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सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
आपराति क अपीलीय अति कार
आपराति क अपील सं. 50/2020
(एस.एल.पी (अप०) सं. 4638/2018 से उत्पन्न
शंकर प्रसाद .... अपीलार्थी! (गण)
बनाम
उत्तर प्रदेश राज्य .... प्रति वादी (गण)
निनण)य
माननीय न्यायमूर्ति डॉ. नंजय वाई चंद्रचूड़, 1 अनुमति प्रदान की गई ।
JUDGMENT
2. यह अपील 5 सिस ंबर, 2017 क े इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ क े निनण)य और आदेश से उद्भू हुई है उच्च न्यायालय ने अपने फ ै सले से अपीलक ा) द्वारा ृ ीय अति रिरक्त सत्र vLohdj.k vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2020 INSC 28 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA न्याया ीश, फ ेहपुर द्वारा सत्र परीक्षण सं. 59/1986 में भार ीय दंड संनिह ा 1860 की ारा 302 क े ह अपरा की सजा को चुनौ ी देने क े लिलए दायर आपराति क अपील सं. 2546/1987 को खारिरज कर निदया, सिजसमें अपीलार्थी! को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। ३. निवचारा ीन घटना 25 अगस्, 1985 को सुबह 8. 45 बजे हुई र्थीी, गया प्रसाद (PW 1), PW 1), जो शिशकाय क ा) है, शौच मुक् होने क े बाद घर लौट रहा र्थीा। जब वह चक रोड से गुजर े हुए निववानिद भूखंड पर पहुंचा, ो उसने देखा निक अपीलक ा) क े भाई दुगा) प्रसाद को दो मजदूरों की मदद क े सार्थी एक गड्डा खोदा जा रहा र्थीा, सिजनमें से एक राम नार्थी (PW 1), PW 2) र्थीा। जब शिशकाय क ा) ने आपलित्त ज ाई, ो दुगा) प्रसाद द्वारा यह कहा जा ा है निक वह कोई गल काम नहीं कर रहा र्थीा। उस समय, अपीलक ा) ने निववाद में हस् क्षेप निकया और बहस हुइ) । अपीलक ा) अपने घर पहुंचा और एक देश निनर्मिम निपस् ौल क े सार्थी लौट आया। जब वह प्रति वादी गया प्रसाद (PW 1), PW 1) पर एक गोली चलाने का इरादा कर रहा र्थीा, उसी समय शिशकाय क ा) क े बेटे उमा शंकर ने पीछे से अपीलक ा) को पकड़ लिलया। अपीलक ा) ने खुद को मुक्त करने में कामयाबी हासिसल की vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA और उमा शंकर को गोली मार दी जो एक आग्नेय आस्त्र की चोट क े परिरणामस्वरूप निगर गया आैर उमा शंकर ने दम ोड़ निदया। 4 घटना का चश्मदीद गवाह प्रति वादी गया प्रसाद (PW 1), PW 1) और राम नार्थी (PW 1), PW 2) क े बयान पर आ ारिर र्थीा इन दोनों गवाहों ने घटना क े बारे में ब ाया। दोनों, सत्र न्यायालय और अपील में, उच्च न्यायालय ने Pw- 1 और 2 क े साक्ष्य पर भरोसा निकया है। इस थ्य का संज्ञान ले े हुए निक PW 1 मृ क का निप ा है, उच्च न्यायालय ने अपनी गवाही क े साव ानीपूव)क मूल्यांकन पर, उसक े आरापों को खारिरज करने का कोई कारण नहीं पाया। उच्च न्यायालय ने माना निक घटना क े समय और स्र्थीान क े संबं में PW 1 की उपस्थिस्र्थीति स्वाभानिवक र्थीी। इसक े अलावा, PW 1 ने अपनी उपस्थिस्र्थीति क े बावजूद दुगा) प्रसाद को अपरा में फ ं साया नहीं ?, जो इस थ्य का एक संक े क र्थीा निक उसने वास् निवक घटना का एक वास् निवक निववरण निदया र्थीा। आखों देखा साक्ष्य को तिचनिकत्सा साक्ष्य द्वारा और डॉक्टर (PW 1), PW 4) क े साक्ष्य द्वारा समर्थिर्थी निकया गया र्थीा, सिजन्होंने इस बा का समर्थी)न निकया र्थीा निक बंदूक की वजह से मृत्यू कारति चोट लग सक ी है। पोस्टमाट)म रिरपोट) में निनम्नलिललिख शब्दों में एक आग्नेय आस्त्र की चोट का संक े निदया गया है: vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA " एक आग्नेय आस्त्र से छा ी क े घाव से प्रवेश करक े 1 x 1 क े शिछद्र क े रूप में गद)न से पेट क की हड्डी क गहरा र्थीा जो दायें निनप्पल से ३ ओ क्लाक की स्थिस्र्थी ी में र्थीा । उसक े आस पास का भाग पीछे की ओर क फट गया र्थीा घाव क े चारों ओर कालापन और गुदा हुआ र्थीा। चोट की निदशा सामने से पीछे की ओर र्थीी । उन्हें उमा शंकर क े शव क े अंदर से एक गोली निमली। ” इस साक्ष्य की स्थिस्र्थीति पर, घटना की प्रक ृ ति निवति व स्र्थीानिप की गई है। अपीलक ा) की उपस्थिस्र्थीति और घटना में अपीलक ा) की भूनिमका रिरकॉड) पर साक्ष्य से स्पष्ट है।
5. 18 मई, 2018 को निवशेष अनुमति यातिचका पर निवचार कर े हुए, इस न्यायालय ने अपीलार्थी! को प्रस् ु करने का उल्लेख निकया निक यनिद पूरे साक्ष्य को सही माना जाए ो भी व )मान मामला भार ीय दंड संनिह ा की ारा 304 क े अं ग) आ ा है इस न्यायालय द्वारा जारी नोनिटस क े अनुसरण में, उत्तर प्रदेश राज्य ने उपस्थिस्र्थीति दज) की है और एक जवाबी हलफनामा दायर निकया गया है। ६. थ्य, जैसा निक वे रिरकॉड) से स्पष्ट है, इंनिग कर ा है निक घटना एक छण में हुई र्थीी और सिजसे अपीलक ा) क े भाई द्वारा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एक टीले की खुदाई पर उत्पन्न एक निववाद क े परिरणाम स्वरूप हुआ र्थीा। शिशकाय क ा) गया प्रसाद (PW 1), PW 1) द्वारा इस पर आपलित्त ज ाई गई र्थीी। निववाद क े परिरणामस्वरूप अपीलक ा) अपने घर गया र्थीा और एक देश निनर्मिम निपस् ौल लाया र्थीा। शिशकाय क ा) क े बेटे -मृ क उमा शंकर ने निववाद क े दौरान हस् क्षेप निकया और उस पर गोलीबारी की गई, सिजसमें एक आग् नेय आस्त्र की चोट क े परिरणामस्वरूप उनकी मृत्यु हो गई र्थीी।
7. मामले की परिरस्थिस्र्थीति यों को ध्यान में रख े हुए, हमारा निवचार है निक भार ीय दंड संनिह ा की ारा 302 क े अ ीन दोषसिसतिi को ारा 304 भाग-I क े अ ीन में संपरिरवर्ति निकया जाना चानिहए हम दनुसार आईपीसी की ारा 304 भाग-I क े ह अपरा क े लिलए अपीलक ा) को दोषी मान े हैं और उसे दस साल की अवति क े लिलए कारावास की सजा दे े हैं।
8. अपील उपरोक्त निनबं नों में अनुज्ञा है vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA........................................ माननीय न्यायमूर्ति डॉ. नंजय वाई चंद्रचूड़......................................... माननीय न्यायमूर्ति ऋनिषक े श रॉय नई निदल्ली; January 10, 2020 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आइटम सं -22 न्यायालय सं. 8 अनुभाग -II उच्च्ा म न्यायालय काय)वाही क े अशिभलेख यातिचका (ओं) को निवशेष अनुमति क े लिलए अपील (अप०) सं. 4638/2018 (05-09-2017 निदनांनिक आक्षेनिप अंति म निनण)य और आदेश से उत्पन्न सिजसे अपराति क अपील सं- 2546/1987 में उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा आपराति क अपील सं. 2546/1987 में पारिर निकया गया र्थीा शंकर प्रसाद.... अपीलार्थी! (गण) बनाम उत्तर प्रदेश राज्य.... प्रति वादी (गण) निदनांक: 10-01-2020 इस यातिचका को आज सुनवाई क े लिलए बुलाया गया र्थीा। कोरम: माननीय न्यायमूर्ति डॉ. डी. वाई. चंद्रचूड़ माननीय न्यायमूर्ति श्री ऋनिषक े श राय vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA यातिचकाक ा) (ओं) क े लिलए अति वक्ता श्री निनम)ल क ु मार अंबष्ठ, एडवोक े ट ऑन रिरकॉड) सुश्री सुस्थिष्म ा निबसया), प्रति वादी (ओं) क े लिलए अति वक्ता श्री निवष्णु शंकर जैन, एडवोक े ट ऑन रिरकॉड) श्री श्रेयस अग्रवाल, अति वक्ता अति वक्ताओं की सुनवाई पर न्यायालय ने निनम्नलिललिख आदेश निदया आदेश अनुमति प्रदत् अपील हस् ाक्षरिर प्रति वेद्य निनण)य क े संदभ) में अनुमति दी गई है लंनिब आवेदन, यनिद कोई हो, का निनस् ारण निकया जा ा है। (संजय क ु मार-I) (सरोज क ु मार गौण) उ० निन० कम पी० एस० कोट) मास्टर हस् ाक्षरिर प्रति वेद्य निनण)य फाइल में रखे जा े है vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA