Yashistha Sahu v. Rajasthan State and Others

Supreme Court of India · 20 Jan 2020 · 2020 INSC 58
Deepak Gupta; Avinrudh Bose
Criminal Appeal No 127 of 2020 @ SLP (Crl) No 7390 of 2019
family appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld the Rajasthan High Court’s order directing the wife to return the child to the USA, emphasizing the child's best interests and respect for foreign custody orders in cross-border disputes.

Full Text
Translation output
भारत का सर्वो च्च न्यायालय
आपराधि क अपीलीय क्षेत्राधि कार
आपराधि क अपील संख्या 127/2020
(विर्वोशेष अनुमधित याधि%का (सीआरएल) संख्या 7390/2019)
यशिशता साहू ... अपीलकता.
बनाम
राजस्थान राज्य और अन्य ...प्रधितर्वोादी
विनर्ण.य
दीपक गुप्ता, न्याया ीश
JUDGMENT

1. अनुमधित दी गई।

2. यशिशता साहू (इसक े बाद पत्नी क े रूप में संदर्भिभत) और र्वोरुर्ण र्वोमा. (इसक े बाद पधित क े रूप में संदर्भिभत) ने भारत में विदनांक 30.05.2016 को शादी की। पधित पहले से ही संयुक्त राज्य अमेरिरका (बाद में यूएसए क े रूप में संदर्भिभत) में काम कर रहा था। पत्नी पधित क े साथ विदनांक 17.07.2016 को यूएसए %ली गई। विदनांक 03.05.2017 को इस युगल क े विकयारा र्वोमा. नाम की एक बेटी का जन्म हुआ। र्वोह यूएसए की नागरिरक है। पधित और पत्नी क े बी% संबं तनार्वोपूर्ण. हो गए और उन्होंने एक-दूसरे पर तरह-तरह क े आरोप-प्रत्यारोप लगाए। पत्नी ने विदनांक 25.08.2018 को नोरफोक जुर्वोेनाइल एंड डोमेस्टिस्टक रिरलेशंस धिडस्टिस्टRक्ट कोट. (इसक े बाद नोरफोक कोट. क े रूप में संदर्भिभत) में एक आपातकालीन सुरक्षा आदेश क े लिलए आर्वोेदन विकया, अपनी सुरक्षा क े लिलए प्राथ.ना की और पधित क े लिUलाफ एकतरफा प्रारंशिभक संरक्षर्ण आदेश पारिरत विकया गया। इसक े बाद, विदनांक 2020 INSC 58 29.08.2018 को, पत्नी ने उसी न्यायालय में एक याधि%का दायर की जिजसमें नाबालिलग बच्चे की एकमात्र अशिभरक्षा की मांग की गई थी। उसने यह प्राथ.ना करते हुए एक याधि%का भी दायर की विक पधित को उसे और नाबालिलग बच्चे को आर्भिथक सहायता देने का विनदWश विदया जाए। पक्षों क े बी% हुए समझौते क े संदभ. में उक्त न्यायालय ने विदनांक 26.09.2018 को एक आदेश पारिरत विकया। यह समझौता आदेश का विहस्सा है और विनम्नानुसार है: "विपता अक्टूबर, 2018 और नर्वोंबर, 2018 क े लिलए र्वोैर्वोाविहक विनर्वोास पर विकराए और उपयोविगताओं का भुगतान जारी रUेंगे। विपता एक अधि क ृ त कब्जेदार या पट्टा ारक क े रूप में मां को पट्टे में जोड़ देंगे। विपता को अक्टूबर और नर्वोंबर, 2018 क े लिलए 150 प्रधित सप्ताह और विदसम्बर 2018 में प्रधित सप्ताह क े लिलए 200 मां को बच्चे क े सहयोग क े लिलए अदा करने होंगे। पक्षकारों को एक उपाय तक पहुं%ने क े लिलए विमलकर काम करना होगा विक नर्वोंबर, 2018 क े बाद से र्वोैर्वोाविहक विनर्वोास पर कौन रहेगा। माँ अपने शैधिक्षक और व्यार्वोसाधियक अनुभर्वो क े अनुरूप रोजगार की तलाश करें। माता और विपता क े पास नाबालिलग बच्चे की संयुक्त कानूनी विहरासत है और बच्चे क े विपता की साझा शारीरिरक विहरासत गुरुर्वोार जिसतंबर, 27, 2018 @ दोपहर से शविनर्वोार 29 जिसतंबर, 2018 @ दोपहर तक रहेगी। इसक े बाद, पक्षकारों को पालन-पोषर्ण का समय विनम्नानुसार साझा करना होगा: माँ हर दूसरे सप्ताह में शविनर्वोार @ दोपहर से बु र्वोार @ दोपहर तक और र्वोैकस्टिeपक सप्ताह में शविनर्वोार @ दोपहर से मंगलर्वोार @ दोपहर तक बच्चे को रUेगी। विपता क े पास पालन-पोषर्ण का समय बु र्वोार @ दोपहर से शविनर्वोार तक और र्वोैकस्टिeपक सप्ताह में मंगलर्वोार @ दोपहर से शविनर्वोार @ दोपहर तक होगा (अथा.त प्रत्येक माता-विपता क े लिलए स्टिस्र्वोचिं%ग सप्ताह में 4 विदन, 3 विदन की छ ु ट्टी) माता-विपता एक-दूसरे को उधि%त नोविटस पर प्रधित शाम कम से कम 5 विमनट क े लिलए बच्चे क े साथ व्हाट्सएप कॉल करने की अनुमधित देंगे। बच्चे क े आदान-प्रदान को सुविर्वो ाजनक बनाने क े लिलए माता-विपता तीसरे तटस्थ पक्ष का उपयोग करेंगे। पक्षकार एक-दूसरे और तीसरे पक्ष क े साथ सहयोग करेंगे यविद दोपहर में बच्चे का अंतरर्ण संभर्वो नहीं हआ तो सभी पक्षकार अपने पासपोट., बच्चे क े पासपोट. सविहत, गार्जिजयन एड लिलटेन को सरेंडर कर देंगी। विदनांक 1 विदसंबर, 2018 तक माता को र्वोैर्वोाविहक विनर्वोास पर विनर्वोास करना होगा, जिजसक े बाद या तो माता परिरसर को Uाली कर देगी या उसक े बाद विकराए और उपयोविगताओं की पूरी जिजम्मेदारी ले लेगी।" इस आदेश क े अनुसार, अन्य बातों क े अलार्वोा, पधित को विकराए क े परिरसर में पत्नी को अधि क ृ त पट्टा ारक क े रूप में जोड़ना था और उन्हें अक्टूबर और नर्वोंबर, 2018 क े महीनों क े लिलए प्रधित सप्ताह $150 की दर से बच्चे को साप्ताविहक सहायता और विदसंबर, 2018 क े महीने क े लिलए प्रधित सप्ताह $200 का भुगतान करना था। बच्चे की संयुक्त, कानूनी विहरासत और साझा शारीरिरक विहरासत माता-विपता को दी गई थी। प्रत्येक माता-विपता को अलग-अलग पालन- पोषर्ण का समय विदया जाता है। समझौते क े अनुसार उधि%त नोविटस क े बाद बच्चे को व्हाट्सएप कॉल करक े दूसरे माता-विपता से बात करने की भी अनुमधित थी। यह ध्यान रUना महत्र्वोपूर्ण. है विक यह स्पष्ट रूप से उल्लेU विकया गया था विक पक्षकार एक-दूसरे क े साथ सहयोग करेंगी और तटस्थ तृतीय पक्ष की सहायता से सौहाद.पूर्ण. समा ान तक पहुं%ने का प्रयास करेंगी। यविद कोई समझौता संभर्वो नहीं था, तो उन्हें बच्चे क े पासपोट. सविहत अपने पासपोट. को अशिभभार्वोक एड लिलट को सरेंडर करना था। पत्नी को 1 विदसंबर, 2018 तक र्वोैर्वोाविहक विनर्वोास में रहने का विनदWश विदया गया था, जिजसक े बाद उसे परिरसर Uाली करना पड़ा या विकराए और उपयोविगताओं की पूरी जिजम्मेदारी लेनी पड़ी।

3. हमारे सामने यह विर्वोर्वोाविदत नहीं है विक पत्नी, बच्चे क े साथ यूएसए छोड़कर विदनांक 30.09.2018 को अथा.त् विदनांक 26.09.2018 क े बाद और 01.10.2018 से पहले भारत आई, जो विक नोरफोक कोट. क े समक्ष अगली तारीU तय की गई थी।

4. पधित को यह पता %लने पर विक उसकी पत्नी अपने बच्चे क े साथ अमेरिरका छोड़कर भारत आ गई है, उसने विदनांक 02.10.2019 को नॉरफ़ॉक कोट. क े समक्ष आपातकालीन राहत क े लिलए याधि%का दायर की। पधित क े पक्ष में एकपक्षीय आदेश पारिरत विकया गया जिजसक े तहत नॉरफ़ॉक कोट. ने पधित को बच्चे की एकमात्र कानूनी और शारीरिरक विहरासत दी और पत्नी को बच्चे क े साथ यूएसए लौटने का विनदWश विदया। नोरफोक कोट. क े आदेश विदनांक 26.09.2018 का उल्लंघन करने पर पत्नी क े लिUलाफ र्वोारंट भी जारी विकया गया था।

5. पधित ने अपने नाबालिलग बच्चे को पेश करने क े लिलए राजस्थान उच्च न्यायालय क े समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण रिरट जारी करने क े लिलए एक याधि%का भी दायर की। उच्च न्यायालय ने विदनांक 01.07.2019 क े आक्षेविपत विनर्ण.य द्वारा पत्नी को 6 सप्ताह की अर्वोधि क े भीतर अपनी नाबालिलग बेटी क े साथ यूएसए लौटने का विनदWश विदया, ताविक यूएसए में न्याधियक अदालत पहले से लंविबत काय.र्वोाही में इस संबं में आगे क े आदेश पारिरत कर सक े । पधित को विनदWश विदया गया विक र्वोह पत्नी और नाबालिलग बच्चे और विकसी साथी क े रहने और आने-जाने की सभी व्यर्वोस्था करे। यह भी विनदWश विदया गया विक यविद पत्नी पधित क े घर में रहने की इच्छ ु क नहीं है, तो याधि%काकता. पधित उधि%त कीमत पर उसकी पसंद क े स्थान पर उसक े रहने की र्वोैकस्टिeपक व्यर्वोस्था करेगा।

6. राजस्थान उच्च न्यायालय क े इस फ ै सले से व्यशिथत होकर पत्नी ने र्वोत.मान अपील दायर की है।

7. हमने सुश्री मालविर्वोका राजकोविटया, अपीलकता. क े विर्वोद्वान र्वोकील और श्री प्रभजीत जौहर, उत्तरदाताओं क े विर्वोद्वान र्वोकील को विर्वोस्तार से सुना है। दोनों पक्षों की ओर से हमारे समक्ष कई आपलित्तयां उठाई गई हैं। सुश्री राजकोविटया द्वारा यह तक. विदया गया है विक बच्चे की अशिभरक्षा क े लिलए बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण रिरट नहीं होगी क्योंविक उसे अर्वोै रूप से विहरासत में नहीं कहा जा सकता है, क्योंविक बच्चा उस मां की विहरासत में था जो प्राक ृ धितक अशिभभार्वोक है। उसने यह भी तक. विदया विक उच्च न्यायालय ने पत्नी को यूएसए की यात्रा करने का विनदWश देकर गलती की है। उसका अगला तक. यह है विक बच्चा क े र्वोल ढाई साल का है और इसक े अलार्वोा एक लड़की होने क े नाते मां की देUभाल, ध्यान और सुरक्षा की आर्वोश्यकता होती है और इसलिलए, यह बच्चे क े विहत में है विक उसे मां की विहरासत में रUा जाए। संयुक्त राज्य अमेरिरका में नॉरफ़ॉक कोट. क े समक्ष काय.र्वोाही क े संबं में, यह तक. विदया गया है विक पत्नी अंग्रेजी क े ज्ञान की कमी क े कारर्ण नॉरफ़ॉक कोट. क े समक्ष काय.र्वोाही को समझने में असमथ. थी और र्वोह भी अमेरिरकी लहजे में बोली जाती थी। उसने यह भी प्रस्तुत विकया विक पत्नी को प्रदान की गई कानूनी सहायता एक र्वोकील की थी, जो एक 'कोक े शिशयान पुरुष' था, जिजसका अथ. है विक दोनों क े बी% संर्वोाद की कमी थी। यह भी तक. विदया गया है विक पत्नी ने कशिथत सहमधित आदेश पर ईमेल विदनांक 28.09.2018 क े माध्यम से आपलित्त जताई थी। र्वोह यह भी प्रस्तुत करती है विक नोरफोक कोट. द्वारा पारिरत आदेश पक्षकारों, विर्वोशेष रूप से पत्नी पर बाध्यकारी नहीं है और बच्चे क े बड़े विहत में पधित द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय क े समक्ष दायर रिरट याधि%का को Uारिरज कर विदया जाना %ाविहए था। सुश्री राजकोविटया द्वारा यह भी तक. विदया गया विक पधित र्वोक. परविमट क े आ ार पर यूएसए में काम कर रहा है, जो क े र्वोल 2020 तक र्वोै है और अगर उसका र्वोीजा / र्वोक. परविमट नहीं बढ़ाया गया तो पत्नी और बच्चे का भविर्वोष्य Uतरे में पड़ जाएगा।

8. दूसरी ओर, श्री जौहर का तक. है विक यह पत्नी थी, जिजसने नॉरफ़ॉक में अदालत का दरर्वोाजा UटUटाया और, समझौते क े द्वारा, माता-विपता दोनों को साझा पालन-पोषर्ण देने का आदेश पारिरत विकया गया। पत्नी को विर्वोशेष रूप से विनदWशिशत विकया गया था विक र्वोह न तो यूएसए छोड़े और न ही बच्चे को यूएसए से बाहर ले जाए, लेविकन उसने न्याधियक अदालत क े आदेशों का उल्लंघन विकया है, जिजसक े अधि कार क्षेत्र काे स्र्वोयं पत्नी ने आह्वान विकया था। उनक े अनुसार पत्नी को विकसी दूसरे देश की अदालत द्वारा पारिरत आदेशों का उल्लंघन करने और विफर भारतीय अदालतों में सुरक्षा की मांग की अनुमधित नहीं दी जा सकती है। उन्होंने यह भी प्रस्तुत विकया विक इस आ ुविनक युग में यह पालन-पोषर्ण का एक सर्वो.विर्वोविदत जिसद्धांत है विक एक विपता भी नाबालिलग बेटी क े लिलए एक उपयुक्त प्राक ृ धितक अशिभभार्वोक हो सकता है। अंत में, उन्होंने कहा विक पधित को पत्नी को तलाक देने में कोई विदल%स्पी नहीं है और उसका इरादा बच्चे और पत्नी क े साथ रहने का है। उन्होंने यह भी आग्रह विकया विक अगर पत्नी बच्चे क े साथ अमेरिरका आती है तो पधित पत्नी और बच्चे क े ठहरने और यात्रा की सभी व्यर्वोस्था करने को तैयार है। क्या बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण रिरट पोषर्णीय है?

9. यह आग्रह करने क े लिलए बहुत देर हो %ुकी है विक यविद बच्चा विकसी अन्य माता-विपता की विहरासत में है तो बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण का रिरट बनाए रUने योग्य नहीं है। इस संबं में कानून समय क े साथ बहुत विर्वोकजिसत हुआ है लेविकन अब यह एक विनधि…त स्टिस्थधित है विक अदालत बच्चे क े सर्वो त्तम विहत क े लिलए अपने असा ारर्ण रिरट क्षेत्राधि कार का आह्वान कर सकती है। यह एलिलजाबेथ विदनशॉ बनाम अरर्वोंद एम. विदनशॉ र्वो अन्य (1987)1 SCC 42, विनथ्या आनंद राघर्वोन बनाम राज्य (विदल्ली राष्टRीय राज ानी क्षेत्र) और अन्य (2017) 8 SCC 454 और लहरी सUामुरी बनाम सोभन कोडाली र्वो अन्य (2019) 7 SCC 311 में विकया गया है। इन सभी मामलों में रिरट याधि%काओं पर विर्वो%ार विकया गया। इसलिलए, हम अपीलकता. की पत्नी क े इस तक. को Uारिरज करते हैं विक राजस्थान उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट याधि%का पोषर्णीय नहीं थी।

10. हमें इस संबं में सभी विनर्ण.यों का उल्लेU करने की आर्वोश्यकता नहीं है, लेविकन विनत्य आनंद राघर्वोन (उपरोक्त) क े फ ै सले से विनम्नलिललिUत विटप्पशिर्णयों का उल्लेU करना उधि%त होगा: "46. उच्च न्यायालय विकसी विदए गए मामले में एक नाबालिलग बच्चे क े संबं में बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण रिरट जारी करने की याधि%का पर विर्वो%ार करते समय, बच्चे की र्वोापसी का विनदWश दे सकता है या सभी उपस्टिस्थधित को ध्यान में रUते हुए बच्चे की विहरासत को बदलने से इनकार कर सकता है। तथ्य और परिरस्टिस्थधितयाँ, जिजसमें ऊपर उजिल्ललिUत कानूनी स्टिस्थधित भी शाविमल है। एक बार विफर, हम यह जोड़ने की जeदबाजी कर सकते हैं विक प्रत्येक मामले में अदालत का विनर्ण.य, बच्चे क े कeयार्ण पर विर्वो%ार करते हुए उसक े सामने लाए गए मामले क े तथ्यों और परिरस्टिस्थधितयों की समग्रता पर विनभ.र होना %ाविहए, जो सर्वो परिर है। विर्वोदेशी अदालत क े आदेश को बच्चे क े कeयार्ण क े लिलए झुकना %ाविहए। इसक े अलार्वोा, बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण रिरट क े उपाय का उपयोग विकसी विर्वोदेशी न्यायालय द्वारा उसक े अधि कार क्षेत्र क े भीतर विकसी व्यविक्त क े लिUलाफ विदए गए विनदWशों क े क े र्वोल प्रर्वोत.न क े लिलए नहीं विकया जा सकता है और उस क्षेत्राधि कार को विनष्पादन न्यायालय में परिरर्वोर्तितत कर सकता है। विनस्संदेह, रिरट याधि%काकता. ऐसे अन्य उपाय का सहारा ले सकता है जो विर्वोदेशी अदालत द्वारा पारिरत आदेश को लागू करने क े लिलए कानून में अनुमत हो सकते हैं या विकसी भी अन्य काय.र्वोाही का सहारा लेने क े लिलए जो बच्चे की विहरासत क े लिलए भारतीय न्यायालय क े समक्ष कानूनी रूप से अनुमत हो सकती है, यविद ऐसी सलाह दी जाती है।

47. पूर्वो क्त बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण याधि%का में, उच्च न्यायालय को इस बात की जां% करनी %ाविहए विक क्या नाबालिलग विकसी अन्य व्यविक्त की र्वोै या गैरकानूनी विहरासत में है (रिरट याधि%का में नाविमत विनजी प्रधितर्वोादी)…”

11. इसक े अलार्वोा, कविनका गोयल बनाम विदल्ली राज्य क े मामले में, यह विनम्नानुसार आयोजिजत विकया गया था: "34. जैसा विक इस न्यायालय क े हाल क े विनर्ण.यों में व्याख्या की गई है, इस मुद्दे को नाबालिलग बच्चे की विहरासत का दार्वोा करने र्वोाले पक्षों क े अधि कारों क े आ ार पर तय नहीं विकया जाना %ाविहए लेविकन ध्यान लगातार इस बात पर रहना %ाविहए विक क्या अर्वोयस्क बच्चे क े सर्वो त्तम विहत का तथ्य मूल देश र्वोापस जाना है या अन्यथा है। तथ्य यह है विक अर्वोयस्क बच्चे की अपने मूल देश में र्वोापसी पर बेहतर संभार्वोनाएँ होंगी, अर्वोयस्क बच्चे की अशिभरक्षा प्रदान करने क े लिलए एक ठोस काय.र्वोाही में एक प्रासंविगक पहलू हो सकता है लेविकन बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण याधि%का में प्रारंशिभक मुद्दों की जां% करने क े लिलए विनर्णा.यक नहीं है। बंदी प्रत्यक्षीकरर्ण याधि%का क े प्रयोजन क े लिलए, न्यायालय को अर्वोयस्क बच्चे क े मूल देश से विनकाले जाने की परिरस्टिस्थधितयों पर ध्यान देना %ाविहए और विर्वोदेशी र्वोातार्वोरर्ण, भाषा, रीधित-रिरर्वोाज आविद का सामना करने क े लिलए एक जगह ले जाया जाता है, जो उसक े समग्र विर्वोकास और संर्वोारने में बा ा डालता है और क्या र्वोहां विनरंतरता हाविनकारक होगी…”

12. र्वोत.मान मामले में %ूंविक पत्नी संयुक्त राज्य अमेरिरका में न्याधियक अदालत क े आदेशों का उल्लंघन करते हुए नाबालिलग को भारत ले आई, बच्चे की उसकी विहरासत को सख्ती से कानूनी नहीं कहा जा सकता है। हालाँविक, हम अपीलकता. क े विर्वोद्वान र्वोकील से सहमत हैं विक उच्च न्यायालय अपीलकता. की पत्नी को यूएसए जाने का विनदWश नहीं दे सकता था। पत्नी बालिलग है और कोई भी अदालत उसे ऐसी जगह रहने क े लिलए बाध्य नहीं कर सकती जहां र्वोह नहीं रहना %ाहती। एक बच्चे की कस्टडी एक अलग मुद्दा है, लेविकन एक बच्चे की कस्टडी क े मुद्दे को तय करते हुए भी, हमारा स्पष्ट विर्वो%ार है विक र्वोयस्क पधित या पत्नी को रिरट क्षेत्राधि कार में दूसरे तनार्वोग्रस्त पधित या पत्नी क े साथ रहने क े लिलए कोई विनदWश जारी नहीं विकया जा सकता है। न्यायालयों की सविमधित

13. तेजी से जिसक ु ड़ती दुविनया में जहां र्वोयस्क विर्वोर्वोाह करते हैं और एक क्षेत्राधि कार से दूसरे क्षेत्राधि कार में स्थानांतरिरत हो जाते हैं, र्वोहां अधि कार क्षेत्र क े मुद्दे बढ़ रहे हैं विक विकस देश की अदालतों का अधि कार क्षेत्र होगा। कई मामलों में क्षेत्राधि कार दो देशों में विनविहत हो सकता है। यह मुद्दा महत्र्वोपूर्ण. है और इसे सार्वो ानी और संर्वोेदनशीलता क े साथ विनपटाया जाना %ाविहए। हालांविक बच्चे का विहत अत्यंत महत्र्वोपूर्ण. है और र्वोास्तर्वो में सर्वो परिर महत्र्वो का है, एक क्षेत्राधि कार क े न्यायालयों को सक्षम क्षेत्राधि कार र्वोाले न्यायालय क े आदेशों का सम्मान करना %ाविहए, भले ही र्वोह उसक े क्षेत्र से बाहर हो। जब एक माता-विपता द्वारा बच्चे को एक देश से दूसरे देश में ले जाया जाता है, विर्वोशेष रूप से अदालत द्वारा पारिरत आदेशों का उल्लंघन करते हुए, जिजस देश में बच्चे को विनकाला जाता है, उसे विहरासत क े प्रश्न पर विर्वो%ार करना %ाविहए और तय करें विक क्या अदालत को बच्चे की विहरासत क े सर्वोाल पर एक विर्वोस्तृत जां% करनी %ाविहए या माता-विपता को अधि कार क्षेत्र में बच्चे की विहरासत र्वोापस करने का आदेश देते हुए मामले को संक्षेप में विनपटाना %ाविहए जिजससे बच्चे को हटा विदया गया था, और बच्चे क े कeयार्ण से संबंधि त सभी पहलुओं की उसक े अपने देश की अदालत में जां% की जानी %ाविहए।

14. इस संबं में एलिलजाबेथ विदनशॉ (सुप्रा) में विदए गए फ ै सले का संदभ. विदया जा सकता है, जिजसमें यह न्यायालय एक ऐसे मामले से विनपट रहा था जहां पत्नी अमेरिरकी नागरिरक थी जबविक पधित भारत का नागरिरक था। उन्होंने अमेरिरका में शादी की और साल 1978 में उनक े घर एक बच्चे का जन्म हुआ। 1980 में दोनों क े बी% मतभेद पैदा हो गए और पत्नी ने तलाक क े लिलए याधि%का दायर कर दी। अमेरिरका में न्याधियक अदालत ने विदनांक 23.04.1982 को तलाक की धिडक्री द्वारा विर्वोर्वोाह को भंग कर विदया था और उसी धिडक्री द्वारा यह विनदWश विदया गया था विक 18 र्वोष. की आयु तक बच्चे की देUभाल, अशिभरक्षा और विनयंत्रर्ण पत्नी क े पास होगा। पधित को मुलाक़ात का अधि कार विदया गया था। सप्ताह क े अंत में मुलाक़ात क े अधि कार का लाभ उठाते हुए, पधित ने विदनांक 11.01.1986 को बच्चे को स्क ू ल से उठाया और भारत ले आया। पत्नी ने इस न्यायालय क े समक्ष भारत क े संविर्वो ान क े अनुच्छेद 32 क े तहत एक याधि%का दायर की। न क े र्वोल याधि%का पर विर्वो%ार विकया गया, बस्टिeक उसकी अनुमधित दी गई और हम पैरा 8 में इस न्यायालय की क ु छ महत्र्वोपूर्ण. विटप्पशिर्णयों का उल्लेU करना %ाहेंगे: "8. जब भी एक नाबालिलग बच्चे की विहरासत से संबंधि त एक अदालत क े सामने कोई सर्वोाल उठता है, तो इस मामले को पक्षकारों क े कानूनी अधि कारों क े विर्वो%ार पर नहीं तय विकया जाना %ाविहए लेविकन एकमात्र और प्रमुU कसौटी पर विक नाबालिलग क े विहत और कeयार्ण क े लिलए सबसे अच्छा क्या होगा। हमने अपने कक्षों में दो बार डस्टन का साक्षात्कार लिलया और उसक े साथ बात की। हमने पाया विक र्वोह उम्र में बहुत कोमल और पूरी तरह से अपरिरपक्र्वो है विक र्वोह अपनी Uुद की कोई स्र्वोतंत्र राय बनाने में सक्षम नहीं है विक उसे विकस माता-विपता क े साथ रहना %ाविहए। बच्चा अमेरिरकी नागरिरक है। विपछले क ु छ महीनों को छोड़कर जो विपता द्वारा अर्वोै अपहरर्ण की प्रविक्रया द्वारा भारत लाए जाने क े बाद से बीत %ुक े हैं, उसने अपना शेष जीर्वोन संयुक्त राज्य अमेरिरका में विबताया है और र्वोह र्वोहाँ स्क ू ल में अच्छा कर रहा था। हमारी सुविर्वो%ारिरत राय में यह डस्टन क े सर्वो त्तम विहत और कeयार्ण में होगा विक उसे संयुक्त राज्य अमेरिरका र्वोापस जाना %ाविहए और उस देश में एक सक्षम अदालत द्वारा उस मां की विहरासत और संरक्षकता क े तहत अपनी शिशक्षा जारी रUें, जिजसे ऐसी विहरासत और संरक्षकता सौंपी गई है। हम इस बात से भी संतुष्ट हैं विक याधि%काकता. जो माँ है, बच्चे क े लिलए सच्चे प्यार और स्नेह से भरी है और उसकी देUभाल करने, उसे शिशधिक्षत करने और उसक े उधि%त पालन-पोषर्ण क े लिलए हर संभर्वो तरीक े से ध्यान देने क े लिलए उस पर सुरधिक्षत रूप से भरोसा विकया जा सकता है। बच्चे ने इस देश में जड़ें नहीं जमाई हैं और र्वोह अभी भी संयुक्त राज्य अमेरिरका में अपने मूल स्थान पर प्राप्त होने र्वोाली स्टिस्थधितयों और र्वोातार्वोरर्णों का आदी और अभ्यस्त है। भारत में बच्चे की उपस्टिस्थधित अपहरर्ण क े एक अर्वोै काय. का परिरर्णाम है और विपता जो उक्त अधि विनयम का दोषी है, यह कहकर विकसी लाभ का दार्वोा नहीं कर सकता है विक उसने बच्चे को पहले ही पुर्णे क े विकसी स्क ू ल में डाल विदया है। विपता का आ%रर्ण ऐसा नहीं रहा है जिजससे हममें यह विर्वोश्वास पैदा हो विक र्वोह र्वोत.मान में बच्चे की अशिभरक्षा और संरक्षकता सौंपे जाने क े लिलए उपयुक्त और उपयुक्त व्यविक्त है।" र्वोी. रविर्वो %ंद्रन (डॉ.) (2) बनाम भारत संघ (यूओआई) और अन्य में यह विनम्नानुसार आयोजिजत विकया गया था: "29. अदालत क े आदेशों क े उल्लंघन में माता-विपता द्वारा एक देश से दूसरे देश में विनकाले गए बच्चे की विहरासत क े मामले से विनपटने क े दौरान जहां पक्षकारों ने अपना र्वोैर्वोाविहक घर स्थाविपत विकया था, जिजस देश में बच्चे को हटाया गया है, उस देश की अदालत को पहले इस सर्वोाल पर विर्वो%ार करना %ाविहए विक क्या अदालत विहरासत क े सर्वोाल पर विर्वोस्तृत जां% कर सकती है या मामले से विनपटने क े लिलए माता-विपता को देश में बच्चे की विहरासत र्वोापस करने क े लिलए संक्षेप में आदेश दे सकती है, जिजसमें से बच्चे को हटा विदया गया था और बच्चे क े कeयार्ण से संबंधि त सभी पहलुओं की उसक े अपने देश की अदालत में जां% की जानी %ाविहए। क्या अदालत को यह विर्वो%ार करना %ाविहए विक एक विर्वोस्तृत जां% आर्वोश्यक है, जाविहर है विक अदालत बच्चे क े कeयार्ण और Uुशी पर विर्वो%ार करने क े लिलए बाध्य है, सर्वो परिर विर्वो%ार क े रूप में और स्टिस्थरता और सुरक्षा, प्यार और समझ देUभाल और माग.दश.न और बच्चे क े %रिरत्र, व्यविक्तत्र्वो और प्रधितभा क े पूर्ण. विर्वोकास सविहत बच्चे क े कeयार्ण क े सभी प्रासंविगक पहलुओं पर ध्यान दें। ऐसा करते समय, उसकी अशिभरक्षा क े संबं में विकसी विर्वोदेशी न्यायालय क े आदेश को उधि%त महत्र्वो विदया जा सकता है; विर्वोदेशी विनर्ण.य का र्वोजन और प्रेरक प्रभार्वो प्रत्येक मामले की परिरस्टिस्थधितयों पर विनभ.र होना %ाविहए।

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30. हालांविक, ऐसे मामले में जहां अदालत बच्चे को उसक े अपने देश में र्वोापस करने क े लिलए संक्षेप में अपने अधि कार क्षेत्र का प्रयोग करने का फ ै सला करती है, मूल देश में अदालत क े अधि कार क्षेत्र को ध्यान में रUते हुए जिजसका मामले में उत्पन्न होने र्वोाले मुद्दों क े साथ विनकटतम संबं और सबसे घविनष्ठ संपक. है, अदालत बच्चे क े कeयार्ण से संबंधि त पहलुओं की जां% उसक े अपने मूल देश में अदालत द्वारा विकए जाने क े लिलए छोड़ सकती है क्योंविक यह बच्चे क े सर्वो त्तम विहत में हो सकता है...।"

15. विनत्य आनंद राघर्वोन (उपरोक्त) में, इस न्यायालय ने विनम्नलिललिUत दृविष्टकोर्ण लिलया: "42. इस न्यायालय का सुसंगत दृविष्टकोर्ण यह है विक यविद बच्चे को भारत क े भीतर लाया गया है, तो भारत की अदालतें विनम्नलिललिUत का सं%ालन कर सकती हैं: (ए) संधिक्षप्त जां%; या (बी) विहरासत क े सर्वोाल पर एक विर्वोस्तृत जां%। एक संधिक्षप्त पूछताछ क े मामले में, अदालत बच्चे को उस देश में र्वोापस करने का आदेश देना उधि%त समझ सकती है जहां से उसे हटाया गया था, जब तक विक ऐसी र्वोापसी बच्चे क े लिलए हाविनकारक साविबत न हो। दूसरे शब्दों में, संधिक्षप्त पूछताछ क े मामले में भी, विर्वोदेशी अदालत द्वारा बच्चे की र्वोापसी क े पहले से मौजूद आदेश क े बार्वोजूद, जिजस देश से उसे हटाया गया था, उस देश में बच्चे की र्वोापसी की राहत को अस्र्वोीकार करने क े लिलए न्यायालय Uुला है। एक विर्वोस्तृत जां% में, अदालत योग्यता की जां% करने क े लिलए बाध्य है विक बच्चे क े सर्वो परिर विहत और कeयार्ण कहां हैं और बच्चे की र्वोापसी क े लिलए विर्वोदेशी अदालत क े पहले से मौजूद आदेश क े तथ्य को क े र्वोल एक परिरस्टिस्थधित क े रूप में मानते हैं। विकसी भी मामले में, अदालत द्वारा विर्वो%ार विकया जाने र्वोाला महत्र्वोपूर्ण. प्रश्न (जिजस देश में बच्चे को हटा विदया गया है) बच्चे क े कeयार्ण क े अनुसार इस मुद्दे का उत्तर देना है। यह स्र्वोतंत्र रूप से प्रत्येक मामले क े तथ्यों और परिरस्टिस्थधितयों की समग्रता को ध्यान में रUते हुए विकया जाना %ाविहए। यहां तक विक हमारे सामने रUे गए कई विनर्ण.यों की बारीकी से जां% करने पर भी हमें इस संबं में कोई विर्वोरो ाभासी राय नहीं विमली। इसे अलग तरीक े से रUने क े लिलए, विहरासत क े मामले को तय करने या मूल राज्य में बच्चे की र्वोापसी क े लिलए अदालतों की दया क े जिसद्धांत को प्र ानता या अधि क भार नहीं विदया जा सकता है। इसक े बाद, लहरी सUामुरी (उपरोक्त) मामले में इस न्यायालय की एक अन्य पीठ ने विनत्य आनंद राघर्वोन (उपरोक्त) में विदए गए फ ै सले की व्याख्या करते हुए कहा: "41...अदालतों क े सौहाद. क े जिसद्धांत, अंतरंग संपक., नाबालिलग बच्चे की विहरासत क े मामले में विर्वोदेशी अदालतों द्वारा पारिरत आदेश, माता-विपता और बच्चे आविद की नागरिरकता, सर्वो त्तम विहत क े विर्वो%ार को ओर्वोरराइड नहीं कर सकते हैं और बच्चे क े कeयार्ण और बच्चे को विर्वोदेशी क्षेत्राधि कार में र्वोापस करने की विदशा में बच्चे को कोई शारीरिरक, मानजिसक, मनोर्वोैज्ञाविनक या अन्य नुकसान नहीं होना %ाविहए।

16. हमारा सुविर्वो%ारिरत मत है विक न्यायालयों की समानता का जिसद्धांत एक बहुत ही स्र्वोस्थ जिसद्धांत है। यविद विर्वोशिभन्न न्यायालयों में अदालतें एक-दूसरे द्वारा पारिरत आदेशों का सम्मान नहीं करती हैं, तो इससे विर्वोशिभन्न न्यायालयों में विर्वोरो ाभासी आदेश पारिरत होंगे। इस संबं में कोई विनधि…त विदशा-विनदWश विन ा.रिरत नहीं विकए जा सकते हैं और प्रत्येक मामले को अपने तथ्यों क े आ ार पर तय करना होता है। हालाँविक हम विफर से दोहरा सकते हैं विक बच्चे का कeयार्ण हमेशा सर्वो परिर रहेगा। बच्चे का कeयार्ण - सर्वो परिर विर्वो%ार

17. विनर्ण.यों की श्रेर्णी द्वारा यह अच्छी तरह से स्थाविपत कानून है विक बच्चे की अशिभरक्षा क े मामलों का विनर्ण.य करते समय, प्राथविमक और सर्वो परिर विर्वो%ार बच्चे का कeयार्ण है। अगर बच्चे क े कeयार्ण की ऐसी मांग है तो तकनीकी आपलित्तयां आड़े नहीं आ सकतीं। हालाँविक, बच्चे क े कeयार्ण का विनर्ण.य लेते समय यह क े र्वोल एक पधित या पत्नी का विर्वो%ार नहीं है जिजसे ध्यान में रUा जाना %ाविहए। अदालतों को विहरासत क े मुद्दे पर क े र्वोल इस आ ार पर फ ै सला करना %ाविहए विक बच्चे क े सर्वो त्तम विहत में क्या है।

18. विहरासत की लड़ाई में बच्चा पीविड़त है। अहंकार की इस लड़ाई और दो पधित- पत्नी क े बी% बढ़ती कटु लड़ाइयों और मुकदमों में, हमारा अनुभर्वो बताता है विक माता-विपता जो अन्यथा अपने बच्चे से प्यार करते हैं, अधि कतर एक तस्र्वोीर पेश करते हैं जैसे विक दूसरा पधित Uलनायक है और र्वोह अक े ले ही बच्चे की कस्टडी का हकदार है। इसलिलए अदालत को पधित-पत्नी में से प्रत्येक द्वारा कही गई बातों से बहुत शिभन्न होना %ाविहए।

19. एक बच्चे, विर्वोशेष रूप से कम उम्र क े बच्चे को माता-विपता दोनों क े प्यार, स्नेह, साथ, सुरक्षा की आर्वोश्यकता होती है। यह न क े र्वोल बच्चे की आर्वोश्यकता है बस्टिeक उसका बुविनयादी मानर्वो अधि कार भी है। जिसफ. इसलिलए विक माता-विपता आपस में लड़ रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है विक बच्चे को माता-विपता दोनों में से विकसी एक की देUभाल, स्नेह, प्यार या सुरक्षा से र्वोंधि%त कर विदया जाना %ाविहए। बच्चा कोई विनजœर्वो र्वोस्तु नहीं है जिजसे एक माता-विपता से दूसरे माता-विपता क े पास फ ें का जा सक े । प्रत्येक अलगार्वो, प्रत्येक पुनर्मिमलन का बच्चे पर दद.नाक और मनोदैविहक प्रभार्वो हो सकता है। इसलिलए, यह सुविनधि…त विकया जाना %ाविहए विक माता-विपता दोनों क े बी% बच्चे की विहरासत को क ै से और विकस तरीक े से साझा विकया जाना %ाविहए, यह तय करने से पहले अदालत प्रत्येक परिरस्टिस्थधित को बहुत सार्वो ानी से तौलती है। यहां तक विक अगर विहरासत एक माता-विपता को दी जाती है, तो दूसरे माता-विपता क े पास यह सुविनधि…त करने क े लिलए पया.प्त मुलाक़ात का अधि कार होना %ाविहए विक बच्चा दूसरे माता-विपता क े संपक. में रहे और दोनों माता-विपता में से विकसी एक क े साथ सामाजिजक, शारीरिरक और मनोर्वोैज्ञाविनक संपक. न Uोए। क े र्वोल विर्वोषम परिरस्टिस्थधितयों में ही माता-विपता में से विकसी एक को बच्चे से संपक. करने से मना विकया जाना %ाविहए। यविद माता-विपता में से विकसी एक को मुलाक़ात क े अधि कार या बच्चे क े साथ संपक. से र्वोंधि%त विकया जाना है, तो कारर्ण विनर्मिदष्ट विकए जाने %ाविहए। विहरासत क े मामलों से विनपटने र्वोाले न्यायालयों को विहरासत क े मुद्दों का फ ै सला करते समय मुलाक़ात क े अधि कारों की प्रक ृ धित, तरीक े और बारीविकयों को स्पष्ट रूप से परिरभाविषत करना %ाविहए।

20. भारत में मुलाक़ात क े अधि कार की अर्वो ारर्णा पूरी तरह से विर्वोकजिसत नहीं है। अधि कांश अदालतें एक पधित या पत्नी को कस्टडी देते समय दूसरे पधित या पत्नी को मुलाक़ात का अधि कार देने का कोई आदेश पारिरत नहीं करती हैं। जैसा विक पहले देUा गया है, एक बच्चे को माता-विपता दोनों का प्यार और स्नेह पाने का मानर्वोीय अधि कार है और अदालतों को यह सुविनधि…त करने क े लिलए आदेश पारिरत करना %ाविहए विक बच्चा अपने माता-विपता में से विकसी एक क े प्यार, स्नेह और साथ से पूरी तरह से र्वोंधि%त नहीं है।

21. आम तौर पर, यविद माता-विपता एक ही शहर या क्षेत्र में रह रहे हैं, तो जिजस पधित या पत्नी को विहरासत में नहीं लिलया गया है, उसे क े र्वोल सप्ताहांत में मुलाक़ात का अधि कार विदया जाता है। यविद पधित-पत्नी एक-दूसरे से दूर रह रहे हैं, तो बार-बार ब्रेक लेकर बच्चे की शिशक्षा में बा ा उत्पन्न करना संभर्वो नहीं होगा या बच्चे क े विहत में होगा और, ऐसे मामलों में मुलाक़ात क े अधि कार लंबे सप्ताहांत, अर्वोकाश और छ ु विट्टयों पर विदए जाने %ाविहए। र्वोत.मान जैसे मामलों में जहां माता-विपता दो अलग- अलग महाद्वीपों में हैं, माता-विपता को अधि कतम मुलाक़ात अधि कार देने का प्रयास विकया जाना %ाविहए, जिजन्हें विहरासत से र्वोंधि%त विकया गया है।

22. 'मुलाक़ात क े अधि कार' क े अलार्वोा, 'संपक. अधि कार' भी बच्चे क े विर्वोकास क े लिलए महत्र्वोपूर्ण. हैं, Uासकर ऐसे मामलों में जहाँ माता-विपता दोनों अलग-अलग राज्यों या देशों में रहते हैं। आ ुविनक युग में संपक. अधि कारों की अर्वो ारर्णा टेलीफोन, ईमेल या र्वोास्तर्वो में संपक. की सबसे अच्छी प्रर्णाली महसूस करती है, यविद पार्मिटयों क े बी% उपलब् हो तो र्वोीधिडयो कॉलिंलग होनी %ाविहए। इंटरनेट की बढ़ती उपलब् ता क े साथ, र्वोीधिडयो कॉलिंलग अब बहुत आम हो गई है और बच्चों की कस्टडी क े मुद्दे से विनपटने र्वोाली अदालतों को यह सुविनधि…त करना %ाविहए विक जिजस माता-विपता को बच्चे की कस्टडी से र्वोंधि%त विकया गया है, उसे अपने बच्चे से जिजतनी बार संभर्वो हो बात करने में सक्षम होना %ाविहए। जब तक कोई अलग दृविष्टकोर्ण लेने क े लिलए विर्वोशेष परिरस्टिस्थधितयाँ न हों, तो जिजस माता-विपता को बच्चे की कस्टडी से र्वोंधि%त विकया जाता है, उसे अपने बच्चे से प्रधितविदन 510 विमनट बात करने का अधि कार होना %ाविहए। यह बच्चे और माता-विपता क े बी% क े बं न को बनाए रUने और सु ारने में मदद करेगा, जिजसे विहरासत से र्वोंधि%त विकया गया है। यविद र्वोह बं न बना रहे तो बच्चे को छ ु विट्टयों या छ ु विट्टयों क े दौरान एक घर से दूसरे घर जाने में कोई कविठनाई नहीं होगी। इसका उद्देश्य यह है विक यविद हम बच्चे को दो माता-विपता र्वोाला एक Uुशहाल घर नहीं दे सकते हैं तो बच्चे को एक-एक माता-विपता क े साथ दो Uुशहाल घरों का लाभ दें।

23. जहां तक र्वोत.मान मामले का संबं है, हमने जो ऊपर रUा है उसे ध्यान में रUते हुए, हम दोनों पधित-पत्नी द्वारा लगाए गए विर्वोशिभन्न आरोपों और प्रधित आरोपों में नहीं जा रहे हैं। हालांविक, हम पधित का बयान दज. करते हैं विक उसका अपनी पत्नी को तलाक देने का कोई इरादा नहीं है। हम क े र्वोल यह आशा कर सकते हैं विक युगल या तो स्र्वोयं या मध्यस्थता क े माध्यम से अपने विर्वोर्वोादों को सुलझा सकते हैं जो न क े र्वोल उनक े विहत में बस्टिeक विकयारा क े विहत में भी होगा। ऐसा कहने क े बाद, %ूँविक इस स्तर पर उनक े बी% का विर्वोर्वोाद अनसुलझा रहता है, इसलिलए हम कारकों को सू%ीबद्ध करेंगे और उन्हें उधि%त तरीक े से तौलेंगे ताविक यह देUा जा सक े विक बच्चे क े विहत में सबसे अच्छा क्या है:

24. बच्चे की उम्र - बच्चे की उम्र 3 साल से कम हो। र्वोह एक लड़की है और इसलिलए, इसमें कोई संदेह नहीं हो सकता विक उसे शायद अपने विपता से अधि क अपनी माँ की आर्वोश्यकता है। यह पत्नी क े पक्ष में कारक है।

25. बच्चे की राष्टRीयता बच्चा जन्म से यूएसए का नागरिरक है। उसक े विपता पहले से ही यूएसए में काम कर रहे थे जब उनकी शादी हुई। हमें बताया जाता है विक शादी से पहले मां एक बार अमेरिरका गई थीं और जब उनकी शादी हुई तो उन्हें इस बात की जानकारी थी विक उन्हें र्वोहां बसना पड़ सकता है। बच्चे का जन्म संयुक्त राज्य अमेरिरका क े एक अस्पताल में हुआ था और माँ प्रसर्वो क े लिलए भारत र्वोापस नहीं आई थी, जो दशा.ता है विक उस समय माता-विपता बच्चे को अमरीका का नागरिरक बनाना %ाहते थे। %ूंविक बच्चा जन्म से संयुक्त राज्य अमेरिरका का नागरिरक है और उस देश का पासपोट. रUता है, विहरासत क े मुद्दे पर विनर्ण.य लेते समय हमें इस कारक को ध्यान में रUना होगा।

26. नॉरफ़ॉक कोट. में काय.र्वोाही यह पत्नी है जिजसने संयुक्त राज्य अमेरिरका में सक्षम अधि कार क्षेत्र की अदालत, यानी नॉरफ़ॉक जुर्वोेनाइल एंड डोमेस्टिस्टक रिरलेशंस धिडस्टिस्टRक्ट कोट. का दरर्वोाजा UटUटाया। उसने पहले एक अंतरिरम आदेश क े लिलए आर्वोेदन विकया और बच्चे की एकमात्र कानूनी और शारीरिरक विहरासत की मांग करने र्वोाली याधि%का भी दायर की। समझौते क े आ ार पर पधित क े पेश होने क े बाद एक सहमधित आदेश पारिरत विकया गया जिजसमें दोनों पक्षों को विदनांक 01.12.2018 तक र्वोैर्वोाविहक विनर्वोास में रहने का विनदWश विदया गया। साथ ही विनदWश विदया विक यविद उक्त धितशिथ तक मामला नहीं सुलझाया जा सका तो पत्नी अपने रहने आविद की व्यर्वोस्था स्र्वोयं करेगी। साझा पालन-पोषर्ण का भी प्रार्वो ान विकया गया था। उक्त आदेश का पूरी तरह से उल्लंघन करते हुए पत्नी बच्चे को र्वोापस भारत ले आई।

27. हम पत्नी की ओर से उठाए गए इस तक. से सहमत नहीं हैं विक र्वोह नॉरफ़ॉक कोट. क े आदेश को समझ नहीं पाई। यह पहली बार नहीं है जब पत्नी ने कोट. का दरर्वोाजा UटUटाया हो। पत्नी शिशधिक्षत है। र्वोह यूएसए में र्वोॉलमाट. में काम कर रही थी। उसने एक एनजीओ से संपक. विकया था और विदनांक 09.09.2017 को पारसीपनी पुलिलस विर्वोभाग को अपने पधित क े लिUलाफ एक ईमेल भेजा था। विदनांक 03.05.2018 को पधित ने पत्नी क े लिUलाफ अंतरिरम सुरक्षा आदेश प्राप्त विकया। इसक े बाद पत्नी नाबालिलग बेटी क े साथ विदनांक 16.05.2018 को भारत लौटी और विदनांक 16.07.2018 को र्वोापस अमेरिरका %ली गई। कहा जाता है विक पधित द्वारा दायर की गई शिशकायत को विदनांक 26.07.2018 को Uारिरज कर विदया गया था। विदनांक 25.08.2018 को पत्नी ने पुलिलस को फोन विकया क्योंविक उसक े अनुसार र्वोह अपनी और अपनी नाबालिलग बेटी की सुरक्षा को लेकर डरी हुई थी। उसक े अनुसार उसने विदनांक 25.08.2018 को एक आपातकालीन सुरक्षात्मक आदेश क े लिलए आर्वोेदन विकया था जो उसक े पक्ष में पारिरत विकया गया था। पत्नी ने विदनांक 29.08.2018 को नॉरफ़ॉक कोट. क े समक्ष नाबालिलग बच्चे की एकमात्र कानूनी और शारीरिरक विहरासत की मांग करते हुए याधि%का दायर की। विदनांक 26.09.2018 को सहमधित आदेश पारिरत विकया गया। यहां यह बताना भी मुनाजिसब होगा विक पत्नी क े मुताविबक र्वोह र्वोाशिंशगटन स्टिस्थत भारतीय दूतार्वोास को मदद क े लिलए ईमेल भी भेजती रही थी। पत्नी ने पूरक पोषर्ण सहायता काय.क्रम क े लिलए भी आर्वोेदन विकया, जो उसक े अनुसार कम आय र्वोाले अमेरिरविकयों को मेज पर भोजन देने में मदद करने क े लिलए एक पोषर्ण काय.क्रम है।

28. पत्नी अपने अधि कारों क े प्रधित जागरूक है। जरूरत पड़ने पर र्वोह पुलिलस, मजिजस्टRेट, डोमेस्टिस्टक कोट. और फ े डरल प्रोग्राम्स की मदद लेती रही है। र्वोह र्वोॉलमाट. क े साथ भी काम कर रही थी और हम उसक े इस तक. को स्र्वोीकार करने में असमथ. हैं विक अनुर्वोादक की कमी क े कारर्ण र्वोह समझ नहीं पाई विक क्या हो रहा है। हम इस बात से भी सहमत होने में असमथ. हैं विक अब उसक े र्वोकील ने उसे समझौते में प्रर्वोेश करने क े लिलए मजबूर विकया। विकसी भी घटना में अगर उसे उस तरीक े क े संबं में कोई शिशकायत है जिजस तरीक े से विनपटारा विकया गया था, तो उधि%त तरीका यह था विक र्वोह इस मुद्दे को नॉरफ़ॉक कोट. क े सामने उठाए। नोरफोक कोट. क े आदेशों पर कोई भी भारतीय न्यायालय अपील नहीं कर सकता है। हमारा स्पष्ट विर्वो%ार है विक उसने जो दलील दी है र्वोह क े र्वोल नॉरफ़ॉक कोट. क े आदेशों क े अपने पेटेंट उल्लंघन को सही ठहराने क े लिलए है।

29. जाविहर तौर पर तीन साल से कम उम्र क े बच्चे की इस मामले में सुनर्वोाई नहीं हो सकती, लेविकन शिशक्षा, सामाजिजक सुरक्षा आविद की सुविर्वो ाओं को ध्यान में रUते हुए, जो संयुक्त राज्य अमेरिरका में उपलब् होंगी, हमारा विर्वो%ार है विक बच्चे को क े र्वोल इस आ ार पर र्वोंधि%त नहीं विकया जाना %ाविहए विक मां अमेरिरका र्वोापस नहीं जाना %ाहती है।

30. र्वोीजा मुद्दा अपीलकता. पत्नी क े र्वोकील ने इस तथ्य पर बहुत जोर विदया है विक पधित का र्वोीजा/र्वोक. परविमट 2020 में समाप्त हो रहा है। यह अपने आप में पधित को बच्चे की कस्टडी से इनकार करने का कोई आ ार नहीं है। यविद उसका र्वोीज़ा/र्वोक. परविमट बढ़ाया जाता है तो कोई समस्या उत्पन्न नहीं होगी लेविकन यविद उसका र्वोीज़ा/र्वोक. परविमट नहीं बढ़ाया जाता है, तो हम इस संबं में फ ै सले क े बाद क े विहस्से में विनदWश देंगे। पधित क े र्वोक. र्वोीजा/र्वोक. परविमट को बढ़ाया जाना है या नहीं, इसका फ ै सला यूएसए क े अधि कारिरयों को करना है और यह कोट. इस पर कोई विटप्पर्णी नहीं कर सकता है। हम यह मानकर कोई आदेश पारिरत नहीं कर सकते विक र्वोीजा की अर्वोधि नहीं बढ़ाई जाएगी।

31. बच्चे क े विहत में सबसे अच्छा क्या है, यह तय करते समय कई कारकों को ध्यान में रUा जाना %ाविहए। कोई कठोर और तेज़ विनयम विन ा.रिरत नहीं विकए जा सकते हैं और प्रत्येक मामले को अपने गुर्ण-दोष क े आ ार पर तय करना होता है। हम इस बात से भी बेUबर नहीं हैं विक जब दो माता-विपता आपस में लड़ रहे हों तो बच्चे को पूरी तरह शांधितपूर्ण. माहौल मुहैया कराना असंभर्वो है। बच्चे की कस्टडी का दार्वोा करने र्वोाले संबंधि त माता-विपता दोनों क े सभी लाभ-हाविन काे आंकने क े बाद अदालत को यह तय करना होगा विक बच्चे क े सर्वो त्तम विहत में क्या है। जाविहर है, विहरासत का ऐसा कोई भी आदेश बच्चे को एक आदश. र्वोातार्वोरर्ण नहीं दे सकता क्योंविक र्वोह सही र्वोातार्वोरर्ण तभी उपलब् होगा जब दोनों माता-विपता बच्चे क े विहतों को अपने मतभेदों से ऊपर रUेंगे। यहां तक विक अगर माता-विपता अलग हो जाते हैं, तो र्वोे एक ऐसी व्यर्वोस्था तक पहुं% सकते हैं जहां बच्चा ऐसे माहौल में रह सक े जो उसक े विर्वोकास क े लिलए यथोधि%त अनुक ू ल हो। जहां तक र्वोत.मान मामले का संबं है, बच्चे की उम्र क े अलार्वोा मां क े पक्ष में क ु छ भी नहीं है। उसने Uुद नॉरफ़ॉक में न्याधियक अदालत का दरर्वोाजा UटUटाया। उसने एक समझौता विकया जिजसक े आ ार पर एक सहमधित आदेश पारिरत विकया गया। उसने उस आदेश का उल्लंघन विकया है और भारत र्वोापस आ गई है और यह एक ऐसा कारक है जिजसे हमें उसक े लिUलाफ रUना होगा।

32. उपरोक्त %%ा. क े मद्देनजर, हमारा स्पष्ट मत है विक माता-विपता दोनों की माता- विपता की देUभाल करना बच्चे क े सर्वो त्तम विहत में है, यविद संयुक्त नहीं तो कम से कम अलग हो जाना %ाविहए। हमारा स्पष्ट विर्वो%ार है विक यविद पत्नी अमेरिरका र्वोापस जाने की इच्छ ु क है तो विहरासत, भरर्ण-पोषर्ण आविद क े संबं में सभी आदेशों को संयुक्त राज्य अमेरिरका क े न्याधियक न्यायालय द्वारा देUा जाना %ाविहए। भारत में एक रिरट अदालत इस तरह की काय.र्वोाही में विनदWश नहीं दे सकती है विक एक र्वोयस्क पत्नी को अमेरिरका जाना %ाविहए। इसलिलए हम दो भागों में विनदWश जारी कर रहे हैं। पहला भाग तब लागू होगा जब अपीलकता. पत्नी पधित द्वारा अपने हलफनामे में विदए गए विनयमों और शत¢ पर यूएसए जाने को तैयार है। दूसरा भाग लागू होगा यविद र्वोह यूएसए जाने की इच्छ ु क नहीं है, तो पधित को बच्चे की कस्टडी क ै से दी जानी %ाविहए। पहला भाग

33. (ए) शुरुआत में हम देUते हैं विक पधित ने एक हलफनामा दायर विकया है, जिजसका प्रासंविगक भाग इस प्रकार है: “(2) विक मैं हमेशा अपनी पत्नी को नाबालिलग बच्चे क े साथ हमारे पास र्वोापस आने क े लिलए कहता रहा हूं ताविक हम सभी एक Uुशहाल परिरर्वोार क े रूप में अमेरिरका में एक साथ रह सक ें । इस संबं में मैंने उन्हें र्वोापस आने क े लिलए विर्वोशिभन्न ईमेल भेजे हैं और मैं अपनी पत्नी और नाबालिलग बच्चे क े अमेरिरका र्वोापस आने की यात्रा का सारा U%. र्वोहन करने को तैयार हूं। (3) विक मैं आगे र्वो%न देता हूँ विक मैं अपनी पत्नी और अर्वोयस्क बच्चे क े ठहरने और यात्रा व्यय (हर्वोाई विटकट सविहत) की सारी व्यर्वोस्था अपने घर में करू ँ गा, जो एक दो बेडरूम का अपाट.मेंट है जिजसक े लिलए मैं प्रधित माह 1500 अमेरिरकी डॉलर का विकराया दे रहा हूं। (4) विक यविद मेरी पत्नी व्यविक्तगत कारर्णों से मेरे साथ रहने को तैयार नहीं है, तो मैं अलग हो जाऊ ँ गा और कहीं और रहने की व्यर्वोस्था करू ँ गा। (5) विक मैं घर क े विदन-प्रधितविदन क े सभी U%¢ का ध्यान रUने का र्वो%न देता हूं, मेरी पत्नी और बच्चे दोनों क े लिलए धि%विकत्सा बीमा, विबजली, गैस अन्य सभी आकस्टिस्मक U%. जब तक अमेरिरकी न्यायालय इस संबं में प्रार्वो ान करता है । (6) विक मैं अमेरिरका में एक नस.री स्क ू ल में प्रर्वोेश सविहत नाबालिलग बच्चे की शिशक्षा क े लिलए सभी U%¢ को र्वोहन करने का र्वो%न देता हूं, जो भोजन और स्क ू ल की आपूर्तित सविहत प्रधित माह लगभग US $1000$1500 का होगा। मैं यह भी र्वो%न देता हूं विक स्क ू ल में नाबालिलग बच्चे क े जीर्वोन क े विहस्से क े रूप में स्क ू ल की आपूर्तित और अन्य आर्वोश्यकताओं का U%. भी मेरे द्वारा र्वोहन विकया जाएगा। (7) विक मैं यह र्वो%न देता हूं विक मैं अपनी पत्नी यशिशता और नाबालिलग बच्चे विकयारा क े लिलए सप्ताह क े विदनों में विकसी भी मेधिडकल इमरजेंसी और टीकाकरर्ण क े लिलए उपलब् रहूंगा। मैं र्वो%न देता हूं विक विकसी भी अन्य काय. क े लिलए, मैं काया.लय क े बाद या सप्ताहांत में उपलब् रहूंगा। (8) विक मैं यह भी कहता हूँ विक हर बार जब नाबालिलग बच्चे ने साझा पालन-पोषर्ण क े आदेश क े अनुसार दौरा विकया है, मैंने यह सुविनधि…त करने क े लिलए घर से काम लिलया है विक मेरा सारा समय बच्चे क े आस-पास व्यतीत हो और मैं र्वो%न देता हूँ विक नाबालिलग बच्चे क े नस.री स्क ू ल (किंकडरगाट.न) में प्रर्वोेश क े बाद भी, उसक े स्क ू ल क े घंटों क े दौरान मैं अपने काया.लय जाऊ ँ गा और स्क ू ल क े घंटों क े बाद मैं घर से काम लूंगा और उसक े साथ पालन-पोषर्ण का समय लूंगा। मैं र्वो%न देता हूं विक अगर जरूरत पड़ी तो मैं अपनी मां को अमेरिरका में मदद क े लिलए बुलाऊ ं गा। (8) विक मैं अन्य सभी U%¢ क े अलार्वोा नाबालिलग बच्चे क े रUरUार्वो और रUरUार्वो क े लिलए यूएस $200 का भुगतान करने का भी र्वो%न देता हूं। हम इसे न्यायालय में एक र्वो%नबद्धता क े रूप में दज. करते हैं और पधित इस र्वो%नबद्धता का पालन करने क े लिलए बाध्य है। (बी) हमें लगता है विक यह बच्चे क े विहत में होगा यविद मां Uुद बच्चे क े साथ यूएसए %ली जाए। अपीलकता. पत्नी संयुक्त राज्य अमेरिरका में रहना पसंद कर सकती है या नहीं, और यह अपीलकता. पत्नी की व्यविक्तगत पसंद है। हालांविक, अगर र्वोह बच्चे क े साथ अमेरिरका र्वोापस जाती है, तो उसे नोरफोक कोट. क े आदेशों का पालन करना होगा। जाविहर है, अगर सलाह दी जाती है तो र्वोह आदेश में संशो न/Uाली करने क े लिलए आर्वोेदन कर सकती है; (सी) यविद पत्नी अमेरिरका र्वोापस %ली जाती है तो यह पधित की जिजम्मेदारी होगी विक र्वोह उसकी पूरी यात्रा और रहने क े लिलए उधि%त U%. का भुगतान करे। इस आदेश क े पारिरत होने क े एक सप्ताह क े भीतर पत्नी को पधित क े र्वोकील को सूधि%त करना होगा विक क्या र्वोह यूएसए र्वोापस जाने की इच्छ ु क है या नहीं। यविद र्वोह ऐसा करने की इच्छा व्यक्त करती है, तो पधित को पत्नी और नाबालिलग बच्चे की यूएसए की यात्रा क े लिलए विटकट Uरीदना होगा, जो यात्रा विदनांक 20.02.2020 को या उससे पहले की जानी %ाविहए। हम यह स्पष्ट करते हैं विक यह पत्नी की जिजम्मेदारी होगी विक उक्त धितशिथ तक यूएसए की यात्रा करने क े लिलए उसक े लिलए आर्वोश्यक यात्रा दस्तार्वोेज प्राप्त करें; (डी) यविद पत्नी अमेरिरका र्वोापस जाने की इच्छ ु क है लेविकन पधित क े साथ रहने की इच्छ ु क नहीं है, तो पधित द्वारा विदए गए र्वो%न क े अनुसार, हम विनदWश देते हैं विक पधित अपने रहने क े लिलए र्वोैकस्टिeपक व्यर्वोस्था करेगा और अपाट.मेंट का कब्जा अब पत्नी को सौंप दें; (ङ) र्वो%नबद्धता क े अनुसार पधित को विनदWश विदया जाता है विक र्वोह घर %लाने क े विदन-प्रधितविदन क े सभी U%¢, पत्नी और बच्चे दोनों क े लिलए धि%विकत्सा बीमा, विबजली, गैस और अन्य सभी आकस्टिस्मक U%¢ का ध्यान उस समय तक उठाए जब तक विक न्याधियक अदालत यूएसए इस संबं में प्रार्वो ान करता है; (एफ) पधित यूएसए में पत्नी क े लिUलाफ विकसी भी तरह की जबरदस्ती या दंडात्मक कार.र्वोाई शुरू नहीं करेगा और अगर ऐसी कार.र्वोाई उसक े द्वारा पहले ही शुरू की जा %ुकी है या उस संबं में कोई काय.र्वोाही लंविबत है, तो उसे र्वोापस ले लिलया जाएगा और पधित द्वारा आगे कोई कार.र्वोाई नहीं की जाएगी। यह पधित और पत्नी क े बी% र्वोैर्वोाविहक विर्वोर्वोाद (नाबालिलग बच्चे की विहरासत और संरक्षकता क े मुद्दों सविहत) से संबंधि त सभी मामलों में प्रभार्वोी ढंग से प्रधितविनधि त्र्वो करने और अपना ब%ार्वो करने क े लिलए संयुक्त राज्य अमेरिरका में संबंधि त न्यायालयों क े समक्ष पत्नी की उपस्टिस्थधित को सुविर्वो ाजनक बनाने क े लिलए एक पूर्वो. शत. होगी।

34. हालांविक, हम स्पष्ट करते हैं विक यह व्यर्वोस्था क े र्वोल विदनांक 30.04.2020 तक जारी रहेगी, इससे पहले पक्षकारों को संयुक्त राज्य अमेरिरका में न्याधियक न्यायालय से उधि%त विनदWश प्राप्त करना होगा। एक बार संयुक्त राज्य अमेरिरका में न्यायक्षेत्र न्यायालय आदेश पारिरत कर देता है तो आदेश का यह विहस्सा काम करना बंद कर देगा। इसक े अलार्वोा, हम यह भी विनदWश देते हैं विक पधित विदनांक 30.04.2020 तक या संयुक्त राज्य अमेरिरका में न्याधियक अदालत द्वारा इस संबं में आदेश पारिरत करने तक, यूएसए में अपने व्यविक्तगत U%¢ क े लिलए पत्नी को प्रधित सप्ताह 250 अमेरिरकी डॉलर का भुगतान करेगा। यह राशिश प्रधित सप्ताह US $200 क े अधितरिरक्त है जिजसे पधित ने नाबालिलग बच्चे क े रUरUार्वो और रUरUार्वो क े लिलए भुगतान करने का र्वो%न विदया है। दूसरा भाग

35. यविद पत्नी आज से एक सप्ताह क े भीतर पधित क े र्वोकील को सूधि%त नहीं करती है विक र्वोह यूएसए र्वोापस जाने की इच्छ ु क है तो यह माना जाएगा विक उसका बच्चे क े साथ यूएसए जाने का कोई इरादा नहीं है। उस स्टिस्थधित में हम विनम्नलिललिUत विनदWश जारी करते हैं: (ए) पत्नी नाबालिलग विकयारा की कस्टडी पधित को सौंप देगी या यविद पधित भारत की यात्रा करने में असमथ. है, तो पधित की मां को राजस्थान उच्च न्यायालय क े रजिजस्टRार जनरल/रजिजस्टRार (न्याधियक) क े समक्ष विदनांक 03.02.2020 पूर्वोा.हन 11.00 बजे प्रस्तुत कर देगी। उसक े बाद, पधित बच्चे को अमेरिरका ले जाने क े लिलए अपने माता- विपता में से कम से कम एक क े साथ आर्वोश्यक व्यर्वोस्था करेगा; (बी) यविद बच्चा अपने पधित या अपने माता-विपता में से विकसी एक क े साथ यूएसए जाता है, तो पधित को यह सुविनधि…त करना होगा विक बच्चा अपनी मां से व्हाट्सएप, स्काइप आविद जैसी र्वोीधिडयो कॉलिंलग सुविर्वो ाओं क े माध्यम से प्रधितविदन रात 8.30 बजे बात करे। पूर्वोœ मानक समय सप्ताह क े विदनों में (सोमर्वोार-गुरुर्वोार) प्रत्येक विदन कम से कम 10 विमनट क े लिलए और सप्ताहांत पर (शुक्रर्वोार-रविर्वोर्वोार) र्वोह यह सुविनधि…त करेगा विक बच्चा कम से कम 15 विमनट क े लिलए र्वोीधिडयो कॉलिंलग क े माध्यम से उसी समय या पार्मिटयों क े बी% पारस्परिरक रूप से तय विकए गए समय पर मां से बात करे। (सी) हम यह भी विनदWश देते हैं विक यविद पत्नी इसक े बाद यूएसए जाती है और उसी शहर में रहती है जहां पधित रहता है, तो उसे रविर्वोर्वोार को शाम 6.00 बजे से रविर्वोर्वोार को शाम 6.00 बजे तक सभी सप्ताहांतों में बच्चे की कस्टडी की अनुमधित दी जाएगी। (डी) यहां तक विक अगर मां यूएसए नहीं जाती है, तो विपता को यह सुविनधि…त करना होगा विक बच्चा साल में कम से कम दो बार, गमœ की छ ु विट्टयों क े दौरान और एक बार शीतकालीन अर्वोकाश क े दौरान, बच्चे क े स्क ू ल काय.क्रम क े अनुसार भारत का दौरा करे। यह सुविनधि…त करना उसकी जिजम्मेदारी होगी विक बच्चा भारत आए या तो उसक े साथ या बच्चे क े दादा-दादी में से कोई एक हो। इस दौरान बच्चा जिसफ. मां क े पास ही रहेगा। हालाँविक, अगर पधित भी बच्चे क े साथ आ रहा है, तो उस अर्वोधि क े दौरान जब बच्चा भारत में है, पधित क े पास प्रधित सप्ताह 2 विदन बच्चे की कस्टडी होगी, अधि मानतः सप्ताहांत पर या पक्षकारों द्वारा तय विकए गए अन्य उपयुक्त विदनों पर।

36. श्री राजकोविटया, अपीलकता. पत्नी क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता ने आग्रह विकया था विक यविद पधित का र्वोक. परविमट/र्वोीसा नहीं बढ़ाया जाता है तो स्टिस्थधित पूरी तरह से बदल जाएगी। यह अटकलों क े दायरे में है, हम यह अनुमान नहीं लगा सकते विक र्वोीजा बढ़ाया जाएगा या नहीं। इसलिलए, हमने पूर्वो क्त विनदWश जारी विकए हैं, लेविकन यह स्पष्ट कर दें विक यविद पधित का र्वोीज़ा/र्वोक. परविमट नहीं बढ़ाया जाता है और उसे यूएसए छोड़ना पड़ता है, तो पत्नी नए विनदWशों क े लिलए इस न्यायालय में जाने क े लिलए स्र्वोतंत्र होगी।

37. उपरोक्त शत¢ में अपील का विनपटारा विकया जाता है। लंविबत आर्वोेदन (आर्वोेदनों), यविद कोई हो, का विनस्तारर्ण विकया गया है। भारत क े सर्वो च्च न्यायालय की रजिजस्टRी क े रजिजस्टRार (न्याधियक) को विनदWश विदया जाता है विक र्वोे इस विनर्ण.य की एक प्रधित राजस्थान उच्च न्यायालय क े रजिजस्टRार जनरल/रजिजस्टRार (न्याधियक) को भेजें। न्याया ीश (दीपक गुप्ता) न्याया ीश (अविनरुद्ध बोस) नयी विदल्ली, जनर्वोरी 20, 2020 यह अनुर्वोाद आर्मिटविफशिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुर्वोास' क े जरिरए अनुर्वोादक की सहायता से विकया गया है। अस्र्वोीकरर्ण: यह विनर्ण.य पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीविमत उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाविदत विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारिरक और आधि कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण.य का अंग्रेजी संस्करर्ण ही प्रामाशिर्णक होगा और विनष्पादन और काया.न्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्करर्ण ही मान्य होगा।