Avadh Sugar Mills Limited v. Union of India

Supreme Court of India · 07 Feb 2020
Mohan M. Shantanagoudar; R. Subhash Reddy
Civil Appeal No. 3890 of 2010
administrative appeal_dismissed Significant

AI Summary

The Supreme Court upheld government levy sugar price fixation orders and dismissed the appellant's challenge of discriminatory classification and constitutional violations under Articles 14 and 19(1)(g).

Full Text
Translation output
प्रति वेद्य
सव च्च न्यायालय क
े समक्ष
सिसविवल अपीलीय अति कार
सिसविवल अपील सं. 3890/2010
मेसस अव शुगर विमल्स लिलविमटेड ... अपीलार्थी#
बनाम
भार संघ और अन्य ...प्रत्यर्थी#

े सार्थी
दीवानी अपील सं. 3891/2010
विनर्णय
न्यायमूर्ति आर. शुभाष रेड्डी,
JUDGMENT

1. ये दीवानी अपील याति1काक ा द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद, लखनऊ बें1, लखनऊ क े समीक्षा याति1का सं. 253/2006 में पारिर विनर्णय और आदेश विदनांविक 18. 07. 2006 और अगला आदेश vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA विदनांविक 11. 09. 2007 से व्यथिर्थी होकर रिरट याति1का सं. 6732/1986 दायर की गई है, उपरोक्त आदेशों क े अनुसार, उच्च न्यायालय ने अपीलक ा द्वारा दायर रिरट याति1का और समीक्षा याति1का को क्रमशः खारिरज कर विदया है।

2. अपीलक ा एक सावजविनक लिलविमटेड क ं पनी है, सिजसका नाम अव शुगर विमल्स लिलविमटेड है, जो उत्तर प्रदेश राज्य क े, सिजला सी ापुर क े हरगांव में स्थिJर्थी है। अपीलक ा क ं पनी नें भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 226 क े ह उच्च न्यायालय क े अति कार क्षेत्र का आह्वान कर े हुए विनम्नलिललिख राह की मांग विकया है: (i) 1ीनी (1984-85 उत्पादन क े लिलए मूल्य विन ारर्ण) आदेश, 1984 और 1ीनी (1985-86 उत्पादन क े लिलए मूल्य विन ारर्ण) आदेश, 1985 क े प्रयोजनों क े लिलए याति1काक ाओं क े पूव# यूपी जोन में स्थिJर्थी 1ीनी कारखाने को लगाने क े लिलए विवपरी पक्षों को विनदQश देने वाले परमादेश को आदेश या विनदQश की प्रक ृ ति में एक रिरट जारी करक े; (ii) 1ीनी (1984-85 उत्पादन क े लिलए मूल्य विन ारर्ण) आदेश, 1984 और 1985-86 उत्पादन क े लिलए 1ीनी मूल्य विन ारर्ण) आदेश, 1985 क े ह याति1काक ाओं क े पूव# यूपी जोन में स्थिJर्थी 1ीनी कारखाने को लगाने क े लिलए विवपरी पक्षों को 1ीनी कारखाने में उपयोग क े लिलए Jवीकाय लेवी 1ीनी क े मूल्यों को अनुम ी प्रदान करने का विनदQश देने वाले परमादेश को आदेश या विनदQश की प्रक ृ ति में एक रिरट जारी करक े और विवपरी पक्षों को सिजला सी ापुर क े अन्य 1ीनी कारखानों क े सार्थी याति1काक ाओं क े 1ीनी कारखाने को आगे जारी रखने का विनदQश देना आैर उत्तर vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd प्रदेश पूव# क्षेत्र में 1ीनी कारखानों क े लिलए लागू मूल्य क े अनुसार याति1काक ाओं को लेवी 1ीनी की कीम का भुग ान करने क े लिलए विवपरी पक्षों को विनदQश दे सक े है। (iii) आवश्यक वJ ु अति विनयम, 1955 की ारा 3 (2) (1) और ारा 3 (3 ग) को भार क े संविव ान क े अनुच्छेद 14 और 19 (1) (छ) को अति कार से परे क े रूप में घोविष करें; (iv) कोई अन्य रिरट आदेश या विनदQश जारी करना, जैसा विक मामले की प्रक ृ ति वारंट क े अनुरूप हो सक ी है। (v) याति1काक ाओं क े पक्ष में एक दर्थी अं रिरम आदेश जारी करना; (vi) मामले की लाग याति1काक ाआें को अति विनर्णिर्ण करें. ”

3. 1ूंविक अपीलक ा ने आवश्यक वJ ु अति विनयम, 1955 की ारा 3 (2) (एफ) और 3 (3 सी) की वै ा पर मांगी गई घोषर्णा पर राह क े लिलए दबाव नहीं डाला, इसलिलए उच्च न्यायालय को इसको इस रह से नही लिलया जाना 1ाविहए।

4. पेराई वष 1984-85 और 1985-86 क े लिलए अपीलक ा 1ीनी विमल को लेवी 1ीनी क े लिलए मूल्य विन ारर्ण क े उद्देश्य से क ें द्रीय जोन में रखा गया र्थीा। मुख्य रूप से, यह अपीलक ा का मामला र्थीा विक सी ापुर सिजले में 1ीनी विमलों की भौगोलिलक और जलवायु स्थिJर्थीति यां, इसी रह क े अन्य 1ीनी कारखानों जैसे सेसरिरया विबसवान शुगर फ ै क्ट्री लिलविमटेड, सिजला सी ापुर और विकसान सहकरी ति1न विमल्स लिलविमटेड महमूदाबाद vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd (अव ), सिजला सी ापुर क े समान हैं। उसी क े बावजूद, इन दो कारखानों को पूव# क्षेत्र में शाविमल विकया गया र्थीा, जबविक पेराइ वष 1984-85 और 1985-86 क े लिलए लेवी 1ीनी मूल्य क े विन ारर्ण क े उद्देश्य से अपीलक ा कारखाने क े सार्थी भेदभाव विकया गया र्थीा और क ें द्रीय जोन में ही रखा गया र्थीा।

5. दोनों पक्षों की ओर से प्रJ ु प्रJ ुति यों और अथिभलेख की अन्य सामग्री पर विव1ार करने से, उच्च न्यायालय ने यह पाया विक उक्त विनर्णय एक नीति ग विनर्णय र्थीा, सिजसने क ें द्र सरकार को एक उति1 वग#करर्ण करने की अनुमति दी र्थीी और विकसी भी मामले की अनुपस्थिJर्थीति में मनमानी या शत्रु ापूर्ण भेदभाव से बाहर, अपीलक ा द्वारा दायर रिरट याति1का को खारिरज कर विदया।

6. हमने अपीलक ा की आेर से प्रJ ु विवद्व वरिरष्ठ अति वक्ता श्री वी. शेखर और प्रत्यर्थी#यों की आेर से प्रJ ु विवद्व वरिरष्ठ अति वक्ता सुश्री विबनू टविमटा को सुना है और अथिभलेख पर रखे आक्षेविप आदेश और अन्य सामग्री का अवलोकन विकया है।

7. क्षेत्र में 1ीनी क े विनमा ाओं को उनक े समग्र उत्पादन और विनवेश पर एक उति1 रिरटन सुविनतिb करने क े इरादे से एक क्षेत्र क े लिलए लेवी 1ीनी की कीम य की जा ी है, बश Q विक इकाइयां आर्णिर्थीक और क ु शल रीक े से 1ल रही हों। आवश्यक वJ ु अति विनयम, 1955 क े प्राव ानों vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd क े ह कवर विकए गए प्रासंविगक समय क े दौरान 1ीनी एक विनयंवित्र वJ ु र्थीी। क ु छ मात्रा में 1ीनी को लेवी 1ीनी कहा जा ा है, सिजसे सरकार द्वारा विन ारिर मूल्य पर सरकार को आपूर्ति की जानी र्थीी और उसमें से ब1े 1ीनी को लेवी मुक्त 1ीनी कहा जा ा र्थीा, सिजसे खुले बाजार में बे1ा जा सक ा र्थीा। लेवी 1ीनी की कीम आवश्यक वJ ु अति विनयम क े ह बनाए गए विनयंत्रर्ण आदेश क े आ ार पर य की गई र्थीी। लेवी 1ीनी का मूल्य क ें द्र सरकार द्वारा विन ारिर विकया गया र्थीा, सिजसमें विवशेषज्ञ विनकाय द्वारा ैयार विकए गए और अनुशंसिस बुविनयादी-लाग अनुसूति1यों क े आ ार सविह विवथिभन्न कारकों को ध्यान में रख े हुए य विकया गया है। जैसा विक प्रत्यर्थी#यों क े रुख से Jपष्ट है विक ऐसा प्र ी हो ा है विक जोनल पैटन क े संबं में औद्योविगक लाग और मूल्य ब्यूरो (BICP) ) की सवQक्षर्ण रिरपोट भार सरकार द्वारा संग नहीं पाई गई र्थीी और इसे लागू नहीं विकया गया र्थीा। अपीलक ा ने विबसवान और महमूदबाद में 1ीनी कारखानों क े सार्थी समान ा का दावा विकया है, लेविकन ऐसी इकाइयों को राज्य सरकार और BICP) द्वारा घोविष योग्य ा क े आ ार पर पूव# क्षेत्र में Jर्थीानां रिर कर विदया गया र्थीा और लेवी की कीम ें ज़ोन क े लिलए य की गई हैं न विक प्रत्येक कारखाने क े लिलए। जोन भी राजJव सिजलों क े अनुसार नहीं र्थीे। क े वल इसलिलए विक क ें द्रीय क्षेत्र और पूव# क्षेत्र में मूल्य में अं र है, अपीलक ा दावा नहीं कर सक ा है, सही रूप में, इसकी इकाई को संबंति वषl क े दौरान क ें द्रीय जोन क े बजाय पूव# जोन में रखा जाना र्थीा। रिरट याति1का में आक्षेविप vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd आदेश विवशेषज्ञों द्वारा गहन अध्ययन पर आ ारिर र्थीे। वै ाविनक शविक्त क े प्रयोग में क ें द्र सरकार द्वारा विदए गए विनष्कषl को या ो भेदभावपूर्ण या अनुति1 नहीं कहा जा सक ा है। अब क विबसवान और महमूदबाद में 1ीनी इकाइयों का संबं है, उन्हें राज्य द्वारा घोविष योग्य ा क े आ ार पर पूव# क्षेत्र में Jर्थीानां रिर कर विदया गया र्थीा। जब राजJव सिजले जोनल तिडवीजन क े लिलए सीमाएं नहीं हैं, ो अपीलक ा क े वल इस आ ार पर अन्य इकाइयों क े सार्थी समान ा का दावा नहीं कर सक ा है विक सभी इकाइयां सी ापुर सिजले में स्थिJर्थी हैं। अपीलक ा इकाई क े संबं में भी, समय की कमी क े बाद इसे पूव# क्षेत्र में रखना संग माना गया और हमें सूति1 विकया गया विक इसे पूव# क्षेत्र में रखा गया र्थीा। जैसा विक अपीलक ा विकसी भी गैरकानूनी भेदभाव और वै ाविनक उल्लंघन को प्रदर्णिश करने में विवफल रहा है, क े वल इस आ ार पर विक सी ापुर सिजले की अन्य इकाइयों को पूव# क्षेत्र में Jर्थीानां रिर कर विदया गया र्थीा और संबंति पेराई वषl क े लिलए अपीलक ा क े प्रति विनति त्व को आगे नहीं बढाया गया, अ ः हJ क्षेप क े लिलए कोई आ ार नहीं है। हमें इस दलील को Jवीकार करने क े लिलए राजी नहीं है विक उत्तर प्रदेश क े पूव# क्षेत्र में सी ापुर सिजले में क ें द्रीय क्षेत्र और अन्य इकाइयों में अपीलक ा इकाई को रखकर अपीलक ा क े सार्थी भेदभाव विकया गया र्थीा। दो अलग- अलग क्षेत्रों में अपीलक ा क े कारखाने को दो अलग -अलग समय पर रखने में क ें द्र सरकार की कारवाई में कोइ भेदभाव नहीं है। विवशेषज्ञ की रिरपोटl को ध्यान में रखकर सरकार की सं ुविष्ट क े अ ीन समय -समय vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd पर नीति ग विनर्णय लिलया गया। प्रत्यर्थी#यों का यह भी मामला है विक नवंबर, 1980 में घोविष सरकार की प्रोत्साहन योजना क े अनुसार, महमूदबाद में कारखाने को सामान्य कोटा पर बहु अति क मुक्त विबक्री 1ीनी में Jर्थीाविप विकया गया र्थीा। 1984-85 और 1985-86 क े पेराई वषl क े दौरान, नीति की घोषर्णा करने से पहले और क्षेत्रों क े विन ारर्ण क े लिलए कई प्रासंविगक कारकों पर विव1ार विकया गया र्थीा। उपयुक्त कारर्णों क े लिलए, हमें उच्च न्यायालय क े विदनांक 18. 07. 2006 क े आक्षेविप आदेश में रिरट याति1का को खारिरज करने आैर आगे क े विदनांविक 11. 09. 2007 आदेश क े ह समीक्षा याति1का सं. 253/ 2006 को खारिरज करने में कोई अवै ा नहीं विमली है, उच्च न्यायालय ने सामग्री पर विवJ ार से विव1ार विकया है और सही विनष्कषl को दज करक े अपीलक ा की याति1का को खारिरज कर विदया है। अथिभलेलिख विकए गए ऐसे विनष्कषl और ऊपर उसिल्ललिख अन्य कारर्णों क े मद्देनजर, हमें इन अपीलों में कोई योग्य ा नहीं विमल ी है ाविक इसमें हJ क्षेप विकया जा सक े । दनुसार, इन अपीलों को लाग क े रूप में विबना विकसी आदेश क े सार्थी खारिरज कर विदया जा ा है।

8. इस न्यायालय द्वारा पारिर अं रिरम आदेशों क े अनुसार, मांग की गई राथिश का 50% रसिजJट्री में अपीलक ा द्वारा जमा विकया जा ा है और शेष 50% बैंक गारंटी प्रJ ु की जा ी है। हम प्रत्यर्थी#-सरकार, जमा vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd द्वारा कवर की गई ऐसी राथिश को वापस लेने क े सार्थी-सार्थी बैंक गारंटी और अर्जिज ब्याज को अनुमति दे े हैं।................................................ (न्यायमूर्ति मोहन एम. शां ानागौदर)....................................... (न्यायमूर्ति आर. सुभाष रेड्डी) नई विदल्ली; 07 फरवरी, 2020 vLohdj.k Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd