Full Text
भा त का सर्वो च्च न्यायालय
सिसविर्वोल अपीलीय अधि कारि ता
सिसविर्वोल अपील संख्या 7472/2011
ाजस्थान ाज्य सड़क परि र्वोहन विनगम क
े प्रबं विनदेशक र्वो अन्य
- अपीलाथ0 (गण)
बनाम
मेश क
ु मा शमा5 - प्रधितर्वोादी (गण)
क
े साथ
सिसविर्वोल अपील संख्या 7475/2011 (XV)
सिसविर्वोल अपील संख्या 7474/2011 (XV)
सिसविर्वोल अपील संख्या 7473/2011 (XV)
सिसविर्वोल अपील संख्या 7476/2011 (XV)
आदेश
सिसविर्वोल अपील संख्या 7472/2011
JUDGMENT
1. हमने अपीलकता5 क े विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता को सुना।
2. कोई भी प्रधितर्वोादी (गण) की ओ से उपस्थिस्थत नहीं हुआ है।
3. कामगा ों द्वा ा अपीलकता5 प्रबं न द्वा ा उन प लगाए गए जुमा5ने की घोषणा औ स्थायी विनषे ाज्ञा क े लिलए सिसविर्वोल मुकदमा दाय विकया गया था। अन्य बातों क े साथ- साथ, प्रधितर्वोादी की यह दलील भी है विक जो विकया गया है र्वोह प्रभार्वोी रूप से स्थायी आदेश क े विर्वोविनयम 35 का उल्लंघन है (अथा5त् गै कानूनी है), इस प्रका, पक्षका ों क े बीच संविर्वोदात्मक दाधियत्र्वो क े भंग होने का आ ोप लगाया गया है।
4. अपीलकता5 ने सिसविर्वोल प्रविWया संविहता, 1908 क े आदेश VII विनयम 11 क े तहत यह दार्वोा क ते हुए याधिचका दाय क क े मुकदमे को ोकने का प्रयास विकया विक र्वोाद नामंजू विकए जाने क े योग्य है औ उत्त दाताओं को औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम, 1947 क े तहत उपचा क े लिलए छोड़ विदया जाए। इस याधिचका को विर्वोद्वान सिसविर्वोल न्याया ीश, जयपु शह का समथ5न नहीं विमला, सिजन्होंने उस आर्वोेदन को विदनांक 16.5.2006 क े आदेश से खारि ज क विदया। इसक े लिखलाफ दाय पुन ीक्षण याधिचका को उच्च न्यायालय ने विदनांक 27.02.2008 को खारि ज क विदया था। अब बा ह साल बाद हम यह विन ा5रि त क हे हैं विक नीचे क े दो मंचों की यह कर्वोायद र्वोै थी या नहीं!
5. हम ध्यान दें सकते हैं विक इस मामले में क े र्वोल नोविर्टेस जा ी विकया गया था औ कोई अंतरि म आदेश नहीं विदया गया था। तार्किकक रूप से कहा जाए तो, मुकदमे की सुनर्वोाई औ विनण5य इस बीच विकया गया होगा, यविद अपील नहीं की गई है तो उस समयार्वोधि को भी ध्यान में खा जाएगा जो समाप्त हो गई है। हालाँविक, हमें सूधिचत विकया गया है विक इस आ ा प मुकदमा आगे नहीं बढ़ाया गया है विक मामला इस न्यायालय क े समक्ष लंविबत है। तथ्य हमें पीड़ा देते हैं इस त ह न्याय विमलने में एक अनंत समय क े लिलए विर्वोलंब हो सकता है।
6. जांच क ने प हमें पता चलता है विक प्रीविमय ऑर्टेोमोबाइल्स लिलविमर्टेेड बनाम कमलेक शांता ाम र्वोाड्क े, बम्बई औ अन्य-1976 (1) एस. सी. सी. 496 में र्वोर्णिणत सिसद्धांत लागू होंगे, जैसा विक नीचे पै ा 9 में र्वोर्णिणत हैः “9. इस प्रका यह देखा जा सकता है विक समुधिचत स का क े हस्तक्षेप द्वा ा, विनधिsत रूप से प्रत्यक्ष रूप से नहीं, औद्योविगक विर्वोर्वोादों क े विनपर्टेान औ न्यायविनण5यन क े लिलए एक बहुत व्यापक मशीन ी प्रदान की गई है। लेविकन चूंविक कोई व्यथिथत व्यविक्त स का क े हस्तक्षेप क े विबना अपनी थिशकायत क े विनर्वोा ण क े लिलए सी े न्यायाधि क ण या श्रम न्यायालय में नहीं जा सकता है, इसलिलए यह विर्वोचा लेना विर्वोधि सम्मत है विक अधि विनयम क े तहत उपबंधि त उपचा ऐसा नहीं है विक औद्योविगक विर्वोर्वोादों क े मुकदमे की सुनर्वोाई क े लिलए सिसविर्वोल न्यायालय की क्षेत्राधि का को पू ी त ह से समाप्त क दे। यविद विर्वोर्वोाद अधि विनयम की ा ा 2 (र्टे) क े अथ[5] में या अधि विनयम की ा ा 2 क क े अथ[5] में एक औद्योविगक विर्वोर्वोाद नहीं है, तो यह स्पष्ट है विक अधि विनयम क े तहत ऐसे विर्वोर्वोादों क े न्याधियक विनण5य का कोई प्रार्वो ान नहीं है। सिसविर्वोल न्यायालय इसक े लिलए उधिचत मंच होंगे। लेविकन जहां औद्योविगक विर्वोर्वोाद सामान्य कानून या लोक विर्वोधि क े तहत विकसी अधि का, बाध्यता या दाधियत्र्वो को लागू क ने क े उद्देश्य से है औ अधि विनयम क े तहत सृसिजत कोई अधि का, बाध्यता या दाधियत्र्वो नहीं है, तो र्वोैकस्थिल्पक न्यायालय को अधि विनयम क े तहत मशीन ी को स्थानांतरि त क ने या सिसविर्वोल न्यायालय में जाने क े लिलए अपना उपचा चुनने क े लिलए एक विर्वोकल्प दे हे हैं। यह स्पष्ट है विक उसक े पास दोनों नहीं हो सकते। उसे इनमें से एक या दूस े का चयन क ना है। लेविकन हम र्वोत5मान में यह विदखाएंगे विक सिसविर्वोल न्यायालय क े पास औद्योविगक विर्वोर्वोाद प मुकदमा चलाने औ विनण5य देने का कोई क्षेत्राधि का नहीं होगा यविद यह क े र्वोल अधि विनयम क े तहत सृसिजत क ु छ अधि का या दाधियत्र्वो क े प्रर्वोत5न से संबंधि त है। उस स्थिस्थधित में सिसविर्वोल न्यायालय को संविर्वोदा क े कथिथत भंग क े का ण होने र्वोाली क्षधित को ोकने क े लिलए व्यादेश की धिडWी जा ी क ने का भी कोई क्षेत्राधि का नहीं होगा, बशत संविर्वोदा ऐसी हो सिजसे क े र्वोल अधि विनयम क े तहत ही मान्यता प्राप्त हो औ उसे लागू विकया जा सक े ।"
7. विर्वोद्वान अधि र्वोक्ता इस बात प विर्वोर्वोाद नहीं क ते है विक पूर्वो क्त विनण5य में लिलए गए दृविष्टकोण को उलर्टे नहीं विदया गया है, लेविकन यह तक 5 प्रस्तुत क ना चाहते है विक ाजस्थान ाज्य सड़क परि र्वोहन विनगम र्वो अन्य बनाम क ृ ष्ण कांत र्वो अन्य-(1995) 5 एससीसी 75 में अपीलकता5 क े मामले में कानूनी स्थिस्थधित स्पष्ट क दी गई है। जो विनम्नानुसा है:- “35. अब हम उपयु5क्त चचा5 से विनकलने र्वोाले सिसद्धांतों को संक्षेप में प्रस्तुत क सकते हैंः (1) जहां विर्वोर्वोाद संविर्वोदा की सामान्य विर्वोधि से उत्पन्न होता है, अथा5त् जहां संविर्वोदा की सामान्य विर्वोधि क े आ ा प अनुतोष का दार्वोा विकया जाता है, र्वोहां सिसविर्वोल न्यायालय में दालिखल विकए गए र्वोाद को सं ाय[5] नहीं कहा जा सकता है,भले ही इस त ह का विर्वोर्वोाद औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम, 1947 की ा ा 2 (र्टे) या ा ा 2-क क े अथ[5] में "औद्योविगक विर्वोर्वोाद" भी हो सकता है। (2) जहां, हालांविक, विर्वोर्वोाद में औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम द्वा ा सृसिजत विकसी अधि का या बाध्यता की मान्यता, पालन या प्रर्वोत5न अंतर्वो5लिलत है तो एकमात्र उपाय उक्त अधि विनयम द्वा ा बनाए गए मंचों मे पहुंचना है। (3). इसी प्रका, जहां विर्वोर्वोाद में औद्योविगक ोजगा (स्थायी आदेश) अधि विनयम, 1946 जैसे अधि विनयमों द्वा ा सृसिजत अधि का ों औ बाध्यताओं की मान्यता, पालन या प्रर्वोत5न शाविमल है सिजसे औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम क े लिलए 'सिसस्र्टे इनक्ट्मेंट्स' कहा जा सकता है औ जो ऐसे विर्वोर्वोादों क े समा ान क े लिलए एक मंच प्रदान नहीं क ता है, र्वोहां एकमात्र समा ान औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम द्वा ा सृसिजत मंचों में जाना होगा बशत र्वोे औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम की ा ा 2 (र्टे) औ खंड 2 (क) क े अथ[5] में औद्योविगक विर्वोर्वोाद का गठन क ते हैं या जहां ऐसा अधि विनयमन कहता है विक ऐसे विर्वोर्वोाद को या तो एक औद्योविगक विर्वोर्वोाद क े रूप में माना जाएगा या कहता है विक इसे औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम द्वा ा सृसिजत विकसी भी मंच द्वा ा विनण0त विकया जाएगा। अन्यथा, सिसविर्वोल न्यायालय का सहा ा खुला है। (4) यह कहना सही नहीं है विक औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम द्वा ा प्रदान विकए गए उपाय इस का ण से समान रूप से प्रभार्वोी नहीं हैं विक मंच तक पहुंच उपयुक्त स का द्वा ा विकए जा हे संदभ[5] प विनभ[5] क ती है।स का को प्रदत्त विनदश क ने की शविक्त का प्रयोग अधि विनयमन क े उद्देश्य को प्रभार्वोी बनाने क े लिलए विकया जाना है औ इसलिलए यह अविनदथिशत नहीं है। विनयम एक संदभ[5] बनाने क े लिलए है, जब तक विक विनधिsत रूप से उठाया गया विर्वोर्वोाद पू ी त ह से प्रथम दृष्टया तुच्छ नहीं है। प्रदत्त शविक्त विनदश क ने की शविक्त है न विक विनण5य क ने की शविक्त, हालांविक यह हो सकता है विक स का इस बात की जांच क ने की हकदा है विक क्या विर्वोर्वोाद प्रथम दृष्टया तुच्छ है, जो न्यायविनण5यन क े योग्य नहीं है। (5) उपयु5क्त कानून की नीधित क े अनुरूप हम संसद औ ाज्य विर्वो ानमंडलों की इस बात क े लिलए स ाहना क ते हैं विक र्वोे ऐसा प्रार्वो ान बनाएं सिजससे श्रविमक औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम की ा ा 2-क क े अंतग5त आने र्वोाले औद्योविगक विर्वोर्वोादों क े मामले में स का द्वा ा विनदश की आर्वोश्यकता क े विबना श्रम न्यायालय/औद्योविगक न्यायाधि क ण में सी े तौ प जा सक ें । यह औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम द्वा ा प्रदान विकए गए उपचा ों की प्रभार्वोशीलता क े संबं में गलतफहविमयों को दू क ने में एक लंबा ास्ता तय क ेगा। (6) औद्योविगक ोजगा (स्थायी आदेश) अधि विनयम, 1946 क े तहत औ उसक े अनुसा तैया विकए गए प्रमाथिणत स्थायी आदेश र्वोै ाविनक रूप से सेर्वोा की शतˆ हैं औ विनयोक्ताओं औ कम5चारि यों दोनों प बाध्यका ी हैं, हालांविक र्वोे र्वोै ाविनक प्रार्वो ानों क े ब ाब नहीं हैं। इन स्थायी आदेशों का कोई भी उल्लंघन विकसी कम5चा ी को औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम द्वा ा बनाए गए मंचों या सिसविर्वोल न्यायालय क े समक्ष उधिचत ाहत का हकदा बनाता है, जहां सिसविल न्यायालय का आश्रय यहांर्वोल न्यायालय का आश्रय यहा विदए गए सिसद्धांतों क े अनुसा खुला है। (7) औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम औ उसक े सहायक अधि विनयविमधितयों से उत्पन्न विर्वोधि की नीधित कम5का ों को एक र्वोैकस्थिल्पक विर्वोर्वोाद समा ान तंत्र उपलब् क ाना है, एक ऐसा तंत्र जो त्र्वोरि त, सस्ता, अनौपचारि क औ सिसविर्वोल न्यायालयों को लागू होने र्वोाली प्रविWयात्मक कानूनों औ अपीलों औ पुन ीक्षणों की अधि कता से मुक्त हो। र्वोास्तर्वो में, औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम क े तहत न्यायालय औ न्यायाधि क णों की शविक्तयां इस अथ[5] में कहीं अधि क व्यापक हैं विक र्वोे विकसी औद्योविगक विर्वोर्वोाद को समाप्त क ने क े लिलए परि स्थिस्थधितयों में उपयुक्त ाहत प्रदान क सकते हैं।"
8. हमें इस बात को ध्यान में खना चाविहए विक औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम कामगा ों क े लाभ क े लिलए एक र्वोैकस्थिल्पक विर्वोर्वोाद समा ान तंत्र है, जो प्रविWयात्मक कानूनों की बहुतायत से त्र्वोरि त, सस्ता, अनौपचारि क औ भा मुक्त है।इस प्रका इसका उद्देश्य कामगा ों की क्षा क ना है।
9. यह भी देखा गया है विक विर्वोर्वोाद संविर्वोदा की सामान्य विर्वोधि से उत्पन्न होता है, अथा5त, जहां संविर्वोदा क े सामान्य विर्वोधि क े आ ा प ाहत का दार्वोा विकया जाता है, सिसविर्वोल अदालत में दाय एक र्वोाद पोषणीय नहीं कहा जा सकता है, भले ही ऐसा विर्वोर्वोाद औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम, 1947 की ा ा 2 (र्टे) या ा ा 2-क क े अथ[5] में "औद्योविगक विर्वोर्वोाद" भी हो सकता है। यह क े र्वोल तभी होता है जब विर्वोर्वोाद में औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम द्वा ा मान्यता, पालन या प्रर्वोत5न या दाधियत्र्वोों को शाविमल विकया जाता है, एकमात्र उपाय विर्वोशेष रूप से औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम अधि विनयम क े प्रार्वो ानों क े तहत होगा। इस मामले क े तथ्यों में कामगा ों की सेर्वोा की समाविप्त शाविमल थी औ इस प्रका समा ान अन्य बातों क े साथ-साथ औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम क े तहत था।
10. र्वोत5मान मामले में कधितपय जुमा5ने की कम की र्वोसूली शाविमल है सिजसे औद्योविगक विर्वोर्वोाद अधि विनयम की ा ा 2-क क े अंतग5त नहीं लाया जा सकता। कामगा ों ने अपने विर्वोर्वोेक से (या संभर्वोतः, इसकी कमी क े का ण) सिसविर्वोल न्यायालय का द र्वोाजा खर्टेखर्टेाया औ विपछले पंद्रह र्वोषŒ से अपने दार्वोों क े गुण-दोष प विबना विकसी विनण5य क े अ में लर्टेक े हुए हैं। हम यह भी ध्यान दे सकते हैं विक आक्षेविपत आदेश एक अथ[5] में अंतर्वो5त0 प्रक ृ धित क े भी हैं।
11. इस प्रका, हमा ा विर्वोचा है विक आक्षेविपत आदेश में हस्तक्षेप क ने का कोई आ ा नहीं बनता है औ परि णामस्र्वोरूप अपील खारि ज की जाती है।
12. समय गुज ने को मद्देनज खते हुए, हम सिसविर्वोल न्याया ीश को सिसविर्वोल मुकदमा 774/2005 का तत्काल विर्वोचा ण क ने औ विर्वोचा ण पू ा क ने औ विनण5य सुनाने का प्रयास क ने का विनदश देते हैं, यविद आदेश प्राप्त होने की ता ीख से छह महीने की अधि कतम अर्वोधि में पहले से ही विनण5य नहीं सुनाया गया हो।
13. अपील पूर्वो क्त विनबं नों क े अनुसा खारि ज की जाती है। सिसविर्वोल अपील संख्या 7475/2011, सिसविर्वोल अपील संख्या 7474/2011, सिसविर्वोल अपील संख्या 7473/2011 औ सिसविर्वोल अपील संख्या 7476/2011 भी उप ोक्त सिसविर्वोल अपील संख्या 7472/2011 में पारि त आदेश क े मद्देनज अपील खारि ज की जाती है। न्याया ीश [संजय विकशन कौल ] न्याया ीश [क े. एम. जोसेफ ] नई विदल्ली 16 जनर्वो ी, 2020 यह अनुर्वोाद आर्किर्टेविफथिशयल इंर्टेेलिलजेंस र्टेूल 'सुर्वोास' क े जरि ए अनुर्वोादक की सहायता से विकया गया है। अस्र्वोीक ण: यह विनण5य पक्षका को उसकी भाषा में समझाने क े सीविमत उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुर्वोाविदत विकया गया है औ विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सकता है। सभी व्यार्वोहारि क औ आधि कारि क उद्देश्यों क े लिलए, विनण5य का अंग्रेजी संस्क ण ही प्रामाथिणक होगा औ विनष्पादन औ काया5न्र्वोयन क े उद्देश्य से भी अंग्रेजी संस्क ण ही मान्य होगा।