Uttar Pradesh State v. Viberla Corporation Limited

High Court of Allahabad · 20 Nov 2019
A. M. Khanwilkar; Vidnesh Maheshwari
Civil Appeal No 1579/2019
tax appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that the State cannot retrospectively withdraw tax exemption notifications once industrial units have relied on them and commenced production, protecting vested rights under the Uttar Pradesh Trade Tax Act, 1948.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील संख्या 1579/2019
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ...अपीलार्थी*(गण)
बनाम
मैसस2 विबरला कॉप रेशन लिलविमटेड ...प्रत्यर्थी*(गण)

े सार्थी
दीवानी अपील संख्या 1580/2019
विन ण2 य
न्यायमूर्ति ए.एम. खानविवलकर
JUDGMENT

1. इन दोनों अपीलों में लिलप्त मौलिलक प्रश्न उत्तर प्रदेश व्यापार कर अतिEविनयम, 1948 (संतिक्षप्त में, "1948 अतिEविनयम") क े ह देय कर क े संबंE में छ ू ट प्रदान करने वाली अतिEसूचना को रद्द करने क े लिलए राज्य की शविN क े विवषय में है और इस प्रकार सुविवEा को वापस लेना औद्योविगक इकाइयों क े संबंE में भी, सिRसने उत्पादन प्रारंभ विकया र्थीा और विदनांक 27 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA फरवरी, 1998 की अतिEसूचना क े श T में इस रह की छ ू ट क े अनुदान क े लिलए विनयमों का अनुपालन विकया र्थीा।

2. संक्षेप में कहा गया है विक उपयुN प्रातिEकारी ने 1948 अतिEविनयम की Eारा 5 क े ह शविN क े प्रयोग में विदनांक 18 Rून, 1997 को अतिEसूचना Rारी की, सिRसमें Eारा 5 क े प्रयोRन क े लिलए अतिEसूतिच माल होने क े लिलए वRन द्वारा 10% या उससे अतिEक फ्लाई ऐश सामग्री वाले माल की घोषणा की गई, और वRन द्वारा 10 से 30% क े बीच फ्लाई ऐश सामग्री वाले माल क े संबंE में 25% की छ ू ट और वRन द्वारा 30% से अतिEक फ्लाई ऐश सामग्री वाले माल क े संबंE में 50% की छ ू ट प्रदान करने क े लिलए इस आEार पर सिRलों में अतिEविनयम क े ह लगाये गए कर पर अतिEसूतिच विकया गया। विनय समय में, सरकार द्वारा प्राप्त प्रति वि_या यह र्थीी विक न ो राज्य क े भी र कोई नई औद्योविगक इकाई स्र्थीाविप की गई र्थीी और न ही मौRूदा इकाइयों द्वारा फ्लाई ऐश की खप बढ़ गई र्थीी। इसक े परिरणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश राज्य क े भी र स्थिस्र्थी र्थीम2ल पावर स्टेशनों द्वारा फ्लाई ऐश का कोई अति रिरN विनपटान/खप नहीं विकया Rा रहा र्थीा। दूसरे शब्दों में, छ ू ट को बढ़ाने क े लिलए अतिEसूचना Rारी करने क े लिलए स्वीक ृ उद्देश्य फलिल नहीं हुआ। इस रह की प्रति पुविi क े प्रकाश में, उपयुN प्रातिEकारी ने विदनांक 27 फरवरी, 1998 को नए सिसरे से अतिEसूचना Rारी की, सिRसमें सं. T.I.F-2- 592/XI-9 (226)94-U.P.Act-15-48-आदेश-98 को पूव[2] की अतिEसूचना को रद्द करने क े लिलए और इसक े बRाय वRन द्वारा 10% से Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 30% क े बीच फ्लाई ऐश सामग्री वाले माल क े संबंE में 25% और वRन द्वारा 30% से अतिEक फ्लाई ऐश सामग्री वाले माल क े संबंE में 50% की छ ू ट प्रदान करने क े लिलए इस आEार पर सिRलों में अतिEविनयम क े ह लगाये गए कर पर विनतिu विनयमों क े अEीन उसिvलिख है। उN अतिEसूचना इस प्रकार है: "[एस. सं. 1289] अतिEसूचना सं. T.I.F-2-592/XI-9(226)94-UP अतिEविनयम-15-48-आदेश- 98, विदनांक 27.02.1998 Rबविक, राज्य सरकार सं ुi है विक ऐसा करना साव2Rविनक विह में लाभकारक है: इसलिलए अब, उत्तर प्रदेश व्यापार कर अतिEविनयम, 1948 (1948 क े उत्तर प्रदेश अतिEविनयम सं. XV) ) की Eारा 5 क े सार्थी पवि{ उत्तर प्रदेश सामान्य खंड अतिEविनयम 1904 की Eारा 21 (1904 का उ.प्र. अतिEविनयम सं. 1) क े ह राज्यपाल की शविNयों क े प्रयोग में विदनांक 1 माच[2], 1998 से प्रभावी है: (a) विदनांक 18 Rून, 1997 की अतिEसूचना सं. TT-2-1885/XI- 9(226)/94-UP-अतिEविनयम-15-48 आदेश-97 को रद्द करने क े लिलए; (b) वRन द्वारा दस से ीस प्रति श क े बीच फ्लाई-ऐश सामग्री वाले माल पर पच्चीस प्रति श की छ ू ट और वRन द्वारा ीस प्रति श से अतिEक फ्लाई ऐश सामग्री वाले माल पर पचास प्रति श की छ ू ट प्रदान करने क े लिलए नीचे विदए गए स् ंभ-2 अनुलग्नक में उसिvलिख सिRलों में अतिEविनयम क े ह लगाये गए कर पर विनम्नलिललिख विनयम क े अEीन उN अनुलग्नक क े स् ंभ-3 में अवतिE उसिvलिख है। श • (i) ऐसे माल का विवविनमा2ण ऐसे इकाई में विकया Rाएगा Rो अनुलग्नक क े स् ंभ-2 में उसिvलिख क्षेत्र में स्र्थीाविप है; (ii) ऐसे माल का विवविनमा2ण उत्तर प्रदेश में स्थिस्र्थी ापीय विवद्यु स्टेशनों से _य अर्थीवा प्राप्त विकए गए फ्लाई-ऐश का उपयोग करक े विकया Rाएगा; Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (iii) इस अतिEसूचना क े ह छ ू ट का दावा करने वाला विव रक ऐसे अभिभलेख रखेगा सिRसमें विनम्नलिललिख सूचनाएं दर्शिश की Rाएंगी: (क) ारीख; (ख) ापीय विवद्यु संयंत्रों का नाम सिRसमें से फ्लाई-ऐश की _य अर्थीवा प्राप्त की Rा ी है (ग) फ्लाई-ऐश का वRन; (घ) विवविनर्मिम वस् ुओं का नाम; (ड़) विवविनर्मिम वस् ुओं का वRन; (च) ऐसे वस् ुओं का विवविनमा2ण में प्रयुN फ्लाई-ऐश का वRन; (छ) ऐसे माल का विवविनमा2ण में प्रयुN अन्य वस् ुओं का वRन; (iv) विवविनर्मिम माल का क ु ल वRन और प्रयुN फ्लाई-ऐश का प्रति श, Rहां क संभव हो ऐसे माल की पैकिंकग को माल पर उसिvलिख विकया Rाना चाविहए। अनुलग्नक _म सं. सिRले का नाम अवतिE सिRसक े लिलए छ ू ट की अनुमति होगी 1 2 3

1. बांदा, हमीरपुर, Rालौन, महोबा, झांसी, ललिल पुर और शाहूRी नगर। बारह वष[2]

2. अल्मोड़ा, चमोली, बागेश्वर, देहरादून, फ ेहपुर, Rौनपुर, कानपुर (देहा ), नैनी ाल, पौड़ी गढ़वाल, विपर्थीौरागढ़, सुल् ानपुर, चम्पाव; टेहरी गढ़वाल; उEम सिंसह नगर, उत्तर काशी और वृतिŽ क ें द्र। बारह वष[2]

3. (i) आRमगढ़ सिRला, अंबेडकरनगर, बहराईच, बलिलया, बाराबंकी, बस् ी, बदायूं, बुलंदशहर, देवरिरया, एटा, इटावा, दस वष[2] Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds फ ै Rाबाद, फर्रु 2 खाबाद, गाRीपुर,गोंडा, हरदोई, मैनपुरी, मर्थीुरा,मऊ, मुरादाबाद, पडरौना, पीलीभी, प्र ापगढ़, रायबरेली, रामपुर,शाहRहाँपुर, सिसŽार्थी2 नगर,सी ापुर, उन्नाव, कौशाम्बी, ज्योति बा फ ु ले नगर, महामाया नगर और श्रावस् ी। (ii) यमुना नदी क े दतिक्षणी में इलाहाबाद सिRले का क्षेत्र और सम्प्रवाही गंगा (इलाहाबाद नगर विनगम, क े अEीन शाविमल क्षेत्र को छोड़कर)। दस वष[2] (iii) ाR असमान् रभुR क्षेत्र दस वष[2] (iv) ग्रेटर नोएडा औद्योविगक विवकास क्षेत्र। दस वष[2] आगरा क े सिRले ( ाR असमान् रभुR क्षेत्र को छोड़कर), अलीगढ़ ( ाR असमान् रभुR क्षेत्र को छोड़कर ), इलाहाबाद (यमुना और गंगा नविदयों क े दतिक्षण में क्षेत्र को छोड़कर, परन् ु नगर विनगम इलाहाबाद क े ह शाविमल क्षेत्र सविह ), बरेली, भदोही, विबRनौर, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विफरोRाबाद ( ाR असमान् रभुR क्षेत्र को छोड़कर), गासिRयाबाद (ग्रेटर नोएडा औद्योविगक विवकास क्षेत्र को छोड़कर ), गोरखपुर, हरिरद्वार, कानपुर (नगर), लखीमपुर खीरी, लखनऊ, महाराRगंR, मेर{, मुRफ्फरनगर, सहारनपुर, वाराणसी, गौ मबुŽनगर, चंदौली, विमRा2पुर और सोनभद्र। स्पiीकरण:-फ्लाई-ऐश आEारिर उद्योगों द्वारा प्रयोग विकए गए फ्लाई-ऐश क े प्रति श का सत्यापन समय-समय पर Rारी सरकारी आदेशों क े आEार पर विकया Rाएगा।

3. यह अतिEसूचना विपछड़े और अविवकसिस क्षेत्रों में औद्योविगक गति विवतिEयों को बढ़ावा देने और प्रोत्साविह करने क े प्रयोRन हे ु Rारी की गई र्थीी। र्थीाविप, इस अतिEसूचना को इलाहाबाद उच्च न्यायालय (संक्षेप में, उच्च न्यायालय) क े समक्ष दायर दो रिरट यातिचकाओं में चुनौ ी दी गई र्थीी। चुनौ ी अविनवाय[2] ः इस आEार पर र्थीी विक अतिEसूचना में विनर्मिदi श T क े परिरणामस्वरूप पड़ोसी राज्यों से आया विकए गए विब_ी उत्पाद क े उत्पादकों और आपूर्ति क ा2ओं क े लिलए भेदभावपूण[2] व्यवहार विकया गया र्थीा, Rैसा विक उत्तर प्रदेश राज्य में विनर्मिम और उत्पाविद माल क े विवपरी र्थीा। इस रह क े विव रण ने भार क े संविवEान क े अनुच्छेद 301 और 304 (ए) क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds संवैEाविनक प्रावEानों का उvंघन विकया। विदनांक 29 Rनवरी, 2004 को उच्च न्यायालय क े आदेश ने उN चुनौ ी को बरकरार रखा। उत्तर प्रदेश राज्य ने उच्च न्यायालय क े उN विनण2य क े विवरूŽ अपील में मामले को आगे बढ़ाया, Rो अं ः उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम Rयप्रकाश एसोसिसएट्स लिलविमटेड ((2014) 4 एससीसी 720) में चुनौ ी की पुविi कर े हुए इस न्यायालय क े फ ै सले क े सार्थी समाप्त हुआ। इस न्यायालय ने अवEारिर विकया विक उत्तर े सिRलों में स्र्थीाविप इकाइयों में कच्चे माल क े रूप में फ्लाई ऐश का उपयोग करक े राज्य सरकार द्वारा क े वल सीमेंट विवविनमा2ण इकाइयों को विदए गए कर में छ े लिलए भार क े अनुच्छेद 301 और 304(ए) में विनविह प्रावEानों का उvंघन है। इसलिलए, न्यायालय ने आगे घोविष विकया विक अतिEसूचना पड़ोसी राज्यों की सीमेंट विवविनमा2ण इकाइयों पर भी लागू होगी, Rो कच्चे माल क े रूप में फ्लाई ऐश का उपयोग कर रहे र्थीे।

4. विदनांक 29 Rनवरी, 2004 को उच्च न्यायालय क े विनण2य क े पuा, उतिच प्रातिEकारी को विदनांक 27 फरवरी, 1998 की अतिEसूचना को रद्द करने की सलाह दी गई र्थीी। कर और पंRीकरण विवभाग क े प्रEान सतिचव ने उN अतिEसूचना को रद्द करने क े प्रस् ाव पर कार2वाई की और मंवित्रपरिरषद की विटप्पभिणयों क े लिलए प्रस् ु विकया Rो इस है: '' गोपनीय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds माननीय मंत्री परिरषद क े लिलए विटप्पभिणयाँ। विवषय: फ्लाई ऐश पर आEारिर इकाइयों को उपलब्E माफी (छ ू ट) को विनरसिस करना क ु छ सिRलों में स्र्थीाविप उद्योगों को अतिEविनयम क े ह आ{, दस, बारह वष[2] क े लिलए विदनांविक 27 फरवरी 1997 की सरकारी अतिEसूचना सं. vya.ka./592/gyarah-9(226)/94 क े अन् ग[2], व्यापार कर अतिEविनयम की Eारा 5 क े ह विनम्नलिललिख आEारों पर लगाए गए कर पर छ ू ट दी गई है- (क) Rहां फ्लाई ऐश की अं र्मिनविह वस् ु माल क े सम्पूण[2] वRन का 10% से 30% है - कर पर 25% छ ू ट। (ख) Rहां फ्लाई ऐश की अं र्मिनविह वस् ु माल क े सम्पूण[2] वRन का 30% से अतिEक है- कर पर 50% छ ू ट।

2. दनुसार विदनांविक 27 फरवरी, 1998 की सरकारी अतिEसूचना सं. vya.ka/-2-593/garaha-9 (226)94 द्वारा क ें द्रीय विब_ी कर अतिEविनयम की Eारा 8 (5) क े ह इसी रह की छ ू ट की अनुमति दी गई है। उपरोN अतिEसूचनाओं में एक श 2 विनEा2रिर की गई र्थीी विक इस रह की वस् ुओं को अनुलग्नक क े कॉलम सं. 2 में उसिvलिख क्षेत्र में स्र्थीाविप इकाइयों क े भी र विनर्मिम विकया Rाएगा और इस रह की वस् ुओं का विनमा2ण उत्तर प्रदेश में स्थिस्र्थी र्थीम2ल पावर स्टेशनों से खरीदे गए फ्लाई ऐश से विकया Rाएगा। रिरट यातिचका द्वारा माननीय े समक्ष उपरोN अतिEसूचनाओं को चुनौ ी दी गई र्थीी।

3. आयुN, व्यापार कर ने सूतिच विकया है विक रिरट यातिचका सं. 957/99M/ s बेला सीमेंट लिल. बनाम राज्य एवं रिरट यातिचका सं. 958/99 मेसस[2] Rयप्रकाश इंडस्ट्रीR बनाम राज्य में विदनांक 29.1.2004 क े आदेश द्वारा माननीय उच्च न्यायालय की न्यायपी{ ने अतिEसूचना में उसिvलिख उपरोN श T को असंवैEाविनक घोविष विकया है। यह भी उvेख विकया गया है विक उपरोN विनण2य का प्रभाव यह होगा विक छ ू ट की सुविवEा न क े वल उत्तर प्रदेश में स्थिस्र्थी उपरोN प्रकार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds की औद्योविगक इकाइयों क े लिलए उपलब्E होगी, बस्थिल्क उत्तर प्रदेश क े बाहर स्थिस्र्थी इकाई क े लिलए भी उपरोN छ ू ट उपलब्E होगी। यह भी अवग कराया गया है विक उपरोN क े संबंE में, अपर महातिEवNा ने विवतिEक राय दी है विक भविवष्य में होने वाले राRस्व हाविन क े विवचारग उN अतिEसूचनाओं को विनरसिस विकया Rा सक ा है। यविद उपरोN अतिEसूचनाओं को पूव2व्यापी प्रभाव से विनरसिस विकया Rाना है ो अध्यादेश क े माध्यम से भी ऐसा विकया Rा सक ा है। माननीय अपर महातिEवNा द्वारा दी गई विवतिEक राय क े अनुसार शीघ्र ा काय2वाही करने की सिसफारिरश की है।

4. ऐसा प्र ी हो ा है विक उपरोN अतिEसूचनाओं को छ ू ट प्रदान करने का मुख्य उद्देश्य यह र्थीा विक उत्तर प्रदेश की औद्योविगक इकाइयों को उपरोN छ ू ट क े दृविiग राज्य में खप क े लिलए उपलब्E अतिEक से अतिEक फ्लाई ऐश का उपयोग करना चाविहए। माननीय उच्च न्यायालय क े उपरोN विनण2य क े आलोक में, अब राज्य क े बाहर स्थिस्र्थी इकाई को भी छ ू ट उपलब्E की Rाएगी। इसलिलए यह उतिच है विक उपरोN अतिEसूचनाओं को विनरसिस विकया Rाना चाविहए। इस संबंE में आयुN व्यापार कर का प्रस् ाव उतिच प्र ी हो ा है।

5. इसलिलए यह प्रस् ाविव है विक फ्लाई ऐश पर आEारिर उद्योगों पर लागू छ ू ट से संबंतिE व्यापार कर अतिEविनयम की Eारा 5 और क ें द्रीय विब_ी कर अतिEविनयम की Eारा 8 (5) क े ह Rारी अतिEसूचनाओं को विनरसिस कर विदया Rाना चाविहए।

6. विवत्त विवभाग ने उपरोN प्रस् ाव को सहमति व्यN की है।

7. कानून विवभाग ने यह विवचार व्यN विकया है विक यह अपर महातिEवNा द्वारा सलाह दी गई र्थीी विक राRस्व हाविन को रोकने की विदनांविक 22.7.1998 अतिEसूचना को विनरसिस विकया Rा सक ा है। उपरोN क े दृविiग, आक्षेविप अतिEसूचनाओं को विनरसिस करने की काय2वाही विवतिEक रूप से संभव है।

8. माननीय मंत्री ने इन विटप्पभिणयों की Rांच की।

9. माननीय क ै विबनेट क े आदेश पर उपरोN प्रस् र 5 पर प्रार्थी2ना की गई है। एसडी / (री ा सिसन्हा) प्रEान सतिचव कर और पंRीकरण विवभाग फ़ाइल सं. 9 (63)/2001 लखनऊ विदनांक 19 अगस्, 2004” (प्रभाव वर्तिE ) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

57,998 characters total

5. राज्य क े उपयुN प्रातिEकारी ने अं ः उN प्रस् ाव पर विनण2य लिलया, सिRसक े परिरणामस्वरूप 14 अक्टूबर, 2004 को एक अतिEसूचना Rारी की गई, सिRसमें 27 फरवरी, 1998 की पूव[2] अतिEसूचना को रद्द कर विदया गया। उN अतिEसूचना इस प्रकार है- “अतिEसूचना No.KA.I.-2-2996/XI-9(63)/2001-अतिEविनयम, 74-56 आदेश- (38) 2004 लखनऊ विदनांविक:: 14 अक्टूबर, 2004 Rबविक, राज्य सरकार सं ुi है विक साव2Rविनक विह में ऐसा करना समीचीन है। इसलिलए, अब क ें द्रीय विब_ी कर अतिEविनयम, 1956 (1956 क े अतिEविनयम सं.

74) की Eारा 8 की उप-Eारा (5) सपवि{ साEारण खण्ड अतिEविनयम 1897 (1897 की अतिEविनयम सं 10) की Eारा 21 की शविNयों क े प्रयोग में राज्यपाल द्वारा सरकारी अतिEसूचना सं. T.I.F-2-593/X-9 (226)/94- Act-74-56-Order-98, विदनांविक 27 फरवरी 1998 को विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से रद्द होने विकया Rा ा है। (प्रभाव वर्तिE )

6. यह अतिEसूचना व 2मान काय2वाही में चुनौ ी का विवषय है।

7. संबंतिE अपीलों में प्रत्यर्शिर्थीयों ने यह कह े हुए अलग -अलग रिरट यातिचकाओं को प्रार्थीविमक ा दी विक विदनांक 27 फरवरी, 1998 की अतिEसूचना क े आEार पर विह Eारकों क े प्रति विनतिEत्व क े कारण, उन्होंने विनर्मिदi वस् ुओं का उत्पादन प्रारम्भ विकया र्थीा और उN अतिEसूचना क े ह प्रदान की गई अपेतिक्ष श T का अनुपालन कर े हुए उन्हें उत्तर प्रदेश कर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds सुविवEा का लाभ उ{ाने का अतिEकार विदया र्थीा। उन्होंने 14 अक्टूबर, 2004 को आक्षेविप अतिEसूचना क े प्रभाव में आने से पहले वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ विकया र्थीा। हालांविक, कभिर्थी अतिEसूचना क े प्रभाव में आने क े कारण उन्हें उस छ ू ट से वंतिच विकया गया है Rो वे दस साल क अर्जिR कर सक े र्थीे।

8. प्रति वादी क े दीवानी अपील सं. 1579/2019 - मेसस[2] विबड़ला कॉप रेशन लिलविमटेड (संक्षेप में, 'बीसीएल') मामले में कारखाने को उN प्रति वादी द्वारा रायबरेली में स्र्थीाविप विकया गया र्थीा और इसने विदनांक 14 विदसंबर, 1998 से वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ विकया र्थीा। Rैसा विक उN प्रति वादी ने विदनांक 27 फरवरी, 1998 की अतिEसूचना में विनर्मिदi सभी श T का अनुपालन विकया र्थीा, इसने विदनांक 14 विदसंबर, 1998 से 13 अक्टूबर, 2004 क छ ू ट की सुविवEा का लाभ उ{ाया। यह दस साल की अवतिE क े लिलए उस सुविवEा का लाभ उ{ाना Rारी रख सक ा र्थीा Rैसे विक, विदनांक 13 विदसंबर, 2008 क, लेविकन विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 को आक्षेविप अतिEसूचना Rारी होने क े कारण यह व्यवस्र्थीा बातिE हो गई। अन्य शब्दों में, बीसीएल क े प्रति वादी को छ ू ट से वंतिच करने की अवतिE विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से 13 विदसंबर, 2008 क है।

9. प्रति वादी क े दीवानी अपील सं. 1579/2019 - मेसस[2] विबड़ला कॉप रेशन लिलविमटेड (संक्षेप में, 'बीसीएल') मामले में, यह राज्य क े बाहर अपने कारखाने का संचालन कर रहा र्थीा और विदनांक 27 फरवरी, 1998 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds की अतिEसूचना में विनर्मिदi श 2 क े कारण, ने उN अतिEसूचना को चुनौ ी दी र्थीी सिRसे पूव N में, उच्च न्यायालय और बाद में इस न्यायालय द्वारा बरकरार रखा गया र्थीा। उN विनण2य क े संदभ[2] में, यह प्रति वादी अपना व्यवसाय Rारी रख सक ा र्थीा और छ ू ट का लाभ भी उ{ा सक ा र्थीा, लेविकन विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 को Rारी आक्षेविप अतिEसूचना क े लिलए। हालाँविक, उN प्रति वादी (Rेपीएल) रिरट यातिचका सं. 958/1999 (कर) क े आदेश विदनांविक 29 Rनवरी, 2004 क े द्वारा उच्च न्यायालय क े समक्ष सफल होने क े बावRूद एहति या न इसने कर छ ू ट सुविवEा से संबंतिE विकसी भी विववाद या विववाद से बचने क े लिलए विदनांक 27 फरवरी, 1998 की विनर्मिदi अतिEसूचना में अपने क्षेत्र में एक कारखाना स्र्थीाविप करने का फ ै सला विकया। उस फ ै सले क े चल े, आवश्यक स्वीकारोविN प्राप्त करने क े पuा, उN प्रति वादी (Rेपीएल) ने विदनांक 18 सिस ंबर, 2004 से उत्तर प्रदेश राज्य में अतिEसूतिच क्षेत्र में स्र्थीाविप कारखाने में वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ विकया और 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना की श T में, दस साल की अवतिE क े प्रचलन में, यानी 17 सिस ंबर, 2014 क क े लिलए छ ू ट सुविवEा का लाभ उ{ाने का हकदार बन गया। हालाँविक, विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 की हस् क्षेप की अतिEसूचना क े कारण, उN प्रति वादी (Rेपीएल) को उस सुविवEा से वंतिच कर विदया गया है, भले ही उसने उत्तर प्रदेश राज्य में अतिEसूतिच क्षेत्र क े भी र एक नया कारखाना स्र्थीाविप करने क े लिलए लगभग 100 करोड़ रूपये का विनवेश विकया है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

10. इस पृष्ठभूविम में, दोनों प्रत्यर्शिर्थीयों ने उच्च न्यायालय क े समक्ष Rोर दे े हुए अलग-अलग रिरट यातिचकाएं दायर कीं, सिRसमें कहा गया विक राज्य विदनांक 27 फरवरी, 1998 और 14 अक्टूबर, 2004 की आक्षेविप अतिEसूचना की श T में विकए गए वादे या प्रति विनतिEत्व को अस्वीक ृ नहीं कर सक ा र्थीा। इसलिलए, वचनबŽ विवबंEन क े अEम[2] क े अति _मण से प्रभाविव हुआ। यह दावा विकया गया र्थीा विक राज्य अपनी काय2कारी शविN क े प्रयोग में, उत्तर प्रदेश राज्य में नाविम क्षेत्रों क े भी र उद्योग की स्र्थीापना को आकृ i करक े विकए गए वादे को अस्वीकार नहीं कर सक ा और इस प्रवि_या में, पूव2व्यापी प्रभाव क े सार्थी छ ू ट की सुविवEा को वापस ले सक ा है। यह क े वल विवEातियका द्वारा उस विवतिE में एक कानून बनाकर अर्थीवा अध्यादेश Rारी करक े विकया Rा सक ा है Rैसा विक ऊपर उसिvलिख मंवित्रपरिरषद को प्रस् ु नोट में सुझाया गया र्थीा। यह भी दावा विकया गया र्थीा विक, वास् व में, Rैसा विक विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 को Rारी अतिEसूचना में विनर्मिदi विकया र्थीा विक यह Rारी होने की ारीख से लागू होगा। इस बा का कोई संक े नहीं है विक उN अतिEसूचना Rारी करने क े पीछे का उद्देश्य उन विह Eारकों की सुविवEा को वापस लेना र्थीा, सिRन्होंने पहले ही अपनी औद्योविगक इकाइयों की स्र्थीापना की र्थीी और विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से पहले वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ विकया र्थीा। चुनौ ी का Rोर यह र्थीा विक 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना को रद्द करने का विनण2य विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से और पड़ोसी राज्यों में अन्य औद्योविगक इकाइयों को स्र्थीाविप करने वाले उद्योग क े लिलए उच्च न्यायालय क े विनण2य क े अनुसार छ ू ट को बंद करना Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds र्थीा। हालाँविक, उस विनण2य को उन उद्योगों, सिRन्होंने विदनांक 27 फरवरी, 1998 क े पuा परन् ु 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] उत्तर प्रदेश राज्य में विनर्मिदi क्षेत्रों क े भी र वाभिणस्थिज्यक उत्पादन शुरू कर विदया र्थीा, क े विवरूŽ लागू अर्थीवा बाध्य नहीं विकया Rा सक ा। विकसी भी अन्य दृविiकोण को लेने से परिरणाम ः 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना को पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव विदया Rाएगा। यह कानून में अस्वीकाय[2] है।

11. रिरट यातिचकाक ा2ओं ने यह भी क 2 विदया विक विकसी भी मामले में, राज्य सरकार पूव2व्यापी प्रभाव क े सार्थी छ ू ट की सुविवEा को विनरस् ीकरण करने और वापस लेने क े लिलए अपरिरहाय[2] पय2वेक्षण परिरस्थिस्र्थीति यों का मामला बनाने पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य में विवफल रही र्थीी। थ्य यह है विक उच्च न्यायालय ने राज्य क े विवरूŽ मुद्दे का फ ै सला विकया और पड़ोसी राज्यों में अन्य औद्योविगक इकाइयों क े लाभ को विवस् ारिर विकया, थ्य यह है विक उच्च न्यायालय ने राज्य क े विवरूŽ इस मुद्दे का फ ै सला विकया और पड़ोसी राज्यों में अन्य औद्योविगक इकाइयों क े लाभ को लाभ बढ़ाया, स्वयं द्वारा 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना से प्रति बŽ अतिEविनयम को न्यायोतिच {हराने क े लिलए एक पय2वेक्षण परिरस्थिस्र्थीति क े आEार पर कम नहीं हो सक ा है।

12. अपीलार्थी*-राज्य ने उच्च न्यायालय क े समक्ष शपर्थीपत्र दायर करक े रिरट यातिचकाओं का विवरोE विकया र्थीा। उच्च न्यायालय क े समक्ष राज्य द्वारा अविनवाय[2] रूप से लिलया गया आEार यह र्थीा विक राज्य क े पास 27 फरवरी, Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 1998 की अपनी अतिEसूचना को रद्द करने और पय2वेक्षण परिरस्थिस्र्थीति यों क े कारण सभी औद्योविगक इकाइयों को छ ू ट की सुविवEा को वापस लेने की शविN र्थीी। उस शविN को लागू करने का प्रभाव अविनवाय[2] ः 29 Rनवरी, 2004 विदनांविक क े इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े फ ै सले क े कारण र्थीा और पड़ोसी राज्यों में औद्योविगक इकाइयों क े दावों को सत्याविप करने में राज्य की अक्षम ा Rो राज्य क े प्रातिEकारिरयों क े प्रादेभिशक क्षेत्रातिEकार से परे र्थीी।

13. उच्च न्यायालय ने आक्षेविप विनण2य द्वारा प्रर्थीम ः यह अवEारिर विकया विक राज्य ने 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में विनर्मिदi अन्य श T क े सार्थी अनुपालन कर े हुए राज्य क े भी र प्रातिEक ृ क्षेत्रों में उत्पाविद विनर्मिदi वस् ुओं पर छ ू ट क े विवषय में आश्वासन विदया र्थीा। इसक े बाद यह अवEारण विकया गया विक भार ीय संदभ[2] में राज्य सरकार और भार ीय न्यायशास्त्र विकसी अन्य विनRी पक्ष या व्यविN की रह वचनात्मक विवबंEन क े सिसŽां क े लिलए उत्तरदायी र्थीा। उस खोR पर, उच्च न्यायालय ने विनष्कष[2] विनकाला विक विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 को Rारी अतिEसूचना औद्योविगक इकाइयों क े दावे क े रूप में न्यातियक Rांच योग्य ा क े परीक्षण पर आEारिर नहीं कर सक ी Rो पहले से ही राज्य में नाविम क्षेत्र क े भी र स्र्थीाविप विकए गए र्थीे और विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] कभिर्थी माल का वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ विकया गया र्थीा। इसने राज्य सरकार द्वारा लिलए गए आEार को भी अस्वीक ृ कर विदया विक अन् र्मिवरोEी लोकविह क े कारण ऐसा करना न्यायोतिच र्थीा और परिरणामस्वरूप संबंतिE प्रत्यर्शिर्थीयों द्वारा वरीय ा दी गई Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds रिरट यातिचकाओं को अनुमति दी गई र्थीी। उच्च न्यायालय द्वारा अभिभलिललिख विनष्कष[2] इस प्रकार है:- “सारांश

121. अन् र्मिवरोEी लोकविह में क े वल प्रति शपर्थीपत्र में अभिभवचन द्वारा स्र्थीाविप नहीं विकया Rा सक ा। विवतिE की आवश्यक ा को पूरा करने क े लिलए यह पया2प्त नहीं होगा। न्यातियक समीक्षा क े दौरान अन् र्मिवरोEी लोकविह की प्रवि_या में राज्य सरकार द्वारा उपलब्E कराये गये थ्यों क े आEार पर विवविनण* विकया Rाना चाविहए। यह स्र्थीाविप करने क े लिलए कु छ भी अभिभलेख में दR[2] नहीं विकया गया है विक सरकार ने पूव[2] की अतिEसूचना को और अतिEक प्रति संहरण क े लिलए प्रेरिर विकया और Rब स्थिस्र्थीति को नहीं बदला गया ब फ्लाईऐश र्थीम2ल पावर स्टेशनों द्वारा प्रदत्त पारिरस्थिस्र्थीति क ख रा बना रह ा है।

122. चूंविक, आक्षेविप अतिEसूचना को Rारी करने से पूव[2] यातिचकाक ा2 ने टांडा में कारखाने की स्र्थीापना प्रारम्भ कर दी र्थीी, माननीय सव च्च न्यायालय विवशेष ः कल्याणपुर सीमेंट लिलविमटेड (उपरोN) क े विनण2य की श्रंखला क े दृविiग आकर्मिष वचनात्मक विवबंEन का सिसŽान् सार्थी ही विवश्व व्यापी विवतिE क े प्रस् ाव को विनEा2रिर विकया गया, यह विवचारों की उपयुN ा और प्रशासन में लोगों क े विवश्वास को बनाए रखने क े लिलए, आम ौर पर सरकार को अपने आश्वासन या वादे का पालन करना चाविहए और विकसी व्यविN को इस रह क े आश्वासन से उपलब्E लाभ से वंतिच नहीं विकया Rाना चाविहए, यविद इस पर कार2वाई की Rाए। यद्यविप सरकार को अपनी नीति बदलने का अतिEकार प्राप्त है परन् ु वह भी न्यातियक समीक्षा क े अEीन है और न्यायालयों को यह सुविनतिu करने की पया2प्त शविN प्राप्त है क्योंविक नीति परिरव 2न क े कारण नागरिरक क े मौलिलक या वैEाविनक अतिEकारों का उvंघन नहीं विकया Rा ा है। न्याय क े विह में न्यायालयों द्वारा वचनात्मक विवबंEन क े सिसŽां क े ह समान राह दी Rा सक ी है।

123. कर छ ू ट क े संबंE में आक्षेविप अतिEसूचना को प्रत्याभिश प्रभाव विदया Rाना चाविहए। इस प्रकार, सिRन उद्योगों को 27.2.1998 विदनांविक की अतिEसूचना में विदए गए आश्वासन पर अवलम्ब ले े हुए स्र्थीाविप और उत्पादन शुरू विकया गया र्थीा, वे उस अवतिE क े लिलए कर छ ू ट क े हकदार हैं, Rो उत्पादन क े समय अर्थीवा आक्षेविप अतिEसूचना Rारी करने से पहले हकदार र्थीे।

124. उपरोN क े दृविiग, रिरट यातिचका को आंभिशक रूप से अनुमति दी Rानी चाविहए और यातिचकाक ा2 27.2.1998 विदनांविक की मूल अतिEसूचना Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds क े मद्देनRर कर छ ू ट क े लाभ क े हकदार प्र ी हो े हैं। हालांविक, इस विवषय पर विवतिE को ध्यान में रख े हुए विक सरकार को एक रफ नीति को बदलने का अतिEकार विमला है और दूसरी ओर यातिचकाक ा2 क े अतिEकार को प्रत्याभिश रूप से आक्षेविप अतिEसूचना को लागू कर े हुए संरतिक्ष विकया Rा सक ा है, वचनात्मक विवबंEन क े ह उपलब्E अतिEकार को प्रत्याभिश रूप से आक्षेविप अतिEसूचना लागू कर े हुए संरतिक्ष विकया Rा सक ा है। आक्षेविप अतिEसूचना को रद्द करने की प्रार्थी2ना को अस्वीक ृ कर विदया गया और राह को दनुसार ढाला Rा ा है। आदेश

125. विदनांक 27.2.1998 की मूल अतिEसूचना क े ह उपलब्E अवतिE क े लिलए कर छ ू ट क े लिलए याची क े पात्र ा की सीमा क रिरट यातिचका की अनुमति दी गई है। दनुसार, परमादेश की प्रक ृ ति में एक रिरट विवपरी पक्षों को विनदºभिश कर े हुए यातिचकाक ा2 को कर में छ े लिलए Rो मूल अतिEसूचना 27.2.1998 विदनांविक क े ह पात्र ा की अवतिE क े लिलए उत्पादन की ति भिर्थी से Rारी की Rा ी है। आंभिशक रूप में रिरट यातिचका को अनुमति दी Rा ी है। लाग सहR है।"

14. उत्तर प्रदेश राज्य ने उच्च न्यायालय क े विनण2य को क 2 प्रस् ु विकया है। राज्य की ओर से विदया गया क 2 विवतिEक स्थिस्र्थीति को स्वीकार कर ा है भले ही राज्य सरकार को छ ू ट की सुविवEा वापस लेने क े लिलए काय2कारी शविN प्रदान की गई हो यह विवतिE क े न्यायालय क े समक्ष औतिचत्य देने क े लिलए आभारी है विक परिरस्थिस्र्थीति यां इ नी अपरिरहाय[2] र्थीीं विक वचनबŽ रहना सरकार क े लिलए अन्यायपूण[2] होगा। अन्य शब्दों में, आक्षेविप अतिEसूचना 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक क े पीछे का अभिभप्राय अन् र्मिवरोEी साव2Rविनक विह से परिरपूण[2] र्थीा। इसे पुi करने क े लिलए, राज्य ने विनम्नलिललिख कारणों पर अवलम्ब लिलया है, सिRन्हें अन् र्मिवरोEी साव2Rविनक विह क े लिलए कहा गया है: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds “i). समान यातिचकाक ा2ओं द्वारा अभिभयोग क े प्रर्थीम दौर में इलाहाबाद उच्च े 29.01.2004 विदनांविक क े फ ै सले ने 27.02.1998 विदनांविक की अतिEसूचना सं. 1 की श 2 को रद्द कर विदया गया र्थीा, सिRसक े द्वारा उत्तर े बाहर स्थिस्र्थी इकाइयों को भी कर छ ू ट का हकदार बनाया गया र्थीा। दनन् र इस विनण2य की पुविi माननीय न्यायालय ने की र्थीी, सिRसक े विनण2य का प्रति वेदन 12.04.2004 विदनांविक को (2014) 4 SCC 720 उत्तर प्रदेश एवं अन्य बनाम Rय प्रकाश एसोसिसएटेड लिलविमटेड आविद क े रूप में की। ii). विनण2य क े प्रभाव ने कर छ ू ट देने में साव2Rविनक विह को शून्य कर विदया। iii). उत्तर प्रदेश राज्य क े बाहर संचालिल इकाइयों की फ्लाई ऐश खप और स्रो का प ा लगाने क े लिलए राज्य का कोई प्रादेभिशक क्षेत्रातिEकार नहीं र्थीा। iv). विदनांक 14.09.1999 और 27.08.2003 को भार सरकार की अतिEसूचनाओं क े संदभ[2] में फ्लाई ऐश क े उपयोग को बढ़ावा विदया गया, सार्थी ही 2003 से 2005 क Rनविह यातिचका में माननीय विदvी उच्च न्यायालय द्वारा विदए गए विनदºश भी विदया गया। राज्य अपने उपयोग को बढ़ावा देकर फ्लाई ऐश क े विनपटान क े लिलए सभी कदम उ{ा रहा र्थीा। v). भविवष्य की राRस्व क्षति ।”

15. ब यह Rोर विदया Rा ा है विक उच्च न्यायालय ने इनमें से प्रत्येक कारणों का सावEानीपूव2क विवश्लेषण नहीं विकया है, छ ू ट की सुविवEा प्रदान करने वाली अतिEसूचना को रद्द करने क े लिलए शविN क े प्रयोग को न्यायोतिच {हरा े हुए सभी कारणों का बहु कम प्रभाव है। यह भी क 2 विदया गया है विक प्रत्यर्शिर्थीयों द्वारा सेवा में दबाए गए विनण2यों को सामान्य स्थिस्र्थीति पर लागू विकये Rाएँगे Rहां राज्य सरकार द्वारा वचनबŽ विवबंEन क े सिसŽां को लागू विकया गया है, लेविकन उसी क े पास विवचाराEीन अतिEसूचना क े लिलए कोई आवेदन नहीं होगा Rो अन् र्मिवरोEी लोकविह का परिरणाम र्थीा। दूसरे शब्दों में, वचनबŽ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विवबंEनऔर विनविह /अर्जिR अतिEकारों क े सामान्य सिसŽां का अन् र्मिवरोEी लोकविह क े मामले में कोई आवेदन नहीं है।

16. अं में, यह आग्रह विकया Rा ा है विक यविद रिरट यातिचकाक ा2ओं - प्रत्यर्शिर्थीयों को यहां भी सफल होना र्थीा, ो छ ू ट का अतिEकार इस थ्य पर विनभ2र करेगा विक क्या उत्तरदा ाओं ने स्वयं दावा की गई राभिश का भुग ान विकया है और अपने उपभोNाओं पर पूण[2] या आंभिशक रूप से बोझ पर पारिर नहीं विकया है, Rैसा विक मामला हो सक ा है। विनर्मिदi अवतिE क े लिलए 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना की प्रयोज्य ा क े परिरणामस्वरूप Eनवापसी का दावा इस मूलभू थ्य को स्र्थीाविप करने पर विनभ2र करेगा विक प्रत्यर्शिर्थीयों ने अपने उपभोNाओं को कर बोझ क े अनुरूप पारिर नहीं विकया र्थीा। उपरोN प्रस् ुति याँ को पुi करने क े लिलए इस न्यायालय क े विनण2यों पर Rम्मू और कश्मीर राज्य बनाम वित्रक ु टा रोलर फ्लोर विमल्स प्रा. लिलविमटेड एवं अन्य ((2018) 11 एससीसी 260); सेल्स टैक्स ऑविफसर एवं अन्य बनाम श्री दुगा2 ऑयल विमल्स एवं अन्य ((1998) 1 एससीसी 572); और श्री विदलिग्वRय सीमेंट क ं पनी लिलविमटेड एवं अन्य बनाम यूविनयन ऑफ इंतिडया एवं अन्य ((2003) 2 एससीसी 614) का अवलम्ब लिलया गया है।

17. इसक े विवपरी, प्रत्यर्थी* 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना को अपनी चुनौ ी बनाए रखने क े लिलए उच्च न्यायालय द्वारा विदए गए कारणों को अपनाएंगे। यह क 2 विदया गया है विक 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना को पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव क े रूप में विनर्मिम नहीं विकया Rा सक ा है और विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से पहले ही स्र्थीाविप और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds प्रारम्भ की गई इकाइयों पर लागू हो ा है। 1948 अतिEविनयम की Eारा 5 पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव क े सार्थी मौRूदा अतिEसूचना को रद्द करने क े लिलए काय2कारी पर कोई शविN प्रदान नहीं कर ी है। उस विदशा में विनवेश की गई शविN क े अभाव में, यह 1948 अतिEविनयम की Eारा 5 अर्थीवा सामान्य खण्ड अतिEविनयम 1897 की Eारा 21 (संक्षेप में, “ 1897 अतिEविनयम”) अर्थीवा सामान्य खण्ड अतिEविनयम 1904 की Eारा 21 (संक्षेप में, “1904 अतिEविनयम”) क े संदभ[2] में काय2कारिरणी को ऐसा करने क े लिलए नहीं है। 1948 क े अतिEविनयम की Eारा 5(2) ने प्रत्यर्शिर्थीयों को क 2 प्रस् ु करने क े लिलए प्रबलिल विकया है विक विवEातियका ने अपनी अतिEसूचना को पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव देने क े लिलए राज्य अर्थीवा काय2कारी में विकसी भी प्रातिEकारी को शाविमल नहीं विकया है, मौRूदा अतिEसूचना को उपEारा (2) क े विवपरी रद्द कर े हुए, Rो स्पi ः अतिEसूचना से पूव[2] एक ति भिर्थी से प्रभावी रूप से सार्थी छ ू ट की अनुमति प्रदान कर ा है। पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव वाली अतिEसूचना Rारी करने क े लिलए काय2कारी में बहु कम, अं र्मिनविह या मौन प्रातिEकार नहीं है। इस दलील क े समर्थी2न में, इस े विनण2यों काज़ी ल्हेंदुप दोरRी बनाम सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्थिस्टगेशन एवं अन्य ((1994) Suppl. (2) एससीसी 572) और इंडस्थिस्ट्रयल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेन्ट कॉप रेशन (ग्वालिलयर) मध्य प्रदेश लिलविमटेड बनाम कविमश्नर ऑफ इन्कम टैक्स, ग्वालिलयर, मध्य प्रदेश ((2018) 4 एससीसी 494) पर अवलम्ब लिलया गया है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

18. व 2मान मामले में यह क 2 प्रस् ु विकया गया विक 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना क े ह एक प्रव 2नीय अतिEकार प्रत्यर्थी*(गणों) क े पक्ष में उपार्जिR विकया गया र्थीा, Rो पूण[2] पात्र ा अवतिE क े लिलए _मशः विदनांक 13 विदसंबर, 2008 और 17 सिस ंबर, 2014 क छ ू ट का लाभ उ{ाने क े लिलए र्थीा। 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की आक्षेविप अतिEसूचना क े गुण द्वारा उस अतिEकार को बातिE और प्रति बंतिE नहीं विकया Rा सक ा है। यह ऐसा मामला नहीं है Rहां विवEातियका ने उस अतिEकार पर रोक लगाने क े लिलए हस् क्षेप विकया है, लेविकन यह एक प्रातिEकारी द्वारा एक अतिEसूचना क े माध्यम से विकया Rा रहा है Rो पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव वाली अतिEसूचना Rारी करने क े लिलए सशN नहीं है। प्रत्यर्थीा2 इस न्यायालय क े विनण2यों पर भरोसा कर रहे हैं सिRसने यह विवचार विकया है विक अतिEसूचनाएं उनक े Rारी होने से पूव[2] स्र्थीाविप इकाइयों पर लागू नहीं हो सक ी हैं। (देखें एमआरएफ लिलविमटेड, कोट्टायम बनाम असिसस्टेंट कविमश्नर (असेसमेंट) सेल्स टैक्स एवं अन्य ((2006) 8 एससीसी 702); साउर्थीन[2] पेट्रोक े विमकल इंडस्ट्रीR क ं पनी लिलविमटेड बनाम इलेस्थिक्ट्रसिसटी इंस्पेक्टर और ईटीआईओ एवं अन्य ((2007) 5 एससीसी 447); और पूना2मी ऑयल विमल्स एवं अन्य बनाम क े रल राज्य एवं अन्य ((1986) Suppl. एससीसी 728) । इस क 2 क े समर्थी2न में 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना क े अनुसार, अEीनस्र्थी कानून का पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव नहीं हो सक ा है, अवलम्ब डायरेक्टर Rनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड एवं अन्य बनाम कनक एक्सपोट[2] एवं अन्य ((2016) 2 एससीसी 226) क े मामले में प्रति पाविद है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

19. अन् र्मिवरोEी अर्थीवा अपरिरहाय[2] Rनविह क े सम्बन्E में राज्य क े क 2 की चचा2 क े दौरान यह आग्रह विकया गया विक उच्च न्यायालय यह अवलोकन करने में सही र्थीा विक राज्य सरकार उस सिसŽां पर 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की आक्षेविप अतिEसूचना को न्यायोतिच {हराने क े लिलए विकसी भी मामले को य करने में विवफल हो चुकी है। उस क 2 को पुi करने क े लिलए, हमारा ध्यान रिरट यातिचका और दोनों पक्षों क े शपर्थीपत्रों क े रूप में उच्च े समक्ष दलीलों क े प्रासंविगक विहस्से पर आकर्मिष विकया गया र्थीा। मेसस[2] मो ीलाल पदमप शुगर विमल्स क ं पनी लिलविमटेड बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ((1979) 2 एससीसी 409) और मैनुएल्संस होटल्स प्राइवेट लिलविमटेड बनाम क े रल राज्य एवं अन्य ((2016) 6 एससीसी 766) क े मामलों की सूविN पर अवलम्ब ले े हुए यह आग्रह विकया गया विक राज्य पर अतिEक बोझ है और यह विदखाने क े लिलए विक साव2Rविनक विह इ ना अन् र्मिवरोEी और इ ना अपरिरहाय[2] है विक वचनबŽ होकर सरकार को विनयस्थिन्त्र करना अन्याय संग होगा। यह आग्रह विकया गया विक अन् र्मिवरोEी लोकविह क े बारे में इस े समक्ष पहली बार राज्य सरकार द्वारा सम्मुख हुआ है। विकसी भी स्थिस्र्थीति में, इसक े समर्थी2न में ब ाए गए कारण न्यातियक Rांच की कसौटी पर उतिच साविब नहीं हो सक े, Rहाँ क विक, 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना और मुकदमेबाRी क े पहले दौर में उN अतिEसूचना क े समर्थी2न में उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर शपर्थीपत्रों पर राज्य सरकार द्वारा लिलया गया विनण2य स्पi ः उN अतिEसूचना में उसिvलिख इस अभिभकर्थीन Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds पर संस्र्थीाविप विकया गया र्थीा विक छ ू ट देने का उद्देश्य उत्तर प्रदेश में र्थीम2ल पावर स्टेशनों से उत्पन्न फ्लाई ऐश क े उपयोग को बढ़ावा देना र्थीा और प्रातिEक ृ क्षेत्रों में उद्योग स्र्थीाविप करने क े द्वारा उत्पाविद माल क े विवविनमा2ण में फ्लाई ऐश का उपयोग करना र्थीा। यह राज्य क े संबंतिE क्षेत्रों क े सम्मुख आने वाले पया2वरणीय मुद्दों को संबोतिE करने और उत्तर प्रदेश राज्य क े भी र प्रातिEक ृ क्षेत्रों में उद्योगों की स्र्थीापना क े कारण स्र्थीानीय लोगों को रोRगार और रोRगार क े अवसर प्रदान करने क े लिलए भी विकया गया र्थीा। स्वीकाय[2] ः, उत्तर प्रदेश में र्थीम2ल पावर स्टेशनों में फ्लाई ऐश का उत्पादन लगा ार Rारी रहा है सिRससे पड़ोस में गंभीर स्वास्थ्य ख रे पैदा हो रहे हैं, उपRाऊ भूविम को बंRर भूविम में बदल विदया गया है। विवशेष ः, विदनांक 27 फरवरी, 1998 क े पuा और 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] प्रातिEक ृ क्षेत्रों में नव स्र्थीाविप उद्योग उत्तर प्रदेश में र्थीम2ल पावर स्टेशनों में उत्पन्न फ्लाई ऐश का उपयोग कर रहा है। इस प्रकार, नव स्र्थीाविप उद्योग उN अतिEसूचना क े विनविह ार्थी2 वस् ु और प्रयोRन को प्राप्त करना Rारी रखेगा, Rो मौRूद नहीं है और अभी भी प्रासंविगक है। ऐसी स्थिस्र्थीति में, यह समझ से परे है विक राज्य द्वारा अन् र्मिवरोEी लोकविह क े सिसŽां को इस रह क े परिरमाण से कम लागू क ै से विकया Rा सक ा है विक राज्य क े लिलए 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में इसक े द्वारा विकए गए वचन को अवEारिर करना अर्थीवा बाध्य करना असंभव होगा। 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की आक्षेविप अतिEसूचना को Rारी प्रस् ाव में अभिभलिललिख एकमात्र कारण, Rैसा विक संबंतिE विवभाग क े प्रEान सतिचव द्वारा मंवित्रपरिरषद को प्रस् ु विकए गए विबन्दु Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds से समझा Rा सक ा है, क े वल उच्च न्यायालय क े 29 Rनवरी, 2004 विदनांविक का विनण2य प्राप्त होने क े बारे में उvेख कर ा है। राज्य क े लिलए यह आशंका व्यN की गयी विक पड़ोसी राज्यों से संचालिल उद्योगों क े दावों क े विनपटान क े लिलए थ्यात्मक आEार को सत्याविप करने की स्थिस्र्थीति में नहीं होगा Rो पहले से ही इस न्यायालय द्वारा पूव[2] च_ में विवचारिर और उपेतिक्ष विकया गया है Rो राज्य क े विवरूŽ संचालिल Rाँच Rारी रहेगी।

20. प्रत्यर्थी*गणों ने संबंतिE मामले क े थ्यों पर विनण2य लेने क े लिलए वित्रक ु टा रोलर फ्लोर विमल्स प्रा. लिलविमटेड (उपरोN) एवं श्री दुगा2 ऑयल विमल्स (उपरोN) में अपीलार्थी* द्वारा सेवा में Rोर विदए गए विनण2यों पर प्रभेद विकया है। पूव[2] मामले में, न्यायालय ने अस्थिस् त्वहीन व्यापारिरयों द्वारा कपटपूण[2] लेनदेन और फR* वापसी क े दावों की विववृलित्त क े कारण राज्य क े अन् र्मिवरोEी लोकविह क े कदम को सही {हराया, सिRन्होंने न ो रिरटन[2] दालिखल विकया र्थीा और न ही कोई कर Rमा विकया र्थीा। परव * मामले में, न्यायालय ने यह राय विदया विक रिरट यातिचकाक ा2ओं ने आवश्यक मूलभू थ्य नहीं विदए हैं और न ही उनक े द्वारा दावा विकए गए विकसी भी राह क े अनुदान क े लिलए संबंतिE अतिEसूचना क े अEीन चुनौ ी दी है। न्यायालय ने यह भी उvेख विकया विक संबंतिE अतिEसूचना ने छ ू ट नहीं दी र्थीी, लेविकन इसने क े वल यह वचन विदया र्थीा विक संबंतिE विवभागों द्वारा रिरयाय ों और प्रोत्साहन को शासन करने क े रीक े को प्रति पाविद विकया Rाएगा और अतिEक महत्वपूण[2] रूप से, रिरट यातिचकाक ा2 की इकाई ने विदनांक 19 माच[2], 1980 को उत्पादन प्रारम्भ कर विदया र्थीा, पूव[2] अतिEसूचना को विदनांक 20 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds मई, 1977 को पहले ही विनरस् कर दी गई र्थीी। यह क 2 प्रस् ु विकया गया विक उस मामले क े थ्यों में, रिरट यातिचकाक ा2 को कोई राह नहीं दी Rा सक ी है और न ही इसे पूव[2] अतिEसूचना को विनरस् करने क े लिलए काय2कारी क े प्रातिEकार को चुनौ ी देने की अनुमति दी Rा सक ी है।

21. इसक े अति रिरN, प्रत्यर्थी*गण विबहार राज्य एवं अन्य बनाम कल्याणपुर सीमेंट लिलविमटेड ((2010) 3 एससीसी 274) क े प्रति पादन पर अवलम्ब लेंगे सिRससे यह आग्रह विकया गया विक वचनात्मक विवबंEन का सिसŽान् अतिEसूचना पर लागू हो ा है Rैसे विक 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की आक्षेविप अतिEसूचना। यह आगे यह आग्रह विकया गया विक 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना न क े वल वचनात्मक विवबंEन का सिसŽान् का उvंघन कर ी है, बस्थिल्क भार क े अनुच्छेद 14 द्वारा मनमाना और व्यंग्यात्मक भी है। लोक प्रहरी थ्रू इट्स Rनरल से_ े टरी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ((2018) 6 एससीसी 1) में विनण2य पर अवलस्थिम्ब है। अं में, यह क 2 विदया गया विक इस न्यायालय क े समक्ष प्रर्थीम ः अन्यायपूण[2] संवE2न का क 2 उ{ाया गया है और इसका समर्थी2न नहीं विकया Rाना चाविहए। यह Eनवापसी की काय2वाही में विवचार योग्य मामला होगा Rो अभी भी संबंतिE प्रातिEकरण क े समक्ष विनण2य क े लिलए लंविब है। प्रत्यर्थी* यह क 2 प्रस् ु कर े हैं विक अपील को गुणों की शून्य ा क े कारण खारिरR विकया Rा ा है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

22. हमने राज्य की रफ से उपस्थिस्र्थी विवद्व वरिरष्ठ अतिEवNा सुश्री ऐश्वया2 भाटी और प्रत्यर्थी*गणों की रफ से उपस्थिस्र्थी विवद्व वरिरष्ठ अतिEवNा श्री एस.क े. बागरिरया और श्री एस.बी. उपाध्याय को सुना।

23. प्रति रोEी कT पर विवचार करने क े पuा, यह सुस्पi हो Rा ा है विक दोनों पक्ष इस आEार पर प्रवृत्त हैं र्मिक राज्य सरकार अर्थीवा कायकारी पूव[2] की अतिEसूचना को रद्द करने हे ु सक्षम हैं और इस संबंE में वचनात्मक विवबंEन क े सिसŽां में कोई अवरोE नहीं हो सक ा। हालांविक, बचाव अर्थीवा फी ाशाही इस श 2 क े सार्थी विकया Rा ा है विक सरकार पर यह बोझ विदखाने क े लिलए है विक उसक े द्वारा इस रह की अतिEसूचना Rारी करने में लोकविह क े लिलए आगे काय[2] विकया है, अन्यर्थीा वचन क े अनुसार और लोकविह इ ना सशN है विक यह वचनबŽ सरकार का अवEारण न्यायविवरूŽ होगा। यह भली भाँति प्रति स्र्थीाविप है विक न्यायालय मात्र सरकार क े इप्से विदतिक्ष (कर्थीन Rो साविब नहीं हुआ) पर कार2वाई नहीं करेगा और राज्य द्वारा भारिर अपने दातियत्वों क े विनव2हन में प्रमाण क े क{ोर एवं उच्च मानकों पर Rोर देना चाविहए। इसक े परिरणामस्वरूप, हमारे लिलए यह आवश्यक नहीं है विक हम विकसी अन्य विनRी पक्ष अर्थीवा व्यविN की रह राज्य सरकार क े वचनात्मक विवबंEन क े प्रयोग पर प्रत्यर्शिर्थीयों द्वारा सेवा में Rोर विदए गए पूव2व * विवषयों पर विवचार करें।

24. इससे पहले विक हम आगे बढ़ें, यह 1948 अतिEविनयम की Eारा 5 क े उध्दरण क े लिलए उपयुN होगा। वह इस प्रकार है:- “5. विनतिu _य अर्थीवा विव_य पर कर की छ ू ट- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds (1) Rहां राज्य सरकार सं ुi है विक वह Rनविह में ऐसा करने में समीचीन है, यह अतिEसूचना द्वारा विकया Rा सक ा है, और ऐसी श T और प्रति बंEों क े अEीन हो सक ा है, सिRसमें विकसी भी विनर्मिदi विबन्दु पर लगाए गए कर की पूरी राभिश क छ ू ट की अनुमति हो।- (क) विकसी माल का _य अर्थीवा विव_य, या (ख) ऐसे माल का विव_य अर्थीवा _य, ऐसे व्यविNयों या व्यविNयों क े वग[2] द्वारा, Rो उN अतिEसूचना में विवविनर्मिदi विकए Rाएंगे। (2) उप-Eारा (1) क े ह छ ू ट अतिEसूचना की ारीख से पूव[2] की ारीख से प्रभावी रूप से अनुज्ञा विकया Rा सक े गा।“

25. इस उपबंE को क े वल प{न करने पर, यह स्पi है विक अतिEसूचना की ति भिर्थी क े पूव[2] की ति भिर्थी से "छ ू ट की सुविवEा को वापस लेने अर्थीवा रद्द करने" की अतिEसूचना Rारी करने क े लिलए काय2कारी को कोई सक्षम प्रातिEकारी नहीं विदया गया है। Eारा 5(2) क े वल उस शविN को रोक ी है सिRस अतिEसूचना की ति भिर्थी क े पूव[2] की ति भिर्थी से प्रभावी छ ू ट की "अनुमति " हो ी है। इसमें अतिEसूचना की ति भिर्थी से पूव[2] की ति भिर्थी से छ ू ट को "वापस लेने" अर्थीवा "रद्द करने" की शविN आवश्यक विनविह ार्थी2 अर्थीवा अन्यर्थीा द्वारा सस्थिम्मलिल नहीं है।

26. 1897 अतिEविनयम की Eारा 21 का भी कोई लाभ नहीं होगा। इसक े सदृश इस प्रकार है:- "21. विनयमों अर्थीवा उप-विनयमों, आदेशों, परिरवर्ति अर्थीवा रद्द की गई अतिEसूचनाएँ, संशोEन, Rोड़ने क े लिलए सस्थिम्मलिल शविN को Rारी करने की शविN- Rहां विकसी क ें द्रीय अतिEविनयम अर्थीवा विवविनयमों द्वारा अतिEसूचनाओं, आदेशों, विनयमों अर्थीवा उप-विनयमों को Rारी करने की शविN प्रदत्त की Rा ी है, ब उस शविN में एक शविN शाविमल हो ी है, Rो इस रह क े प्रयोगार्थी2 में मंRूरी और श T (यविद कोई हो), क े अEीन हो ी है, Rो विनयमों अर्थीवा उप- विनयमों, आदेशों, परिरवर्ति अर्थीवा रद्द की गई अतिEसूचनाएँ, संशोEन, Rोड़ने क े लिलए Rारी विकए गए हैं।“ Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

27. उपरोN प्रावEान अतिEविनयम 1904 की Eारा 21 से संबंतिE है और अतिEसूचना की ति भिर्थी क े पूव[2] की ति भिर्थी से छ ू ट वापस लेने का कोई लाभ नहीं होगा। व 2मान मामले में, इस पहलू पर विवस् ार देना आवश्यक नहीं है क्योंविक 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना की सामान्य भाषा की पुनप्र2स् ुति प्रस् र 5 में ऊपर की गई है, Rो विक विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से प्रभावी रूप से 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना को स्वयं स्पi ः रद्द कर विदया गया है। इस अतिEसूचना से प्रकट कोई अभिभव्यN अर्थीवा उपलतिक्ष प्रयोRन नहीं है विक अतिEसूचना की ति भिर्थी क े पूव[2] की ति भिर्थी से प्रभावी छ ू ट की सुविवEा को वापस लेने क े लिलए इसे अप2ण शविN क े रूप में माना Rा सक े । इस विनष्कष[2] पर, इस विनष्कष[2] क े सहव * रूप में कु छ भी कहने की आवश्यक ा नहीं है, Rरूरी होगा विक विदनांक 27 फरवरी, 1998 क े पuा और 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] स्र्थीाविप सभी औद्योविगक इकाइयों ने वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारंभ विकया र्थीा, अन्य सभी श T को पूण[2] करने क े अEीन 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में उसिvलिख विनर्मिदi अवतिE क े छ ू ट क े लिलए योग्य ा प्राप्त करना Rारी रखना चाविहए,

28. बीसीएल क े मामले में, छ ू ट विदनांक 13 विदसंबर, 2008 क Rारी रहनी चाविहए और Rेपीएएल क े मामले में, 17 सिस ंबर, 2014 क। 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की आक्षेविप अतिEसूचना की कोई अन्य व्याख्या, पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव देना आवश्यक होगा। यह 1948 अतिEविनयम की Eारा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds 5 अर्थीवा आक्षेविप अतिEसूचना द्वारा पूव2कभिर्थी नहीं है। यह कहने क े बाद, यह आवश्यक होगा विक वचनात्मक विवबंEन क े सिसŽां द्वारा प्रभाविव होने क े आEार पर अतिEसूचना को चुनौ ी देने क े लिलए हमें और दूर करने की आवश्यक ा नहीं है। इसी रह, सिRन परिरस्थिस्र्थीति यों में सरकार 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना क े ह व्यवस्र्थीा से दूर हो सक ी है, उनक े बारे में क 2 अप्रासंविगक हो गया है।

29. यह सोच े हुए विक हमें अन् र्मिवरोEी लोकविह क े 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की आक्षेविप अतिEसूचना को न्यायोतिच {हराने क े लिलए राज्य सरकार द्वारा प्रस् ु विकए गए कारणों की Rांच करने की आवश्यक ा है, यह े समक्ष पक्षकारों द्वारा बदले गए दलीलों अर्थीवा इस े समक्ष मामले को राज्य सरकार का पूव[2] की अतिEसूचना को रद्द करने क े प्रमुख कारण का मूल्यांकन 29 Rनवरी, 2004 विदनांविक को उच्च े विनण2य का प्रभाव र्थीा और भविवष्य राज्य राRस्व क े लिलए विवत्तीय विनविह ार्थी2 सविह उस विनण2य क े काया2न्वयन में राज्य का सामना करने वाले ार्मिकक मुद्दों पर ध्यान विदया गया है। राज्य द्वारा ली गई दलील क े उतिच विवश्लेषण क े लिलए, हमें 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना क े पीछे क े आशय पर विवचार करना चाविहए। प्रमुख आशय उत्तर े भी र विनर्मिदi क्षेत्रों में औद्योविगक इकाई स्र्थीाविप करने क े लिलए विनवेशकों को आमंवित्र करना र्थीा, सिRन्हें अविवकसिस या विपछड़े क्षेत्रों क े लिलए Rाना Rा ा र्थीा और अतिEक महत्वपूण[2] रूप से उत्तर प्रदेश में स्थिस्र्थी र्थीम2ल Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds पावर स्टेशनों द्वारा उत्पन्न फ्लाई ऐश क े कारण पया2वरणीय मुद्दे को संबोतिE करना र्थीा और संयोगवश स्र्थीानीय लोगों को रोRगार क े अवसर और रोRगार उत्पन्न करना र्थीा। उच्च न्यायालय द्वारा 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना को विदए गए व्याख्या और इस न्यायालय द्वारा की गई पुविi क े कारण यह क 2 देना एक बा है विक पड़ोसी राज्यों में स्थिस्र्थी औद्योविगक इकाइयाँ 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना क े पीछे का अं र्मिनविह आशय को अपने पत्र और भावना में पूण[2] करने में सक्षम नहीं हो सक ी। यह राज्य की दलील नहीं है। इसक े अलावा, यह विनर्मिववाद है विक उत्तर प्रदेश राज्य में र्थीम2ल पावर स्टेशन अभी भी वि_याशील हैं और यविद अतिEक नहीं ो उसी रह और मात्रा में फ्लाई ऐश पैदा कर रहे हैं, Rैसा विक फरवरी, 1998 में हो रहा र्थीा। यह भी विनर्मिववाद है विक 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में विकए गए वादे अर्थीवा प्रति विनतिEत्व क े प्रोत्साहन में स्र्थीाविप औद्योविगक इकाइयां, सिRन्होंने विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] विनर्मिदi वस् ुओं क े संबंE में वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारंभ विकया र्थीा, 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में विनर्मिदi उद्देश्य को प्राप्त करना Rारी रखेंगे। इसमें, संबंतिE विवविनमा2ण इकाइयाँ राज्य क े भी र स्थिस्र्थी र्थीम2ल पावर स्टेशनों से _य अर्थीवा उत्पाविद फ्लाई ऐश का उपयोग करक े विनर्मिदi वस् ुओं का विवविनमा2ण Rारी रख ी हैं। Rब क उस गति विवतिE को 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना क े ह विनर्मिदi अवतिE अर्थीा2 ् वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ होने की ति भिर्थी से दस वष[2] क Rारी रखा Rा ा है, यहां न ो कोई {ोस कारण नहीं है और न ही यह क 2 करने क े लिलए है Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds विक 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अं र्मिनविह अतिEसूचना का प्रमुख उद्देश्य का अस्थिस् त्व स्र्थीविग अर्थीवा विकसी भी रीक े से अप्रासंविगक हो चुका र्थीा, 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में वर्शिण श 2 से बाध्य होना अपरिरहाय[2] है विक बहु कम अं रविवरोEी परिरस्थिस्र्थीति यां ऐसी इकाइयों को यर्थीास्थिस्र्थीति प्राप्त कर ी हैं Rो राज्य सरकार क े लिलए अनुतिच होगा।

30. वास् व में, उच्च न्यायालय द्वारा विदए गए विनण2य और 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना की समुतिच व्याख्या करने में इस न्यायालय द्वारा पुविi की गई विक भविवष्य क े राRस्व नुकसान क े संबंE में विवत्तीय विनविह ार्थी2 सविह राज्य क े लिलए क ु छ ार्मिकक मुद्दों को उत्पन्न विकया Rाए। उस आEार को औद्योविगक इकाइयों की गति विवतिEयों क े संदभ[2] में अं र्मिवरोEी लोकविह क े रूप में लागू नहीं विकया Rा सक ा है, Rो अन्य सभी विवषयों में 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में विनर्मिदi श T को अह[2] ा प्राप्त कर े हैं और 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] विनर्मिदi उत्पाद क े वाभिणस्थिज्यक उत्पादन का प्रारम्भ विकया र्थीा। विनतिu ौर पर, एक साध्य अतिEकार ऐसी औद्योविगक इकाइयों क े पक्ष में उपार्जिR और वि_स्टलीकृ विकया गया र्थीा, सिRसे ब क काटा या ोड़ा नहीं Rा सक ा र्थीा Rब क विक सिRस प्रमुख उद्देश्य क े लिलए 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना को Rारी विकया गया र्थीा, उसका अस्थिस् त्व समाप्त नहीं हुआ र्थीा, अर्थीा2 ् राज्य क े भी र स्थिस्र्थी र्थीम2ल पावर स्टेशनों द्वारा फ्लाई ऐश और उस फ्लाई ऐश की खप राज्य क े विवविनर्मिदi क्षेत्रों क े भी र स्र्थीाविप औद्योविगक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds इकाइयों द्वारा विवविनर्मिदi मात्रा क े अनुसार यहाँ उसिvलिख अवतिE क े लिलए छ ू ट क े हकदार होंगे। भविवष्य में राRस्व हाविन का सवाल ही नहीं उत्पन्न होगा क्योंविक पड़ोसी राज्यों में स्र्थीाविप औद्योविगक इकाइयाँ पूव[2] की अतिEसूचना को रद्द करने क े कारण छ ू ट का लाभ उ{ाने क े लिलए पात्र नहीं होंगी। यह देखने क े लिलए पया2प्त है विक भविवष्य क े राRस्व हाविन क े बारे में यह क 2 उन औद्योविगक इकाइयों क े विवरूŽ लागू नहीं विकया Rा सक ा है, सिRन्होंने विदनांक 27 फरवरी, 1998 क े पuा और 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] स्र्थीाविप और उत्पादन प्रारम्भ विकया र्थीा। इसक े लिलए, यह सुरतिक्ष रूप से माना Rा सक ा है विक नीति विनमा2 ा उन इकाइयों को छ ू ट देने क े कारण भविवष्य क े राRस्व क े सामासिRक नुकसान क े बारे में पूरी रह से सचे र्थीे, Rब उन्होंने 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना Rारी की र्थीी। 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना क े ह अन्य सभी सम्बस्थिन्E मामलों में अह[2] ा प्राप्त करने वाली औद्योविगक इकाइयों क े विवरूŽ उस आEार को स्र्थीाविप नहीं विकया Rा सक ा है और इसने अं र्मिवरोEी लोकविह हो े हुए करोड़ों में पया2प्त विनवेश विकया है, Rैसा विक इन काय2वाविहयों में राज्य द्वारा सांत्वना विदया Rा रहा है। यह स्पi रूप से एक क 2 है, Rो विकसी भी मानक द्वारा न्यातियक Rांच की कसौटी पर खरी नहीं उ र सक ी है। यह अच्छी रह से स्र्थीाविप है विक न्यायालय अं रविवरोEी लोकविह क े रूप में अपनी कार2वाई को न्यायोतिच {हराने क े लिलए राज्य पर भार और दातियत्व क े विनव2हन में अत्यतिEक क{ोर मानक क े लिलए Rोर देने क े लिलए उपक ृ है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds

31. यह कहने क े बाद, यह आवश्यक रूप से पालन करना चाविहए विक 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की आक्षेविप अतिEसूचना में औद्योविगक इकाइयों क े लिलए उपार्जिR साध्य अतिEकार का कोई आवेदन नहीं हो सक ा है, Rो 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में विवविनर्मिदi अन्य सभी श T को पूण[2] कर े हैं, विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] विवविनर्मिदi वस् ु का वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ विकया गया है। अन्य शब्दों में, हम अं र्मिवरोEी लोकविह क े बारे में राज्य सरकार क े पक्ष को अस्वीकार कर े हैं, क्योंविक प्रत्यर्थी* को यहां और इसी प्रकार प्रस् ु विकया गया है। 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना को ऐसी औद्योविगक इकाइयों क े पक्ष में उपार्जिR अतिEकारों को कम करने क े लिलए पूव2व्यापी अर्थीवा पूव2मान्य प्रभाव क े रूप में नहीं माना Rा सक ा है।

32. इस मामले क े दृविiकोण में, इस क 2 क े समर्थी2न क े लिलए सेवा में दबाए गए उदाहरणों पर विवस् ार करना अनावश्यक है विक वचनात्मक विवबंEन का सिसŽां राज्य सरकार पर लागू हो ा है अर्थीवा पूव[2] की अतिEसूचना को रद्द करने क े लिलए राज्य सरकार की शविN क े बारे में Rो 1948 अतिEविनयम की Eारा 5 क े ह छ ू ट पात्र औद्योविगक इकाइयों को प्राप्य और देय हो गई र्थीी। हम अपीलार्थी* की भिशकाय का भी विनस् ारण कर े हैं विक उच्च न्यायालय ने 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक की अतिEसूचना Rारी करने को न्यायोतिच {हरा े हुए अं र्मिवरोEी लोकविह क े क 2 क े सार्थी विवस् ृ रूप से विनपटान नहीं विकया है। हम ऐसा इसलिलए कह े हैं क्योंविक हम प्रत्यर्थी* क े क 2 से Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds आश्वस् हैं विक उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर प्रति वि_या में अर्थीवा उस संबंE में राज्य सरकार द्वारा व 2मान काय2वाही में कोई भौति क थ्य नहीं विदया गया है।

33. विफर भी, हमने राज्य सरकार को उन कारणों को स्पi करने की अनुमति दी र्थीी Rो उसने लिललिख प्रस् ुति करण में विकए र्थीे Rैसा विक ऊपर विदए गए प्रस् र 14 में विनर्मिदi विकया गया है। हमने उN कारणों का विवश्लेषण विकया है और माना है विक राज्य सरकार क े लिलए इकलौ े अर्थीवा एक सार्थी लिलए गए म का कोई फायदा नहीं होगा, 14 अक्टूबर, 2004 विदनांविक को आक्षेविप अतिEसूचना क े आवेदन को न्यायोतिच {हराने क े लिलए, औद्योविगक इकाइयों को पहले से ही स्र्थीाविप विकया गया है सिRन्होंने विदनांक 14 अक्टूबर, 2004 से पूव[2] विवविह क्षेत्रों में विनर्मिदi माल का वाभिणस्थिज्यक उत्पादन प्रारम्भ विकया र्थीा।

34. प्रागनुभविवक, प्रत्यर्थी*गणों और एक समान व्यविN 27 फरवरी, 1998 विदनांविक की अतिEसूचना में विनर्मिदi प्रासंविगक अवतिE क े लिलए छ ू ट क े हकदार होंगे, Rो विनर्मिदi अवतिE की समाविप्त अर्थीा2 ् दस वष[2] क प्रचलन में रहेगा। _मशः बीसीएल क े मामले में विदनांक 13 विदसंबर, 2008 क और Rेपीएल क े मामले में 17 सिस ंबर, 2014 क। हालांविक, छ ू ट की राभिश संबंतिE प्रातिEकारिरयों क े समक्ष लंविब उनक े Eनवापसी दावे क े सत्यापन पर विनभ2र करेगी और अन्यायपूण[2] संवE2न क े सिसŽां सविह सिसफ 2 अपवादों क े अEीन होगी। प्रत्यर्थी*गणों को यह प्रमाभिण करने में सक्षम होना चाविहए विक उनक े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds द्वारा दावा की गई राभिश उनक े उपभोNाओं को नहीं दी गई है। भी, वे Eनवापसी क े हकदार होंगे। सक्षम प्रातिEकारी कानून क े अनुसार प्रत्येक प्रत्यर्थी*गणों क े Eनवापसी क े लिलए दावे को सत्याविप कर सक ा है और संबंतिE अवतिE क े लिलए ब्याR से संबंतिE समुतिच आदेश पारिर कर सक ा है।

35. हम प्रत्यर्थी*गणों क े सार्थी समझौ ा कर रहे हैं विक वित्रकु टा रोलर फ्लोर विमल्स प्रा. लिलविमटेड (उपरोN) और श्री दुगा2 ऑयल विमल्स (उपरोN) क े विनण2यों में संबंतिE मामलों क े थ्यों पर पलट े हैं। उन मामलों क े कर्थीन में उपरोN विवश्लेषण क े आलोक में व 2मान मामले क े थ्य की स्थिस्र्थीति क े लिलए कोई आवेदन नहीं होगा। इसी प्रकार, इस न्यायालय द्वारा पूव2व * काय2वाविहयों में विकए गए अवलोकन प्रत्यर्थी*गणों क े लिलए संबंतिE अवतिE क े लिलए छ ू ट की राभिश की वापसी क े लिलए अपने दावे को आगे बढ़ाने क े रास् े में नहीं आ सक े हैं। Rो विवतिE क े अनुसार य विकया Rाए।

36. उपरोN क े मद्देनRर, इन अपीलों को विवफल होना चाविहए। इसलिलए, अवलोकनों क े सार्थी खारिरR कर विदया Rा ा है। लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा। सभी लंविब आवेदनों का भी विनस् ारण विकया Rा ा है। (न्यायमूर्ति, ए. एम. खानविवलकर)........................................ (न्यायमूर्ति, विदनेश माहेश्वरी) Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds........................................ नई विदvी; 20 नवम्बर, 2019 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds