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भार ीय सव च्च न्यायालय में
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील सं. 802 / 2020
(विवशेष अनुमति याति'का (सिसविवल) सं. 9276 / 2017 से उद्भू )
श्रीपाल भाटी एवं एक अन्य .... अपीलार्थी4(गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य .... प्रत्यर्थी4(गण)
विन ण< य
न्यायमूर्ति क
ृ ष्ण मुरारी
अनुमति प्रदान की गयी।
JUDGMENT
2. यह अपील उच्च न्यायालय[1] क े फ ै सले 08.02.2017 विदनांविक क े विवरूद्ध अति माविन विकया गया है, सिHसमें अपीलार्थिर्थीयों द्वारा दायर रिरट याति'का को खारिरH कर े हुए, प्रत्यर्थी4 सं. 4 द्वारा प्रति विनयुविP क े आ ार पर परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े पद पर न्यू ओखला इंडक्ट्रिYटVयल डेवलपमेंट ऑर्थीारिरटी (ए क्ट्रिYमनपश्चा 'NOIDA' NOIDA'NOIDA' क े रूप में संदर्थिभ ) में विनयुविP और उसक े अनुव 4 समावेश को 'ुनौ ी दी गई है।
3. अपीलार्थी4 व <मान में NOIDA में सहायक परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े रूप में ैना हैं। (इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े क्षेत्राति कार में, लखनऊ पीठ) mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
4. प्रत्यर्थी4 सं. 4 द्वारा विकए गए अनुरो पर उ.प्र. पावर कॉप रेशन लिलविमटेड में उप-खण्ड अति कारी क े रूप में विनयोसिH विकया गया र्थीा, राज्य सरकार NOIDA में परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े रिरP पद पर विनयुविP की मांग कर े हुए 13.02.2014 विदनांविक को पत्र क े माध्यम से NOIDA को उP पद पर प्रति विनयुविP क े आ ार पर ीन वष< की अवति क े लिलए विनयुP करने की आवश्यक ा र्थीी। उपरोP पत्र क े अनुसरण में, NOIDA द्वारा एक विनयुविP आदेश 19.02.2014 विदनांविक को Hारी विकया गया र्थीा और प्रत्यर्थी4 सं.[4] को उP पद में सक्ट्रिoमलिल होने की अनुमति दी गई र्थीी। त्पश्चा पत्र विदनांविक 16.02.2015 क े माध्यम से, प्रत्यर्थी4 सं.[2] ने प्रत्यर्थी4 सं.[4] क े समावेश क े लिलए प्रत्यर्थी4 सं.[1] की संY ुति की। उसी से व्यभिर्थी होकर, अन्य बा ों क े सार्थी सार्थी, अपीलार्थिर्थीयों ने रिरट याति'का प्रार्थी<ना पत्र क े माध्यम से उच्च न्यायालय का दरवाHा खटखटाया, Hो विक इस प्रकार:- (i) समावेश क े लिलए संY ुति पत्र 16.02.2015 विदनांविक को रद्द करना। (ii) परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े पद पर प्रति विनयुविP क े आ ार पर प्रत्यर्थी4 सं.[4] की विनयुविP का पत्र 19.02.2014 विदनांविक को रद्द करना। (iii) प्रत्यर्थिर्थीयों को सेवा विनयमावली क े अनुसार परिरयोHना अभिभयं ा क े पद को भरने और प्रत्यर्थी4 सं.[4] को NOIDA में परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े रूप में काय< करने से रोकना।
5. उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट याति'का क े लंबन क े दौरान, प्रत्यर्थी4 सं.[1] द्वारा Hारी आदेश 07.05.2015 विदनांविक क े माध्यम से प्रत्यर्थी4 सं.[4] को परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े पद पर अवशोविष विकया गया र्थीा। इस आदेश को रिरट Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA याति'का में एक संशो न आवेदन क े माध्यम से 'ुनौ ी दी गई र्थीी सिHसे उच्च न्यायालय ने अनुमति दी र्थीी।
6. उच्च न्यायालय ने आक्षेविप आदेश 08.02.2017 विदनांविक क े माध्यम से रिरट याति'का को खारिरH कर विदया।
7. मुख्य मुद्दा Hो हमारे विव'ारार्थी< उत्पन्न हो ा है विक Uया प्रत्यर्थी4 सं.[4] की परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े पद पर प्रति विनयुविP क े आ ार पर विनयुविP और उP पद पर उसका अनुव 4 समावेश NOIDA सेवा विवविनयम, 1981 क े ह Yवीकाय< है।
8. संयोग से एक और मुद्दा Hो उठ ा है विक Uया अपीलार्थी4 उस पद पर पदोन्न होने क े लिलए पात्र हैं सिHस पर प्रत्यर्थी4 सं.[4] को विनयुP विकया गया है और Uया अपीलार्थी4 क े पदोन्नति का अति कार प्रत्यर्थी4 सं.[4] क े अवशोषण द्वारा ग्रहण हो Hा ा है। और यविद अपीलार्थिर्थीयों को पदोन्नति क े लिलए पात्र नहीं पाया गया, ो Uया प्रत्यर्थी4 सं.[4] का अवशोषण अर्थीवा विनयुविP की कोई भी 'ुनौ ी उनक े आदेश पर अनुरक्षणीय होगा।
9. राज्य विव ानमंडल द्वारा अति विनयविम उ.प्र. औद्योविगक विवकास अति विनयम, 1976 (ए क्ट्रिYमनपश्चा ् 'NOIDA' 1976 का अति विनयम'NOIDA' क े रूप में सन्दर्थिभ ) की ारा 3 क े ह Hारी अति सू'ना क े माध्यम से राज्य सरकार द्वारा औद्योविगक और शहरी आबादी में राज्य क े कति पय क्षेत्रों क े विवकास क े लिलए प्राति करण क े गठन का उपबं करने क े लिलए NOIDA का गठन विकया गया।
10. सामान्य/विवशेष आदेशों क े माध्यम से राज्य सरकार क े विनयंत्रण/प्रति बं क े अ ीन उनक े ग्रेड और पदनाम विन ा<रिर करने सविह अपने कायz क े प्रदश<न क े लिलए अति कारिरयों/कम<'ारिरयों को विनयुP करने की शविP 1976 क े अति विनयम की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ारा 5 प्राति करण क े सार्थी विनविह है। राज्य सरकार की विपछली Yवीकृ ति क े सार्थी विवविनयम बनाने की शविP 1976 क े अति विनयम की ारा 19 प्राति करण क े सार्थी विनविह है।
11. 1976 क े अति विनयम की ारा 19 क े ह विनविह शविPयों का प्रयोग करने में, NOIDA ने अपने कम<'ारिरयों की श z को सेवा की श z को शासिस करने क े लिलए नई ओखला औद्योविगक विवकास प्राति करण सेवा विवविनयम, 1981 (ए क्ट्रिYमनपश्चा ् “1981 विवविनयम” क े रूप में सन्दर्थिभ ) विवरति' विकया है। 1981 क े विवविनयमन 16 सभी पदों पर भ 4 क े स्रो ों को प्रदान कर ा है। यह विनoनलिललिख रूप से है: - “ ारा 16 - भ 4 क े स्रो
16. (1) प्राति करण क े ह विकसी पद पर भ 4 विकसी भी स्रो से की Hा सक ी है - (क) सी ी भ 4 द्वारा; (ख) विन'ले Y र पर पद ारण करने वाले कम<'ारिरयों में से प्रोन्नति द्वारा विवभागीय परीक्षा अर्थीवा 'यन क े साक्षात्कार या प्राति करण द्वारा विवविनर्दिदष्ट विकसी अन्य रीति से। (ग) प्रति विनयुविP या पुनर्दिनयोHन द्वारा या संविवदा क े आ ार पर। (घ) प्राति करण द्वारा यर्थीा अनुमोविद विकसी अन्य स्रो से। (2) (i) समूह 'NOIDA' क'NOIDA' पदों का भिछयासठ (66) प्रति श सी ी भ 4 द्वारा भरा Hाएगा और शेष 'ौं ीस (34) प्रति श पद वरिरष्ठ ा क े आ ार पर कम<'ारिरयों में से पदोन्नति द्वारा अपेतिक्ष अह< ाओं की अYवीक ृ ति और पूर्ति क े अ ीन रह े हुए भरे Hाएँगे और उस विवभिशष्ट कम<'ारी की श < क े भी अ ीन होगा सिHसने अगले वे नमान पर कम से कम दो वष< क े लिलए काय< विकया हो। यविद विकसी भी समय यह पाया Hा ा है विक पया<प्त संख्या में कम<'ारी पदोन्नति क े लिलए विन ा<रिर प्रति श में भरने क े लिलए उपलब् नहीं हैं, ो ऐसे पदों को सी ी भर्ति यों द्वारा भरा Hा सक ा है; Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ii) समूह 'NOIDA' ख'NOIDA' क े अं ग< आने वाले विवभिभन्न पदों को इस प्रकार भरा Hाएगा सिHससे यह सुविनतिश्च हो सक े विक कम<'ारिरयों में से प'ास(50) प्रति श पद प्रोन्नति से भरे Hाएं और ऐसा प्रोन्नति वरिरष्ठ ा क े आ ार पर अपेतिक्ष अह< ाओं को अYवीक ृ और पूर्ति क े अ ीन रह े हुए और कम से कम दो वष< की अवति क े लिलए अगले वे नमान पर काय< करने वाले विवभिशष्ट कम<'ारी की श < क े भी अ ीन होगी; (iii) अपात्र की अYवीक ृ ति और अपेतिक्ष अह< ाओं की पूर्ति और उस विवभिशष्ट कम<'ारी द्वारा ठीक नी'े क े वे नमान पर कम से कम दो वष< की अवति क काय<र रहने की श < क े अ ीन वरिरष्ठ ा क े आ ार पर समूह 'NOIDA' घ'NOIDA' से संबंति कम<'ारिरयों में से पदोन्नति द्वारा समूह 'NOIDA' ग'NOIDA' क े अं ग< पच्चीस प्रति श क पद भरे Hाएँगे शेष प'हत्तर प्रति श ऐसे पदों को सी ी भ 4 द्वारा भरा Hाएगा; (iv) इसमें विकसी बा क े हो े हुए भी, प्राति करण को विकसी पद या पदों क े वग< क े संबं में भ 4 क े स्रो या पदोन्नति क े प्रति श या सी ी भ 4 क े प्रति श को रूपां रिर करने की पूरी शविP होगी।”
12. अपीलार्थी4 क े विवद्व अति वPा द्वारा यह क < विकया गया विक 'ूंविक खंड 16 (2) में यह उपबं है विक समूह 'NOIDA' क'NOIDA' पदों का 60% सी ी भ 4 द्वारा भरा Hाना है और शेष 34% वरिरष्ठ ा क े आ ार पर विवद्यमान कम<'ारिरयों में से पदोन्नति क े रूप में, परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) का पद Hो समूह 'NOIDA' क'NOIDA' पद है, प्रति विनयुविP क े माध्यम से भरा नहीं Hा सक ा र्थीा और इस प्रकार प्रत्यर्थी4 सं. 4 प्रति विनयुविP क े आ ार पर उP पद पर विनयुविP अवै और प्रत्यक्ष ः सेवा विवविनयमों की अवहेलना है।
13. क < विवविनयम 16 (2)(i) क े पृर्थीक रूप पर व्याख्या पर आ ारिर है Hो अननुज्ञेय है। यह अच्छी रह Yर्थीाविप है विक प्राव ान को संपूण< रूप में पढ़ा Hाना आवश्यक है न विक विहYसे और प्राव ान क े अन्य पृर्थीक विहYसों में। संपूण< प्राव ान को सामंHYयपूण< रूप से पढ़ने की आवश्यक ा है। विवविनयमन 16 (i) (c) ) Yपष्ट Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रूप से प्राव ान कर ा है विक प्राति करण क े ह विकसी भी पद पर भ 4 प्रति विनयुविP द्वारा की Hा सक ी है। यविद विवविनयमन 16 क े प्राव ानों को अपीलार्थी4 क े लिलए विवद्व अति वPा द्वारा सुझाए प्रणाली से पढ़ा Hाना है, ो यह खंड 16 (i) (c) ) को प्रY ु करना पूण< ः विनरर्थी<क होगा। यह विवति का सिसद्धां अच्छी रह से य है विक प्राव ान क े विकसी भी विवशेष विहYसे को इस प्रणाली से पृर्थीक रूप में नहीं पढ़ा Hा सक ा है ाविक उसी प्राव ान क े अन्य प्रY ु विहYसे को पूण< ः विनरर्थी<क करार विदया Hा सक े । इसी रह की क्ट्रिYर्थीति यां खंड 16 (2) (ii) और (iii) क े ह मौHूद हैं Hो समूह 'NOIDA' ख'NOIDA' और 'NOIDA' ग'NOIDA' क े ह आने वाले पद पर विनयुविP का उपबं कर ा है। यविद अपीलार्थी4 क े विवद्व अति वPा द्वारा सुझाए गए प्रणाली और रीति में विवविनयम 16 क े उपबं ों को पढ़ा Hा ा है ो समूह 'NOIDA' ख'NOIDA' और 'NOIDA' ग'NOIDA' क े अ ीन आने वाले पदों क े संबं में ारा 16 (i) (ग) क े उपबं पूण< ः विनरर्थी<क हो Hाएंगे। विवविनयमन 16 का उद्देश्य भ 4 क े रीक े प्रदान करना है और संपूण< विवविनयमों को संयुP रूप से पढ़ने पर यह Yपष्ट हो Hा ा है विक समूह 'NOIDA' ए'NOIDA', 'NOIDA' बी'NOIDA' और 'NOIDA' सी'NOIDA' क े ह आने वाले पद पर विनयुविP प्रति विनयुविP क े आ ार पर बहु अच्छे से की Hा सक ी है।
14. अपीलार्थिर्थीयों क े विवद्व अति वPा ने आगे कहा विक NOIDA ने वष< 1993 में एक भ 4 और पदोन्नति नीति ैयार की र्थीी,सिHसमें प्रदान की गई भ 4 का रीका पदोन्नति, सी ी भ 4 और प्रति विनयुविP क े माध्यम से र्थीा। इसक े बाद 2005 में एक और भ 4 और पदोन्नति नीति ैयार की गई, सिHसमें कहा गया विक इंHीविनयरिंरग क ै डर में परिरयोHना अभिभयं ा क े पद को पदोन्नति द्वारा 100% भरने की आवश्यक ा र्थीी। इस प्रकार, 1993 की नीति में विव'ार विकए गए भ 4 क े ीन स्रो ों को 2005 में एक स्रो कम कर विदया गया र्थीा और इस प्रकार प्रति विनयुविP क े माध्यम से प्रोHेUट इंHीविनयर क े पद पर कोई भ 4 नहीं की Hा सक ी र्थीी। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
15.
NOIDA की ओर से भरे गए Hवाबी हलफनामे में कहा गया है विक भ 4 और पदोन्नति नीति, 2005 को राज्य सरकार की मंHूरी क े लिलए भेHा गया र्थीा। 18.10.2007 विदनांविक पत्र क े माध्यम से, राज्य सरकार ने Yपष्ट कर े हुए कहा विक बोड< अपनी भ 4 और पदोन्नति नीति को लागू करने क े लिलए सक्षम है, NOIDA को यह सुविनतिश्च करने क े लिलए विनद’भिश विकया विक नीति विवविनयम, 1981 क े प्राव ानों क े सार्थी असंग नहीं है। NOIDA द्वारा अपने Hवाबी हलफनामे में यह विवभिशष्ट मामला है विक नीति को राज्य सरकार द्वारा Hारी विनद’शों क े मद्देनHर लागू नहीं विकया Hा सक ा है, 'ूँविक समूह 'NOIDA' ए'NOIDA' पदों पर सी ी भ 4 करने और उन्हें क े वल पदोन्नति क े आ ार पर भरने का प्रY ाव NOIDA सेवा विवविनयम 16 (i) (c) ) 1981 क े विवविनयमों क े सार्थी असंग र्थीा। NOIDA द्वारा विवभिशष्ट मामले क े मद्देनHर विक 2005 की नीति को कभी भी 1981 विवविनयमों क े सार्थी असंग नहीं विकया गया र्थीा और 1981 क े विवविनयमन 16 क े विकसी भी विहYसे को आH क संशोति नहीं विकया गया है, अपीलक ा<ओं द्वारा 2005 की नीति पर रखी गई विनभ<र ा पूरी रह से गल और गल है। विवविनयमन 16 क े रूप में यह खड़ा है (यहां उद्धृ ) Hो प्राति करण में भ 4 क े स्रो क े संबं में क्षेत्र रख ा है। राज्य सरकार ने अपने Hवाबी हलफनामे में वही रुख अपनाया है।
16. अब प्रत्यर्थी4 सं.[4] क े मुद्दे पर पहुँ' रहा है विवविनयमन सं. 16/1981 Yपष्ट रूप से यह प्राव ान कर ा है विक भ 4 या ो प्रति विनयुविP क े माध्यम से अर्थीना सी ी भ 4 या विकसी अन्य स्रो से की Hा सक ी है। विवविनयमन 2 इन विवविनयमों की प्रयोज्य ा से संबंति है और Yपष्ट रूप से NOIDA की सेवा में ऐसे व्यविPयों का समावेश प्रति विनयुविP क े आ ार पर पोस्टिंYटग/भ 4 क े लिलए प्राव ान कर ा है। यह विवविनयमन सं. 2 से उद्धृ होना उपयोगी हो सक ा है। Hो विनoनानुसार है:- Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “2. ये विनयम प्राति करण क े प्रत्येक पूण<कालिलक कम<'ारी को संघ सरकार अर्थीवा विकसी राज्य सरकार या Yर्थीानीय प्राति करण या विनगम या विकसी अन्य संगठन से प्रति विनयुविP पर प्राति करण क े सार्थी काय< करने वाले व्यविP को छोड़कर, सिHस भी नाम से संबोति विकया Hा ा है, और ऐसा व्यविP अपने मूल विवभाग अर्थीवा संगठन क े ह उसकी सेवा क े संबं में उस पर लागू विनयमों द्वारा शासिस होना Hारी रहेगा, 'ाहे वह विकसी भी नाम से न हो, Hब क विक ऐसा व्यविP विनयविम कम<'ारी क े रूप में प्राति करण की सेवा में समावेभिश न हो।”
17. प्रत्यर्थी4 सं.[4] को समावेश करने का विनण<य राज्य सरकार द्वारा उ.प्र. समावेभिश विनयममावली, 1984 क े ह शविPयों का प्रयोग कर े हुए भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 309 द्वारा प्रदत्त शविPयों क े प्रयोग में बनाया गया र्थीा। उ.प्र. समावेभिश विनयममावली, 1984 क े विनयम 5 में यह प्राव ान है विक विकसी भी सरकारी कम<'ारी को उस उपक्रम की सेवाओं में समावेभिश होने की अनुमति दी Hा सक ी है सिHसमें कम<'ारी प्रति विनयुविP पर है, यविद उसने ीन वष< की समाविप्त से पूव< उपक्रम में अपने समावेशण क े लिलए सरकार को आवेदन विकया र्थीा अर्थीवा उस ति भिर्थी से पूव< सिHस विदन वह 53 वष< की आयु प्राप्त कर ले ा है, Hो भी पहले हो, और संबंति उपक्रम ने भी ऐसी अवति क े भी र अपने अवशोषण क े लिलए सरकार को Yर्थीानां रिर कर विदया और सरकार साव<Hविनक विह में इस रह क े अवशोषण क े लिलए सहम हो गई।
18. Hवाबी हलफनामे में राज्य सरकार क े सार्थी ही सार्थी NOIDA द्वारा एक विवभिशष्ट कदम उठाया गया है विक राज्य सरकार ने NOIDA द्वारा प्रत्यर्थी4 सं.[4] क े समावेशण का आदेश Hारी कर े हुए उत्तर प्रदेश समावेशण विनयमावली, 1984 क े ह शविP का प्रयोग विकया गया है।
19. अपीलार्थिर्थीयों की ओर से प्रY ु विवद्व अति वPा ने यह क < विदया विक प्रत्यर्थी4 सं.[4] पूव<व 4 उ.प्र. पावर कॉरपोरेशन का कम<'ारी र्थीा Hो एक सरकारी विवभाग नहीं Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA है, इसलिलए वह एक सरकारी कम<'ारी नहीं र्थीा और इस प्रकार समावेश विनयम, 1984 क े ह NOIDA की सेवा में समावेभिश नहीं विकया Hा सक ा र्थीा Uयोंविक उP विनयम क े वल एक सरकारी कम<'ारी क े मामले में लागू हो े हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है विक प्रत्यर्थी4 सं.[4] एक सरकारी कम<'ारी नहीं र्थीा और समावेशी विनयम क े वल एक सरकारी कम<'ारी क े लिलए लागू हो े हैं, परन् ु इस मुद्दे को हमें इस कारण रोकने की आवश्यक ा नहीं है विक विनयमों का एक अन्य सेट है सिHसे 'NOIDA' 'NOIDA' उत्तर प्रदेश राज्य विवद्यु परिरषद क े सेवकों का साशन एवं अन्य उपक्रमों मे समविवलयन विवविनयम 1987'NOIDA' 'NOIDA' (ए क्ट्रिYमनपश्चा 'NOIDA' 1987 विवविनयम'NOIDA' क े रूप सन्दर्थिभ ) क े रूप में Hाना Hा ा है, Hो विवद्यु आपूर्ति अति विनयम, 1948 की ारा 79(सी) क े प्राव ानों क े ह एक वै ाविनक विवविनयमन है बनाई गई है, Hहां विनगम क े कम<'ारिरयों को राज्य सरकार की सेवा में समावेश विकया Hा सक ा है अर्थीवा सरकार क े अन्य उपक्रमों या विनगमों में उसी रह से सिHस रह से सरकार क े कम<'ारिरयों को समावेश विनयम, 1984 क े ह समावेभिश विकया Hा सक ा है।
20. इस Y र पर यह संदभ< 1976 क े अति विनयम की ारा 5 क े ह लिलया Hा सक ा है Hो विनoनानुसार है: - 'NOIDA' 'NOIDA' 5 प्राति करण क े कम<'ारी- (1) ऐसे विनयंत्रण और प्रति बं राज्य सरकार क े सामान्य अर्थीवा विवभिशष्ट आदेशों द्वारा विन ा<रिर हो सक ा है, प्राति करण ऐसे अति कारिरयों और कम<'ारिरयों क े सदYय की विनयुविP कर सक ा है Hो अपने कायz क े प्रदश<न क े लिलए आवश्यक हों और इसक े ग्रेड और पदनाम विन ा<रिर कर सक े हैं। (2) यर्थीापूव P प्राति कारी क े अति कारी और अन्य कम<'ारी प्राति करण की विनति यों, ऐसे वे न और भत्तों से प्राप्त करने क े लिलए हकदार होंगे और वे सेवा की ऐसी अन्य श z द्वारा शासिस होंगे Hो प्राति करण से सहम हों। ” Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
21. उपयु<P प्राव ानों क े अवलोकन से,यह Yपष्ट है विक अति कारिरयों और कम<'ारिरयों की विनयुविP की शविP प्राति करण पर विनभ<र कर ा है Hो इस रह क े विनयंत्रण और प्रति बं ों क े अ ीन है, Hो राज्य सरकार क े सामान्य अर्थीवा विवभिशष्ट आदेशों द्वारा विन ा<रिर विकए Hा सक े हैं। अपीलार्थिर्थीयों क े विवद्व अति वPा हमारे सामने राज्य सरकार क े ऐसे विकसी भी सामान्य अर्थीवा विवभिशष्ट आदेश देने में विवफल रहे, Hहां विनयुविP की शविP सिHसमें प्रोन्नति द्वारा विनयुविP में शाविमल शविP प्रति बंति है। इसक े विवपरी, 1981 क े विवविनयमों का विवविनयमन 16(1)(सी) NOIDA को प्रति विनयुविP पर विनयुP करने क े लिलए Yपष्ट रूप से शविP प्रदान कर ा है Hो भ 4 क े स्रो ों क े ह मान्य ा प्राप्त स्रो में से एक है। एक बार भ 4 क े स्रो क े रूप में प्रति विनयुविP भ 4 क े विनयमों क े ह उपलब् है, हमें 1976 क े अति विनयम और 1981 क े ह आवश्यक इरादे या अभिभप्राय द्वारा प्राति करण क े सार्थी एक प्रति विनयुविP करने वाले क े समावेश की शविP को मानने में कोई अवरो नहीं विदख ा।
22. इसक े अलावा 1981 क े विवविनयम 80 में यह प्राव ान विकया गया है विक ये विवविनयम 1976 क े अति विनयम क े ह राज्य सरकार द्वारा बनाए गए विकसी भी विनयम क े अ ीन हैं, Hैसा विक उ.प्र. शहरी विनयोHन और विवकास अति विनयम, 1973 की ारा 41 क े ह राज्य सरकार द्वारा Hारी विकए गए विनद’शों अर्थीवा उत्तर प्रदेश या संसद क े विव ानमंडल क े अति विनयम द्वारा इस विवषय पर बनाए गए विकसी अन्य कानून क े अनुसार है। 1981 क े विवविनयम 80 का विवविनयमन इस प्रकार है:- “80. संशय को दूर करने क े लिलए यह घोविष विकया Hा ा है विक ये विवविनयम अति विनयम क े ह राज्य सरकार द्वारा बनाए गए विकसी भी विनयम अर्थीवा उ.प्र. शहरी विनयोHन और विवकास अति विनयम, 1973 की ारा 41 क े ह राज्य सरकार द्वारा Hारी विकए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA गए विकसी भी विनद’श अर्थीवा उत्तर प्रदेश विव ानमंडल क े अति विनयम द्वारा इस विवषय पर बनाए गए विकसी अन्य कानून क े प्राव ानों अर्थीवा संसद क े अ ीन होंगे। उत्तर प्रदेश शहरी योHना और विवकास अति विनयम की ारा 41 विनoनलिललिख प्रकार है: - “41. राज्य सरकार द्वारा विनयंत्रण:- (1) (प्राति करण), अध्यक्ष या (उपाध्यक्ष) ऐसे विनद’श करेगा Hो राज्य सरकार द्वारा इस अति विनयम क े दक्ष प्रशासन क े लिलए समय-समय पर Hारी विकए Hाएं। (2) यविद इस अति विनयम क े अ ीन (प्राति करण, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष) द्वारा अपनी शविPयों का प्रयोग और क ृ त्यों का विनव<हन करने में या उसक े संबं में प्राति करण, अध्यक्ष या उपाध्यक्ष क े बी' कोइ< विववाद उद्भू हो ा है ो राज्य सरकार ऐसे विववाद पर राज्य सरकार का विवविनश्चय अंति म होगा। (3) राज्य सरकार, विकसी भी समय, अपने Yवयं क े प्रY ाव पर अर्थीवा इस विनविमत्त विकए गए आवेदन पर, (प्राति कारी या सभापति ) द्वारा पारिर विकसी आदेश या विनY ारिर विकए गये विकसी मामले में Hारी विकए गए विकसी आदेश की वै ा या उपयुP ा क े बारे में Yवयं को सं ुष्ट करने क े प्रयोHन क े लिलए प्राति करण या सभापति ) द्वारा पारिर विकसी मामले या आदेश क े अभिभलेख मंगा सक े गी और इस संबं में ऐसा आदेश पारिर कर सक े गी या ऐसा विनदेश दे सक े गी Hो वह ठीक समझे: परं ु राज्य सरकार ऐसे व्यविP को सुनवाइ< का युविPयुP अवसर विदए विबना प्रति क ू ल प्रभाव डालने वाला आदेश पारिर नहीं करेगी। (4) इस अति विनयम द्वारा प्रदत्त शविPयों क े प्रयोग में विकया गया राज्य सरकार का प्रत्येक आदेश अंति म होगा और विकसी न्यायालय में प्रश्नग नहीं विकया Hाएगा” उत्तर प्रदेश शहरी विनयोHन और विवकास अति विनयम, 1976 की ारा 41 उP अति विनयम की ारा 12 क े आ ार पर 1976 का अति विनयम लागू है। विवद्यु आपूर्ति अति विनयम, 1948 की ारा 79(ग) क े उपबं ों क े ह बनाए गए 1987 क े विवविनयमों, सरकारी उपक्रमों या अन्य सांविवति क विनगमों में पूव< क े कम<'ारिरयों का प्राति क ृ समावेश संसदीय अति विनयमन, विवविनयमों 1981 की ारा 80 क े उपबं ों और उत्तर प्रदेश शहरी विनयोHन और विवकास अति विनयम, 1976 की सपविठ ारा 41 क े दृविष्टकोण में, न क े वल प्रत्यर्थी4 सं.[2] राज्य सरकार Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा समय-समय पर Hारी विकए गए प्रत्येक विनद’श से आबद्ध है बक्ट्रि™क प्रति विनयुविP क े आ ार पर NOIDA में प्रत्यर्थी4 सं.[4] की विनयुविP और राज्य सरकार क े आदेशों क े ह उसक े पश्चा व 4 समावेश में त्रुविट नहीं की Hा सक ी अर्थीवा 1981 विवविनयमों का अति क्रमण अव ारिर हो सक ा है। दनुसार प्रर्थीम मुद्दे का उत्तर विदया गया है।
23. अपीलार्थिर्थीयों क े इशारे पर विनयुविP और पश्चा व 4 समावेश क े लिलए 'ुनौ ी की अनुरक्षण ा का प्रश्न भी प्रत्यर्थी4 सं.[2] और 3 क े विवद्व अति वPा द्वारा उठाया गया है। यह Hोरदार रीक े से क < विदया गया है विक अपीलार्थी4 क े पास परिरयोHना अभिभयं ा (इलेक्ट्रिUटVकल) क े पद पर पदोन्नति क े विव'ारार्थी< अपेतिक्ष आवश्यक योग्य ा का अभाव है और उP पद पर विनयुविP की कोई भी 'ुनौ ी पदोन्नति क े लिलए अनुति' होने पर उनका इशारा पोषणीय नहीं है। यह ब ाया गया है विक परिरयोHना अभिभयं ा क े लिलए पात्र ा इंHीविनयरिंरग में तिडग्री है सिHसमें सहायक परिरयोHना अभिभयं ा क े रूप में न्यून म 8 वष< का अनुभव हो।
24.
NOIDA द्वारा अपने Hवाबी हलफनामे में Yर्थीाविप विवभिशष्ट मामला यह है विक अपीलार्थी4 सं.[1] को 1987 में Hूविनयर इंHीविनयर क े रूप में विनयुP विकया गया र्थीा और विदनांक 27.08.2013 को सहायक परिरयोHना अभिभयं ा क े पद पर पदोन्न विकया गया र्थीा। इस प्रकार उनक े पास 8 वष< क े अनुभव की आवश्यक योग्य ा का अभाव है और 2021 में पदोन्नति क े विव'ारार्थी< पात्र होंगे। Hहाँ क अपीलार्थी4 सं.[2] का संबं है उन्हें फरवरी, 2009 में सहायक परिरयोHना अभिभयं ा क े पद पर विनयुP विकया गया र्थीा। Hैसा विक सेवा विवविनयमों द्वारा उपबक्ट्रिन् विकया गया है, वह फरवरी, 2017 में 8 वष< की सेवा पूरी करने पर पदोन्नति क े विव'ारार्थी< पात्र हो गया। इस प्रकार, 2014 में प्रत्यर्थी4 सं.[4] की विनयुविP क े समय और 2015 में उसक े पश्चा व 4 क े समावेश दोनों अपीलार्थी4 सहायक परिरयोHना अभिभयं ा क े रूप में 8 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वष< क े अपेतिक्ष अनुभव क े लिलए परिरयोHना अभिभयं ा क े लिलए पात्र नहीं र्थीे।
25. उपरोP थ्यों और कारणों क े लिलए अपीलार्थिर्थीयों द्वारा 'ुनौ ी दी गई विक प्रत्यर्थी4 सं.[4] का विनयुविP और समावेश योग्य नहीं है और उनक े पास मामले में सुने Hाने का कोई अति कार नहीं है। इस न्यायालय द्वारा Hसभाई मो ीभाई देसाई बनाम रोशन क ु मार, हाHी बशीर अहमद एवं अन्य[2] में विकये गए अवलोकनों का उल्लेख करना प्रासंविगक हो सक ा है, यह अव ारिर कर े हुए उच्च न्यायालय द्वारा अवलक्ट्रिoब है विक Hब क व्यविPग रूप से 'ोट न लगी हो, विकसी व्यविP को दुखी नहीं कहा Hा सक ा है और सुने Hाने का कोई अति कार नहीं है। "उपरोP ''ा< क े आलोक में, यह Yपष्ट रूप से Yपष्ट है विक अपीलार्थी4 को कानूनी अति कार से इनकार अर्थीवा वंति' नहीं विकया गया है। उन्होंने विकसी कानूनी संरक्षण विह को 'ोट नहीं पहुं'ाई है। वाY व में, आक्षेविप आदेश उसक े विवरूद्ध एक विनण<य क े रूप में काय< नहीं कर ा है, उससे बहु ही कम गल रीक े से उसक े शीष<क को प्रभाविव कर ा है। उसे कानूनी गल नहीं माना गया है। उसे कोई कानूनी भिशकाय नहीं हुई है। उसक े पास फांसी देने क े न्यायसंग दावे क े लिलए कोई विवति क आ ार नहीं है। अ ः, वह 'NOIDA' व्यभिर्थी व्यविP'NOIDA' नहीं है और उसक े पास “अनापलित्त प्रमाणपत्र” क े अनुदान को 'ुनौ ी देने क े लिलए सुने Hाने का कोई अति कार नहीं है।”
26. प्रत्यर्थी4 सं.[4] क े बाद विनर्दिववाद रूप से मामले पर विव'ार करने क े लिलए उत्तरदायी मामले का एक और पहलू है विक NOIDA में उसे अपने मूल विवभाग से मुP कर विदया गया र्थीा और मूल विवभाग क े सार्थी उसका ग्रहणाति कार समाप्त हो गया र्थीा। Hमील अहमद बनाम इंडक्ट्रिYटVयल डेवलपमेन्ट कविमश्नर एण्ड प्रिंप्रसिसपल सेक्र े टरी एवं अन्य 3 में क ु छ इसी रह क े विववाद को ध्यान में रख े हुए, Hहां रेलवे सुरक्षा बल में एक वरिरष्ठ विनरीक्षक को प्रारoभ में NOIDA में प्रति विनयुP विकया गया र्थीा और पश्चा व 4 समावेभिश विकया गया र्थीा, इस न्यायालय ने यह अव ारण कर े हुए
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विक NOIDA में प्रति विनयुविP पर विनयुविP और पश्चा व 4 समावेश की अनुमति र्थीी और 1981 क े प्राव ानों का विवश्लेषण करने क े बाद यह अवलोकन विकया विक इस रह क े कम<'ारी को ऐसी क्ट्रिYर्थीति में नहीं रखा Hा सक ा है सिHसक े परिरणामYवरूप उसक े कम<'ारी न ो प्राति करण क े हैं और न ही मूल विवभाग क े । यह रिरपोटz क े पैराग्राफ 9 में की गई विटप्पभिणयों को पुन: प्रY ु करने क े लिलए प्रासंविगक हो सक ा है। 'NOIDA' 'NOIDA' इस मामले क े थ्यों और परिरक्ट्रिYर्थीति यों पर, हमें प्राति करण की ओर से आग्रह विकए Hाने वाले प्रश्न में गहराई से Hाने की आवश्यक ा नहीं है, Uयोंविक, हमारा विव'ार है विक अपीलार्थिर्थीयों ने रेलवे से इY ीफा दे विदया है और प्राति करण ने उन्हें आठ वष< पूव< समावेभिश कर लिलया गया है, उसकी विकसी त्रुविट क े लिलए एक क्ट्रिYर्थीति में नहीं रखा Hा सक ा है, सिHसक े परिरणामYवरूप उसका कोई कम<'ारी न ो प्राति करण का है और न ही उसक े मूल विवभाग का। अपीलार्थी4 को विवसंगति क े लिलए पीविड़ नहीं बनाया Hा सक ा है, यविद कोई हो, ो यह मान े हुए विक ऐसी कोई कमी है सिHसे अब प्राति करण द्वारा एक कारण क े रूप में क < विकया गया है।'NOIDA' 'NOIDA'
27. हमारी पूव P ''ा< क े परिरणामYवरूप, हमें इस अपील में कोई गुण नहीं विमल ी और दनुसार लाग क े विबना ही आदेश को खारिरH कर विदया Hा ा है।.............................................. (न्यायमूर्ति मोहन एम. शान् ानागौदर).............................................. (न्यायमूर्ति क ृ ष्ण मुरारी) नई विदल्ली; 29 Hनवरी, 2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA