Full Text
भार क
े सव च्च न्यायालय
सिसविवल अपीलीय अति कारिर ा
सिसविवल अपील संख्या 1836 वर्ष 2020
(विवशेर्ष अनुमति याति(का (सिसविवल) 33445 वर्ष 2014 से उद्भु )
पूनम देवी व अन्य ...अपीलार्थी2 (गण)
बनाम
ओरिरयन्टल इंश्योरेन्स कॉप रेशन लिलविमटेड ...प्रत्यर्थी2 (गण)
विनणय
न्यायमूर्ति नवीन सिसन्हा
अपीलार्थी2गण मृ क क
े विवति क उत्तराति कारी हैं। उनको कमकार प्रति कर
अति विनयम, 1923 (इसक
े पश्चा ् "अति विनयम" कहा गया) की ारा 4 ए(3)(b) ) क
े
ह विनयोक्ता पर लगाए गए जुमाने क
े अलावा दुर्घटना की ारीख से जमा की
ारीख क आयुक्त, कमकार प्रति कर अति विनयम द्वारा 12 प्रति श की दर से
ब्याज सविह 4,45,420 रुपये का मुआवजा विदया गया र्थीा। उच्च न्यायालय ने
09.05.2014 को प्रति वादी की अपील को स्वीकार कर े हुए ारिर विकया विक
मृत्यु विनयोजन क
े दौरान हुई लेविकन विनयोजन से उत्पन्न नहीं हुई।
JUDGMENT
2. प्रति वादी संख्या 2 (अब हटा विदया गया) क े अ ीन विनयोजन में, मृ क की उम्र 21 वर्ष र्थीी, और वह अपनी टाटा 407 वाहन पंजीकरण संख्या यूपी 15 पी 1689 को विदनांक 11.06.2003 को अंबाला से मेरठ क (ला रहा र्थीा, जो लगभग 200 विकमी. की दूरी र्थीी, दोपहर करीब साढ़े बारह बजे जब वह ग्राम फ ेहपुर क े पास पुल पर पहुं(ा ो मृ क यमुना नहर में पानी भरने और सार्थी ही नहाने गया। दुभाग्यवश, mn~?kks"k.kk Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA 2020 INSC 291 वह नहर में विफसल गया और मर गया। वाहन प्रत्यर्थी2 की इंश्योरेन्स क ं पनी से बीविम र्थीा। पी.डब्ल्यू. 2, जो पुल क े पास खड़ा र्थीा, उसने गवाही दी विक मृ क तिडब्बे में पानी भरने गया र्थीा सार्थी में खलासी र्थीा सिजसने उसे ब(ाने की कोशिशश की, लेविकन दोनों नहर में विफसल गए। कमकार प्रति कर आयुक्त क े आदेश विदनांविक 12.12.2005 द्वारा पूव क्त रूप में दावे को स्वीकार कर विदया गया।
3. बीमा क ं पनी द्वारा दायर अपील में उच्च न्यायालय ने अशिभ ारिर विकया विक मृ क की मृत्यु विनयोजन क े दौरान हो सक ी है, लेविकन मृत्यु विनयोजन से नहीं हुई, क्योंविक नहर में स्नान करना विनयोजन क े लिलए आनुर्षंविगक नहीं र्थीा, बल्किल्क कामगार क े जोलिखम पर र्थीा। कामगार की मृत्यु और उसक े विनयोजन क े बी( कोई आकल्किस्मक संबं नहीं र्थीा। वह अपने विनजी उपभोग क े लिलए पानी लेने गया र्थीा और उसका मामला यह नहीं र्थीा विक ट्रक गम हो गया र्थीा।
4. अपीलार्थी2 क े विवद्वान अति वक्ता श्री विवकास भड़ाना ने कहा विक मृत्यु का विनयोजन से सरोकार में अनौप(ारिरक संबं र्थीा। जून क े महीने की भीर्षण गम[2] में दोपहर क े समय यह प्रकल्पना उत्पन्न होगी विक मृ क न क े वल ट्रक को ठंडा करने क े लिलए बल्किल्क स्वयं भी विनयोक्ता क े वाहन की उति( और सुरतिm यात्रा र्थीा उसकी अपनी सुरmा सुविनतिश्च करने क े लिलए नहर में पानी लाने गया र्थीा। लीला बाई व अन्य बनाम सीमा (ौहान व अन्य, (2019) 4 एससीसी 325 पर अवलम्ब लिलया गया।
5. अपील का विवरो कर े हुए प्रत्यर्थी2 क े विवद्वान अति वक्ता, श्री अजय सिंसह ने कहा विक उच्च न्यायालय ने ठीक ही अशिभ ारिर विकया है विक मृ क की मृत्यु का विनयोजन से कोई अनौप(ारिरक संबं नहीं र्थीा। क े वल इसलिलए विक मृत्यु विनयोजन क े दौरान हुई, यह ब क पयाप्त नहीं होगा जब क विक यह स्र्थीाविप नहीं हो जा ा विक यह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA आनुर्षंविगक र्थीा और विनयोजन से उत्पन्न हुआ र्थीा। मलिलकाजुन जी. विहरेमठ बनाम शाखा प्रबन् क, ओरिरयन्टल इन्श्योरेन्स क ं पनी लिलविमटेड व अन्य, (2009) 13 एससीसी 405 पर अवलम्ब लिलया गया।
6. हमने पmकारों की ओर से विदए गए कr पर विव(ार विकया है और आmेविप आदेशों क े सार्थी सार्थी हमारे समm रखे गए विवति क व्यवस्र्थीाओं का भी परिरशीलन विकया है।
7. कमकार प्रति कर अति विनयम, 1923 (अब इसका नाम "कम(ारी प्रति कर अति विनयम, 1923”) सामासिजक लाभकारी विव ायन का एक भाग है। इसलिलए प्राव ानों की व्याख्या इस रह से करनी होगी ाविक कानून क े उद्देश्य को आगे बढ़ाया जा सक े, न विक उसे नुकसान पहुं(ाया जा सका। सी े संर्घर्ष की ल्किस्र्थीति में, जब कोई सुलह संभव नहीं है, ो वै ाविनक प्राव ान भी प्रभावी होगा।
8. अति विनयम की ारा 3 पर परिर((ा करना प्रासंविगक है। प्रासंविगक उद्दरण विनम्न प्रकार हैः “3. प्रति कर क े लिलए विनयोजक का दातियत्व- (1) यविद कामगार को अपने विनयोजन क े दौरान और उससे उत्पन्न दुर्घटना द्वारा वैयविक्तक mति कारिर हो ी है ो उसका विनयोजक इस अध्याय क े उपबन् ों क े अनुसार प्रति कर का देनदार होगाः XXXX"
9. मंजू सरकार व अन्य बनाम मविवश विमयाँ व अन्य, (2014) 14 एससीसी 21 में मृ क विनयोजक की ट्रक अगर ला से (ुराईबरी एफसीआई गोदाम ले रहा र्थीा ((ला Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA रहा र्थीा)। जब वह रम नगर क े पास पहुं(ा ो ट्रक में क ु छ यांवित्रक खराबी को ठीक करने की व्यवस्र्थीा करने क े लिलए नी(े उ रे, भी उसे सड़क पर अन्य वाहन द्वारा टकरा मार विदया गया और अस्प ाल में उसकी मृत्यु हो गई। काल्पविनक विवस् ार क े सिसद्धां को लागू करक े, यह अव ारिर विकया गया विक मृत्यु विनयोजन क े दौरान हुई। बी.ई.एस.टी. अड़रटेकिंकग बनाम एगनेस, एआईआर 1964 एससी 193, क े प्रस् र 12 पर अवलम्ब लिलया गया, “अति विनयम की ारा 3 (1) क े ह, कामगार को कारिर mति उसक े विनयोजन से उद्भु या उसक े दौरान दुर्घटना से कारिर होनी (ाविहए। यह प्रश्न विक विनयोजन कब शुरू हो ा है और कब खत्म हो जा ा है, यह प्रत्येक मामले क े थ्यों पर विनभर कर ा है। लेविकन न्यायालय इस पर सहम हो गए हैं विक विनयोजन अविनवाय रूप से ब समाप्त हो जा ा है जब "डाउन टूल" (समाविप्त) का संक े दे विदया जा ा है या जब कामगार उस कायस्र्थील को वास् विवक रूप से छोड़ दे ा है जहाँ वह काय कर ा है। समय और स्र्थीान क े अनुसार प्रवेश और विनकास दोनों पर एक काल्पविनक विवस् ार है। इस रह क े विवस् ार का दायरा विनतिश्च रूप से विकसी विदए गए मामले की परिरल्किस्र्थीति यों पर विनभर होना (ाविहए। (ूंविक विनयोजन न क े वल ब समाप्त हो सक ा है या शुरू हो सक ा है जब कम(ारी काम करना शुरू कर ा है या अपने उपकरण छोड़ दे ा है, बल्किल्क ब भी जब वह आने-जाने क े सा नों का उपयोग कर ा है और विनयोजन क े स्र्थीान से बाहर आ ा-जा ा है।”
10. अभी हाल ही में दया विकशन जोशी व अन्य बनाम डयानेमे( सिसस्टम्स प्राइवेट लिलविमटेड, (2018) 11 एससीसी 642 में, मृ क को उत्पादों की विबक्री और Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA संस्र्थीापन को बढ़ावा देने क े लिलए एक इंजीविनयर क े रूप में विनयुक्त विकया गया र्थीा, सिजसक े लिलए उन्हें mेत्र में र्घूमना पड़ ा र्थीा। mेत्र काय से लौट े समय, वह एक दुर्घटना का शिशकार हो गया, सिजसक े परिरणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो गई। यह मान े हुए विक अपने क व्यों की प्रक ृ ति से संबंति काय क े लिलए उसक े सड़क पर होने क े कारण, न क े वल विनयोजन की अवति क े दौरान (ोट लगी र्थीी, बल्किल्क विनयोजन से भी उद्भु हुई र्थीी।
11. व मान मामले की बा करें ो मृ क प्रति वादी संख्या 2 का ट्रक अंबाला से मेरठ (ला रहा र्थीा। विनर्विववाद रूप से वह अपने विनयोजन क े अनुक्रम में र्थीा। हम इस थ्य की न्यातियक अवेmा (नोविटस) ले सक े हैं विक विनमा ा क े विवविनद„श को देख े हुए, ट्रक का क े विबन वा ानुक ू लिल नहीं र्थीा और जून 2003 की उमस भरी मानसूनी गम[2] में दोपहर क े मध्य में एक गभ भट्टी रहा होगा, जब यमुनानगर (हरिरयाणा) में ापमान 42.[6] ० C क े लगभग र्थीा (स्रो: weatheronline.in)। मृ क क े लिलए न क े वल प्रति वादी संख्या 2 क े ट्रक को नुकसान से ब(ाने क े लिलए बल्किल्क एक सुगम यात्रा सुविनतिश्च करने और सुरतिm ड्राइकिंवग द्वारा अपने स्वयं क े जीवन की रmा करने क े लिलए रो ाजा रहना और स क रहना एक मजबूरी र्थीी। हम इस थ्य की न्यातियक अवेmा भी ले सक े हैं विक ट्रक की भी ओवरहीकिंटग को रोकने क े लिलए पानी की आवश्यक ा की संभावना को पूरी रह से खारिरज नहीं विकया जा सक ा है। इन परिरल्किस्र्थीति यों में क्या यह कहा जा सक ा है विक मृ क का ट्रक क े लिलए क ै न में पानी लाने क े लिलए नहर में जाना और यात्रा जारी रखने से पहले स्वयं को स्नान करक े रो ाज़ा करना विनयोजन क े लिलए आनुर्षंविगक नहीं र्थीा? विनयोक्ता से संबंति ट्रक की सुरmा सुविनतिश्च करने क े लिलए ट्रक क े (ालक का प्रत्येक काय और स्वयं क े लिलए एक सुरतिm यात्रा द्वारा अपनी सुरmा सुविनतिश्च करने क े लिलए काल्पविनक विनयोजन सिसद्धां क े विवस् ार द्वारा विनयोजन क े लिलए आनुर्षंविगक माना जाना (ाविहए। Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA एक ट्रक (ालक जो ऐसी गम[2] में गाड़ी (लाने क े लिलए स्वयं को रो ाजा नहीं करेगा, वह गम[2] की वजह से विनणय की विकसी भी वास् विवक त्रुविट क े कारण सड़क पर दूसरों क े लिलए एक संभाविव ख रा होगा। एगनेस (उपरोक्त) में उसि—लिख और लीला बाई (उपरोक्त) में अनुसरण विकए गए काल्पविनक विवस् ार क े सिसद्धां को यहां उद् ृ विकया गया है: "9. व मान मामले क े थ्यों और साक्ष्य की प्रक ृ ति में, एगनेस वाद (उपरोक्त) में विव(ार गए विनयोजन क े "कल्किल्प विवस् ार" क े सिसद्धां को लागू करने क े लिलए दुर्घटना और विनयोजन क े बी( एक स्पष्ट संबं र्थीा: "...हालांविक यह अब सुस्र्थीाविप है, विक यह विनयोक्ता क े परिरसर क े काल्पविनक विवस् ार क े सिसद्धां क े अ ीन है ाविक उस mेत्र को शाविमल विकया जा सक े जहां से कमकार गुजर ा है और वास् विवक काय स्र्थील पर जा े समय और छोड़ने समय गुजर ा है। समय और स्र्थील दोनों में कु छ उति( विवस् ार हो सक ा है और एक कमकार को उसक े विनयोजन क े क्रम में माना जा सक ा है, भले ही वह अपने विनयोक्ता क े परिरसर में नहीं पहुं(ा र्थीा या छोड़ विदया र्थीा। हर समय काल्पविनक विवस् ार क े इस सिसद्धां को ध्यान में रख े हुए प्रत्येक मामले क े थ्यों और परिरल्किस्र्थीति यों की बहु साव ानी से जां( की जानी (ाविहए ाविक यह विन ारिर विकया जा सक े विक दुर्घटना एक कमकार क े विनयोजन क े क्रम में हुई या नहीं।”
12. लीला बाई (उपरोक्त) में, मृ क एक ड्राइवर क े रूप में अपनी यात्रा पूरी करने क े बाद र्घर न जाकर अगली सुबह जल्दी विन ारिर प्रस्र्थीान सुविनतिश्च करने क े लिलए Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA बस की छ पर रुक गया। वह बस की छ से नी(े उ र रहा र्थीा विक वह विफसल कर विगर गया और उसकी मौ हो गई। प्रस् र 7 में विनम्नानुसार अव ारिर विकया गया: "7. मामले क े थ्यों र्थीा उपलब् साक्ष्यों से यह स्पष्ट है विक मृ क बस टर्विमनल पर मौजूद र्थीा और इंदौर से आने क े बाद भी अपनी इच्छा पर नहीं, बल्किल्क मजबूरी और आवश्यक ा से, अपने क व्यों की प्रक ृ ति क े कारण बस क े सार्थी रहा। बस की रूट टाइकिंमग क े लिलए मृ क को बस क े सार्थी सुलभ रूप से उपलब् होना आवश्यक र्थीा ाविक प्रति वादी 1 द्वारा प्रदान की जा रही यात्री सेवा क ु शल बनी रहे और प्रभाविव न हो। यविद मृ क प्रति विदन बस पाक करक े र्घर जा ा और अगली सुबह लौट ा, ो यात्रा करने वाले लोगों क े लिलए बस सेवा सुविव ा क े समय की क ु शल ा विनतिश्च रूप से प्रभाविव हो ी, जो मृ क क े अपने र्घर से बस स्टैंड आने पर विनभर कर ी। स्वाभाविवक रूप से यह बस क े प्रस्र्थीान समय में अविनतिश्च ा का एक त्व लाएगा और यात्रा करने वाली जन ा क े लिलए सेवा की दm ा में कमी ला सक ा है। मृ क द्वारा य समय का पालन स्वाभाविवक रूप से समयबद्ध सेवा क े कारण आय में वृतिद्ध करक े प्रति वादी 1 क े लाभ को सुविनतिश्च करेगा। यह अकारण नहीं है विक मृ क सप्ताहों क र्घर नहीं जाएगा जैसा विक अपीलक ा द्वारा बयान विदया गया र्थीा। क े वल इसलिलए विक मृ क भोजन करने क े बाद बस की छ से नी(े आ रहा र्थीा, इसे इससे अलग नहीं माना जा सक ा है और इ नी दूरदर्शिश ा से व्याख्या नहीं की जा सक ी विक वह Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA ड्यूटी पर नहीं र्थीा और इसलिलए मुआवजे का हकदार नहीं होगा।"
13. हमें कोई कारण नहीं विदख ा विक व मान मामलें क े थ्यों पर भी काल्पविनक विवस् ार क े सिसद्धां का अनुप्रयोग क्यों नहीं होगा।
14. मलिलकाजुन वाद (उपरोक्त) अपने स्वयं क े थ्यों पर अलग है क्योंविक मृ क ने सिसरागुप्पा से गुरुगुंटा अंगेश्वर मंविदर क अपनी यात्रा पूरी की र्थीी, सिजसक े बाद वह ालाब में गया और स्नान कर े समय विफसल गया और डूब गया। मामला अपने थ्यों पर पूरी रह से अलग है।
15. इसलिलए, हम उच्च न्यायालय क े आदेश को अरmणीय पा े हैं। इसे अपास् विकया जा ा है। कमकार mति पूर्ति आयुक्त क े आदेश विदनांक 12.12.2005 को बहाल विकया जा ा है। कमकार मुआवजा आयुक्त क े आदेश क े अनुसार अपीलक ाओं को भुग ान आज से छह सप्ताह की अवति क े भी र विकया जाना है। (ूंविक प्रति वादी संख्या 2 को हटा विदया गया है, इसलिलए उसक े द्वारा अर्थीदण्ड़ क े भुग ान का प्रश्न ही नहीं उठ ा।
16. अपील की अनुमति दी जा ी है।................................... (न्यायमूर्ति अशोक भूर्षण)................................. (न्यायमूर्ति नवीन सिंसहा) नई विद—ी, 06 मा( 2020. Þ{ks=h; Hkk"kk esa vuqokfnr fu.kZ; oknh ds viuh Hkk"kk esa le>us gsrq fufcZa/kr iz;ksx ds fy;s gS vkSj fdlh vU; mís'; ds fy;s iz;ksx ugh fd;k tk ldrk gSA lHkh O;kogkfjd vkSj ljdkjh mís';ksa ds fy;s] fu.kZ; dk vaxzsth laLdj.k izkekf.kd ekuk tk;sxk rFkk fu"iknu vkSj fdz;kUo;u ds mís';ksa ds fy;s ekU; gksxkßA