोमा ारिरयों को ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष मायोसिज नहीं विकया जाना 3ाविहए र्थीा सिज े विक ामान्य श्रेणी क े ापेक्ष प>ों की ंख्या परिरवर्ति हो जाए। (4) विवणिभन्न श्रेणी में रिरवि5यों की ंख्या में परिरव !न उ.प्र. आरक्षण अति विनयम, 1994 क े अनु ार आरक्षण कोटा क े ंवै ाविनक अपेक्षा को ं ुष्ट करने क े लिलए है और यह 3यन प्रविOया क े शुरू हो जाने क े उपरान् खेल क े विनयमों में परिरव !न करने की कोविट में नहीं आ ा है। (5) ाक्षात्कार में क्निम्मल होकर अ फल हो जाने क े उपरान् प्राइवेट प्रत्यर्थी,/हस् क्षेपक ा! अपनी बा े पीछे नहीं हट क े हैं और ंशोति अति ू3ना वि>नांविक 12.10.2014 र्थीा अक्निन् म 3यन ू3ी वि>नांविक 21.05.2015 को 3ुनौ ी नहीं >े क े हैं। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" (6) न भरे गये क्षैति ज आरतिक्ष प>ों को उनक े उध्व! आरतिक्ष प>ों े भरना राज्य की नीति क े अनुरूप है और गल नहीं हो क ा है। (7) श्री शेनाय ए}ड़ कम्पनी बंगलौर एवं अन्य बनाम वाणिणज्य कर अति कारी, र्षिकल-2, बंगलौर एवं अन्य 1985 2 ए. ी. ी. 512 एवं विफ>ा हु ैन एवं अन्य मुरा>ाबा> विवका प्राति करण एवं अन्य 2011 12 ए. ी. ी. 615 क े मामले में पारिर विनण!य एवं अन्य विनण!यों क े दृविष्टग क े वल रिरट याति3का (सि विवल) 34196/2015 में पारिर ामान विनण!य को 3ुनौ ी >ेना और अन्य रिरट याति3काओं को 3ुनौ ी न >ेना पूव! न्याय की कोविट में नहीं आएगा।

78. परिरणामस्वरूप, रिरट याति3का (सि विवल) 34196/2015 में उच्च न्यायालय द्वारा पारिर मान आक्षेविप विनण!य वि>नांविक 10.02.2017 और मूह रिरट याति3का को अपास् विकया जा ा है और इन अपीलों को अनुज्ञा विकया जा ा है। प्राइवेट प्रत्यर्थी,/हस् क्षेपक ा! और 906 अभ्यर्थी, सिजन्हें विनयुवि5 आ>ेश नहीं जारी विकया गया और सिजन्होंने उच्च न्यायालय क े मक्ष रिरट याति3का >ायर विकया उन्हें आगामी भ, में एक बार आयु में छ ू ट प्र>ान विकया जाएगा। आयु में छ ू ट क े वल एक बार प्र>ान की जाएगी। परिरणामस्वरूप भी हस् क्षेपक ा!/... आवे>न को खारिरज विकया जा ा है। “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" …………………………….. न्यायमूर्ति आर. भानुमति ……………………………... न्यायमूर्ति ए.ए. बोपन्ना नई वि>ल्ली, वि>नांकः 30 सि म्बर, 2019 “क्षेत्रीय भार्षा में अनुवावि> विनण!य वा>ी क े अपनी भार्षा में मझने हे ु विनब@ति प्रयोग क े लिलए है और विक ी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा क ा है। भी व्यावहारिरक और रकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण!य का अंग्रेजी ंस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पा>न और विOयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।"