Railway Electrification Central Institute v. ECI-SPIC-SMO-MCML (JV)

High Court of Allahabad · 17 Dec 2019
R. Bhanumathi; A. S. Bopanna; Hrishikesh Roy
Civil Appeal Nos. 9486-9487 of 2019
civil appeal_allowed Significant

AI Summary

The Supreme Court held that appointment of a sole arbitrator outside the contractually mandated panel is invalid, directing adherence to the panel-based arbitration appointment procedure under Clause 64 of the contract and the amended arbitration rules.

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 9486-9487 वर्ष$ 2019
(विव.अ.या.(सिस.) सं. 24173-74 वर्ष$ 2019 से उद्भू )
रेलवे विवद्यु ीकरण क
े न्द्रीय संस्थान ........अपीलाथ3
बनाम
मे. ईसीआई-एसपीआईसी-एसएमओ-एमसीएमएल(जेवी)
एक संयुक्त उपक्रम .........प्रत्यथ3
विनण$य
न्यायमूर्ति आर.भानुम ी
अनुमति प्रदान की गयी।
JUDGMENT

2. ये अपीलें मध्यस्थ ा आवेदन संख्या 151 वर्ष$ 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा पारिर 03.01.2019 और 29.03.2019 विदनांविक आक्षेविप आदेशों क े विवरुद्ध की गयी हैं सिजसमें और सिजसक े द्वारा उच्च न्यायालय ने अपीलाथ[3] क े इस क $ को खारिरज कर विदया विक मध्यस्थ अनुबं की सामान्य श R 64 (3) (ए) (ii) और 64 (3) (बी) क े अनुसार विनयुक्त विकया जाना चाविहए और पक्षों क े बीच विववाद को सुलझाने क े लिलए न्यायमूर्ति श्री राजेश दयाल खरे को एकमात्र मध्यस्थ विनयुक्त विकया गया। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

3. अपीलाथ[3] ने प्रत्यथ3-क ं पनी को 20.09.2010 विदनांविक एक संविवदा क े द्वारा 165,67,98,570/- रुपये का काय$ अनुबं प्रदान विकया सिजसमें मध्यस्थ ा खंड शाविमल है। इसक े बाद, मध्यस्थ ा और सुलह (संशो न) अति विनयम, 2015 (23.10.2015 से प्रभावी) क े लागू होने क े बाद, रेल मंत्रालय, भार सरकार ने अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 में संशो न विकया और संशो न क े काया$न्वयन क े लिलए 16.11.2016 को एक अति सूचना जारी की। संशोति खंड 64(3)(ए)(ii) (जहां ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त कर विदया गया है) अन्य बा ों क े साथ-साथ यह उपबं कर ी है विक उन मामलों में जहां सभी दावों का क ु ल मूल्य 1 करोड़ रुपये से अति क हो,मध्यस्थ न्यायाति करण मध्यस्थ क े रूप में ीन राजपवित्र रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा जो जेए (जूविनयर प्रशासविनक) ग्रेड से नीचे नहीं होगा या दो रेलवे राजपवित्र अति कारी जो जेए ग्रेड से नीचे नहीं होंगे और एक सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी, जो वरिरष्ठ प्रशासविनक (एसए) क े पद से नीचे सेवाविनवृत्त न हुआ हो, होंगे। उसमें मध्यस्थ न्यायाति करण क े गठन की प्रविक्रया का उपबं है। खंड 64(3)(बी) मध्यस्थ की विनयुविक्त से संबंति है जहां मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त नहीं विकया गया है। खंड 64(3)(बी) यह उपबं कर ा है विक मध्यस्थ न्यायाति करण में मध्यस्थ क े रूप में ीन सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा जो इंविग प्रविक्रया क े अनुसार वरिरष्ठ प्रशासविनक अति कारी क े रैंक से नीचे का नहीं होगा।

4. चूंविक प्रत्यथ[3] ने विवविह अवति क े भी र 18.10.2017 को अनुबं क े ह काय$ पूरा नहीं विकया, अपीलाथ[3] ने प्रत्यथ[3] को अनुबं की सामान्य श R क े खंड 62 क े ह "सा विदन" नोविhस विदया। त्पश्चा 27.10.2017 को, अपीलाथ[3] ने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रत्यथ[3] को "48 घंhे का नोविhस" जारी कर काय$ की प्रगति देने को कहा, ऐसा न करने पर अनुबं समाप्त हो जाएगा। चूंविक प्रत्यथ[3] ने काय$ में पया$प्त प्रगति नहीं की थी, इसलिलए विदनांक 01.11.2017 को अनुबं की सामान्य श R क े खंड 62 क े अनुसार अनुबं समाप्त कर विदया गया था। प्रत्यथ[3] को यह भी सूतिच विकया गया विक उनकी जमान राशिश जब् कर ली गई है और उसक े द्वारा प्रस् ु की गई विनष्पादन गारंhी को भी भुना लिलया जाएगा।

5. प्रत्यथ[3] ने अनुबं की समाविप्त को चुनौ ी दे े हुए उच्च न्यायालय क े समक्ष एक यातिचका संख्या 760 वर्ष$ 2017 दायर की, सिजसे उच्च न्यायालय द्वारा 28.11.2017 विदनांविक आदेश द्वारा खारिरज कर विदया गया और उच्च न्यायालय ने प्रत्यथ[3] को मध्यस्थ ा खंड क े द्वारा वैकल्पिल्पक उपचार का लाभ उठाने का विनदrश विदया। प्रत्यथ[3] ने अपने 27.07.2018 विदनांविक पत्र क े माध्यम से अपीलक ा$ से पक्षों क े बीच विववादों को सुलझाने और 73.35 करोड़ रुपये क े दावों क े विनपhान क े लिलए एक मध्यस्थ न्यायाति करण की विनयुविक्त क े लिलए अनुरो विकया। 24.09.2018 विदनांविक उत्तर में, अपीलक ा$ ने मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए जेए ग्रेड क े चार सेवार रेलवे विवद्यु ीकरण अति कारिरयों की एक सूची भेजी। प्रति वादी को विकन्हीं दो का चयन करने और मध्यस्थ ा न्यायाति करण पैनल क े गठन क े लिलए अपीलक ा$ से संवाद करने क े लिलए कहा गया था। 25.10.2018 विदनांविक पत्र क े माध्यम से, प्रति वादी को चार सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों क े एक अन्य पैनल की एक सूची भेजी गई थी। रेलवे की अनुबं की सामान्य श R क े खंड 63(3)(बी) क े संदभ$ में, प्रति वादी को इस सूची में से विकन्हीं दो का चयन करने और मध्यस्थ ा न्यायाति करण क े गठन क े लिलए ीस विदनों क े भी र अपीलक ा$ को सूतिच करने क े लिलए कहा गया था। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

6. प्रति वादी ने अपीलक ा$ क े उपरोक्त पत्रों का उत्तर नहीं भेजा; बल्पिल्क म भेदों क े समा ान क े लिलए एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त की मांग कर े हुए मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम की ारा 11 (6) क े ह उच्च न्यायालय क े समक्ष मध्यस्थ ा यातिचका संख्या 151 वर्ष$ 2018 दायर की। अपनी यातिचका में, प्रति वादी ने इस मामले में एक मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त करने क े लिलए रेलवे बोड$ से सेवाविनवृत्त सदस्य इलेल्पिthuकल श्री अतिvनी क ु मार कपूर क े नाम का सुझाव विदया। प्रति वादी क े अनुसार, पक्षकारों क े बीच एक वै और बाध्यकारी मध्यस्थ ा खंड मौजूद है जो अध्याय 2 क े भाग I क े खंड 1.2.54 और अनुबं की सामान्य श R 64 में विदया गया हैं; लेविकन चूंविक अनुबं की सामान्य श R में विकसी hस्थ मध्यस्थ की विनयुविक्त पर विवचार नहीं विकया गया है, प्रति वादी क े पास मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम, 1996 की ारा 11(6) क े ह यातिचका दायर करने क े अलावा कोई अन्य रास् ा नहीं है।

7. उच्च न्यायालय ने 03.01.2019 विदनांविक आक्षेविप आदेश द्वारा अपीलक ा$ क े इस क $ को खारिरज कर विदया विक मध्यस्थ को अनुबं की सामान्य श R क े अनुसार मध्यस्थों क े पैनल से ही विनयुक्त विकया जाना चाविहए। उच्च न्यायालय ने पाया विक मध्यस्थ विनयुक्त करने की न्यायालय की शविक्तयां पक्षकारों क े बीच अनुबं से स्व ंत्र हैं और न्यायालय की शविक्तयों से कोई बं न नहीं जोड़ा जा सक ा है। उन विनष्कर्षR क े साथ, उच्च न्यायालय ने मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम की ारा 11 (8) क े ह, इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े एक सेवाविनवृत्त न्याया ीश, श्री राजेश दयाल खरे को उनकी सहमति क े अ ीन एकमात्र मध्यस्थ विनयुक्त विकया। इसक े बाद, 29.03.2019 विदनांविक आदेश क े माध्यम से, उच्च न्यायालय ने न्यायालय द्वारा विनयुक्त मध्यस्थ की सहमति को नोh विकया और मध्यस्थ को मध्यस्थ ा की काय$वाही क े साथ आगे बढ़ने का विनदrश विदया। व्यशिथ होकर अपीलाथ[3] ने ये अपीलें की। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

8. अपीलक ा$ की ओर से पेश हुए अति रिरक्त सॉलिलसिसhर जनरल (एएसजी) श्री ए.एन.एस. नाडकण[3] ने कहा विकया विक अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 (3) (ए) (ii) क े संदभ$ में (जहां संशोति अति विनयम की ारा 12 (5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त कर विदया गया है), पंचाh न्यायाति करण में मध्यस्थ क े रूप में ीन राजपवित्र रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा जो कविनष्ठ प्रशासविनक ग्रेड से नीचे नहीं होगा या दो रेलवे राजपवित्र अति कारी होंगे जो कविनष्ठ प्रशासविनक ग्रेड से नीचे नहीं होंगे और एक सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी जो वरिरष्ठ प्रशासविनक ग्रेड अति कारी क े रैंक से नीचे क े सेवाविनवृत्त नहीं हुआ हो, होंगे। यह कहा गया विक अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64(3)(बी) क े अनुसार (जहां अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त नहीं विकया गया है ), खंड 64(3)(बी) में विन ा$रिर प्रविक्रया क े अनुपालन क े बाद मध्यस्थ न्यायाति करण में मध्यस्थ क े रूप में ीन सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल शाविमल होगा जो वरिरष्ठ प्रशासविनक ग्रेड अति कारिरयों क े रैंक से नीचे से सेवाविनवृत्त नहीं हुए। यह क $ विदया गया विक जब समझौ े और अनुबं की सामान्य श R में पैनल क े ीन मध्यस्थों से युक्त मध्यस्थ न्यायाति करण की विनयुविक्त क े लिलए प्राव ान विकया गया, ो उच्च न्यायालय ने मध्यस्थों क े पैनल क े बाहर एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त में गल ी की। विवद्वान एएसजी ने आगे कहा विक एक स्व ंत्र मध्यस्थ की विनयुविक्त अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64(3)(a)(i), 64(3)(a)(ii) )(i), 64(3)(a)(i), 64(3)(a)(ii) )(ii) और 64(3)(b) ) क े उल्लंघन में है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का एक पूव$ न्याया ीश की विनयुविक्त का आक्षेविप विनण$य पोर्षणीय नहीं है। क $ क े समथ$न में, विवद्वान एएसजी ने अन्य बा ों क े साथ-साथ यूविनयन ऑफ इंतिडया बनाम परमार क ं स्hutशन क ं पनी (2019) एससीसी ऑनलाइन एससी 442 और यूविनयन ऑफ इंतिडया बनाम प्रदीप विवनोद क ं स्hutशन mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क ं पनी (2019) एससीसी ऑनलाइन एससी 1467 और अन्य विनण$यों का अवलंब लिलया है।

9. उपरोक्त क $ का खंडन कर े हुए, प्रति वादी की ओर से उपल्पिस्थ विवद्वान अति वक्ता श्री श्री र पो ाराजू ने कहा विक मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम, 1996 को 23.10.2015 से संशोति विकया गया था और व $मान मामले में, विववादों क े समा ान क े लिलए मध्यस्थ ा की मांग प्रति वादी द्वारा 27.07.2018 को की गयी थी और इसलिलए, संशोति अति विनयम क े प्राव ान व $मान मामले पर लागू हो े हैं। यह कहा गया विक मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम, 1996 की ारा 12(5) सपविठ अनुसूची VII क े प्राव ानों क े आ ार पर, अपीलक ा$ द्वारा विदनांक 24.09.2018 क े पत्र द्वारा अपीलक ा$ क े प्रस् ाविव मध्यस्थों क े पैनल को मध्यस्थ विनयुक्त विकए जाने से वै ाविनक रूप से अपात्र बना विदया गया था tयोंविक वे सेवार या सेवाविनवृत्त कम$चारी थे। यह क $ विदया गया विक संशो न अति विनयम, 2015 क े प्राव ानों क े अनुसार, व $मान या पूव$ सभी कम$चारिरयों को मध्यस्थ क े रूप में विनयुविक्त क े लिलए वै ाविनक रूप से अपात्र बनाया गया है। विवद्वान अति वक्ता ने आगे कहा विक जब महाप्रबं क स्वयं अति विनयम की ारा 12(5) सपविठ अनुसूची VII क े ह मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े लिलए अपात्र हैं, ो महाप्रबं क विकसी भी व्यविक्त को मध्यस्थ क े रूप में नाविम नहीं कर सक ा। प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता ने अन्य बा ों क े साथ-साथ वोस्hलपाइन शेनेन Gmb) h बनाम विदल्ली मेhuो रेल कॉप रेशन लिलविमhेड (2017) 4 एससीसी 665, hीआरएफ लिलविमhेड बनाम एनेग इंजीविनयरिंरग प्रोजेtट्स लिलविमhेड (2017) 8 एससीसी 377 और अन्य कई विनण$यों का अवलंब लिलया है जो विक उपयुक्त स्थान पर संदर्भिभ विकये जाएंगे। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

10. हमने कR पर ध्यानपूव$क विवचार विकया है और आक्षेविप विनण$य और अशिभलेखों की सामग्री का परिरशीलन विकया। विवचारणीय विवर्षय यह है विक tया उच्च न्यायालय द्वारा अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64(3)(ए)(ii) और 64(3) (बी) क े उल्लंघन में एक स्व ंत्र मध्यस्थ विनयुक्त करना सही था। अनुबं की सामान्य श R (जीसीसी) क े खंडों क े संदभ$ क े विबना एक स्व ंत्र मध्यस्थ की विनयुविक्त - tया सही है?

11. प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता ने कहा विक अपीलक ा$ क े सेवार कम$चारी होने क े कारण, अपीलक ा$ द्वारा विदनांक 24.09.2018 क े पत्र द्वारा प्रस् ाविव मध्यस्थों का पैनल, मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम की ारा 12(5) सपविठ अनुसूची VII क े प्राव ानों क े मद्देनजर मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े योग्य नहीं थे। विवद्वान अति वक्ता ने आगे कहा विकया विक अपीलक ा$ द्वारा विदनांक 25.10.2018 क े पत्र द्वारा प्रस् ाविव मध्यस्थों का पैनल, सिजसमें अपीलक ा$ क े सेवाविनवृत्त कम$चारी शाविमल थे, भी अति विनयम की ारा 12(5) सपविठ अनुसूची VII क े ह मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े योग्य नहीं थे tयोंविक अपीलक ा$ क े कम$चारिरयों को स्पष्ट रूप से अपात्र बनाया गया है।

12. उपरोक्त क $ क े समथ$न में, प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता ने वोस्hलपाइन शेनेन Gmb) h बनाम विदल्ली मेhuो रेल कॉप रेशन लिलविमhेड (2017) 4 एससीसी 665 का अवलंब लिलया है, सिजसमें सव च्च न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया है: "24. …….संशोति प्राव ान एक ऐसे व्यविक्त पर मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने पर प्रति बं लगा ा है, जो विववाद क े पक्ष का कम$चारी है। यह विकसी व्यविक्त को मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने से भी वंतिच कर ा है यविद वह सलाहकार या mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA परामश$दा ा रहा हो या डीएमआरसी क े साथ उसका कोई अ ी या व $मान व्यावसातियक संबं रहा हो…….”।

13. प्रति वादी की ओर से, भार ब्रॉडबैंड नेhवक $ लिलविमhेड बनाम यूनाइhेड hेलीकॉम लिलविमhेड (2019) 5 एससीसी 755 का अवलंब लिलया गया, सिजसमें सव च्च न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया था: - "15. दूसरी ओर, ारा 12(5), एक नया प्राव ान है जो मध्यस्थ क े इस रह काय$ करने की विवति क असमथ$ ा से संबंति है। इस प्राव ान क े ह, इसक े विवपरी कोई भी पूव$ समझौ ा ारा 12(5) में गैर-बाध्यकारी खंड द्वारा विमhा विदया जा ा है, सिजस क्षण कोई भी व्यविक्त सिजसका पक्ष या सलाहकार या विववाद की विवर्षय-वस् ु सा वीं अनुसूची क े अं ग$ आ ा हो। उप- ारा ब घोर्षणा कर ी है विक ऐसा व्यविक्त मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े लिलए "अपात्र" होगा। इस अपात्र ा को दूर करने का एकमात्र रीका परं ुक है, जो विफर से एक विवशेर्ष प्राव ान है सिजसमें कहा गया है विक पक्षकार, उनक े बीच विववाद होने क े बाद, लिललिख रूप में एक प्रकh समझौ े द्वारा ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को छोड़ सक ी हैं। इसलिलए, जो स्पष्ट है, वह यह है विक जहां, पक्षकारों क े बीच विकसी भी समझौ े क े ह, कोई व्यविक्त सा वीं अनुसूची में विन ा$रिर विकसी भी श्रेणी क े अं ग$ आ ा हो, वह विवति क रूप से, मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े लिलए अपात्र है। इस अपात्र ा को दूर करने का एकमात्र रीका, विफर से, कानून में, यह है विक पक्षकारों क े बीच विववाद उत्पन्न होने क े बाद, इस उप- ारा की प्रयोज्य ा को "लिललिख रूप में व्यक्त समझौ े " द्वारा छोड़ विदया जा सक ा है। जाविहर है, "लिललिख रूप में व्यक्त समझौ ा " में एक ऐसे व्यविक्त का संदभ$ है जो सा वीं अनुसूची द्वारा प्रति वाविद विकया गया है, लेविकन पक्षकारों द्वारा (उनक े बीच विववाद उत्पन्न होने क े बाद) एक ऐसा व्यविक्त होने क े लिलए कहा गया है सिजस पर उन्हें विवvास है, इस थ्य क े बावजूद विक ऐसे व्यविक्त को सा वीं अनुसूची द्वारा अं र्विवरोति विकया गया है।"

14. इसक े विवपरी, अपीलक ा$ की ओर से, विवद्वान एएसजी श्री ए.एन.एस. नाडकण[3] ने कहा है विक मध्यस्थ की विनयुविक्त अनुबं की सामान्य श R (जीसीसी) क े खंड 64(3)(ए)(i) और 64(3)(ए)(ii) क े अनुसार विनयंवित्र हो ी है जहां mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त कर विदया गया है और मध्यस्थ न्यायाति करण में ीन सेवार रेलवे अति कारिरयों या दो सेवार अति कारिरयों और एक सेवाविनवृत्त अति कारी का एक पैनल शाविमल होगा। विवद्वान एएसजी ने कहा विक जीसीसी का खंड 64(3)(बी) मध्यस्थ की विनयुविक्त से संबंति है जहां अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त नहीं विकया गया है। यह आगे कहा गया विक जीसीसी क े खंड 64 (3) (बी) में कहा गया है विक मध्यस्थ न्यायाति करण में ीन सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा जो वरिरष्ठ प्रशासविनक अति कारी क े पद से नीचे नहीं होंगे और मध्यस्थ न्यायाति करण का गठन प्रविक्रया क े अनुसार विकया जाएगा। यूविनयन ऑफ इंतिडया बनाम परमार क ं स्hutशन क ं पनी (2019) एससीसी ऑनलाइन एससी 442 और यूविनयन ऑफ इंतिडया बनाम प्रदीप विवनोद क ं स्hutशन क ं पनी (2019) एससीसी ऑनलाइन एससी 1467 क े मामले का अवलंब ले े हुए, विवद्वान एएसजी ने कहा विक जब अनुबं विवशेर्ष रूप से पैनल की विनयुविक्त क े लिलए उपबं कर ा है ो मध्यस्थों की विनयुविक्त अनुबं क े अनुसार होनी चाविहए और स्व ंत्र एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त अनुबं की सामान्य श R क े उल्लंघन में है जो मध्यस्थों की विनयुविक्त क े लिलए पक्षकारों को विनयंवित्र कर ी है।

15. अनुबं की सामान्य श R का खंड 64 विववादों क े समा ान की प्रविक्रया से संबंति है और "मध्यस्थ ा की मांग" और मध्यस्थों की विनयुविक्त का प्राव ान कर ा है। अनुबं की सामान्य श R (जीसीसी) का खंड 64 विनम्नानुसार है: - "64. (1): मध्यस्थ ा की मांग:

64. (1) (i) इस अनुबं क े विनमा$ण या संचालन क े संबं में पक्षकारों क े बीच विकसी भी विववाद या म भेद की ल्पिस्थति में, या विकसी भी प्रश्नग विववाद या म भेद mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA क े विकसी भी मामले पर पक्षकारों क े संबंति अति कार और उत्तरदातियत्व, खा े या रेलवे द्वारा विकसी प्रमाण पत्र को रोकने क े संबं में सिजसक े लिलए ठेक े दार हकदार होने का दावा कर सक ा है, विववाद या म भेद या यविद रेलवे 120 विदनों क े भी र विनण$य लेने में विवफल रह ा है, ो और ऐसे विकसी भी मामले में, लेविकन इन श R क े खंड 63 में विनर्विदष्ट अपवाद क े मामले में "अपवाद स्वरूप मामलों" को छोड़कर, ठेक े दार, 120 विदनों क े बाद, लेविकन विववाविद मामलों पर अपना अंति म दावा पेश करने क े 180 विदनों क े भी र लिललिख रूप में मांग करेगा विक विववाद या म भेद को मध्यस्थ ा क े लिलए भेजा जाए।

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64. (1) (ii) (ए) मध्यस्थ ा की मांग उन मामलों को या विववाद या म भेद क े विवर्षय क े साथ-साथ दावे की राशिश भी आइhम-वार विनर्विदष्ट करेगी जो प्रश्न में हैं। क े वल ऐसे विववाद या म भेद, सिजसक े संबं में मांग की गई है, साथ ही रेलवे द्वारा विदए गए काउंhर दावों या सेh ऑफ क े साथ, मध्यस्थ ा को संदर्भिभ विकया जाएगा और अन्य मामलों को संदभ$ में शाविमल नहीं विकया जाएगा।

64. (1) (ii) (बी) पक्षकार मध्यस्थ ा और सुलह (संशो न) अति विनयम, 2015 की उप- ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को छोड़ सक े हैं। यविद वे ऐसी छ ू h पर अनुलग्नक XII की श R क े अनुसार लिललिख रूप में सहम हों।"

16. मध्यस्थ ा और सुलह (संशो न) अति विनयम, 2015 क े लागू होने क े बाद, रेल मंत्रालय, भार सरकार ने अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 में संशो न विकया और रेलवे बोड$ ने इस संबं में विदनांक 16.11.2016 को अति सूचना जारी की।। संशोति खंड 64(3)(ए)(i) (जहां अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त कर विदया गया है) अन्य बा ों क े साथ-साथ यह उपबं कर ी है विक ऐसे मामले में जहां एक साथ जोड़े गए सभी दावों का कु ल मूल्य एक करोड़ रुपये से अति क नहीं है, उस ल्पिस्थति में, मध्यस्थ न्यायाति करण में एकमात्र मध्यस्थ शाविमल होगा जो महाप्रबं क द्वारा नाविम राजपवित्र अति कारी होगा जो जेए ग्रेड से नीचे का नहीं होगा। खंड 64(3)(ए)(i) क े ह, महाप्रबं क को मध्यस्थ ा की लिललिख और वै मांग प्राप्त होने क े विदन से साठ विदनों क े भी र mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एकमात्र मध्यस्थ विनयुक्त करना होगा। व $मान मामले में, चूंविक काय$ अनुबं का मूल्य 165 करोड़ रुपये से अति क है, इसलिलए खंड 64(3)(ए)(i) लागू नहीं है।

17. जीसीसी का खंड 64(3)(ए)(ii) उन मामलों से संबंति है जो खंड 64(3) (ए)(i) में शाविमल नहीं हैं जहां अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त कर विदया गया है। अनुबं की सामान्य श R का खंड 64(3)(ए)(ii) विनम्नानुसार है: - "64. (3) मध्यस्थ की विनयुविक्त: ………..

64. (3) (ए) (ii) ऐसे मामले में जो खंड 64 (3) (ए) (i) क े अन् ग$ नहीं आ ा, मध्यस्थ न्यायाति करण मध्यस्थ क े रूप में ीन राजपवित्र रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा जो जेए ग्रेड से नीचे न हों या दो रेलवे राजपवित्र अति कारी जो जेए ग्रेड से नीचे न हों और एक सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी, जो एसएजी अति कारी रैंक से नीचे सेवाविनवृत्त न हुआ हो। इस प्रयोजन क े लिलए, जीएम द्वारा मध्यस्थ ा क े लिलए लिललिख और वै मांग प्राप्त होने की ारीख से 60 विदनों क े भी र रेलवे एक या अति क रेलवे विवभागों क े राजपवित्र रेलवे अति कारिरयों क े कम से कम चार (4) नामों का एक पैनल भेजेगा, सिजसमें सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी (अति कारिरयों) क े नाम भी शाविमल हो सक े हैं जो ठेक े दार क े साथ रेलवे मध्यस्थ क े रूप में काम करने क े लिलए सूचीबद्ध हैं। ……”

18. जीसीसी का खंड 64(3)(बी) मध्यस्थ की विनयुविक्त से संबंति है जहां अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त नहीं विकया गया है। संशोति खंड 64(3)(बी) में अन्य बा ों क े साथ-साथ प्राव ान विकया गया है विक मध्यस्थ न्यायाति करण में मध्यस्थ क े रूप में ीन सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एक पैनल होगा जो एसएओ अति कारी क े रैंक से नीचे क े नहीं होंगे। इस उद्देश्य क े लिलए रेलवे पैनल में शाविमल सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों क े कम से कम चार नामों का एक पैनल भेजेगा। ठेक े दार पैनल में ठेक े दार क े नामांविक ों की विनयुविक्त क े लिलए महाप्रबं क को कम से कम से कम दो नामों का सुझाव देगा और महाप्रबं क उनमें से कम से कम एक को ठेक े दार क े नामांविक क े रूप में विनयुक्त करेगा। साथ ही महाप्रबं क पैनल से या पैनल क े बाहर से मध्यस्थों की शेर्ष संख्या को भी विनयुक्त करेगा। अनुबं की सामान्य श R का संशोति खंड 64(3)(बी) इस प्रकार है:- "64. (3)(बी) मध्यस्थ की विनयुविक्त जहां ए एंड सी अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त नहीं विकया गया है। मध्यस्थ न्यायाति करण मध्यस्थ क े रूप में ीन सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा, जो एसएओ अति कारी क े रैंक से नीचे सेवाविनवृत्त न हुए हों। इस उद्देश्य क े लिलए रेलवे पैनल में शाविमल सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी (अति कारिरयों) क े कम से कम चार नामों का एक पैनल उनकी सेवाविनवृलित्त ति शिथ दर्भिश कर े हुए रेलवे मध्यस्थों क े रूप में काम करने क े लिलए उस विदन से 60 विदनों क े भी र भेजेगा सिजस विदन जीएम को मध्यस्थों क े लिलए एक लिललिख और वै मांग प्राप्त हो ी है। ठेक े दार को रेलवे द्वारा अनुरो भेजने की ारीख से 30 विदनों क े भी र महाप्रबं क को ठेक े दार क े नाविम ी क े रूप में विनयुविक्त क े लिलए पैनल में से कम से कम दो नामों का सुझाव देने क े लिलए कहा जाएगा। महाप्रबं क उनमें से कम से कम एक को ठेक े दार क े नाविम ी क े रूप में विनयुक्त करेगा और साथ ही साथ पैनल से या पैनल क े बाहर से अन्य मध्यस्थों की शेर्ष संख्या को भी विनयुक्त करेगा, इस प्रकार विनयुक्त ीन मध्यस्थों में से 'अध्यक्ष मध्यस्थ' को विवति व इंविग करेगा। ठेक े दार क े नामांविक व्यविक्तयों क े नाम प्राप्त होने क े 30 विदनों क े भी र मध्यस्थ न्यायाति करण की विनयुविक्त का काय$ पूरा करेंगे। मध्यस्थों को नाविम कर े समय, यह सुविनतिश्च करना आवश्यक होगा विक उनमें से एक ने लेखा विवभाग में सेवा की है। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

19. मध्यस्थ ा और सुलह (संशो न) अति विनयम, 2015 क े लागू होने क े बाद, जब अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 को अन्य बा ों क े साथ-साथ इस बा का उपबं करने क े लिलए भी संशोति विकया गया है विक मध्यस्थ न्यायाति करण क े गठन में ीन सेवार या सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त विकये जाएं, ो उच्च न्यायालय द्वारा अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 (3) (बी) क े ह विन ा$रिर मध्यस्थ की विनयुविक्त की प्रविक्रया का सहारा लिलए विबना एक स्व ंत्र एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त करना उतिच नहीं है।

20. यह नोh करना उतिच है विक मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम, 1996 की ारा 11(6) क े ह दायर आवेदन में भी, प्रति वादी ने अनुबं की सामान्य श R क े विनविवदा समझौ े / खंड 64 क े खंड 1.2.54(बी)(i) क े संदभ$ में पक्षकारों क े बीच उत्पन्न होने वाले विववादों क े न्यायविनण$यन क े लिलए एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए प्राथ$ना की थी। अति विनयम की ारा 11(6) क े ह दायर यातिचका में, प्रति वादी ने श्री अतिvनी क ु मार कपूर को मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए विनयुक्त करने की प्राथ$ना की। इस प्रकार, प्रति वादी ने स्वयं अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 क े अनुसार मध्यस्थ की विनयुविक्त की मांग की। श्री अतिvनी क ु मार कपूर की मध्यस्थ क े रूप में विनयुविक्त, विनतिश्च रूप से, अपीलक ा$ क े लिलए स्वीकाय$ नहीं थी, tयोंविक यह पाया गया विक श्री अतिvनी कु मार कपूर मध्यस्थों क े पैनल में नहीं थे और इसलिलए, मध्यस्थ क े रूप में विनयुविक्त क े लिलए विवचार नहीं विकया जा सक ा था। चूंविक काय$ अनुबं का मूल्य 165 करोड़ रुपये से अति क था, अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 (3) (बी) क े अनुसार विववाद को क े वल ीन मध्यस्थों क े एक पैनल द्वारा हल विकया जा सक ा है। प्रति वादी द्वारा विनविवदा mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुबं क े खंड 1.2.54(बी)(i)/अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 क े संदभ$ में एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त की मांग करना सही नहीं था।

21. रेलवे ठेक े क े विवशिभन्न मामलों और स्व ंत्र मध्यस्थों की विनयुविक्त में हस् क्षेप को ध्यान में रख े हुए, यूविनयन ऑफ इंतिडया और अन्य बनाम एम.पी. गुप्ता (2004) 10 एससीसी 504 और यूविनयन ऑफ इंतिडया और अन्य बनाम वी.एस. इंजीविनयरिंरग (पी) लिलविमhेड (2006) 13 एससीसी 240 और अन्य विनण$यों को सन्दर्भिभ कर े हुए, यूविनयन ऑफ इंतिडया बनाम परमार क ं स्hutशन क ं पनी (2019) एससीसी ऑनलाइन एससी 442 क े मामले में, सुप्रीम कोh$ ने एक स्व ंत्र मध्यस्थ की विनयुविक्त को रद्द कर विदया और महाप्रबं क को विनदrश विदया रेलवे समझौ े क े खंड 64(3) क े ह मध्यस्थ की विनयुविक्त करे। परमार क ं स्hutशन क ं पनी क े मामले में प्रस् र (44) में, सुप्रीम कोh$ ने विनम्नानुसार ारिर विकया: - "44. विनष्कर्ष$ रूप में, हमारे सुविवचारिर राय में, मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए पक्षकारों द्वारा आं रिरक प्रविक्रया क े रूप में अनुबं क े खंड 64 (3) क े ह विवविह प्रविक्रया का सहारा लिलए विबना उच्च न्यायालय द्वारा एक स्व ंत्र मध्यस्थ की विनयुविक्त करना उतिच नहीं था।"

22. प्रदीप विवनोद क ं स्hutशन क ं पनी (2019) एससीसी ऑनलाइन एससी 1467 क े मामले में परमार क ं स्hutशन क ं पनी क े अनुपा को लागू कर े हुए, सुप्रीम कोh$ ने माना विक मध्यस्थ की विनयुविक्त समझौ े क े अनुसार होनी चाविहए और उच्च न्यायालय द्वारा अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 की अनदेखी कर एक स्व ंत्र मध्यस्थ की विनयुविक्त करना सही नहीं था। परमार क ं स्hutशन क ं पनी और प्रदीप विवनोद क ं स्hutशन क ं पनी क े मामलों में यथा ारिर, उच्च न्यायालय द्वारा मध्यस्थों क े विनयुविक्त की अनुबं की सामान्य श R क े ह mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विवविह प्रविक्रया का सहारा लिलए विबना एक स्व ंत्र मध्यस्थ विनयुक्त करना उतिच नहीं था। प्रति: क $:- सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी अति विनयम की ारा 12(5) सपविठ अनुसूची VII क े ह मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े पात्र नहीं हैं और उन्हें मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त विकए जाने क े लिलए विवति क रूप से अपात्र बना विदया गया था।

23. 27.07.2018 विदनांविक पत्र क े माध्यम से, प्रति वादी ने मध्यस्थ की विनयुविक्त/मध्यस्थ न्यायाति करण क े गठन क े लिलए अनुरो विकया। उसी क े जवाब में, अपीलक ा$ ने 24.09.2018 को एक पत्र भेजा सिजसमें चार सेवार रेलवे अति कारिरयों को नाविम विकया गया था और प्रति वादी को चार अति कारिरयों की सूची में से विकन्हीं दो नामों का चयन करने और अपीलक ा$ को सूतिच करने क े लिलए कहा गया था। रिरकॉड$ से विदख ा है विक प्रति वादी ने अपने 26.09.2018 विदनांविक पत्र क े माध्यम से संशो न अति विनयम, 2015 की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त करने में अपनी असहमति व्यक्त की। अपने स्वयं क े पहले क े 24.09.2018 विदनांविक पत्र और प्रति वादी क े 26.09.2018 विदनांविक पत्र का उल्लेख कर े हुए, अपीलक ा$ ने विदनांक 25.10.2018 को एक संचार भेजा था सिजसमें चार सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों क े पैनल को मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए नाविम विकया गया था और प्रति वादी से जीसीसी क े खंड 64 (3) (बी) क े संदभ$ में सूची से विकन्हीं दो नामों का चयन करने और मध्यस्थ ा न्यायाति करण क े गठन क े लिलए पत्र की ारीख से ीस विदनों क े भी र अपीलक ा$ को सूतिच करने का अनुरो विकया था। अपीलक ा$ क े अनुसार, प्रति वादी ीस विदनों क े विन ा$रिर समय क े भी र पैनल से विकसी भी नाविम व्यविक्त का चयन करने में विवफल रहा। प्रति वादी ने अपीलक ा$ क े 25.10.2018 विदनांविक पत्र का जवाब mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA नहीं विदया न ही अपीलक ा$ द्वारा भेजे गए पैनल से दो मध्यस्थों क े नामों का सुझाव विदया। इसक े बजाय प्रति वादी ने 17.12.2018 को एक यातिचका दायर करक े एक स्व ंत्र एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए अति विनयम की ारा 11 (6) क े ह उच्च न्यायालय का दरवाजा खhखhाया।

24. प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता का क $ यह है विक अपीलक ा$ द्वारा विदनांक 25.10.2018 क े पत्र द्वारा प्रस् ाविव मध्यस्थों का पैनल, सिजसमें अपीलक ा$ क े सेवाविनवृत्त कम$चारी शाविमल हैं,अति विनयम की ारा 12(5) क े सपविठ अनुसूची VII। क े ह मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े पात्र नहीं हैं। प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता का आगे क $ यह है विक अपीलक ा$ द्वारा बनाए गए मध्यस्थों क े पैनल में वे व्यविक्त शाविमल हैं जो रेलवे कम$चारी या पूव$-रेलवे कम$चारी थे और इसलिलए, उन्हें मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त विकए जाने क े लिलए वै ाविनक रूप से अपात्र बना विदया गया है।

25. यह क $ दे े हुए विक मध्यस्थ क े रूप में सेवाविनवृत्त कम$चारिरयों की विनयुविक्त पर क े वल इसलिलए आक्षेप नहीं विकया जा सक ा tयोंविक मध्यस्थ एक पक्ष का सेवाविनवृत्त कम$चारी है, विवद्वान एएसजी ने वोस्hलपाइन शेनेन Gmb) h बनाम विदल्ली मेhuो रेल कॉप रेशन लिलविमhेड (2017) 4 एससीसी 665 क े मामले का अवलंब लिलया है। विवशिभन्न विनण$यों और संशो न अति विनयम,2015 की ारा 12 क े संशोति प्राव ान क े दायरे और सा वीं अनुसूची में प्रविवविष्टयों का उल्लेख करने क े बाद, सुप्रीम कोh$ ने कहा विक क े वल इसलिलए विक प्रति वादी - विदल्ली मेhuो रेल कॉप रेशन द्वारा ैयार विकये गये मध्यस्थों क े पैनल में सरकारी कम$चारी या पूव$ सरकारी कम$चारी हैं, यह स्वंय में ऐसे व्यविक्तयों को प्रति वादी-डीएमआरसी क े मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए अपात्र नहीं बना ा। यह कहा गया विक क ें द्र सरकार या क ें द्रीय लोक विनमा$ण विवभाग या साव$जविनक क्षेत्र क े उपक्रमों क े ह रेलवे में काम mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA करने वाले व्यविक्तयों को प्रति वादी-डीएमआरसी का कम$चारी या सलाहकार या परामश$दा ा नहीं माना जा सक ा है। वोस्hलपाइन शेनेन Gmb) h क े प्रस् र (26) में, सव च्च न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया: - "26. यह नहीं कहा जा सक ा है विक क े वल इसलिलए विक वह व्यविक्त एक सेवाविनवृत्त अति कारी है जो सरकार या अन्य वै ाविनक विनगम या साव$जविनक क्षेत्र क े उपक्रम से सेवाविनवृत्त हुआ है और उसका DMRC (विववाद में पक्ष) से कोई संबं नहीं है, उसे मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए अपात्र माना जाएगा। यविद विव ातियका की यही मंशा हो ी ो सा वीं अनुसूची में ऐसे व्यविक्तयों को भी शाविमल विकया गया हो ा। पूवा$ग्रह या पूवा$ग्रह की वास् विवक संभावना ऐसे उच्च योग्य और अनुभवी व्यविक्तयों से अपेतिक्ष नहीं है, क े वल इस आ ार पर विक उन्होंने क ें द्र सरकार या साव$जविनक उपक्रमों की सेवा की, ब भी जब उनका डीएमआरसी से कोई संबं नहीं था। इन व्यविक्तयों को पैनल में शाविमल करने का मुख्य कारण यह सुविनतिश्च करना है विक जब वे मध्यस्थ क े रूप में काय$ करें ो विववाद क े कनीकी पहलुओं को उनकी विवशेर्षज्ञ ा का उपयोग करक े उतिच रूप से हल विकया जाए । यहां यह भी उल्लेख विकया जा सक ा है विक विवति आयोग ने अं रा$ष्टuीय मध्यस्थ ा में विह ों क े hकराव पर आईबीए विदशाविनदrशों की लाल और नारंगी सूची से ैयार की गई अनुसूची को शाविमल करने का प्रस् ाव विदया था, इस विhप्पणी क े साथ विक इसे यह विन ा$रिर करने क े लिलए "माग$दश$क" क े रूप में माना जाएगा विक tया ऐसी परिरल्पिस्थति यां मौजूद हैं जो इस रह क े उतिच संदेह को जन्म दे ी हैं"। ऐसे व्यविक्त आईबीए विदशाविनदrशों की लाल या नारंगी सूची में भी शाविमल नहीं हैं। [अंडरलाइनिंनग जोड़ा गया] mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

26. हरिरयाणा सरकार पीडब्ल्यूडी हरिरयाणा (बी एंड आर) शाखा बनाम जी.एफ. hोल रोड प्राइवेh लिलविमhेड और अन्य (2019) 3 एससीसी 505 क े मामले में भी इसी म को दोहराया गया था सिजसमें, सुप्रीम कोh$ ने कहा विक समझौ े क े लिलए एक पक्षकार क े एक सेवाविनवृत्त कम$चारी की विनयुविक्त इस आ ार पर आक्षेविप नहीं की जा सक ी है विक वह समझौ े क े पक्षकारों में से एक का सेवाविनवृत्त / पूव$ कम$चारी है। वस् ु ः, मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए एक सेवाविनवृत्त कम$चारी की विनयुविक्त पर मध्यस्थ ा और सुलह (संशो न) अति विनयम, 2015 की ारा 12(5) क े ह कोई रोक नहीं है।

27. 25.10.2018 विदनांविक पत्र द्वारा, अपीलक ा$ ने अपने पैनल क े चार सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों की एक सूची अग्रेविर्ष की है, सिजससे प्रति वादी को मध्यस्थ क े रूप में नाविम विकए जाने वाले विकन्हीं दो नामों का सुझाव देने क े लिलए एक विवस् ृ विवकल्प विदया गया है, सिजसमें से एक को प्रति वादी -ठेक े दार का प्रति विनति त्व करने वाले मध्यस्थ क े रूप में नाविम विकया जाएगा। जैसा विक वोस्hलपाइन शेनेन Gmb) h (2017) 4 SCC 665 में कहा गया था, सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों को पैनल में शाविमल करने का मूल कारण यह सुविनतिश्च करना है विक मध्यस्थ क े रूप में काय$ कर े समय विववाद क े कनीकी पहलुओं को उनकी विवशेर्षज्ञ ा का उपयोग करक े उतिच रूप से हल विकया जाए। क े वल इसलिलए विक मध्यस्थों का पैनल रेलवे में काम करने वाले सेवाविनवृत्त कम$चारी हैं, उन्हें मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए अपात्र नहीं बना ा है। प्रति: क $: - अनुरो की ारीख से ीस विदनों क े भी र जवाब न देना अनुबं क े ह काय$ करने में विवफल ा। mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

28. प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता का कथन है विक 27.07.2018 विदनांविक पत्र क े माध्यम से, प्रति वादी ने विववाद को मध्यस्थ ा क े लिलए संदर्भिभ करने का अनुरो विकया था, लेविकन अपीलक ा$ द्वारा 27.07.2018 विदनांविक अनुरो की ारीख से ीस विदनों क े भी र कोई कदम नहीं उठाया गया था। यह कहा गया विक 17.12.2018 को, प्रति वादी ने एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए उच्च न्यायालय क े समक्ष अति विनयम की ारा 11 (6) क े ह आवेदन विकया, उस समय क अपीलक ा$ द्वारा अनुबं क े ह कोई कदम नहीं उठाया गया, सिसवाय 24.09.2018 और 25.10.2018 विदनांविक पत्र द्वारा दो मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त विकये जाने क े लिलए व्यविक्तयों की दो सूची भेजने क े जोविक विवति क रूप से अपात्र थे। इस संबं में, पुंज लॉयड लिलविमhेड बनाम पेhuोनेh एमएचबी लिलविमhेड (2006) 2 एससीसी 638 क े मामले का अवलंब लिलया गया। अति विनयम की ारा 11 (6) की प्रयोज्य ा को ध्यान में रख े हुए, पुंज लॉयड लिलविमhेड क े मामले में, सव च्च न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया:- "5. पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ताओं को सुनने क े बाद, हम इस बा से सं ुष्ट हैं विक अपील स्वीकार विकए जाने योग्य है। अपीलक ा$ क े विवद्वान अति वक्ता ने दा ार ल्पिस्वचविगयस$ लिलविमhेड बनाम hाhा फाइनेंस लिलविमhेड (2000) 8 एससीसी 151 क े मामले में इस न्यायालय द्वारा प्रति पाविद विवति का अवलंब लिलया है,सिजसमें इस न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया: "[जहां] क ारा 11 (6) का संबं है, यविद एक पक्ष दूसरे पक्ष से मध्यस्थ विनयुक्त करने की मांग कर ा है और विवरो ी पक्ष मांग क े 30 विदनों क े भी र विनयुविक्त नहीं कर ा है, ो विनयुविक्त का अति कार 30 विदनों की समाविप्त क े बाद स्व ः समाप्त नहीं हो ा है। यविद विवरो ी पक्ष मांग क े 30 विदनों क े बाद भी विनयुविक्त कर ा है, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लेविकन पहले पक्ष द्वारा ारा 11 क े ह न्यायालय में जाने से पहले, ो वह पया$प्त होगा। दूसरे शब्दों में, ारा 11 (6) क े ह उत्पन्न होने वाले मामलों में, यविद विवरो ी पक्ष ने मांग क े 30 विदनों क े भी र विनयुविक्त नहीं की है, ो विनयुविक्त का अति कार समाप्त नहीं विकया जा ा है, बल्पिल्क जारी रह ा है, लेविकन विनयुविक्त पहले पक्ष द्वारा ारा 11 क े ह मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए आवेदन दायर करने से पहले की जानी चाविहए। भी विवरो ी पक्ष का अति कार समाप्त हो ा है।" जैसा विक पुंज लॉयड लिलविमhेड क े मामले में कहा गया है, यविद विवरो ी पक्ष ने मांग क े ीस विदनों क े भी र मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए कोई आवेदन नहीं विकया है, ो विनयुविक्त करने का अति कार समाप्त नहीं हो ा बल्पिल्क जारी रह ा है; लेविकन विनयुविक्त एक मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए अति विनयम की ारा 11 क े ह आवेदन करने से पूव$ की जानी है। भी विवरो ी पक्ष का अति कार समाप्त हो ा है।

29. यूविनयन ऑफ इंतिडया बनाम भार बैhरी मैन्युफ ै tचरिंरग क ं पनी (पी) लिलविमhेड (2007) 7 एससीसी 684 क े मामले में, 30.03.2006 को, प्रति वादी ने एक मध्यस्थ की विनयुविक्त क े लिलए ारा 11(6) क े ह यातिचका दायर की। उस मामले में अपीलक ा$ भार संघ ने समझौ े क े खंड 24 क े ह 15.05.2006 को एकमात्र मध्यस्थ क े रूप में डॉ गी ा राव को विनयुक्त विकया। मामले क े ऐसे थ्यों और परिरल्पिस्थति यों क े आलोक में, पुंज लॉयड लिलविमhेड क े मामले विदये गये विनण$य को ध्यान में रख े हुए, सव च्च न्यायालय ने कहा विक "एक बार जब कोई पक्ष अति विनयम की ारा 11(6) क े ह एक आवेदन दायर कर ा है, ो उसक े बाद दूसरा पक्ष समझौ े क े ह मध्यस्थ विनयुक्त करने क े अपने अति कार को खो दे ा है। समझौ े क े खंड क े ह मध्यस्थ विनयुक्त करने का अति कार ब समाप्त हो जा ा है जब ारा 11(6) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यातिचका दूसरे पक्ष द्वारा न्यायालय क े समक्ष दायर कर मध्यस्थ की विनयुविक्त की मांग की जा ी है…..”।

30. जैसा विक पहले चचा$ की गई है, जीसीसी क े संशोति खंड 64 (3) (बी) क े अनुसार, जब महाप्रबं क को मध्यस्थ ा की लिललिख और वै मांग प्राप्त हो ी है, ो रेलवे मध्यस्थ क े रूप में काम करने क े लिलए सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों क े कम से कम चार नामों का एक पैनल भेजेगा। ठेक े दार को रेलवे द्वारा अनुरो भेजने की ारीख से ीस विदनों क े भी र महाप्रबं क को ठेक े दार क े नाविम ी क े रूप में विनयुविक्त क े लिलए पैनल में से कम से कम दो नामों का सुझाव देने क े लिलए कहा जाएगा। 27.07.2018 विदनांविक पत्र क े माध्यम से, प्रति वादी ने विववादों को सुलझाने क े लिलए एक मध्यस्थ की विनयुविक्त की मांग की है। अपीलक ा$ ने अपने 24.09.2018 विदनांविक पत्र (जो विक साठ विदनों की अवति क े भी र है) द्वारा खंड 64 (3) (ए) (ii) (जहां अति विनयम की ारा 12 (5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त कर विदया गया है) क े संदभ$ में मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए जेए ग्रेड क े चार सेवार रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल भेजा और प्रति वादी से अनुरो विकया विक वह सूची में से विकन्हीं दो का चयन करें और मध्यस्थ ा न्यायाति करण क े गठन क े लिलए जल्द से जल्द काया$लय को सूतिच करें। 26.09.2018 विदनांविक पत्र द्वारा, प्रति वादी ने संशो न अति विनयम, 2015 की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त करने में अपनी असहमति व्यक्त की। 25.10.2018 विदनांविक पत्र द्वारा, जीसीसी क े खंड 64 (3) (बी) क े संदभ$ में (जहां ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त नहीं विकया गया है) अपीलक ा$ ने मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए चार सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल नाविम विकया है और प्रति वादी से अनुरो विकया है विक सूची में से विकन्हीं दो का चयन करें और मध्यस्थ ा न्यायाति करण क े गठन क े लिलए पत्र की ारीख से ीस विदनों क े भी र अपीलक ा$ mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को सूतिच करें। प्रति वादी ने न ो अपना उत्तर भेजा है और न ही सूची से दो नामों का चयन विकया है और अपीलक ा$ को उत्तर विदया है। अपीलक ा$ को जवाब विदए विबना, प्रति वादी ने 17.12.2018 को उच्च न्यायालय क े समक्ष मध्यस्थ ा और सुलह अति विनयम की ारा 11 (6) क े ह यातिचका दायर की है। जब प्रति वादी ने 25.10.2018 विदनांविक सूचना का कोई जवाब नहीं भेजा, ो प्रति वादी का यह क $ देना उतिच नहीं है विक अति विनयम की ारा 11 क े ह आवेदन दालिखल करने से पहले मध्यस्थ न्यायाति करण की विनयुविक्त नहीं की गई है और मध्यस्थ ा न्यायाति करण क े गठन का अपीलक ा$ का यह अति कार अति विनयम की ारा 11(6) क े ह आवेदन दालिखल करने पर समाप्त हो जा ा है। प्रति: क $: - महाप्रबं क स्वयं मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े लिलए विवति ः अपात्र होने क े कारण, मध्यस्थ को नाविम करने क े लिलए पात्र नहीं हैं।

31. प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता का म यह है विक अति विनयम ारा 12(5) सपविठ अनुसूची VII क े आ ार पर, महाप्रबं क स्वयं मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त होने क े लिलए अपात्र हैं और इसलिलए, वह विकसी अन्य व्यविक्त को मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त नहीं कर सक ा। कथन का सार यह है विक "जो प्रत्यक्ष रूप से नहीं विकया जा सक ा, वह अप्रत्यक्ष रूप से नहीं विकया जा सक ा है"। अपने क $ क े समथ$न में, प्रति वादी क े विवद्वान अति वक्ता ने hीआरएफ लिलविमhेड बनाम एनज इंजीविनयरिंरग प्रोजेtट्स लिलविमhेड (2017) 8 एससीसी 377 क े मामले का अवलंब लिलया है सिजसमें सव च्च न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया: - "54. ऐसे संदभ$ में, विववाद का आ ार यह होगा विक tया एक अयोग्य मध्यस्थ, जैसे विक प्रबं विनदेशक, एक मध्यस्थ को नाविम कर सक ा है, जो अन्यथा योग्य और एक सम्माविन व्यविक्त हो सक ा है। जैसा विक पहले कहा गया है, हम न ो वस् ुविनष्ठ ा से संबंति हैं और न ही व्यविक्तग सम्मान से। हम क े वल प्रबं mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनदेशक क े अति कार या शविक्त से संबंति हैं। हमारे विवश्लेर्षण से, हम इस विनष्कर्ष$ पर पहुंचने क े लिलए बाध्य हैं विक एक बार मध्यस्थ कानून क े अनुसार अपात्र हो जाने पर, वह विकसी अन्य को मध्यस्थ क े रूप में नाविम नहीं कर सक ा है। अति विनयम की ारा 12(5) में विनविह विवति क े अनुसार मध्यस्थ अपात्र हो जा ा है। कानून में यह अकल्पनीय है विक जो व्यविक्त वै ाविनक रूप से अपात्र है वह विकसी व्यविक्त को नामांविक कर सक ा है। कहने की जरूर नहीं है विक एक बार बुविनयादी ढांचे क े ढह जाने क े बाद, अति रचना का प न होना य है। विबना चबू रे क े भवन नहीं बन सक ा। या इसे अलग रह से कहें ो, एक बार एकमात्र मध्यस्थ क े रूप में प्रबं विनदेशक की पहचान खो जाने क े बाद, विकसी और को मध्यस्थ क े रूप में नाविम करने की शविक्त समाप्त हो जा ी है। इसलिलए, उच्च न्यायालय द्वारा व्यक्त विकया गया विवचार पोर्षणीय नहीं है और हमारा यही कहना है।"

32. hीआरएफ लिलविमhेड क े मामले में, हालांविक न्यायालय ने कहा विक मध्यस्थ क े एक बार विवति ः अपात्र हो जाने पर, वह दूसरे को मध्यस्थ क े रूप में नाविम नहीं कर सक ा है, पैरा (50) में, न्यायालय ने एक और ल्पिस्थति क े बारे में चचा$ की है जहां दोनों संबंति पक्ष अपनी पसंद क े मध्यस्थ नाविम कर सक े हैं और यह विक वह दूसरे पक्ष की समान शविक्त द्वारा प्रति -सं ुलिल हो जाएगा। hीआरएफ लिलविमhेड क े विनण$य क े पैरा (50) में, सव च्च न्यायालय ने विनम्नानुसार ारिर विकया: - "50......हम अक े ले इस विवर्षय पर विवचार कर रहे हैं विक प्रबं विनदेशक क े विवति ः अपात्र होने क े बाद भी, tया वह मध्यस्थ नाविम करने क े योग्य है। दोहराव की कीम पर, हम कह सक े हैं विक जब दो पक्ष हो े हैं, ो एक मध्यस्थ को नाविम कर सक ा है और दूसरा दूसरे को विनयुक्त कर सक ा है। यह विबलक ु ल अलग ल्पिस्थति है। यविद कोई खंड है सिजसमें पक्षकारों से अपने संबंति मध्यस्थ को नाविम करना अपेतिक्ष है, ो नाविम करने क े उनक े अति कार पर सवाल नहीं उठाया जा सक ा है। वास् व में उस परिरल्पिस्थति में सिजस पर प्रश्न खड़ा विकया जा सक ा है वह है- अति विनयम और उससे जोड़ी गयी अनुसूतिचयों क े ह उपबंति प्रविक्रयात्मक अनुपालन और उनक े मध्यस्थों की पात्र ा …। ” [अंडरलाइनिंनग जोड़ा गया] mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

33. hीआरएफ लिलविमhेड में विदये गये विनण$य क े आ ार पर पर्विकन्स ईस्hमैन आर्विकhेtट्स डीपीसी और एक अन्य बनाम एचएससीसी (इंतिडया) लिलविमhेड (2019) एससीसी ऑनलाइन एससी 1517 क े मामले में, सव च्च न्यायालय ने ारिर विकया विक मामलों की दो श्रेशिणयां हो ी हैं। पहली, hीआरएफ लिलविमhेड वाले मामले जैसी हो ी है, सिजसमें प्रबं विनदेशक स्वयं मध्यस्थ क े रूप में नाविम हो ा है, सिजसक े पास विकसी अन्य व्यविक्त को मध्यस्थ क े रूप में विनयुक्त करने की अति रिरक्त शविक्त हो ी है। दूसरी श्रेणी में, प्रबं विनदेशक को स्वयं मध्यस्थ क े रूप में काय$ नहीं करना हो ा; बल्पिल्क मध्यस्थ क े रूप में अपनी पसंद या विववेकाति कार पर विकसी अन्य व्यविक्त को विनयुक्त करने क े लिलए अति क ृ हो ा है। यह देख े हुए विक यविद पहली श्रेणी में प्रबं विनदेशक अक्षम पाया गया ो दूसरी श्रेणी क े मामलों में भी हमेशा ऐसी ही अमान्य ा उत्पन्न होगी।पर्विकन्स ईस्hमैन क े पैरा (20) में, सुप्रीम कोh$ ने विनम्नानुसार ारिर विकया: - "20.....यविद, मामलों की पहली श्रेणी में, प्रबं विनदेशक अक्षम पाया गया, ो यह उस विह क े कारण था जो उसका विववाद क े परिरणाम में कहा जाएगा। इस प्रकार अमान्य ा का त्व इस रह क े परिरणाम या विनण$य में होने वाले विह से सी े संबंति और उत्पन्न होगा। यविद यह कसौhी हो, ो इसी रह की अमान्य ा हमेशा उत्पन्न होगी और दूसरी श्रेणी क े मामलों में भी होगी। यविद विववाद क े परिरणाम में उसका विह पूवा$ग्रह की संभावना क े आ ार क े रूप में लिलया जा ा है, ो यह हमेशा मौजूद रहेगा चाहे मामला पहली या दूसरी श्रेणी क े मामलों क े अं ग$ आ ा हो। हम जान े हैं विक यविद इस रह का विनगमन hीआरएफ लिलविमhेड क े मामले में इस न्यायालय क े विनण$य से विनकाला गया, ो ऐसे उपबं वाले सभी मामले सिजन पर हम विवचार कर े हैं,में समझौ े का एक पक्ष स्वयं मध्यस्थ की कोई विनयुविक्त करने क े लिलए अयोग्य होगा और यह क $ देने का विवकल्प हमेशा उपलब् होगा विक विववाद में विह बद्ध पक्ष या अति कारी या प्राति कारी को मध्यस्थ की विनयुविक्त करने का अति कार नहीं होगा।" mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA

34. पर्विकन्स ईस्hमैन क े मामले में hीआरएफ लिलविमhेड क े मामले में विदये गये विनण$य क े पैरा (50) का उल्लेख करने क े बाद, सुप्रीम कोh$ ने एक अलग ल्पिस्थति का उल्लेख विकया जहां दोनों पक्षों को अपनी पसंद क े मध्यस्थ को नाविम करने का लाभ है और ारिर विकया विक एक मध्यस्थ की विनयुविक्त करने का एक पक्ष का लाभ दूसरे पक्ष की समान शविक्त द्वारा प्रति सं ुलिल हो जाएगी। पैरा (21) में, यह विनम्नानुसार ारिर विकया गया: - "21..... प्रस् र का अगला वाtय, आगे दर्भिश कर ा है विक सिजन मामलों में दोनों पक्ष अपनी पसंद क े संबंति मध्यस्थों को नाविम कर सक े थे, वे पूरी रह से अलग ल्पिस्थति में पाए गए। कारण स्पष्ट है विक एक पक्ष को अपनी पसंद क े मध्यस्थ को नाविम करने से जो भी लाभ प्राप्त होगा, वह दूसरे पक्ष की समान शविक्त द्वारा प्रति सं ुलिल हो जाएगा….. ”

35. जैसा विक पहले चचा$ की गई है, मध्यस्थ ा और सुलह (संशो न) अति विनयम, 2015 क े बाद, रेलवे बोड$ ने 16.11.2016 विदनांविक अति सूचना द्वारा अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 को संशोति और अति सूतिच विकया है। खंड 64(3)(ए) (ii) क े अनुसार [जहां अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त कर विदया गया है], खंड 64(3)(ए)(i) क े अं ग$ न आने वाले मामले में, मध्यस्थ न्यायाति करण में मध्यस्थ क े रूप में ीन राजपवित्र रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा जो कविनष्ठ प्रशासविनक ग्रेड क े रैंक से नीचे नहीं होंगे या दो रेलवे राजपवित्र अति कारी होंगे जो कविनष्ठ प्रशासविनक रैंक से नीचे नहीं होंगे और एक सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी जो वरिरष्ठ प्रशासविनक अति कारी क े रैंक से नीचे सेवाविनवृत्त न हुआ हो। इस प्रयोजन क े लिलए, महाप्रबं क, रेलवे, द्वारा मध्यस्थ ा की लिललिख और वै मांग प्राप्त होने की ारीख से साठ विदनों क े भी र रेलवे क े एक या अति क विवभागों क े राजपवित्र रेलवे अति कारिरयों क े कम से कम चार नामों का mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एक पैनल भेजेगा। ठेक े दार को रेलवे से अनुरो भेजने की ारीख से ीस विदनों क े भी र ठेक े दार क े नाविमति यों क े रूप में विनयुविक्त क े लिलए पैनल में से कम से कम दो नामों का सुझाव महाप्रबं क को देने क े लिलए कहा जाएगा। महाप्रबं क कम से कम एक को ठेक े दार क े नाविम क े रूप में विनयुक्त करेगा और साथ ही पैनल से या पैनल क े बाहर से मध्यस्थों की शेर्ष संख्या को विनयुक्त करेगा, सिजसमें ीन विनयुक्त मध्यस्थों में से "पीठासीन अति कारी" को विनर्विदष्ट करेगा। महाप्रबं क, ठेक े दार क े नाविम ों क े नाम प्राप्त होने की ारीख से ीस विदनों क े भी र मध्यस्थ न्यायाति करण को विनयुक्त करने की प्रविक्रया को पूरा करेगा।

36. जीसीसी का खंड 64(3)(बी) मध्यस्थ की विनयुविक्त से संबंति है जहां अति विनयम की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त नहीं विकया गया है। जीसीसी क े खंड 64(3)(बी) क े ह, मध्यस्थ न्यायाति करण में मध्यस्थ क े रूप में ीन सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल शाविमल होगा जो वरिरष्ठ प्रशासविनक ग्रेड अति कारिरयों क े पद से नीचे सेवाविनवृत्त न हुए हों। इस उद्देश्य क े लिलए, महाप्रबं क द्वारा मध्यस्थ ा क े लिलए एक लिललिख और वै मांग प्राप्त होने की ारीख से साठ विदनों क े भी र रेलवे मध्यस्थ क े रूप में काम करने क े लिलए पैनल में शाविमल सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों क े कम से कम चार नामों का एक पैनल,उनकी सेवाविनवृलित्त की ारीख इंविग कर े हुए ठेक े दार को भेजेगा। ठेक े दार को रेलवे क े अनुरो क े प्रेर्षण की ारीख से ीस विदनों क े भी र ठेक े दार क े नाविमति यों की विनयुविक्त क े लिलए पैनल में से कम से कम दो नामों का सुझाव महाप्रबं क को देने क े लिलए कहा जाएगा। महाप्रबं क उनमें से कम से कम एक को ठेक े दार क े नाविम ी क े रूप में विनयुक्त करेगा और साथ ही पैनल से या पैनल क े बाहर से शेर्ष मध्यस्थों की विनयुविक्त करेगा, सिजसमें ीन मध्यस्थों में से "पीठासीन अति कारी" को विवति व इंविग करेगा। मध्यस्थ न्यायाति करण की विनयुविक्त की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रविक्रया ठेक े दार क े नाविम ों क े नाम प्राप्त होने क े ीस विदनों क े भी र पूरी की जाएगी। इस प्रकार, मध्यस्थ न्यायाति करण क े गठन में महाप्रबं क क े अति कार को प्रति वादी द्वारा चार नामों में से विकसी दो को चुनने की शविक्त द्वारा सं ुलिल विकया जा ा है और महाप्रबं क उनमें से कम से कम एक को ठेक े दार क े नाविम ी क े रूप में विनयुक्त करेगा।

37. व $मान मामले में, प्रति वादी द्वारा मध्यस्थ न्यायाति करण क े गठन क े लिलए अपीलाथ[3] को 27.07.2018 विदनांविक पत्र भेजे जाने क े बाद,अपीलाथ[3] ने मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए कविनष्ठ प्रशासविनक ग्रेड सेवार अति कारिरयों क े पैनल को नाविम कर े हुए 24.09.2018 को संचार भेजा और प्रति वादी को सूची में से विकन्हीं दो का चयन करने और महाप्रबं क क े काया$लय को सूतिच करने क े लिलए कहा। 26.09.2018 विदनांविक पत्र द्वारा, प्रति वादी ने संशो न अति विनयम, 2015 की ारा 12(5) की प्रयोज्य ा को अवमुक्त करने में अपनी असहमति व्यक्त की। प्रति वादी क े 26.09.2018 विदनांविक पत्र क े जवाब में, अपीलक ा$ ने मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए चार सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल, उनका विववरण दे े हुए, भेजा और प्रति वादी से अनुरो विकया विक सूची में से विकन्हीं दो का चयन करें और महाप्रबं क क े काया$लय को सूतिच करें। चूंविक प्रति वादी को पैनल क े चार नामों में से दो नामों का चयन करने की शविक्त दी गई है, इसलिलए अपीलक ा$ द्वारा अपने मध्यस्थ को नाविम करने की शविक्त प्रति वादी को दी गई चयन की शविक्त से प्रति -सं ुलिल हो जा ी है। इस प्रकार, महाप्रबं क की मध्यस्थ को नाविम करने की शविक्त प्रति वादी द्वारा सेवाविनवृत्त अति कारिरयों क े पैनल से सुझाए गए चार नामों में से दो नामांविक व्यविक्तयों में से विकसी एक का चयन करने की शविक्त द्वारा प्रति -सं ुलिल है। जीसीसी क े संशोति खंड 64(3)(ए)(ii) और 64(3)(बी) क े दृविष्टग, इसलिलए यह नहीं कहा जा सक ा है विक महाप्रबं क mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA मध्यस्थ क े रूप में काय$ करने क े लिलए अपात्र हो गए हैं। हम प्रति वादी क े विवपरी क $ में कोई मेरिरh नहीं पा े। hीआरएफ लिलविमhेड क े मामले का विनण$य व $मान मामले पर लागू नहीं हो ा है।

38. अनुबं की सामान्य श R क े संशोति खंडों में एक स्पष्ट प्राव ान है, खंड 64(3)(ए)(ii) और 64(3)(बी) क े अनुसार, मध्यस्थ न्यायाति करण में ीन राजपवित्र रेलवे अति कारिरयों का एक पैनल होगा [खंड 64(3)(ए)(ii)] और ीन सेवाविनवृत्त रेलवे अति कारी जो वरिरष्ठ प्रशासविनक ग्रेड अति कारिरयों क े पद से नीचे सेवाविनवृत्त न हुए हों [खंड 64(3)(बी)]। जब अनुबं में विवविनर्विदष्ट रूप से पैनल में से ीन मध्यस्थों सेवार या सेवाविनवृत्त से युक्त मध्यस्थ न्यायाति करण की विनयुविक्त का उपबं कर ा है, ो मध्यस्थों की विनयुविक्त पक्षकारों द्वारा अनुबं में यथा सहमति क े अनुसार होनी चाविहए। पक्षकारों क े बीच करार की और अनुबं की सामान्य श R की इस ल्पिस्थ क े कारण, अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64 (3) (ए) (ii) और 64 (3) (बी) की अनदेखी कर े हुए उच्च न्यायालय द्वारा एक स्व ंत्र एकमात्र मध्यस्थ की विनयुविक्त करना उतिच नहीं था और आक्षेविप आदेशों को बरकरार नहीं रखा जा सक ा।

39. परिरणामस्वरूप, पंचाh आवेदन संख्या 151 वर्ष$ 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा 03.01.2019 और 29.03.2019 को पारिर आक्षेविप आदेश अपास् विकये जा े हैं और इन अपीलों को स्वीकार विकया जा ा है। अपीलक ा$ को प्रति वादी-ठेक े दार को सूतिच कर े हुए आज से ीस विदनों की अवति क े भी र अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64(3)(बी) क े अनुसार चार सेवाविनवृत्त अति कारिरयों का एक नया पैनल भेजने का विनदrश विदया जा ा है। प्रति वादी ठेक े दार चार सुझाए गए नामों में से दो का चयन करेगा और नामांविक ों क े नाम प्राप्त होने की mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ारीख से ीस विदनों क े भी र अपीलक ा$ को सूतिच करेगा। प्रति वादी से संचार प्राप्त होने पर, अपीलक ा$ प्रति वादी से संचार की प्राविप्त की ारीख से ीस विदनों क े भी र अनुबं की सामान्य श R क े खंड 64(3)(बी) क े अनुसार मध्यस्थ न्यायाति करण का गठन करेगा। पक्षकारों को अपना-अपना खच$ वहन करना होगा।................................... (न्यायमूर्ति आर.भानुम ी).................................. (न्यायमूर्ति ए.एस.बोपन्ना)................................. (न्यायमूर्ति हृविर्षक े र्ष रॉय) नई विदल्ली विदसंबर 17, 2019 mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA