Uttar Pradesh State v. Ali Hussain Ansari & Ors.

Supreme Court of India · 15 Jan 2020
S. Abdul Nazeer; Sanjeev Khanna
Civil Appeal No. 314 of 2020
civil appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld pension entitlement from the date of recognized service despite non-payment of salary, rejecting the State's appeal and awarding compensation.

Full Text
Translation output
अप्रति वेद्य
भार ीय सव च्च न्यायालय
दीवानी अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील सं. 314 वर्ष! 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति(का (सिसविवल) सं. 18627 वर्ष! 2019 से उद्भू )
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य ..........अपीलार्थी5 गण
बनाम
अली हुसैन अंसारी एवं अन्य ...........प्रत्यर्थी5 गण
विनण!य
न्यायमूर्ति संजीव खन्ना
अनुमति प्रदत्त।
JUDGMENT

2. उत्तर प्रदेश राज्य एवं इसक े पदाति कारिरयों ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय क े 19.07.2018 विदनांविक उस विनण!य को (ुनौ ी दे े हुए mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA व !मान अपील दायर की है सिजसक े द्वारा खंडपीठ ने उनकी अपील को खारिरज कर े हुए विवद्व एकल न्याया ीश द्वारा सेवाओं एवं पदोन्नति यों में वरिरष्ठ ा क े सार्थी सेवाविनवृत्तित्त लाभों क े रूप में अनुर्षंविगक लाभ, यविद कोई, लेविकन 08.06.1987 से 30.06.2006 क े बी( क े वे न का वास् विवक भुग ान नहीं, का विदया जाना विनर्दिदष्ट करने वाले 04.01.2018 विदनांविक आदेश की पुविष्ट की र्थीी। खंडपीठ ने अक्षेविप आदेश द्वारा प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 की प्रारंभिभक विनयुविX ति भिर्थी को 08.06.1987 मान े हुए सेवाओं क े जारी रहने संबं ी विनष्कर्ष! की अभिभपुविष्ट की है। विवविनर्दिदष्ट विकया है विक 8.6.1987 से वास् विवक सेवायोजन की ति भिर्थी 30.06.2006 क क े बी( अवति पेंशन लाभ सविह अन्य अनुर्षंविगक लाभ क े उद्देश्य क े त्तिलए विगनी जाएगी । हालांविक विपछले वे न क े भुग ान क े त्तिलए नहीं विगनी जाएगी।

3. पक्षों क े अति वXाओं को सुनने क े पश्चा विवभिशष्ट थ्यों,इक्वि`वटी क े अति शेर्ष,क े आलोक में हमारा मानना है, विक सेवाविनवृत्तित्त लाभ क े संबं में यर्थीा प्रदत्त विनदbश में संशो न की आवश्यक ा है।

4. हमारे समक्ष प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 अली हुसैन अंसारी की सत्य प्रकाश विववेकानंद इंटर कॉलेज,मुसहरी, देवरिरया,उत्तर प्रदेश में दर्थी! आ ार पर विनयुविX की अनुशंसा की गई र्थीी। हालांविक हमारे समक्ष उपक्विस्र्थी विद्व ीय प्रत्यर्थी5 उX कॉलेज की प्रबं सविमति सहम नहीं हुई और परिरणामस्वरूप विनयुविX पत्र जारी नहीं विकया। उन्होंने 08.07.1987 विदनांविक विवज्ञापन जारी विकया। पद पर सी ी भ 5 क े त्तिलए रोजगार दफ् र में पंजीक ृ नामों को शाविमल विकया जाना र्थीा। (यन क े पश्चा ् शेर्षमभिण शुक्ला नाम का व्यविX विनयुX विकया गया और सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया को अनुमोदनार्थी! वन 11.09.1987 विदनांविक पत्र त्तिलखा गया। हालांविक सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया ने इंकार कर विदया और 10.12.1987 विदनांविक पत्र Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी यह कह े हुए संस् ुति नहीं दी की शेर्षमभिण शुक्ला का (यन उत्तर प्रदेश माध्यविमक सेवा आयोग (कविठनाइयों का विनवारण) आदेश, 1981 क े प्राव ानों क े विवरुद्ध र्थीा। सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया ने 20.04. 1988 विदनांविक आदेश द्वारा शेर्षमभिण शुक्ला की विनयुविX क े त्तिलए विवत्तीय स्वीक ृ ति देने से मना कर विदया। सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया क े द्वारा अपनाए गए रवैये से व्यभिर्थी शेर्षमभिण शुक्ला ने इन आदेशों को रिरट याति(का संख्या 14530/1988 द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में (ुनौ ी दी। 27.01.1992 विदनांविक अं रिरम आदेश द्वारा सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया सविह हमारे समक्ष उपक्विस्र्थी अपीलार्थी5 गण ने और दूसरे प्रत्यर्थी5 को शेर्षमभिण शुक्ला को वे न क े भुग ान का विनदbश विदया गया । अ ः अं रिरम विनदbशों क े ह शेर्षमभिण शुक्ला ने काय! विकया और उसे 23.04.2004 क वे न विदया गया जब उच्च न्यायालय ने उसक े द्वारा दायर रिरट याति(का को रद्द कर विदया। व्यभिर्थी शेर्षमभिण शुक्ला ने विवशेर्ष अनुमति याति(का संख्या 590 वर्ष! 2004 दायर विकया जो विक उच्च न्यायालय क े खंडपीठ द्वारा 22.02.2006 को रद्द कर विदया गया। इस विनण!य क े विवरुद्ध अपील को भी सी ए नंबर 4966 वर्ष! 2009 में 31.07.2009 विदनांविक आदेश क े द्वारा रद्द कर विदया गया ।

5. त्पश्चा प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 को विनयुविX पत्र जारी विकया गया और सक्षम प्राति कारी सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया द्वारा 31.07.2006 विदनांविक आदेश जारी करने क े पश्चा सहायक प्रोफ े सर (?) क े रूप में 30.06.2006 को विनयुX विकया गया। प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 सेवाविनवृत्तित्त की आयु होने पर 30.06.2009 को सेवाविनवृत्त हो गया।

6. 1.5.2008 क े आस-पास प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 ने 8.6.1987 से 30.6.2006 क क े बकाया वे न क े भुग ान की मांग कर े हुए उच्च न्यायालय क े समक्ष रिरट याति(का 221012 वर्ष! 2008 दायर की है। रिरट याति(का का विनस् ारण विवद्व एकल Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्याया ीश की 1.05.2008 विदनांविक आदेश से हुआ सिजसमें सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया को प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 की मांग पर विव(ार करने और विनण!य करने का विनदbश विदया गया। सिजला विवद्यालय विनरीक्षक देवरिरया ने 20.5.2009 विदनांविक आदेश द्वारा "काम नहीं भुग ान नहीं" क े सिसद्धां क े आ ार पर बकाया वे न क े भुग ान की मांग को अस्वीक ृ कर विदया। व्यभिर्थी प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 ने रिरट याति(का संख्या 11131 वर्ष! 2010 दायर की जो 4.01.2018 विदनांविक आदेश द्वारा यह विवविनर्दिदष्ट कर े हुए विनस् ारिर विकया विक प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 8.06.1987 से अनुर्षंविगक लाभों सविह पेंशन लाभ का हकदार होगा। हमने खंडपीठ द्वारा विदए गए Special Appeal Defective No. 416 वर्ष! 2008 में आदेश को संदर्भिभ विकया है सिजसमें अपील को अन्य बा ों क े सार्थी-सार्थी यह कह े हुए रद्द कर विदया विक प्रत्यर्थी5 सेवाविनवृत्तित्त लाभ क े भुग ान क े उद्देश्यों क े त्तिलए 8.6.1987 से सेवार मान े हुए वरिरष्ठ ा और पदोन्नति लाभ क े सार्थी, यविद कोई हो,सेवाविनवृत्तित्त लाभों का हकदार होगा। हालांविक वास् विवक वे न "काम नहीं भुग ान नहीं" क े सिसद्धां क े आ ार पर नहीं विदया जाना र्थीा।

7. ऊपर अंविक थ्यों से यह प्रत्यक्ष है विक शेर्षमभिण शुक्ला ने (यन एवं विनयुविX क े उपरां वर्ष! 1988 में रिरट याति(का दायर की र्थीी और 2004 क सहायक प्रोफ े सर क े रूप में काय! विकया र्थीा यह उच्च न्यायालय द्वारा जारी विकए अं रिरम विनदbशों क े अनुरूप र्थीा। शेर्षमभिण शुक्ला को असिसस्टेंट प्रोफ े सर क े रूप में वे न का भुग ान भी विकया गया र्थीा। प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 हालांविक सहायक अध्यापक क े रिरX पद क े त्तिलए अनुशंविर्ष विकया गया र्थीा लेविकन उसे कभी भी विनयुविX पत्र जारी नहीं विकया गया और विनयुX नहीं विकया गया और 30.06.2006 को पद ारण करने से पूव! काय! नहीं विकया र्थीा 3 वर्ष† क काय! करने क े पश्चा वह 30.06.2009 को सेवाविनवृत्त हो गया। उपरोX विवशेर्ष थ्यात्मक क्विस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए हम न्यायालय Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा सेवाविनवृत्तित्त लाभ क े भुग ान संबंति विनदbश को इस विनदbश क े सार्थी संशोति कर े हैं विक प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 को रु. 4,00,000 ((ार लाख रूपये मात्र) अनु ोर्ष क े रूप में विदया जाए। अनु ोर्ष उसकी विनयुविX की ति भिर्थी को 30.06.2006 मान े हुए प्रर्थीम प्रत्यर्थी5 को विवति क े अनुरूप देय होगा। उपरोX रु. 4,00,000 ((ार लाख रूपये मात्र) राभिश अपीलार्थी5 द्वारा इस आदेश की ति भिर्थी से 6 सप्ताह क े भी र दी जाएगी और भुग ान क े विवलम्ब की क्विस्र्थीति में अपीलार्थी5 इस आदेश की ति भिर्थी से 10% वार्दिर्षक ब्याज देने क े त्तिलए उत्तरदायी होगा। …...…………………….. (न्यायमूर्ति एस. अब्दुल नजीर) ……………………….. (न्यायमूर्ति संजीव खन्ना) नई विदल्ली 15 जनवरी, 2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA