Full Text
समक्ष भार ीय सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय न्यायक्षेत्र
सिसविवल अपील सं. 1757 / 2020
(विवशेष अनुमति याति&का (सिसविवल) सं. 32812 / 2018 से उद्भू )
उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य .... अपीलार्थी3(गण)
बनाम
विवजय शंकर दुबे .... प्रत्यर्थी3(गण)
विन ण9 य
यह उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य द्वारा दायर की गई इलाहाबाद उच्च
न्यायालय की ति?वीजन बें&, लखनऊ पीठ क
े विनण9य 01.11.2017
विदनांविक को &ुनौ ी देने वाली अपील है सिजसक
े द्वारा प्रत्यर्थी3 द्वारा दायर
रिरट याति&का 01.01.1996 विदनांविक से की जा रही उच्च वे नमान क
े लाभ
को अनुमति दी गई है।
JUDGMENT
2. इस अपील को य करने क े लिलए मामले क े संतिक्षप्त थ्य इस प्रकार हैं: उद्घोषणा “क्षेत्रीय भाषा में अनुवाविद विनण9य वादी क े अपनी भाषा में समझने हे ु विनबVतिW प्रयोग क े लिलए है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए प्रयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और सरकारी उद्देश्यों क े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े उद्देश्यों क े लिलए मान्य होगा।" प्रत्यर्थी3 विदनांक 11.02.1963 को प्रारंभ ः सहायक लोक अतिWकारी क े पद पर विनयुक्त हुआ र्थीा। प्रत्यर्थी3 को विदनांक 12.06.1964 को संयुक्त विनदेशक, अणिभयोजन क े वग9-I क े पद क े रूप में पदोन्न विकया गया र्थीा। प्रत्यर्थी3 ने विदनांक 31.01.1997 को सेवाविनवृलित्त की आयु प्राप्त की। सेवाविनवृलित्त क े समय वह &ौर्थीे वे न आयोग की रिरपोट[9] क े अनुसार रु. 3700-5000 क े वे नमान में र्थीा। पां&वें वे न आयोग की रिरपोट[9] की सिसफारिरशों पर संयुक्त विनदेशक क े पद क े लिलए वे नमान, अणिभयोजन को संशोतिW कर 3700-5000 रुपये क े स्र्थीान पर 12000-16500 रुपये कर विदया गया। दनुसार, प्रति वादी क े वे नमान को संशोतिW विकया गया र्थीा और उसे संशोतिW पेंशन भी दी गई र्थीी।
3. सरकार द्वारा विदनांक 02.02.1997 को स्वीकार की गई पां&वें वे न आयोग की रिरपोट[9] क े परिरणामस्वरूप वे नमान क े संबंW में विवणिभन्न अभ्यावेदन और आपलित्तयों पर विव&ार करने क े लिलए, मुख्य सति&व की अध्यक्ष ा में एक सविमति का गठन विकया गया र्थीा। इसे विवसंगति यों पर विव&ार करने क े लिलए सविमति क े रूप में भी संदर्भिभ विकया जा ा है। उक्त सविमति द्वारा अणिभयोजन शाखा क े पद क े वे नमान में संशोWन पर भी विव&ार विकया गया। सविमति ने सिसफारिरश विकया विक विदनांक 01.04.2001 से क ें द्र क े सीबीआई संगठन में मौजूद पद क े अनुरूप अणिभयोजन संवग[9] की विवणिभन्न उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े श्रेणिणयों क े वे नमान को उत्र्थीान विकया जाना &ाविहए। संयुक्त विनदेशक क े पद क े लिलए, अणिभयोजन वे नमान को विदनांक 01.04.2001 क े प्रभाव से रू. 14300-18500 में संशोतिW करने की सिसफारिरश की गई र्थीी। सरकार द्वारा उक्त सविमति की सिसफारिरश को स्वीकार कर लिलया गया र्थीा और संयुक्त विनदेशक अणिभयोजन क े वे नमान में विदनांक 01.04.2001 से संशोWन क े लिलए 02.02.2007 विदनांविक को जारी आदेश की सिसफारिरश को स्वीकार विकया गया र्थीा।
4. प्रति वादी ने उच्च न्यायालय में रिरट-क सं.18687/2013 दायर विकया। उच्च न्यायालय ने आक्षेविप विनण9य से रिरट याति&का को उच्च न्यायालय क े दो पूव[9] विनण9यों यानी विवशेष अपील (?ी) सं. 870/2009 (उ.प्र. राज्य एवं अन्य बनाम आनंद क ु मार विमश्रा एवं अन्य) और विवशेष अपील सं.115 (एसबी)/2009 (उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य बनाम घनश्याम सिंसह एवं एक अन्य पर अवलम्ब ले े हुए अनुमति दी। उच्च न्यायालय ने अवWारिर विकया विक प्रति वादी का मामला उच्च न्यायालय क े विनण9य उ.प्र. राज्य एवं अन्य बनाम आनंद क ु मार विमश्रा एवं अन्य द्वारा पूण[9] ः आच्छाविद विकया गया है, प्रति वादी विदनांक 01.01.1996 से संशोतिW वे नमान क े लाभ का हकदार है। उच्च न्यायालय क े विनण9य से व्यणिर्थी होकर यह अपील उ.प्र. राज्य एवं अन्य द्वारा दायर की गई है। उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े
5. हमने अपीलार्भिर्थीयों की रफ से प्रस् ु वरिरष्ठ विवद्वान अतिWवक्ता श्री वी. शेखर और प्रति वादी की रफ से प्रस् ु वरिरष्ठ विवद्वान अतिWवक्ता श्री पी.एन. विमश्रा ने को सुना।
6. अपीलार्भिर्थीयों की रफ से प्रस् ु वरिरष्ठ विवद्व अतिWवक्ता श्री वी. शेखर ने यह क 9 विदया विक राज्य सरकार ने सविमति की सिसफारिरशों पर विव&ार करने क े बाद उ.प्र. राज्य क े अणिभयोजन विवभाग में विवणिभन्न पदों क े वे नमान में विदनांक 01.04.2001 से संशोWन करने का फ ै सला विकया, जो सविमति द्वारा की गई सिसफारिरश क े परिरणामस्वरूप र्थीा। श्री शेखर ने क 9 विदया विक सीबीआई संगठन क े संबंW में क ें द्र में सादृश्य क े बाद वे नमान में संशोWन क े लिलए विदनांक 01.04.2001 की ति णिर्थी य की गई र्थीी। सीबीआई में वे नमान क े अनुसार राज्य की अणिभयोजन शाखा में विवणिभन्न पदों क े वे नमानों क े लिलए पहली बार सीबीआई संगठन की सादृश्य ा को अपनाया गया र्थीा। अ ः, उक्त लाभ क े काया9न्वयन की ति णिर्थी 01.04.2001 य की गई र्थीी। उन्होंने क 9 प्रस् ु विकया विक सरकारी आदेश 02.02.2007 विदनांविक से यह संक े नहीं विमल ा विक वे नमान में कोई त्रुविट र्थीी जो पां&वें वे न आयोग की रिरपोट[9] क े आWार पर प्रति वादी को प्रदान की गई र्थीी। वह क 9 प्रस् ु कर े हैं विक विदनांक 01.04.2001 को य करने में एक आनुपाति क आWार र्थीा उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े सिजसे प्रति वादी द्वारा वैW रूप से &ुनौ ी नहीं दी जा सक ी है। उच्च न्यायालय ने पूव[9] क े दो विनण9यों उ.प्र. राज्य एवं अन्य बनाम आनंद कु मार विमश्रा एवं अन्य क े मामले पर अवलम्ब लिलया, जो उ.प्र. पुलिलस रेति?यो विवभाग क े कम9&ारिरयों का मामला र्थीा। उच्च न्यायालय द्वारा अवलम्बिम्ब दूसरा विनण9य घनश्याम सिंसह का र्थीा जो राज्य क े अणिभयोजन पक्ष से भी संबंतिW नहीं र्थीा। उच्च न्यायालय द्वारा अवलम्बिम्ब दोनों विनण9य थ्यों क े अलग-अलग समूह में र्थीे और विवणिभन्न पदों क े लिलए सिजन्हें प्रति वादी क े मामले को आच्छाविद करने क े लिलए नहीं कहा जा सक ा और उच्च न्यायालय ने यह अवWारिर कर े हुए त्रुविट विकया विक प्रति वादी का मामला पूव क्त विनण9यों द्वारा आच्छाविद विकया गया र्थीा।
7. यह आगे क 9 विदया गया विक अन्य ति?वीजन बें& ने रिरट अपील सं.20754/2013 (सुWीर क ु मार गुप्ता बनाम उ.प्र. राज्य एवं अन्य) क े अपने विनण9य 08.05.2018 विदनांविक क े माध्यम से, जहां याति&काक ा9 विदनांक 30.11.1999 को संयुक्त विनदेशक (अणिभयोजन) क े पद से सेवाविनवृत्त हुए और विदनांक 01.01.1996 से सरकारी आदेश 02.02.2007 विदनांविक में लाभ क े लिलए विकए गये दावे का रिरट अपील उस विनण9य को सही ढंग से अवWारिर कर े हुए खारिरज कर विदया गया विक संयुक्त उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े विनदेशकों (अणिभयोजन) क े लाभ को बढ़ाया नहीं जा सक ा जो विदनांक 01.11.1999 को सेवाविनवृत्त हुए र्थीे।
8. प्रति वादीगणों की रफ से प्रस् ु वरिरष्ठ विवद्वान अतिWवक्ता श्री पी.एन. विमश्रा क े क 9 से असहम अपीलार्भिर्थीयों की रफ से प्रस् ु वरिरष्ठ विवद्वान अतिWवक्ता ने क 9 विदया विक आक्षेविप विनण9य मे अवलम्बिम्ब उच्च न्यायालय क े दोनों ति?वीजन बें& क े विनण9य पूण[9] ः उपयुक्त र्थीे। यह क 9 प्रस् ु विकया गया विक घनश्याम सिंसह क े मामले में विनण9य क े विवरुद्ध कोई अपील दायर नहीं की गई र्थीी, जबविक एसएलपी (सी) सं.27765/2009 को विवशेष अपील सं.870/2009 में उच्च न्यायालय क े विनण9य 06.08.2009 विदनांविक क े विवरुद्ध दायर की गई र्थीी, सिजस एसएलपी को विदनांक 06.11.2009 को खारिरज कर विदया गया र्थीा।
9. श्री विमश्रा ने क 9 विदया विक जब पां&वें वे न आयोग की सिसफारिरशें विदनांक 01.01.1996 से लागू की गई र्थीीं, ो प्रति वादी का वे नमान ठीक से य नहीं विकया गया र्थीा और इसीलिलए विवसंगति यों क े लिलए सविमति अम्बिस् त्व में आई सिजसने पुनरीक्षण और वे नमान में संशोWन रू. 14300 से 18500 की सिसफारिरश की जो विदनांक 01.01.1996 क े प्रभाव से लागू विकया जाना &ाविहए र्थीा। उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े
10. हमने पक्षकारों क े विवद्वान अतिWवक्ता क े क• पर विव&ार विकया है और अणिभलेखों का परिरशीलन विकया।
11. पक्षकारों क े बी& संयुक्त विनदेशक, अणिभयोजन क े पां&वें वे न आयोग की परिरशोतिW वे नमान रू.3700-5000 से रू.12000-16500 का कोई विववाद नहीं है। प्रति वादी का पां&वें वे न आयोग की रिरपोट[9] का लाभ विदनांक 01.01.1996 से बढ़ाया गया र्थीा और दनुसार उसकी पेंशन को परिरशोतिW विकया गया र्थीा। राज्य सरकार ने सरकार क े आदेश 23.12.1997 विदनांविक क े माध्यम से पां&वें वे न आयोग की सिसफारिरशों को स्वीकार कर लिलया और विदनांक 01.01.1996 से वे नमान को परिरशोWन करने का विनण9य लिलया। अणिभयोजन विनदेशालय में काय9र अतिWकारिरयों सविह कई विवभागों द्वारा कई आपलित्तयां और अभ्यावेदन प्रस् ु विकए गए। सरकारी आदेश 02.02.2007 विदनांविक का प्रासंविगक भाग विनम्नलिललिख है: "प्रेषक, (अपठनीय) अवर सति&व उ.प्र. सरकार, सेवा में, महाविनदेशक अणिभयोजन, अणिभयोजन विनदेशालय उ.प्र., लखनऊ. उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े पत्र सं.246/VI-P-9-07-31 (49)/2000 विदनांक 02.02.2007. विवषय: उत्तर प्रदेश राज्य में अणिभयोजन विवभाग में मौजूद विवणिभन्न पदों क े वे नमान में संशोWन क े संबंW में। यह शीष9क में विदये गए मामले क े संदभ[9] में है। मुझे यह कहने क े लिलए विनद‚णिश विकया गया है विक उत्तर प्रदेश राज्य सरकार क े विवणिभन्न विवभागों में काय9र सरकारी व्यविक्तयों क े वे नमान आविद में परिरशोWन क े लिलए गविठ वे न सविमति 1997-99 की सिसफारिरशों क े आWार पर और इस रह की सिसफारिरशों क े विव&ारार्थी9, उक्त मुख्य सति&व सविमति की सिसफारिरशों क े आWार पर वे नमान इत्याविद में विवसंगति यों की घटनाओं क े मामलों में फ ै सला लेने क े लिलए मुख्य सति&व की अध्यक्ष ा वाली सविमति का गठन विकया गया र्थीा। उत्तर प्रदेश क े माननीय महामविहम राज्यपाल, अणिभयोजन विवभाग में विवणिभन्न पदों क े लिलए परिरशोतिW उच्च वे नमान को संस्वीक ृ ति देने की क ृ पा कर े हैं, जैसा विक इस सरकारी आदेश क े सार्थी संलग्न लेखा-ति&त्र क े स् ंभ-2 में उसि…लिख है, सामान्य परिरशोतिW वे नमान क े स्र्थीान पर विदनांक 01.01.1996 से लागू, जैसा विक उक्त लेखा -ति&त्र क े स् ंभ-3 में विदखाया गया है, विदनांक 01.04.2001 से लागू विकया जाएगा।........................................................ ”
12. सरकारी आदेश 02.02.2007 विदनांविक को सारणीबद्ध रूप में स् ंभों - पद, विदनांक 01.01.1996 से सामान्य परिरशोतिW वे नमान, विदनांक 01.04.2001 से संशोतिW वे नमान और सिसफारिरशों को संलग्न विकया गया उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े र्थीा। सरकारी आदेश 02.02.2007 विदनांविक क े संलग्नक का उद्धरण उपयोगी है जो विनम्नलिललिख प्रभाव क े लिलए है: bम सं. पद विदनांक 01.01.1996 से प्रभावी सामान्य परिरशोतिW वे नमान विदनांक 01.01.1996 से प्रभावी संशोतिW वे नमान सिसफारिरशें 1 2 3 4 5
1. अणिभयोजन अतिWकारी 7450- 8000- --
2. वरिरष्ठ अणिभयोजन अतिWकारी (सामान्य स् र) 8000- 10000- 325- --
3. वरिरष्ठ अणिभयोजन अतिWकारी (उच्च स् र)/ उप विनदेशक अणिभयोजन 10000- 12000- 375- वरिरष्ठ अणिभयोजन अतिWकारी (उच्च वे नमान)/ उप विनदेशक का पद संयुक्त विनदेशक क े रूप में पुनर्निनयुक्त होगा।
4. संयुक्त विनदेशक (विवतिW)/संयुक्त विनदेशक (अणिभयोजन) 12000- 14300- 400- संयुक्त विनदेशक (अणिभयोजन) और संयुक्त विनदेशक (विवतिW) का पद अपर विनदेशक (अणिभयोजन) और अपर विनदेशक (विवतिW) क े रूप में पुनर्निनयुक्त होगा। उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े हस् ाक्षरिर /- मंजू &ंद्र विवशेष सति&व"
13. उपरोक्त संलग्नक का अवलोकन इंविग कर ा है विक अणिभयोजन विवभाग क े सभी अतिWकारिरयों क े वे नमान में संशोWन नहीं विकया गया र्थीा, जैसा विक स् ंभ संख्या 4 में उसि…लिख है, क े वल विदनांक 01.04.2001 से वरिरष्ठ अणिभयोजन अतिWकारी (उच्च स् र)/उप विनदेशक अणिभयोजन और संयुक्त विनदेशक (विवतिW)/संयुक्त विनदेशक (अणिभयोजन) क े लिलए संशोWन विकए गए र्थीे।
14. अपीलार्भिर्थीयों की रफ से प्रस् ु विवद्वान अतिWवक्ता ने क• क े प्रस् ु करने क े दौरान उस ति णिर्थी विदनांक 01.04.2001 को प्रस् ु विकया है जो मुख्य सति&व की सविमति द्वारा क ें द्र क े सीबीआई संगठन में सादृश्य स्वीकार करने क े कारण सिसफारिरश की गई र्थीी। मुख्य सति&व की सविमति की सिसफारिरश का संदभ[9] दे े हुए अपीलार्भिर्थीयों क े विवद्वान अतिWवक्ता ने क 9 विदया विक अणिभयोजन विवभाग में संयुक्त विनदेशक की उच्च वे नमान की स्वीक ृ ति क ें द्र क े सीबीआई संगठन की सादृश्य ा क े आWार पर र्थीा। अपीलार्भिर्थीयों क े लिलए विवद्वान अतिWवक्ता द्वारा प्रस् ु विकए गये लिललिख कर्थीन में अणिभयोजन शाखा उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े क े पद क े लिलए वे नमान में संशोWन क े विव&ार पर मुख्य सति&व की सविमति की सिसफारिरशें जो परिरशीलन क े लिलए रखी गयी हैं जो संक े कर ा है विक कमेटी की सिसफारिरशें: “.....उपरोक्त म्बिस्र्थीति यों क े दृविˆकोण में सविमति की सिसफारिरश है विक अणिभयोजन संवग[9] की विवणिभन्न श्रेणिणयों क े वे नमानों को विदनांक 01.04.2001 से क ें द्र क े सीबीआई संगठन में मौजूदा पदों क े सादृश्य उपरोक्त सामान्य विनण9य क े अनुसार विनम्नानुसार पदोन्नति विकया जाना &ाविहए।......"
15. मुख्य सति&व क े सविमति की सिसफारिरशों को स्वीकार कर लिलया गया और परिरणामस्वरूप सरकार का आदेश विदनांक 02.02.2007 को दनुसार जारी कर विदया गया।
16. आक्षेविप विनण9य में उच्च न्यायालय ने पूव[9] क े दो विनण9यों घनश्याम सिंसह और आनंद क ु मार विमश्रा एवं अन्य में अवलंब ले े हुए अवWारिर विकया विक प्रत्यर्थी3 का मामला उक्त विनण9यों द्वारा सम्बम्बिन्W है, अ ः रिरट याति&का को अनुमति दी जा ी है। उच्च न्यायालय ने यह नहीं कहा विक विदनांक 01.04.2001 को कट ऑफ ति णिर्थी क ै से य की गई र्थीी, यह अविनतिŠ है। विवणिभन्न वे नमानों की सिसफारिरश करने वाले विवणिभन्न विवभागों क े संबंW में सविमति क े विवषम ा की रिरपोट[9] विवणिभन्न विवभागों क े पे -स्क े ल पर आWारिर है और क े वल इसलिलए क्योंविक वायरलेस विवभाग क े कम9&ारिरयों को विदनांक 01.01.1996 से उच्च वे न विदया गया है जो घोविष करने का आWार नहीं उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े हो सक ा और विदनांक 01.04.2001 को संयुक्त विनदेशक क े वे नमान का संशोWन लागू करने क े लिलए विनय विकया गया अणिभयोजन अवैW है। हम अपीलार्भिर्थीयों क े विवद्वान अतिWवक्ता क े क 9 में जो सार विमल ा है वह क ें द्र क े े सादृश्य मुख्य सति&व की सविमति द्वारा की गई सिसफारिरश को संयुक्त विनदेशक, अणिभयोजन क े वे नमान में संशोWन कर ा है। इस प्रकार, सीबीआई संगठनों में वे नमान क े बढ़ाए जाने का लाभ पहली बार स्वीकार विकया गया र्थीा। अणिभयोजन विंवग क े प्रति वेदन को मुख्य सति&व की सविमति द्वारा स्वीकार विकया गया र्थीा जो क ें द्र क े सीबीआई संगठन क े लाभों का विवस् ार करने क े लिलए सहम र्थीी। जब वे नमान में संशोWन प्रभाविव हो रहा है ो हमें एकसमान ति णिर्थी 01.04.2001 को य करने में कोई स्वेच्छा&ारिर ा नहीं विमल ी। श्री विमश्रा का क 9 है विक विदनांक 01.01.1996 से वे नमान का संशोWन, जो विक पां&वें वे न आयोग द्वारा य की गई ति णिर्थी र्थीी वह विफर से संबंतिW होना &ाविहए और व 9मान मामले क े थ्यों में स्वीकार नहीं विकया जा सक ा है।
17. श्री विमश्रा ने इस न्यायालय क े विनण9य पर पुरुषोत्तम लाल एवं अन्य बनाम भार संघ एवं अन्य, (1973) 1 एससीसी 651 में भी अवलम्ब लिलया है। उपरोक्त मामले में, याति&काक ा9ओं को वन अनुसंWान संस्र्थीान एवं कॉलेज, देहरादून में विनयोसिज विकया गया र्थीा जो खाद्य और क ृ विष मंत्रालय, उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े भार सरकार का एक विवभाग र्थीा। दूसरे वे न आयोग ने अपनी रिरपोट[9] प्रस् ु की और वैज्ञाविनक स्टाफ क े संबंW में सिसफारिरश की। वन अनुसंWान संस्र्थीान में वैज्ञाविनक स्टाफ क े वे नमान में संशोWन विदनांक 21.06.1962 से प्रभावी र्थीा, जबविक इसी प्रकार क े जुड़े हुए संस्र्थीानों क े संबंW में विदनांक 1 जुलाई, 1959 से सरकार द्वारा विद्व ीय वे न आयोग की सिसफारिरश को स्वीकार विकया गया र्थीा। वन अनुसंWान संस्र्थीान क े उक्त वैज्ञाविनक स्टाफ द्वारा विवरोW विकया गया और प्रति वेदन प्रस् ु विकया और त्पŠा अनुच्छेद 32 क े ह इस न्यायालय में रिरट याति&का दायर की। सरकार की ओर से इस न्यायालय क े समक्ष क 9 विकया गया र्थीा विक दूसरे वे न आयोग ने याति&काक ा9ओं क े मामले क े सार्थी समझौ ा नहीं विकया और वे विदनांक 1 जुलाई, 1959 से लाभ क े हकदार नहीं र्थीे, सिजसे स्वीकार नहीं विकया गया। प्रस् र 14,15 और 17 में इस न्यायालय ने यह विनWा9रिर विकया: "14 सरकार की ओर से श्री ढेबर उसी म्बिस्र्थीति को बनाए रख े हैं और उनका कहना है विक वे न आयोग की रिरपोट[9] ने याति&काक ा9ओं क े मामले क े सार्थी समझौ ा नहीं विकया। हम इस क 9 को स्वीकार करने में असमर्थी9 हैं। संदभ[9] की श • व्यापक हैं, और यविद सरकारी कम9&ारिरयों की विकसी भी श्रेणी को बाहर रखा गया है ो इस न्यायालय क े समक्ष रखा जाना &ाविहए र्थीा। वे न आयोग ने स्पˆ रूप से कहा है विक उनकी जां& क े प्रयोजनों क े लिलए उन्होंने सभी व्यविक्तयों को क ें द्र सरकार की दीवानी सेवाओं में ले लिलया र्थीा या उस सरकार क े ह दीवानी पदों को Wारिर कर े हुए भार क े समेविक कोष से क ें द्र सरकार क े कम9&ारिरयों को भुग ान विकया र्थीा। श्री ढेबर द्वारा इस बा से इनकार नहीं विकया जा ा है उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े विक याति&काक ा9ओं को भार की समेविक विनतिW से भुग ान विकया जा ा है।
15. श्री ढेबर का क 9 है विक यह सरकार क े लिलए वे न आयोग की सिसफारिरशों को स्वीकार करना र्थीा और ऐसा करने क े लिलए यह विनWा9रिर करना विक कम9&ारिरयों की कौन सी श्रेणिणयों को संदभ[9] की श • में शाविमल विकया जाना &ाविहए। हम इस विंबदु की सराहना करने में असमर्थी9 हैं। या ो सरकार ने सभी सरकारी कम9&ारिरयों क े संबंW में संदभ[9] विदया है या नहीं। लेविकन यविद इसने सभी सरकारी कम9&ारिरयों क े संबंW में कोई संदभ[9] विदया है ो यह उन सिसफारिरशों को स्वीकार कर ा है जो सभी सरकारी कम9&ारिरयों क े संबंW में सिसफारिरशों को लागू करने क े लिलए बाध्य हैं। यविद यह क ु छ कम9&ारिरयों क े संबंW में रिरपोट[9] को लागू नहीं कर ा है, ो यह क े वल संविवWान क े अनुच्छेद 14 और 16 का उ…ंघन कर ा है। जहां क इन याति&काक ा9ओं का संबंW है यह सरकार ने ऐसा विकया है।
17. परिरणामस्वरूप याति&का की अनुमति है और यह विनद‚णिश विकया जा ा है विक याति&काक ा9ओं क े संशोतिW वे नमान, वे न आयोग की सिसफारिरशों क े अनुसार विदनांक 1 जुलाई, 1959 से प्रभावी होगा। हम आगे विनद‚श दे े हैं विक याति&काक ा9ओं को जुलाई 1959 से वे नमान क े संशोWन क े परिरणामस्वरूप उन्हें देय राणिश का भुग ान विकया जाना &ाविहए। याति&काक ा9ओं को याति&का का भार वहन करना होगा।”
18. उपरोक्त मामले में, इस न्यायालय ने एक ऐसे मामले पर विव&ार विकया है सिजसे दूसरे वे न आयोग द्वारा भी कवर विकया गया र्थीा, लेविकन लाभों को बढ़ाया नहीं गया र्थीा, जबविक समान जुड़े हुए संस्र्थीानों का लाभ बढ़ाया गया र्थीा। उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े इस प्रकार, इस न्यायालय ने रिरट याति&का की अनुमति दी और विदनांक 1 जुलाई, 1959 से याति&काक ा9ओं को भी लाभ देने का विनद‚श विदया। उपरोक्त मामले का व 9मान मामले क े थ्यों पर कोई असर नहीं है। व 9मान में जो अनुbम और घटनाएँ ऊपर वर्भिण हैं वे थ्यों क े विवणिभन्न पहलुओं पर आWारिर हैं और उपरोक्त विनण9य व 9मान मामले में प्रति वादी की सहाय ा नहीं कर ा।
19. इस प्रकार, हमारा विव&ार है विक मुख्य सति&व क े सविमति की सिसफारिरश क े आWार पर संयुक्त विनदेशक, अणिभयोजन क े पद क े वे नमान में संशोWन क े लिलए कट ऑफ ति णिर्थी 01.04.2001 एक स&े विनण9य र्थीा जो क ें द्र क े े सदृश बनाया गया र्थीा। जब पहली बार कम9&ारिरयों क े वग[9] क े लिलए लाभ बढ़ाया जा ा है ो राज्य हमेशा क 9 संग कट ऑफ ति णिर्थी य कर सक ा है और यह राज्य क े लिलए अविनवाय[9] नहीं र्थीा विक वह क ें द्र की सीबीआई संगठन की सादृश्य ा का लाभ 01.01.1996 से लागू हो, जो पां&वें वे न आयोग की सिसफारिरशों की ति णिर्थी र्थीी। विदनांक 02.02.2007 क े सरकारी आदेश द्वारा कवर न विकए गए प्रति वादी को सही ढंग से सूति& विकया गया र्थीा विक वह विदनांक 31.01.1997 को पहले से ही सेवाविनवृत्त हो गया र्थीा इसलिलए वे नमान में संशोWन क े लाभ का हकदार नहीं र्थीा। उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े
20. पूव[9] क े कर्थीनों में हमारे दृविˆकोण में उच्च न्यायालय का विनण9य अवहनीय है और ए द्वारा अपास् विकया जा ा है। अपील को अनुमति दी गई है।...................................... (न्यायमूर्ति अशोक भूषण)...................................... (न्यायमूर्ति मोहन एम. शां ानागौदर) नई विद…ी, 19 मा&9, 2020. उद्घोषणा े लिलए, विनण9य का अंग्रेजी संस्करण प्रामाणिणक माना जाएगा र्थीा विनष्पादन और विbयान्वयन क े