Full Text
भार का सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय क्षेत्राति कार
सिसविवल अपील संख्या 8590/2010
राजस्थान राज्य विवद्यु बोर्ड, जयपुर ........ अपीलक ा, बनाम
उप आयकर आयुक्त (आंकलन) और अन्य ......... प्रति वादी
विनर्ण,य
अशोक भूषर्ण, न्याया ीश
JUDGMENT
1. यह अपील विन ा,रिर ी द्वारा राजस्थान उच्च न्यायालय की जयपुर खंर्डपीठ, जयपुर में खंर्डपीठ क े विनर्ण,य विदनांक 13.11.2007 को चुनौ ी दे े हुए दायर की गई है, सिजसक े द्वारा आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 143 (1-क) क े ह अति रिरक्त कर की मांग को बरकरार रख े हुए राजस्व द्वारा दायर खंर्डपीठ सिसविवल विवशेष अपील (रिरट) संख्या 837/1993 को अनुमति दी गई है।
2. इस अपील पर विनर्ण,य लेने क े लिलए आवश्यक संतिक्षप्त थ्य इस प्रकार हैंः विन ा,रिर ी क ं पनी अति विनयम, 1956 की ारा 617 क े ह परिरभाविष सरकारी क ं पनी है। विन ा,रिर ी ने विन ा,रर्ण वष, 1991-92 क े लिलए विदनांक 30.12.1991 को रुपये 427,39,32,972/- की हाविन दशा, े हुए रिरटन, दालिखल की थी । एक सद्भावी गल ी 2020 INSC 313 क े कारर्ण विन ा,रिर ी ने 75% मूल्यह्रास क े बजाय परिरसंपलि[यों क े अवलिललिख मूल्य पर 333,77,70,317/- रुपये क े 100% मूल्यह्रास का दावा विकया। असंशोति आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 32 (2) क े ह करदा ा 100 प्रति श ह्रास का दावा करने का हकदार था। हालांविक, संशो न क े बाद मूल्यह्रास क े वल 75% हो सक ा था। विन ा,रिर ी ने अनंति म राजस्व खा े, विदनांक 31.03.1991 की बैलेंस शीट, सकल अचल परिरसंपलि[यों क े विववरर्ण, गर्णना चाट, और मूल्यह्रास चाट, क े साथ रिरटन, का समथ,न विकया। विन ा,रिर ी द्वारा कथिथ रिरटन, पर कोई कर देय नहीं था। विन ा,रिर ी द्वारा आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 143(2) क े ह कोई नोविटस प्राप्त नहीं हुआ।
3. आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 143 (1) (क) क े ह विदनांक 12.02.1992 को मूल्यह्रास को 75% क सीविम कर े हुए मूल्यांकन अति कारी द्वारा मूल्यह्रास क े 25% को अस्वीकार कर े हुए एक सूचना जारी की गई थी। आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 143 (1-क) क े ह 8,63,64,827 रुपये क े अति रिरक्त कर की मांग की गई थी। करदा ा ने 18 फरवरी, 1992 को आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 154 क े ह एक आवेदन दायर कर मांग में सु ार करने का अनुरो विकया था। विन ा,रिर ी ने अति रिरक्त कर की मांग क े विवरुद्ध आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 264 क े ह एक यातिचका भी दायर की। यातिचका में कहा गया था विक क े वल 75% मूल्यह्रास की अनुमति देने क े बाद भी विन ा,रिर ी की आय 3,43,94,90,393/- रुपये की हाविन में रही। विन ा,रिर ी ने अति रिरक्त कर की मांग को रद्द करने क े लिलए प्राथ,ना की। आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 154 क े ह दालिखल आवेदन को 28.02.1992 को आकलन अति कारी द्वारा खारिरज कर विदया गया था। आयकर अति विनयम, 1961 की ारा 264 क े ह पुनरीक्षर्ण यातिचका आयकर आयुक्त द्वारा विदनांक 31.03.1992 क े आदेश द्वारा खारिरज कर दी गई। आयकर आयुक्त ने विनम्नलिललिख कारर्ण दे े हुए पुनरीक्षर्ण यातिचका को खारिरज कर विदया: " ारा 143(1-क) क े प्राव ानों को पढ़ने से प ा चल ा है विक जब भी समायोजन विकया जा ा है, ो ऐसी 'अति रिरक्त राथिश'पर देय कर क े 20% की दर से अति रिरक्त कर लगाया जा ा है। 'अति रिरक्त राथिश'का ात्पय, आय में वृतिद्ध और विनविह ाथ, से हाविन में कमी से है जहाँ योग क े बाद भी नकारात्मक आय हो ी है। ारा 143 (1-क) (ख) क े स्पष्टीकरर्ण में कहा गया है विक इस रह क े अति रिरक्त कर पर देय कर का अथ, है वह कर जो क ु ल आय क े समायोजन की राथिश पर देय हो ा।जहां समायोजन विन ा,रिर आय से अति क हो।स्पष्ट रूप से, इसलिलए, इस मामले में अति रिरक्त कर आकलन अति कारी द्वारा 83,44,42,579/- रुपये की राथिश पर प्रभाय, कर क े आ ार पर प्रभारिर विकया गया था।"
4. अति रिरक्त कर की मांग को चुनौ ी देने वाले आयकर आयुक्त क े आदेश से असं ुष्ट होकर, सिजसे घटाकर 7,67,68,717/- रुपये कर विदया गया था, विन ा,रिर ी द्वारा जयपुर में राजस्थान उच्च न्यायालय, जयपुर पीठ में रिरट यातिचका संख्या 2267/1992 दायर की गई थी। विवद्वान एकल न्याया ीश ने विदनांक 19.01.1993 क े विनर्ण,य द्वारा ारा 143(1-क) क े ह अति रिरक्त कर लगाने को रद्द करने वाली रिरट यातिचका को स्वीकार विकया।विवद्वान एकल न्याया ीश क े विनर्ण,य से व्यथिथ राजस्व ने विवशेष अपील दायर की सिजसे उच्च न्यायालय की खंर्डपीठ ने अपने विनर्ण,य विदनांक 13.11.2007 द्वारा अति रिरक्त कर की मांग को सही ठहरा े हुए स्वीकार कर लिलया। खंर्डपीठ क े विनर्ण,य से व्यथिथ होकर विन ा,रिर ी ने यह अपील दायर की है।
5. हमने अपीलक ा, की ओर से उपस्थिस्थ विवद्वान वरिरष्ठ अति वक्ता श्री अरिरजी प्रसाद और प्रति वाविदयों क े विवद्वान अति वक्ता श्री रूपेश क ु मार को सुना है।
6. क ें द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड, क े विदनांक 30.10.1989 क े परिरपत्र संख्या 549 का उल्लेख कर े हुए श्री अरिरजी प्रसाद ने कहा विक 1961 क े अति विनयम की ारा 143 (1-क) क े ह लगाए जाने वाला 20 प्रति श अति रिरक्त कर दंर्ड की प्रक ृ ति का है और इसे क े वल भी लगाया जा सक ा है जब विन ा,रिर ी ने जानबूझकर गल रिरटन, दालिखल करने की मांग की हो। यह क, प्रस् ु विकया है विक इस रह का अति रिरक्त कर क े वल उस स्थिस्थति में देय हो सक ा है जहां विन ा,रिर ी को कर क े उद्देश्य से आय क े लिलए आंकलन विकया गया और जहां कोई आय नहीं थी या नुकसान हुआ था, वहां लागू नहीं हो सक ा। ारा 143(1-क) क े प्राव ान को लागू करने में विव ातियका का आशय यह सुविनतिv करना था विक विन ा,रिर ी भी रिरटन, में अपने नुकसान की सही घोषर्णा करे और जहां विन ा,रिर ी जानबूझकर या आशयपूव,क गल रिरटन, दालिखल कर ा है, वह अति रिरक्त आयकर का भुग ान करने क े लिलए उ[रदायी हो ा है। यह विनवेदन विकया है विक अनवशोविष हाविनयों और अनवशोविष मूल्यह्रास को भविवष्य क े वषx में लाभ क े साथ समायोसिज करने क े लिलए आगे बढ़ाया जाना था और यह विकसी भी रह से व्यापार हाविन को प्रभाविव नहीं कर ा। वह क, प्रस् ु कर े है विक विन ा,रिर ी को हुई व्यापारिरक हाविन, मूल्यह्रास की गर्णना करने में अपीलक ा, द्वारा की गई वास् विवक गल ी क े कारर्ण कम नहीं हुई थी। विन ा,रिर ी घाटे में था और घाटे में बना रहा। मूल्यह्रास में 100% से घटाकर 75% करने से हाविन में कमी नहीं हो ी और आयकर अति विनयम, 1961 की े ह अति रिरक्त कर क े वल कर अपवंचन को रोकने क े लिलए था। उनका विनवेदन है विक जब अति रिरक्त कर में दंर्ड स्पष्ट और विवथिशष्ट रूप से अंविक था, ो राजस्व को यह कह े नहीं सुना जा सक ा था विक अति विनयम की ारा 143(1-क) क े ह अति रिरक्त कर का आरोपर्ण स्वचालिल है। यविद ऐसी परिरस्थिस्थति यों में अति रिरक्त कर लगाया जा सक ा है, ो यह विन ा,रिर ी को विबना विकसी गल ी क े दंतिर्ड करना होगा और वह भी उसे सुने विबना।
7. राजस्व क े विवद्वान अति वक्ता क, दे े हैं विक ारा 143 (1-क) का उपबं यह दशा, ा है विक यह दंर्डनीय प्रक ृ ति का नहीं है। यह कर अपवंचन को रोकने का उपकरर्ण है। यह क, प्रस् ु विकया गया है विक ारा 143 (1-क) की शविक्तयों को चुनौ ी विवथिभन्न उच्च न्यायालयों और इस न्यायालय द्वारा अस्वीकार कर दी गई है। ारा 143 (1 -क) को आयकर अति विनयम में शाविमल विकया गया है, ाविक विन ा,रिर ी पहले नुकसान विदखाने की विवति का सहारा लेकर और विफर नुकसान को कम करक े कर चोरी करने में समथ, न हो सक े । विवद्व वकील प्रस् ु कर े हैं विक उच्च न्यायालय की खण्र्ड पीठ ने अति रिरक्त कर की मांग को बरकरार रख े हुए राजस्व की अपील को उतिच रूप से स्वीकार विकया है.
8. हमने पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ताओं की दलीलों पर विवचार विकया और अथिभलेखों का अवलोकन विकया।
9. इस अपील में क े वल इस प्रश्न का उ[र विदया जाना है विक व,मान मामले क े थ्यों में ारा 143(1-क) क े प्राव ानों क े ह अति रिरक्त कर की मांग उतिच थी या नहीं।
10. इससे पहले विक हम पक्षकारों क े विवद्वान अति वक्ताओं क े विवरो ी दलीलों में प्रवेश करें, ारा 143 और 143 (1-क) क े ह वै ाविनक व्यवस्था पर विवचार करना सुसंग है। ारा 143 (1) (क) इस प्रकार हैः "143. (1) (क) जहां ारा 139 क े ह या ारा 142 की उप- ारा (1) क े ह एक नोविटस क े जवाब में रिरटन, दालिखल विकया गया है, - (i) यविद कोई कर या ब्याज इस रह क े रिरटन, क े आ ार पर देय पाया जा ा है, ो स्रो पर काटे गए विकसी भी कर, भुग ान विकए गए विकसी भी अवि•म कर और कर या ब्याज क े रूप में अन्यथा भुग ान की गई विकसी भी राथिश क े समायोजन क े बाद, प्राव ानों पर प्रति क ू ल प्रभाव र्डाले विबना उप- ारा (2) क े अनुसार, विन ा,रिर ी को देय राथिश विनर्दिदष्ट कर े हुए एक सूचना भेजी जाएगी, और ऐसी सूचना ारा 156 क े ह जारी की गई मांग की सूचना मानी जाएगी और इस अति विनयम क े सभी प्राव ान दनुसार लागू होंगे; और (ii) यविद इस रह क े रिरटन, क े आ ार पर कोई न वापसी देय है, ो वह विन ा,रिर ी को अनुज्ञा विकया जाएगाः परन् ु विन ा,रिर ी द्वारा संदेय या उसे प्रति देय कर या ब्याज की संगर्णना में, विनम्नलिललिख समायोजन रिरटन, में घोविष आय या हाविन में विकया जाएगा, अथा, ् - (i) रिरटन,, खा ों या इसक े साथ संलग्न दस् ावेजों में विकसी अंकगथिर्ण ीय त्रुविट को सु ारा जाएगा; (ii) कोई भी हाविन, कटौ ी, भ[ा या राह, जो इस रह क े रिरटन,, खा ों या दस् ावेजों में उपलब् जानकारी क े आ ार पर प्रथम दृष्टया स्वीकाय, है,लेविकन जो रिरटन, में दावा नहीं विकया गया है, को स्वीकार विकया जाएगा; (iii) रिरटन, में दावा विकया गया कोई हाविन, कटौ ी, भ[ा या राह, जो इस रह क े रिरटन,, खा ों या दस् ावेजों में उपलब् जानकारी क े आ ार पर प्रथम दृष्टया अस्वीकाय, है, को अस्वीकार कर विदया जाएगा: परन् ु यह और विक जहां पहले परं ुक क े ह समायोजन विकया जा ा है, विन ा,रिर ी को एक सूचना भेजी जाएगी, इस बा क े बावजूद विक कथिथ समायोजन करने क े बाद उससे कोई कर या ब्याज देय नहीं है: परं ु यह भी विक इस खंर्ड क े अ ीन संसूचना उस विन ा,रर्ण वष, क े, सिजसमें आय पहली बार विन ा,रर्णीय थी, अं से दो वष, की समाविप्त क े पvा ् नहीं भेजी जाएगी।”
11. उप ारा (1-क), जैसा विक मूल रूप से पढ़ा गया था, इस प्रकार था: "143. (1-क) (क) जहां, विकसी व्यविक्त क े मामले में, उप ारा (1) क े खंर्ड (क) क े पहले परं ुक क े अ ीन विकए गए समायोजनों क े परिरर्णामस्वरूप क ु ल आय विववरर्णी में घोविष क ु ल आय से विकसी राथिश से अति क हो जा ी है, वहां आकलन अति कारी, – (i) उपखंर्ड (1) क े अ ीन संदेय कर की राथिश में ऐसी अति रिरक्त राथिश पर संदेय कर क े बीस प्रति श की दर से परिरकलिल अति रिरक्त आयकर द्वारा और उपखंर्ड (1) क े खंर्ड (क) क े उपखंर्ड (झ) क े अ ीन भेजी जाने वाली सूचना में अति रिरक्त आयकर को विवविनर्दिदष्ट करें। (ii) जहां उप ारा (1) क े अ ीन कोई राथिश देय है, वहां ऐसे संदाय की जाने वाली राथिश को उपखंर्ड (झ) क े अ ीन गर्णना की गई अति रिरक्त राथिश क े बराबर राथिश में से कम करें। ”
12. उप- ारा (1-क) को विव[ अति विनयम, 1993 द्वारा 1-4-1989 से संशोति विकया गया था, जो वह ति थिथ थी सिजस पर उप- ारा (1-क) को अति विनयम में पेश विकया गया था। प्रति स्थाविप उप- ारा (1-क) इस प्रकार है: "143. (1-क) (क) जहां उप ारा (1) क े पहले परं ुक क े अ ीन विकए गए समायोजनों क े परिरर्णामस्वरूप, – (i) विकसी व्यविक्त द्वारा रिरटन, में घोविष आय में वृतिद्ध हो जा ी है, या (ii) ऐसे व्यविक्त द्वारा रिरटन, में घोविष हाविन कम हो जा ी है या आय में परिरवर्ति हो जा ी है, आकलन अति कारी (क) ऐसे मामले में जहां इस खंर्ड क े अ ीन आय में वृतिद्ध ने ऐसे व्यविक्त की क ु ल आय में वृतिद्ध कर दी है, इस प्रकार बढ़ाई गई क ु ल आय पर कर और उस कर क े बीच क े अं र पर बीस प्रति श की दर से परिरकलिल अति रिरक्त आय कर द्वारा उप ारा (1) क े अ ीन संदेय कर की राथिश में और वृतिद्ध कर दी जाएगी, जो प्रभाय, हो ा यविद ऐसी क ु ल आय में समायोजन की राथिश घटा दी गई हो ी और उप ारा (1) क े उपखंर्ड (झ ) क े अ ीन भेजी जाने वाली सूचना में अति रिरक्त आय कर विवविनर्दिदष्ट कर विदया जा ा; (ख) उस दशा में जहां इस खंर्ड क े उपखंर्ड (ii) क े अ ीन इस प्रकार घोविष हाविन को कम कर विदया गया है या पूव क्त समायोजनों का उस हाविन को आय में परिरवर्ति करने का प्रभाव है, समायोजनों की रकम पर प्रभाय, कर क े बीस प्रति श क े बराबर राथिश (सिजसे इसमें इसक े पvा ् अति रिरक्त आयकर कहा गया है) की गर्णना करें, मानो यह ऐसे व्यविक्त की क ु ल आय हो ी और उपखंर्ड (1) (ग) क े अ ीन भेजी जाने वाली सूचना में इस प्रकार परिरकलिल अति रिरक्त आय कर को विवविनर्दिदष्ट करें, जहां उपखंर्ड (1) क े अ ीन कोई प्रति दाय देय है, वहां ऐसे प्रति दाय की राथिश को, यथास्थिस्थति, उपखंर्ड (क) या उपखंर्ड (ख) क े अ ीन परिरकलिल अति रिरक्त आय कर क े सम ुल्य राथिश से घटा दें।
13. विव[ अति विनयम, 1993 द्वारा भू लक्षी प्रभाव अथा, विदनांक 01.04.1989 से लाए गए संशो न प्रश्न में मूल्यांकन क े संबं में अथा, विन ा,रर्ण वष, 1991-92 क े लिलए पूरी रह से आक ृ ष्ट हैं।प्रति स्थाविप उपखंर्ड (1-क) यह स्पष्ट कर ी है विक जहां विकसी विन ा,रिर ी द्वारा घोविष हाविन को उपखंर्ड (1) (क) क े ह विकए गए समायोजन क े कारर्ण कम कर विदया गया था, वहां उपखंर्ड (1-क) क े प्राव ान लागू होंगे।जैसा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है, आयकर आयुक्त ने यातिचकाक ा, की पुनर्दिवचार यातिचका को अस्वीकार कर े हुए यह विवचार व्यक्त विकया है विक जब भी समायोजन विकया जाएगा, ऐसी अति रिरक्त राथिश पर देय कर का 20% की दर से अति रिरक्त कर लगाया जाएगा। अति रिरक्त राथिश आय में वृतिद्ध और हाविन में कमी को संदर्भिभ कर ी है जहां वृतिद्ध क े बाद भी नकारात्मक आय हो ी है। क्या सभी परिरस्थिस्थति यों में प्रति श अति रिरक्त कर लगाया जाना चाविहए और सिजन मामलों में हाविन में कमी की गई है, इस प्रश्न का उ[र व,मान मामले में विदया जाना है।
14. करा ान विवति (संशो न) अति विनयम, 1991 द्वारा खंर्ड 32 में ीसरे परन् ुक को विनम्नलिललिख आशय क े लिलए अं ःस्थाविप विकया गयाः परं ु यह भी विक 1 अप्रैल, 1991 को विन ा,रर्ण वष, से सुसंग पूव,वष, क े संबं में इस खंर्ड क े अ ीन विकसी आस्थिस् समूह क े संबं में कटौ ी, विकसी क ं पनी की दशा में, करा ान कानून (संशो न) अति विनयम, 1991 क े प्रारंभ से ठीक पहले इस अति विनयम क े अ ीन विवविह ऐसी आस्थिस् यों क े अवलिललिख मूल्य पर प्रति श में परिरकलिल राथिश क े पचह[र प्रति श क सीविम होगी।
15. उपरोक्त परं ुक को शाविमल करने से पहले मूल्यह्रास ऐसी परिरसंपलि[यों क े अवलिललिख मूल्य पर प्रति श पर गर्णना की गई राथिश क े 75% क सीविम नहीं था। विन ा,रिर ी द्वारा रिरटन, विदनांक 31.12.1991 को दालिखल विकया गया था, सिजस ारीख से पहले करा ान कानून (संशो न) अति विनयम, 1991 लागू हुआ था।यह सदाशयी गल ी और असाव ानी क े कारर्ण था विक विन ा,रिर ी ने 75 प्रति श क े बजाय 100 प्रति श मूल्यह्रास का दावा विकया।33, 37, 77, 70, 317/- रुपये क े 100 प्रति श अवमूल्यन का दावा परिरसंपलि[यों क े अवलिललिख मूल्य पर विकया गया था, इस प्रकार 25 प्रति श अवमूल्यन को 75 प्रति श क सीविम करने की अनुमति नहीं दी गई थी और 25 प्रति श अवमूल्यन हाविन को घटाने क े बाद 3,43,94,90,393/- रुपये की सीमा क बना रहा। यहां क विक 25 प्रति श की कमी क े बावजूद विन ा,रिर ी की हाविन आय की वापसी बनी रही।100% मूल्यह्रास का दावा करने में विन ा,रिर ी का दावा है विक कर से बचने का कोई इरादा नहीं था और उक्त दावा क े वल एक सदभावी गल ी थी।जैसा विक विव[ अति विनयम, 1993 द्वारा ऊपर उल्लेख विकया गया है, ारा 143 (1-क) को विदनांक 01.04.1989 से भू लक्षी प्रभाव से प्रति स्थाविप विकया गया था। विव[ विव ेयक क े प्राव ानों को भू लक्षी प्रभाव से समझाने वाला ज्ञापन का विनम्नलिललिख प्रभाव थाः आयकर अति विनयम की ारा 143 (1-क) क े प्राव ानों में 20 प्रति श अति रिरक्त आयकर लगाने का प्राव ान है, जहां ारा 143 (1) (क) क े ह विकए गए समायोजन क े परिरर्णामस्वरूप, रिरटन, में घोविष क ु ल आय से अति क है। ये प्राव ान लौटाई गई आय क े साथ-साथ लौटाई गई हाविन क े मामलों को कवर करना चाह े हैं। इसक े विनवारक प्रभाव क े अलावा, अति रिरक्त आयकर लगाने का उद्देश्य सभी विन ा,रिरति यों को गलति यों से बचने क े लिलए अपनी आय का रिरटन, दालिखल करने क े लिलए राजी करना है। हाल की दो न्यातियक विनर्ण,यों में, यह अथिभविन ा,रिर विकया गया है विक आयकर अति विनयम की ारा 143 (1-क) क े उपबं, जैसा विक ये शब्दबद्ध हैं, हाविन क े मामलों में लागू नहीं हो े हैं। अ ः विव ेयक में आयकर अति विनयम की ारा 143 (1-क) में संशो न करने का प्राव ान विकया गया है, ाविक यह सुविनतिv विकया जा सक े विक ारा 143 (1) (क) क े ह विकए गए समायोजन क े परिरर्णामस्वरूप, विकसी भी व्यविक्त द्वारा रिरटन, में घोविष आय में वृतिद्ध हो ी है, ो आकलन अति कारी बढ़ी हुई क ु ल आय पर कर क े बीच क े अं र पर बीस प्रति श की दर से अति रिरक्त आयकर वसूल करेगा और वह कर जो प्रभाय, हो ा यविद ऐसी क ु ल आय समायोजन की राथिश से घटा दी जा ी।ऐसे मामलों में जहां उपयु,क्त समायोजन क े परिरर्णामस्वरूप रिरटन, में घोविष हाविन को कम कर विदया गया है या उपयु,क्त समायोजन का प्रभाव उस हाविन को आय में परिरवर्ति करने क े रूप में है, विव ेयक में यह प्राव ान करने का प्रयास विकया गया है विक आकलन अति कारी समायोजन की राथिश पर प्रभाय, कर क े बीस प्रति श क े बराबर राथिश (सिजसे अति रिरक्त आयकर क े रूप में संदर्भिभ विकया गया है) की गर्णना करेगा, मानो यह ऐसे व्यविक्त की क ु ल आय हो। प्रस् ाविव संशो न 1-4-1989 से प्रभावी होगा और दनुसार, विन ा,रर्ण वष, 1989-1990 और उसक े बाद क े वषx क े संबं में लागू होगा।
16. राजस्व क े विवद्वान अति वक्ता ने ठीक ही कहा है विक ारा 143(1-ए) का उद्देश्य कर अपवंचन को रोकना था।विव[ विव ेयक क े प्राव ानों की व्याख्या करने वाला ज्ञापन, जैसा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है, विन ा,रिर ी को गल ी से बचने क े लिलए साव ानीपूव,क आयकर रिरटन, दालिखल करने क े लिलए मनाना करने क े लिलए भी था।
17. आयकर आयुक्त, गौहाटी बनाम स ी ऑयल उद्योग लिलविमटेर्ड और अन्य, (2015) 7 एससीसी 304 में इस न्यायालय क े पास ारा 143(1-क) क े उपबं ों, उसक े उद्देश्य और वै ा पर विवस् ार से विवचार करने का अवसर था। विव[ अति विनयम, 1993 द्वारा पुनःस्थाविप ारा 143(1-ए) क े प्राव ानों की भू लतिक्ष ा क े लिलए एक चुनौ ी थी। गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने अथिभविन ा,रिर विकया था विक संशो न का भू लक्षी प्रभाव मनमाना और अनुतिच होगा।इस न्यायालय में राजस्व द्वारा अपील दायर की गई थी, सिजसमें अपील, इस न्यायालय क े पास प्राव ानों की संवै ाविनक वै ा की जांच करने का अवसर था। इस न्यायालय ने उपरोक्त विनर्ण,य में अथिभविन ा,रिर विकया विक ारा 143(1-ए) का उद्देश्य कर अपवंचन को रोकना था। विनर्ण,य क े पैरा 9 में विनम्नलिललिख अथिभविन ा,रिर विकया गया है: “9. इस प्राव ान को स ही ौर पर पढ़ने पर यह स्पष्ट हो जा ा है विक खंर्ड 143 (1- क) का उद्देश्य कर अपवंचन को रोकना है। इस प्राव ान को लागू करने से ऐसे व्यविक्त सिजन्होंने ऐसे रिरटन, दालिखल विकए हैं सिजनमें उन्होंने अपने द्वारा उतिच रूप से देय कर का अपवंचन करने की कोथिशश की है, उनका एक विनवारक प्रभाव होगा और रिरटन, में घोविष की गई राथिश और कर क े लिलए विन ा,रिर राथिश क े बीच क े अं र पर अति रिरक्त आयकर क े रूप में 20 प्रति श की भारी राथिश देय होगी।"
18. क े. पी. वगŽज बनाम आईटीओ, (1981) 4 एस. सी. सी. 173 वाले मामले में इस न्यायालय क े पूव, विनर्ण,य का भरोसा कर े हुए, इस न्यायालय ने उपरोक्त मामले में अथिभविन ा,रिर विकया विक खंर्ड 143 (1-क) क े उपबं ों को क े वल कर अपवंचकों पर लागू विकया जाना चाविहए। पैरा•ाफ 21 और 25 में विनम्नलिललिख विन ा,रिर विकया गया थाः "21. व,मान मामले में, हमारे सामने यह प्रश्न भी उठ ा है विक क्या वास् विवक विन ा,रिर ी े जाल में फ ं से हैंहम यह जोड़ना चाह े हैं विक जे. क े. सिंसथेविटक्स मामले क े विवपरी, ारा 143 (1-क) को वास् व में व,मान मामले क े थ्यों क े आ ार पर उच्च न्यायालय क े समक्ष संवै ाविनक आ ारों पर चुनौ ी दी गई है। ऐसा होने क े कारर्ण, हमें लग ा है विक चूंविक इस प्राव ान का कर चोरी को रोकने में विनवारक प्रभाव पड़ ा है, इसलिलए इसे क े वल कर अपवंचको पर लागू विकया जाना चाविहए।इस प्रस् ाव क े समथ,न में, हम क े पी वगŽज बनाम आईटीओ क े फ ै सले का हवाला दे े हैं।उस मामले में न्यायालय आयकर अति विनयम की ारा 52(2) क े सही विनमा,र्ण से संबंति था: (क े.पी. वगŽस मामला, एससीसी पृष्ठ 179, पैरा 4: एससीआर पृष्ठ 639) "
52. (2) उप ारा (1) क े उपबं ों पर प्रति क ू ल प्रभाव र्डाले विबना, यविद आयकर अति कारी की राय में अं रर्ण की ारीख को विकसी विन ा,रिर ी द्वारा अं रिर पूंजी आस्थिस् का उतिच बाजार मूल्य ऐसी पूंजी आस्थिस् क े अं रर्ण क े संबं में विन ा,रिर ी द्वारा घोविष प्रति फल क े पूर्ण, मूल्य से कम से कम घोविष मूल्य क े पंद्रह प्रति श से अति क नहीं है ो ऐसी पूंजी आस्थिस् क े प्रति फल का पूर्ण, मूल्य, विनरीक्षर्ण सहायक आयुक्त क े पूव, अनुमोदन क े साथ, उसक े अं रर्ण की ारीख को उसका उतिच बाजार मूल्य माना जाएगा।............
25. वगŽज मामले से संक े ले े हुए, हम मान े हैं विक ारा 143 (1-क) को क े वल भी लागू विकया जा सक ा है जब यह थ्यों पर पाया जा ा है विक विन ा,रिर ी द्वारा दालिखल विकए गए रिरटन, में वर्भिर्ण कम राथिश विन ा,रिर ी द्वारा कानूनी रूप से देय कर से बचने क े प्रयास का एक परिरर्णाम है।यह साविब करने का भार विक विन ा,रिर ी ने इस प्रकार कर क े अपवंचन का प्रयास विकया है, राजस्व पर है, सिजसे थ्यों और परिरस्थिस्थति यों को स्थाविप करक े राजस्व द्वारा चुकाया जा सक ा है, सिजससे यह उतिच विनष्कष, विनकाला जा सक ा है विक विन ा,रिर ी ने वास् व में इसक े द्वारा कानूनी रूप से देय कर क े अपवंचन का प्रयास विकया है। ारा143 (1-क) क े उपरोक्त विनमा,र्ण क े अ ीन, हम उक्त खंर्ड क े पूव,व्यापी स्पष्टीकरर्ण संशो न को बरकरार रख े हैं और अपीलों को स्वीकार कर े हैं। गुवाहाटी उच्च न्यायालय क े खंर्ड पीठ क े विनर्ण,यों को रद्द कर विदया गया है। लाग क े बारे में कोई आदेश नहीं होगा।"
19. उपरोक्त मामले में इस न्यायालय ने ारा 143 (1-क) (विव[ अति विनयम, 1993 द्वारा यथा अं ःस्थाविप ) की संवै ाविनक वै ा को बरकरार रखा, बश ‘ विक ारा 143 (1-क) का उपयोग क े वल उन थ्यों क े आ ार पर विकया जा सक ा है विक विन ा,रिर ी द्वारा दालिखल रिरटन, में वर्भिर्ण कम राथिश विन ा,रिर ी द्वारा कानूनी रूप से कर अपवंचन क े प्रयास का परिरर्णाम है।
20. व,मान मामले में उपरोक्त विनर्ण,य क े अनुपा को लागू कर े हुए, हमें यह प ा लगाने की आवश्यक ा है विक क्या विन ा,रिर ी द्वारा दालिखल रिरटन, में उसिल्ललिख 100% मूल्यह्रास विन ा,रिर ी द्वारा कानूनी रूप से देय कर से बचने क े प्रयास का परिरर्णाम था।
21. हमने थ्यों से देखा है, जैसा विक ऊपर उल्लेख विकया गया है, विक 25% मूल्यह्रास को अस्वीक ृ करने क े बाद भी, रिरटन, में विन ा,रिर ी हाविन में रहा और विन ा,रिर ी द्वारा एक सद्भावी गल ी क े कारर्ण रिरटन, में 100% मूल्यह्रास का दावा विकया गया था। करा ान कानून (संशो न) अति विनयम, 1991 द्वारा, क ं पनी क े मामले में मूल्यह्रास 75% क सीविम था, जो विनरीक्षर्ण क े कारर्ण रिरटन, दालिखल कर े समय विन ा,रिर ी द्वारा चूक गया था। आयकर आयुक्त ने पुनरीक्षर्ण यातिचका पर फ ै सला कर े हुए इस आशय का कोई अवलोकन नहीं विकया है विक विन ा,रिर ी द्वारा दावा विकए गए 100 प्रति श मूल्यह्रास का उद्देश्य विन ा,रिर ी द्वारा विवति व रूप से देय कर क े भुग ान से बचना था, बस्थिल्क आयुक्त ने 31 माच,, 1992 को अपने आदेश में कहा है विक जब भी समायोजन विकया जा ा है, ो ऐसी अति रिरक्त राथिश पर देय कर क े 20 प्रति श की दर से अति रिरक्त कर लगाया जा ा है।
22. यह सच है विक कर विव ातियका की व्याख्या कर े समय परिरर्णामों और कविठनाइयों पर ध्यान नहीं विदया जा ा है, लेविकन उद्देश्य और वस् ु सिजसक े द्वारा करा ान विवति यों को अति विनयविम विकया गया है, उसे भुलाया नहीं जा सक ा है। इस न्यायालय ने उसी प्राव ान अथा, ारा 143 (1-क), उसक े उद्देश्य और उद्देश्य पर विवचार कर े हुए और इस प्राव ान को बरकरार रख े हुए कहा विक यह साविब करने का भार विक विन ा,रिर ी ने कर अपवंचन का प्रयास विकया है, राजस्व पर है, सिजसे उन थ्यों और परिरस्थिस्थति यों को स्थाविप करक े राजस्व द्वारा चुकाया जा सक ा है, सिजनसे यह उतिच विनष्कष, विनकाला जा सक ा है विक विन ा,रिर ी ने वास् व में इसक े द्वारा कानूनी रूप से देय कर क े अपवंचन का प्रयास विकया है। व,मान मामले में, यहां क विक कोई संक े भी नहीं, विक विन ा,रिर ी द्वारा 100% मूल्यह्रास का दावा विकया गया था, सिजसमें से 25% की अनुमति कर अपवंचन क े इरादे से दी गई थी। हम व,मान मामले क े थ्यों में और आयकर आयुक्त, गुवाहाटी बनाम स ी ऑयल उद्योग लिलविमटेर्ड और अन्य (पूव क्त) में इस न्यायालय द्वारा स्पष्ट म क े मद्देनजर ारा 143 (1-क) क े प्राव ानों को यंत्रव रूप से लागू नहीं कर सक े, जहां यह माना जा ा है विक ारा 143 (1-क) का उपयोग क े वल भी विकया जा सक ा है जब विन ा,रिर ी द्वारा दालिखल रिरटन, में उसिल्ललिख कम राथिश विन ा,रिर ी द्वारा कानूनी रूप से देय कर से बचने क े प्रयास का परिरर्णाम हो। उपरोक्त को ध्यान में रख े हुए, हम मान े हैं विक व,मान मामले क े थ्यों में ारा 143(1-क) का यांवित्रक अनुप्रयोग अनुतिच था।
23. परिरर्णामस्वरूप, हम अपील को स्वीकार कर े हैं और उच्च न्यायालय की खण्र्ड पीठ क े विनर्ण,य क े साथ-साथ विदनांक 12.02.1992 की अति रिरक्त कर की मांग, सिजसे विदनांक 28.02.1992 को संशोति विकया गया को खारिरज कर े है। न्याया ीश (अशोक भूषर्ण ) न्याया ीश (मोहन एम. शां नागौर्डर ) नई विदल्ली 19 माच,, 2020 यह अनुवाद आर्दिटविफथिशयल इंटेलिलजेंस टूल 'सुवास'क े जरिरए अनुवादक की सहाय ा से विकया गया है। अस्वीकरर्ण: यह विनर्ण,य पक्षकार को उसकी भाषा में समझाने क े सीविम उपयोग क े लिलए स्थानीय भाषा में अनुवाविद विकया गया है और विकसी अन्य उद्देश्य क े लिलए इसका उपयोग नहीं विकया जा सक ा है। सभी व्यावहारिरक और आति कारिरक उद्देश्यों क े लिलए, विनर्ण,य का अं•ेजी संस्करर्ण ही प्रामाथिर्णक होगा और विनष्पादन और काया,न्वयन क े उद्देश्य से भी अं•ेजी संस्करर्ण ही मान्य होगा।