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भार की सव च्च न्यायालय में
आपराति क अपीलीय अति कार
विवशेष अनुमति याति का (सी) सं. 4802-4803 वष! 2019
उत्तर प्रदेश और अन्य ..... याति काक ा!गण
बनाम
वीरेन्द्र क
ु मार और अन्य .....प्रत्यर्थी,गण
सह
विवशेष अनुमति याति का (सी) सं. 4815 वष! 2019
उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद और एक अन्य ..... याति काक ा!गण
बनाम
वीरेन्द्र क
ु मार और अन्य .… प्रत्यर्थी,गण
सह
विवशेष अनुमति याति का (सी) सं. 4804 वष! 2019
उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद और एक अन्य ..... याति काक ा!गण
बनाम mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
ंद्रा पाल सिंसह और अन्य ..... प्रत्यर्थी,गण
सह
विवशेष अनुमति याति का (सी) सं. 373 वष! 2019
उत्तर प्रदेश एवं विवकास परिरषद और एक अन्य ..... याति काक ा!गण
बनाम
शिशवाश्रय राय और अन्य ..... प्रत्यर्थी,गण
सह
विवशेष अनुमति याति का (सी) सं. 386 वष! 2019
उत्तर प्रदेश राज्य .... याति काक ा!
बनाम
शिशवाश्रय राय और अन्य ..... प्रत्यर्थी,गण
विनण!य
माननीय न्यायमूर्ति अशोक भूषण
हमने उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से उत्तर प्रदेश राज्य महाति वक्ता श्री
राघवेन्द्र सिंसह को सुना, प्रति वादी सं. 1 से 4 क
े लिलए विवद्व अति वक्ता श्री mn~?kks"k.kk
Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
विनलि<ल मजीवि>या उपस्थि@र्थी हुए हैं, प्रत्यर्थी, संख्या 1 से 4 क
े लिलए विवद्व
अति वक्ता श्री पीक
े जैन उपस्थि@र्थी हुए हैं।
JUDGMENT
2. पक्षकारों क े विवद्व अति वक्ता ने क े वल इस प्रश्न पर अपने कI को र<ा है विक क्या उत्तर प्रदेश राज्य बनाम प्री म सिंसह, (2014) 15 एस. सी. सी. 774 में इस न्यायालय क े विनण!य को वृहत्तर पी> को संदर्भिभ विकए जाने की आवश्यक ा है या नहीं।
3. इससे पहले विक हम संबंति पक्षकारों क े कI पर विव ार करें, विववाद की विबषयव@ ु को नोविOस करना आवश्यक है जो इस न्यायालय द्वारा प्री म सिंसह (उपरोक्त) क े मामले में विनण, विकया गया र्थीा। हमें थ्यों और मुद्दों पर भी ध्यान देने की आवश्यक ा है जो इन विवशेष अनुमति याति काओं में उत्पन्न हुए हैं। प्री म सिंसह का मामला
4. राज्य विव ानमंडल ने उत्तर प्रदेश में एक आवास और विवकास बोड! की @र्थीापना, विनगमन और कामकाज क े लिलए एक अति विनयम पारिर विकया, अर्थीा! ्, उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद अति विनयम, 1965 (इसक े पश्चा ् “1965 अति विनयम” क े रूप में विनर्दिदष्ट)। ारा 3 में यह उपबं है विक राज्य सरकार राजपत्र में अति सू ना द्वारा एक बोड! @र्थीाविप करेगी जिजसे उत्तर प्रदेश अवाम विवकास परिरषद (जिजसे इसमें इसक े पश्चा ् बोड! या परिरषद कहा गया है) कहा जाएगा। बोड! को एक विनगविम विनकाय माना गया र्थीा।
5. बोड! ने वष! 1973 में अपने कम! ारिरयों को अंशदायी भविवष्य विनति प्रदान करने क े लिलए विवविनयम बनाए हैं। विदनांक 21.02.1995 को, बोड! ने अपने mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कम! ारिरयों क े लिलए अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े @र्थीान पर पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना का प्र@ ाव र<ा। राज्य सरकार ने विदनांक 16.05.1996 को प्र@ ाव का जवाब भेजा विक राज्य सरकार को अपने कम! ारिरयों क े लिलए पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना को लागू करने में कोई आपलित्त नहीं है, हालांविक, वह योजना क े लिलए बोड! को कोई विवत्तीय सहाय ा नहीं देगा। बोड! ने हालिलया अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े @र्थीान पर अपने कम! ारिरयों क े लिलए पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी क े लिलए अति विनयम, 1965 की ारा 95 क े ह विवविनयम बनाए। राज्य सरकार ने विदनांक 26.11.1997 क े पत्रांक द्वारा पेंशन योजना क े काया!न्वयन को रोकने क े लिलए विनदbशिश विकया।
6. राज्य ने बोड! में अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े @र्थीान पर पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना क े काया!न्वयन क े लिलए विदनांक 14.04.1999 को एक आदेश जारी विकया, जिजसमें कई श c शाविमल र्थीीं। विदनांक 13.09.2005 को राज्य सरकार ने विdर से बोड! को सूति कर े हुए एक आदेश जारी विकया विक राज्य सरकार क े पहले क े आदेश विदनांक 07.05.2003 को रोकने का विनण!य लिलया गया है जो बोड! में अंशदायी भविवष्य विनति क े @र्थीान पर पेंशन/परिरवार पेंशन और ग्रेच्युOी योजना क े काया!न्वयन क े लिलए जारी विकया गया र्थीा। विदनांक 12.07.2007 को विdर से, एक और आदेश इस आशय का पारिर विकया गया विक साव!जविनक उद्यमों/विनगमों क े उन कर्दिमयों को पेंशन/भविवष्य विनति योजना लागू करने की कोई आवश्यक ा नहीं है जो कम! ारी भविवष्य विनति व क े न्द्रीय सरकार क े प्रकीण! उपबन् अति विनयम,1952 द्वारा कवर विकए गए हैं और/या वो जिजन्हें विवशिभन्न अंशदायी Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA भविवष्य विनति योजनाएं पहले ही लागू हैं। रिरO याति का सं. 582(एस/बी) वष! 2000 (प्री म सिंसह और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य) उच्च न्यायालय इलाहाबाद, ल<नऊ <ण्डपी> में दायर विकया गया जिजसमें विदनांक 14.09.1999, 13.09.2005 और 12.07.2007 क े आदेशों को ुनौ ी दी गयी र्थीी। रिरO याति का उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा लड़ी गई र्थीी उच्च न्यायालय ने अपने विनण!य विदनांविक 16.01.2009 से विनम्नलिललि< आदेश द्वारा रिरO याति का की अनुमति दी: "पूव!गामी कारणों क े लिलए, रिरO याति का सdल हो ी है और ए द्वारा अनुम की जा ी है। विदनांक 13.09.2005 क े आक्षेविप आदेशिश जिजसकी प्रति संलग्नक-14 है और विदनांक 12.07.2007 क े आदेश, जिजसकी प्रति अशिभले< पर संलग्नक- 18 है, को ए द्वारा रद्द विकया जा ा है, जहां क वे उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद से संबंति हैं। विदनांक 05.11.1997 को बनाए गए इसक े विनयमों क े अनुसार अपनी पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना को लागू करने क े लिलए उत्तर प्रदेश अवाम विवकास परिरषद को विनदbशिश कर े हुए परमादेश की प्रक ृ ति में एक रिरO जारी की जा ी है। परिरस्थि@र्थीति यों क े अन् ग!, लाग क े लिलए कोई आदेश नहीं होगा।”
7. उच्च न्यायालय क े विदनांक 16.01.2009 क े d ै सले क े विवरूद्ध व्यशिर्थी होकर उत्तर प्रदेश राज्य ने एक एसएलपी (सी.ए. संख्या 6307 वष! 2010mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उत्तर प्रदेश राज्य बनाम प्री म सिंसह और अन्य) दायर विकया। विदनांक 07.08.2012 को इस न्यायालय ने उच्च न्यायालय क े आदेश को रोक विदया लेविकन अन् ः विदनांक 23.09.2014 को इस न्यायालय द्वारा जिसविवल अपील को <ारिरज कर विदया गया जिजसका विनण!य (2014) 15 एससीसी 774 में रिरपोO! विकया गया है। इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक कम! ारिरयों की सेवा की श c बोड! क े कायI को गवि> नहीं कर ी हैं और इस प्रकार राज्य को पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना क े सम्बन् में विदनांक 13.09.2005 और 12.07.2007 क े विनदbशों को जारी करने की अति कारिर ा नहीं है। इस न्यायालय ने बोड! द्वारा ारा 95(1)(एd) क े ह बनाये गये विवविनयमों अर्थीा! ् पेन्शन/पारिरवारिरक पेन्शन और ग्रेच्युOी योजना विदनांविक 19.05.2009 पर भी ध्यान विदया। इस अदाल ने रिरO याति का को <ारिरज कर े हुए बोड! को ीन महीने क े भी र विदनांक 19. 05. 2009 की अति सू ना द्वारा शाजिस सेवाविनवृत्त कम! ारिरयों को पेंशन लाभ जारी करने का विनदbश विदया। आगे यह अव ारिर विकया गया विक यविद सेवाविनवृत्त कम! ारिरयों में से कोई भी अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े ह पहले से भुग ान विकए गए से अति क विवत्तीय बकाया का हकदार है, ो उक्त कम! ारी (ओं) को उक्त राशिश 9% प्रति वष! की दर से ब्याज का भुग ान विकया जाएगा।
8. विदनांक 13.05.2015 क े आदेश द्वारा उत्तर प्रदेश राज्य ने प्री म सिंसह(उपरोक्त) क े मामले में इसमें उजिpलि< क ु छ श I क े ह, इस न्यायालय क े विनण!य विदनांविक 23.09.2014 क े अनुपालन में बोड! क े कम! ारिरयों को पेंशन लाभ का विव@ ार करने क े लिलए विनदbश जारी विकए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दीवानी अपील संख्या 4802-4803 वष! 2019 (उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य बनाम वीरेंद्र क ु मार और अन्य आविद।)
9. उत्तर प्रदेश वे न सविमति 2008 की जिसdारिरशों क े आ ार पर, राज्य सरकार ने 6 वें वे न आयोग की रिरपोO! विदनांविक 01.01.2006 को लागू करने का विनण!य लिलया। राज्य सरकार ने इस विवषय पर विदनांक 08.12.2008 को आदेश सं. जनरल-3-1508/X-2008-308-97 जारी विकया: “उत्तर प्रदेश वे न सविमति 2008 की जिसdारिरशों क े आ ार पर विदनांक 01.01.2006 से पेंशन, ग्रेच्युOी/परिरवारिरक पेंशन और सेवाविनवृत्त/मृ व्यविक्तयों क े लघुकरण का संशो न।” प्र@ र 2 क े अं में सरकार क े आदेश ने विनदbशिश विकया: "परन् ु पूव क्त आदेश माननीय उच्च न्यायालय क े न्याया ीशों, उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग क े अध्यक्ष और सद@यों, गैर @वविवत्तपोविष सरकारी विवद्यालय क े कम! ारी और अध्यापक, @र्थीानीय विनकायों क े कम! ारी और लोक उद्यम कम! ारिरयों पर लागू नहीं होंगे"
10. इस प्रकार, उपरोक्त सरकारी आदेश ने @र्थीानीय विनकायों और साव!जविनक उद्यमों क े कम! ारिरयों को उक्त आदेश की प्रयोज्य ा से बाहर र<ा। एक अन्य सरकारी आदेश सं. 3-1515/X-2008-308-97 विदनांविक 08.12.2008 भी उन कम! ारिरयों क े लिलए जारी विकया गया र्थीा जो विदनांक 01.01.2006 से पहले सेवाविनवृत्त हुए र्थीे। उक्त आदेश भी @र्थीानीय विनकायों और साव!जविनक उद्यमों पर लागू नहीं विकया गया र्थीा। विदनांक 19.05.2009 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को बोड! द्वारा विवविनयमन अर्थीा! ्, उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद कम! ारी पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी विवविनयमन बनाया गया। विदनांक 16.10.2009 क े सरकारी आदेश द्वारा राज्य सरकार ने रिरपोO! की जिसdारिरशों पर लिलए गए विनण!य क े अनुसार जैसा विक 7 वें उत्तर प्रदेश वे न सविमति 2008 द्वारा प्र@ ु विकया गया र्थीा, साव!जविनक उद्यम/विनगमों क े विवशिभन्न श्रेशिणयों क े कम! ारिरयों को संशोति वे न संर ना, वे न बैंड और ग्रेड वे न और अन्य भत्ते को मंजूरी दी।
11. विदनांक 14.01.2010 को राज्य सरकार ने साव!जविनक क्षेत्र/विनगमों क े कम! ारिरयों क े लिलए 7 वें उत्तर प्रदेश वे न सविमति 2008 की जिसdारिरशों पर लिलए गए विनण!य क े अनुसार बोड! क े कम! ारिरयों को संशोति वे न संर ना में वे न बैंड और ग्रेड वे न और अन्य भत्तों को मंजूरी देने वाला आदेश जारी विकया। विदनांक 14.01.2010 क े सरकारी आदेश क े dल@वरूप हाउसिंसग कविमश्नर ने विदनांक 23.01.2010 को परिरणामी आदेश जारी विकया। विदनांक 15.09.2011 क े पश्चा ्व, सरकारी आदेश में यह @पष्ट विकया गया र्थीा विक विदनांक 01.01.2006 से 13.01.2010 की अवति क े लिलए संशोति वे न का बकाया बोड! क े कम! ारिरयों क े लिलए @वीकाय! नहीं होगा। राज्य सरकार ने प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय द्वारा पारिर विदनांक 23.09.2014 क े आदेश क े अनुपालन में बोड! क े कम! ारिरयों को पेंशन लाभ क े संबं में विदनांक 05.05.2015 को एक और पत्र जारी विकया। बोड! ने विदनांक 05.05.2015 को एक परिरणामी आदेश जारी विकया। बोड! क े सेवाविनवृत्त सहायक अशिभयं ाओं और सेवाविनवृत्त वग! I और II क े अति कारिरयों द्वारा रिरO याति का सं. 12645(एस/एस) वष! 2016 ( ंद्र पाल सिंसह और अन्य बनाम Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य) दायर की गयी। बोड! क े कम! ारिरयों और अति कारिरयों क े एक अन्य समूह द्वारा रिरO याति का सं. 10355(एस/बी) वष! 2017 (वीरेन्द्र क ु मार और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश और अन्य) दायर की गई। रिरO याति का संख्या 12645(एस/एस) वष! 2016 में विनम्नलिललि< प्रार्थी!नाएँ की गई हैं: "प्रार्थी!ना जिजस कारण, यह सादर प्रार्थी!ना की जा ी है विक माननीय ृ पा करे विक:i. प्रत्यर्भिर्थीयों को उसकी सेवाविनवृलित्त क याति काक ा!ओं क े वे न को विdर से विन ा!रिर करने और उसक े बाद छ>े वे न आयोग की जिसdारिरश क े आ ार पर विदनांक 01.01.2006 से उनक े पेंशन लाभ का आदेश दे े हुए परमादेश की प्रक ृ ति में रिरO, आदेश या विनदbश जारी करने क े लिलए। ii परिरषद क े अति कारिरयों पर सरकारी आदेश सं. 1508 विदनांक 08.12.2008 क े प्राव ानों को लागू करने जबविक पेंशन विवविनयमन विदनांविक 15.05.2009 सपवि> माननीय सव च्च न्यायालय का आदेश व विनण!य विदनांविक 23.09.2014 क े मद्देनजर उ.प्र. आवास एवं विवकास परिरषद क े कम! ारिरयों पर इसक े गैर-प्रयोग क े बारे में प्रति षे कारी प्राव ानों को उपयुक्त ः हOा े हुए प्रत्यर्भिर्थीओं को आदेश दे े हुए परमादेश की प्रक ृ ति में रिरO, आदेश या विनदbश जारी करने क े लिलए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA iii. छ>े वे न आयोग की जिसdारिरश क े संदभ! में विदनांक 01.01.2006 से सेवाविनवृलित्त क याति काक ा!ओं क े वे न को विdर से विन ा!रिर /विdर से य करने और उसक े बाद विदनांक े शासकीय आदेश क े अनुसरण में उनकी सेवाविनवृत्त ति र्थीी से संशोति पेंशन लाभ और वे न का बकाया भुग ान और संशोति अस्थिन् म आहरिर भुग ान क े अनुसार उनकी पेंशन लाभ को पुनः विन ा!रिर करना, याति काक ा!ओं क े पेंशन लाभ क े लिलए पहले से भुग ान की गई राशिश में कOौ ी क े बाद, 2 महीने की अवति क े भी र विन ा!रिर करने क े लिलए प्रत्यर्भिर्थीओं को आदेश दे े हुए परमादेश की प्रक ृ ति में रिरO, आदेश या विनदbश जारी करने क े लिलए। iv. शासकीय आदेश विदनांविक 08.12.2008 क े अनुसार याति काक ा!ओं को 10 ला< रुपये की अति क्तम ग्रेच्युOी का लाभ प्रदान करने क े लिलए प्रत्यर्भिर्थीओं को आदेश दे े हुए ृ ति का रिरO, आदेश या विनदेश जारी करना। v. छ>ें वे न आयोग की अनुशंसा क े आ ार पर गणना की गयी पेंशन लाभ व वे न का बकाया का भुग ान 2 माह क े भी र 10 ला< की बढ़ी हुई ग्रेच्युOी को ालू बैंक की दर पर ब्याज क े सार्थी भुग ान को शाविमल कर े हुए प्रत्यर्भिर्थीओं को आदेश दे े हुए परमादेश की प्रक ृ ति में रिरO, आदेश या विनदbश जारी करना। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA vi. छ>े वे न आयोग जिसdारिरश क े संदभ! में याति काक ा!ओं की व !मान पेंशन का भुग ान करने क े लिलए प्रत्यर्थी, प्राति कारिरयों को एक अं रिरम परमादेश जारी करना। vii. ऐसे अन्य आदेश पारिर करने क े लिलए जिजसे यह माननीय न्यायालय मामले की परिरस्थि@र्थीति यों में उति और उपयुक्त समझे। viii. याति काक ा!ओं क े पक्ष में लाग क े सार्थी रिरO याति का की अनुमति देने क े लिलए।”
12. रिरO याति का (एस/बी) संख्या 10355 वष! 2017 (वीरेंद्र क ु मार और अन्य बनाम उ.प्र. राज्य और अन्य) में विनम्नलिललि< प्रार्थी!ना की गई है: "प्रार्थी!ना यह सविवनय प्रार्थी!ना की जा ी है विक यह माननीय न्यायालय क ृ पा करे विक: (क) राज्य सरकार द्वारा पारिर विदनांक 05.05.2015 क े आक्षेविप आदेश और आवास आयुक्त, परिरषद द्वारा पारिर विदनांक 13.05.2015 क े परिरणामी आदेश जैसा विक रिरO याति का क े अनुलग्नक सं. 1 और 2 में विनविह है, को रद्द कर े हुए उत्प्रेषण ले< की प्रक ृ ति में एक रिरO, आदेश या विनदbश जारी करना। (<) राज्य सरकार द्वारा पारिर विदनांक 05.05.2015 क े आक्षेविप आदेश और आवास आयुक्त, परिरषद द्वारा पारिर विदनांक 13.05.2015 क े परिरणामी आदेश जैसा विक रिरO याति का क े अनुलग्नक सं. 1 और 2 में विनविह है, को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA प्रभावी नहीं करने क े लिलए प्रत्यर्भिर्थीओं को आदेश देने वाले परमादेश ले< की प्रक ृ ति में आदेश या विनदbश, रिरO या परमादेश का ले< जारी करना। (ग) रिरO याति का क े अनुलग्नक सं. 5 में अं र्दिवष्ट आवास एवं विवकास परिरषद द्वारा जारी की गई अति सू ना विदनांविक 19.05.2009 क े अनुसार क ु Oुम्ब पेंशन व उपदान योजना को लागू करने और दीवानी अपील सं. 6307 वष! 2010 में माननीय सव च्च न्यायालय द्वारा पारिर विदनांक 23.09.2014 क े विनण!य और आदेश क े संदभ! में याति काक ा!ओं को उसका लाभ देने क े लिलए प्रत्यर्भिर्थीयों को आदेश देने वाले परमादेश की प्रक ृ ति में आदेश या विनदेश, रिरO या परमादेश का ले< जारी करना। (घ) कोइ! अन्य समुति रिरO, आदेश या विनदेश जारी करना जिजसे यह माननीय न्यायालय मामले की परिरस्थि@र्थीति यों में उति और आवश्यक समझे; और (ड़) रिरO याति का को < b क े सार्थी अनुज्ञा करे।"
13. दोनों रिरO याति काएं यूपी राज्य द्वारा प्रति वाविद की गयीं। उच्च न्यायालय की तिडवीजन बें ने विदनांक 16.03.2018 क े अपने d ै सले द्वारा दोनों रिरO याति काओं को अनुमति दी। तिडवीजन बें ने यह दृविष्टकोंण लिलया विक विदनांक 08.12.2008 का सरकारी आदेश सं. 1058 सांविवति क विवविनयम विदनांविक 19.05.2009 क े आ ार पर परिरषद क े लिलए अपनी संपूण! ा में लागू होगा। तिडवीजन बें ने अव ारिर विकया विक सरकारी आदेश विदनांविक े ह अपवज!नात्मक भाग जहाँ क यह साव!जविनक उद्यम और @र्थीानीय विनकायों क े कम! ारिरयों पर अपनी प्रयोज्य ा को छ ू O दे ा है, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को अशिभ<स्थिण्ड करना होगा और अप्रयोज्य माना जाएगा जहाँ क लोक विनगमो क े कम! ारिरयों का संबं है। यह अव ारिर विकया गया विक परिरषद क े कम! ारिरयों से राज्य सरकार क े बराबर व्यवहार करना होगा और सरकारी विनगमों आविद क े लिलए जारी विकए गए सरकारी आदेशों की लोक उद्यम ब्यूरो द्वारा कोई प्रयोज्य ा नहीं होगी। दोनों रिरO याति काओं की अनुमति दी गई र्थीी, विyयाशील भाग प्र@ र 41 में विनविह है जो विनम्नलिललि< प्रभाव क े हैं: "41. द्नुसार दोनो रिरO याति काओं को अनुमति दी जा ी है और रिरO याति का संख्या 12645(एस/बी) वष! 2017 क े अनुलग्नक संख्या 1 और में विनविह आक्षेविप आदेश विदनांविक आदेश 05.05.2015 और 13.05.2015 को इस सीमा क रद्द विकया जा ा है विक वे माननीय उच्च म न्यायालय द्वारा दीवानी अपील सं. 6307 वष! 2010, उ.प्र.राज्य बनाम प्री म सिंसह और अन्य में पारिर विनण!य क े विवपरी हैं। प्रत्यर्भिर्थीओं को विदनांक 1.1.2006 से 13.01.2010 क परिरषद क े कम! ारिरयों को देय वे न क े बकाया का लाभ देने क े लिलए और उनकी पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन को >ीक करने क े लिलए और यूपी आवास एवं विवकास परिरषद विवविनयमन विदनांविक 19 मई 2009 क े प्राव ानों क े अनुसार ग्रेच्युOी भी जारी करने क े लिलए परमादेश जारी विकया जा ा है और दीवानी अपील सं. 6307 वष! 2010 में माननीय सव च्च न्यायालय क े आदेशों क े आलोक में, उनकी पात्र ा की ति शिर्थी से ब्याज क े सार्थी प्रति वष! 9%की Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA दर से इस आदेश की प्रमाशिण प्रति प्रावि{ की ति शिर्थी से दो महीने की अवति क े भी र दी जाये, जिजसमें विवdल होने पर याति काक ा! 12% प्रति वष! की दर से ब्याज क े भुग ान क े लिलए हकदार होंगे।"
14. इन एसएलपीयों को तिडवीजन बें क े d ै सले विदनांविक 16.03.2018 को ुनौ ी दे े हुए दायर विकया गया है। उत्तर प्रदेश राज्य क े अलावा उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद ने भी एसएलपी (सी) संख्याएँ 4804 और 4815 वष! 2019 दायर की हैं। विवशेष अपील संख्या 610 वष! 2018 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय, ल<नऊ बें की तिडवीजन बें द्वारा पारिर विनण!य विदनांविक 26.11.2018 क े विवरूद्ध अन्य एसएलपी, एसएलपी (सी) सं. 386 वष! 2019 (उ.प्र. राज्य और शिशवाश्रय राय व अन्य) और एसएलपी (सी) संख्या 373 वष! 2019 ( उ.प्र. आवास एवं विवकास परिरषद और एक अन्य बनाम शिशवाश्रय राय और अन्य) दायर विकए गए हैं।
15. रिरO याति का सं. 9033 (एस/एस) वष! 2016 में पारिर विवद्वान एकल न्याया ीश क े विनण!य विदनांविक 16.08.2017 को ुनौ ी दे े हुए उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा विवशेष अपील सं. 610 वष! 2018 दायर की गयी। उ.प्र. आवास एवं विवकास परिरषद क े कम! ारिरयों द्वारा रिरO याति का दायर की गई, जिजसमें प्रत्यर्भिर्थीओं को उनकी सेवाविनवृलित्त क याति काक ा!ओं क े वे न को विdर से विन ा!रिर करने और उसक े बाद 6 वें वे न आयोग की जिसdारिरशों क े आ ार पर विदनांक 01.01.2006 से उनको पेंशन लाभ देने की आज्ञा देने वाले ृ ति में विदशा-विनदbश की मांग की गई र्थीी। सरकारी आदेश सं. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 1508 विदनांविक 08.12.2008 क े प्राव ानों को परिरषद क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों पर लागू करने क े लिलए परमादेश की मांग की गई र्थीी, जबविक बोड! क े कम! ारिरयों पर इसकी प्रयोज्य ा क े बारे में प्रति बं नात्मक प्राव ानों को >ीक से रद्दोबदल करने क े लिलए मांग की गयी र्थीी। रिरO याति का को विवद्वान एकल न्याया ीश द्वारा @वीक ृ विकया गया र्थीा। प्रत्यर्भिर्थीओं को बोड! क े कम! ारिरयों को विदनांक 01.01.2006 से 13.01.2010 क देय वे न क े बकाया का लाभ देने क े लिलए और उनकी पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन को >ीक करने क े लिलए और विदनांक 19.05.2009 क े विवविनयमों क े अनुसार ग्रेच्युOी भी जारी करने क े लिलए परमादेश जारी विकया गया र्थीा। उक्त विनण!य क े विवरूद्ध दायर विवशेष अपील को तिडवीजन बें द्वारा विदनांक 26.11.2018 को <ारिरज कर विदया गया।
16. विदनांक 26.11.2018 क े विनण!य क े विवरूद्ध दायर इन एसएलपीयों में उ>ाए गए मुद्दे लगभग समान हैं जैसा विक विदनांक 16.03.2018 की तिडवीजन बें क े d ै सले क े विवरूद्ध दायर एसएलपी में उ>ाया गया।
17. प्री म सिंसह क े मामले क े थ्य, जैसा विक उपयु!क्त उजिpलि< है, संक े कर े हैं विक प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय द्वारा विव ारणीय मुख्य मुद्दा यह र्थीा, विक क्या राज्य सरकार को बोड! क े कम! ारिरयों पर पेंशन/परिरवार पेंशन और ग्रेच्युOी योजना को लागू न करने क े लिलए विनदbश जारी करने का कोई अति कार क्षेत्र है। प्री म सिंसह प्रकरण की रिरO याति का में उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार क े आदेशों को अपा@ कर विदया। राज्य सरकार क े विदनांक 13.09.2005 और 12.07.2007 क े आदेशों को रद्द कर विदया गया और बोड! Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA को विदनांक 05.11.1997 को बनाए गए अपने विवविनयमों क े अनुसार अपनी पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना को लागू करने का विनदbश दे े हुए परमादेश जारी विकया गया। प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय ने उच्च े d ै सले की पुविष्ट कर े हुए उत्तर प्रदेश राज्य की अपील को <ारिरज कर विदया, जिजसका प्रभाव यह है विक बोड! द्वारा य की गई पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना को लागू विकया जाना है। प्री म सिंसह क े मामले में उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से विदए गए कI में से एक यह है विक राज्य सरकार क े पास परिरषद को पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना को लागू नहीं करने का विनदbश जारी करने का अति कार क्षेत्र र्थीा जैसा विक सरकारी आदेश विदनांविक 13.09.2005 और 12.07.2007 में विनविह र्थीा जो उत्तर प्रदेश राज्य विनयंत्रण लोक विनगम अति विनयम 1975 क े वै ाविनक प्राव ान क े ह जारी की जा सक ी र्थीी। प्री म सिंसह क े मामले में विनण!य क े प्र@ र 13 में पूव क्त अति विनयम की ारा 2 को नोविOस विकया गया है। विनण!य का प्र@ र 13 इस प्रकार है: "13. उच्च न्यायालय द्वारा विदनांक 16-1-2009 को विदए गए आक्षेविप विनण!य को ुनौ ी दे े हुए, उत्तर प्रदेश राज्य क े विवद्व अति वक्ता का यह प्रबल क ! र्थीा विक इस योजना को राज्य सरकार द्वारा एक व्यक्त अनुमोदन की अनुपस्थि@र्थीति में प्रति पाविद और प्रभाव नहीं विदया जा सक ा र्थीा। जहाँ क प्र@ ु क ! का संबं है, अपीलक ा! क े विवद्व अति वक्ता ने उत्तर प्रदेश राज्य विनयंत्रण लोक विनगम अति विनयम, 1975 पर Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनभ!र ा र<ी। हमारा ध्यान ारा 2(1) पर आकर्दिष विकया गया र्थीा, जिजसे विनम्नानुसार उद्धृ विकया जा रहा है: “2. (1) संवै ाविनक विनकायों को विनदेश जारी करने की शविक्त- विकसी उत्तर प्रदेश अति विनयम क े अ ीन @र्थीाविप या गवि> प्रत्येक संवै ाविनक विनकाय ( ाहे वह विकसी भी नाम से ज्ञा हो) जिसवाय उत्तर प्रदेश राज्य विवश्वविवद्यालय अति विनयम 1973, उत्तर प्रदेश विवश्वविवद्यालय(पुनः-अति विनयमन और संशो न) अति विनयम 1974 द्वारा पुनः-अति विनयविम और संशोति द्वारा शाजिस विवश्वविवद्यालयों क े, अपने क ृ त्यों क े विनव!हन में नीति यों क े प्रश्नों पर ऐसे विनदेशों द्वारा माग!दर्भिश विकया जाएँगें, जो राज्य सरकार द्वारा उसे विदए जाएं, इस बा क े हो े हुए भी विक ऐसे संवै ाविनक विनकाय @र्थीाविप करने या गवि> करने वाली विवति क े अ ीन राज्य सरकार को ऐसी कोई शविक्त @पष्ट रूप से प्रदान नहीं की गई है।” (प्रभाववर्ति ) पूव क्त उपबं ों क े आ ार पर अपीलार्थी, क े विवद्व अति वक्ता का क ! र्थीा विक उत्तर प्रदेश राज्य ने अपने 13-9-2005 और 12-7-2007 विदनांविक संसू नाओं क े माध्यम से, पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और उपदान योजना को लागू करने से विनवारिर कर े हुए विवकास परिरषद को विनदेश जारी विकया गया Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA समझा जाना ाविहए। उपयु!क्त विनदbश विवद्व अति वक्ता क े अनुसार, विवकास परिरषद क े लिलए बाध्यकारी र्थीे।”
18. प्री म सिंसह में इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक उत्तर प्रदेश राज्य में सभी लोक विनगमों को नीति क े प्रश्न पर विनदbश जारी करना राज्य सरकार क े लिलए <ुला है, लेविकन नीति क े सवालों क े संबं में विनदbश क े वल "इसक े क !व्य क े विनव!हन" क े संबं में होने पर ही जारी विकए जा सक े हैं। इस न्यायालय ने माना विक बोड! क े काय! क े वल 1965 अति विनयम की ारा 15 में विन ा!रिर कायI से संबंति हैं। प्र@ र 14 से 16 इस प्रकार हैं: "14. हमने अपीलार्थी, क े विवद्व अति वक्ता द्वारा विदए गए प्रर्थीम क ! पर अपने विव ार विदए हैं। इसमें कोई संदेह नहीं हो सक ा है विक उत्तर प्रदेश राज्य में सभी लोक विनगमों को नीति क े प्रश्नों पर विदशा-विनदbश जारी करना 1975 अति विनयम की ारा 2(1) में विनविह आदेश क े अग्रसरण में राज्य सरकार क े लिलए <ुला है। र्थीाविप यह उpे< करना उति होगा विक उपरोक्त विनदेश नीति क े प्रश्नों क े बाब ही जारी विकए जा सक े हैं जिजनका संबं “इसक े क ृ त्यों क े विनव!हन” से हो। जहाँ क विवकास परिरषद का संबं है, हमारा विव ार है विक विवकास परिरषद क े काय! क े वल 1965 अति विनयम की ारा 15 में विन ा!रिर कायI से संबंति हैं।
15. ऊपर उजिpलि< ारा 15 को यहां विनम्नानुसार पुन: प्र@ ु विकया जा रहा है: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "15. बोड! क े काय!-(1) इस अति विनयम क े उपबं ों और विनयमों और विवविनयमों क े अ ीन रह े हुए, बोड! क े काय! विनम्नलिललि< होंगे– (क) आवास और सु ार योजनाओं और अन्य परिरयोजनाओं को बनाने और विनष्पाविद करने क े लिलए; (<) राज्य में विवशिभन्न आवास विyयाकलापों की योजना बनाना और उनका समन्वय करना और राज्य में आवास और सु ार योजनाओं का शीघ्र और दक्ष काया!न्वयन सुविनतिश्च करना; (ग) क े न्द्रीय सरकार या राज्य सरकार द्वारा प्रायोजिज या सहाय ा प्रा{ आवासीय और सु ार योजनाओं क े अन् ग! विवशिभन्न प्रोजेक्Oों को जाँ ना और कनीकी सलाह प्रदान करना; (घ) राज्य सरकार से संबंति ऐसी @र्थीावर संपलित्तयों का प्रबं ग्रहण करना, जो इस प्रयोजन क े लिलए उसे अं रिर की जाएं या सौंपी जाएं; (ड़) बोड! क े विनयंत्रण और प्रबं न क े अ ीन र<े गए राज्य सरकार क े या बोड! क े भू<ंडों, भवनों और अन्य संपलित्तयों का अनुरक्षण, उपयोग, आबंOन, या अन्यर्थीा अं रण करना; ( ) भवन विनमा!ण सामग्री क े विवविनमा!ण और संग्रहण क े लिलए काय!शालाओं और भंडारों का संग>न और सं ालन करना; Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (छ) ऐसे विनबं नों और श I पर, जिजन पर बोड! और राज्य सरकार क े बी सहमति हो, उ.प्र. औद्योविगक आवास अति विनयम 1955(1955 का उ.प्र. अति विनयम 23) क े अ ीन रह े हुए विकसी @कीम क े विनष्पादन में उसक े द्वारा बनाए गए मकानों की घोषणा करने क े लिलए; (ज) भवन प्र ालन को विवविनयविम करने क े लिलए; (झ) मलिलन बस्थि@ यों की विनकासी और सु ार क े लिलए; (ञ) इसक े द्वारा विवकजिस क्षेत्रों में सड़क ें, विवद्यु, @वच्छ ा, जल आपूर्ति और अन्य नागरिरक सुविव ाएं और आवश्यक सेवाएं उपलब् कराना; (O) पूव! उजिpलि< प्रयोजनों में से विकसी क े लिलए जंगम और @र्थीावर सम्पलित्त का अज!न करना; (>) बाजार से ऋण जुOाने क े लिलए, राज्य सरकार, क े न्द्रीय सरकार, @र्थीानीय प्राति कारी और अन्य लोक विनगमों से अनुदान और ऋण प्रा{ करने क े लिलए और @र्थीानीय प्राति कारिरयों, अन्य लोक विनगमों, आवास सहकारी सविमति यों और अन्य व्यविक्तयों को पूव! उजिpलि< प्रयोजनों में से विकसी क े लिलए अनुदान और ऋण देने क े लिलए; Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (ड) विकसी संपलित्त की जां, परीक्षा या सवbक्षण करना या विकसी @र्थीानीय प्राति कारी या राज्य सरकार द्वारा की गयी ऐसी जां, परीक्षा या सवbक्षण क े < ! में अशिभदाय करना; (ढ) बेह री शुल्क लगाने क े लिलए; (ण) इस अति विनयम या त्समय प्रवृत्त विकसी अन्य विवति द्वारा या उसक े अ ीन अति रोविप विकसी अन्य दातियत्व को पूरा करना; और ( ) ऐसे सभी अन्य क ृ त्यों और ीजों को करने क े लिलए, जो पूव! उजिpलि< क ृ त्यों क े विनव!हन क े लिलए आवश्यक हों। (2) इस अति विनयम क े उपबं ों और विनयमों और विवविनयमों क े अ ीन रह े हुए, बोड!, जहां वह आवश्यक समझे, विनम्नलिललि< में से कोइ! क ृ त्य कर सक े गा, अर्थीा! ्ः– (क) भवनों क े विनमा!ण में ेजी लाने और लाग कम करने क े प्रयोजन क े लिलए अनुसं ान को बढ़ावा देना; (<) लोक सं@र्थीाओं, @र्थीानीय प्राति कारिरयों और अन्य लोक विनगमों और क े न्द्रीय सरकार और राज्य सरकार क े विवभागों की ओर से राज्य में कायI का विनष्पादन; (ग) भवन सामग्री की आपूर्ति और विवyय करना; Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (घ) भवन विनमा!ण सामग्री क े उत्पादन का समन्वय, सरलीकरण और मानकीकरण करना और संर नात्मक अवयवों की व्यापक कमी और पूव!विनमा!ण को प्रोत्साविह करना और संगवि> करना; (ड़) विकसी शहर, नगरपालिलका, नगर क्षेत्र या अति सूति क्षेत्र में और उसक े आसपास जनसंख्या क े सं लन को सुकर बनाने की दृविष्ट से, सड़कों और पुलों का विनमा!ण, विव@ ार, सुदृढ़ करने या अन्यर्थीा सु ार करने क े लिलए और ऐसे प्रयोजनों क े लिलए दूसरों को विवत्तीय सहाय ा देना; ( ) ऐसे सभी अन्य क ृ त्यों और ीजों को करने क े लिलए, जो पूव! वर्भिण क ृ त्यों क े विनव!हन क े लिलए आवश्यक हों।”
16. हमारे विव ार में, उत्तर प्रदेश राज्य को 1965 अति विनयम की ारा 15 क े ह विवकास परिरषद को सौंपे गए कायI क े संबं में ही विनदbश जारी करने का अति कार र्थीा। हमारे विव ार में कम! ारिरयों की सेवा की श c, विवकास परिरषद क े कायI का ग>न नहीं कर ी हैं और इस रह हम सं ुष्ट हैं विक 1975 अति विनयम की ारा 2(1) क े ह विव ारणीय विनदbश उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा जारी विकए गए 13-9-2005 और 12-7-2007 विदनांविक क े आक्षेविप आदेशों में विनदbशों का विव@ ार नहीं कर ी है। इसलिलए हमें अपीलक ा! क े विवद्व अति वक्ता द्वारा विदए गए क ! में कोई बल नहीं विमल ा।” Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
19. ऊपर उद्धृ विनण!य क े प्र@ र 16 में इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक "हमारे विव ार में कम! ारिरयों की सेवा की श c, विवकास परिरषद क े कायI का ग>न नहीं कर ी हैं"। इस न्यायालय ने 1965 अति विनयम की ारा 95 और ारा 93 पर भी विव ार विकया। इस न्यायालय ने अव ारिर विकया विक विवकास परिरषद को विवविनयम बनाने का अति कार विनविह विकया गया है, ाविक अपने कम! ारिरयों को पेंशन/परिरवार पेंशन और ग्रेच्युOी योजना की प्रक ृ ति में एक योजना का विव@ ार विकया जा सक े । अंति म विनदbश प्र@ र 21 में विनम्नलिललि< प्रभाव क े जारी विकए गए र्थीे: "21. आक्षेविप आदेश विदनांविक 16-1-2009 को ुनौ ी देने क े लिलए इस न्यायालय में आने से उत्तर प्रदेश राज्य क े परिरणाम को विन ा!रिर करना भी हमारे लिलए आवश्यक है। इस अदाल ने अपीलक ा! द्वारा दायर याति का को विव ारणार्थी! कर े हुए विदनांक 7-8-2012 को अं रिरम विनदbश पारिर विकया, जिजसमें उच्च न्यायालय द्वारा जारी विकए गए विनदbशों क े काया!न्वयन को रोकने का प्रभाव र्थीा, अर्थीा! ् अति सू ना विदनांक 19-5-2009 क े काया!न्वयन को रोकने का विनदbश र्थीा। न ीज न, अति सू ना विदनांक 19-5-2009 द्वारा शाजिस कम! ारिरयों को अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े ह अपने सेवाविनवृत्त बकाया का भुग ान विकया गया र्थीा। ूंविक हमने अब विदनांक 16-1-2009 क े उच्च न्यायालय क े आक्षेविप विनण!य की पुविष्ट की है, इसलिलए यह @पष्ट है विक विवकास परिरषद क े सभी पात्र कम! ारी विदनांक 19-5-2009 की अति सू ना द्वारा शाजिस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA होंगे। इसलिलए वे अपनी सेवाविनवृलित्त की ारी< से पेंशन लाभ क े हकदार होंगे। विन@संदेह, उन्हें उत्तर प्रदेश राज्य की ओर से इस न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेशों क े परिरणाम@वरूप उक्त सेवाविनवृत्त लाभों से वंति कर विदया गया है। मामले क े उपरोक्त दृविष्टकोण में, हम विवकास परिरषद को आज से ीन महीने क े भी र अति सू ना विदनांक 19-5-2009 द्वारा शाजिस सेवाविनवृत्त कम! ारिरयों को पेंशन लाभ जारी करने का विनदbश दे े हैं। पात्र सेवाविनवृत्त कम! ारिरयों को देय पेंशन लाभ का विन ा!रण कर े समय, यविद यह पाया जा ा है विक सेवाविनवृत्त कम! ारिरयों में से कोई भी अंशदायी भविवष्य विनति योजना क े ह पहले से भुग ान विकए गए से अति क विवत्तीय बकाया का हकदार है, ो उक्त कम! ारी(ओं) को उक्त राशिश पर 9% प्रति वष! ब्याज की दर से भुग ान विकया जाएगा। विवभेद राशिश पर पूव क्त ब्याज अवयव क े भार को प्रर्थीम बार में विवकास परिरषद द्वारा दे दी जाएगी। हालाँविक, उत्तर प्रदेश राज्य से इसे वसूल विकया जाएगा, जो संबंति कम! ारिरयों को भुग ान विकए जाने वाले ब्याज क े लिलए पूरी रह से जिजम्मेदार है।”
20. विवद्व महाति वक्ता ने कहा विक इस न्यायालय द्वारा प्र@ र 16 में व्यक्त विकया गया दृविष्टकोण विक कम! ारिरयों की सेवा श c विवकास परिरषद क े कायI का ग>न नहीं कर ी हैं और विदनांक 13.09.2005 और 12.07.2007 को Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA जारी विकए गए विनदbश राज्य सरकार द्वारा जारी नहीं विकए जा सक े र्थीे। 1965 अति विनयम क े प्रासंविगक वै ाविनक प्राव ानों पर विव ार विकए विबना इस न्यायालय द्वारा व्यक्त विकए गए हैं। 1965 अति विनयम की ारा 8 क े ह, बोड! बोड! क े अति कारिरयों और सेवकों को ऐसे विनयंत्रण और प्रति बं ों क े अ ीन विनयुक्त कर सक ा है, जो समय-समय पर राज्य सरकार द्वारा विवशेष या सामान्य आदेशों द्वारा लगाए जा सक े हैं। इस प्रकार, विनयुविक्तयां राज्य सरकार क े विनयंत्रण में की जानी हैं जो @पष्ट रूप से इंविग कर ी हैं विक राज्य विनयुविक्तयों क े संबं में विवशेष या सामान्य आदेश जारी कर सक े हैं जो विनयुक्त विकए जाने वाले कम! ारिरयों की सेवा की श I को अच्छी रह से शाविमल कर सक े हैं। उन्होनें कहा विक अध्याय X में अति विनयम की ारा 92 में बोड! और अन्य @र्थीानीय प्राति करण पर राज्य सरकार क े विनयंत्रण का प्राव ान है। उन्होंने आगे यह क ! प्र@ ु विकया विक ारा 94(2)(एनएन) राज्य को विकसी भी मामले पर विनयम बनाने का अति कार दे ी है जिजसक े लिलए बोड! द्वारा ारा 95 क े ह विवविनयमन बनाया जा सक ा है। इस प्रकार राज्य सरकार क े पास विनयम बनाने की शविक्त र्थीी जब बोड! बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों की सेवा की श I क े संबं में विवविनयमन बना सक ा है, ो बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों की सेवा की श I क े संबं में विनयम बनाने की शविक्त @पष्ट रूप से राज्य सरकार को दी गई है। यह क ! विदया गया है विक प्री म सिंसह क े मामले में न्यायपी> का ध्यान ारा 8, 92 और 94(2) (एनएन) पर आकर्दिष नहीं विकया गया है और न ही विनण!य में पूव क्त प्राव ानों पर विव ार विकया गया है और यविद न्यायालय ने पूव क्त प्राव ानों पर ध्यान विदया हो ा, ो यह नहीं माना जा सक ा र्थीा विक Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA कम! ारिरयों की सेवा की श c विवकास परिरषद क े कायI का ग>न नहीं कर ी हैं। वह आगे कह े हैं विक संविव ान की सा वीं अनुसू ी की सू ी II की प्रविवविष्ट 41 राज्य विव ानमंडल को लोक सेवाओं पर कानून बनाने का अति कार दे ी है और राज्य क े पास उन सभी विवषयों पर काय!कारी शविक्त भी हो ी है जहां इसक े पास विव ायी शविक्त हो ी है, इस प्रकार राज्य लोक सेवाओं क े संबं में अपनी काय!कारी शविक्त का उपयोग कर सक ा है जिजसमें कम! ारिरयों की सेवा श c शाविमल हैं।
21. वह आगे क ! दे े हैं विक ारा 15 क े ह विव ारणीय बोड! क े काय! अत्यं विव@ ीण! हैं और अति विनयम क े प्राव ानों में बोड! को अन्य काय! सौंपे गये हैं और जब बोड! को विवविनयम बनाने का अति कार विदया गया है ो यह भी उसक े कायI में से एक है। यह प्र@ ु विकया गया है विक प्री म सिंसह क े मामले में प्र@ र 16 में अशिभव्यक्त म दे<भाल में कमी क े माध्यम से व्यक्त विकया गया है क्योंविक यह 1965 अति विनयम की ारा क े सुसंग कानूनी उपबं ों पर विव ार विकए विबना अशिभव्यक्त विकया गया है जैसा विक ऊपर उजिpलि< विकया गया है। आगे यह कहा गया है विक राज्य सरकार द्वारा जारी विकया गया विनदbश विदनांक 19.05.2009 को बोड! द्वारा बनाये गये पेंशन विवविनयमों पर अति भावी होगा।
22. आगे यह प्र@ ु विकया गया है विक 6 वीं वे न आयोग की रिरपोO! को लागू कर े समय राज्य ने बोड! क े संबं में वा@ विवक लाभ विदनांक 21.01.2010 से लागू विकया र्थीा। वह कह े हैं विक राज्य सरकार क े पास बोड! क े अति कारिरयों, कम! ारिरयों की सेवा श I संबं ी विनदbशों को जारी करने क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA लिलए पया!{ क्षेत्राति कार है और प्री म सिंसह क े मामले में विवपरी दृविष्टकोण को विdर से विव ार करने की आवश्यक ा है।
23. प्रत्यर्भिर्थीयों क े लिलए उपस्थि@र्थी विवद्व अति वक्ता श्री विनलि<ल मजीवि>या ने क ! विदया विक राज्य सरकार क े पास अपने कम! ारिरयों की सेवा श I क े संबं में परिरषद को विनदbश जारी करने की शविक्त है, इस अदाल ने प्री म सिंसह क े मामले में सही उत्तर विदया गया है। उन्होंने कहा विक इस न्यायालय क े d ै सले में कोई त्रुविO नहीं है, जिजसमें विकसी भी पुनर्दिव ार की आवश्यक ा हो। यह प्र@ ु विकया गया है विक एक बड़ी बें को संदर्भिभ विकए जाने क े लिलए कोई भी श ! व !मान मामले क े थ्यों में सं ुष्ट नहीं है। विकसी भी वै ाविनक प्राव ान पर विव ार न करना मात्र प्रश्न को बड़ी बें को संदर्भिभ करने का कोई आ ार नहीं है। प्री म सिंसह क े मामले में मुख्य प्रश्न यह र्थीा विक बोड! क े कम! ारिरयों की सेवा श I क े संबं में विनदbश जारी करने की राज्य की शविक्तयां जिजसकी विव@ ृ रूप से ा! की गई है और उत्तर विदया गया है। दलील क े एक अवयव पर विव ार न करना, जो न्यायालय क े समक्ष उ>ाया जा सक ा र्थीा और उ>ाया नहीं गया है और विनण, हो गया है, संदर्भिभ करने क े लिलए एक आ ार नहीं है। अति विनयम की ारा 92 को संदर्भिभ कर े हुए उन्होने क ! विदया विक ारा 92 क े ह विनदbश बोड! क े कायI से संबंति होगा जैसा विक ारा 15 में प्रख्याविप है जिजसमें बोड! क कम! ारिरयों की सेवा की श I से संबंति कोई विनदbश शाविमल नहीं है। प्री म सिंसह की दीवानी अपील में राज्य ने अपनी दलील में 1965 अति विनयम की ारा 94(2)(एनएन) को संदर्भिभ विकया है।आगे यह प्र@ ु विकया गया है विक विदनांक 13.09.2005 और 12.07.2007 क े सरकारी आदेशों की वै ा और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA वै ाविनक ा का मुद्दा प्री म सिंसह क े मामले क े d ै सले में इस न्यायालय क े आदेश द्वारा अंति म रूप प्रा{ कर ुका है और इन काय!वाविहयों में उनकी वै ा को नहीं जाँ ा जा सक ा है। यह न्यायालय विकसी भी समीक्षा क्षेत्राति कार का प्रयोग नहीं कर रहा है जहां क प्री म सिंसह क े मामले क े d ै सले का संबं है और इसलिलए विदनांक 13.09.2005 और 12.07.2007 क े सरकारी आदेशों की वै ा और वै ाविनक ा विन ा!रिर करने का प्रश्न व !मान काय!वाही में इस न्यायालय क े लिलए उपलब् नहीं है।
24. प्रत्यर्भिर्थीयों क े लिलए उपस्थि@र्थी विवद्व अति वक्ता श्री पी. क े. जैन ने ने प्र@ ु विकया विक राज्य को 1965 अति विनयम की ारा 15 क े ह बोड! को सौंपे गए कायI क े संबं में ही विनदेश जारी करने का अति कार है और कम! ारिरयों की सेवा की श c विवकास परिरषद क े कायI का ग>न नहीं कर ी हैं। उन्होंने कहा विक सभी प्रत्यर्थी, बहु पहले सेवाविनवृत्त हो ुक े हैं, लेविकन उनकी पेंशन का भुग ान अभी क नहीं विकया गया है, जिजससे उन पर बहु प्रति क ू ल प्रभाव पड़ा है। राज्य को 1965 अति विनयम की ारा 15 क े ह विवकास परिरषद को विनदbश जारी करने का ही अति कार है। कम! ारिरयों की सेवा की श c विवकास परिरषद क े कायI का ग>न नहीं कर ी हैं।
25. हमने पक्षकारों क े कI पर विव ार विकया है और अशिभले<ों का परिरशीलन विकया है।
26. प्री म सिंसह क े d ै सले में इस न्यायालय ने उ.प्र. राज्य विनयंत्रण लोक विनगम अति विनयम 1975 क े प्राव ानों पर विव ार करने क े बाद और 1965 अति विनयम क े क ु छ प्राव ान को विनम्नलिललि< रूप में प्रति पाविद विकया: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA (1) कम! ारिरयों की सेवा की श c विवकास परिरषद् क े क ृ त्यों का ग>न नहीं कर ी हैं। (2) राज्य सरकार 1965 अति विनयम की ारा 15 द्वारा यर्थीा अनुध्या विवविनर्दिदष्ट क ृ त्यों क े संबं में ही नीति क े प्रश्न पर विनदेश जारी कर सक ी है। (3) कम! ारिरयों की सेवा की श c जो अति विनयम की ारा 15 क े अ ीन बोड! क े क ृ त्य नहीं हैं, राज्य सरकार को परिरषद क े पेंशन/ पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी क े बारे में विनदbश जारी करने की कोई अति कारिर ा नहीं है।
27. यह विवद्वान महाति वक्ता द्वारा प्र@ ु विकया गया है विक उपरोक्त प्र@ ाव सही विवति प्रति पाविद नहीं कर ा है। प्री म सिंसह क े मामले में सुनवाई करने वाली पी> ने 1965 क े अति विनयम क े अन्य प्रासंविगक प्राव ानों पर विव ार नहीं विकया है और यह ारण करने में गल ी की है विक कम! ारिरयों की सेवा की श c न ो परिरषद का काय! है और न ही राज्य सरकार का काय! है।
28. प्री म सिंसह क े मामले में, इस न्यायालय ने 1965 अति विनयम की ारा 15 को उद्धृ विकया है। और यह अव ारिर विकया विक कम! ारिरयों की सेवा की श c परिरषद का काय! नहीं हैं। हम पहले यह विव ार कर सक े हैं विक प्री म सिंसह क े मामले में लिलया गया उपरोक्त दृविष्टकोण सही है या नहीं।
29. 1965 अति विनयम का अध्याय III बोड! क े कायI और शविक्तयों से संबंति है। यह सत्य है विक ारा 15 में कम! ारिरयों की सेवा की श c बोड! क े कायI में से एक क े रूप में शाविमल नहीं हैं, लेविकन ारा 15(1) “इस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA े उपबं ों और विनयमों और विवविनयमों क े अ ीन रह े हुए” शब्दों क े सार्थी आरंभ हो ी है, इस प्रकार, बोड! क े क ृ त्य जैसा विक ारा 15 में संगशिण है, 1965 अति विनयम क े अ ीन है। इस प्रकार, बोड! क े काय! जैसे ारा 15 में संगशिण है, संपूण! नहीं है और अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों क े अन्य प्राव ानों क े अनुसार बोड! क े कायI क े सार्थी पढ़ा जाना ाविहए। अति विनयम की ारा 8 व !मान उद्देश्य क े लिलए एक उपयुक्त दृष्टां है। ारा 8 में अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त का प्राव ान है। अति विनयम की ारा 8 इस प्रकार है: "8. अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त- (1) राज्य सरकार द्वारा विवशेष या सामान्य आदेशों द्वारा समय-समय पर लगाए गए ऐसे विनयंत्रण और प्रति बं ों क े अ ीन, बोड! ऐसे अति कारिरयों और कम! ारिरयों को विनयुक्त कर सक ा है जैसा विक वह अपने कायI क े क ु शल प्रदश!न क े लिलए आवश्यक समझ ा है। (2) बोड!, राज्य सरकार क े पूव! अनुमोदन से, उसक े अ ीन विकसी पद पर ऐसे विनबं नों और श I पर जिजन पर सहमति हो, क े न्द्रीय या राज्य सरकार क े या विकसी @र्थीानीय प्राति कारी क े कम! ारी की विनयुविक्त कर सक े गा।"
30. उपरोक्त उद्धृ ारा 8 इंविग कर ी है विक अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त भी बोड! क े कायI में से एक है। मान लीजिजए विक बोड! विकसी भी अति कारी और कम! ारी की विनयुविक्त नहीं कर ा है ो क्या यह अति विनयम Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA द्वारा उसे सौंपे गए काय! को कर सक ा है, जवाब @पष्ट रूप से नहीं है। इस प्रकार, अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त बोड! क े कायI में से एक है और जब विनयुविक्त की शविक्त दी जा ी है, ो सेवा की श I को विन ा!रिर करने की शविक्त इसमें विनविह हो ी है। यविद बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों क े विनयम और श c विन ा!रिर करने क े लिलए कोई विनयम या विवविनयम नहीं हैं, ो बोड! काय!कारी आदेशों द्वारा भी विनयमों और श I को विवविनयविम कर सक ा है। प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय का ध्यान "अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों क े अ ीन" अशिभव्यविक्त पर नहीं <ीं ा गया र्थीा जो अत्यति क महत्व की अशिभव्यविक्त र्थीी और @पष्ट रूप से बोड! को अन्य कायI को बढ़ाने और जोड़ने का इरादा र्थीा जैसा विक अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों में प्रदान विकया गया है। 1965 अति विनयम की ारा 8(2)क े प्राव ान इंविग कर े हैं विक राज्य सरकार की पूव! मंजूरी से बोड! क ें द्र या राज्य सरकार या @र्थीानीय प्राति कारी क े विकसी कम! ारी या इसक े ह विकसी भी पद पर ऐसे विनयमों और श I पर विनयुक्त कर ा है जिजस पर सहमति हो।
31. इस प्रकार, विनयुविक्त क े मामले में ारा 8(2) क े ह विनयुविक्त की श I और विनयमों को विन ा!रिर विकया जाना ाविहए, हालांविक समझौ े पर सहमति क े सार्थी। ारा 8 (2) @पष्ट रूप से संक े दे रही है विक विनयुविक्त क े विनयम और श c बोड! क े कायI से अलग नहीं हैं। ारा 95(1) जो बोड! को विनयमों को बनाने का अति कार दे ा है, इस प्रकार है: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA "विनयम बनाने की शविक्त-(1) बोड! राजपत्र में अति सू ना द्वारा प्राव ान करने वाले विनयम बना सक ा है - (क)...................................................................... ( ) बोड! क े अति कारिरयों और सेवकों की सेवा की श c; (छ)................................................"
32. जैसा ऊपर उpे< विकया गया है ारा 15(1) “इस अति विनयम और विनयमों और विवविनयमों क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए” शब्दों से आरंभ हो ी है, इस प्रकार जब ारा 95(1)(एd) बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों की श I को प्रदान करने क े लिलए बोड! द्वारा विनयम बनाने का प्राव ान कर ी है, उपरोक्त विवषय पर विनयम बनाना भी बोड! का एक काय! है। इस प्रकार ारा 95 को बोड! क े कायI में पढ़ा जाना ाविहए जैसा विक ारा 15 में प्रगशिण है। विवविनयमों द्वारा प्रगशिण काय! को भी जोड़ा जाना ाविहए जो प्राव ान का सरल और @पष्ट अर्थी! है। प्री म सिंसह क े मामले का d ै सला करने वाली <ंडपी> ने विबना सुसंग उपबन् ों को ध्यान विदए और ारा 8, ारा 95(1) ( ) का संदभ! नहीं लिलया र्थीा जो @पष्ट रूप से इंविग कर े हैं विक कम! ारिरयों की सेवा की श c भी बोड! का एक काय! है, प्री म सिंसह क े मामले का d ै सला करने वाली बें ने यह ारण करने में गल ी की विक सेवा की श c बोड! क े कायI का ग>न नहीं कर ी हैं जो म 1965 अति विनयम क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA अनुसार नहीं है। इस प्रकार प्री म सिंसह क े मामले में न्यायपी> द्वारा व्यक्त उपरोक्त म ारा 8, ारा 95(1)( ) को संदर्भिभ विकए विबना है।
33. हम भी ारा 92 का संदभ! ले सक े हैं जो बोड! और अन्य @र्थीानीय प्राति कारिरयों पर राज्य सरकार क े विनयंत्रण से संबंति है। ारा 92(2) व !मान मामले क े लिलए सुसंग है। अति विनयम की ारा 92 को भी संदर्भिभ नहीं विकया गया है। हमारे सामने यह क ! विदया गया र्थीा विक कम! ारिरयों की सेवा श I से संबंति राज्य सरकार क े विनदbशों पर ारा 92(2) में विव ार नहीं विकया गया है। इस अति विनयम क े उद्देश्य को पूरा करने क े लिलए ारा 92(2) की अपनी प्रयोज्य ा है। “इस अति विनयम का प्रयोजन” शब्द पया!{ संदभ! हैं जो @वयं बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त को समाविह कर ा है अ ः राज्य सरकार ारा 95(2) क े ह अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त क े संबं में विनदbश जारी कर सक ी है। प्री म सिंसह क े मामले में ारा 92 पर भी विव ार नहीं विकया गया है।
34. उपरोक्त क े मद्देनजर हम इस विव ार पर हैं विक प्री म सिंसह क े d ै सले में बें ने यह प्रति पाविद कर े हुए विक कम! ारिरयों की सेवा की श c विवकास परिरषद क े कायI का ग>न नहीं कर ी है, इसने ारा 15(1) में विदए गए विनयमों और विवविनयमों, इस अति विनयम क े उपबन् ों क े अ ीन अशिभव्यक्त और ारा 8, 92, 95(1)( ) क े अन्य प्राव ानों पर विव ार नहीं विकया है।
35. यविद बोड! क े कायI में बोड! क े कम! ारिरयों की सेवा की श c शाविमल हैं, ो े पास 1975 अति विनयम क े ह और सार्थी ही 1965 े ह बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त क े Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संबं में बोड! को विनदbश जारी करने का अति कार क्षेत्र होगा, राज्य सरकार द्वारा विनयंत्रण और प्रति बन् अशिभव्यक्तः ारा 8(1) में प्रदान विकए गए हैं जब बोड! द्वारा अति कारिरयों और कम! ारिरयों की विनयुविक्त अशिभव्यक्तः राज्य सरकार द्वारा त्समय लगाये गये प्रति बन् ों और विनयंत्रणों क े अ ीन है, ो यह नहीं कहा जा सक ा है विक राज्य सरकार क े पास कम! ारिरयों की सेवा श I से संबंति विनदbश जारी करने का कोई अति कार क्षेत्र नहीं र्थीा। राज्य सरकार को ऐसे सभी विवषय क े संबं में, जहां बोड! द्वारा ारा 95 क े ह विवविनयम बनाए जा सक े हैं, अशिभव्यक्तः विनयम बनाने की शविक्त दी गयी है। ारा 94(1) और (2)(एनएन) इस प्रकार प्राव ान कर ा है: "94. विनयम बनाने की शविक्त- (1) राज्य सरकार राजपत्र में अति सू ना द्वारा इस अति विनयम क े प्रयोजनों को काया!स्थिन्व करने क े लिलए विनयम बना सक े गी। (2) विवशिशष्ट या और पूव!गामी शविक्त की व्यापक ा पर प्रति क ू ल प्रभाव डाले विबना, ऐसे विनयम विनम्नलिललि< क े लिलए उपबं कर सक ें गे– (क)....................... (ढढ) विकसी मामले में जिजसक े लिलए ारा 95 क े ह बोड! द्वारा विवविनयम बनाए जा सक े हैं;......... ” Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
36. जैसा विक ऊपर उpे< विकया गया है, बोड! क े पास बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों की सेवा की श I क े बारे में विवविनयमों को बनाने की शविक्त है, े पास उपरोक्त विवषय पर विनयम बनाने की शविक्त होगी। इसक े अलावा, ारा 95(2) क े आ ार पर राज्य द्वारा बनाये गये विनयमों का अति भावी प्रभाव पड़ ा है। ारा 95 (2) इस प्रकार है: " ारा 95(2) यविद कोई विवविनयम विकसी विनयम से असंग है ाहे वह विनयम विवविनयम क े पहले या बाद में बनाया गया हो, ो वह अति भावी होगा और विवविनयमन असंग ा की सीमा क शून्य होगा।'
37. उपरोक्त <ंड यह भी संक े दे ा है विक बोड! क कम! ारिरयों की सेवा श I क े बारे में राज्य में अति कार क्षेत्र की कमी नहीं है। राज्य विव ानमंडल को संविव ान की सा वीं अनुसू ी की प्रविवविष्ट 41 सू ी 5 क े ह विव ायी क्षम ा है, इसक े पास संविव ान क े अनुच्छेद 162 क े आ ार पर आदेश जारी करने की भी काय!कारी शविक्त है। इस प्रकार, राज्य अनुच्छेद 162 क े ह राज्यों क े कायI क े लिलए विनयोजिज कम! ारिरयो और अति कारिरयों की सेवा श I से संबंति काय!कारी आदेश जारी करने क े लिलए अपने अति कार क्षेत्र का प्रयोग कर सक ा है।
38. राय साविहब राम जवाया कपूर और अन्य बनाम पंजाब राज्य एआईआर 1955 एससी 549 में इस न्यायालय की एक संविव ान पी> क े पास संविव ान क े अनुच्छेद 162 को परीतिक्ष करने का अवसर र्थीा। प्र@ र 7 में विनम्नलिललि< प्रति पाविद विकया गया र्थीा: Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA “(7).......… अनुच्छेद 162 जिजसक े सार्थी हम इस मामले में सी े संबंति हैं, प्रति पाविद कर ा हैः '' इस संविव ान क े अ ीन रह े हुए, विकसी राज्य की काय!पालिलका शविक्त का विव@ ार उन विवषयों क होगा जिजनक े संबं में राज्य क े विव ान-मंडल को विवति बनाने की शविक्त है: बश b विक विकसी भी मामले में जिजसक े संबं में विकसी राज्य और संसद क े विव ानमंडल को कानून बनाने की शविक्त है, राज्य की काय!कारी शविक्त इस संविव ान द्वारा प्रदत्त या संसद द्वारा संघ या उसक े अति कारिरयों पर बनाए गए विकसी कानून द्वारा @पष्ट रूप से अशिभव्यक्त काय!कारी शविक्त क े अ ीन और सीविम होगी।" इस प्रकार इस अनुच्छेद क े ह राज्य का काय!कारी प्राति कारी सा वीं अनुसू ी की सू ी II में शाविमल मामलों क े संबं में काय!कारी है........"
39. संविव ान पी> ने अव ारिर विकया विक काय!कारी काय! में नीति क े विन ा!रण क े सार्थी-सार्थी इसे विनष्पादन करना शाविमल है। प्र@ र 13 में संविव ान पी> ने विन ा!रिर विकया: "(13) जिजन सीमाओं क े भी र काय!पालिलका सरकार भार ीय संविव ान क े अ ीन काय! कर सक ी है, उन सीमाओं का उस Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA काय!पालिलका क े रूप क े प्रति विनदbश करक े, जिजसे हमारे संविव ान ने @र्थीाविप विकया है, विबना कवि>नाई क े प ा लगाया जा सक ा है। हमारा संविव ान, हालांविक यह ढां े में संघीय है, वि…विOश संसदीय प्रणाली पर आ ारिर है, जहां काय!पालिलका को सरकारी नीति क े विनमा!ण और कानून में इसक े प्रसारण क े लिलए प्रार्थीविमक जिजम्मेदारी माना जा ा है, हालांविक इस जिजम्मेदारी क े अनुप्रयोग की पूव!व, श c राज्य की विव ायी शा<ा का विवश्वास बनाए र<ना है। काय!कारी dलन में नीति क े विन ा!रण क े सार्थी-सार्थी इसे विनष्पाविद करना दोनों शाविमल हैं। इसमें @पष्ट रूप से विव ान का आरम्भ, व्यव@र्थीा का र<र<ाव, सामाजिजक और आर्भिर्थीक कल्याण को बढ़ावा देना, विवदेशी नीति की विदशा, वा@ व में राज्य क े सामान्य प्रशासन को लाना या पय!वेक्षण करना शाविमल है।"
40. ए.बी. क ृ ष्णा और अन्य बनाम कना!Oक राज्य और अन्य, (1998) 3 एससीसी 495 में इस न्यायालय ने विन ा!रिर विकया र्थीा विक यह मुख्य रूप से विव ातियका है, अर्थीा! ् संसद या राज्य विव ानसभा, जिजसमें संघ या राज्य क े मामलों क े संबं में साव!जविनक सेवाओं और पदों पर विनयुक्त व्यविक्तयों की सेवा की भ, और श I को विवविनयविम करने वाले कानून बनाने की शविक्त विनविह है। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA
41. जब राज्य विव ानमण्डल में व्यविक्तयों की सेवा श c और भ, को विवविनयविम करने वाला कानून बनाने की शविक्त विनविह है ो इसे अनुच्छेद 162 क े ह आदेश जारी करने की काय!कारी शविक्त का अनुप्रयोग करने का पया!{ अति कार क्षेत्र है।
42. पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना से संबंति विदनांक 19.05.2005 क े विवविनयमन जिजस पर प्री म सिंसह क े मामले में अवलम्बन लिलया गया है, @वयं इस बा पर विव ार कर े हैं विक सरकार क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों क े लिलए @वीकाय! पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी योजना बोड! पर भी लागू होगी। विवविनयमों में @पष्ट रूप से उpे< विकया गया है विक सरकार क े आदेश बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों क े लिलए भी @वीकाय! होंगे और yम सं. 5 पर विनम्नलिललि< शाविमल विकए गए र्थीे ''पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी की राह से संबंति उ.प्र. क े विवत्तीय विवभाग क े सभी आदेश"। जब विवविनयम 2009 @वयं पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी को विवविनयविम करने वाले सरकारी आदेश जारी करने पर विव ार कर ा है, जिजसे बोड! क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों पर लागू विकया जाना र्थीा, ो यह इस कारण को उत्पन्न नहीं कर ा है विक राज्य सरकार क े पास पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और ग्रेच्युOी से संबंति आदेश जारी करने की कोई शविक्त नहीं है।
43. उपरोक्त कारणों से हमारा यह म है विक ीन पहलुओं अर्थीा! ् (1), (2) और (3) क े बारे में जो ऊपर उpे< विकया गया है, प्री म सिंसह क े मामले में विनण!य पर पुनर्दिव ार विकए जाने की आवश्यक ा है। एक वृहत्तर पी> द्वारा Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विनम्नलिललि< प्रश्नों पर विव ार करने क े लिलए हम विनम्नलिललि< प्रश्न ैयार कर े हैं: (1) क्या प्री म सिंसह क े मामले में इस न्यायालय का विनण!य यह प्रति पाविद कर े हुए विक अति कारिरयों और कम! ारिरयों की सेवा की श c उ.प्र. आवास एवं विवकास परिरषद क े क ृ त्यों का ग>न नहीं कर ी हैं, सही विवति को प्रति पाविद कर ी है और उस स्थि@र्थीति में जब विनण!य 1965 अति विनयम की ारा 8, 92, 94(2)(ढढ) क े उपबं ों को संदर्भिभ नहीं कर ा है? (2) क्या प्री म सिंसह क े विनण!य में व्यक्त विकया गया म विक 1965 अति विनयम की ारा 15 में प्रगशिण उत्तर प्रदेश आवास एवं विवकास परिरषद् क े क ृ त्य क े वल विवविनर्दिदष्ट क ृ त्य हैं जिजसमें बोड! क े कम! ारिरयों की सेवा श c सस्थिम्मलिल नहीं हैं, सही विवति अति कशिर्थी कर ी है? जबविक अति विनयम, विनयमों और विवविनयमों क े अन्य प्राव ानों में संदर्भिभ बोड! क े काय! जैसा विक ारा 15(1) में @पष्ट रूप से इस अशिभव्यविक्त क े प्रयोग द्वारा व्यक्त विकया गया है विक “इस अति विनयम और विनयमों और विवविनयमों क े उपबं ों क े अ ीन रह े हुए”, बोड! क े ऐसे क ृ त्य भी होंगे जो 1965 अति विनयम की ारा 95 (1)( ) क े अनुसार अति कारिरयों और कम! ारिरयों की सेवा श I को उत्प्रेरिर कर े हों। (3) क्या राज्य सरकार को 1965 अति विनयम और 1975 अति विनयम और राज्य सरकार को अन्य सभी समर्थी!कारी शविक्तयों क े अ ीन Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA उ.प्र. आवास एवं विवकास परिरषद् क े अति कारिरयों और कम! ारिरयों की सेवा श I क े संबं में विनदेश जारी करने की कोई अति कारिर ा नहीं र्थीी?
44. माननीय मुख्य न्याया ीश क े समक्ष एक वृहत्तर पी> का ग>न करने क े लिलए इन मामलों क े कागजा र<े जाएं। हम माननीय मुख्य न्याया ीश से यह भी अनुरो कर े हैं विक वे एक विनकO म ति शिर्थी पर बड़ी बें का ग>न करें, इस थ्य को दे< े हुए विक व !मान एसएलपीयों में जिजन मुद्दों का उत्तर विदया जाना है, वे ज्यादा र सेवाविनवृत्त कम! ारिरयों से संबंति मुद्दे हैं जिजनका पेंशन/पारिरवारिरक पेंशन और उपदान क े बकाया का भुग ान शाविमल है। …………………………. (न्यायमूर्ति अशोक भूषण) …………………………. (न्यायमूर्ति एम. आर. शाह) नई विदpी 10 dरवरी 2020 Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA